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पंजाब की सियासत में तेज़ हुई हलचल, फरवरी में अमित शाह के दौरे की तैयारी; क्या है BJP का गेम प्लान?

चंडीगढ़  पंजाब जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के नतीजों ने प्रदेश BJP समेत सेंट्रल लीडरशिप को पंजाब में पार्टी के हालातों के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. चुनाव में BJP को ग्रामीण आंचल में ज्यादा रिस्पॉन्स नहीं मिला. इसी वजह से सेंट्रल लीडरशिप ने पंजाब पर फोकस करने के लिए पार्टी के पॉलिसी मेकर्स से सलाह करने की तैयारी के संकेत दे दिए है, वहीं कहा जा रहा है कि सेंट्रल लीडरशिप अब पंजाब के मुद्दों और समस्याओं पर पंजाब के नेताओं से राय लेगी. इस बारे में जल्द ही दिल्ली में एक मीटिंग हो सकती है. पार्टी पंजाब में सीनियर नेताओं को ऑब्जर्वर भी नियुक्त कर सकती है.  मालवा में रैली कर सकते हैं गृह मंत्री सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज चौहान का फरवरी 2026 में पंजाब आने का कार्यक्रम बन रहा है, जिसे कुछ ही दिन में अंतिम रूप दिया जाएगा. इस दौरे के दौरान एक संभावित रैली मालवा में की जाएगी और इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने की योजना बनाई जा रही है. इस रैली में गृह मंत्री और कृषि मंत्री पंजाब के लिए कुछ घोषणाएं कर सकते हैं. खासकर रूरल बेल्ट को साधकर ग्रामीणों को खुश किया जा सकता है, क्योंकि BJP मान कर चल रही है कि ग्रामीणों में पार्टी के खिलाफ जितना गुस्सा था, उसको खत्म कर दिया गया है. अब उनको अपना बनाने की कवायद शुरू करनी है.   गठबंधन के लिए नेताओं से लेगे सलाह बेशक हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी पंजाब में जगह-जगह जाकर लोगों की नब्ज टटोल रहे हैं. रिपोर्ट BJP हाईकमान तक पहुंचा रहे हैं, वही दूसरे नेता जहां पंजाब के नेताओं से राज्य के मुद्दों पर रिपोर्ट लेंगे, वहीं भविष्य में किसी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करने पर भी वर्करों से सलाह लेंगे. बेशक कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे कद्दावर नेता BJP हाइकमान के सामने अपना दृष्टिकोण पहले ही रख चुके है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के टकसाली वर्करों ने सेंट्रल लीडरशिप को चिट्ठी लिखकर सलाह दी है कि अगर BJP को पंजाब में सत्ता हासिल करनी है तो पंजाब के ज्वलंत मुद्दों, अधिकारों और समस्याओं पर सोचना होगा.   ग्रामीण इलाकों के वोट जीतने के लिए अकेले चुनाव मैदान में उतरने की बजाय गठबंधन करना भी जरूरी है. पंजाब में BJP के शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन पर दिल्ली समेत पंजाब के कई नेताओं की अलग-अलग राय है, लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान को लेना है. बताया जा रहा है कि BJP की सेंट्रल लीडरशिप ने साफ कर दिया है कि पंजाब में किसी भी पार्टी के साथ समझौते के बारे में कोई भी फैसला पंजाब यूनिट से सलाह-मशविरा करने के बाद ही लिया जाएगा. इसलिए BJP साल 2026 में पंजाब संगठन को एक्टिव करने का प्लान बनाने में जुटी है. पंजाब में पार्टी के सोशल मीडिया विंग को मजबूत किया जाएगा. गौरतलब है अगर राज्य में किसी पार्टी का सबसे मजबूत सोशल मीडिया विंग है तो वह सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी का है, लेकिन अब BJP भी राज्य में पार्टी के सोशल मीडिया विंग को मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपनी अलग से रणनीति बनाने में जुटी हुई है.  

अमित शाह का पंचकुला दौरा: सहकारी सम्मेलन में हरियाणा को मिलीं नई सौगातें, नायब सैनी की जमकर तारीफ

पंचकुला केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पंचकुला आगमन पर हरियाणा को एक साथ कई सौगातें दी हैं। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित थे। शाह सहकारी सम्मेलन में पहुंचे थे। इस अवसर पर सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि अमित शाह ने जिला भिवानी में दूध शीतकरण केंद्र सलेमपुर प्लांट , जिला रेवाड़ी के हैफेड आटा मिल जाटूसाना तथा सहकारिता मंत्रालय द्वारा तैयार आईवाईसी के पोर्टल का पंचकुला से रिमोट द्वारा ई -लोकार्पण किया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने इसी अवसर पर हरियाणा राज्य सहकारी बैंकों के 5 लाभार्थियों को रुपे -प्लैटिनम डेबिट कार्ड तथा हरियाणा में कृभको द्वारा बनाए गए 2 एम-पैक्स के अध्यक्षों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र का वितरण किया। उन्होंने कृभको द्वारा तैयार आईवाईसी के समारोहों पर आधारित वर्ष पुस्तिका का विमोचन भी किया। इससे पूर्व कृभको कॉर्पोरेट फिल्म का प्रदर्शन किया गया इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण , सहकारिता मंत्री अरविन्द शर्मा , कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी, उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह, स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी, खेल मंत्री गौरव गौतम, हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अलावा कृभको के अध्यक्ष श्री वी सुधाकर चौधरी , प्रबंध निदेशक एस एस यादव भी उपस्थित थे।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पंचकूला में आयोजित 'सहकार से समृद्धि' कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा आज देश में किसान कल्याण, पारदर्शी शासन और तेज़ निर्णय क्षमता का आदर्श बन चुका है। अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वह कर दिखाया है, जिसकी हिम्मत बहुत कम सरकारें कर पाती हैं। चुनावी घोषणा पत्र के दौरान जब 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का प्रस्ताव सामने आया, तो उन्होंने रात को फोन करके इस घोषणा को पुनः कन्फर्म किया तो मुख्यमंत्री सैनी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आप घोषणा करिए, खरीद की ज़िम्मेदारी मेरी है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहाँ 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल खरीद ही नहीं, बल्कि 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में फसलों का भुगतान करके हरियाणा सरकार ने एक नई प्रशासनिक क्रांति भी की है। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों को देश में सबसे अधिक मूल्य देने का काम भी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने किया है, जिससे पूरे देश की सरकारों पर सकारात्मक दबाव बना है। अमित शाह ने हरियाणा सरकार की जल प्रबंधन और सिंचाई योजनाओं की भी विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा कि “पर ड्रॉप – मोर क्रॉप” योजना के अंतर्गत 85 प्रतिशत सब्सिडी, दशकों से वंचित क्षेत्रों तक सिंचाई का पानी पहुँचाना और 2088 अमृत सरोवरों का निर्माण, ये सभी कदम दूरदर्शी सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का छोटा राज्य होते हुए भी कृषि, दुग्ध उत्पादन, खेल और राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान देता रहा है। आज मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में यह परंपरा और भी सशक्त हुई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हरियाणा का उद्योग, जीएसटी और आयकर में बड़ा योगदान है, लेकिन किसी भी सरकार की असली पहचान यह होती है कि उसका किसान खुश है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के किसान को मुस्कुराने का कारण दिया है और यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।” अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र पर चलते हुए, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हरियाणा को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में और मजबूत स्थान दिलाएंगे।

एमपी में अमित शाह का हाई-प्रोफाइल विजिट: दो दिन अलर्ट मोड पर रहेगा प्रशासन, चप्पे-चप्पे पर पहरा

ग्वालियर  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 24 दिसंबर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंच सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, शाह यहां रात्रि विश्राम भी करेंगे और उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। इस यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। जिस वीआईपी होटल में गृह मंत्री ठहरेंगे, उसे पुलिस ने पहले ही घेरे में ले लिया है। शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों ने होटल का दौरा कर सुरक्षा का पूरा खाका तैयार किया। राजनीतिक हलचल बढ़ी, कांग्रेस की नजर भी बैठक पर अमित शाह के ग्वालियर में रात्रि विश्राम करने की खबर से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। भाजपा नेताओं का मानना है कि गृह मंत्री मुख्यमंत्री के साथ ग्वालियर-चंबल अंचल के प्रमुख भाजपा नेताओं और दिग्गजों के साथ बंद कमरे में महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र में पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। अहम मानी जा रही बैठक यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि चंबल अंचल भाजपा के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। अगले दिन यानी 25 दिसंबर को अमित शाह ग्वालियर के मेला मैदान में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं। मेला मैदान में तीन विशाल डोम लगाए जा रहे हैं, जिनमें करीब 30 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। नो मैन्स जोन घोषित सुरक्षा के लिहाज से पूरे आयोजन स्थल को नो मैन्स जोन घोषित किया जाएगा। डोम के अंदर-बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहेगा। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। कार्यक्रम स्थल तक आने वाले रास्तों पर बैरिकेड्स लगाए जाएंगे, ताकि किसी तरह की असुरक्षा की गुंजाइश न रहे।   अमित शाह की यह यात्रा सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं लग रही। रात्रि विश्राम और संभावित बैठकों ने इसे राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। भाजपा के स्थानीय नेता इसे पार्टी के लिए सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जबकि विपक्षी खेमे में भी इस पर नजर टिकी हुई है। कुल मिलाकर, ग्वालियर इस क्रिसमस पर राजनीतिक गहमागहमी का केंद्र बनने जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन को लेकर सुरक्षा सख्त, 25 दिसंबर को कई मार्ग बंद

ग्वालियर  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित ग्वालियर दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने व्यापक सुरक्षा व यातायात व्यवस्था की रूपरेखा तैयार कर ली है। 25 दिसंबर को प्रस्तावित इस वीआईपी विजिट के दौरान शहर में चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रहेगी और कई प्रमुख मार्गो पर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्रालय से अभी औपचारिक कार्यक्रम जारी होना शेष है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री वायुसेना के विशेष विमान से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंचेंगे और वहां से सीधे मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। एयरबेस से कार्यक्रम स्थल तक पूरे मार्ग पर जमीन से लेकर हाइराइज इमारतों तक सुरक्षा निगरानी की जाएगी। गृहमंत्री के आगमन से पहले शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह रहेगा वीआईपी रूट एयरबेस से निकलने के बाद वीआईपी काफिला एयरपोर्ट तिराहा, दीनदयालनगर, पिंटो पार्क, गोला का मंदिर, दूध डेयरी, भाऊसाहब पोतनीस एनक्लेव के सामने से होते हुए मेला मैदान पहुंचेगा।   -भिंड से ग्वालियर आने वाले वाहन बरेठा चौकी, बड़ागांव, हुरावली मार्ग से शहर में प्रवेश करेंगे। -मुरैना से आने वाला यातायात चार शहर का नाका से शहर में प्रवेश करेगा और वापसी भी इसी मार्ग से होगी। -मुरार से भिंड जाने वाले वाहन सात नंबर चौराहा, बरेठा चौकी मार्ग का उपयोग करेंगे। -वीआईपी विजिट के दौरान गोला का मंदिर चौराहा, सात नंबर चौराहा और सूर्य नमस्कार तिराहा से मेला मैदान की ओर जाने वाले मार्ग पर सामान्य वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। सीएम विजिट की तैयारी, डायवर्ट होगा यातायात शहर में तानसेन समारोह में शामिल लिए डा.मोहन यादव सोमवार को ग्वालियर आ सकते हैं। उनके प्रवास को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को बदला गया है। यातायात पुलिस अधिकारियों का कहना है सीएम डॉ. मोहन यादव के शहर आगमन के दौरान भारी वाहनों की शहर में एंट्री बंद रहेगी। -रेलवे स्टेशन से हजीरा जाने वाले वाहन तानसेन रोड से नए आरओबी होकर रेसकोर्स रोड से गोला का मंदिर के रास्ते जाएंगे। -पुरानी छावनी से रेलवे स्टेशन आने वाले संजयनगर पुल से बिरलानगर होकर रेलवे स्टेशन आएंगे। -चार शहर का नाका से हजीरा आने वाले वाहन घोड़ा चौक होकर आएंगे। घासमंडी, किलागेट से हजीरा जाने वाले वाहन सेवानगर, रमटापुरा पुल, तानसेन नगर से लोको होकर जाएंगे। सेवानगर, किलागेट से हजीरा से मल्लगढ़ा जाने के लिए किलागेट से वाहन बाबा कपूर, काशीनरेश की गली से सागरताल होकर जाएंगे।  

तेज बुखार में भी अमित शाह का जवाब तीखा, ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच राहुल गांधी सदन छोड़ गए

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार जब गृह मंत्री लोकसभा में बोल रहे थे उस समय वह बुखार से ग्रस्त थे। उनके शरीर का तापमान 102 डिग्री था। सदन की कार्यवाही से ठीक पहले डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और बुखार कम करने की दवाइयां दीं। बुखार के बावजूद अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे का भाषण दिया और विपक्ष के हर आरोप वोट चोरी, स्पेशल रिविजन इंस्पेक्शन (SIR) और चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर विस्तृत और आक्रामक तरीके से जवाब दिया।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनका भाषण उत्कृष्ट, तथ्यपूर्ण और विपक्ष के झूठों को उजागर करने वाला था। आपको बता दें कि राहुल गांधी हाल के दिनों में कई मंचों पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं और इसे “हाइड्रोजन बम” तक कह चुके हैं। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर रैली भी की थी और सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से इसे उठाया। सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि कोई उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें किस क्रम में क्या बोलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, “जब आप जीतते हैं, नई पोशाक पहनकर शपथ लेते हैं और सूची बिल्कुल ठीक लगती है। लेकिन जब बिहार की तरह जमीन खिसक जाती है तब अचानक मतदाता सूची में गड़बड़ी दिखने लगती है। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।” आपको बता दें कि अमित शाह जब जवाब देने लगे तो कुछ ही देर में राहुल गांधी संसद की अगुवाई में विपक्ष संसद छोड़कर बाहर चला गया। SIR पर भी दिया विस्तार से जवाब अमित शाह ने कहा कि SIR पर संसद में चर्चा होना आवश्यक नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष की मांग मानकर बहस में हिस्सा लिया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप चुनाव आयोग को आधिकारिक रूप से सौंपे ही नहीं गए थे।  

बंगाल मिशन: अमित शाह बोले—हर जगह ड्यूटी मोड में रहें कार्यकर्ता

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद उत्साहित भाजपा अब मिशन बंगाल पर जुटने वाली है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिल्ली स्थित आवास पर हुई डिनर मीटिंग में भाजपा नेताओं का होम मिनिस्टर अमित शाह ने मार्गदर्शन किया। एक तरफ उन्होंने बिहार में मिली जीत से अहंकार में ना आने की सीख दी तो वहीं यह भी कहा कि अब बंगाल के लिए जुटना होगा। उन्होंने कहा कि अब आगे हम लोगों को बंगाल की लड़ाई के लिए तैयार रहना है। उनकी स्पष्ट नसीहत थी कि सभी लोग जहां कम, वहां हम वाले भाव से काम करें और कार्यकर्ता मोड में रहें।   गृह मंत्री ने कहा कि जहां भी संगठन कमजोर पड़े, वहां जाकर ताकत बनना है। अमित शाह ने कहा कि नेताओं की भूमिका सिर्फ चुनाव लड़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि जहां कम, वहां हम के भाव से सक्रिय रहने की है। इसके अलावा बिहार के नेताओं के लिए भी अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि कोई भी यह ना माने की उसके चलते जीत मिली है। ऐसा सोचना अहंकार का भाव पैदा करता है। उन्होंने कहा, 'सभी नेताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है। चुनाव में 1 प्रतिशत का योगदान भी बहुत बड़ा होता है, लेकिन कोई नेता यह न सोचे कि जीत उसकी वजह से मिली है।ऐसा सोचना घमंड पैदा करता है।' अगले साल अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। बिहार के बाद बंगाल की ओर भाजपा रुख करना चाहती है। अमित शाह ने कहा कि किसी भी नेता की कहीं भी ड्यूटी लगाई जा सकती है। उनकी इस बात से साफ है कि दूसरे इलाकों के नेताओं को भी बंगाल में भेजा जा सकता है। इसके अलावा विधानसभा से लेकर बूथ लेवल तक कहीं भी तैनाती की जा सकती है। गौरतलब है कि बिहार में यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों से भाजपा नेताओं को बुलाया था। यूपी सरकार के मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तो बिहार की गली-गली में प्रचार करते और लोगों के पैर छूते नजर आए थे। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।  

अमित शाह ने किया ऐलान: देश 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से होगा पूरी तरह सुरक्षित

नई दिल्ली  31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। नक्सलवाद का वैचारिक पोषण किसने किया, जब तक उनको हम समझ नहीं पाते तब तक नक्सल खत्म नहीं होगा। शाह ने कहा कि कई लोग मानते हैं कि सशस्त्र गतिविधियों के समाप्त होने से नक्सली समस्या समाप्त हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं है। इस देश में नक्सली समस्या क्यों उत्पन्न हुई, बढ़ी और विकसित हुई? इसे वैचारिक समर्थन किसने प्रदान किया? कहा कि जब तक भारतीय समाज इस सिद्धांत, नक्सलवाद के इस विचार और समाज में वैचारिक समर्थन, कानूनी समर्थन और वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले लोगों को नहीं समझेगा, तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई समाप्त नहीं होगी। ‘2014 में 3 नक्सल हॉटस्पॉट थे’ सत्र को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आई तब नॉर्थ ईस्ट कॉरिडोर, जम्मू कश्मीर और नक्सल 3 हॉटस्पॉट थे। नॉर्थ ईस्ट में 70 फीसदी की कमी आई है। नागरिकों की मृत्यु में 85 फीसदी कमी आई है। वहीं 10,500 युवाओं ने आत्मसमर्ण किया। अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद पर चर्चा करने के पहले 60 के दशक से अबतक जितने लोग नक्सल में मारे गए है मै उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।   गृहमंत्री अमित शाह ने साफ किया कि हम किसी को मारना नहीं चाहते, लेकिन अगर कोई किसी निर्दोष को मरेगा तो उनको बचाना हमारा काम है। जो आत्म समर्पण करना चाहते है उनके लिए हमारी सरकार में रेड कार्पेट है। लेकिन जो हथियार उठाएगा उसको जबाव मिलेगा। अगर कोई बंदूक उठाएगा तो गोली का जवाब सरकार गोली से देगी। डाटा शेयर करते हुए बताया कि साल 2024 में नक्सल के खिलाफ अभियान में 290 नक्सली मारे गए, जो हथियार के साथ थे। इसके अलावा 1090 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 881 नक्सलियों ने खुद का आत्मसर्पण कर दिया। जम्मू कश्मीर पर की चर्चा शाह ने बताया कि जम्मू कश्मीर में मोदी के नेतृत्व में धारा 370 समाप्त हो गया। वहां सुनियोजित तरीके से विकास हुआ। सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु में 65 फीसदी और नागरिकों की मृत्य में 75 फीसदी की कमी आई। पशुपति से तिरुपति तक रेड कॉरिडोर का नारा अब खत्म हो गया। देश के भूभाग में 17 फीसदी हिस्सा नक्सल प्रभावित था। जब तक वामपंथी दल सत्ता में नहीं आए तब तक नक्सलवाद पनपता रहा। जैसे ही वो सत्ता में आए नक्सल में वहां गिरावट आई। कहा कि पहले की सरकार का नक्सल पर कोई स्थाई योजना नहीं था। जो ऑपरेशन चलते थे, स्टीयरिंग नक्सल के पास होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अमित शाह का बिहार दौरा: मिथिला, कोसी और सीमांचल के नेताओं को मिलेगा बड़ा टास्क

पटना गृह मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने सारण और चंपारण के नेताओं के साथ बेतिया में बैठक की। इसके बाद पटना में भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठक की। आज यानी शनिवार को मिथिला, कोसी, सीमांचल और अंग प्रदेश के 70 से विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की तैयारियों का जायजा लेंगे। वह समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर, बांका  भाजपा कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। बैठक में इन इलाकों से आने वाले मंत्री, विधायक, सांसद और वरीय पदाधिकारी शामिल होंगे। गृह मंत्री पहले समस्तीपुर के सरायगंज में बैठक करेंगे। इसके बाद अररिया के फॉरबिसगंज जाएंगे। यहां करीब पांच हजार नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देंगे। बैठक को लेकर सारी तैयारी पूरी इधर, सांगठनिक जिलों कोर कमेटी  बैठक में गृह मंत्री अमित शाह पहले सभी विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं की लिस्ट देखेंगे। इसके बाद यहां की तैयारियों का जायजा लेंगे। इसके बाद नेताओं को अपने क्षेत्र में आगामी चुनाव से जुड़े कुछ टास्क देंगे। बैठक को लेकर सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कोर कमेटी के सदस्यों को शत-प्रतिशत तैयार होकर आने का निर्देश दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया इधर, गृह मंत्री ने शुक्रवार को पहले पश्चिम चंपारण के चनपटिया में भाजपा कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। उन्होंने सारण, पश्चिम और पूर्वी चंपारण समेत 10 सांगठनिक जिलों के कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक की। इसके बाद उन्होंने पटना में प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठक की। यहां पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव हमारा लक्ष्य 225 सीटों पर जीत दर्ज करना है। इसलिए हर सीट पर कम से कम 225 बार जनसंपर्क करें। लोगों को एनडीए सरकार के विकास कार्यों को बताएं। महिला परिवार की केंद्र बिंदु हैं। उनकी समस्याओं को सुने। उनकी शिकायत और सुझावों को डायरी में नोट करें और उस पर काम करें। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हर सीट को आप अपना समझें। अपनी पार्टी, उसकी पार्टी की बातों को मन में नहीं लाएं। हर एक सीट पर अपना 100 प्रतिशत दें। बगैर किसी भेदभाव के चुनाव जीतना ही एनडीए का लक्ष्य है।  

परिवारवाद पर अमित शाह की तीखी टिप्पणी, स्टालिन और सोनिया गांधी घिरे

चेन्नई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक प्रतिष्ठित तमिल नेता, सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए मनोनीत किया है। अमित शाह ने कहा कि पहलगाम में, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने निर्दोष नागरिकों की दुखद जान ले ली। मोदी ने देश को दृढ़ता से आश्वस्त किया कि आतंकियों और उनके कृत्यों को अंजाम देने वालों, दोनों को परिणाम भुगतने होंगे। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया। इसके अलावा, 'ऑपरेशन महादेव' ने पहलगाम में हुए जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। पूरा विपक्ष एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध कर रहा है। प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि अगर किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को जेल होती है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। विपक्ष ने इस विधेयक पर सवाल उठाए। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि डीएमके के दो वरिष्ठ मंत्री लगभग आठ महीने जेल में रहे और इस दौरान उन्होंने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया। किसी व्यक्ति का जेल से शासन करना अव्यावहारिक और अनुचित है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि यहां तक कि डीएमके इस विधेयक को 'काला विधेयक' बताकर इसकी आलोचना कर रहा है। मैं स्टालिन को याद दिलाना चाहूंगा कि अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों को ऐसे आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकारों में से एक है, जो कई हाई-प्रोफाइल घोटालों में फंसी है। इनमें टीएएसएमएसी शराब घोटाला, रेत खनन घोटाला, परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और नौकरी के बदले पैसे कांड जैसे कई अन्य घोटाले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को 18 प्रतिशत वोट शेयर मिला, जबकि हमारी सहयोगी पार्टी, एआईएडीएमके को 21 प्रतिशत वोट मिले। कुल मिलाकर इस गठबंधन को कुल वोट शेयर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा मिला। एनडीए और एआईएडीएमके के बीच यह साझेदारी सिर्फ एक राजनीतिक सहयोग नहीं है, यह तमिलनाडु के विकास और प्रगति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता है। अमित शाह ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि एमके स्टालिन का एकमात्र एजेंडा अपने बेटे के लिए मुख्यमंत्री पद सुरक्षित करना है, जबकि सोनिया गांधी का प्राथमिक लक्ष्य अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाना है। मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूं कि दोनों ही अपनी महत्वाकांक्षाओं में विफल रहेंगे, क्योंकि एनडीए पूरी तरह से जीत की ओर अग्रसर है।

अमित शाह बोले, राहुल गांधी कर रहे हैं संस्थाओं पर विश्वास कम करने का प्रयास

कोच्चि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोच्चि में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को मान न दिए जाने का आरोप लगाया। शाह आगामी महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भाजपा के राज्य नेतृत्व को तैयार करने हेतु शुक्रवार को केरल की वाणिज्यिक राजधानी कोच्चि के एक दिवसीय दौरे पर हैं। एक कार्यक्रम में शाह ने बताया कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियां पिछली सत्ता की देन है। उन्होंने कहा, “जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण देश के लिए नासूर जैसा है। 2014 में नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इन तीनों की जगह ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस’ की शुरुआत हुई है और जिसे पूरा देश अनुभव कर रहा है। करप्शन को दूर करने का प्रयास देश के पीएम ने किया है। चूंकि स्थिरता है, इसलिए लंबे समय तक नीतियां चल रही हैं। इस 11 साल के कालखंड को जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि जनता के देश में पहले जो सवाल था कि भविष्य कैसा होगा, वो अब नहीं है। आज 140 करोड़ लोग मानते हैं कि 2047 में भारत टॉप पर होगा और इसे लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। वहीं, राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर बोले, जब से वो मुखिया बने हैं तब से संवैधानिक संस्थाओं को शक की नजर से देख रहे हैं। अभी जो एसआईआर हो रहा है, वो 2003 में भी हुआ था, 1961 में भी हुआ था और 1970 में भी हुआ था। तो अब समस्या क्या है? अगर एसआईआर से कोई भी नागरिक या राजनीतिक पार्टी संतुष्ट नहीं है, तो वह असेंबली के रिटर्निंग ऑफिसर, जिला कलेक्टर और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर के सामने अपील कर सकता है। शाह ने सदन में पेश तीन विधेयकों को लेकर कहा कि लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है। ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है। ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू होगा। बता दें कि मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) बिल 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 और संविधान (130वां संशोधन) बिल 2025 पेश किए थे। जिसमें प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध किया।