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अजित पवार और पत्नी सुनेत्रा को 25,000 करोड़ के घोटाले में मिली क्लीन चिट

मुंबई  सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने  25000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दायर की गई दो क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है जिसमें दिवंगत अजित पवार को क्लीन चिट दी गई है। इस बैंक और इसकी सहायक कंपनियों का नेतृत्व करने वाले कई प्रमुख नेताओं के नाम इस कथित घोटाले में सामने आए थे। नेताओं को क्लीन चिट: EOW ने अपनी रिपोर्ट में दिवंगत अजित पवार, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके भतीजे रोहित पवार को क्लीन चिट दे दी है। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की मौजूदा उपमुख्यमंत्री हैं। ED और अन्ना हजारे की याचिकाएं खारिज जज महेश के. जाधव ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने और मामले में हस्तक्षेप करने की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका को खारिज कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित 50 अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर की गई विरोध याचिकाओं को भी नामंजूर कर दिया है। याचिका खारिज होने का कारण जज ने बताया कि EOW की पहली क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ ED ने पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज किया जा चुका है। उस फैसले के खिलाफ ED की अपील फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत के विस्तृत आदेश अगले सप्ताह तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। ED का पक्ष और दलीलें ED ने अपनी हस्तक्षेप याचिका में दावा किया था कि वह इस मामले में एक 'प्रभावित पक्ष' है क्योंकि उनका मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला EOW द्वारा दर्ज की गई FIR पर ही आधारित था। ED ने दलील दी कि जांच के दौरान उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी और संपत्तियां भी कुर्क की थीं, जिसमें अजित पवार, सुनेत्रा पवार और रोहित पवार से जुड़ी एक मिल (कारखाना) भी शामिल थी। EOW का पक्ष और क्लोजर रिपोर्ट का आधार EOW ने अदालत में कहा कि ED को इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है, खासकर तब जब उनकी ऐसी ही एक याचिका पहले ही खारिज हो चुकी हो। EOW ने स्पष्ट किया कि मामले की गहन और आगे की जांच के बाद भी उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि कोई 'संज्ञेय अपराध' हुआ है। इसी कारण से उन्होंने मामले को बंद करने की रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) अदालत में पेश की। सुप्रीम कोर्ट के नियम का प्रभाव इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का 2022 का एक अहम फैसला लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि यदि कोई 'प्रेडिकेट' या 'शेड्यूल्ड' अपराध (यानी वह मूल आपराधिक मामला जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस आधारित होता है) साबित नहीं होता है या मौजूद नहीं है, तो 'धन शोधन निवारण अधिनियम' (PMLA) के तहत दर्ज मामला आगे नहीं बढ़ सकता। इस स्थिति में, EOW का मामला ही वह 'मूल अपराध' था। चूंकि EOW ने ही मामले में कोई अपराध न होने की बात कहकर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी है, इसलिए कानूनी रूप से ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस का आधार भी खत्म हो जाता है। बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को एक दर्दनाक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 66 वर्षीय पवार मुंबई से अपने गृह क्षेत्र बारामती जा रहे थे, जब उनका चार्टर्ड विमान (लियरजेट 45) बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान क्रैश होकर आग की लपटों में घिर गया। इस भीषण हादसे में अजित पवार के साथ-साथ विमान में सवार चार अन्य लोगों (दो पायलट, एक सुरक्षा अधिकारी और एक फ्लाइट अटेंडेंट) की भी जान चली गई। दशकों तक महाराष्ट्र की सियासत में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले 'अजित दादा' के इस आकस्मिक निधन ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया और राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। वर्तमान में इस दुर्घटना के कारणों को लेकर सीआईडी (CID) और उड्डयन अधिकारियों द्वारा उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।

पंचतत्व में विलीन हुए अजित पवार, राजकीय सम्मान के बीच बेटों ने अंजाम दी अंतिम रस्म

मुंबई  महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार का बुधवार को बारामती में प्लेन क्रैश में निधन हो गया. आज गुरुवार 29 जनवरी 2026 को बारामती के कटेवाड़ी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. जानकारी के मुताबिक सुबह 9 बजे के करीब उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई. बता दें, अजित पवार अगले महीने होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के लिए चुनाव प्रचार करने जा रहे थे. सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर उन्होंने चार्टर प्लेन से उड़ान भरी और 8 बजकर 45 मिनट पर उनका प्लेन क्रैश हो गया. उनके साथ 5 लोगों की भी मौके पर ही मौत हो गई. सभी दिग्गजों ने अजित पवार के आसामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया है. वहीं, कुछ लोगों ने प्लेन क्रैश हादसे की जांच की भी बात कही हैं. इस पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस दुख के समय में किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए. डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है. दोनों बेटों ने दी मुखाग्नि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. दोनों बेटों ने अपने पिता को मुखाग्नि दी.  प्रधानमंत्री ने अजित पवार को जनता से जुड़े नेता बताते हुए कहा कि प्रशासनिक मामलों की उनकी गहरी समझ और कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उल्लेखनीय रही है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में पवार परिवार के साथ खड़ी है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हादसे की जांच के आदेश दिए और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे. शिंदे ने भावुक होते हुए कहा, ‘हम महाराष्ट्र की प्रगति के लिए एक टीम के रूप में काम कर रहे थे. उनके जाने से न सिर्फ टीम का एक अहम हिस्सा खो गया है, बल्कि मैंने अपने बड़े भाई को भी खो दिया है.’ एनसीपी (एसपी) सांसद और अजित पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले भी परिवार के सदस्यों के साथ शोक में डूबी नजर आईं. अजित पवार ने विभिन्न सरकारों में उपमुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी, जिनमें पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकारें शामिल हैं. उन्होंने सांसद के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई और पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया. एनसीपी ने दिल्ली स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय में शोकसभा का आयोजन किया, जहां पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हादसे को अस्वाभाविक बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि छोटे विमान से यात्रा करने वाले नेताओं और उद्योगपतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे हादसों की गहन जांच जरूरी है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी घटना की उचित जांच की मांग की और सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं. इस बीच शरद पवार ने लोगों से अपील की कि वे इस दुखद घटना को राजनीतिक रंग न दें. उन्होंने कहा कि यह एक दुर्घटना है और राजनीति को इसमें नहीं घसीटना चाहिए. एकनाथ शिंदे ने भी किसी साजिश की आशंका को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में राजनीति करना उचित नहीं है. अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से आते थे. वह अपनी स्पष्टवादी शैली, तेज फैसलों और प्रशासनिक दक्षता के लिए जाने जाते थे. समर्थकों के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही जो जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझता और उनके समाधान के लिए सक्रिय रहता था. उनके अचानक निधन से न सिर्फ एनसीपी बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है. अजित पवार अपने पीछे पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटों के पीछे छोड़ गए हैं. राज्यभर में उनके निधन पर शोक की लहर है और राजनीतिक, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है. गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें राज्य और केंद्र के कई वरिष्ठ नेता शामिल होने की संभावना है.

प्लेन क्रैश के कुछ मिनट पहले पायलट की चेतावनी उजागर, रनवे गायब होने की दहशत

बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह बारामती में हुए विमान हादसे में निधन हो गया। दिग्गज नेता लियरजेट 45 नामक प्रावइेट जेट से जा रहे थे, जोकि लैंडिंग से पहले क्रैश हो गया और हादसे में सवार सभी पांच लोगों की जान चली गई। हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत देशभर के तमाम नेताओं ने दुख जताया है। प्लेन ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन उसे गो-अराउंड करके दोबारा आना पड़ा था। पहली बार में पायलट ने कहा था कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन बाद में गो-अराउंड के बाद रनवे दिख गया था।   विमान हादसा आज सुबह 8.46 बजे हुआ। सुबह 8.18 मिनट पर प्लेन ने बारामती एयरपोर्ट से संपर्क स्थापित किया था। यह दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का जेट प्लेन था, जिसे अजित पवार इस्तेमाल कर रहे थे। सुबह लगभग 8.10 मिनट पर मुंबई से प्लेन ने उड़ान भरी। मुंबई और बारामती के बीच की दूरी लगभग 256 किलोमीटर है और विमान को 45 मिनट का समय लगता है। बारामती एयरपोर्ट से विमान लगभग 56 किलोमीटर की दूरी पर था, जब उससे संपर्क किया गया। प्लेन को पुणे द्वारा कंट्रोल लोकल एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को दे दिया गया। इसके बाद विमान को उड़ा रहीं कैप्टन शंभवी पाठक को स्थानीय मौसम की जानकारी दी गई। पायलट ने हवाओं और विजिबिलिटी के बारे में पूछा और उन्हें बताया गया कि हवाएं शांत हैं और विजिबिलिटी तीन हजार मीटर है। इसके बाद विमान ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया और कहा कि उन्हें रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद, उन्होंने गो-अराउंड किया। 'रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा' गो-अराउंड एक स्टैंडर्ड प्रोसीजर है, जिसके तहत पायलट जब सफल लैंड नहीं कर पाता है तो वह दोबारा हवा में उड़कर, वापस चक्कर लगाकर लैंडिंग की कोशिश करता है। एविएशन सेक्टर में यह कोई विफलता नहीं, बल्कि इसे सेफ्टी उपाय माना जाता है। गो-अराउंड के बाद, विमान से उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया और पायलट ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया। उनसे रनवे दिखने पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। उन्होंने जवाब दिया रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा है, जब रनवे दिखेगा तो कॉल करेंगे। कुछ सेकंड बाद उन्होंने बताया कि रनवे दिखाई दे रहा है। विमान को 08.43 बजे पर रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई, हालांकि, उन्होंने लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं दिया। सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ भयावह मंजर रिपोर्ट की मानें तो सुबह 8.43 मिनट पर प्लेन साइलेंट हो गया था, यानी कि उसने सिग्नल भेजना बंद कर दिया था। इस दौरान विमान की गति लगभग 237 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। प्लेन भी जमीन से लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इसके बाद सुबह 8.46 बजे एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर ही विमान क्रैश हो गया। घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी में हादसे के बाद धुएं का गुबार उठता हुआ दिखाई दे रहा है। बता दें कि कंपनी के पास इस फ्लीट में सात लियरजेट 45 एयरक्राफ्ट (एक दुर्घटनाग्रस्त), पांच Embraer 135BJ एयरक्राफ्ट, चार King Air B200 एयरक्राफ्ट और एक Pilatus PC-12 एयरक्राफ्ट शामिल हैं। पिछला रेगुलेटरी ऑडिट डीजीसीए द्वारा फरवरी 2025 के महीने में किया गया था और कोई लेवल-I फाइंडिंग जारी नहीं की गई थी।  

कौन बनेगा वारिस, क्या टूटेगी या जुड़ेगी NCP? अजित पवार के निधन के बाद सियासी घमासान

नई दिल्ली महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया अजित पवार की आज (बुधवार, 28 जनवरी) सुबह एक विमान दुर्घटना में दु:खद मौत हो गई। उनके साथ विमान में कुल पांच लोग सवार थे और सभी की उस हादसे में मौत हो गई। 66 वर्षीय अजित पवार जमीन से जुड़े एक नेता थे, जिनका दुखद अंत उनके गृह नगर बारामती में ही हुआ। उनके असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल कौंधने लगे हैं। मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि उनका राजनीतिक वारिस कौन होगा? राजनीतिक विरासत का वारिस कौन? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार की छत्रछाया से बाहर निकलकर जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा खिलाफ बगावत कर दी थी और पार्टी के नाम और चिह्न के साथ-साथ पार्टी के अधिकतर विधायकों को अपने पाले में कर लिया था। अब उनके आकस्मिक निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि उनकरी इस राजनीतिक विरासत का वारिस कौन होगा? क्या राज्यसभा सांसद और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार अजित दादा की असली राजनीतिक वारिस होंगी या फिर उनके बेटे पार्थ पवार के कंधों पर ये जिम्मेदारी आएगी क्योंकि वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पार्थ 2019 का लोकसभा चुनाव मावल संसदीय सीट से लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें तब हार का सामना करना पड़ा था। उनके दूसरे बेटे जय पवार फैमिली बिजनेस संभालते हैं। इसके अलावा चर्चा ये भी है कि क्या उनकी राजनीतिक विरासत का वारिस परिवार से बाहर का भी हो सकता है? अगला डिप्टी सीएम कौन होगा? अजित पवार महाराष्ट्र की महायुति सरकार में उप मुख्यमंत्री थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक शून्य पैदा हो गया है। ऐसे में उनके निधन के बाद ये भी चर्चा जोर मारने लगी है कि अब राज्य का अगला उप मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार इस जिम्मेदारी को संभालेंगी या उनके बेटे पार्थ को ये जिम्मेदारी मिलेगी। चर्चा ये भी है कि चूंकि पार्थ पवार का राजनीतिक अनुभव कम है, इसलिए पार्टी में दूसरे लाइन के नेता इस पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। NCP का अगला चीफ कौन? अजित दादा की आकस्मिक मौत ने एक नहीं अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। उनमें एक सवाल ये भी है कि उनके जाने के बाद NCP की कमान अब कौन संभालेगा? क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को ये जिम्मेदारी मिल सकती है या परिवार से ही कोई सदस्य पार्टी की अगुवाई करेगा? क्या महायुति से अलग होगी NCP? चर्चा ये भी है कि क्या अजित दादा गुट वाली NCP अब महायुति से अलग हो जाएगी क्योंकि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पिछले कुछ दिनों से महायुति में अजित पवार मुखर थे और भाजपा से कुछ मुद्दों पर उकी तल्खी चल रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पार्टी भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन से अलग हो जाएगी या जिनसे तल्खी थी, वो तो रहे नहीं तो पार्टी पहले की ही तरह महायुति में बनी रहेगी क्योंकि सत्ता से हटने के बाद पार्टी में बिखराव का खतरा बढ़ सकता है। क्या दोनों NCP का विलय होगा और कौन लेगा ये फैसला? एक चर्चा ये भी है कि अजित दादा की मौत के बाद NCP के दोनों धड़े एक हो सकते हैं, जिसकी चर्चा पिछले कुछ समय से हो रही है। हालिया पुणे और पिपंरी-चिंचीवाड़ महा नगरपालिका चुनावों में दोनों धड़ों ने एक होकर चुनाव लड़ा था और इसकी संभावनाओं को बल भी दिया था लेकिन इन सबके बावजूद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि NCP में इन मुद्दों पर फैसला लेगा कौन? अजित पवार की मौत ने पार्टी और परिवार को बड़े असमंजस में डाल दिया है। बता दें कि पिछले साल के लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी। आम चुनाव में मिली करारी हार को लेकर आलोचकों के निशाने पर आए अजित पवार ने हालांकि पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में 41 सीट जीतकर सबको गलत साबित कर दिया था। वहीं शरद पवार की अगुवाई वाली NCP को सिर्फ 10 सीट मिलीं थी। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से अजित पवार ने राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली थी लेकिन उनके निधन ने राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति में कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।  

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस त्रासदी ने न केवल एक लोकप्रिय जननेता को छीन लिया, बल्कि उन दर्दनाक हादसों की कड़वी यादें भी ताजा कर दीं, जिनमें पहले भी देश ने अपने कई राजनीतिक दिग्गजों और प्रमुख हस्तियों को असमय खोया है। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता पवार (66) और अन्य लोगों को ले जा रहा विमान पुणे के बारामती में उस समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया जब वह उतर रहा था।   होमी भाभा- 1966 भारत के अग्रणी परमाणु भौतिकी वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु 24 जनवरी 1966 को ‘एयर इंडिया’ की उड़ान 101 के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण हुई। जिनेवा एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के साथ हुए गलत संचार की वजह से विमान ‘स्विस आल्प्स’ पहाड़ के मोंट ब्लांक में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।   संजय गांधी- 1980 कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वह सफदरजंग हवाई अड्डे के पास ‘दिल्ली फ्लाइंग क्लब’ के विमान में हवाई करतब दिखा रहे थे, तभी विमान अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।   माधवराव सिंधिया-2001 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नागर विमानन मंत्री माधवराव सिंधिया की मृत्यु 30 सितंबर 2001 को कानपुर में राजनीतिक रैली के लिए जा रहे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण हुई। उत्तर प्रदेश में खराब मौसम के कारण 10 लोगों की बैठने की क्षमता वाला निजी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।   जी एम सी बालयोगी-2002 लोकसभा अध्यक्ष रहे एवं तेलुगु देशम पार्टी के नेता जी एम सी बालयोगी की मृत्यु तीन मार्च 2002 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई। वह पश्चिम गोदावरी जिले के भीमवरम से आ रहे थे, जब उनका निजी हेलीकॉप्टर आंध प्रदेश के कृष्णा जिले के कैकलुरु के पास एक तालाब में गिर गया। सिप्रियन सांगा-2004 मेघालय के ग्रामीण विकास मंत्री किप्रियन सांगा और 9 अन्य लोग 22 सितंबर 2004 को गुवाहाटी से शिलॉन्ग जा रहे पवन हंस हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त के कारण मारे गए थे। यह हेलीकॉप्टर राज्य की राजधानी से केवल 20 किमी दूर बारापानी झील के पास दुर्घटना का शिकार हुआ। के एस सौम्या- 2004 दक्षिण भारत की लोकप्रिय अभिनेत्री सौंदर्या (के एस सौम्या) की मृत्यु 17 अप्रैल 2004 को विमान दुर्घटना में हुई जब वह अपने भाई के साथ बेंगलुरु से करीमनगर जा रही थीं। ओ पी जिंदल और सुरेंद्र सिंह-2005 उद्योगपति और हरियाणा के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश जिंदल और कृषि मंत्री सुरेंद्र सिंह की 2005 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई जब उनका हेलीकॉप्टर दिल्ली से चंडीगढ़ जाते समय उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दुर्घटना का शिकार हो गया। वाई एस रेड्डी-2009 दो सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजसेखर रेड्डी (वाईएसआर) का हेलीकॉप्टर ‘बेल 430’ खराब मौसम के कारण नल्लमाला जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उनकी मृत्यु हो गई। दोरजी खांडू-2011 अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू और चार अन्य लोगों को 30 अप्रैल 2011 को तवांग से ईटानगर जा रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण जान गंवानी पड़ी। सीडीएस जनरल बिपिन रावत-2021 भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत की मृत्यु आठ दिसंबर 2021 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई। यह दुर्घटना तमिलनाडु के कूनूर के पास हुई, जब वह सुलूर से वेलिंगटन जा रहे थे। विजय रुपाणी-2025 गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की मृत्यु 12 जून 2025 को अहमदाबाद विमान दुर्घटना में हुई। इस हादसे में बोइंग ‘787-8 ड्रीमलाइनर’ (एआई171) में सवार 242 यात्री और चालक दल में से एक को छोड़कर सभी की मौत हो गई, जबकि जमीन पर भी कई एमबीबीएस छात्रों समेत 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।  

अजित पवार के विमान हादसे में ग्वालियर की पायलट शांभवी पाठक, मैसेज कर दी थी दादी को

ग्वालियर  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का पुणे के बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया। अजित पवार जिस चार्टर्ड प्लेन में सवार थे, उस प्लेन को ग्वालियर की रहने वाली शांभवी पाठक उड़ा रही थी। शांभवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली थी। उनका जन्म ग्वालियर में ही हुआ और उनका बचपन भी वहीं बीता। उनकी दादी मीरा पाठक को शांभवी ने मुंबई से सुबह 6:36 पर मैसेज भेजा और उसमें लिखा था गुड मॉर्निंग दद्दा… इसके बाद शांभवी अपनी फ्लाइट पर पहुंच गईं और 8:46 बजे प्लेन क्रैश हो गया। ग्वालियर में फिलहाल शांभवी की दादी मीरा पाठक रहती हैं। पायलट शांभवी के घर पर उनकी कुछ बचपन की तस्वीरें हैं और फाइटर प्लेन से उन्हें बेहद लगाव था, क्योंकि उनके पिता भी इंडियन एयरफोर्स में रहे हैं। अगस्त में ग्वालियर आई थी शांभवी शांभवी पाठक के माता-पिता दिल्ली में रहते हैं। दादी मीरा पाठक ने बताया कि वह ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में जन्मी और यहीं एयर फोर्स स्कूल में पढ़ाई लिखाई हुई और उसके बाद वह दिल्ली चली गई। अगस्त के महीने में शांभवी पाठक ग्वालियर आई थी। शांभवी पाठक के बारे में दादी ने बताया कि वह बेहद हंसमुख थी और हमेशा मुझसे बात करती रहती थी।  पड़ोसी पहुंचे घर वहीं शांभवी पाठक की सूचना मिलते ही उनके पड़ोसी भी उनकी दादी के पास पहुंच गए। पड़ोसी महिलाओं ने बताया कि वह बहुत चंचल स्वभाव की थी और वह जब ग्वालियर आई थी तो उनसे मिलना जुलना होता था और खूब बातें करती थी। आज उसकी निधन की सूचना मिलने से गम का माहौल है। 

सीएम नीतीश कुमार, तेजस्वी और सम्राट ने अजित पवार के निधन पर जताया शोक

दरभंगा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि यह हादसा अत्यंत पीड़ादायक है और वे इससे मर्माहत हैं। उन्होंने अजित पवार को कर्मठ एवं कुशल राजनेता बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में उनका अहम योगदान रहा। वे मृदुभाषी, मिलनसार और लोगों में बेहद लोकप्रिय थे। उनके निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।नीतीश कुमार ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा परिजनों व प्रशंसकों को इस दुख की घड़ी में धैर्य देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित छह लोगों की विमान हादसे में हुई आकस्मिक मौत पर राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद , पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव सहित राजद परिवार के नेताओं ने गहरी शोक संवेदना प्रकट की है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बारामती में हुई भीषण हवाई जहाज दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित कई लोगों के निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें और शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित अन्य की असामयिक मृत्यु पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गहरा शोक जताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि घटना ह्रदय विदारक है। प्रार्थना की है कि भगवान परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति दें।

NCP विवाद पर अजीत पवार का संकेत: दोनों ओर के कार्यकर्ता एक साथ, पारिवारिक मतभेद समाप्त

मुंबई महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार का कहना है कि एनसीपी के दोनों गुट के कार्यकर्ता एक होना चाहते हैं और पवार परिवार के अंदर सभी तनाव खत्म हो गए हैं। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अजीत पवार ने कहा, "दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एक होना चाहते हैं। दोनों एनसीपी अब साथ हैं। हमारे परिवार में सभी तनाव खत्म हो गए हैं।" लगभग दो साल पहले शरद पवार की एनसीपी से अजीत पवार ने बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा बन गए थे। इसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी। एक एनसीपी के प्रमुख अजीत पवार बने, जबकि दूसरा धड़ा शरद पवार की एनसीपी के साथ रहा। अब एनसीपी के दोनों गुट एक बार फिर से साथ आए हैं और पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम में साथ में चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, पिछले दिनों अजीत पवार ने यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) पर उनकी हालिया टिप्पणियों को मीडिया मे गलत तरीके से पेश किया था जबकि उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया था। अजीत पवार ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, "मीडिया ने मेरे बयान को अलग तरह से पेश किया। मैंने आरोप नहीं लगाया था। महाराष्ट्र सरकार अच्छा काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में अच्छा काम हो रहा है। मैंने यही कहा था लेकिन मेरा पूरा बयान नहीं दिखाया गया। मैंने इसी आधार पर बयान दिया था।" उन्होंने मीडिया से कहा कि उनका बयान इस बात को उजागर करने के उद्देश्य से था कि महाराष्ट्र सरकार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रभावी रूप से काम कर रही है लेकिन उनके बयान के केवल चुनिंदा अंश ही प्रसारित किए गए। उन्होंने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारें महाराष्ट्र में विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित कर रही हैं , हालांकि कार्यान्वयन में कमियों के कारण स्थानीय स्तर पर अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकारें महाराष्ट्र के हर कोने में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा रही हैं। केंद्र या राज्य सरकार द्वारा कोई भी विकास योजना लंबित नहीं रखी जा रही है।" पवार ने आगे कहा, "लेकिन सवाल यह है कि पिछले कई वर्षों से एक ही नेतृत्व में चल रहे नगर निगमों की क्या स्थिति रही है?"

महायुति में शामिल लेकिन संघ से परहेज? RSS कार्यक्रम में अजित पवार की गैरमौजूदगी पर सियासी घमासान

मुंबई  महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन में शामिल अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से दूरी बनाकर रखी है। रविवार को संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के नागपुर स्थित स्मारक पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तो पहुंचे लेकिन एनसीपी से कोई नजर नहीं आया। इस बारे में जब पार्टी नेता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एनसीपी महायुति में राज्य के विकास के लिए शामिल हुई है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब अजित पवार और उनकी पार्टी के विधायकों ने हेडगेवार के स्मारक पर जाने से परहेज किया हो।   प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि पार्टी की विचारधारा छत्रपति शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और बी आर आंबेडकर जैसे समाज सुधारकों की प्रगतिशील सोच पर आधारित है। उन्होंने दोहराया कि यह पहली बार नहीं है जब अजित पवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक के स्मारक पर जाने से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा, “हम अपने सिद्धांतों पर कायम हैं और हमारा ध्यान राज्य के विकास पर है।” महायुति में उठी इस दरार का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस की तरफ से तुरंत ही एक बयान सामने आ गया। पार्टी के प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि राकांपा मंत्रिमंडल बैठकों में आरएसएस की “विचारधारा” सुन रही है और अगर पवार की पार्टी उससे सहमत नहीं होगी, वह सत्ता में नहीं रह सकती। सावंत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरएसएस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने वाली विचारधाराओं को बढ़ावा देता है। शिंदे और शिवसेना विधायकों के हेडगेवार स्मारक जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनका ध्यान “पैसा बांटकर सत्ता हासिल करने और संवैधानिक लोकतंत्र को नष्ट करने” पर है। कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि सौ साल से अधिक समय से अस्तित्व में रहने के बावजूद आरएसएस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि हिंदुत्व का वास्तविक अर्थ क्या है। उन्होंने कहा, “कम से कम अब उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि हिंदुत्व वास्तव में क्या है।” इससे पहले रविवार सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ भाजपा एवं शिवसेना के विधायकों ने हेडगेवार के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी, लेकिन अजित पवार और उनके नेतृत्व वाली राकांपा के नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इस समय नागपुर में महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र जारी है। हर साल इस सत्र के दौरान भाजपा के मंत्री और विधायक रेशिमबाग में स्थित स्मृति मंदिर में आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर के स्मारक पर जाते हैं। विधानसभा में 41 विधायकों वाली राकांपा की ओर से पिछले साल केवल विधायक राजू करेमोरे और राजकुमार बडोले स्मृति मंदिर पहुंचे थे।