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ऑनलाइन खरीदारी करते समय डेबिट कार्ड यूज करना क्यों है रिस्की? वजह जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली ऑनलाइन शॉपिंग के क्रेज पिछले कुछ साल से तेजी से बढ़ा है। आप भी करत होंगे ऑनलाइन शॉपिंग। ऑफर्स और डिस्काउंट्स की वजह से ज्यादा शॉपिंग होती है। लेकिन आपको मोड ऑफ पेमेंट के तौर पर क्या इस्तेमाल करना चाहिए? कैश ऑन डिलिवरी? या कार्ड? अगर आपका जवाब डेबिट कार्ड है तो शायद आपको डेबिट कार्ड से शॉपिंग करने से बचना चाहिए। इंटरनेट पर डेबिट कार्ड डीटेल्स देकर कोई भी सामान खरीदना खतरे से खाली नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग सेफ है और ये ऑफलाइन पेमेंट से भी सुरक्षित है। ऑनलाइन शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड यूज न करना दरअसल आपके बचाव का तरीका है। कई सारी परेशानियों से बच सकते हैं। अगर कुछ गलत हुआ तो आप इससे बच सकते हैं। ऑनलाइन पेमेंट के लिए डेबिट कार्ड का यूज न करने की दो वजहे हैं। भारत में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कार्ड नंबर के साथ पासवर्ड या पिन की जरूरत होती है। पहली वजह डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से शॉपिंग करने से ई-ट्रांजैक्शन यूज होता है, लेकिन एक बड़ा फर्क है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट होती है जिससे ज्यादा आप स्पेंड कर ही नहीं सकते। लेकिन डेबिट कार्ड की कोई लिमिट नहीं होती है। आपके अकाउंट में जितने पैसे हैं उतने की शॉपिंग आप कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो डेबिट कार्ड अगर हैक हुआ तो अक्सर आप ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। मुमकिन है आपके सारे पैसे जा सकते हैं जितने आपके बैंक अकाउंट में हैं। अगर क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होता है तो जितनी क्रेडिट लिमिट है उतने ही पैसे जाएंगे। दूसरी वजह क्रेडिट कार्ड में दी गई लिमिट आपका पैसा नहीं होता है। आप क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करते हैं तो आप बैंक का पैसा यूज कर रहे हैं जो फिर आपके ऊपर कर्ज बन जाता है जिसे बाद में बैंक को चुकाना होता है। बैंक इसके लिए इंटरेस्ट चार्ज करती है और कुछ समय तक ये फ्री होता है। ये फ्रॉड से प्रोटेक्शन का भी काम करता है। अगर क्रेडिट कार्ड में किसी ने सेंध भी लगाया है तो ये जिम्मेदारी बैंक की होती है कि वो उसे फ्रॉड से बचाए। आप बैंक को ये एक्सप्लेन कर सकते हैं कि क्रेडिट कार्ड का किसी ने गलत यूज किया है और आप इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में बैंक ट्रांजैक्शन की खुद जांच करता है और अगर उन्हें ये समझ आता है कि आप सच बोल रहे हैं तो फ्रॉड किए गए पैसे आपसे नहीं मांगे जाते हैं जो आपके लिए अच्छी बात है। अगर आपके साथ डेबिट कार्ड फ्रॉड होता है तो आप बैंक को बता सकते हैं कि आपके कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है, ये भी संभव है कि आपको वो पैसे भी वापस मिल जाएं, लेकिन क्रेडिट और डेबिट कार्ड के फ्रॉड में फर्क ये है कि अगर डेबिट कार्ड फ्रॉड हुआ तो पहले आपके पैसे चले जाएंगे और फिर अगर बैंक आपके दावे को सच मानेका तो वापस मिलेंगे। लेकिन क्रेडिट कार्ड के मामले में आपका पैसा नहीं जाता है, जब तक की बैंक आगे चल कर ये मानने से इनकार कर दे कि आपके साथ कोई फ्रॉड हुआ है। इसके बाद आपसे पैसे चुकाने को कहे जाएंगे। हालांकि तब भी आप इसे चैलेंज कर सकते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो अगर आप डेबिट कार्ड यूज करके पैसे स्पेंड कर रहे हैं तो आपके कैश का तत्काल नुकसान होता है। बैंक से पैसे तुरंत कट जाते हैं, क्रेडिट कार्ड अलग तरीके से काम करता है। यहां ट्रांजैक्शन और पेमेंट करने के बीच आपके पास समय होता है, जो आमतौर पर क्रेडिट कार्ड के बिलिंग साइकल का आखिरी टाइम होता है।  

एड़ियां फटी-फटी? अपनाएं ये 6 आसान घरेलू उपाय और बनाएं उन्हें सॉफ्ट

फटी एड़ियां न केवल आपके पैरों के लुक को खराब करती हैं, बल्कि चलने-फिरने में दर्द और जलन भी पैदा कर सकती हैं। इसकी वजह अक्सर ड्राई स्किन, लंबे समय तक पानी में रहना, विटामिन की कमी या मौसम बदलना हो सकता है। फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए मार्केट में कई क्रीम उपलब्ध हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे न सिर्फ सुरक्षित होते हैं बल्कि लंबे समय तक असर भी दिखाते हैं। यहां कुछ बेहद असरदार और आसान घरेलू उपायों की जानकारी दी गई है, जो आपकी फटी एड़ियों को मुलायम और साफ बना देंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में। एड़ियों को मुलायम बनाने के उपाय     नारियल तेल और मोम- नारियल तेल एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है और मोम स्किन को सील करके नमी को लॉक करता है। दोनों को मिलाकर हल्का गर्म करें और रात में सोने से पहले एड़ियों पर लगाएं। ऊपर से कॉटन के मोजे पहन लें। कुछ दिनों में ही असर नजर आने लगेगा।     ग्लिसरीन और गुलाबजल- ग्लिसरीन त्वचा को नमी देती है और गुलाबजल ठंडक देता है। दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर हर रात एड़ियों पर लगाएं। ग्लिसरीन और रोज वाटर एड़ियों को सॉफ्ट बनाने के साथ-साथ डलनेस भी दूर करता है।     नींबू और शहद- नींबू में नैचुरल ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज होती हैं और शहद स्किन को नरम करता है। दोनों को मिलाकर 15-20 मिनट तक एड़ियों पर लगाएं। इससे डेड स्किन हटती है और त्वचा साफ और चमकदार बनती है।     गुनगुना पानी और नमक- गुनगुने पानी में थोड़ा-सा नमक डालकर 15 मिनट तक पैरों को डुबोएं। इसके बाद स्क्रबर या प्यूमिक स्टोन से डेड स्किन हटाएं। यह उपाय हफ्ते में 2 बार करें, इससे स्किन साफ और सॉफ्ट होती है।     केला और शहद का पैक- पका केला मसलकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और एड़ियों पर लगाएं। 20 मिनट बाद वॉश करें। केला पोषण देता है और शहद एंटीसेप्टिक का काम करता है।     एलोवेरा जेल- एलोवेरा जेल में हीलिंग और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। इसे रात को साफ एड़ियों पर लगाकर मोजे पहन लें। इससे स्किन रिपेयर होती है और दरारें भरने में मदद मिलती है। इन आसान और नेचुरल उपायों को रोजाना या नियमित रूप से अपनाकर आप अपनी एड़ियों को सॉफ्ट और सुंदर बना सकते हैं, वो भी बिना महंगे प्रॉडक्ट्स या साइड इफेक्ट्स के।  

स्वदेशी तकनीक का दम: पीएम मोदी ने पहने ‘Sarvam Kaze’, भारतीय कंपनी की AI में उड़ान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक शानदार चश्मा पहने हुए देखा गया। यह साधारण नहीं बल्कि AI डिवाइस है। इस वियरेबल का नाम sarvam kaze है। एआई ग्लासेस को देश के AI स्टार्टअप सर्वम AI ने बनाया है। एआई समिट 2026 में जियो ने भी अपने एआई ग्लासेस पेश किए हैं। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी एआई ग्लासेस को पहनना कोई आम बात नहीं है। ये एआई ग्लासेस कई दमदार फीचर्स के साथ लाए जाएंगे। पीएम मोदी ने टेस्ट किए एआई ग्लासेस 16 फरवरी से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में Sarvam Kaze पेश किए गए हैं। यह एक AI वियरेबल है। इसकी मदद से अन्य स्मार्ट ग्लासेस की तरह ही यूजर रियल समय में देखी जाने वाली चीजों के बारे में सुन सकते हैं। यह एआई ग्लासेस आपकी बातों का जवाब देता है और इसके जरिए आप कुछ भी कैप्चर कर सकते हैं। भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में वॉक फेंक के दौरान पीएम मोदी ने यह चश्मा पहना था। सर्वम AI के को-फाउंडर प्रत्यूष कुमार द्वारा शेयर की गई फोटोज में प्रधानमंत्री एग्जीबिशन फ्लोर पर इसके रियल-टाइम रिस्पॉन्स को टेस्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। चैट फीचर लाने की योजना में कंपनी कंपनी इस हफ्ते एक चैट फीचर भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस डिवाइस को आवाज और विजुअल इंटरैक्शन के जरिए असल दुनिया में इंटेलिजेंस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यूजर्स सर्वम प्लेटफॉर्म पर जाकर कस्टम एक्सपीरियंस भी पा सकते हैं। इस एआई डिवाइस को भारत में डिजाइन और बनाया गया है। कंपनी इसे पूरी तरह से देसी AI प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी के अनुसार इस डिवाइस को मई में भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है। बिना इंटरनेट वाला एआई भारतीय स्टार्टअप Sarvam AI ने हाल ही में Sarvam Edge लॉन्च किया है। इसकी खासियत है कि यह बिना इंटरनेट के चल रहा है। इसकी मदद से आप अपने फोन या लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी AI का इस्तेमाल कर पाएंगे। ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, Sarvam AI ने बताया है कि यह एक ऐसा ऑन डिवाइस AI प्लेटफॉर्म होगा, जिसे चलाने के लिए ना तो क्लाउड सर्वर की जरूरत है और ना ही इंटरनेट कनेक्शन की। Sarvam Edge उन लोगों तक भी AI को पहुंचाएंगा, जो महंगे इंटरनेट प्लान का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और जिनके क्षेत्र में नेटवर्क नहीं आते हैं। Sarvam Edge की खासियत होगी कि यह आपके डिवाइस की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करेगा और इंटरनेट से जुड़ा ना होने की वजह से 100% सुरक्षित भी रहेगा। इससे देखकर लग रहा है कि अब भारतीय कंपनियों ने भी एआई के क्षेत्र में देश को टॉप पर पहुंचाने के लिए अपनी कमर कस ली है।

अब इंटरनेट नहीं तो भी टेंशन नहीं: ऐसे करें UPI पेमेंट बिना ऐप

नई दिल्ली देश के मेट्रो शहर हों या छोटे कस्बे, आज खरीदारी, मोबाइल रिचार्ज या बिल भुगतान तक में ऑनलाइन पेमेंट हमारे लिए सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका बन गया है। Google Pay, Paytm, BHIM जैसे ऐप्स ने लेन-देन को बेहद सहज बना दिया है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इंटरनेट काम नहीं करता और कोई जरूरी पेमेंट करना पड़ता है। ऐसे समय में कैश के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, और अगर पास में कैश भी नहीं है तो मुश्किल बढ़ जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए National Payments Corporation of India (NPCI) ने साल 2022 में ऑफलाइन पेमेंट सर्विस शुरू की। यह सेवा उन लोगों के लिए बेहद मददगार है जो इंटरनेट कनेक्शन कमजोर या उपलब्ध न होने वाले क्षेत्रों में रहते हैं। ऑफलाइन पेमेंट कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड स्टेप 1: अपने मोबाइल फोन से *USSD कोड 99# डायल करें। स्टेप 2: स्क्रीन पर “OK” और “Welcome to *99#” दिखाई देगा। OK पर क्लिक करें। स्टेप 3: अब कई विकल्प दिखाई देंगे। यहां “Send Money” चुनें। स्टेप 4: मोबाइल नंबर का ऑप्शन चुनें। स्टेप 5: उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज करें जिसे आप पैसे भेजना चाहते हैं। स्टेप 6: स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नाम दिखाई देगा। स्टेप 7: राशि दर्ज करें और अपना UPI पिन डालें। स्टेप 8: पैसा आपके खाते से कट जाएगा और सीधे प्राप्तकर्ता के पास पहुंच जाएगा। ध्यान रखने वाली बातें ऑफलाइन पेमेंट के लिए जरूरी है कि आपका मोबाइल नंबर और आधार नंबर आपके बैंक खाते से लिंक हो। यह सुविधा इंटरनेट के बिना भी सुरक्षित लेन-देन करने में मदद करती है। खासकर ग्रामीण या नेटवर्क कमजोर क्षेत्रों में यह सेवा बहुत लाभकारी साबित हो रही है। NPCI की इस ऑफलाइन पेमेंट सर्विस के जरिए अब लोग कहीं भी, किसी भी समय आसानी से पैसे भेज सकते हैं, बिना इंटरनेट की चिंता किए। यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सभी के लिए वित्तीय लेन-देन को सरल और भरोसेमंद बनाता है।

चेहरे पर रेज़र चलाना पड़ सकता है भारी: ये 5 आम भूलें स्किन को कर देती हैं खराब

आजकल चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए फेस शेविंग महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल बालों को हटाती है, बल्कि त्वचा को एक्सफोलिएट कर डेड स्किन सेल्स को भी निकाल देती है, जिससे मेकअप और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा में बेहतर तरीके से समा जाते हैं। हालांकि, चेहरे की त्वचा बहुत सेंसिटिव होती है। इसलिए अगर आप फेस रेजर का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि कटने, छिलने या पिंपल्स की समस्या न हो। सही रेजर का चुनें चेहरे के लिए कभी भी अपने बॉडी रेजर का इस्तेमाल न करें। चेहरे के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फेशियल रेजर का ही इस्तेमाल करें, जिनमें एक छोटा और बारीक ब्लेड होता है। हमेशा चेक करें कि रेजर का ब्लेड तेज हो। पुराने ब्लेड से त्वचा छिल सकती है। साथ ही, इस्तेमाल से पहले और बाद में रेजर को सैनिटाइजर या अल्कोहल से साफ जरूर करें ताकि बैक्टीरिया न पनपें। त्वचा को तैयार करना सूखी त्वचा पर कभी भी रेजर न चलाएं। इससे जलन और रेजर बर्न हो सकता है। सबसे पहले चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से साफ करें। शेविंग को आसान बनाने के लिए चेहरे पर एलोवेरा जेल, फेशियल ऑयल या एक अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं। यह रेजर और त्वचा के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। शेविंग की सही तकनीक चेहरे को शेव करने का भी एक खास तरीका होता है, जिसे फॉलो करना जरूरी है।     रेजर को त्वचा पर हमेशा 45 डिग्री के एंगल पर रखें।     रेजर को बहुत जोर से न दबाएं। हल्के हाथों से छोटे-छोटे स्ट्रोक्स लें।     हमेशा बालों के उगने की दिशा में ही शेव करें। उल्टी दिशा में शेव करने से इनग्रोन हेयर की समस्या हो सकती है।     शेव करते समय दूसरे हाथ से त्वचा को थोड़ा ऊपर की ओर खींचकर टाइट रखें, ताकि ब्लेड आसानी से फिसल सके। शेविंग के बाद की देखभाल शेविंग के बाद त्वचा के पोर्स खुल जाते हैं, इसलिए सही देखभाल जरूरी है-     शेविंग के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोएं ताकि त्वचा शांत हो जाए।     शेविंग वाले दिन विटामिन-सी, किसी भी तरह के केमिकल एक्सफोलिएंट, जैसे- AHA/BHA या रेटिनॉल का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।     एक अच्छे हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल से चेहरे को अच्छी तरह हाइड्रेट करें। कब शेविंग से बचें? अगर आपके चेहरे पर मुंहासे, कट्स या कोई स्किन इन्फेक्शन है, तो उस समय शेविंग बिल्कुल न करें। रेजर के इस्तेमाल से बैक्टीरिया पूरे चेहरे पर फैल सकते हैं और आपकी समस्या बढ़ सकती है।  

अब जेट लैग नहीं करेगा परेशान: लंबी यात्रा के बाद बदन को तरोताज़ा रखने का वैज्ञानिक तरीका आया सामने

लंबी हवाई यात्रा के बाद होने वाली थकान या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने की वजह से बिगड़ी हुई नींद अब बीते दिनों की बात हो सकती है। जापान के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी दवा 'मिक 628' की खोज की है, जो शरीर की 'इंटरनल क्लॉक' को तेजी से आगे खिसकाने में मदद करती है। इस दवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अनिद्रा और थकान से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो रही है। चूहों पर सफल रहा प्रयोग वैज्ञानिकों ने इस दवा का परीक्षण चूहों पर किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे। शोध के दौरान चूहों के लिए दिन और रात के समय को 6 घंटे आगे बढ़ाकर 'जेट लैग' जैसी स्थिति पैदा की गई। जिन चूहों को 'मिक 628' की एक खुराक दी गई, वे सामान्य चूहों की तुलना में 3 दिन पहले ही नए समय के अनुसार ढल गए। इस प्रयोग से यह साफ हुआ कि यह दवा जेट लैग से उबरने के समय को लगभग आधा कर देती है। कैसे काम करती है यह दवा? यह महत्वपूर्ण शोध अमेरिका की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले शरीर की अंदरूनी घड़ी को नियंत्रित करने वाले एक खास जीन की पहचान की। 'मिक 628' दवा इसी जीन को सक्रिय करती है, जिससे शरीर का चक्र तेजी से बदल जाता है। इस दवा की एक और खास बात यह है कि इसे लेने के समय का इसके असर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जो इसे अन्य दवाओं से अलग बनाता है। भारतीयों के लिए क्यों है खास? आज के दौर में भारतीयों का विदेश दौरा काफी बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में करीब 3.17 करोड़ भारतीयों ने लंबी हवाई यात्राएं कीं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को अक्सर समय के अंतर के कारण नींद न आने और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर यह दवा बाजार में आती है, तो इन करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब इंसानों पर होगा परीक्षण चूहों पर मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब वैज्ञानिक इस दवा को इंसानों पर परखने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में इसके सुरक्षा मानकों और प्रभाव का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। अगर इंसानों पर होने वाले परीक्षण सकारात्मक रहते हैं, तो यह दवा न केवल यात्रियों के लिए, बल्कि शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  

गलत सनस्क्रीन कर सकती है त्वचा को नुकसान! खरीदते समय रखें इन 3 बातों का ध्यान

आप कितना भी महंगा स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करें, लेकिन अगर आपका सनस्क्रीन अच्छा नहीं है, तो आपके पैसे बर्बाद हो रहे हैं। सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा के लिए हानिकारक होती हैं। इनके कारण समय से पहले झुर्रियां, सनबर्न और स्किन कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन खतरों से बचने के लिए सनस्क्रीन बेहद जरूरी है, लेकिन बाजार में मौजूद ढेरों ऑप्शन्स में से अपने लिए सही सनस्क्रीन चुनना अक्सर कन्फ्यूजिंग हो जाता है। हालांकि, अगर सनस्क्रीन खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो आपको यूवी किरणों से पूरा बचाव मिल सकता है। सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? जब भी आप सनस्क्रीन खरीदें, उसके लेबल पर इन तीन चीजों को जरूर देखें- SPF (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) SPF यह बताता है कि सनस्क्रीन आपको यूवी-बी किरणों से कितनी सुरक्षा देगी। हमेशा सनस्क्रीन 30 या उससे ज्यादा SPF का खरीदें। इससे आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से 97-98% सुरक्षा मिल सकती है। ब्रॉड स्पेक्ट्रम केवल SPF काफी नहीं है। आपकी सनस्क्रीन पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा होना जरूरी है। इसका मतलब है कि यह यूवी-ए और यूवी-बी दोनों से रक्षा करेगी। PA रेटिंग अक्सर आप लेबल पर PA+, PA++ या PA+++ देखते होंगे। यह UVA किरणों से सुरक्षा के स्तर के बारे में बताता है। जितने ज्यादा '+' के निशान होंगे, सुरक्षा उतनी ही बेहतर होगी। कोशिश करें कि कम से कम PA+++ वाली सनस्क्रीन चुनें। अपनी स्किन टाइप के अनुसार कैसे चुनें सनस्क्रीन? हर किसी की त्वचा अलग होती है, इसलिए सनस्क्रीन भी अलग होनी चाहिए-     ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन- इनके लिए जेल-बेस्ड या मैट फिनिश सनस्क्रीन सबसे अच्छी होती है। लेबल पर Non-comedogenic जरूर देखें, जिसका मतलब है कि यह पोर्स को बंद नहीं करेगी।     ड्राई स्किन- आपको क्रीम-बेस्ड सनस्क्रीन चुननी चाहिए जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स जैसे मॉइस्चराइजिंग तत्व हों।     सेंसिटिव स्किन- ऐसी त्वचा के लिए फिजिकल या मिनरल सनस्क्रीन, जिसमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड हो बेहतर होती है, क्योंकि यह त्वचा में समाने के बजाय ऊपर एक सुरक्षा परत बनाती है। सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका सही सनस्क्रीन खरीदना केवल आधा काम है, उसे सही से लगाना भी उतना ही जरूरी है-     दो उंगलियों का नियम- चेहरे और गर्दन के लिए अपनी पहली और दूसरी उंगली की लंबाई के बराबर सनस्क्रीन लें। इससे कम सनस्क्रीन आपको पूरी सुरक्षा नहीं देगा।     20 मिनट पहले लगाएं- घर से निकलने से कम से कम 15-20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं, ताकि वह त्वचा में सेट हो सके।     दोबारा लगाएं- अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं या पसीना आ रहा है, तो हर 2-3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं।  

डिजिटल लोक अदालत से पुराने चालान का समाधान: घर बैठे पूरा प्रोसेस समझें आसान भाषा में

नई दिल्ली अगर आपके पुराने चालान बकाया हैं, तो अब डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल के जरिए आप घर बैठे उनका निपटारा कर सकेंगे। यह पोर्टल लोगों को अपनी गाड़ी का नंबर और ओटीपी दर्ज करके चालान देखने की सुविधा देता है। इस पोर्टल के जरिए लोग लोक अदालत के लिए तारीख और कोर्ट चुन सकेंगे। इसके बाद चुनी हुई तारीख को कोर्ट में जाकर पोर्टल पर मिलने वाले बारकोड को स्कैन करवाना होगा। इसके बाद जुर्माने की राशि को भरते ही रियल टाइम में चालान का निपटारा अपडेट हो जाएगा। डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल से क्या फायदा डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का फायदा लोगों को प्रशासन दोनों को मिलेगा। इसके जरिए ट्रैफिक चालानों के निपटारे की रफ्तार तेज हो जाएगी। इसके अलावा पहले चालान का स्टेटस अपडेट होने में लंबा समय लग जाता था, जो कि अब रियल टाइम में तुरंत हो जाएगा। इसके अलावा इस पोर्टल की वजह से लोगों को बार-बार कोर्ट का चक्कर नहीं मारना पड़ेगा और वह अपने अनुसार घर या दफ्तर के पास की कोर्ट और टाइम स्लॉट चुनकर सभी चालान का निपटारा करा पाएंगे। समझें इस्तेमाल का पूरा प्रोसेस डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का इस्तेमाल करना काफी आसान हैं। इसके लिए आपको:     सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल यानी कि     traffic.delhipolice.gov.in/lokadalat/ पर जाना होगा।     यहां होम पेज पर अपनी गाड़ी का नंबर और वेरिफिकेशन कोड डालकर सर्च बटन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपको रजिस्टर्ड नंबर पर एक OTP मिलेगा। OTP को दर्ज करके वेरिफाई करें।     वेरिफिकेशन होने के बाद आपको स्क्रीन पर गाड़ी के सभी पेंडिंग नोटिस और चालान दिखने लगेंगे। आपको जिस किसी भी चालान का निपटारा करना है, उसे चुन लें।     अब अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी कोर्ट को चुनें और टाइप स्लॉट चुनें।     इसके बाद अंडरटेकिंग पर क्लिक करके सबमिट कर दें और चालान की रसीद का फ्रिंट लेकर उसे सेव कर लें। इसके बाद क्या करें?     इसके बाद तय तारीख और समय पर संबंधित कोर्ट में पहुंचें।     कोर्ट में मौजूद लोक अदालत की बेंच के सामने अपनी चालान की रसीद दिखाएं।     कोर्ट का स्टाफ रसीद का बारकोड स्कैन करेगा और आपको जुर्माने की रकम भरनी होगी।     इसके साथ ही मौके पर चालान का निपटारा कर दिया जाएगा।

iPhone 18 Pro फीचर्स हुए लीक, परफॉर्मेंस और AI में मचाएगा तहलका

नई दिल्ली Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 लाइनअप को लॉन्च कर सकता है. कयास हैं कि कंपनी इस साल सिर्फ प्रो वेरिएंट को ही लॉन्च करेगी. लेटेस्ट लीक रिपोर्ट्स की मानें, तो ब्रांड Pro मॉडल्स में कई बड़े अपग्रेड करेगा. ऐपल दो स्मार्टफोन्स- iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर दिया जाएगा. कंपनी इन फोन्स में C2 मॉडम दे सकती है, जो ब्रांड का इन-हाउस चिप होगा. दोनों ही फोन्स में छोटा डायनैमिक आईलैंड मिलेगा. आइए जानते हैं इन फोन्स में क्या कुछ खास हो सकता है. मिलेंगे मैक्स अपग्रेड Macrumors की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में बड़ा अपग्रेड मिलेगा. दोनों ही फोन्स में डायनैमिक आईलैंड का साइज छोटा किया जा सकता है. स्मार्टफोन से कुछ फेस आईडी टेक्नोलॉजी को हटाया जा सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर मिलेगा. ये चिप 2nm प्रॉसेस पर तैयार किया जाएगा. प्रोसेसर नए आर्किटेक्चर और पैकेजिंग डिजाइन पर बेस्ड होगा. इसकी वजह से परफॉर्मेंस के साथ ही पावर एफिशिएंसी भी बेहतर होगी. इसके अलावा सेल्यूलर और नेटवर्किंग फीचर के मामले में भी कंपनी अपग्रेड्स करेगी. अपकमिंग स्मार्टफोन सीरीज में N2 चिप मिलेगा. कंपनी इन दोनों ही फोन्स में 48MP का प्राइमरी फ्यूजन कैमरा दे सकती है. नए अपग्रेड के बाद iPhone में लाइट को कंट्रोल करना आसान होगा. नॉन प्रो मॉडल्स नहीं होंगे लॉन्च रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी इस साल iPhone 18 को लॉन्च नहीं करेगी. इस फोन को कंपनी अगले साल यानी 2027 में लॉन्च कर सकती है. वहीं iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को कंपनी इस साल यानी 2026 सितंबर में लॉन्च कर सकती है. प्रो सीरीज के डिजाइन में इस बार कुछ नया देखने को संभवतः नहीं मिलेगा.

2050 का खतरा: दुनिया की 25% आबादी को हो सकती है कान की दिक्कत, WHO की चेतावनी

नई दिल्ली दुनिया भर में सुनने से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की पहली वर्ल्ड रिपोर्ट ऑन हियरिंग के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की करीब 2.5 अरब आबादी यानी हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर की सुनने की समस्या से जूझ रहा होगा. इनमें से लगभग 70 करोड़ लोगों को कान और सुनने से जुड़ी विशेष हॉस्पिटैलिटी और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत पड़ेगी. ‌ ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 2050 तक हर चार में से एक शख्स को कान की दिक्कतें क्यों होगी और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में और क्या-क्या आया सामने आया. अभी क्या है स्थिति? डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को सुनने में किसी न किसी तरह की दिक्कत है. समय पर इलाज और देखभाल न मिल पाना मामलों के बढ़ने के बड़ी वजह है. डब्ल्यूएचओ का कहना है की कम आय वाले देशों में ऐसे 80 प्रतिशत मामले सामने आते हैं, जहां एक्सपर्ट्स और संसाधनों की भारी कमी है. इसके अलावा संक्रमण, जन्मजात बीमारियां, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में लंबे समय तक रहना और अनहेल्दी लाइफस्टाइल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं. वहीं बच्चों में करीब 60 फीसदी मामलों को टीकाकरण, बेहतर मातृत्व, शिशु देखभाल और कान के संक्रमण के समय पर इलाज से रोका जा सकता है. वहीं युवाओं में तेज आवाज में संगीत सुनना बड़ा खतरा बनता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 12 से 35 वर्ष के एक अरब से ज्यादा लोग स्मार्टफोन और हेडफोन के जरिए तेज आवाज में गाने सुनने के कारण खतरे में है. हेल्थ व्यवस्था में बड़ी कमी भी वजह डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों में कान, नाक और गला एक्सपर्ट्स, ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की भारी कमी है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कान और सुनने से जुड़ी देखभाल को अभी भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई. इसके चलते शुरुआती पहचान और समय पर इलाज नहीं हो पाता है. इसके अलावा एक्सपर्ट का कहना है कि सुनने की समस्या की शुरुआती जांच बहुत जरूरी है. वहीं नई तकनीकों की मदद से अब कम संसाधनों में भी जांच संभव है. कई कान की बीमारियों का इलाज दवा या सर्जरी से हो सकता है. जहां सुनने की क्षमता वापस नहीं लाई जा सकती, वहां हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी जैसे ऑप्शन मददगार साबित होते हैं. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि कान और सुनने से जुड़ी सेवाओं में निवेश करने पर सरकार को हर एक डॉलर के बदले करीब 16 डॉलर का सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सकता है. वहीं सुनने की समस्या का असर सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहता. यह पढ़ाई, रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे सामाजिक अलगाव और अवसाद का खतरा भी बढ़ सकता है.