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ड्रोन, AI और साइबर हमलों से निपटने की तैयारी, वायुसेना प्रमुख ने तय किए 4 बड़े लक्ष्य

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के एक दिन बाद बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वायुसेना का हर स्क्वाड्रन, हर रडार, हर वायु रक्षा इकाई और हर वायु सैनिक किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में वायुसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। लड़ाकू विमानों की संख्या को स्वीकृत स्तर तक पहुंचाना, हथियारों और सैन्य उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। वायुसेना प्रमुख ने अपनी सोच को 'वायु' नाम दिया है। इसके तहत 4 प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। इनमें सतर्कता और अभियान की तैयारी, आत्मनिर्भरता, रणनीतिक कौशल और तीनों सेनाओं के बीच एकजुट होकर काम करना शामिल है। उन्होंने कहा कि आज युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष तकनीक, साइबर हमले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम जैसी नई तकनीकें युद्ध की दिशा बदल रही हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत को कौन सा स्थान मिला है? मोबाइल रिचार्ज जीतने का मौका! आत्मनिर्भरता पर दिया जोर एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना का पहला काम अपनी लड़ाकू क्षमता को स्वीकृत स्क्वाड्रन संख्या के करीब पहुंचाना होगा। इसके साथ ही हर रडार, वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य इकाई को चौबीसों घंटे सतर्क रहना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने कहा कि भारतीय तकनीक से बने सेंसर, सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार वायुसेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगे। उन्होंने कहा कि वायुसेना को भारतीय समाधानों के साथ लड़ने की क्षमता विकसित करनी होगी और इनकी पर्याप्त संख्या भी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि लंबे समय तक अभियान चलाए जा सकें। दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना आशुतोष दीक्षित का कहना था कि वायुसेना की जिम्मेदारी सिर्फ युद्ध लड़ना और जीतना नहीं, बल्कि अपनी मजबूत हवाई ताकत के दम पर दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना भी है। उन्होंने रणनीतिक कौशल के तहत सैन्य योजनाओं, काम करने के तरीकों और तकनीक में लगातार बदलाव की जरूरत बताई। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस कमांड सिस्टम, ड्रोन से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, विमानों और उपकरणों की समय पर मरम्मत व सैन्य ठिकानों की सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में लगातार सुधार किया जाएगा।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बड़ा बयान, ऑपरेशन सिंदूर में 1,200 किमी तक भारतीय वायुसेना की कार्रवाई

 नई दिल्ली  भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर किए गए सटीक और नपे-तुले हमलों ने यह साबित कर दिया है कि अब कोई भी लक्ष्य वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है मीडिया  अनुसार, उन्होंने इस आतंकवाद-रोधी कार्रवाई को वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति की बड़ी सफलता बताया। वायुसेना प्रमुख ने रेखांकित किया कि पश्चिमी सीमा पर संचालित यह सैन्य अभियान लगभग 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक फैला हुआ था, जिसमें भारतीय जांबाजों ने दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक और मारक प्रहार किए। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने देश के प्राथमिक जवाबी रक्षक और एक मजबूत रणनीतिक निवारक के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को एक बार फिर से पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर से क्या मिली रणनीतिक सबक? चार दिनों तक चले इस अभियान की अगुवाई करने वाले एयर चीफ मार्शल ने आगाह किया कि इस सफलता के बाद सेना को लापरवाह नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से सबसे बड़ा सबक यह मिला कि हमें हमेशा कई विकल्प खुले रखने चाहिए और दुश्मन के दांव-पेंच बदलते ही तेजी से रणनीति में बदलाव करने में सक्षम होना चाहिए। एक क्षमता-केंद्रित सेना ही ऐसा कर सकती है, क्योंकि वह किसी एक हथियार पर निर्भर न रहकर कई विकल्पों का उपयोग कर सकती है। इसी लचीलेपन की बदौलत वायुसेना तनाव को अपने नियंत्रण में रखते हुए कार्रवाई करने में सफल रही। पहलगाम आतंकी हमले का करारा जवाब पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, जिसके तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद सीमा पार भारत की सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई थी। इस दौरान भारत ने 9 प्रमुख आतंकी अड्डों को निशाना बनाया। पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को पनाह देना जारी रखने पर वायुसेना ने उसके सैन्य ठिकानों पर प्रहार किया, जो रावलपिंडी जैसे सैन्य मुख्यालय के बेहद करीब तक पहुंचे। स्वदेशी हथियारों का दमदार प्रदर्शन वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए दुश्मन के इलाके में गहराई तक गंभीर चोट पहुंचाई। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना ने पूरे अभियान के दौरान आम नागरिकों या जीरो कोलैटरल डैमेज के अपने संकल्प का पूरी तरह पालन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान की सफलता किसी एक हथियार या लड़ाकू विमान की वजह से नहीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क ऑपरेशंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों और मजबूत एयर डिफेंस के संयुक्त तालमेल से हासिल हुई। क्या है विकसित भारत 2047 का विजन? भारतीय वायुसेना के स्वदेशी नेटवर्क आधारित एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों को हवा में ही नाकाम कर दिया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना निगरानी (आईएसआर), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एंटी-ड्रोन सिस्टम, सुरक्षित नेटवर्क और एआई आधारित प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि वायुसेना का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के साथ जुड़ा है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना एक ऐसी मल्टी-डोमेन एयरोस्पेस शक्ति बनेगी जो आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से उन्नत और देश के आर्थिक व सामरिक हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।  

अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 पर भारत का रुख साफ, वायुसेना प्रमुख ने क्या कहा?

 नई दिल्ली भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने  अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को लेकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय अधिकारियों को इस लड़ाकू विमान के पास तक नहीं जाने देते, जबकि इसे भारत को बेचने की बात हो रही है. वायुसेना प्रमुख ने यह टिप्पणी अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर की मौजूदगी में की. दरअसल, जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. इसमें भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर एक साथ मंच पर मौजूद थे. इस दौरान वायुसेना प्रमुख से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 को भारत को बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव दिया है? इस सवाल पर एपी सिंह ने कहा, 'आपके लोग हमें विमान के पास भी नहीं जाने देते और आप इसे हमें बेचने की बात कर रहे हैं.' उनकी इस टिप्पणी ने अमेरिकी लड़ाकू विमान को भारत को बेचे जाने की चर्चाओं की ओर ध्यान खींचा. F-35 को लेकर अमेरिका ने नहीं दिया कोई आधिकारिक प्रस्ताव वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से F-35 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर भारत को अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब अमेरिका की ओर से भारत को इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं. खास बात यह रही कि एपी सिंह ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर की मौजूदगी में की. रूस के Su-57 लड़ाकू विमान पर क्या बोले वायुसेना प्रमुख? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख से रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर उन्होंने बताया कि रूस की ओर से इस विमान को लेकर दिया गया प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के संज्ञान में आया है. हालांकि, अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि इस लड़ाकू विमान का मूल्यांकन किया जाना चाहिए या नहीं. एपी सिंह ने कहा, 'एक बार सरकार की ओर से हमें फैसला बता दिया जाएगा, तो हम मूल्यांकन करेंगे कि Su-57 हमारी जरूरतों को किस हद तक पूरा करता है.' उनके बयान से स्पष्ट है कि रूसी लड़ाकू विमान को लेकर अभी मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय नहीं हुआ है. भारत खुद भी बना रहा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत अपनी भविष्य की लड़ाकू विमान संबंधी जरूरतों का आकलन कर रहा है. इसके साथ ही भारत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है. भारत की दीर्घकालिक रक्षा योजनाओं में स्वदेशी लड़ाकू विमानों का विकास और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. तरंग शक्ति-2026 युद्धाभ्यास का समापन जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' में भारतीय वायुसेना समेत कुल आठ देशों की वायुसेनाओं ने भाग लिया. इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाना और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था. इसी युद्धाभ्यास के समापन समारोह के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना प्रमुख ने अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट की.

राष्ट्रीय सुरक्षा पर वायुसेना प्रमुख की दो टूक: शक्ति के साथ इच्छाशक्ति भी अनिवार्य

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख के अनुसार आर्थिक, कूटनीतिक या तकनीकी शक्ति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, यदि उसके पीछे सशक्त सैन्य बल नहीं है, तो कोई भी राष्ट्र दूसरे देशों के दबाव में आ सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके ताजा उदाहरण हैं। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार को संबोधित किया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सैन्य शक्ति राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्णायक तत्व होती है। इसके बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता। सेमिनार को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके उदाहरण हैं, जहां कमजोर सैन्य स्थिति के कारण बाहरी हस्तक्षेप और दबाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अंततः वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सिर्फ सैन्य शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रयोग करने की इच्छाशक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कोई देश केवल संयम दिखाता है, लेकिन उसकी शक्ति स्पष्ट नहीं है, तो उस संयम को कमजोरी के रूप में देखा जाता है। वहीं, जब कोई देश मजबूत होकर संयम दिखाता है, तभी वह संयम क्षमता और आत्मविश्वास के रूप में स्वीकार किया जाता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में जिस सैन्य शक्ति ने अपेक्षित परिणाम दिए हैं, वह हवाई शक्ति है। चाहे संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान हो, आतंकवादी ढांचों और उनके संरक्षकों पर सटीक प्रहार करना हो, या फिर कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के बेस व दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना हो, इन सभी मामलों में हवाई शक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है। वायु सेना प्रमुख ने हवाई शक्ति को कम समय में तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता वाला बताया। अपनी इसी क्षमता के कारण हवाई शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि भारत को एक प्रभावशाली और विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित रहना है, तो वायु शक्ति पर निरंतर ध्यान और निवेश आवश्यक है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और कठिन परिस्थितियों में भी वायुसेना की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुब्रतो मुखर्जी की दूरदृष्टि ने भारतीय वायुसेना को सही दिशा दी और जैसा कहा जाता है कि अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय वायुसेना पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है और संसाधन भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने पूर्ववर्ती वायुसेना प्रमुखों की तुलना में अधिक सक्षम वातावरण में कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आत्मसंतोष से बचना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना को पिछली सफलताओं पर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को और अधिक सशक्त, आधुनिक और तैयार बनाना होगा। यह आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं’ पर मंथन किया गया था।