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8वें वेतन आयोग में देरी, कर्मचारियों को एरियर मिलने की संभावना 2026 से, रिपोर्ट 2027 तक हो सकती है

नई दिल्ली  31 दिसंबर 2025 को 7वां वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू किया जाना है, जिसकी संभावना कम है, क्योंकि केन्द्र की मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफ्रेंस को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है, ऐसे में आयोग अप्रैल 2027 तक केन्द्र सरकार को सिफारिशें सौंपेगा और फिर सारे पहलुओं पर विचार करते हुए इसे अक्टूबर नवंबर 2027 तक लागू किया जा सकेगा, ऐसे में जनवरी 2026 से एरियर मिलेगा या नहीं, यह सवाल चर्चाओं में बना हुआ है। इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है ले्किन संकेत जरूर मिले है कि एरियर मिल सकता है।आईए जानते है विस्तार से… 1 जनवरी 2026 से मिलेगा कर्मचारियों को एरियर?     वर्तमान में केंद्र सरकार 50 लाख कर्मचारी और 68.72 लाख पेंशनर्स है, जिन्हें 8वें वेतन आयोग का लाभ मिलना है लेकिन 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों और सांसदों द्वारा इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में चार सांसदों ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की तारीख के बारे में पूछा।     राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि इसे लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी।आयोग की स्वीकृत सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार उचित धन का प्रावधान करेगी।बता दे कि 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना और नवंबर 2015 में रिपोर्ट दी गई। इसके बाद करीब 2.5 साल बाद जून 2016 में इसे लागू किया गया लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2016 से एरियर दिया गया।कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग में भी एरियर दिया जा सकता है, हालांकि सरकार की तरफ से अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। नए वेतन आयोग में डीए होगा शून्य? फिटमेंट फैक्टर पर पड़ेगा असर?     आमतौर पर वेतन आयोगों की अनुशंसाएं प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर लागू की जाती हैं। फरवरी 2014 में 7वें वेतन आयोग का गठन हुआ था और 1 जनवरी 2016 से उसकी सिफारिशें लागू की गई थीं।इसके लागू होते ही 2.57 फिटमेंट फैक्टर होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 7000 हजार रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये (14.3%) हो गई थी।अगर 7वें वेतन आयोग के फॉर्मूले पर 8वां वेतन आयोग लागू किया जाता है तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 34560 या 51,480 रुपये हो सकती है। हालांकि कितनी सैलरी बढ़ेगी यह फिटमेंट फैक्‍टर और DA पर निर्भर करेगा।     7वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 था, जो 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़कर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है और डीए शून्य हो जाएगा क्योंकि हर वेतन आयोग के लागू होने पर डीए ‘0’ हो जाता है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत है जो जुलाई से दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा। जनवरी 2026 में इसके 60% तक जाने की उम्मीद है।विशेषज्ञों की मानें तो जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता तब तक DA बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में ही बढ़ेगा और आयोग के लागू होने के बाद मौजूदा DA बेसिक पे में मर्ज हो जाएगा, जिससे वेतन संरचना में बदलाव आएगा । 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी?     7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर के कारण वेतन और पेंशन में वृद्धि के बाद केंद्रीय कर्माचारियों की न्यूनतम सैलरी 7,000 से बढ़कर 18,000 रूपये हो गई थी। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है, जिससे वेतन में 30-50 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।अगर 1.92 फिटमेंट फैक्टर होता है तो वेतन में 92% की वृद्धि यानि 18,000 रुपये से बढ़कर 34,560 रुपये हो जाएगा।     2.47 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया, तो 18,000 रुपये का बेसिक वेतन बढ़कर लगभग 44,460 रुपये हो सकता है।1.83 फिटमेंट फैक्टर होने पर बेसिक वेतन करीब 32,940 रुपये और 1.86 होने पर लगभग 33,480 रुपये तक हो सकता है। 2.86 फिटमेंट होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 51,480 रुपये हो सकती है।     महंगाई राहत पेंशन पर एक निश्चित फीसदी के रूप में दी जाती है।जब पेंशन बढ़ती है, तो DR की वैल्यू खुद बढ़ जाती है।पुरानी पेंशन 20,000 रुपए है और DR 20% पर 4,000 रुपए और नई पेंशन 30,000 रुपए है और DR 20% तो 6,000 रुपए मिलेगी।इससे साफ है कि जितनी ज्यादा पेंशन बढ़ेगी, उतनी ज्यादा ही महंगाई राहत बढ़ेगी। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.86 तक जाता है, तो 25,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर 71,500 हो सकती है और कुल सैलरी (DA और HRA समेत) 90,000 से ज्यादा पहुंच सकती है। आठवें वेतन आयोग से किसे लाभ होगा?     केंद्र सरकार के कर्मचारी     रक्षा कर्मी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कर्मचारी     रेलवे कर्मचारी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CPC) को अपनाने वाले स्वायत्त और वैधानिक निकाय     केंद्र सरकार के पेंशनभोगी  

8वें वेतन आयोग पर सरकार का महत्वपूर्ण बयान, पेंशनर्स और कर्मचारियों को कब से मिलेगा लाभ

नई दिल्‍ली.  8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने में अब सिर्फ 17 महीने का समय बचा है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बार फिर आयोग की शर्तों को लेकर जारी कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में 8वें वेतन आयोग को लेकर स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. उन्‍होंने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड के इंतजाम को लेकर भी जवाब दिए. संसद में चर्चा के दौरान वित्‍त राज्‍यमंत्री ने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की संख्‍या करीब 50.14 लाख है, जबकि 69 लाख के आसपास पेंशनर्स भी हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी को फायदा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस और इसके लागू होने की तारीख जैसे सवालों के भी जवाब दिए हैं. उनसे पूछा गया कि 8वें वेतन आयोग के लिए वित्‍तवर्ष 2026-27 के बजट में फंड आवंटन को लेकर क्‍या योजना है. क्‍या सरकार पेंशनधारकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करेगी. कबसे लागू होगा 8वां वेतन आयोग जबसे 8वें वेतन आयोग की घोषणा हुई है, सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि इसे लागू कब से किया जाएगा. संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तिथि के बारे में घोषणा बाद में की जाएगी. फिलहाल आयोग को अपने गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों हर हाल में पेश करनी होगी. 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समात्‍प हो जाएगा, लेकिन अभी तक 8वें के लागू करने की तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. आयोग बनने के बाद अब तक क्‍या हुआ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी फंड पर समय के साथ फैसला किया जाएगा. इसके लिए पहले से तय प्रक्रिया का भी पालन किया जाएगा. 41 दिन पहले 8वें वेतन आयोग को बनाने के बाद से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार ने इसके टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी 3 नवंबर, 2025 को जारी किया जा चुका है. किस आधार पर सैलरी तय करेगा आयोग पे कमीशन मूल वेतन के स्‍ट्रक्‍चर, पेंशन, अलाउंस और अन्‍य सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. उसका मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स को उचित भुगतान दिलाना है. आयोग के सामने फिटमेंट फैक्‍टर में बदलाव करने की भी चुनौती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में भी बदलाव आएगा. सरकार ने आयोग के गठन के बाद से अब तक कई कदम उठाए हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर सीधे तौर पर असर डालने वाला है.  

सरकार का जवाब आया: 8वें वेतन आयोग के बाद पेंशन पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली कई महीनों से केन्द्र सरकार के पेंशनभोगी और कर्मचारी इस चिंता में थे कि क्या 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) उनकी पेंशन को फिर से तय किया जाएगा या नहीं. सरकार ने जैसे ही 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किए, अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पेंशन संशोधन को भी इसमें साफ-साफ शामिल किया जाए. आम लोगों में भी भ्रम फैल गया था कि शायद पेंशन की समीक्षा इसमें नहीं है. इसी उलझन को दूर करते हुए वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ कर दिया है कि 8वां वेतन आयोग पेंशन से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सिफ़ारिशें देगा. यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाखों पेंशनर्स लंबे समय से किसी स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहे थे. राज्यसभा में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने अनस्टार्ड प्रश्न के जरिये पूछा कि क्या सचमुच 8वें CPC में पेंशन संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है? इसके जवाब में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ कहा कि यह बात गलत है. उन्होंने कहा, “8वां आयोग वेतन, भत्तों और पेंशन आदि से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सिफ़ारिशें देगा.” इस जवाब ने पेंशनभोगियों को राहत दी है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि पेंशन की समीक्षा भी आयोग की कार्यसूची में शामिल है. DA, DR को मूल वेतन में मर्ज करने का प्लान? इसके साथ ही, दोनों सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या सरकार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्लान बना रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को तत्काल राहत मिल सके? इस पर पंकज चौधरी ने दो टूक जवाब दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है. उन्होंने कहा, “वर्तमान में महंगाई भत्ता को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है.” जनवरी 2024 में जब DA 50 फीसदी तक पहुंच गया था, तब कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार से इस मर्जर की मांग की थी, क्योंकि इससे भविष्य की सैलरी और पेंशन दोनों बढ़ जाती हैं. लेकिन सरकार लगातार यह साफ करती रही है कि वह इस दिशा में कदम उठाने की योजना नहीं रखती. सांसदों का एक और सवाल था कि क्या 8वें वेतन आयोग के गठन के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है? इस पर मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की कि सरकार ने 03.11.2025 की तारीख वाला नोटिफिकेशन जारी करके गठन को मंजूरी दे दी है और इसके टर्म ऑफ रेफरेंस भी जारी कर दिए गए हैं. इसके साथ ही आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है. इसका मतलब है कि आयोग औपचारिक रूप से अपना काम शुरू कर चुका है और आने वाले समय में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई सिफ़ारिशों का रास्ता खुल जाएगा.

8th Pay Commission DA मर्जर पर वित्त मंत्रालय ने तोड़ी चुप्पी, एकीकरण से इनकार

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बहुप्रतीक्षित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central ) को लेकर चर्चाएं इन दिनों तेज हैं. सरकार द्वारा आयोग के गठन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद जहां कर्मचारियों को वेतन संशोधन की उम्मीद जगी थी, वहीं Terms of Reference (ToR) में कई अहम बिंदुओं की अस्पष्टता ने असंतोष को भी जन्म दिया है. इस बीच संसद में सरकार के ताजा जवाब ने कर्मचारियों की चिंताओं को और स्पष्ट कर दिया है. संसद में उठा मुद्दा, सरकार से मांगी गई थी स्थिति की जानकारी संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन, 1 दिसंबर को लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि क्या 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है और क्या बढ़ती महंगाई को देखते हुए महंगाई भत्ता (DA) को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है. इन सवालों का लिखित उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक प्रस्ताव (Resolution) जारी कर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित कर दिया है. इसके साथ ही भारत के राजपत्र (Gazette Notification) की प्रति भी सदन के पटल पर रखी गई. हालांकि, DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग पर सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत महंगाई भत्ता (DA/DR) को AICPI-IW सूचकांक के आधार पर हर छह महीने में संशोधित किया जाता रहेगा. ToR को लेकर क्यों नाराज हैं कर्मचारी संगठन? 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference जारी होने के बाद कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों ने कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उनका मानना है कि वर्तमान ToR, 7वें वेतन आयोग की तुलना में अधिक सीमित और अस्पष्ट है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग की शर्तों में पेंशनरों का स्पष्ट रूप से उल्लेख था, जबकि 8वें वेतन आयोग के ToR में यह बात साफ नहीं कही गई है. इससे यह आशंका पैदा हो रही है कि पेंशन संशोधन के मुद्दे को अपेक्षित महत्व नहीं मिलेगा. ToR में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या किसी अन्य तारीख से. इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो आगामी वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और अपनी वित्तीय योजना बना रहे हैं. DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग क्यों तेज थी? कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऊंची महंगाई के कारण कर्मचारियों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ा है. उनका तर्क है कि केवल छह महीने में DA संशोधन से महंगाई के प्रभाव की पूरी भरपाई नहीं हो पाती, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति लगातार घट रही है. इसी कारण DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी. आगे क्या? अब 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया शुरू करेगा, विभिन्न मंत्रालयों से आंकड़े जुटाएगा और कर्मचारी संगठनों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करेगा. लेकिन ToR को लेकर जारी असंतोष को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले महीनों में कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं.

सरकार का सख्त रुख: 8वें वेतन आयोग की इस मांग पर नहीं मिली मंजूरी

नई दिल्ली  8वें सेंट्रल पे कमीशन को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। साथ ही, महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दिया। कर्मचारी क्या मांग रहे हैं? केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि तीन दशकों में महंगाई अपने सबसे अधिक स्तर पर है। उनका तर्क है कि मौजूदा DA और DR (पेंशनर्स का भत्ता) रिटेल महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसीलिए यूनियनों की मांग है कि DA 50% होने पर इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए। यह मांग तब और मजबूत हो गई जब सरकार ने नवंबर में 8th CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। सरकार ने वायरल मैसेज को बताया फर्जी सोशल मीडिया पर हाल ही में एक संदेश वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया था कि फाइनेंस एक्ट 2025 के बाद DA बढ़ोतरी और पे कमीशन के फायदे बंद कर दिए जाएंगे, खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए।   किन कर्मचारियों पर हुआ नियम में बदलाव? सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल में CCS (पेंशन) रूल्स, 2021 के रूल 37 में किया गया बदलाव सिर्फ एक छोटे समूह से जुड़ा है। यह बदलाव उन PSU कर्मचारियों पर लागू है जिन्हें किसी गंभीर गलती या गलत काम के कारण नौकरी से निकाला जाता है।    ऐसे मामलों में उनके रिटायरमेंट लाभ जैसे पेंशन आदि जब्त किए जा सकते हैं। सरकार ने कहा कि यह संशोधन डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर और वित्त मंत्रालय की सलाह के बाद किया गया है, और इसका आम कर्मचारियों या रिटायर्ड पेंशनरों के DA/DR पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  

8th Pay Commission लागू होने पर बड़ा अपडेट: ToR के संकेतों से कर्मचारियों में बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली  सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए। हालांकि, इसके साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी और पेंशनर यूनियन का आरोप है कि ToR में उस तारीख का जिक्र ही नहीं है, जिस दिन से आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, जबकि 4th से 7th वेतन आयोग तक सभी की सिफारिशें हर 10 साल में 1 जनवरी से लागू होती रही हैं। यही कारण है कि अब आशंका जताई जा रही है कि 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की परंपरा टूट भी सकती है। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। अब तक माना जा रहा था कि 8वां वेतन आयोग स्वाभाविक रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन ToR में यह तारीख शामिल न होने से प्रश्न उठने लगे हैं। यूनियन और पेंशनर समूहों का कहना है कि भले ही सिफारिशें देरी से आई हों, लेकिन लागू होने की प्रभावी तारीख हमेशा 1 जनवरी ही रही है। इस बार तारीख का उल्लेख न होना एक संभावित नीतिगत बदलाव या देरी का संकेत माना जा रहा है। कौन कर रहा है विरोध? ToR जारी होते ही कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऐंड वर्कर्स (CCGEW) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS)। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ToR में मौजूद 'कमियों' पर आपत्ति जताई है और संशोधन की मांग की है। BPS की 7 बड़ी आपत्तियां और मांगें 17 नवंबर को भेजे गए विस्तृत पत्र में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने कई अहम मुद्दे उठाए। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं— 1. 1 जनवरी 2026 की तारीख स्पष्ट तौर पर शामिल की जाए BPS चाहता है कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी। 2. 'Unfunded Cost' शब्द हटाया जाए BPS का कहना है कि इस शब्द से लगता है कि पेंशन सरकार पर बोझ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पेंशन को पहले ही संवैधानिक अधिकार घोषित कर चुका है। 3. पेंशन समानता और संशोधन के स्पष्ट नियम सभी पेंशनरों के लिए तिथि की परवाह किए बिना संशोधन का एकसमान सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि पुराने और नए पेंशनरों का अंतर खत्म हो सके। 4. OPS–NPS–UPS की समीक्षा 2004 के बाद नियुक्त हुए 26 लाख से अधिक कर्मचारी NPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वां वेतन आयोग इन सभी प्रणालियों की समीक्षा करे और बेहतर विकल्प दे। 5. GDS और स्वायत्त निकायों को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को डाक तंत्र की रीढ़ बताते हुए BPS ने उन्हें 8th CPC में शामिल करने की मांग की। साथ ही स्वायत्त और सांविधिक निकायों को भी दायरे में लाने की अपील की। 6. 20% अंतरिम राहत महंगाई को देखते हुए BPS चाहता है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को तत्काल राहत के रूप में 20% अंतरिम राहत दी जाए। 7. CGHS में सुधार की मांग BPS ने इन सुधारों की मांग की— • CGHS को सभी स्वायत्त कर्मचारियों तक बढ़ाया जाए • जिला स्तर पर नए CGHS केंद्र खोले जाएं • इलाज कैशलेस और प्रक्रिया आसान हो • लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू हों BPS ने कहा कि ये सभी मांगें 'जनहित' में हैं। AIDEF और CCGEW: पेंशनरों को दायरे से बाहर रखने पर कड़ा विरोध AIDEF ने 4 नवंबर को वित्त मंत्री को पत्र लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30 साल सेवा दे चुके 69 लाख पेंशनर 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।” CCGEW ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा़, “ToR के कई हिस्सों में तुरंत संशोधन की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों के हित सुरक्षित रहें।” क्या सरकार 10 साल के वेतन आयोग चक्र में बदलाव की तैयारी में है? सबसे बड़ा सवाल यही है। कर्मचारी और पेंशनरों को लगता है कि तारीख का गायब होना, “Unfunded Cost” का उल्लेख और पेंशनरों को प्राथमिकता न देना…ये संकेत हो सकते हैं कि सरकार पारंपरिक 10-वर्षीय वेतन आयोग चक्र में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विरोध बढ़ता जा रहा है। इससे साफ है कि 8वें वेतन आयोग को 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी भी भ्रम बरकरार है।  

आठवें वेतन आयोग अपडेट: सरकारी नौकरी में भी प्राइवेट जैसा सैलरी और इनाम, जोर होगा Efficiency और Accountability पर

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है. जल्द ही 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू हो सकता है, और इसके साथ सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) के अनुसार, सरकार अब सरकारी नौकरियों की तनख्वाह को निजी क्षेत्र के बराबर लाने पर विचार कर रही है. इसका मकसद है कि सरकारी नौकरियां भी उतनी ही आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनें, जितनी निजी कंपनियों में होती हैं. अगर सरकार इन नई सिफारिशों को मंजूरी दे देती है, तो कर्मचारियों को निजी कंपनियों जैसा सैलरी स्ट्रक्चर मिल सकता है. इसमें खास जोर कार्यकुशलता (Efficiency), जवाबदेही (Accountability) और जिम्मेदारी (Responsibility) पर दिया जाएगा, ताकि हर विभाग में उत्पादकता (productivity) बढ़े और काम का बेहतर नतीजा सामने आए. आयोग को दी गई बड़ी जिम्मेदारी इस आयोग को ऐसा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जो कुशल और प्रतिभाशाली लोगों को सरकारी क्षेत्र में काम करने के लिए आकर्षित करे. अब सरकार चाहती है कि सरकारी नौकरी को सिर्फ “सुरक्षित रोजगार” नहीं, बल्कि एक ऐसा करियर माना जाए, जिसमें तरक्की, अच्छे वेतन और विकास के अवसर हों. वित्त मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, आयोग यह मूल्यांकन करेगा कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतनमान को किस तरह निजी क्षेत्र के लेवल के करीब लाया जा सकता है. खासकर उन पदों के लिए जहां तकनीकी विशेषज्ञता या स्पेशलाइज्ड नॉलेज की जरूरत होती है. इसका मतलब यह हो सकता है कि आईटी (IT), डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics), इंजीनियरिंग (Engineering), विज्ञान (Science) और प्रशासन (Administration) जैसे क्षेत्रों के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा किया जा सकता है. इससे सरकार को न केवल कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि युवा पेशेवरों को भी सरकारी नौकरियों की ओर आकर्षित किया जा सकेगा. रिजल्ट देने वालों को मिलेगा बड़ा इनाम नया सैलरी स्ट्रक्चर ऐसा होगा जो रिजल्ट पर आधारित (Result-oriented) होगा, जिसमें कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन (Performance) के अनुसार इनाम और पदोन्नति मिलेगी. इससे सरकारी कामकाज का कल्चर अधिक आधुनिक और पारदर्शी बन सकेगा. प्राइवेट सेक्टर में भी इसी आधार पर पदोन्नति होती है और सैलरी में इजाफा होता है. सबसे खास बात यह है कि 8वें वेतन आयोग में परफॉर्मेंस-बेस्ड बोनस सिस्टम (Performance-Linked Bonus) की सिफारिश की जा सकती है. यानी अब हर कर्मचारी को समान वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी, बल्कि जो कर्मचारी मेहनत करेंगे और इनोवेशन दिखाएंगे, उन्हें ज्यादा मिलने की संभावना होगी. 7वें वेतन आयोग का फोकस सैलरी स्ट्रक्चर को सरल और संतुलित बनाना था, जबकि इस बार 8वां आयोग मेरिट (Merit) और कंपटीशन (Competition) पर आधारित ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है. अगर यह नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू हो जाता है, तो भारत में सरकारी नौकरियों की छवि पूरी तरह बदल सकती है. अब सरकारी नौकरी को सिर्फ स्थायी और सुरक्षित मानने की बजाय, लोग इसे एक बेहतर, चुनौतीपूर्ण और सम्मानजनक करियर विकल्प के रूप में देखेंगे.

सरकारी कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी? OPS पर 8th Pay Commission ने बढ़ाई उम्मीद

नई दिल्ली  केंद्रीय और राज्य सरकारों के लाखों कर्मचारी, भारतीय सशस्त्र बलों को छोड़कर, लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू किया जाए। दरअसल, जनवरी 2004 में केंद्र सरकार ने नई नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) लागू की थी, जिससे दशकों पुरानी गारंटीड और गैर-योगदान आधारित OPS को समाप्त कर दिया गया। OPS बहाली की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 को एक नई पेंशन योजना यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) की शुरुआत की। यह योजना NPS और OPS दोनों की विशेषताओं का मिश्रण है। UPS में कर्मचारियों और सरकार दोनों का योगदान रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे NPS में होता है। साथ ही, UPS न्यूनतम गारंटीड पेंशन भी प्रदान करती है, बशर्ते कर्मचारी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करे। सरकार का कहना है कि UPS से कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी भी मिलेगी और सरकारी वित्तीय ढांचे पर अत्यधिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। OPS फिर बनी प्रमुख मांग इस साल जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों से सुझाव मांगे। इन सुझावों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली प्रमुख मांगों में से एक रही। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि NPS के तहत पेंशन 'बाजार पर निर्भर' है और निश्चित नहीं है, जबकि OPS में जीवनभर गारंटीड पेंशन मिलती थी। क्या है सरकार का रुख हालांकि, केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि OPS की वापसी की कोई संभावना नहीं है। हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक (जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की) में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस(ToR) को मंजूरी दी गई। 8वें वेतन आयोग की शर्तों में छिपा संकेत सरकार द्वारा मंजूर किए गए Terms के अनुसार, 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर देगा। 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में “non-contributory pension” का ज़िक्र सरकार की यही नीति दर्शाता है कि पुरानी पेंशन योजना अब अतीत का हिस्सा बन चुकी है। आयोग को देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, विकास व्यय और कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन जैसे कारकों को ध्यान में रखना होगा। इसका मतलब साफ है कि आयोग उन योजनाओं पर विचार नहीं करेगा जिनसे राजकोषीय संतुलन बिगड़ सकता है और OPS ठीक वैसी ही एक योजना है। OPS अब इतिहास केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि OPS की वापसी नहीं होगी। हालांकि कुछ राज्य सरकारें जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड (गैर-एनडीए शासित राज्य) अपने स्तर पर OPS बहाल कर चुकी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे राजकोषीय रूप से अनुचित बताया है। वित्त मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने कई मौकों पर कहा है कि OPS अब केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू नहीं की जाएगी और NPS तथा UPS ही भविष्य की पेंशन प्रणाली रहेंगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से किसकी सैलरी होगी सबसे पहले बढ़ी?

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को आखिरकार मंजूरी मिल चुकी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयोग के लिए संदर्भ की शर्तों को मंजूरी दे दी है. अब यह नई वेतन संरचना 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है. इसी बीच आइए जानते हैं कि 8वें वेतन आयोग का सबसे पहले किन सरकारी कर्मचारियों को फायदा होगा. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सबसे पहले लाभ  आठवें वेतन आयोग का सबसे पहला लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा. इसके लागू होते ही 50 लाख से ज्यादा कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी में सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी. इनमें भारतीय रेलवे, आयकर, डाक विभाग और सीमा शुल्क जैसे कुछ बड़ी विभागों के कर्मचारी शामिल हैं.  सशस्त्र बल और अर्धसैनिक बल के कर्मचारी शामिल  इसी के साथ भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मचारी भी आठवें वेतन आयोग का लाभ उठा पाएंगे. इसमें सिर्फ अधिकारी और सैनिक ही शामिल नहीं हैं, बल्कि बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आइटीबीपी और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों में सेवारत कर्मचारी भी शामिल हैं. आपको बता दें कि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इन बालों के वेतनमान नए फिटमेंट फैक्टर के मुताबिक एडजेस्ट किए जाएंगे.  केंद्रीय संस्थानों और स्वायत्त निकायों के लिए लाभ  मंत्रालयों और रक्षा बलों के अलावा कई केंद्रीय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को भी इस नए वेतन ढांचे का फायदा होगा. इसमें आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस, यूजीसी, आईसीएआर और सीएसआईआर शामिल हैं. इसी के साथ अलग-अलग सेक्टर में काम करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को भी आठवें वेतन आयोग का फायदा होगा. इन कर्मचारियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी हो सकती है. क्या हो सकता है फिटमेंट फैक्टर  आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.83 और 2.46 के बीच रहने की उम्मीद की जा रही है. यानी कि यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन ₹20000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.5 पर सेट है तो नया मूल वेतन 20000×2.5=50000 हो जाएगा. इस वृद्धि के बाद एचआरए और डीए जैसे भत्तों पर भी प्रभाव पड़ेगा. इसके बाद टेक होम वेतन और भी ज्यादा हो जाएगा. हालांकि आपको बता दें कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर और वेतन स्लैब इन्फ्लेशन, जीवन यापन की लागत और सरकारी राजस्व का मूल्यांकन करने के बाद ही आयोग द्वारा तय किए जाएंगे. केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा. अनुमानों के मुताबिक कुल वेतन में 30% से 34% तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है.

केंद्र ने दी 8वें वेतन आयोग को हरी झंडी, जानें कब शुरू होगा लाभ

नई दिल्ली 8th Pay Commission: केंद्र सरकार के 1.2 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने आखिरकार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। लगभग 10 महीने बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai) करेंगी। पैनल में दो अन्य सदस्य होंगे और इसे 18 महीनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपनी होगी, यानी आयोग अप्रैल 2027 तक अपनी सिफारिशें पेश कर सकता है। कर्मचारियों की उम्मीदें और हकीकत हालांकि सरकारी कर्मचारी वेतन वृद्धि की जल्दी उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में 2028 तक का समय लग सकता है। पिछले दो वेतन आयोगों (6वें और 7वें) की प्रक्रिया को देखें तो उनके गठन से लेकर सिफारिशों के लागू होने तक 22 से 28 महीने का समय लगा था। 6वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: जुलाई 2006 (UPA-1 सरकार) – ToR की मंजूरी: अक्टूबर 2006 – रिपोर्ट सौंपी: मार्च 2008 (18 महीने बाद) – कैबिनेट की मंजूरी: अगस्त 2008 – कुल अवधि: लगभग 22 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2006 से प्रभावी रूप से लागू की गईं। 7वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: सितंबर 2013 (UPA-2) – ToR मंजूरी: फरवरी 2014 – रिपोर्ट सौंपी: नवंबर 2015 (18 महीने बाद) – मंजूरी: जून 2016 (NDA सरकार) – कुल अवधि: लगभग 28 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी की गईं। इन दोनों आयोगों के अनुभवों के अनुसार, ToR मंजूरी से लेकर वेतन संशोधन लागू होने तक लगभग 2 से 2.5 वर्ष का समय लगता है। 8वें वेतन आयोग की संभावित समयसीमा 8वें वेतन आयोग की घोषणा 16 जनवरी 2025 को की गई थी, लेकिन इसका ToR 28 अक्टूबर 2025 को ही मंजूर किया गया। अब आयोग को 18 महीनों में रिपोर्ट सौंपनी है, यानी यह अप्रैल 2027 तक पूरी हो सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिससे वास्तविक वेतन संशोधन 2028 के प्रारंभिक महीनों में लागू हो सकता है। आयोग को मिले मुख्य दायित्व केंद्र सरकार द्वारा मंजूर ToR के अनुसार 8वां वेतन आयोग निम्न बिंदुओं पर अध्ययन और सिफारिश करेगा — 1. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा और संशोधन। 2. पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में बदलाव की सिफारिश। 3. वेतन समानता (Pay Parity) और वेतन संरचना के तर्कसंगतकरण के उपाय। 4. भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार। 5. कार्य परिस्थितियों की तुलना सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र से। 6. सिफारिशों का असर राजकोषीय स्थिति और आर्थिक संतुलन पर। 7. पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मूल्यांकन, क्योंकि कई राज्य भी केंद्र के वेतन ढांचे को अपनाते हैं। किसे मिलेगा लाभ? 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सीधे तौर पर 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रभावित करेंगी। इसके अलावा, स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) और सांविधिक संगठनों के कर्मचारी, जो केंद्र के वेतनमान को अपनाते हैं, उन्हें भी लाभ मिलेगा। राज्य सरकारें भी बाद में अपने-अपने संशोधित संस्करण लागू करती हैं, जिससे लाखों अतिरिक्त कर्मचारियों को भी परोक्ष रूप से फायदा होगा। बता दें कि अब जब ToR को मंजूरी मिल चुकी है, तो आयोग औपचारिक रूप से काम शुरू करेगा। अगले 18 महीनों में यह विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञ संस्थानों से परामर्श लेकर रिपोर्ट तैयार करेगा।