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Air Taxi की टेस्टिंग शुरू, अब मिनटों में पहुंचे ऑफिस और एयरपोर्ट

नई दिल्ली  आसमान में उड़ती टैक्सी. सुनने में अब भी थोड़ा साइंस-फिक्शन जैसा लगता है. लेकिन तकनीक की दुनिया इस सपने को धीरे-धीरे सच में बदल रही है. अमेरिकी कंपनी Joby Aviation ने अपनी पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) की उड़ान शुरू कर दी है. यानी एक ऐसी मशीन, जिसमें आने वाले समय में लोग बैठकर शहर के ऊपर से उड़ते हुए ऑफिस या एयरपोर्ट जा सकेंगे. कंपनी का दावा है कि अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही यह एयर टैक्सी आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। जॉबी एविएशन ने घोषणा की है कि, कंपनी ने अपनी पहली प्रोडक्शन एयर टैक्सी की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी का कहना है कि यह कदम पैसेंजर सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले समय में लोग शहरों के ऊपर से इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी में सफर करते नजर आ सकते हैं। कंपनी ने बताया कि शुरुआती उड़ानें उसके मरीना, कैलिफोर्निया स्थित प्लांट में की जा रही हैं. यहां कंपनी के पायलट एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग कर रहे हैं. दरअसल, कंपनी ये टेस्टिंग इसलिए कर रही है ताकि एयरक्रॉफ्ट बिना किसी तकनीकी खामी के फेडरेशन के सामने पेश किया जा सके. अमेरिकी विमानन नियामक संस्था फेडरेशन एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इसकी आधिकारिक जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि इसी साल इसके लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। कैसी है ये Air Taxi Joby Aviation कई साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी पहले ही नियामकों (रेगुलेटर्स) के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट के डिजाइन, उसके पार्ट्स और प्रोडक्शन प्लान को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनी के डेवलपमेंट मॉडल पहले की टेस्टिंग में 50,000 मील से ज्यादा उड़ान भी भर चुके हैं. यानी टेक्निकली अब तक इस फ्लाइंग प्रोसेस में कंपनी कोई ख़ास समस्या नहीं आई है। Joby की एयर टैक्सी का डिजाइन काफी खास है. यह हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज दोनों का मिला-जुला रूप है. इसमें 6 रोटर लगे हैं जो इसे अपनी जगह से ही सीधा टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में मदद करते हैं. इसके बाद यह सामान्य एयरक्रॉफ्ट की तरह आगे की ओर उड़ान भरती है. यह इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट एक पायलट और 4 पैसेंजर को लेकर उड़ान भर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा साइलेंट है। ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं। जल्द शुरू होगी पैसेंजर सर्विस कंपनी की योजना इस साल के अंत तक Dubai में अपनी पहली पैसेंजर सर्विस शुरू करने की है. इसके लिए शहर में 4 लैंडिंग साइट बनाने की योजना है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा कंपनी अमेरिका में भी लिमिटेड लेवल पर ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. यह एक फेडरल प्रोग्राम का हिस्सा होगा, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को नेशनल एयरस्पेस में शामिल करना है। UBER का ऐलान हाल ही में मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber ने ऐलान किया था कि, कंपनी जॉबी एविएशन के साथ मिलकर एयर टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने प्रोडक्शन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके लिए कैलिफोर्निया के प्लांट के साथ-साथ डेटन, ओहियो स्थित फैक्ट्री में भी प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. कंपनी का टार्गेट है कि साल 2027 तक हर महीने करीब 4 एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाए. इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

ट्रैफिक से छुटकारा! भारत में एयर टैक्सी की एंट्री, AI समिट में दिखा फ्यूचर ट्रांसपोर्ट

नई दिल्ली माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट में कई अलग-अलग चीजें दुनिया को देखने को मिली हैं। यहां चीनी रोबोडॉग को अपना बताने के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सवाल उठे तो वहीं कुछ ऐसे प्रयोग भी सामने आए हैं, जिनकी काफी सराहना हो रही है। इनमें से ही एक AI संचालित एयर टैक्सी का एक मॉडल है। इसे लेकर माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे लेकर कंपनी का कहना है कि भारी जाम वाले शहरों में इसके इस्तेमाल से राहत मिल सकेगी। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी तरह के रनवे की भी जरूरत नहीं होगी। कंपनी का दावा है कि 8 मिनट में यह टैक्सी 36 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। हालांकि इसका किराया थोड़ा अधिक रहेगा। कंपनी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि यदि बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यूबी सिटी जाना हो तो दो घंटे का वक्त लगता है। सड़क से जाने पर कैन का किराया 1000 रुपये देना होता है। लेकिन इस एयरटैक्सी से यह सफर महज 8 मिनट में ही पूरा होगा। इसके लिए 1700 रुपये किराये के तौर पर चुकाने होंगे। एक बार की चार्जिंग पर लगा सकेगी कई राउंड इसके अलावा एक बड़ा फीचर यह भी बताया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद यह कई ट्रिप मार सकती है। इसका नाम कंपनी ने (e-VTOL) रखा है, जिसका अर्थ है- इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ ऐंड लैंडिंग। आमतौर पर एयरप्लेन और हेलिकॉप्टर जब उड़ान भरते हैं तो काफी आवाज आती है, लेकिन इसमें ऐसा नहीं होगा। इसकी आवाज 120 डेसिबल से कम ही होगी। यहां तक कि नीचे चल रहे लोगों को यह भी अहसास नहीं होगा कि ऊपर कोई एयर टैक्सी उड़ रही है। इसका उड़ान भरना बेहद आसान होगा और उसकी लैंडिंग में भी कोई समस्या नहीं होगी। बैटरी से ही चलेगी यह टैक्सी, खर्च भी काफी कम; डिजाइन मंजूर कंपनी के फाउंडर विकल्प मित्तल का कहना है कि इसका संचालन बैटरी से ही होगा। इसके चलते इसकी परिवहन लागत भी कम होगी। हेलिकॉप्टर्स का संचालन काफी महंगा होता है क्योंकि उनमें तेल काफी खर्च होता है। मित्तल के अनुसार इस एयरटैक्सी को पूरी तरह भारत में ही मद्रास आईआईटी में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि चिप्स और मोटर जैसी जरूरी चीजों को भारत में ही डिजाइन किया गया है। बस उनकी मैन्युफैक्चरिंग बाहर हुई थी। मित्तल ने कहा कि उड्डयन महानिदेशालय से इसके डिजाइन के लिए अप्रूवल लिया था और उसके बाद ही इसे तैयार करने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहला प्रोडक्शन मॉडल जब तैयार हो जाएगा तो इसकी टेस्टिंग की जाएगी।  

दिल्ली-नोएडा-गुरुग्राम में शुरू होगा Air Taxi सेवा, मिनटों में पहुंचें ऑफिस और अस्पताल

 नई दिल्ली  दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को अक्सर भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है. इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए Air Tax का प्रस्ताव सामने आया है. इसके बाद सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम का सफर सिर्फ 12 मिनट में पूरा होगा.  एयर टैक्सी कॉरिडोर योजना की दिल्ली -NCR में लगने वाले समय को घटाकर मिनटों में कर सकती है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयर टैक्सी कॉरिडोर की यह पहल दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की पुरानी समस्या का सॉल्यूशन बन सकती है.  दिल्ली वालों को गुरुग्राम और नोएडा की कनेक्टिविटी  CII ने गुरुग्राम-कनॉट प्लेस-नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले एक पायलट एडवांस्ड एयर मोबिलिटी कॉरिडोर प्रपोजल पेश किया है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) फ्लाइट और अन्य  टेक्नोलॉजी पर काम को शामिल करके दिल्ली-NCR में एविएशन इकोसिस्टम को सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकता है. हालांकि अभी यह प्रपोजल है और इसको कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है.  सफल होने के बाद और भी शहरों में हो सकेगा शुरू दिल्ली-NCR में यह मॉडल सफल होता है तो आगे चलकर इस मॉडल को देश के अन्य बड़े शहरों में शामिल किया जा सकेगा. इसमें मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे नाम शामिल होंगे.  एयर एम्बुलेंस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फायदा  दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी का एम्बुलेंस में भी किया जा सकता है. इसके लिए अस्पतालों पर वर्टीपोर्ट्स तैयार किए जाएंगे. इसकी मदद एम्स समेत दूसरे बड़े अस्पतालों के बीच मरीज को रेफर करना आसान हो जाएगा.  ट्रैवल टाइम में होगी बारी कटौती  एयर टैक्सी की मदद से ट्रैवल टाइम में भारी कटौती आएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम तक का सफर 12 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से सफर में 1  घंटे से करीब डेढ़ घंटा लगता है.  कनॉट प्लेस से नोएडा इंटरनेशनल नेशनल एयरपोर्ट का सफर 20 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से इस सफर में करीब 2 से 3 घंटे का समय लगता है. आगे क्या होंगे चुनौतियां?  देश की राजधानी होने की वजह से दिल्ली में कुछ हिस्से हाई सेंसटिव जोन हैं. दिल्ली कैंट, लुटियंस दिल्ली और IGI एयरपोर्ट के ऊपर से एयर टैक्सी को उड़ने की परमिशन नहीं दी जा सकती है. इसके लिए DGCA को नए स्टैंडर्ड और रूट्स तैयार करने होंगे. फायर सेफ्टी, इमरजेंसी इवैक्यूएशन और स्टॉप फ्री क्लीयरेंस जरूरी होगी.