samacharsecretary.com

फ्रांस में महंगाई के खिलाफ दंगे, 143 साल पुरानी इमारत आग में जलकर खाक

पेरिस
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन के भारी खर्च और सरकारी कटौती के खिलाफ जारी छात्रों और ट्रेड यूनियनों का आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी हिंसक दंगे और लूटपाट में बदल गया है। शनिवार और रविवार के दौरान पेरिस, बोरदो, ल्योन और मार्सैई सहित फ्रांस के प्रमुख शहरों में 5.5 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, जिनमें से केवल पेरिस में ही 1,10,000 लोग जमा हुए।

आंदोलन के उग्र होने के साथ ही नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने Apple, Louis Vuitton, Hermès जैसी दुनिया की प्रमुख लक्जरी रिटेल दुकानों और शोरूम्स में जमकर तोड़फोड़ और लूटपाट की।

लक्जरी शोरूम्स में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी
फ्रांस के गृह मंत्रालय और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के अलग-अलग शहरों में हिंसा और अराजकता का माहौल देखा गया।

बोरदो में उपद्रवियों ने एप्पल के फ्लैगशिप स्टोर और लग्जरी फैशन ब्रांड्स 'लुई वुइटन' और 'हर्मीस' के शीशे तोड़कर दुकानों को लूट लिया।

प्रदर्शनकारी मार्सैई की नगर निगम इमारत में जबरन घुस गए। वहां उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रीय प्रतीक 'मारियाने' की मूर्ति तोड़ दी, टीवी सेट नष्ट किए और दीवारों पर अराजकतावादी प्रतीक चिन्ह पेंट कर दिए।

ल्योन शहर के प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया
नकाबपोश युवाओं ने पेरिस में सड़कों पर बनी इमारतों, रेस्टोरेंट और गाड़ियों को फूंक दिया। कुछ उग्र प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के आधिकारिक आवास 'एलिसी पैलेस' पर धावा बोलने की चेतावनी भी दी।

फ्विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा के बीच, लिमोज टाउन हॉल का 1883 में बना 143 साल पुराना घंटाघर आग की लपटों में ढह गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे भी आग के हवाले कर दिया।
   
किन-किन वर्गों ने मिलाया हाथ?
शुरुआत में शिक्षा और कार्य स्थितियों को लेकर शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन देखते ही देखते जन-आंदोलन में बदल गया।

इस आंदोलन में छात्र, शिक्षक, ट्रेड यूनियन, मजदूर, किसान, पेंशनभोगी और प्रसिद्ध 'येलो वेस्ट' आंदोलन के कार्यकर्ता एकजुट हो गए हैं।

जीवन-यापन के खर्च को नियंत्रित करना, शिक्षा क्षेत्र में बजट बढ़ाना, शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी, पेंशन की सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती को तुरंत वापस लेना।

400 गिरफ्तार; मैक्रॉन और गृह मंत्री का कड़ा बयान
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि हिंसा के आरोप में देशभर से लगभग 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें अकेले पेरिस से 110 गिरफ्तारियां हुई हैं।

गृह मंत्री नुनेज और प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने तबाही के लिए वामपंथी उग्रवादी गुटों और असमाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री ने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हमारे गणराज्य में पूरा स्थान है, लेकिन लूटपाट और हमलों का कोई स्थान नहीं है।"

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "गणराज्य में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। जिन लोगों ने तोड़फोड़ की, हमला किया और दुकानों को लूटा है, उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाएगा और कड़ी सजा दी जाएगी।"

दंगों पर काबू पाने के लिए फ्रांसीसी दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है, जबकि प्रमुख शहरों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here