samacharsecretary.com

उधमपुर मुठभेड़: सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को किया समाप्त, इलाके में कड़ी सुरक्षा

 उधमपुर   जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बंसंतगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ J&K पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जोफर रामनगर क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) शुरू किया था। तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की भी सूचना है।  जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जोफर इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो सक्रिय कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की ज्‍वाइंट टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका पिछले करीब एक महीने से उनके रडार पर था और यहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार उनकी निगाह बनी हुई थी. यह 15 दिसंबर के बाद उधमपुर में दूसरी मुठभेड़ थी, जब सौन गांव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे। जनवरी में कठुआ जिले में तीन और किश्तवाड़ के चतरू वन क्षेत्र में चार मुठभेड़ें हुईं जिनके परिणामस्वरूप कठुआ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान को ढेर किया गया और किश्तवाड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया। ये मुठभेड़ जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे गहन अभियानों के बीच हुईं। उस्मान उसी गिरोह का हिस्सा था जो उधमपुर जिले में फंसा हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से उस क्षेत्र में सक्रिय था। 'ऑपरेशन केया' के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया. मंगलवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली, जिसके बाद एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में पहुंचे, आतंकियों ने घने जंगलों में छिपकर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मुठभेड़ में ढेर  सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया और इलाके में एडिशनल फोर्स डिप्लॉइड की गई.  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन की निगरानी की. रात तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने में आखिरकार कामयाबी हासिल की.  सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन केया' नाम दिया, जो खुफिया सूचना पर आधारित था. इलाके में ऑपरेशन के बाद भी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटा जा सके.

पहला स्वदेशी ऑटोनॉमस रोबोट ‘डैगर’ जयपुर में बना, दिल्ली में परेड में दिखेंगे मेड इन इंडिया के 3 रोबोट

 जयपुर  भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के खिलाफ हुए सफल ऑपरेशन में मानवरहित रोबोट ‘जीना’ ने मुख्य भूमिका निभाई। करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगलों के बीच छिपे भारी हथियारों से लैस तीन आतंकियों का पता लगाने और उन्हें ढेर करने में इस एआई-लेस रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से बिना किसी मानवीय क्षति के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। स्वदेशी ‘डैगर’ भारतीय सेना की 50 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल किया गया ‘डैगर’ देश का पहला पूरी तरह से स्वदेशी और नेक्स्ट-जेन ऑटोनॉमस रोबोट है। यह रोबोट न केवल युद्ध क्षेत्र में रीयल-टाइम निगरानी करता है, बल्कि भीषण गोलीबारी के बीच घायलों को सुरक्षित स्थान तक निकालने में भी सक्षम है। ‘डैगर’ को राइफल, लाइट मशीन गन (LMG) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस किया जा सकता है। यह 450 किलो तक वजन उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों पर 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव इन अत्याधुनिक रोबोट्स को जयपुर की कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स द्वारा ‘सीतापुरा’ क्षेत्र में डिजाइन और तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा और डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा के अनुसार, डैगर को पूरी तरह से भारत में विकसित करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है। रक्षा रोबोटिक्स के अलावा, कंपनी ने ‘कृष्णा’ नामक रोबोट भी बनाया है जो खतरनाक आग बुझाने और केमिकल प्लांट्स जैसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने में सक्षम है। राजपथ पर दिखेगा पराक्रम आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देश की राजधानी दिल्ली में इन स्वदेशी रोबोट्स का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सेना की तकनीकी निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किए गए ये रोबोट अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के लिए ‘कवच’ का काम करेंगे। इनकी मदद से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए मिलिट्री ऑपरेशन करना संभव होगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इन खूबियों से लैस हैं ये व्हीकल यूजीवी डैगर : नाइट विजन के साथ अत्याधुनिक फीचर इसे जमीन पर सहायता के लिए ह्यूमन कंट्रोल से लैस किया गया है। मल्टी यूजीवी कॉर्डिनेट मूवमेंट के लिए कॉन्वॉय फॉलोइंग मोड का विकल्प भी है। मजबूत मिलिट्री-ग्रेड ऑल-टेरेन मोबिलिटी यूजीवी डैगर दूसरे रोबोट्स की तुलना में अधिक मजबूत है। इसमें नाइट विजन के साथ रीयल टाइम आईएसआर जैसे अत्याधुनिक फीचर भी हैं। डैगर युद्ध क्षेत्र में घायलों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की खूबी रखता है। यह आईएसआर मिशन के लिए टेथर्ड ड्रोन को सपोर्ट करता है। इस अत्याधुनिक रोबोट को आरसीडब्ल्यूएस के अनुकूल किया गया है। इससे यह राइफल, लाइट मशीन गन (एलएमजी), मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर (एजीएल) के साथ काम करने में भी सक्षम है। इसकी खासियत से सैनिकों को उबड़-खाबड़ रास्तों व खतरे वाले स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होगी और जान का खतरा नहीं होगा। जीना : ऊंचाई और मुश्किल इलाकों के लिए बनाया यह एक मिनी वेपनाइज्ड मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। इसे विशेष तौर पर ऊंचाई और मुश्किल इलाकों में टेक्निकल निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किया है। यह दिन के साथ रात में भी कैमरा पेलोड और रिमोट वेपन स्टेशन इंटीग्रेशन को सपोर्ट करता है। इससे सुरक्षित दूरी से बिना किसी खतरे के मिलिट्री ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन रक्षा मिशन के लिए तेज डिप्लॉयमेंट, उच्च स्थिरता और मजबूत मोबिलिटी सुनिश्चित करता है। अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ जीना रोबोट अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानव रहित रोबोट 'जीना' का इस्तेमाल किया गया था। वहां करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल में आतंकवादियों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल किया था। इस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस तीनों आतंकवादी मारे गए थे। कृष्णा : आग लगने की जगह पानी-फोम फेंककर बुझाने में सक्षम यह एडवांस्ड एआई लैस फायर फाइटिंग यूजीवी है। इसे औद्योगिक और तेल व गैस, केमिकल प्लांट, आयुध और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे उच्च जोखिम वाले आग वाले वातावरण के लिए बनाया गया है। यह ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसर से रियल-टाइम निगरानी के साथ रिमोट फायर सप्रेशन को सक्षम बनाता है। आपातकालीन टीमों के लिए डिजाइन किया गया कृष्णा रोबोट खतरनाक स्थितियों में इंसान की जान के जोखिम को कम करते हुए अत्यधिक प्रेशर से पानी/फोम फेंकने में सक्षम है। अत्यधिक गर्मी या धुएं वाला वातावरण भी इसको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स की डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा ने बताया- यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम है। इसे 30 किलोमीटर की रेंज में ऑटोनॉमस नेविगेशन से ऑपरेट किया जा सकता है। गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक्स को युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन करने की काबिलियत रखता है। भारत में डिजाइन, डेवलप हैं ये रोबोट क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा ने कहा- हमें गर्व है कि हमने यूजीवी डैगर को पूरी तरह से भारत में डिजाइन, डवलप और निर्मित किया है। इससे यह सही मायने में पूरी तरह से स्वदेशी रोबोट है। टीम ने 'मेक इन इंडिया' अभियान में योगदान देने की कोशिश की है। यह कदम भारतीय सेना के रक्षा रोबोटिक्स में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माइलस्टोन है। उल्लेखनीय है कि क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स भारत की रक्षा और अग्निशमन रोबोटिक्स इनोवेटर कंपनी है। इसके द्वारा राइजिंग राजस्थान में किए एमओयू के तहत देश की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में स्थापित की जा रही है।  

ग्वालियर के बेटे की शहादत, पत्नी को आखिरी शब्द: ‘मैं ऊंचाई पर जा रहा हूं’, डोडा में बलिदान

ग्वालियर  शहर का सपूत शैलेंद्र सिंह भदौरिया देश की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर में बलिदानी हो गया। डोडा जिले के भद्रवाह-चांबा मार्ग पर स्थित खानी टाप क्षेत्र में सेना की बुलेट प्रूफ बस गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में 10 जवान बलिदान हुए, जिनमें शैलेंद्र सिंह भदौरिया भी शामिल थे। हादसे से पहले  रात शैलेंद्र ने फोन पर पत्नी शिवानी और बेटे भावेश से बात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि "ख्याल रखना, मैं ऊंचाई पर जा रहा हूं।" नेटवर्क की समस्या के कारण वीडियो कॉल पूरी नहीं हो सकी थी और कुछ देर बाद फोन कट गया। इसके बाद गुरुवार दोपहर उनकी यूनिट से बलिदान की सूचना स्वजनों को दी गई। शव सेना द्वारा ग्वालियर लाया जा रहा बलिदानी जवान का शव सेना द्वारा ग्वालियर लाया जा रहा है, जो शुक्रवार को पहुंचेगा। ग्वालियर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। इस दौरान सेना और स्थानीय पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। शैलेंद्र सिंह भदौरिया, पिता हनुमंत सिंह भदौरिया, मूल रूप से भिंड जिले के निवासी थे। वर्ष 2007 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में भारतीय सेना की 4-आरआर यूनिट में हवलदार के पद पर पदस्थ थे। ग्वालियर के गोला का मंदिर स्थित पिंटो पार्क क्षेत्र की प्रीतम विहार कॉलोनी में उनका निवास है, जहां पिता, दो भाई, पत्नी और तीन बच्चे रहते हैं। बलिदान की खबर मिलते ही ग्वालियर स्थित उनके घर पर रिश्तेदार, परिचित और सेना के अधिकारी पहुंचने लगे। पत्नी शिवानी बेसुध हो गईं। छह वर्षीय बेटा भावेश और बेटियां अक्षिता व राधिका का रो-रोकर बुरा हाल है। शैलेंद्र तीन भाइयों में मझले थे।  

आसिम मुनीर के जाने के बाद लीबिया को बड़ा झटका, आर्मी चीफ की विमान दुर्घटना में मौत

अंकारा लीबिया के लिए पाकिस्तान पनौती बनकर निकला है. पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के कदम पड़ते ही लीबिया को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान के साथ डिफेंस डील करते ही लीबिया में दुखों का पहाड़ टूटा है. जी हां, लीबिया के आर्मी चीफ की प्लेन क्रैश में मौत हो गई है. एक प्राइवेट जेट में लीबिया के सेना प्रमुख और चार अन्य अधिकारी तुर्की से अपने देश लौट रहे थे. तभी उनका प्लेन क्रैश हो गया. इस प्लेन क्रैश में लीबिया के आर्मी चीफ और अन्य 7 लोगों की मौत हो गई. इनमें तीन क्रू मेंबर थे. दरअसल, लीबिया के मिलिट्री चीफ, चार अन्य अफसरों और तीन क्रू मेंबर्स को ले जा रहा एक प्राइवेट जेट मंगलवार को तुर्की की राजधानी अंकारा से उड़ान भरने के बाद क्रैश हो गया. इससे विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई. लीबिया के अधिकारियों ने बताया कि प्लेन क्रैश का कारण विमान में तकनीकी खराबी थी. तुर्की के अधिकारियों ने बताया कि लीबिया का प्रतिनिधिमंडल तुर्की और लीबिया के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के मकसद से उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता के लिए अंकारा में था. लीबिया के पीएम ने किया कन्फर्म लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल-हामिद दबीबा ने आर्मी चीफ जनरल मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद और चार अधिकारियों की मौत की पुष्टि की और फेसबुक पर एक बयान में कहा कि यह दुखद दुर्घटना तब हुई जब प्रतिनिधिमंडल घर लौट रहा था. प्रधानमंत्री ने इसे लीबिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया. लीबिया के आर्मी चीफ अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया में टॉप सैन्य कमांडर थे और लीबिया की सेना को एकजुट करने के लिए चल रहे संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले प्रयासों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जो लीबिया के संस्थानों की तरह ही विभाजित हो गई है. आर्मी चीफ के अलावा कौन अफसर मरे? तुर्की प्लेन क्रैश में मारे गए चार अन्य अधिकारी जनरल अल-फितौरी घ्रैबिल, लीबिया की जमीनी सेना के प्रमुख, ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी (जिन्होंने सैन्य निर्माण प्राधिकरण का नेतृत्व किया), मोहम्मद अल-असावी दियाब, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार, और मोहम्मद उमर अहमद महजूब, चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय में एक सैन्य फोटोग्राफर थे. तीनों क्रू मेंबर्स की पहचान तुरंत पता नहीं चल पाई. कैसे हुआ लीबिया के आर्मी चीफ का प्लेन क्रैश तुर्की के अधिकारियों ने बताया कि फाल्कन 50-टाइप के बिजनेस जेट का मलबा अंकारा से लगभग 70 किलोमीटर (लगभग 43.5 मील) दक्षिण में हयमाना जिले के केसिक्कावाक गांव के पास मिला है. इससे पहले मंगलवार शाम को तुर्की के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने कहा कि अंकारा के एसेनबोगा हवाई अड्डे से उड़ान भरने के बाद लीबिया लौट रहे विमान से उनका संपर्क टूट गया था.     तुर्की के आंतरिक मंत्री अली येरलिकाया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि विमान ने मंगलवार रात 8:30 बजे उड़ान भरी थी और 40 मिनट बाद संपर्क टूट गया.     येरलिकाया ने कहा कि सभी संचार बंद होने से पहले विमान ने हयमाना के पास आपातकालीन लैंडिंग का संकेत दिया था.     तुर्की के राष्ट्रपति संचार कार्यालय के प्रमुख बुरहानेटिन दुरान ने कहा कि विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बिजली की खराबी के बारे में सूचित किया और आपातकालीन लैंडिंग का अनुरोध किया.     विमान को वापस एसेनबोगा की ओर मोड़ दिया गया, जहां उसकी लैंडिंग की तैयारी शुरू हो गई थी.     हालांकि, दुरान ने बताया कि इमरजेंसी लैंडिंग के लिए नीचे उतरते समय प्लेन रडार से गायब हो गया. आसमान में धमाका और बिजली जैसी चमक स्थानीय टेलीविज़न स्टेशनों पर दिखाए गए सिक्योरिटी कैमरे के फुटेज में हेमाना के ऊपर रात का आसमान अचानक एक धमाके जैसी चीज़ से रोशन होता दिखा. अंकारा में रहते हुए लीबिया के आर्मी चीफ अल-हद्दाद ने तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी. अंकारा में एयरपोर्ट को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था और कई फ्लाइट्स को दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया था. तुर्की के न्याय मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में आम तौर पर जैसा होता है, वैसे ही इस क्रैश की जांच के लिए चार प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किए गए हैं. तुर्की जाएगी लीबिया की जांच टीम फेसबुक पर एक सरकारी बयान के अनुसार, लीबिया इस क्रैश की जांच में तुर्की अधिकारियों के साथ काम करने के लिए अंकारा में एक टीम भेजेगा. लीबियाई प्रतिनिधिमंडल का मंगलवार का दौरा तुर्की की संसद द्वारा लीबिया में सेवारत तुर्की सैनिकों के कार्यकाल को दो साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी देने के एक दिन बाद हुआ. तुर्की ने 2019 में अंकारा और त्रिपोली स्थित सरकार के बीच हुए सुरक्षा और सैन्य सहयोग समझौते के बाद सैनिक तैनात किए थे. बता दें कि बीते दिनों ही आसिम मुनीर लीबिया में मौजूद थे. मुनीर बन गए पनौती लीबिया को यह झटका ऐसे वक्त में लगा है, जब आसिम मुनीर के एक दिन पहले ही लीबिया में कदम पड़े थे. एक तरह से कहें तो पाकिस्तान लीबिया के लिए पनौती साबित हुआ है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बीते दिनों 2025 में लीबिया का आधिकारिक दौरा किया. इस दौरान उन्होंने लीबियन नेशनल आर्मी (एलएनए) के कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल खलीफा हफ्तार और उनके डिप्टी सद्दाम खलीफा हफ्तार से बेनगाजी में मुलाकात की. इस दौरे के बाद पाकिस्तान और लीबिया के बड़ी डिफेंस डील हुई. इसके तहत पाकिस्तान अपने फाइटर जेट्स लीबिया को देगा.

जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ में अलर्ट: दरवाज़ा खटखटाकर आतंकियों ने मांगा खाना, पुलिस को कॉल के बाद बड़ा अभियान शुरू

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ और आसपास के इलाके में एक बार फिर से आतंकी हलचल के संकेत मिले हैं. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात बसंतगढ़ के ऊपरी इलाके में स्थित चिंगला बलोठा गांव में तीन संदिग्ध आतंकियों ने एक बकरवाल परिवार के घर का दरवाजा खटखटाया और खाना मांगा. इससे घर का मालिक घबराकर भाग गया और इस बारे में पुलिस को जानकारी दी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर का मालिक अचानक तीन अजनबी युवकों को देखकर घबरा गया और मौके का फायदा उठाकर भाग निकला. उसने तुरंत पास के पुलिस चौकी और सेना को सूचना दी. इलाके में आतंकियों के होने का इनपुट मिलने के बाद रात से ही सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), CRPF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने चिंगला बलोठा समेत ऊपरी बसंतगढ़ के घने जंगलों, गुफाओं और चोटियों को घेर लिया है. ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की जा रही है. गुरुवार सुबह तक ये सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है. बता दें कि बसंतगढ़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा (LoC) से महज कुछ किलोमीटर दूर है और पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए डोडा-किश्तवाड़ के घने जंगलों तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता रहा है. हाल के महीनों में भी इसी इलाके में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं और कई आतंकी मारे जा चुके हैं.  

एलओसी पर अचानक हलचल, सेना सतर्क—पाकिस्तान सीमा पर हाई अलर्ट जारी

नई दिल्ली रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक ओर कहा, ‘सिंध भले ही आज भौगोलिक रूप से भारत का हिस्सा नहीं, लेकिन सभ्यता के नजर‍िये से सिंध हमेशा भारत का अभिन्न अंग रहेगा. जहां तक जमीन की बात है, सीमाएं बदल सकती हैं. कौन जानता है क‍ि कल सिंध फ‍िर भारत में वापस आ जाए.’ उनके बयान से पाक‍िस्‍तान में हलचल मची हुई है. दूसरी ओर खबर आ रही क‍ि पाक‍िस्‍तान से लगते इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी पर हलचल तेज हो गई है. कहा तो यहां तक जा रहा क‍ि भारत ने इस इलाके में फौज की संख्‍या दोगुनी कर दी है. हालांकि, इसके पीछे वजह कुछ और बताई जा रही है. दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं. ब्लास्ट के तुरंत बाद से ही केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियां लगातार इनपुट साझा कर रही हैं, जिन्हें देखते हुए इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) दोनों ही सेक्टरों में फोर्सेज की तैनाती को कई स्तर पर बढ़ा दिया गया है. सीमा पर हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जवानों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और गश्त का दायरा भी रात-दिन लगातार बढ़ाया गया है.     दिल्ली ब्लास्ट के बाद आतंकियों की हलचल तेज     इनपुट्स के अनुसार फिलहाल जम्मू-कश्मीर में करीब 131 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 117 पाकिस्तानी आतंकी बताए जा रहे हैं. इनके साथ 14 स्थानीय मददगार भी शामिल हैं, जो इन आतंकियों को हाइडआउट बदलने, मूवमेंट छिपाने और संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. वहीं, सीमा पार भी बड़ी संख्या में आतंकी घुसपैठ की फिराक में बैठे हुए हैं.     सर्दियों का मौसम जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए एक अलग चुनौती लेकर आता है. पुंछ-राजौरी सेक्टर में बर्फबारी और गहरी धुंध के कारण एलओसी के रास्ते से घुसपैठ लगभग नामुमकिन हो जाती है. ऐसे में खुफिया एजेंसियों को यह इनपुट मिल रहा है कि आतंकी अब इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) को घुसपैठ का नया रास्ता बनाने की तैयारी में हैं. इंटरनेशनल बॉर्डर पर बढ़ी हलचल यही वजह है कि सेना और बीएसएफ ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर सुरक्षा तैनाती को दोगुना कर दिया है. पेट्रोलिंग के दौरान महिला और पुरुष जवान दोनों शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि पेट्रोलिंग टीम में वही महिला अधिकारी भी तैनात हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कई पोस्ट को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी.  उस इंटरनेशनल बॉर्डर तक पहुंची, जहां से पाकिस्तानी पोस्ट महज कुछ मीटर की दूरी पर साफ दिखाई देती हैं. यह वही जोन है जहां दुश्मन हर समय नजर बनाए रखता है. हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. सामने पाकिस्तान का पोस्ट, हर क्षण खतरा, और पहरेदारी में जरा भी ढिलाई की गुंजाइश नहीं. हथियार हर पल तैयार बीएसएफ और सेना के जवानों ने बताया कि उनके हथियार हर समय लोडेड और तैयार रहते हैं. पेट्रोलिंग के दौरान उनकी निगाहें लगातार पाकिस्तान की दिशा में रहती हैं. एक जवान ने कहा, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता. वे कभी भी किसी भी हरकत की कोशिश कर सकते हैं. इसी लिए हर सेकेंड अलर्ट रहना पड़ता है. एक महिला अधिकारी ने कहा, खतरे कई हैं, लेकिन हमारे अंदर कोई डर नहीं है. हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं. बॉर्डर पर हम हैं, तो देश सुरक्षित है. ड्रोन खतरा बड़ा, अब स्पेशल ट्रेनिंग दे रही सेना जवानों ने यह भी खुलासा किया कि पहले सीमा पर मुकाबला केवल ‘रेंज फाइट’ तक सीमित था. यानी दूर से फायरिंग. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल बेहद नजदीक से किया गया. इसके बाद से जवानों को ड्रोन डिटेक्शन और ड्रोन-न्यूट्रलाइजेशन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. फोर्सेज के अनुसार पाकिस्तान सीमा पर तैनात पोस्टों से ड्रोन भेजने की कई असफल कोशिशें पहले भी हुई हैं. यही वजह है कि अब हर पेट्रोलिंग टीम में ‘एंटी-ड्रोन गियर’ और प्रशिक्षित जवान शामिल किए गए हैं.  जवानों का स्पष्ट संदेश जवानों ने कैमरे पर सीधे पाकिस्तान को संदेश भेजते हुए कहा, सीमा पर कोई भी नापाक हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पाकिस्तान की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि चाहे घुसपैठ की कोशिश हो, ड्रोन से हथियार भेजने की साजिश, या पाक रेंज से फायरिंग, हर तरह की प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए वे पूर्ण रूप से तैयार हैं.  

LoC के पास उरी में आतंकवादियों पर सेना की कार्रवाई, एनकाउंटर अभी भी जारी

उरी  आतंकी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अब जम्मू पुलिस जल्द ही किरायेदारों को लेकर नया मुहिम शुरू करने जा रही है. किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने और लोगों की थाने आने-जाने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक विशेष वेब पोर्टल शुरू करने जा रही है. जम्मू के एसएसपी जोगिंदर सिंह ने कहा कि वर्तमान मैनुअल प्रणाली में हर किरायेदार और मकान मालिक को थाने में फिजिकली उपस्थित होना पड़ता है, जिससे अक्सर असुविधा होती है. उन्होंने आगे बताया कि हम इस भौतिक संपर्क को खत्म करने पर काम कर रहे हैं. एक उपयोगकर्ता-अनुकूल किरायेदार सत्यापन पोर्टल विकसित किया जा रहा है और जल्द ही शुरू किया जाएगा. एसएसपी जोगिंदर सिंह ने बताया कि पोर्टल शुरू होने के बाद न तो किरायेदार और न ही मकान मालिक को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता होगी. सत्यापन फार्म ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेगी. बता दें क‍ि अक्‍सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि आतंकवादी किरायेदार के रूप में रह रहे हैं, लेकिन उनके बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता है. एसएसपी ने यह भी कहा कि दुकानदारों और कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का सत्यापन करना डीसीपी के आदेशों के तहत अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि हर दुकानदार या कंपनी को अपने कर्मचारियों का सत्यापन सुनिश्चित करना होगा. यह अनिवार्य है. सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर एसएसपी ने कहा कि पुलिस ने सरकार से आवश्यक नियम लागू करने का आग्रह किया है. कैसे विस्‍तार करता गया अल-फलाह ट्रस्‍ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी पीएमएलए-2002 की धारा 19 के तहत की गई. ईडी ने इस मामले में अपनी जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर की थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद ने छात्रों और अभिभावकों को धोखा देने के लिए धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से एनएएसी मान्यता का दावा किया था, जबकि विश्वविद्यालय को यूजीसी मान्यता प्राप्त नहीं थी. ईडी की जांच में यह सामने आया कि अल-फलाह ट्रस्ट (जो 1995 में स्थापित हुआ था) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव था, लेकिन इसके बावजूद इसने 1990 के दशक से लेकर अब तक जबरदस्त विस्तार किया. जांच में यह भी पाया गया कि ट्रस्ट ने अपनी आय को पारिवारिक संस्थाओं में ट्रांसफर किया और इसके लिए निर्माण तथा खानपान के ठेके अपने परिवार के सदस्य संस्थाओं को दिए.

J&K के कुपवाड़ा में बड़ी सफलता! सेना ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर 2 आतंकियों को किया ढेर

कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ घुसपैठ की कोशिश को सेना ने नाकाम कर दिया। साथ ही, जवानों ने 2 अज्ञात आतंकवादियों को मारा गिराया है। सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला था। इसके आधार पर कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया। सेना ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'सतर्क सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी। इस दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। फिलहाल इलाके की तलाशी जारी है।' वहीं, श्रीनगर में पुलिस ने  तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से हथियार और गोला-बारूद जब्त कर आतंकी साजिश नाकाम कर दी गई। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि ममता चौक, कोनाखान डलगेट के पास नियमित वाहनों की जांच चल रही थी। इस दौरान पुलिस की टीम ने बिना पंजीकरण संख्या वाली काले रंग की मोटरसाइकिल को रोका। रुकने का इशारा करने पर मोटरसाइकिल सवार और पीछे बैठे दो लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया। देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान शाह मुतैयब और कामरान हसन शाह के रूप में हुई है। ये दोनों कुलीपोरा खानयार श्रीनगर के निवासी हैं। मोहम्मद नदीम उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी है और वर्तमान में कावा मोहल्ला, खानयार में रह रहा है। पुलिस ने बताया कि इनके पास से एक देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद हुए। शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि आरोपी बरामद हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल करके इलाके में किसी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। खानयार पुलिस स्टेशन में यूएपीए और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इन्फेंट्री स्कूल महू में ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत नई रिसर्च लैब स्थापित

 महू   ड्रोन तकनीक को भविष्य की युद्ध प्रणाली में निर्णायक भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। भारतीय सेना अब स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलाजी को लेकर बड़ा कदम उठा रही है। सेना के ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में मान्यता प्राप्त इन्फेंट्री स्कूल महू और आईआईटी कानपुर इनक्यूबेटेड डिफेंस ड्रोन निर्माता वीयू डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच संयुक्त उपक्रम के तहत अत्याधुनिक ड्रोन रिसर्च लैबोरेटरी स्थापित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में महू स्थित पाथ समूह का स्ट्रेटेजिक निवेश भी शामिल है। सेना की समस्याओं व आवश्यकताओं पर शोध कर होगा नवाचार समय के साथ-साथ युद्ध तकनीक, रणनीति और जरूरतें बदलती जा रही हैं। तकनीकी युग में युद्ध के दौरान ही कई बड़ी समस्याएं व चुनौतियां सामने आती हैं। इनको त्वरित रूप से हल करने के लिए भारतीय सेना का प्रतिष्ठित इन्फेंट्री स्कूल वर्तमान और भविष्य में होने वाले युद्ध की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ी आवश्यकताओं और समस्याओं को वीयू डायनेमिक्स कंपनी के साथ साझा करेगा। इसके बाद दोनों की संयुक्त अनुसंधान टीम आवश्यकताओं व समस्यों के तकनीकी समाधान को लेकर शोध कर नवाचार करेंगे, फिर त्वरित विकास के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने वाले ड्रोन समाधानों पर कार्य करेगी। यह होगी विशेषता     इस रिसर्च लैब में ऐसे ड्रोन सिस्टम विकसित किए जाएंगे जो संचार बाधित या जीपीएस जैम की स्थिति में भी मिशन पूरा करने में सक्षम हों।     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से लक्ष्य की पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता रखते हों।     इस लैब से विदेशी निर्भरता से मुक्त होकर पूर्ण रूप से स्वदेशी निर्मित तकनीकी समाधान प्रदान कर सकेंगे।     तेज प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण के माध्यम से युद्ध में होने वाली वास्तविक जरूरतों को पूरा करेंगे।     इस प्रयोगशाला में एफपीवी अटैक ड्रोन, कमिकाजी प्लेटफार्म और लंबी दूरी वाले फिक्स्ड-विंग ड्रोन सहित कई सामरिक ड्रोन प्रणालियों के विकास पर कार्य होगा। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम यह पहल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाते हुए भारतीय सेना को भविष्य की युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार किए गए स्वदेशी ड्रोन समाधान उपलब्ध कराएगी। यह सहयोग देश की तीन प्रमुख शक्तियों के एकीकृत प्रयास के परिणाम हैं। इसमें भारतीय सेना का युद्ध अनुभव, भारतीय स्टार्टअप का नवाचार व भारतीय उद्योग की मजबूती शामिल है। जिससे भविष्य में होने वाले युद्ध व युद्ध संभावनाओं में भारत की निर्णायक बढ़त सुनिश्चित करेंगे। इसको लेकर महू की इन्फेंट्री स्कूल में समारोह आयोजित हुआ। जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ वीयू डायनेमिक्स व पाथ समूह के प्रतिनिधि के बीच समझौता पत्र के लिए हस्ताक्षर किए।

हथियारों की खरीद पर सरकार आक्रामक, आधा डिफेंस बजट उड़ा, कई डील्स पेंडिंग में

नई दिल्ली भारतीय सेना को स्वदेशी और आधुनिक बनाने के लिए तेजी से निवेश किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में रक्षा खरीद (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए 1,80,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. मात्र कुछ महीनों के भीतर ही रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे आवंटन का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च कर दिया है. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में मंत्रालय ने सितंबर 2025 के अंत तक कैपिटल एक्सपेंडिचर का 50% से अधिक उपयोग कर लिया है. कुल आवंटन 1,80,000 करोड़ रुपये में से 92,211.44 करोड़ रुपये (51.23%) खर्च किए जा चुके हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में रक्षा मंत्रालय ने 1,59,768.40 करोड़ रुपये का 100% कैपिटल एक्सपेंडिचर खर्च किया था. लगातार की जा रही है खरीद रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कैपिटल एक्सपेंडिचर का 50% से अधिक उपयोग करने से महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म जैसे एयरक्राफ्ट, शिप, पनडुब्बी, हथियार प्रणाली आदि की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी, जो आने वाले वर्षों में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है. अधिकतर खर्च एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन पर किया गया है. इसके बाद लैंड सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण, हथियार और प्रोजेक्टाइल पर खर्च हुआ है. कैपिटल एक्सपेंडिचर रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसके तहत नए हथियारों की खरीद, अनुसंधान एवं विकास, और सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जाता है. स्वदेशीकरण पर फोकस अपने देश में बने हथियारों से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में स्वदेशीकरण की मुहिम तेज़ी से आगे बढ़ रही है. वित्तीय वर्ष 2020-21 से ही रक्षा मंत्रालय घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए धन आवंटित कर रहा है, जिससे ये उद्योग लगातार मजबूत हो रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में घरेलू उद्योगों के लिए 1,11,544.83 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अब तक घरेलू खरीद के लिए आवंटित राशि का 45% तक का महत्वपूर्ण खर्च दर्ज किया गया है. यह आवंटन रक्षा प्रौद्योगिकी और निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ MSMEs, स्टार्ट-अप्स आदि को इस क्षेत्र में आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया है. सशस्त्र बलों की सेवाओं के लिए पूंजीगत आवंटन में पिछले कई वर्षों से लगातार वृद्धि देखी जा रही है. पिछले पांच वर्षों में इसमें लगभग 60% की बढ़ोतरी हुई है.