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अडानी ग्रुप की एंट्री से चमकी JP की जमीन, खबर आते ही शेयरों में उछाल

कानपुर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज घरेलू बाजार में एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट सौदा करने का ऐलान किया है। अडानी पोर्ट्स संकट में फंसी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेजोल्यूशन प्लान (दिवाला प्रक्रिया समाधान) के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (JFIL) में 100% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह पूरा सौदा ₹1,500 करोड़ की नकद (Cash) डील के जरिए होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। इस अधिग्रहण (Acquisition) के बाद जेपी फर्टिलाइजर्स की सहायक कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (KFCL) पर अडानी पोर्ट्स का अप्रत्यक्ष (Indirect) नियंत्रण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डील के जरिए अडानी ग्रुप को कानपुर में 243 एकड़ बेशकीमती इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के व्यापार की दिशा बदल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इससे हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। भले ही यह सौदा एक फर्टिलाइजर कंपनी का दिख रहा हो, लेकिन अडानी पोर्ट्स की नजर इस कंपनी की कानपुर वाली जमीन पर है। अडानी ग्रुप इस 243 एकड़ जमीन का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक विशाल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और आधुनिक वेयरहाउसिंग (गोदाम) हब बनाने के लिए करने जा रहा है। रणनीतिक फायदा:- कानपुर को उत्तर भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। इस जमीन पर लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से अडानी ग्रुप का जमीनी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (Inland Logistics) बेहद मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2031 तक वह देश में अपने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या को 12 से बढ़ाकर 16 करेगी और अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को लगभग चार गुना तक बढ़ाएगी। कानपुर का यह प्रोजेक्ट इसी महा-प्लान का एक अहम हिस्सा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaypee Group) लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसी थी, जिसके समाधान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवाला प्रक्रिया चल रही थी। इस साल की शुरुआत में वित्तीय लेनदारों (लेंडर्स) के बहुमत के समर्थन से एनसीएलटी ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' ने इसके लिए अधिक बोली लगाई थी, लेकिन बैंकों और कर्जदाताओं ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर अडानी के प्लान पर भरोसा जताया। अडानी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि जेपी एसोसिएट्स के लिए यह रेजोल्यूशन प्लान अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा सबमिट किया गया था। इसे मार्च 2026 में NCLT (National Company Law Tribunal) की इलाहाबाद बेंच ने मंजूरी दी थी और बाद में मई 2026 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने भी इस फैसले को सही ठहराया। इस सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की जरूरी मंजूरी अगस्त 2025 में ही मिल चुकी थी। नियमों के अनुसार, 17 मार्च 2026 को मिली एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अगले 90 दिनों के भीतर इस ₹1,500 करोड़ के अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से फाइनल (Consummated) कर लिया जाएगा। अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) के शेयरों में आज (21 मई 2026) हल्की लेकिन सकारात्मक तेजी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 0.78% चढ़कर ₹1,786.40 पर कारोबार कर रहा था। हाल ही में कानपुर फर्टिलाइजर्स (Kanpur Fertilizers) अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। जून 2010 में बनी जेपी फर्टिलाइजर्स (JFIL) का सालाना टर्नओवर पिछले कुछ सालों में नाममात्र (FY24 में ₹25,000 और FY25 में ₹2,000) का रह गया था। लेकिन, अडानी ग्रुप के हाथों में आने के बाद इसकी खाली पड़ी जमीनों का उपयोग देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। यह डील उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।

अडाणी के खिलाफ अमेरिका से समन, भारत सरकार ने समन तामिल कराने से किया मना

मुंबई  अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC (Securities and Exchange Commission) और भारत के विधि मंत्रालय के बीच गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को समन भेजने को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है। मंत्रालय ने तकनीकी आपत्तियों का हवाला देते हुए दो बार समन तामील करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद SEC ने अब अमेरिकी अदालत से ईमेल के जरिए नोटिस भेजने की अनुमति मांगी है। दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार ने मई और दिसंबर 2025 में दो अलग-अलग मौकों पर समन लौटाए। पहली बार मई 2025 में समन लौटाया गया था। मंत्रालय ने कहा कि SEC के कवर लेटर पर 'इंक सिग्नेचर' (असली हस्ताक्षर) नहीं थे और जरूरी फॉर्म पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी थी। दूसरी आपत्ति दिसंबर 2025 में दर्ज कराई गई थी। मंत्रालय ने SEC के ही एक आंतरिक नियम (Rule 5-b) का हवाला देते हुए कहा कि समन जारी करना SEC के उन प्रवर्तन टूल की श्रेणी में नहीं आता जो इस नियम के तहत कवर होते हैं। सरल शब्दों में, मंत्रालय ने SEC के समन जारी करने के अधिकार पर ही तकनीकी सवाल उठाए। SEC ने न्यूयॉर्क की अदालत में दी गई अपनी अर्जी में भारत सरकार के मंत्रालय के तर्कों को निराधार बताया है। SEC के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समन भेजने के लिए किसी विशेष मुहर या इंक सिग्नेचर की अनिवार्यता नहीं है। एसईसी ने यह भी दावा किया है कि जिस अमेरिकी नियम (Rule 5-b) का हवाला भारत ने दिया है, वह SEC की आंतरिक जांच प्रक्रिया के लिए है न कि अंतरराष्ट्रीय समन भेजने की उसकी कानूनी शक्ति के लिए। अडाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को आधारहीन करार दिया है। ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजारों को स्पष्ट किया कि कंपनी इस कानूनी कार्यवाही में कोई पक्ष नहीं है। उनके खिलाफ रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए गए हैं। SEC की यह कार्यवाही सिविल प्रकृति की है, न कि क्रिमिनल की। इस खबर के सामने आने के बाद शुक्रवार को अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। ग्रुप की कुल मार्केट कैप में लगभग ₹1 लाख करोड़ की कमी आई, जिसमें अडाणी ग्रीन के शेयर सबसे ज्यादा (करीब 14.6%) गिरे।

LIC के बड़े निवेश खुलासा: टॉप-5 में अडानी ग्रुप की जगह नहीं, सबसे ज्यादा पैसा किसमें लगा?

मुंबई  अडानी ग्रुप (Adani Group) में LIC के निवेश को लेकर वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट पर देश में राजनीति शुरू हो गई है. विपक्ष ने सरकार पर सवाल दागे, तो LIC ने अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है.  दरअसल, वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में LIC पर अडानी ग्रुप में 3.9 अरब डॉलर (करीब 33 हजार करोड़ रुपये) निवेश करने का बड़ा आरोप लगा है. रिपोर्ट की मानें तो बीमा कंपनी ने अडानी ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए मई- 2025 में यह निवेश किया है. लेकिन LIC ने इस पूरी रिपोर्ट को भ्रामक करार दिया है. बीमा कंपनी ने कहना है कि  ये रिपोर्ट LIC की साफ-सुथरी छवि को खराब करने और भारत के मजबूत वित्तीय क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के मकसद से जारी की गई है.  अब आइए जानते हैं, LIC का अडानी ग्रुप में कितना निवेश है, और देश में सबसे ज्यादा LIC का निवेश कहां और कंपनियों में हैं. आज हम LIC के टॉप-10 निवेश के बारे में भी जानेंगे.  सितंबर- 2025 के डेटा के मुताबिक LIC की अडानी ग्रुप की इन कंपनियों में हिस्सेदारी हैं.   अडानी पोर्ट्स: 7.73% (जून से पहले 8.14% थी.) अडानी एंटरप्राइजेज: 4.16% Adani ग्रीन एनर्जी: 1.3% Adani एनर्जी सॉल्यूशन: 3.42% Adani टोटल गैस: 6% अंबुजा सीमेंट: 7.31% ACC लिमिटेड: 9.95%  हालिया रिपोर्ट के मुताबिक LIC की इक्विटी में निवेश करीब 16 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि अडानी ग्रुप की कंपनियों में LIC का निवेश करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है. यानी LIC के कुल निवेश का करीब 4 फीसदी हिस्सा अडानी ग्रुप की कंपनियों में हैं.LIC ने अडानी ग्रुप से ज्यादा देश की कई दूसरी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है.  LIC का टॉप-5 निवेश:  1. LIC का सबसे ज्यादा निवेश Reliance Industries में है, यहां करीब 1.38 लाख करोड़ का निवेश है, जो कि RIL में करीब 6.94% हिस्सेदारी बनती है. 2. ITC Ltd: इस कंपनी में LIC का निवेश करीब 82,342 करोड़ रुपये का है, यानी ITC में LIC की करीब 15.86% हिस्सेदारी है.  3. HDFC Bank Ltd: इस बैंक में LIC का करीब 72,500 करोड़ रुपये का निवेश है. इस बैंक में LIC की करीब 5.45 फीसदी हिस्सेदारी है. 4. SBI: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में LIC की करीब 9.59% हिस्सेदारी है, अमाउंट में ये निवेश करीब 68,000 करोड़ रुपये का है.  5. Larsen & Toubro Ltd (L&T) में LIC का करीब 66,053 करोड़ रुपये का निवेश है. यानी इस कंपनी में 13% से ज्यादा हिस्सेदारी LIC की है.  6. Infosys Ltd में LIC का निवेश लगभग 63,400 करोड़ रुपये का है.  यानी LIC के टॉप-5 निवेश में अडानी ग्रुप नहीं है. LIC के लिए Adani Group महत्वपूर्ण जरूर है. लेकिन इसका हिस्सा सीमित है. LIC के शीर्ष 10 निवेशों में अभी भी बैंकिंग, आईटी, और कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियां हावी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक LIC का इक्विटी पोर्टफोलियो 300 से कंपनियां हैं. जहां वह कम-से-कम 1% हिस्सेदारी रखती है. जून 2025 तिमाही के दौरान, एलआईसी ने 81 कंपनियों में हिस्सेदारी कम करके और चार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) रक्षा शेयरों को जोड़कर अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल किया.  निवेश पर अडानी ग्रुप का बयान अडानी समूह में एलआईसी का निवेश अन्य बड़े समूहों तुलना में काफी कम है, और यह पोर्टफोलियो विविधीकरण का एक हिस्सा है. एलआईसी का कहना है कि उनके निवेश फैसले बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं और नियामक दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है. बता दें, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी एशिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स हैं. फोर्ब्स के अनुसार उनकी नेटवर्थ 6.22 लाख करोड़ रुपये है. दुनिया के अमीरों की लिस्ट में वे 27वें नंबर पर हैं. अडाणी ग्रुप का साम्राज्य कोल ट्रेडिंग, माइनिंग, लॉजिस्टिक्स, पावर जेनरेशन, सीमेंट इंडस्ट्री और डिस्ट्रीब्यूशन तक फैला हुआ है.