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पूर्व कांग्रेसी नेता जगजोत सिंह पर हमला, हमलावरों ने काटे बाल

लुधियाना. ढोलेवाल इलाके में बुधवार देर रात पूर्व कांग्रेसी नेता जगजोत सिंह पर जानलेवा हमला किया गया। मैगी प्वाइंट रेस्टोरेंट से खाना खाकर लौट रहे जगजोत पर इनोवा सवार सात से आठ हमलावरों ने कथित तौर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। आरोप है कि हमलावरों ने कार में घुसने के बाद भी गोलियां चलाईं। इसके बाद दातर से सिर पर वार किए और पिस्तौल के बट से हमला कर उनके बाल काट दिए। वारदात के समय जगजोत की मां मनजीत कौर और साढ़े तीन साल का बेटा भी कार में मौजूद थे। घायल अवस्था में जगजोत खुद कार चलाकर सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने हमले के पीछे पुरानी राजनीतिक रंजिश को कारण बताया है। मिल्लरगंज निवासी जगजोत सिंह के मुताबिक, बुधवार देर रात वह अपनी मां और बेटे के साथ ढोलेवाल स्थित मैगी प्वाइंट रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। तीनों कार में बैठकर खाना खा रहे थे। वह बेटे के लिए पानी की बोतल लेने और बिल चुकाने कार से उतरे। इसी दौरान पीछे से आए सात से आठ युवकों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। जगजोत का दावा है कि शुरुआती दो गोलियों से वह बच निकले और कार में बैठ गए, लेकिन हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा। लात और आंख के पास लगे गोली के छर्रे जगजोत ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने कार लेकर निकलने की कोशिश के दौरान उन पर दातर से कई वार किए। सिर पर दस्तार के ऊपर से हमला किया गया और पिस्तौल के बट से भी चोट पहुंचाई गई। हमलावरों ने दातर से उनके बाल काट दिए। उन्होंने लात और आंख के पास गोली के छर्रे लगने की बात भी कही। बिल चुकाने के लिए कार से उतरा था बेटा जगजोत की मां मनजीत कौर के मुताबिक, उनका बेटा पानी की बोतल लेने और बिल चुकाने के लिए कार से उतरा था। कुछ देर बाद उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो वह गोलियों की आवाज के बीच कार की तरफ भाग रहा था। जगजोत के कार में बैठते ही हमलावरों ने खिड़की के पास से फायरिंग शुरू कर दी। बेटे को बचाने की कोशिश में मनजीत कौर को भी चोट लगी और उनके चेहरे पर जख्म हो गया। इस दौरान कार में साढ़े तीन साल का बच्चा भी मौजूद था। एक साल पहले घर पर हमले का भी आरोप जगजोत ने बताया कि वह हमलावरों को पहले से जानते हैं। वह पहले कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन अब किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं। हमलावर दूसरी पार्टी से जुड़े हैं और चुनावी रंजिश के चलते उन पर हमला किया। उन्होंने हमलावरों के जनता नगर इलाके से संबंधित होने का भी दावा किया। जगजोत प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और एनजीओ भी चलाते हैं। करीब एक साल पहले भी इन्हीं लोगों ने उनके घर पर हमला कर फायरिंग की थी। इस बार उनकी कार पर भी गोलियों के निशान मिले हैं। उन्होंने मौके पर .45 बोर का एक खाली खोल मिलने की बात कही है। राजनीतिक रंजिश के चलते हमला: एसीपी एसीपी अनुभव जैन ने बताया कि शुरुआती जांच में हमला राजनीतिक रंजिश से जुड़ा सामने आया है। जसविंदर, दिलराज सिंह और खुशराज सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। हमले में पिस्तौल का भी इस्तेमाल किया गया। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।

स्कूल में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, छात्र ने कुर्सी से किया हमला; 22 टांके लगे

जालंधर. ट्विंकल मॉडल स्कूल दो बच्चों में 2 दिन पहले बेंच पर बैठने को लेकर लड़ाई हो गई थी। इस दौरान एक बच्चे ने दूसरे को कुर्सी उठाकर मार दी जिस वजह से उसके पेट पर 22 टांके लगे हैं। घायल बच्चे के ताया जसवीर सिंह और मासी सिमरन ने कहा कि उनका बच्चा आकाशदीप दसवीं कक्षा में पड़ता है। स्कूल में एक ही कक्षा में दसवीं और नवमी कक्षा पढ़ाई जाती है। उनके बच्चे को सुबह जल्दी बुलाया जाता है और वह सुबह जल्दी आकर कक्षा के बेंच ठीक करता है, ऐसे में आकाशदीप दो दिन पहले कक्षा के बेंच ठीक कर रहा था तभी नवमी कक्षा के एक छात्रा ने उसे बहसबाजी शुरू कर दी कि वह इस बेंच पर बैठेगा जबकि वह बेंच अतिरिक्त था। इसी बात को लेकर उसके बच्चे को पहले चेहरे और बाद में कुर्सी उठाकर उसके पेट में मारी गई।

ईरानी ड्रोन-मिसाइलों पर अमेरिकी लेजर अटैक, युद्ध में नया हथियार

तेहरान  अमेरिकी सैन्य बल अब लेजर सिस्टम का इस्तेमाल असल मुकाबले में करने लगे हैं. पेंटागन ने पुष्टि की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को लेजर से मार गिराया जा रहा है. पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की तुलना में इसकी लागत बहुत कम है।  एक पारंपरिक मिसाइल लाखों डॉलर की पड़ती है जबकि लेजर शॉट की कीमत बिजली के खर्च जितनी ही होती है. इसी वजह से यह तकनीक आकर्षक बन गई है. उसी समय अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर कार्टेल द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोनों के खिलाफ भी इस तकनीक का परीक्षण चल रहा है। ड्रग तस्करी और निगरानी के लिए छोटी ड्रोनें लगातार समस्या बन रही थीं. लेजर सिस्टम इन्हें तेजी से और कम खर्च में नष्ट कर सकता है. दशकों के शोध और विकास के बाद लेजर हथियार अब प्रयोगशाला से निकलकर युद्ध के मैदान तक पहुंच गए हैं।  लेजर सिस्टम कैसे काम करता है? उच्च ऊर्जा लेजर एक शक्तिशाली किरण पैदा करता है जो लक्ष्य पर टारगेट किया जाता है. टारगेट जला जाता है. उसके सेंसर और संरचना को नुकसान पहुंचाती है. ड्रोन या मिसाइल जैसे छोटे और तेज लक्ष्यों के खिलाफ यह बहुत प्रभावी साबित हो रहा है. पारंपरिक हथियारों में गोला-बारूद सीमित होता है लेकिन लेजर के लिए सिर्फ बिजली की जरूरत होती है. जहाज या जमीनी वाहन पर लगे जनरेटर से यह लगातार काम कर सकता है।  आर्मी ने वार-रेडी यानी युद्ध के लिए तैयार हाई एनर्जी लेजर सिस्टम के लिए 50 करोड़ डॉलर का ठेका दिया है. यह ठेका दिखाता है कि अब यह तकनीक सिर्फ प्रयोग नहीं बल्कि वास्तविक तैनाती के चरण में पहुंच चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि ऑपरेटर इन्हें निशाना बनाने के लिए रीकॉन्फिगर्ड एक्सबॉक्स कंट्रोलर का इस्तेमाल कर रहे हैं. गेमिंग कंट्रोलर सस्ते, आसानी से उपलब्ध और सैनिकों के लिए परिचित होते हैं. इससे ट्रेनिंग का समय भी कम लगता है।  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. यहां ईरानी ड्रोन और मिसाइलों का खतरा लगातार बना रहता है. पारंपरिक रक्षा प्रणालियां महंगी पड़ती हैं. स्टॉक भी सीमित होता है. लेजर सिस्टम इस समस्या का समाधान पेश करता है. यह न सिर्फ ड्रोन बल्कि कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बना सकता है. लागत कम होने से लंबे समय तक लगातार रक्षा संभव हो जाती है।    दक्षिणी सीमा पर स्थिति अलग है. यहां मुख्य चुनौती छोटी और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली ड्रोनें हैं जो तस्करी के लिए इस्तेमाल होती हैं. पारंपरिक हथियार इनके खिलाफ बेकार साबित होते हैं. लेजर सटीक और कम कोलेटरल डैमेज वाला विकल्प देता है. दोनों जगहों पर परीक्षण और असल इस्तेमाल से सेना को अनुभव मिल रहा है कि अलग-अलग परिस्थितियों में यह तकनीक कितनी कारगर है।   फायदे और चुनौतियां सबसे बड़ा फायदा लागत का है. एक लेजर शॉट की कीमत कुछ डॉलर में सिमट जाती है जबकि एक इंटरसेप्टर मिसाइल कई लाख डॉलर की हो सकती है. दूसरा फायदा गति का है. लेजर प्रकाश की गति से चलता है इसलिए चकमा देना मुश्किल होता है. तीसरा फायदा यह कि गोला-बारूद खत्म होने की चिंता नहीं रहती।  फिर भी चुनौतियां बाकी हैं. खराब मौसम, धूल,धुंध या बारिश लेजर की प्रभावशीलता कम कर सकती है. उच्च ऊर्जा सिस्टम को ठंडा रखने के लिए अच्छी कूलिंग व्यवस्था चाहिए. बिजली की निरंतर आपूर्ति भी जरूरी है. इन सीमाओं के बावजूद तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और सेना इसे व्यावहारिक बना रही है।    निर्देशित ऊर्जा हथियार भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल सकते हैं. ड्रोन स्वार्म यानी झुंड में आने वाले कई ड्रोनों के खिलाफ पारंपरिक हथियार अपर्याप्त साबित हो सकते हैं. लेजर एक के बाद एक लक्ष्य को तेजी से निपटा सकता है. समुद्री जहाजों, जमीनी ठिकानों और यहां तक कि विमानों पर भी इनकी तैनाती बढ़ने की उम्मीद है।   एक्सबॉक्स कंट्रोलर जैसी आम चीजों का इस्तेमाल बताता है कि सेना व्यावहारिक और सस्ते समाधान अपना रही है. इससे न सिर्फ लागत घटती है बल्कि सैनिकों के लिए सिस्टम संचालित करना आसान हो जाता है. पेंटागन का जोर इस बात पर है कि दशकों की रिसर्च अब असली नतीजे दे रही है।  कुल मिलाकर अमेरिकी सेना का लेजर सिस्टम इस्तेमाल करना सैन्य तकनीक में एक बड़ा बदलाव है. होर्मुज से लेकर दक्षिणी सीमा तक इसका प्रयोग साबित करता है कि निर्देशित ऊर्जा हथियार अब कल्पना नहीं बल्कि हकीकत बन चुके हैं. आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और क्षमता दोनों बढ़ने वाली हैं. यह विकास न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सैन्य रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। 

पुलिस हिरासत से भागा आरोपी सैफ मांडर में पकड़ा गया, फिर फायरिंग के बाद मुठभेड़ में पैर में लगी गोली

 रांची आरएसएस कार्यालय पर बम से हमले के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपित अमन और सैफ से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें हाजत में बंद कर दिया था। इसी दौरान आरोपित सैफ पुलिस को चकमा देकर हाजत से फरार हो गया और मांडर की ओर भाग निकला। सूचना मिलते ही पुलिस ने उसका पीछा शुरू किया और मांडर टोल गेट के पास उसे पकड़ लिया। पुलिस सैफ को वापस रांची ला रही थी। इसी दौरान रास्ते में पुलिस की गाड़ी खराब हो गई। पुलिस के अनुसार मौके का फायदा उठाकर सैफ ने एक जवान की पिस्टल छीन ली और दोबारा भागने का प्रयास किया। इस दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग भी कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिससे सैफ के पैर में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस ने उसे फिर से दबोच लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दुबई में काम करते हैं अमन और सैफ पुलिस का कहना है कि सैफ और अमन दोनों दुबई में काम करते थे। वहीं काम करने के दौरान उनका संपर्क कथित तौर पर आतंकी संगठनों से हुआ था। दोनों करीब एक माह पहले भारत लौटे थे। आरएसएस कार्यालय पर हमला किस उद्देश्य से किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपितों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।

निवारणपुर स्थित RSS ऑफिस को बनाया निशाना, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

रांची  निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ऑफिस को निशाना बनाकर पेट्रोल बम फेंकने की खबर सामने आई है. यह घटना देर रात हुई, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए. बताया जा रहा है कि देर रात एक कार में सवार दो अज्ञात हमलावर RSS कार्यालय के पास पहुंचे. आरोप है कि उन्होंने ऑफिस की ओर पेट्रोल बम फेंका और वहां से फरार हो गए. घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही सदर डीएसपी समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा. पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. घटनास्थल से सबूत जुटाए जा रहे हैं. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके.पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में पेट्रोल बम फेंके जाने की बात सामने आई है. हालांकि घटना के पीछे की वजह क्या थी, इसका पता अभी नहीं चल पाया है. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. घटना के बाद RSS कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है. सुरक्षा के मद्देनजर कार्यालय के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और हमलावरों की तलाश में छापेमारी भी शुरू कर दी गई है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही घटना का खुलासा कर लिया जाएगा. वहीं प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांति बनाए रखने की अपील की है.

कैथल के युवकों पर हमले का खुलासा, नंबर प्लेट देखकर आरोपियों ने किया हमला

कैथल/चंडीगढ़. उत्तराखड़ के ऋषिकेश में पूंडरी क्षेत्र के दो युवकों को नग्न कर पिटाई करवाने वाले दो आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मारपीट करने वाले अन्य युवकों की तलाश की जा रही है। मामले में जिस महिला के साथ युवकों की बहस हुई थी, वे महिला भी अब सामने आई है। महिला ने इंटरनेट मीडिया पर आकर छेड़छाड़ की बात पूरी तरह से नकारा है। कहा कि मेरी युवकों से बहस हुई थी, वहां पर मौजूद लोगों ने हरियाणा का नंबर देखते ही उनकी की पिटाई शुरू कर दी। एसपी देहात ऋषिकेश जया बलूनी ने दो आरोपितों की गिरफ्तारी की भी पुष्टि की है। एसपी ने कहा कि युवकों को पीटना गलत है, कोई बात हुई है तो पुलिस को सूचना देनी थी, कानून को हाथ में लेना ठीक नहीं है। मारपीट करने वाले आरोपितों की पुलिस तलाश कर रही है। ये था मामला पूंडरी क्षेत्र निवासी सतबीर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 20 मई को वह अपने साथियों सोनू , सतीश कुमार , प्रदीप कुमार व विक्रम सिंह के साथ कार से ऋषिकेश घूमने आए थे। कालेकी ढाल पर एक महिला से हुई गलतफहमी के बाद मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। भीड़ ने बिना कारण जाने उन्हें बुरी तरह पिटना शुरू कर दिया, साथ ही उनकी कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, उन्होंने कोई छेड़छाड़ या गलत इशारा नहीं किया था। ऋषिकेश कोतवाली एसपी जया बलोनी ने बताया कि आरोपितों की तलाश में पुलिस टीम गठित की गई। भरत विहार ट्रक यूनियन पार्किंग क्षेत्र में दबिश देकर घटना में शामिल 47 वर्षीय अशोक थापा व नरेश कश्यप निवासी कालेकी ढाल को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि बाकी दो नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है। अज्ञात आरोपितों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कोई विवाद सामने आता है तो लोग कानून को अपने हाथ में न लें, घटना की जानकारी पुलिस को दें। एसपी ने बताया कि बताया कि महिला से जानकारी ली गई, लेकिन उनकी पुत्री से छेड़छाड़ जैसी बात सामने नहीं आई। एचआर नंबर गाड़ी देखते ही लोगों ने किया हमला पीड़ित सतीश ने आरोप लगाया कि वेन्यू एचआर08एएल 9398 नंबर की गाड़ी देखते ही सड़क पर मौजूद लोगों ने हमला कर दिया। हमने ऐसा कोई काम नहीं किया , जिससे किसी नाबालिग को परेशानी हो, भीड़ ने बिना कारण जाने ही गालियां दी और मारपीट की। ऋषिकेश पुलिस को शिकायत दी है, पुलिस कार्रवाई करने में लगी है। युवकों ने बताया कि हरियाणा के लोगों को जानबूझ कर टारगेट किया जा रहा है, जो गलत है। लड़की मां बोली, ईशारा किया था, कोई छेड़छाड़ नहीं की वहीं लड़की की मां ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। महिला ने बताया कि ऋषिकेश मैं शाम को बाजार में जा रही थी, एचआर नाम की गाड़ी भी हमारे साथ चल रही थी। मेरी बेटी ने कहा कि अंकल कुछ इशारे कर रहे हैं। मैंने पास जाकर कहा कि कोई दिक्कत है तो गाड़ी रोक लो, युवकों ने गाड़ी रोक ली, जैसे ही हम उनसे बातचीत करने लगे, दोनों पक्षों की आवाज भी ऊंची थी, इसी दौरान वहां पर काफी गाड़ियों भी रूक गई और युवकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। मैंने रोकने की बहुत कौशिश की, लेकिन ज्यादा भीड़ होने के कारण मेरी बात किसी ने नहीं सुनी, इसके बाद डायल 112 को फोन किया, पुलिस मौका पर पहुंचकर युवकों को अपने साथ ले गई। महिला ने बताया कि छेड़खानी जैसा कुछ नहीं हुआ, बिना कारण जाने ही भीड़ में मौजूद लोगों ने उनपर हमला कर दिया।

टेक्सास में फिर हुई फायरिंग, वॉशिंगटन के हमले के बाद दो लोग हुए घायल

 टेक्सास अमेरिका के टेक्सास के मिडलैंड शहर में एक बार के पास रविवार को सुबह-सुबह गोलीबारी की दो अलग-अलग घटनाओं की जांच चल रही है. यह घटना सुबह करीब रविवार को करीब 1 बजकर 30 मिनट की बताई जा रही है. मिल रही जानकारी के मुताबिक मिडलैंड पुलिस डिपार्टमेंट के कुछ ऑफ ड्यूटी पुलिसकर्मी ट्रेडविंड्स और ड्यूविले बुलेवार्ड के पास मौजूद एक बार में ड्यूटी पर थे. इसी दौरान उन्होंने पास ही गोली चलने की आवाज सुनी. मौके पर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों को एक हथियारों से लैस व्यक्ति मिला, जिस पर उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुए गोली चला दी।  घटना में घायल संदिग्ध को तुरंत मिडलैंड मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. इसी दौरान पुलिस ने बताया कि उसी घटना के बाद दो अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हो गए थे. उन्हें निजी वाहन से अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. घटनाओं की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बार के सामने सड़क के दूसरी ओर किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था. इसी झगड़े के दौरान संदिग्ध ने कई राउंड फायरिंग की, जिससे दोनों लोग घायल हो गए. फायरिंग के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया, जिसके बाद यह मुठभेड़ हुई।  मामले की जांच जारी इस पूरे मामले की जांच अब टेक्सास रेंजर्स की ओर से की जा रही है, खासकर उस हिस्से की जिसमें पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी शामिल है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही साझा की जाएगी. फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से पुलिस सतर्क बनी हुई है।  एक अन्य घटना में 2 की मौत अमेरिका के कास काउंटी में  सुबह एक अन्य दर्दनाक घटना सामने आई, जहां आग लगने के बाद दो लोगों के शव बरामद किए गए. यह हादसा क्वीन काउंटी के पास एक ट्रक स्टॉप और भारतीय रेस्टोरेंट में हुआ. शेरिफ कार्यालय के मुताबिक रविवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस को अमेरिका के हाईवे 59 पर मौजूद पुंज ट्रक स्टॉप एंड इंडियन रेस्तरां में भी आग लगने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही पुलिस और फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं. जांच के दौरान इमारत की दूसरी मंजिल से दो लोगों के शव मिले. अभी तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। 

घरेलू विवाद ने लिया खौफनाक मोड़: आरक्षक की दूसरी पत्नी के हमले में मां-बेटे की मौत

दुर्ग. दुर्ग के एसटीएफ कॉलोनी में शनिवार सुबह महिला ने आरक्षक ललितेश यादव के घर घुसकर परिवारवालों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमले में आरक्षक की पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौके पर मौत हो गई, वहीं एक बेटी गंभीर घायल हो गई. एक बेटी ने बाथरुम में छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रही. पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज और बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव के बीच संबंध थे. बताया जा रहा है कि महिला एक दिन पहले भी आरक्षक के घर पहुंची थी, इस दौरान उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था. लेकिन महिला ने आज फिर से घर में घुसकर खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया. महिला द्वारा चाकू से किए गए हमले में आरक्षक की पत्नी रीना यादव और 9 वर्षीय बेटे आदित्य यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की बेटी तानिया यादव को उपचार के लिए अस्पताल के आईसीयू में रखा है. घटना के दौरान दूसरी बेटी नैना यादव ने बाथरूम में छिपकर किसी तरह से अपनी जान बचाई. घटना के बाद पूरे कॉलोनी में सनसनी फैल गई है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. घटना के संबंध में सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी महिला ने घर में घुसकर महिला और बच्चों पर हमला किया है, जिसमें दो की मौत हो गई और एक बच्ची का इलाज जारी है. फिलहाल, आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है. फेसबुक में दोस्ती, फिर की शादी! घटना को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव और जांजगीर-चांपा में रहने वाली आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज के बीच फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी, जो जल्द ही प्यार में बदल गया. बताया जा रहा है कि आरक्षक ने कथित तौर पर महिला से दूसरी शादी भी कर ली थी. अब पुलिस कथित दूसरी पत्नी के आरक्षक की पहली पत्नी और बच्चों पर हमले के पीछे की वजह जानने में जुटी हुई है.

सरकारी ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों पर हमला, विभाग ने की सख्त कार्रवाई की मांग

 फतेहाबाद गांव खुम्बर में अवैध जल कनेक्शन काटने गई जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा हमला करने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस घटना से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में गहरा रोष है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमंडल अभियंता आंचल जैन की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई। उपमंडल अभियंता आंचल जैन ने बताया कि विभाग को पोर्टल पर शिकायत मिली थी कि गांव खुम्बर स्थित एक खाली प्लॉट में अवैध कनेक्शन लिया गया है। विभागीय आदेशानुसार, पृथ्वीपाल खंड संयोजक के नेतृत्व में एक टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची थी। जब टीम अपना कार्य पूरा कर बूस्टिंग स्टेशन पर वाल्व खोलने पहुंची, तो वहां गांव के निवासी रविन्द्र उर्फ घोलू ने कुछ महिलाओं के साथ मिलकर कर्मचारियों को घेर लिया। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने कर्मचारियों के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि हाथापाई पर उतारू हो गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने कड़े शब्दों में घटना की निंदा करते हुए कहा की सरकारी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने सदर थाना प्रभारी, फतेहाबाद को लिखित शिकायत भेजकर सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी देने के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारी यूनियन के जिला अध्यक्ष शमशेर सिंह कुंडू ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ तुरंत उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो जल्द ही जिला स्तरीय बैठक बुलाकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा सुनिश्चित न होने की स्थिति में फील्ड में काम करना असंभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो और फील्ड कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि पेयजल आपूर्ति बाधित न हो। इस बैठक में शर्मा चंद लाली (जिला सलाहकार), सुभाष चन्द्र (उपमंडल अभियंता), शमशेर सिंह कुंडू (जिला अध्यक्ष), अमनदीप सिंह, छोटू राम, दुर्गेश कुमार (कनिष्ठ अभियंता), दलबीर सिंह, राम मेहर सिंह सहित कई कर्मचारी व पदाधिकारी मौजूद रहे।  

क्या जंग के मुहाने पर हैं अमेरिका और ईरान: सैन्य ताकत, पलटवार की योजना और युद्ध के असर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है? पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव? ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है। 1. परमाणु कार्यक्रम अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। 2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके। 3. क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं। अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। 1. नौसैनिक बेड़े विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है। विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं। 2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं। सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं। ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे। 3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है। हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं। मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा? अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी? अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। 1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी 25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि … Read more