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रेलवे कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से पहले सैलरी बढ़ोतरी का रास्ता साफ, जानिए क्या है नई योजना

नईदिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने से पहले ही भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं। वेतन और पेंशन पर भविष्य में पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए रेलवे अभी से खर्च घटाने, बचत बढ़ाने और आय के नए स्रोत मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। संकेत साफ हैं कि 8वें वेतन आयोग के लागू होते ही रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग का गठन जनवरी 2025 में हुआ था और 28 अक्टूबर 2025 को इसके टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए गए। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में जनवरी 2026 से पहले रिपोर्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी सीमित समय को देखते हुए रेलवे ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। 7वें वेतन आयोग का अनुभव रेलवे को 7वें वेतन आयोग का असर अब भी याद है। साल 2016 में आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में 14% से 26% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे रेलवे के वेतन और पेंशन खर्च में सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब आंतरिक आकलन के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के बाद यह बोझ बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बढ़ते खर्च से निपटने की रणनीति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही ठोस योजना बनाई जा रही है।     ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर     फ्रेट यानी माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने की रणनीति     आंतरिक संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग रेलवे की मौजूदा वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 98.90% रहा, जबकि इस दौरान शुद्ध आय 1,341.31 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेश्यो को घटाकर 98.43% करने का लक्ष्य रखा गया है और नेट रेवेन्यू 3,041.31 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और कर्ज से होगी बड़ी बचत पूरे रेल नेटवर्क के इलेक्ट्रिफिकेशन से हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2027-28 से रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को किए जाने वाले भुगतान में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा बजटीय सहायता से पूरा किया गया है। फिटमेंट फैक्टर बना अहम मुद्दा कर्मचारी संगठनों की मांगें भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती हैं। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जबकि अब यूनियनें 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो वेतन खर्च में 22% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। बजट बढ़ोतरी से मिला भरोसा इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रेलवे आश्वस्त नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन के लिए बजट बढ़ाकर 1.28 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल 1.17 लाख करोड़ रुपये था। पेंशन मद में भी अधिक फंड आवंटित किया गया है। रेलवे का मानना है कि सही योजना, बढ़ती आय और बेहतर प्रबंधन के जरिए 8वें वेतन आयोग के असर को संतुलित किया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ 12.5 लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा।  

पंकज चौधरी ने लोकसभा में किया 8वें वेतन आयोग पर स्पष्टीकरण, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पर अहम जानकारी

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचार‍ियों और पेंशनरों के बीच काफी उत्‍सुकता है. सोशल मीड‍िया पर भी 8वें वेतन आयोग के लागू होने को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं. मसलन 1 जनवरी 2026 से इसे लागू कर द‍िया जाएगा और डीए को बेस‍िक सैलरी में मर्ज कर द‍िया जाएगा. लेक‍िन इन सभी अटकलों को साफ करते हुए  लोकसभा में फाइनेंस स्‍टेट म‍िन‍िस्‍टर पंकज चौधरी ने यह स्‍पष्‍ट कर द‍िया क‍ि फ‍िलहाल 8वें वेतन आयोग को लागू करने की कोई तारीख पक्‍की नहीं हुई है. और ना ही डीए और बेस‍िक सैलरी को मर्ज करने का कोई फैसला ल‍िया गया है. 8वें वेतन आयोग की स‍िफार‍िशों पर जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की हेडिंग वाला कमीशन अभी काम कर रहा है. बजट में हो सकता है अहम ऐलान हालांक‍ि अपने जवाब में पंकज चौधरी ने एक बात स्‍पष्‍ट कही क‍ि 8वें वेतन आयोग के तहत लगभग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर के वेतन में वृद्ध‍ि के ल‍िए फंड का भी इंतजाम करना होगा. ल‍िहाजा समझने वाली बात ये है क‍ि अगर बात बजट की है तो उसका ऐलान भी बजट में हो सकता है. उम्‍मीद है क‍ि इस बार 8वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचार‍ियों और पेंशनरों की सैलरी के ल‍िए फंड पर बजट के दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है. 8वें वेतन आयोग पर अब तक का अपडेट क्‍या है? भारत सरकार ने यह कन्फर्म किया है कि 8वां सेंट्रल पे कमीशन (CPC) फॉर्मल तौर पर बन गया है और इसका काम चल रहा है. हालांक‍ि 1 जनवरी 2026 इसके लागू होने की तारीख के लिए कोई वादा नहीं किया. सोमवार को लोकसभा में फाइनेंस स्टेट मिनिस्टर पंकज चौधरी के एक लिखित जवाब में कहा है क‍ि 8वें CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को ऑफिशियली 3 नवंबर 2025 को नोटिफाई किया गया था. इससे ये पता चलता है क‍ि पे पैनल अपना काम शुरू कर चुका है. लेक‍िन साथ ही यह भी कहा क‍ि 8वां वेतन आयोग लागू करने से पहले कमीशन को देश के मौजूदा आर्थिक हालात, फिस्कल समझदारी की जरूरत और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले फाइनेंशियल असर को भी ध्‍यान रखना होगा. सरकार ने संसद को यह भी भरोसा दिलाया है कि मानी गई सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड का इंतजाम किया जाएगा. मंत्री ने कन्फर्म है किया कि 8th CPC में लगभग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर शाम‍िल होंगे. बता दें क‍ि सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सैलरी, अलाउंस और पेंशन स्ट्रक्चर में बदलाव की सिफारिश करने का काम जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की हेडिंग वाले कमीशन को सौंपा गया है.

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वां वेतन आयोग कब लागू होगा, सरकार ने किया साफ

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने इस नए वेतन आयोग का गठन तो कर दिया है लेकिन अब तक इसे लागू किए जाने की तिथि नहीं बताई गई है। दरअसल, 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। ऐसे में नए वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अब सरकार की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई है। हाल ही में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि 8वें वेतन आयोग के समय और फंडिंग पर बाद में फैसला लिया जाएगा। इसका मतलब है कि 1 जनवरी 2026 से वेतन आयोग लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में पंकज चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी अधिसूचित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आयोग अपनी रिपोर्ट गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपेगा। मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार के लगभग 50.14 लाख कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी हैं, जिन पर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर पड़ेगा। 8वां वेतन आयोग बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में की थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को आयोग की कमान सौंपी गई है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 18 महीनों में देगा, जबकि समय-समय पर अंतरिम रिपोर्टें भी देता रहेगा। मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति देसाई को आयोग का प्रमुख बनाने के साथ भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), बेंगलूर के प्रोफेसर पुलक घोष को अंशकालिक सदस्य और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन को सदस्य-सचिव बनाने का भी फैसला किया। आमतौर पर हर 10 वर्ष के अंतराल पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं। इस परिपाटी को देखते हुए आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के भी जनवरी, 2026 से लागू किए जाने की संभावना है।  

8वें वेतन आयोग में देरी, कर्मचारियों को एरियर मिलने की संभावना 2026 से, रिपोर्ट 2027 तक हो सकती है

नई दिल्ली  31 दिसंबर 2025 को 7वां वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू किया जाना है, जिसकी संभावना कम है, क्योंकि केन्द्र की मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफ्रेंस को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है, ऐसे में आयोग अप्रैल 2027 तक केन्द्र सरकार को सिफारिशें सौंपेगा और फिर सारे पहलुओं पर विचार करते हुए इसे अक्टूबर नवंबर 2027 तक लागू किया जा सकेगा, ऐसे में जनवरी 2026 से एरियर मिलेगा या नहीं, यह सवाल चर्चाओं में बना हुआ है। इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है ले्किन संकेत जरूर मिले है कि एरियर मिल सकता है।आईए जानते है विस्तार से… 1 जनवरी 2026 से मिलेगा कर्मचारियों को एरियर?     वर्तमान में केंद्र सरकार 50 लाख कर्मचारी और 68.72 लाख पेंशनर्स है, जिन्हें 8वें वेतन आयोग का लाभ मिलना है लेकिन 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों और सांसदों द्वारा इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में चार सांसदों ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की तारीख के बारे में पूछा।     राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि इसे लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी।आयोग की स्वीकृत सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार उचित धन का प्रावधान करेगी।बता दे कि 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना और नवंबर 2015 में रिपोर्ट दी गई। इसके बाद करीब 2.5 साल बाद जून 2016 में इसे लागू किया गया लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2016 से एरियर दिया गया।कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग में भी एरियर दिया जा सकता है, हालांकि सरकार की तरफ से अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। नए वेतन आयोग में डीए होगा शून्य? फिटमेंट फैक्टर पर पड़ेगा असर?     आमतौर पर वेतन आयोगों की अनुशंसाएं प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर लागू की जाती हैं। फरवरी 2014 में 7वें वेतन आयोग का गठन हुआ था और 1 जनवरी 2016 से उसकी सिफारिशें लागू की गई थीं।इसके लागू होते ही 2.57 फिटमेंट फैक्टर होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 7000 हजार रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये (14.3%) हो गई थी।अगर 7वें वेतन आयोग के फॉर्मूले पर 8वां वेतन आयोग लागू किया जाता है तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 34560 या 51,480 रुपये हो सकती है। हालांकि कितनी सैलरी बढ़ेगी यह फिटमेंट फैक्‍टर और DA पर निर्भर करेगा।     7वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 था, जो 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़कर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है और डीए शून्य हो जाएगा क्योंकि हर वेतन आयोग के लागू होने पर डीए ‘0’ हो जाता है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत है जो जुलाई से दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा। जनवरी 2026 में इसके 60% तक जाने की उम्मीद है।विशेषज्ञों की मानें तो जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता तब तक DA बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में ही बढ़ेगा और आयोग के लागू होने के बाद मौजूदा DA बेसिक पे में मर्ज हो जाएगा, जिससे वेतन संरचना में बदलाव आएगा । 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी?     7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर के कारण वेतन और पेंशन में वृद्धि के बाद केंद्रीय कर्माचारियों की न्यूनतम सैलरी 7,000 से बढ़कर 18,000 रूपये हो गई थी। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है, जिससे वेतन में 30-50 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।अगर 1.92 फिटमेंट फैक्टर होता है तो वेतन में 92% की वृद्धि यानि 18,000 रुपये से बढ़कर 34,560 रुपये हो जाएगा।     2.47 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया, तो 18,000 रुपये का बेसिक वेतन बढ़कर लगभग 44,460 रुपये हो सकता है।1.83 फिटमेंट फैक्टर होने पर बेसिक वेतन करीब 32,940 रुपये और 1.86 होने पर लगभग 33,480 रुपये तक हो सकता है। 2.86 फिटमेंट होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 51,480 रुपये हो सकती है।     महंगाई राहत पेंशन पर एक निश्चित फीसदी के रूप में दी जाती है।जब पेंशन बढ़ती है, तो DR की वैल्यू खुद बढ़ जाती है।पुरानी पेंशन 20,000 रुपए है और DR 20% पर 4,000 रुपए और नई पेंशन 30,000 रुपए है और DR 20% तो 6,000 रुपए मिलेगी।इससे साफ है कि जितनी ज्यादा पेंशन बढ़ेगी, उतनी ज्यादा ही महंगाई राहत बढ़ेगी। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.86 तक जाता है, तो 25,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर 71,500 हो सकती है और कुल सैलरी (DA और HRA समेत) 90,000 से ज्यादा पहुंच सकती है। आठवें वेतन आयोग से किसे लाभ होगा?     केंद्र सरकार के कर्मचारी     रक्षा कर्मी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कर्मचारी     रेलवे कर्मचारी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CPC) को अपनाने वाले स्वायत्त और वैधानिक निकाय     केंद्र सरकार के पेंशनभोगी  

8वें वेतन आयोग पर सरकार का महत्वपूर्ण बयान, पेंशनर्स और कर्मचारियों को कब से मिलेगा लाभ

नई दिल्‍ली.  8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने में अब सिर्फ 17 महीने का समय बचा है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बार फिर आयोग की शर्तों को लेकर जारी कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में 8वें वेतन आयोग को लेकर स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. उन्‍होंने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड के इंतजाम को लेकर भी जवाब दिए. संसद में चर्चा के दौरान वित्‍त राज्‍यमंत्री ने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की संख्‍या करीब 50.14 लाख है, जबकि 69 लाख के आसपास पेंशनर्स भी हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी को फायदा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस और इसके लागू होने की तारीख जैसे सवालों के भी जवाब दिए हैं. उनसे पूछा गया कि 8वें वेतन आयोग के लिए वित्‍तवर्ष 2026-27 के बजट में फंड आवंटन को लेकर क्‍या योजना है. क्‍या सरकार पेंशनधारकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करेगी. कबसे लागू होगा 8वां वेतन आयोग जबसे 8वें वेतन आयोग की घोषणा हुई है, सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि इसे लागू कब से किया जाएगा. संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तिथि के बारे में घोषणा बाद में की जाएगी. फिलहाल आयोग को अपने गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों हर हाल में पेश करनी होगी. 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समात्‍प हो जाएगा, लेकिन अभी तक 8वें के लागू करने की तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. आयोग बनने के बाद अब तक क्‍या हुआ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी फंड पर समय के साथ फैसला किया जाएगा. इसके लिए पहले से तय प्रक्रिया का भी पालन किया जाएगा. 41 दिन पहले 8वें वेतन आयोग को बनाने के बाद से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार ने इसके टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी 3 नवंबर, 2025 को जारी किया जा चुका है. किस आधार पर सैलरी तय करेगा आयोग पे कमीशन मूल वेतन के स्‍ट्रक्‍चर, पेंशन, अलाउंस और अन्‍य सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. उसका मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स को उचित भुगतान दिलाना है. आयोग के सामने फिटमेंट फैक्‍टर में बदलाव करने की भी चुनौती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में भी बदलाव आएगा. सरकार ने आयोग के गठन के बाद से अब तक कई कदम उठाए हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर सीधे तौर पर असर डालने वाला है.  

सरकार का जवाब आया: 8वें वेतन आयोग के बाद पेंशन पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली कई महीनों से केन्द्र सरकार के पेंशनभोगी और कर्मचारी इस चिंता में थे कि क्या 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) उनकी पेंशन को फिर से तय किया जाएगा या नहीं. सरकार ने जैसे ही 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किए, अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पेंशन संशोधन को भी इसमें साफ-साफ शामिल किया जाए. आम लोगों में भी भ्रम फैल गया था कि शायद पेंशन की समीक्षा इसमें नहीं है. इसी उलझन को दूर करते हुए वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ कर दिया है कि 8वां वेतन आयोग पेंशन से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सिफ़ारिशें देगा. यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाखों पेंशनर्स लंबे समय से किसी स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहे थे. राज्यसभा में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने अनस्टार्ड प्रश्न के जरिये पूछा कि क्या सचमुच 8वें CPC में पेंशन संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है? इसके जवाब में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ कहा कि यह बात गलत है. उन्होंने कहा, “8वां आयोग वेतन, भत्तों और पेंशन आदि से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सिफ़ारिशें देगा.” इस जवाब ने पेंशनभोगियों को राहत दी है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि पेंशन की समीक्षा भी आयोग की कार्यसूची में शामिल है. DA, DR को मूल वेतन में मर्ज करने का प्लान? इसके साथ ही, दोनों सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या सरकार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्लान बना रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को तत्काल राहत मिल सके? इस पर पंकज चौधरी ने दो टूक जवाब दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है. उन्होंने कहा, “वर्तमान में महंगाई भत्ता को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है.” जनवरी 2024 में जब DA 50 फीसदी तक पहुंच गया था, तब कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार से इस मर्जर की मांग की थी, क्योंकि इससे भविष्य की सैलरी और पेंशन दोनों बढ़ जाती हैं. लेकिन सरकार लगातार यह साफ करती रही है कि वह इस दिशा में कदम उठाने की योजना नहीं रखती. सांसदों का एक और सवाल था कि क्या 8वें वेतन आयोग के गठन के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है? इस पर मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की कि सरकार ने 03.11.2025 की तारीख वाला नोटिफिकेशन जारी करके गठन को मंजूरी दे दी है और इसके टर्म ऑफ रेफरेंस भी जारी कर दिए गए हैं. इसके साथ ही आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है. इसका मतलब है कि आयोग औपचारिक रूप से अपना काम शुरू कर चुका है और आने वाले समय में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई सिफ़ारिशों का रास्ता खुल जाएगा.

8th Pay Commission DA मर्जर पर वित्त मंत्रालय ने तोड़ी चुप्पी, एकीकरण से इनकार

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बहुप्रतीक्षित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central ) को लेकर चर्चाएं इन दिनों तेज हैं. सरकार द्वारा आयोग के गठन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद जहां कर्मचारियों को वेतन संशोधन की उम्मीद जगी थी, वहीं Terms of Reference (ToR) में कई अहम बिंदुओं की अस्पष्टता ने असंतोष को भी जन्म दिया है. इस बीच संसद में सरकार के ताजा जवाब ने कर्मचारियों की चिंताओं को और स्पष्ट कर दिया है. संसद में उठा मुद्दा, सरकार से मांगी गई थी स्थिति की जानकारी संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन, 1 दिसंबर को लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि क्या 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है और क्या बढ़ती महंगाई को देखते हुए महंगाई भत्ता (DA) को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है. इन सवालों का लिखित उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक प्रस्ताव (Resolution) जारी कर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित कर दिया है. इसके साथ ही भारत के राजपत्र (Gazette Notification) की प्रति भी सदन के पटल पर रखी गई. हालांकि, DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग पर सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत महंगाई भत्ता (DA/DR) को AICPI-IW सूचकांक के आधार पर हर छह महीने में संशोधित किया जाता रहेगा. ToR को लेकर क्यों नाराज हैं कर्मचारी संगठन? 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference जारी होने के बाद कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों ने कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उनका मानना है कि वर्तमान ToR, 7वें वेतन आयोग की तुलना में अधिक सीमित और अस्पष्ट है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग की शर्तों में पेंशनरों का स्पष्ट रूप से उल्लेख था, जबकि 8वें वेतन आयोग के ToR में यह बात साफ नहीं कही गई है. इससे यह आशंका पैदा हो रही है कि पेंशन संशोधन के मुद्दे को अपेक्षित महत्व नहीं मिलेगा. ToR में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या किसी अन्य तारीख से. इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो आगामी वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और अपनी वित्तीय योजना बना रहे हैं. DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग क्यों तेज थी? कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऊंची महंगाई के कारण कर्मचारियों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ा है. उनका तर्क है कि केवल छह महीने में DA संशोधन से महंगाई के प्रभाव की पूरी भरपाई नहीं हो पाती, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति लगातार घट रही है. इसी कारण DA को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी. आगे क्या? अब 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया शुरू करेगा, विभिन्न मंत्रालयों से आंकड़े जुटाएगा और कर्मचारी संगठनों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करेगा. लेकिन ToR को लेकर जारी असंतोष को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले महीनों में कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं.

सरकार का सख्त रुख: 8वें वेतन आयोग की इस मांग पर नहीं मिली मंजूरी

नई दिल्ली  8वें सेंट्रल पे कमीशन को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। साथ ही, महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दिया। कर्मचारी क्या मांग रहे हैं? केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि तीन दशकों में महंगाई अपने सबसे अधिक स्तर पर है। उनका तर्क है कि मौजूदा DA और DR (पेंशनर्स का भत्ता) रिटेल महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसीलिए यूनियनों की मांग है कि DA 50% होने पर इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए। यह मांग तब और मजबूत हो गई जब सरकार ने नवंबर में 8th CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। सरकार ने वायरल मैसेज को बताया फर्जी सोशल मीडिया पर हाल ही में एक संदेश वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया था कि फाइनेंस एक्ट 2025 के बाद DA बढ़ोतरी और पे कमीशन के फायदे बंद कर दिए जाएंगे, खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए।   किन कर्मचारियों पर हुआ नियम में बदलाव? सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल में CCS (पेंशन) रूल्स, 2021 के रूल 37 में किया गया बदलाव सिर्फ एक छोटे समूह से जुड़ा है। यह बदलाव उन PSU कर्मचारियों पर लागू है जिन्हें किसी गंभीर गलती या गलत काम के कारण नौकरी से निकाला जाता है।    ऐसे मामलों में उनके रिटायरमेंट लाभ जैसे पेंशन आदि जब्त किए जा सकते हैं। सरकार ने कहा कि यह संशोधन डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर और वित्त मंत्रालय की सलाह के बाद किया गया है, और इसका आम कर्मचारियों या रिटायर्ड पेंशनरों के DA/DR पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  

8th Pay Commission लागू होने पर बड़ा अपडेट: ToR के संकेतों से कर्मचारियों में बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली  सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए। हालांकि, इसके साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी और पेंशनर यूनियन का आरोप है कि ToR में उस तारीख का जिक्र ही नहीं है, जिस दिन से आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, जबकि 4th से 7th वेतन आयोग तक सभी की सिफारिशें हर 10 साल में 1 जनवरी से लागू होती रही हैं। यही कारण है कि अब आशंका जताई जा रही है कि 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की परंपरा टूट भी सकती है। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। अब तक माना जा रहा था कि 8वां वेतन आयोग स्वाभाविक रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन ToR में यह तारीख शामिल न होने से प्रश्न उठने लगे हैं। यूनियन और पेंशनर समूहों का कहना है कि भले ही सिफारिशें देरी से आई हों, लेकिन लागू होने की प्रभावी तारीख हमेशा 1 जनवरी ही रही है। इस बार तारीख का उल्लेख न होना एक संभावित नीतिगत बदलाव या देरी का संकेत माना जा रहा है। कौन कर रहा है विरोध? ToR जारी होते ही कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऐंड वर्कर्स (CCGEW) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS)। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ToR में मौजूद 'कमियों' पर आपत्ति जताई है और संशोधन की मांग की है। BPS की 7 बड़ी आपत्तियां और मांगें 17 नवंबर को भेजे गए विस्तृत पत्र में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने कई अहम मुद्दे उठाए। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं— 1. 1 जनवरी 2026 की तारीख स्पष्ट तौर पर शामिल की जाए BPS चाहता है कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी। 2. 'Unfunded Cost' शब्द हटाया जाए BPS का कहना है कि इस शब्द से लगता है कि पेंशन सरकार पर बोझ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पेंशन को पहले ही संवैधानिक अधिकार घोषित कर चुका है। 3. पेंशन समानता और संशोधन के स्पष्ट नियम सभी पेंशनरों के लिए तिथि की परवाह किए बिना संशोधन का एकसमान सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि पुराने और नए पेंशनरों का अंतर खत्म हो सके। 4. OPS–NPS–UPS की समीक्षा 2004 के बाद नियुक्त हुए 26 लाख से अधिक कर्मचारी NPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वां वेतन आयोग इन सभी प्रणालियों की समीक्षा करे और बेहतर विकल्प दे। 5. GDS और स्वायत्त निकायों को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को डाक तंत्र की रीढ़ बताते हुए BPS ने उन्हें 8th CPC में शामिल करने की मांग की। साथ ही स्वायत्त और सांविधिक निकायों को भी दायरे में लाने की अपील की। 6. 20% अंतरिम राहत महंगाई को देखते हुए BPS चाहता है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को तत्काल राहत के रूप में 20% अंतरिम राहत दी जाए। 7. CGHS में सुधार की मांग BPS ने इन सुधारों की मांग की— • CGHS को सभी स्वायत्त कर्मचारियों तक बढ़ाया जाए • जिला स्तर पर नए CGHS केंद्र खोले जाएं • इलाज कैशलेस और प्रक्रिया आसान हो • लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू हों BPS ने कहा कि ये सभी मांगें 'जनहित' में हैं। AIDEF और CCGEW: पेंशनरों को दायरे से बाहर रखने पर कड़ा विरोध AIDEF ने 4 नवंबर को वित्त मंत्री को पत्र लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30 साल सेवा दे चुके 69 लाख पेंशनर 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।” CCGEW ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा़, “ToR के कई हिस्सों में तुरंत संशोधन की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों के हित सुरक्षित रहें।” क्या सरकार 10 साल के वेतन आयोग चक्र में बदलाव की तैयारी में है? सबसे बड़ा सवाल यही है। कर्मचारी और पेंशनरों को लगता है कि तारीख का गायब होना, “Unfunded Cost” का उल्लेख और पेंशनरों को प्राथमिकता न देना…ये संकेत हो सकते हैं कि सरकार पारंपरिक 10-वर्षीय वेतन आयोग चक्र में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विरोध बढ़ता जा रहा है। इससे साफ है कि 8वें वेतन आयोग को 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी भी भ्रम बरकरार है।  

आठवें वेतन आयोग अपडेट: सरकारी नौकरी में भी प्राइवेट जैसा सैलरी और इनाम, जोर होगा Efficiency और Accountability पर

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है. जल्द ही 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू हो सकता है, और इसके साथ सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) के अनुसार, सरकार अब सरकारी नौकरियों की तनख्वाह को निजी क्षेत्र के बराबर लाने पर विचार कर रही है. इसका मकसद है कि सरकारी नौकरियां भी उतनी ही आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनें, जितनी निजी कंपनियों में होती हैं. अगर सरकार इन नई सिफारिशों को मंजूरी दे देती है, तो कर्मचारियों को निजी कंपनियों जैसा सैलरी स्ट्रक्चर मिल सकता है. इसमें खास जोर कार्यकुशलता (Efficiency), जवाबदेही (Accountability) और जिम्मेदारी (Responsibility) पर दिया जाएगा, ताकि हर विभाग में उत्पादकता (productivity) बढ़े और काम का बेहतर नतीजा सामने आए. आयोग को दी गई बड़ी जिम्मेदारी इस आयोग को ऐसा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जो कुशल और प्रतिभाशाली लोगों को सरकारी क्षेत्र में काम करने के लिए आकर्षित करे. अब सरकार चाहती है कि सरकारी नौकरी को सिर्फ “सुरक्षित रोजगार” नहीं, बल्कि एक ऐसा करियर माना जाए, जिसमें तरक्की, अच्छे वेतन और विकास के अवसर हों. वित्त मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, आयोग यह मूल्यांकन करेगा कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतनमान को किस तरह निजी क्षेत्र के लेवल के करीब लाया जा सकता है. खासकर उन पदों के लिए जहां तकनीकी विशेषज्ञता या स्पेशलाइज्ड नॉलेज की जरूरत होती है. इसका मतलब यह हो सकता है कि आईटी (IT), डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics), इंजीनियरिंग (Engineering), विज्ञान (Science) और प्रशासन (Administration) जैसे क्षेत्रों के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा किया जा सकता है. इससे सरकार को न केवल कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि युवा पेशेवरों को भी सरकारी नौकरियों की ओर आकर्षित किया जा सकेगा. रिजल्ट देने वालों को मिलेगा बड़ा इनाम नया सैलरी स्ट्रक्चर ऐसा होगा जो रिजल्ट पर आधारित (Result-oriented) होगा, जिसमें कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन (Performance) के अनुसार इनाम और पदोन्नति मिलेगी. इससे सरकारी कामकाज का कल्चर अधिक आधुनिक और पारदर्शी बन सकेगा. प्राइवेट सेक्टर में भी इसी आधार पर पदोन्नति होती है और सैलरी में इजाफा होता है. सबसे खास बात यह है कि 8वें वेतन आयोग में परफॉर्मेंस-बेस्ड बोनस सिस्टम (Performance-Linked Bonus) की सिफारिश की जा सकती है. यानी अब हर कर्मचारी को समान वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी, बल्कि जो कर्मचारी मेहनत करेंगे और इनोवेशन दिखाएंगे, उन्हें ज्यादा मिलने की संभावना होगी. 7वें वेतन आयोग का फोकस सैलरी स्ट्रक्चर को सरल और संतुलित बनाना था, जबकि इस बार 8वां आयोग मेरिट (Merit) और कंपटीशन (Competition) पर आधारित ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है. अगर यह नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू हो जाता है, तो भारत में सरकारी नौकरियों की छवि पूरी तरह बदल सकती है. अब सरकारी नौकरी को सिर्फ स्थायी और सुरक्षित मानने की बजाय, लोग इसे एक बेहतर, चुनौतीपूर्ण और सम्मानजनक करियर विकल्प के रूप में देखेंगे.