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खाप पंचायत का बड़ा फैसला, भिवानी में अंतरजातीय विवाह को मिली हरी झंडी

भिवानी. झाझड़िया खाप पंचायत ने अंतरजातीय विवाह का निर्णय लिया है। इसके अलावा हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग करते हुए साथ ही यह भी मांग उठाई है कि कोर्ट मैरिज में माता पिता की सहमति जरूरी हो। नेहरू पार्क में हुई पंचायत की अध्यक्षता खाप के राष्ट्रीय प्रधान राय सिंह झाझड़िया की रही। पंचायत में छह अहम निर्णय लिया गए। वक्ताओं ने कहा पंचायत समाज में सार्थक बदलाव पर काम करेगी। भाईचारा मजबूत करने के लिए मुहिम चलाई जाएगी। पंचायत में हुए निर्णय के बारे में खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष राय सिंह झाझड़िया ने कहा खाप अंतरजीतीय विवाह को मंजूरी देती है। कोर्ट मैरिज होती है तो उसमें माता पिता की सहमति जरूरी हो। हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव किया जाए। इसके अलावा विकसित भारत जीरामजी योजना का रुपया किसानों ओर मजदूरों को दिया जाए। इस योजना का रुपया गलत हाथों में जा रहा है इस पर रोक लगाई जाए। पंचायत में यह प्रस्ताव किया गया कि पेट्रोल डीजल के एक माह में चार बार रेट बढ़ाए गए हैं इनको तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। सौनाली फौगाट और शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई जांच की रिपोर्ट सामने लाई जाए। देरी होने से लोगों का भरोसा टूट रहा है। सीबीआई जांच जल्द लोगों के सामने नहीं लाई जाती तो लोग बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसके लिए प्रशाासन स्वयं जिम्मेदार होगा। पंचायत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर निर्णय लिया गया किया ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे। बरगद, नीम, पीपल, त्रिवेणी हर गांंव में लगाए जाएंगे। पंचायत में खाप के राजस्थान प्रधान रामस्वरूप तारानगर, हरियाणा प्रधान प्रीत भैरवी, उप प्रधान सतबीर बारवास, भिवानी के प्रधान बनवारीलाल, प्रताप सिंह नंबरदार, सरपंच जयवीर सिंह, ईश्वर सिंह घिकाड़ा, अमरसिंह, राजेश पहाड़ी, फौजी जयसिंह, सूबेदार रामसिंह, पटवारी रामेहर सिंह, विजय पिलानी अधिवक्ता, सरपंच सतबीर रोहिला, सुरेश कोच, सरपंच धर्मबीर, युवा प्रधान संदीप बरालू आदि मौजूद रहे।

फ्री बस यात्रा के लिए तैयार रहें, भिवानी में हैपी कार्ड को लेकर शुरू होगा जागरूकता अभियान

भिवानी. आपकी यात्रा सुगम और सुखद हो इसके लिए हैप्पी कार्ड बनाए गए हैं। भिवानी डिपो में अभी भी 45 हजार से अधिक हैप्पी कार्ड आवेदकों का इंतजार कर रहे हैं। भिवानी डिपो, तोशाम और लोहारू सब डिपो में हजारों हैप्पी कार्डों का वितरण नहीं हो पाया है। रोडवेज कर्मचारी अब पात्र लोगों को फोन कर-करके कार्ड ले जाने की अपील कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित संख्या में लोग कार्ड लेने नहीं पहुंच रहे। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो भिवानी डिपो, तोशाम और लोहारू डिपो में पिछले दिनों कुल 53,252 हैप्पी कार्ड पहुंचे थे। इनमें से बड़ी संख्या अब भी डिपो में पड़ी हुई है। इससे पहले अप्रैल 2024 में 1,52,892 हैप्पी कार्ड आए थे। इस प्रकार अब तक इन तीनों डिपो में कुल मिलाकर 2,06,144 हैप्पी कार्ड पहुंच चुके हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा कार्ड बंटे रोडवेज के अनुसार अब तक 1,57,363 हैप्पी कार्ड पात्र लोगों को वितरित किए जा चुके हैं। बावजूद इसके 45 हजार से अधिक कार्ड अब भी पात्र लोगों तक पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में योजना को लेकर लोगों में उत्साह दिखा, लेकिन अब धीरे-धीरे कार्ड लेने वालों की संख्या घटने लगी है। खासतौर पर भिवानी डिपो में अब पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आ रही। कम होती दिलचस्पी ने बढ़ाई चिंता रोडवेज विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। जिन लोगों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी कर हैप्पी कार्ड बनवा लिया, वही अब कार्ड लेने में कम रुचि दिखा रहे हैं। कई पात्र लोग या तो सूचना के बावजूद डिपो नहीं पहुंच रहे या फिर कार्ड लेने में देरी कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों को अब लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर संपर्क करना पड़ रहा है। कर्मचारी लगातार फोन करके लोगों से कार्ड प्राप्त करने की अपील कर रहे हैं, ताकि योजना का लाभ समय पर मिल सके और कार्ड निष्क्रिय अवस्था में डिपो में न पड़े रहें। लाभार्थियों तक पहुंचाना अब बड़ी चुनौती हैप्पी कार्ड योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र वर्ग को रोडवेज यात्रा में राहत देना है, लेकिन लाभार्थियों की उदासीनता के कारण विभाग को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। डिपो स्तर पर कार्डों की सुरक्षा, रिकार्ड और वितरण व्यवस्था भी एक अतिरिक्त जिम्मेदारी बन गई है। रोडवेज अधिकारियों का मानना है कि अगर लोग समय पर अपने कार्ड नहीं लेते, तो योजना का पूरा लाभ प्रभावित हो सकता है। डिपो में आए हैप्पी कार्डों का वितरण लगातार किया जा रहा है। जिन पात्र लोगों के कार्ड तैयार हैं, उन्हें फोन के माध्यम से सूचना दी जा रही है। डीसी के गांवों में लगने वाले रात्रि दरबार में भी हैप्पी कार्ड वितरण के लिए बूथ बनाए जाते हैं। पात्र लोग संबंधित डिपो पर पहुंचकर अपना हैप्पी कार्ड प्राप्त कर सकते हैं ताकि सरकार की इस योजना का लाभ आसानी से मिल सके।

रोहतक: भूमि विवादों के समाधान के लिए अब सिर्फ राजस्व अधिकारी करेंगे कार्रवाई

रोहतक  हरियाणा सरकार ने लाल डोरा और स्वामित्व योजना से संबंधित शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू की है। विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा सभी जिला उपायुक्तों को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) अधिनियम-2025 के तहत आने वाली शिकायतों का निपटारा केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी ही करेंगे। सरकार के इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आमजन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिलेगा। विकास एवं पंचायत विभाग, चंडीगढ़ की ओर से जारी पत्र के अनुसार यह अधिनियम 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था, जबकि इसे 26 नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। विभाग के संज्ञान में आया था कि लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतें अब तक कई स्थानों पर बीडीपीओ (खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी) तथा डीडीपीओ (जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी) कार्यालयों को भेजी जा रही थीं, जबकि अधिनियम में इन अधिकारियों की कोई निर्धारित भूमिका नहीं है। इससे शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी और फाइलों की आवाजाही बढ़ रही थी। नए निर्देशों के तहत अब ऐसे सभी मामलों का निस्तारण केवल अधिनियम के तहत नियुक्त नायब तहसीलदार (एसी द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (एसी प्रथम श्रेणी) जैसे राजस्व अधिकारियों की ओर से किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों का समाधान अधिनियम की धारा 15 और 16 के प्रावधानों के अनुरूप किया जाना अनिवार्य होगा जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने कहा कि विभागीय निर्देशों के अनुसार अब लाल डोरा व स्वामित्व योजना से संबंधित मामलों को बीडीपीओ या डीडीपीओ कार्यालयों में नहीं भेजा जाएगा, बल्कि शिकायतकर्ता सीधे संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी और लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, पुराने गेस्ट टीचर्स को पक्का करने के निर्देश

चंडीगढ़. हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था। हाई कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।  

पेड़ों की कटाई पर HC सख्त, हिसार इंटरचेंज प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक

हिसार. विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस एक बार फिर हिसार की धरती पर आकार लेती दिखाई दे रही है। गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास के माध्यम से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल कागजों में ही ठहर गई है। उच्च न्यायालय के एक केस में दिए आदेश के बाद प्रदेशभर में पेड़ों की कटाई पर लगी रोक ने इस परियोजना की रफ्तार पर अचानक विराम लगा दिया है। जिस परियोजना से हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब हरियाली और विकास के द्वंद्व में उलझी खड़ी है। टेंडर आवंटित हो चुका है, तकनीकी तैयारियां भी लगभग पूरी हैं, लेकिन निर्माण स्थल पर खड़े पेड़ फिलहाल इस परियोजना के सबसे बड़े अवरोध बन गए हैं। आदेश ने थाम दी परियोजना की चाल प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक का आधार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे सुनील कुमार शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले को माना जा रहा है। हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सात अप्रैल 2026 को क्षेत्रीय वन अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आगामी आदेश तक किसी भी आयु अथवा प्रजाति के पेड़ की कटाई की अनुमति न दी जाए। इसके बाद से विभागीय स्तर पर पेड़ों की कटाई से जुड़े प्रस्ताव भी रोक दिए गए। इसी आदेश की परछाई अब हिसार की इस बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना पर भी पड़ रही है। एनएचएआई करवा रहा है पेड़ों का सर्वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अब निर्माण क्षेत्र में पेड़ों की गणना और सर्वे का कार्य करवा रहा है। विभाग यह स्पष्ट करने में जुटा है कि परियोजना के लिए आखिर कितने पेड़ों की कटाई आवश्यक होगी। हालांकि स्थिति साफ है कि जब तक पेड़ हटाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक निर्माण कार्य की शुरुआत संभव नहीं दिखाई देती। ऐसे में जिस परियोजना से क्षेत्र को शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद थी, उसका इंतजार अब और लंबा हो सकता है। ढंढूर के पास आकार लेगा आधुनिक यातायात केंद्र प्रस्तावित योजना के तहत गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को जोड़ने के लिए दो आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास बनाए जाने हैं। ये अंडरपास मौजूदा ओवरब्रिज से लगभग एक-एक किलोमीटर की दूरी पर विकसित किए जाएंगे। इनके निर्माण के बाद वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग एक ही बिंदु पर व्यवस्थित रूप से जुड़ सकेंगे। इससे यातायात अधिक सुगम और सुरक्षित बनने की उम्मीद है। भारी वाहनों के लिए भी होगा सहज मार्ग इंजीनियरों के अनुसार प्रत्येक अंडरपास की चौड़ाई लगभग 20 मीटर और ऊंचाई साढ़े पांच मीटर के आसपास होगी। आधुनिक मानकों पर आधारित यह संरचना भारी ट्रकों और बड़े वाहनों की आवाजाही को भी बिना बाधा के संभव बनाएगी। भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को ध्यान में रखते हुए परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत स्वरूप दिया गया है। 63.27 करोड़ की परियोजना करीब 63.27 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना को एनएचएआई ने विस्तृत योजना के साथ तैयार किया है। इसके पूर्ण होने पर प्रतिदिन गुजरने वाले लगभग 30 हजार वाहनों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। वाहनों को बिना रुके मार्ग मिलने से ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय घटेगा और यातायात जाम की समस्या में भी कमी आएगी। एनएच-9 का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। क्रास ट्रैफिक और अव्यवस्थित मोड़ों के कारण यहां हादसों का खतरा बना रहता है। डबल लूप इंटरचेंज बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अलग-अलग स्तरों पर संचालित होगी, जिससे टकराव के बिंदु कम होंगे और दुर्घटनाओं की आशंका में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इस परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार हिसार-सिरसा मार्ग और हिसार-कैथल मार्ग को बेहतर ढंग से जोड़ने वाली यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार इससे औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था निवेश आकर्षित करेगी और रोजगार के अवसरों का विस्तार भी संभव होगा। गांव ढंढूर निवासी विकास जांगड़ा और नरेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित यह परियोजना क्षेत्र के लिए एक दूरदर्शी और जनहितकारी पहल है। यह भविष्य की सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था की मजबूत नींव है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद एनएच-9 और एनएच-52 के बीच आवागमन कहीं अधिक सहज और सुरक्षित हो जाएगा। डबल लूप इंटरचेंज के प्रमुख लाभ सुचारू यातायात : अलग स्तर पर मार्ग बनने से वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और यातायात निर्बाध रूप से चलता रहेगा। दुर्घटनाओं में कमी : क्रासिंग और टर्निंग प्वाइंट कम होने से हादसों की आशंका घटेगी। समय और ईंधन की बचत : बिना रुकावट के सफर से यात्रा तेज होगी और ईंधन की खपत कम होगी। बढ़ती ट्रैफिक क्षमता : भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालने में यह संरचना अधिक सक्षम होगी। कम होगा प्रदूषण : वाहनों के लगातार चलने से इंजन कम समय तक आइडल रहेगा, जिससे प्रदूषण घटेगा। बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी : दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग सीधे जुड़ने से व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अनिकेत श्रीवास्तव ने कहा कि न्यायालय के एक आदेश के चलते पेड़ों की कटाई पर रोक लगी हुई है। इसी कारण गांव ढंढूर के पास प्रस्तावित डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास परियोजना पर फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है। विभाग पेड़ों का सर्वे करवा कर रिपोर्ट तैयार करेगा तभी स्थिति स्पष्ट होगी। पेड़ कटाई की अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आरंभ हो पाएगा।

रोहतक जेल से पैरोल पर निकला राम रहीम, सिरसा डेरा पहुंचने पर बढ़ी हलचल

सिरसा. डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को 23 दिन की पैरोल मिली है। मंगलवार सुबह साढ़े 6 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से निकलकर सिरसा के लिए रवाना हुए। उन्हें लेने के लिए उनकी मुंह बोली बेटी हनीप्रीत इंसा गई थी। चार गाड़ियों के काफिले में गुरमीत सिंह लैंड क्रूजर गाड़ी में सवार था। सुबह साढ़े आठ बजे डेरा प्रमुख का काफिला शाह सतनाम धाम में पहुंचा गया। डेरा प्रमुख के दर्शनों के लिए उसके अनुयायी पहले से ही मौजूद थे। इससे पहले गुरमीत के पैरोल मिलने की सूचना पर रात को डेरे के चारों ओर बेरीकेड्स लगा दिए गए थे और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई है। डेरा के आस पास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा गुरमीत सिंह वर्ष 2026 में पांच जनवरी को 40 दिन की पैरोल पर बाहर आया था। तब शाह सतनाम सिंह का अवतार दिवस था। इस वर्ष में उसकी दूसरी पैरोल है। इससे पहले वह 15 बार पैरोल और फरलो ले चुका है और अब उसकी 16 वीं पैरोल है। रणजीत हत्याकांड और छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत बरी डेरा प्रमुख रणजीत हत्याकांड और छत्रपति हत्याकांड में बरी हो चुका है। इस साल सात मार्च को गुरमीत को पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट ने छत्रपति हत्याकांड से उसे बरी किया था। अब उसने साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की हुई है। पुराने डेरे की करवा रहा मरम्मत डेरा प्रमुख जब पिछली बार सिरसा आया था तो उस समय उसे पुराने डेरे के पुन निर्माण शुरू करवाया था। गुरमीत सिंह ने 40 दिन की पैरोल के दौरान वह नियमित तौर पर पुराने डेरे में आकर काम का निरीक्षण करता था। जिसका काम आज भी जारी है। इसके पास स्थित लड़कों के स्कूल को नए डेरे के पास शिफ्ट करने की योजना है। इस डेरे की स्थापना डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक शाह मस्ताना ने की थी।

‘सेल्फी विद डॉटर’ को मिला खट्टर का समर्थन, सुनील जागलान से की खास मुलाकात

जींद. केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने जींद प्रवास के दूसरे दिन सोमवार सुबह बीबीपुर गांव में पूर्व सरपंच सुनील जागलान के घर पहुंचे। उन्होंने सुनील के सेल्फी विद डाटर अभियान को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि अभियान ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को पूरे देश में सबसे अधिक गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर बीबीपुर गांव से शुरू हुई सेल्फी विद डाटर मुहिम ने न केवल देश, बल्कि दूसरे देशों तक अपनी पहचान बनाई। प्रधानमंत्री स्वयं अपने कार्यक्रम मन की बात में इस मुहिम का उल्लेख कर चुके हैं। गाली बंद अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने विभिन्न राज्यों में गाली देने की प्रवृत्ति पर सुनील जागलान के सर्वे पर भी विस्तृत चर्चा की। एआइ सेल्फी विद डाटर अभियान की भी पूरी जानकारी ली। केंद्रीय मंत्री ने सुनील जागलान की बेटियों नंदिनी जागलान और याचिका जागलान से भी बातचीत की। ऊर्जा संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री की अपील का जिक्र करते हुए मनोहर लाल ने कहा, ऊर्जा संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री की सोच को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे बदलाव अपनाकर ईंधन और ऊर्जा की बचत कर सकते हैं। निजी वाहन का अनावश्यक रूप से प्रयोग कम कर, सार्वजनिक वाहनों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना, बिजली उपकरणों का सोच-समझकर उपयोग करना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना जैसे कदम देशहित में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। प्रत्येक नागरिक ऊर्जा संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे, तो देश आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक मजबूत होगा।

महिला हॉकी को नई ऊंचाई देने वाले बलदेव सिंह हुए पद्मश्री से सम्मानित

शाहाबाद/चंडीगढ़. हरियाणा की खेल नगरी शाहाबाद के लिए आज गर्व का ऐतिहासिक पल रहा, जब द्रोणाचार्य अवार्डी हाकी कोच बलदेव सिंह को राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। जैसे ही यह सम्मान उन्हें मिला, पूरे शाहाबाद और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय महिला हाकी को नई पहचान दिलाने वाले बलदेव सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से नवाजा जाना हरियाणा के लिए भी गौरव की बात है। गौरतलब है कि बलदेव सिंह ने उस दौर में शाहाबाद में महिला हाकी की नींव मजबूत की, जब बेटियों का खेलों में आगे बढ़ना आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और तमाम सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने गांव-गांव से प्रतिभाएं खोजीं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया। उनकी मेहनत और समर्पण ने शाहाबाद को भारतीय महिला हाकी की सबसे बड़ी नर्सरी बना दिया। उनकी कोचिंग में तैयार हुई रानी रामपाल, नवनीत कौर, जसजीत कौर, राजवींदर कौर, जायदीप कौर, रितु रानी, सुमन बाला जैसी खिलाड़ियों ने भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इनमें से कई खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की कप्तानी भी संभाली। उनके द्वारा तैयार खिलाड़ियों ने ओलंपिक, एशियन गेम्स, कामनवेल्थ गेम्स और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मिठाई बांट कर मनाई खुशी शाहाबाद में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। खिलाड़ियों ने कहा कि यह सम्मान केवल बलदेव सिंह का नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों की मेहनत का सम्मान है, जिन्हें उन्होंने तराश कर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाया। पद्मश्री से सम्मानित होने के बाद बलदेव सिंह एक बार फिर साबित कर चुके हैं कि सच्चा गुरु वही होता है, जो अपनी मेहनत से साधारण प्रतिभाओं को असाधारण पहचान दिला दे। शाहाबाद की मिट्टी से निकले इस महान कोच ने भारतीय हाकी को जो विरासत दी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।

‘नो PUCC, नो फ्यूल’! हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से लागू होगी नीति

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक आधारित कार्ययोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. सरकार ने फैसला लिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा. यह नियम एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू किया जाएगा. हरियाणा में प्रदूषण कम करने के लिए ​ पर जोर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है. इसके तहत सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. सरकार ईवी नीति के तहत करेगी काम सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक एनसीआर के प्रमुख शहरों में 925 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का है. इनमें से 575 बसों के खरीद आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, रोहतक और सोनीपत में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. सरकार ईवी नीति के तहत लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन भी दे रही है. बिना PUC वाले वाहनो की जाएगी पहचान प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी. सरकार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लागू कर रही है, जिससे बिना PUC वाले वाहनों की पहचान की जा सकेगी. परिवहन विभाग ने पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ रोजाना कार्रवाई करने का लक्ष्य तय किया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट उद्योगों की निगरानी भी अब पहले से ज्यादा सख्त होगी. हरियाणा में 1349 उद्योगों को ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इनमें से अधिकतर इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट किया जा चुका है . सरकार सितंबर 2026 तक नए उत्सर्जन मानकों को पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर रही है . अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान के लिए नया सर्वे भी कराया जाएगा. सरकार का लक्ष्य वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए राज्य में नए एयर मॉनिटरिंग स्टेशन भी लगाए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य 30 सितंबर 2026 तक सभी जरूरी स्टेशन चालू करने का है, ताकि प्रदूषण वाले क्षेत्रों की समय पर पहचान की जा सके. जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू इसके अलावा एनसीआर क्षेत्र में सड़कों के पुनर्विकास, निर्माण सामग्री और कचरा प्रबंधन पर भी काम तेज किया गया है. सरकार ने जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं . अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकतर काम पूरे कर लिए जाएंगे, जिससे आने वाले समय में एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से राहत मिल सके.

गुरुग्राम-मेवात में बनेगा 500 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर, हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘हरियाणा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026’ को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर उद्योगों को आकर्षित कर बड़े स्तर पर निवेश और रोजगार सृजित करना है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए नई नीति लाने की घोषणा की थी। अब इस नीति को लागू कर हरियाणा सरकार देश की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रानिक्स अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की तैयारी में है मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में उद्योगपतियों से सलाह मशविरा करने के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया। हरियाणा की नई नीति केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार देश में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का आकार वर्ष 2014 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा की नई नीति भी इन्हीं केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई है। गुरुग्राम-मेवात बेल्ट बनेगी नया इलेक्ट्रानिक्स हब हरियाणा सरकार ने आइएमटी सोहना में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, बेहतर सड़क नेटवर्क, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की उपलब्धता इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकेगी। राज्य पहले से ही आटोमोबाइल और आटो कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी है। अब सरकार इलेक्ट्रानिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी उसी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे औद्योगिक क्षेत्र इलेक्ट्रानिक्स निर्माण के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। उद्योगों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन, पूंजी सहायता मिलेगी उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि नई नीति के तहत सरकार उद्योगों को 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता देगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी सीमा 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरियाणा में निर्मित इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। रोजगार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आने से हरियाणा में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। मोबाइल कंपोनेंट, पीसीबी असेंबली, डिस्प्ले यूनिट, बैटरी पैक, आटो इलेक्ट्रानिक्स और चिप पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में एमएसएमइ इकाइयों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इसके साथ ही राज्य में डिजाइन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और इलेक्ट्रानिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से विशेष नीति तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार भी भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। ऐसे में हरियाणा भविष्य में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।