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गुरुग्राम-मेवात में बनेगा 500 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर, हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘हरियाणा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026’ को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर उद्योगों को आकर्षित कर बड़े स्तर पर निवेश और रोजगार सृजित करना है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए नई नीति लाने की घोषणा की थी। अब इस नीति को लागू कर हरियाणा सरकार देश की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रानिक्स अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की तैयारी में है मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में उद्योगपतियों से सलाह मशविरा करने के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया। हरियाणा की नई नीति केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार देश में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का आकार वर्ष 2014 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा की नई नीति भी इन्हीं केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई है। गुरुग्राम-मेवात बेल्ट बनेगी नया इलेक्ट्रानिक्स हब हरियाणा सरकार ने आइएमटी सोहना में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, बेहतर सड़क नेटवर्क, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की उपलब्धता इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकेगी। राज्य पहले से ही आटोमोबाइल और आटो कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी है। अब सरकार इलेक्ट्रानिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी उसी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे औद्योगिक क्षेत्र इलेक्ट्रानिक्स निर्माण के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। उद्योगों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन, पूंजी सहायता मिलेगी उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि नई नीति के तहत सरकार उद्योगों को 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता देगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी सीमा 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरियाणा में निर्मित इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। रोजगार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आने से हरियाणा में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। मोबाइल कंपोनेंट, पीसीबी असेंबली, डिस्प्ले यूनिट, बैटरी पैक, आटो इलेक्ट्रानिक्स और चिप पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में एमएसएमइ इकाइयों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इसके साथ ही राज्य में डिजाइन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और इलेक्ट्रानिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से विशेष नीति तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार भी भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। ऐसे में हरियाणा भविष्य में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

अब उम्र नहीं देख रही थायराइड बीमारी, किशोर और युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित

 फतेहाबाद बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है। यही हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, पाचन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और अधिक बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है। इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां     संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।     आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।     नियमित व्यायाम और योग करें।     तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।     वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।     लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।     जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है। -डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।  

अब प्राइवेट केंद्रों पर भी फ्री अल्ट्रासाउंड, नूंह की गर्भवती महिलाओं को मिली राहत

नूंह. जिला स्वास्थ्य विभाग ने नूंह के नागरिकों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार,प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत जिले के प्रमुख निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को स्वास्थ्य विभाग के पैनल में शामिल किया गया है। अब सरकारी अस्पतालो से रेफर की गई गर्भवती महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने इसके लिए प्रति अल्ट्रासाउंड 330 रुपये की दर तय की है, जिसका भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाएगा। वहीं मरीजों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह सुविधा 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश 18 से 19 सप्ताह की जांच अनिवार्य: प्रत्येक रेफर की गई महिला को गर्भावस्था के 18वें से 19वें सप्ताह के बीच कम से कम एक मुफ्त अल्ट्रासाउंड प्रदान किया जाएगा। यह जांच गर्भ में पल रहे शिशु की किसी भी जन्मजात विकृति या अन्य जटिलताओं का समय पर पता लगाने के लिए बेहद जरूरी है। विशेष दिनों में प्राथमिकता: हर महीने की 9, 10, 23 और 30 तारीख को रेफर की गई महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर जांच के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। शनिवार को पहले दिन ही देवांश अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छह महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया गया। देवांश हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. प्रियंका ने बताया कि सरकार द्वारा जारी आदेशों का नियमानुसार पालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब दूर दराज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें अपने नजदीकी ही उच्च स्तरीय जांच की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिल सकेगी। फिरोजपुर झिरका खंड     न्यू वाधवा नर्सिंग होम,     रौनक अल्ट्रासाउंड सेंटर     दुर्गा देवी अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     प्राइम डॉयग्नोस्टिक्स     गोयल अल्ट्रासाउंड     डॉ. अरोड़ा अल्ट्रासाउंड नूंह खंड      आर.जी. अल्ट्रासाउंड सेंटर     मलिक हॉस्पिटल     महाजन डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. विशाखा इमेजिंग सेंटर     गोयल अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर      सिटी डॉयग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर      मेसर्स एएनएच 3डी/4डी अल्ट्रासाउंड     भारत अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर पुन्हाना खंड       बी.एस. अल्ट्रासाउंड सेंटर      सहारा अल्ट्रासाउंड सेंटर     न्यू भारत डॉयग्नोस्टिक सेंटर     तिरुपति डॉयग्नोस्टिक्स लैब व सीटी स्कैन      वरदान अल्ट्रासाउंड सेंटर      न्यू प्राइम अल्ट्रासाउंड सेंटर पिनंगवा खंड     मंगला अल्ट्रासाउंड सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     डॉ. हिम्मत राय मेमोरियल हॉस्पिटल तावडू खंड     माडर्न अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     न्यू ओम डॉयग्नोस्टिक     देवांश अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर गर्भ की जांच सरल होगी – क्योंकि सरकारी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की पुख्ता व्यवस्था नहीं है, इसलिए यह फैसला लिया गया है, सरकारी केंद्रों पर आने वाली गर्भवति महिलाओं को जांच के लिए भेजा जाएगा प्राईवेट केंद्र पर। इससे महिलाओं की गर्भ की जांच सरल होगी। – डॉ ज्योत्सना, सीएमओ नूंह

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला! 40% दिव्यांगजन अब रोडवेज में कर सकेंगे फ्री सफर

नूंह. प्रदेश परिवहन विभाग की तरफ हरियाणा रोडवेज की बसों में 40 प्रतिशत से ऊपर दिव्यांग अब निशुल्क सफर कर सकेंगे। परिवहन विभाग की तरफ से जारी किए गए आदेश जारी कर दिए गए हैं। पहले केवल 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए यह सुविधा थी, लेकिन अब में 40 से लेकर 99 प्रतशित के दिव्यांगों को भी योजना का लाभ दिया गया। शुरू की गई निशुल्क बस सफर की इस योजनाओं से हजारों की की संख्या में दिवयांगों को लाभ होगा। सरकार की तरफ से जारी की गई योजना का दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। सरकार की तरफ से आए आदेशों की जिले के परिवहन विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप अहलावत ने भी पृष्टि की है। सुविधा केवल हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य बता दें कि प्रदेश सरकार की तरफ से 25 अगस्त 2008 को 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए परिवहन विभाग की बसों में निशुल्क यात्रा का प्रविधान किया था। यह योजना तभी से चली आ रही है। योजना के तहत 100 प्रतिशत दिव्यांग के साथ एक व्यक्ति भी उसके साथ निशुल्क सफर कर सकता है, लेकिन अब सरकार ने पूर्व की इस योजना में छूट दी है। हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की तरफ से जारी किए गए आदेशों में हरियाणा रोडवेज की साधारण बसों में 40 से प्रतिशत से ज्यादा दिवयांग को निशुल्क परिवहन सुविधा की बात कही गई है। जारी आदेशों में कहा गया है कि यह सुविधा केवल हरियाणा राज्य सीमा के भीतर ही हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य होगी। निशुल्क योजना का लाभ लेने के लिए दिव्यांग व्यक्ति को यूडीआई ( यूनिक डिसबिलिटी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड प्राप्त करना होगा। जो जरूरत पड़ने पर परिचालक व चेंकिग टीम को दिखाना होगा। विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना को दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। दिव्यांग शोकिन, यूनूस, जमशेद ने कहा कि दिव्यांग कई बार निशुल्क बस सफर की मांग कर चुकें हैं। लेकिन अब जाकर यह फैसला हुआ है। यह स्वागत योग्य है।

हरियाणा BJP का विशेष अभियान, मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की योजना

चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हरियाणा भाजपा ने प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने “बारह साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” कार्यक्रम को लेकर प्रदेश समिति का गठन किया है। प्रदेश कार्यालय ‘पंचकमल’ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह समिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक ले जाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। गठित समिति में प्रदेश सचिव राहुल राणा को संयोजक बनाया गया है, जबकि पूर्व प्रदेश सचिव मनीष यादव को सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय बंसल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओबीसी मोर्चा अवनीत कौर तथा युवा मोर्चा कार्यकारिणी सदस्य विकास दहिया को सदस्य बनाया गया है। भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह समिति प्रदेशभर में विभिन्न जनसंपर्क, संवाद और उपलब्धि आधारित कार्यक्रम आयोजित कर सकती है, ताकि प्रधानमंत्री मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को जनकल्याण और विकास के दृष्टिकोण से जनता के बीच प्रस्तुत किया जा सके।

छुट्टियों में राशन स्टॉक पर हरियाणा सरकार की नजर, खराब होने पर जिम्मेदार होगा स्कूल स्टाफ

फतेहाबाद/लुधियाना. भीषण गर्मी के बीच शिक्षा विभाग ने 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। छुट्टियों के साथ ही विभाग ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के स्टाक को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने सभी स्कूलों से मिड-डे मील में उपयोग होने वाले गेहूं, चावल, दाल, तेल सहित अन्य सामग्री का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही के कारण यदि कोई खाद्यान्न खराब हुआ तो संबंधित स्कूल स्टाफ जिम्मेदार माना जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार अवकाश के दौरान स्कूल बंद रहेंगे, ऐसे में खाद्यान्न की सुरक्षित स्टोरेज सुनिश्चित करना जरूरी होगा। जिन स्कूलों में राशन अधिक मात्रा में बचा हुआ है या खराब होने की आशंका है, वहां से स्टाक तुरंत वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं से स्टाक का रिकॉर्ड निर्धारित समय में उपलब्ध करवाने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी के मौसम में खाद्यान्न खराब होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें कि पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील योजना के तहत भोजन दिया जाता है।

बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ा अभियान, हरियाणा में 78 बच्चों को मिला नया जीवन

कैथल/चंडीगढ़. ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत मानवता व संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायी मिसाल देखने को मिली। एमडीडी ऑफ इंडिया और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) की संयुक्त टीमों ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 78 जरूरतमंद बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया। इन बच्चों में गुमशुदा, बाल श्रमिक, भीख मांगने वाले, कूड़ा बीनने वाले तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे शामिल रहे। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन भीम सेन ने बताया कि अप्रैल 2026 की मासिक समीक्षा रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों का सफलता पूर्वक निपटारा किया गया। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है अपनी कैथल जिला की पुलिस पर जिन्होंने अभियान के दौरान 18 गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनके परिजनों से मिलवाया गया, जबकि 20 बच्चों को बाल श्रम के चंगुल से मुक्त करवाया गया। बेहतर भविष्य और पारिवारिक संरक्षण मिल सके इसके अतिरिक्त 22 बच्चों को भीख मांगने की विवशता से बाहर निकालकर सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया तथा आठ कचरा बीनने वाले बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने बताया कि एक परित्यक्त मासूम बच्ची को भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाते हुए विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (एसएए) में शिफ्ट किया गया, ताकि उसे बेहतर भविष्य और पारिवारिक संरक्षण मिल सके। इस अभियान के दौरान हर बच्चे की काउंसलिंग, चिकित्सा जांच, सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी गई। भीम सेन अग्रवाल ने कहा कि हर बच्चा देश का भविष्य है और उसे भय, शोषण तथा असुरक्षा से मुक्त वातावरण देना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।” उन्होंने बताया कि सीडब्ल्यूसी की टीम लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बच्चा दोबारा असुरक्षित परिस्थितियों में न पहुंचे।

कैथल के युवकों पर हमले का खुलासा, नंबर प्लेट देखकर आरोपियों ने किया हमला

कैथल/चंडीगढ़. उत्तराखड़ के ऋषिकेश में पूंडरी क्षेत्र के दो युवकों को नग्न कर पिटाई करवाने वाले दो आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मारपीट करने वाले अन्य युवकों की तलाश की जा रही है। मामले में जिस महिला के साथ युवकों की बहस हुई थी, वे महिला भी अब सामने आई है। महिला ने इंटरनेट मीडिया पर आकर छेड़छाड़ की बात पूरी तरह से नकारा है। कहा कि मेरी युवकों से बहस हुई थी, वहां पर मौजूद लोगों ने हरियाणा का नंबर देखते ही उनकी की पिटाई शुरू कर दी। एसपी देहात ऋषिकेश जया बलूनी ने दो आरोपितों की गिरफ्तारी की भी पुष्टि की है। एसपी ने कहा कि युवकों को पीटना गलत है, कोई बात हुई है तो पुलिस को सूचना देनी थी, कानून को हाथ में लेना ठीक नहीं है। मारपीट करने वाले आरोपितों की पुलिस तलाश कर रही है। ये था मामला पूंडरी क्षेत्र निवासी सतबीर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 20 मई को वह अपने साथियों सोनू , सतीश कुमार , प्रदीप कुमार व विक्रम सिंह के साथ कार से ऋषिकेश घूमने आए थे। कालेकी ढाल पर एक महिला से हुई गलतफहमी के बाद मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। भीड़ ने बिना कारण जाने उन्हें बुरी तरह पिटना शुरू कर दिया, साथ ही उनकी कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, उन्होंने कोई छेड़छाड़ या गलत इशारा नहीं किया था। ऋषिकेश कोतवाली एसपी जया बलोनी ने बताया कि आरोपितों की तलाश में पुलिस टीम गठित की गई। भरत विहार ट्रक यूनियन पार्किंग क्षेत्र में दबिश देकर घटना में शामिल 47 वर्षीय अशोक थापा व नरेश कश्यप निवासी कालेकी ढाल को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि बाकी दो नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है। अज्ञात आरोपितों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कोई विवाद सामने आता है तो लोग कानून को अपने हाथ में न लें, घटना की जानकारी पुलिस को दें। एसपी ने बताया कि बताया कि महिला से जानकारी ली गई, लेकिन उनकी पुत्री से छेड़छाड़ जैसी बात सामने नहीं आई। एचआर नंबर गाड़ी देखते ही लोगों ने किया हमला पीड़ित सतीश ने आरोप लगाया कि वेन्यू एचआर08एएल 9398 नंबर की गाड़ी देखते ही सड़क पर मौजूद लोगों ने हमला कर दिया। हमने ऐसा कोई काम नहीं किया , जिससे किसी नाबालिग को परेशानी हो, भीड़ ने बिना कारण जाने ही गालियां दी और मारपीट की। ऋषिकेश पुलिस को शिकायत दी है, पुलिस कार्रवाई करने में लगी है। युवकों ने बताया कि हरियाणा के लोगों को जानबूझ कर टारगेट किया जा रहा है, जो गलत है। लड़की मां बोली, ईशारा किया था, कोई छेड़छाड़ नहीं की वहीं लड़की की मां ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। महिला ने बताया कि ऋषिकेश मैं शाम को बाजार में जा रही थी, एचआर नाम की गाड़ी भी हमारे साथ चल रही थी। मेरी बेटी ने कहा कि अंकल कुछ इशारे कर रहे हैं। मैंने पास जाकर कहा कि कोई दिक्कत है तो गाड़ी रोक लो, युवकों ने गाड़ी रोक ली, जैसे ही हम उनसे बातचीत करने लगे, दोनों पक्षों की आवाज भी ऊंची थी, इसी दौरान वहां पर काफी गाड़ियों भी रूक गई और युवकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। मैंने रोकने की बहुत कौशिश की, लेकिन ज्यादा भीड़ होने के कारण मेरी बात किसी ने नहीं सुनी, इसके बाद डायल 112 को फोन किया, पुलिस मौका पर पहुंचकर युवकों को अपने साथ ले गई। महिला ने बताया कि छेड़खानी जैसा कुछ नहीं हुआ, बिना कारण जाने ही भीड़ में मौजूद लोगों ने उनपर हमला कर दिया।

नायब सरकार की नई पहल, DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन

करनाल. कृषि उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि लगातार गिरते हुए भू-जल स्तर को सुधारने के लिए विभाग की तरफ से जिला के किसानों से डीएसआर विधि से धान की बिजाई करने की अपील की गई है। विभाग द्वारा धान की सीधी बिजाई अपनाने हेतु किसानों को प्रेरित करने के लिए काफी व्यापक योजना बनाई गई है। विभाग द्वारा जिला में धान की सीधी बिजाई पर 30 हजार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है जिसमें प्रति एकड़ 4500 रुपये अनुदान के तौर पर धान की सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों के खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से दी जायेगी। किसान धान की सीधी बिजाई पर अनुदान हेतु मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर 15 जून तक अपना पंजीकरण करवा सकते है। इस योजना के अतिरिक्त डीएसआर मशीन भी इच्छुक किसानों को दिए जाने की योजना है। मशीन के कुल मूल्य का 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये है जो भी कम हो प्रति मशीन पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए है। धान की सीधी बिजाई मशीन पर अनुदान के लिए किसान ट्रैक्टर की वैध आरसी के साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा, आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, बैंक खाता संख्या इत्यादि जानकारी को साथ लेकर विभाग के पोर्टल पर आवेदन दे सकते है।

गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों की बढ़ती पैठ, जिगाना और PX-5 पिस्टल पर एजेंसियों की नजर

कुरुक्षेत्र  गांव रतनगढ़ के पास एसटीएफ द्वारा मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों से बरामद हथियार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क की ओर गंभीर संकेत दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों के कब्जे से पीएक्स-5 टर्किश पिस्टल बरामद की गई हैं। पिछले कुछ समय से भारत में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार, जोराकी, रेटे और जिगाना जैसी टर्किश पिस्टल्स अब अलग-अलग राज्यों में अपराधियों के बीच लगातार देखी जा रही हैं। हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय सूत्रों के अनुसार, ये टर्किश पिस्टल्स मूल रूप से तुर्किये में स्पोर्ट्स शूटिंग और सेल्फ-डिफेंस के लिए वैध रूप से तैयार की जाती हैं, लेकिन बाद में इनका बड़ा हिस्सा अवैध तस्करी नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच जाता है। यहां से यह हथियार यूरोप, पश्चिम एशिया और बाल्कन देशों के रास्ते होते हुए दक्षिण एशिया तक लाए जाते हैं। भारत में इन हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय है, जिसमें हथियारों को छोटे-छोटे खेपों में अलग-अलग देशों के डीलरों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद इन्हें सीमा पार तस्करी, कोरियर नेटवर्क, फर्जी बिलिंग और छिपे हुए लाजिस्टिक चैनलों के जरिए भारत लाया जाता है। कई मामलों में इन्हें पार्ट्स में अलग-अलग भेजकर बाद में असेंबल करने की भी बात सामने आई है। गैंगस्टरों की पसंद बनी टर्की मेड जिगाना पिस्टल जिगाना पिस्टल, जिसे तुर्किये की ड्यूरेबल और हाई-रिलायबिलिटी सेमी-आटोमैटिक पिस्टल माना जाता है और हाल के वर्षों में गैंगस्टर नेटवर्क में खास तौर पर चर्चित रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन टर्किश हथियारों का बढ़ता उपयोग संगठित अपराध के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क की सक्रियता को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं कि आखिर ये आधुनिक टर्किश हथियार किन अंतरराष्ट्रीय रास्तों से भारत में प्रवेश कर रहे हैं और किन स्थानीय संपर्कों के जरिए गैंगस्टरों तक पहुंच रहे हैं। टीटी-30 और ग्लाक इससे पहले थी मनपसंद विदेशी हथियारों के मामले में इससे पहले गैंगस्टरों के बीच टीटी-30 और ग्लाक पिस्टल सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती थीं। लंबे समय तक रूस के टीटी-30 (स्टार-30 के नाम से भी जाना जाता) के चाइनीज माडल भारत के गैंग नेटवर्क में खूब इस्तेमाल हुए। वहीं पिछले कुछ सालों से आस्ट्रिया मेड ग्लाक गैंगस्टरों के बीच काफी लोकप्रिय थी। हालांकि अब पुराने टीटी और ग्लाक की जगह अब टर्की मेड पिस्टल्स जैसे जिगाना और अन्य हाई-एंड माडल तेजी से ले रहे हैं।