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LoC के पास उरी में आतंकवादियों पर सेना की कार्रवाई, एनकाउंटर अभी भी जारी

उरी  आतंकी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अब जम्मू पुलिस जल्द ही किरायेदारों को लेकर नया मुहिम शुरू करने जा रही है. किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने और लोगों की थाने आने-जाने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक विशेष वेब पोर्टल शुरू करने जा रही है. जम्मू के एसएसपी जोगिंदर सिंह ने कहा कि वर्तमान मैनुअल प्रणाली में हर किरायेदार और मकान मालिक को थाने में फिजिकली उपस्थित होना पड़ता है, जिससे अक्सर असुविधा होती है. उन्होंने आगे बताया कि हम इस भौतिक संपर्क को खत्म करने पर काम कर रहे हैं. एक उपयोगकर्ता-अनुकूल किरायेदार सत्यापन पोर्टल विकसित किया जा रहा है और जल्द ही शुरू किया जाएगा. एसएसपी जोगिंदर सिंह ने बताया कि पोर्टल शुरू होने के बाद न तो किरायेदार और न ही मकान मालिक को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता होगी. सत्यापन फार्म ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेगी. बता दें क‍ि अक्‍सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि आतंकवादी किरायेदार के रूप में रह रहे हैं, लेकिन उनके बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता है. एसएसपी ने यह भी कहा कि दुकानदारों और कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का सत्यापन करना डीसीपी के आदेशों के तहत अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि हर दुकानदार या कंपनी को अपने कर्मचारियों का सत्यापन सुनिश्चित करना होगा. यह अनिवार्य है. सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर एसएसपी ने कहा कि पुलिस ने सरकार से आवश्यक नियम लागू करने का आग्रह किया है. कैसे विस्‍तार करता गया अल-फलाह ट्रस्‍ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी पीएमएलए-2002 की धारा 19 के तहत की गई. ईडी ने इस मामले में अपनी जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर की थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद ने छात्रों और अभिभावकों को धोखा देने के लिए धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से एनएएसी मान्यता का दावा किया था, जबकि विश्वविद्यालय को यूजीसी मान्यता प्राप्त नहीं थी. ईडी की जांच में यह सामने आया कि अल-फलाह ट्रस्ट (जो 1995 में स्थापित हुआ था) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव था, लेकिन इसके बावजूद इसने 1990 के दशक से लेकर अब तक जबरदस्त विस्तार किया. जांच में यह भी पाया गया कि ट्रस्ट ने अपनी आय को पारिवारिक संस्थाओं में ट्रांसफर किया और इसके लिए निर्माण तथा खानपान के ठेके अपने परिवार के सदस्य संस्थाओं को दिए.

J&K के कुपवाड़ा में बड़ी सफलता! सेना ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर 2 आतंकियों को किया ढेर

कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ घुसपैठ की कोशिश को सेना ने नाकाम कर दिया। साथ ही, जवानों ने 2 अज्ञात आतंकवादियों को मारा गिराया है। सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला था। इसके आधार पर कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया। सेना ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'सतर्क सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी। इस दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। फिलहाल इलाके की तलाशी जारी है।' वहीं, श्रीनगर में पुलिस ने  तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से हथियार और गोला-बारूद जब्त कर आतंकी साजिश नाकाम कर दी गई। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि ममता चौक, कोनाखान डलगेट के पास नियमित वाहनों की जांच चल रही थी। इस दौरान पुलिस की टीम ने बिना पंजीकरण संख्या वाली काले रंग की मोटरसाइकिल को रोका। रुकने का इशारा करने पर मोटरसाइकिल सवार और पीछे बैठे दो लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया। देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान शाह मुतैयब और कामरान हसन शाह के रूप में हुई है। ये दोनों कुलीपोरा खानयार श्रीनगर के निवासी हैं। मोहम्मद नदीम उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी है और वर्तमान में कावा मोहल्ला, खानयार में रह रहा है। पुलिस ने बताया कि इनके पास से एक देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद हुए। शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि आरोपी बरामद हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल करके इलाके में किसी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। खानयार पुलिस स्टेशन में यूएपीए और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इन्फेंट्री स्कूल महू में ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत नई रिसर्च लैब स्थापित

 महू   ड्रोन तकनीक को भविष्य की युद्ध प्रणाली में निर्णायक भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। भारतीय सेना अब स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलाजी को लेकर बड़ा कदम उठा रही है। सेना के ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में मान्यता प्राप्त इन्फेंट्री स्कूल महू और आईआईटी कानपुर इनक्यूबेटेड डिफेंस ड्रोन निर्माता वीयू डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच संयुक्त उपक्रम के तहत अत्याधुनिक ड्रोन रिसर्च लैबोरेटरी स्थापित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में महू स्थित पाथ समूह का स्ट्रेटेजिक निवेश भी शामिल है। सेना की समस्याओं व आवश्यकताओं पर शोध कर होगा नवाचार समय के साथ-साथ युद्ध तकनीक, रणनीति और जरूरतें बदलती जा रही हैं। तकनीकी युग में युद्ध के दौरान ही कई बड़ी समस्याएं व चुनौतियां सामने आती हैं। इनको त्वरित रूप से हल करने के लिए भारतीय सेना का प्रतिष्ठित इन्फेंट्री स्कूल वर्तमान और भविष्य में होने वाले युद्ध की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ी आवश्यकताओं और समस्याओं को वीयू डायनेमिक्स कंपनी के साथ साझा करेगा। इसके बाद दोनों की संयुक्त अनुसंधान टीम आवश्यकताओं व समस्यों के तकनीकी समाधान को लेकर शोध कर नवाचार करेंगे, फिर त्वरित विकास के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने वाले ड्रोन समाधानों पर कार्य करेगी। यह होगी विशेषता     इस रिसर्च लैब में ऐसे ड्रोन सिस्टम विकसित किए जाएंगे जो संचार बाधित या जीपीएस जैम की स्थिति में भी मिशन पूरा करने में सक्षम हों।     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से लक्ष्य की पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता रखते हों।     इस लैब से विदेशी निर्भरता से मुक्त होकर पूर्ण रूप से स्वदेशी निर्मित तकनीकी समाधान प्रदान कर सकेंगे।     तेज प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण के माध्यम से युद्ध में होने वाली वास्तविक जरूरतों को पूरा करेंगे।     इस प्रयोगशाला में एफपीवी अटैक ड्रोन, कमिकाजी प्लेटफार्म और लंबी दूरी वाले फिक्स्ड-विंग ड्रोन सहित कई सामरिक ड्रोन प्रणालियों के विकास पर कार्य होगा। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम यह पहल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाते हुए भारतीय सेना को भविष्य की युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार किए गए स्वदेशी ड्रोन समाधान उपलब्ध कराएगी। यह सहयोग देश की तीन प्रमुख शक्तियों के एकीकृत प्रयास के परिणाम हैं। इसमें भारतीय सेना का युद्ध अनुभव, भारतीय स्टार्टअप का नवाचार व भारतीय उद्योग की मजबूती शामिल है। जिससे भविष्य में होने वाले युद्ध व युद्ध संभावनाओं में भारत की निर्णायक बढ़त सुनिश्चित करेंगे। इसको लेकर महू की इन्फेंट्री स्कूल में समारोह आयोजित हुआ। जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ वीयू डायनेमिक्स व पाथ समूह के प्रतिनिधि के बीच समझौता पत्र के लिए हस्ताक्षर किए।

हथियारों की खरीद पर सरकार आक्रामक, आधा डिफेंस बजट उड़ा, कई डील्स पेंडिंग में

नई दिल्ली भारतीय सेना को स्वदेशी और आधुनिक बनाने के लिए तेजी से निवेश किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में रक्षा खरीद (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए 1,80,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. मात्र कुछ महीनों के भीतर ही रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे आवंटन का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च कर दिया है. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में मंत्रालय ने सितंबर 2025 के अंत तक कैपिटल एक्सपेंडिचर का 50% से अधिक उपयोग कर लिया है. कुल आवंटन 1,80,000 करोड़ रुपये में से 92,211.44 करोड़ रुपये (51.23%) खर्च किए जा चुके हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में रक्षा मंत्रालय ने 1,59,768.40 करोड़ रुपये का 100% कैपिटल एक्सपेंडिचर खर्च किया था. लगातार की जा रही है खरीद रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कैपिटल एक्सपेंडिचर का 50% से अधिक उपयोग करने से महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म जैसे एयरक्राफ्ट, शिप, पनडुब्बी, हथियार प्रणाली आदि की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी, जो आने वाले वर्षों में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है. अधिकतर खर्च एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन पर किया गया है. इसके बाद लैंड सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण, हथियार और प्रोजेक्टाइल पर खर्च हुआ है. कैपिटल एक्सपेंडिचर रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसके तहत नए हथियारों की खरीद, अनुसंधान एवं विकास, और सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जाता है. स्वदेशीकरण पर फोकस अपने देश में बने हथियारों से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में स्वदेशीकरण की मुहिम तेज़ी से आगे बढ़ रही है. वित्तीय वर्ष 2020-21 से ही रक्षा मंत्रालय घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए धन आवंटित कर रहा है, जिससे ये उद्योग लगातार मजबूत हो रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में घरेलू उद्योगों के लिए 1,11,544.83 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अब तक घरेलू खरीद के लिए आवंटित राशि का 45% तक का महत्वपूर्ण खर्च दर्ज किया गया है. यह आवंटन रक्षा प्रौद्योगिकी और निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ MSMEs, स्टार्ट-अप्स आदि को इस क्षेत्र में आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया है. सशस्त्र बलों की सेवाओं के लिए पूंजीगत आवंटन में पिछले कई वर्षों से लगातार वृद्धि देखी जा रही है. पिछले पांच वर्षों में इसमें लगभग 60% की बढ़ोतरी हुई है.

पहला ड्रोन अभ्यास तैनात — सेना की करवाई से मिले संकेत, तनाव प्रबंधित करने की तैयारी

नई दिल्ली भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना खुद को ड्रोन युद्ध के लिए तैयार कर रही है। अंबाला के पास नारायणगढ़ फील्ड फायरिंग रेंज में सेना का वायु समन्वय युद्धाभ्यास चल रहा है। यह अभ्यास पांच दिन चलने वाला है। पश्चिमी और दक्षिणी कमांड इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसमें कई तरह के ड्रोन के संचालन और ड्रोन हमले से बचने पर फोकस है। वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के मुताबिक, सेना अब ड्रोन का काफी इस्तेमाल कर रही है। खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में सप्लाई के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है। ड्रोन ऑपरेशन को लेकर ऑपरेशन सिंदूर से काफी सबक मिला है। ऐसे में ड्रोन के निर्माण और सेना को उसकी ट्रेनिंग पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा अगर फिर से किसी दु्श्मन के साथ भिड़ंत होती है तो उसे और बड़ी सजा दी जाएगी। इस युद्धाभ्यास में जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है वे स्थानीय स्तर पर ही बनाए गए हैं। इनकी रेंज पांच किलोमीटर तक है और ये 5 किलो वजन ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्मी के पास ज्यादा रेंज और ज्यादा पेलोड ले जाने वाले ड्रोन भी मौजूद हैं। कटियार ने कहा कि आने वाले समय में लॉजिस्टिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हजारों ऐसे ड्रोन की जरूरत पड़ेगी। वहीं इन ड्रोन से हमला करने के लिए जिन हथियारों का इस्तेमाल होगा, उन्हें देश में ही तैयार किया जाएगा। बता दें कि ना सिर्फ युद्ध के समय में बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भी सेना ड्रोन का इस्तेमाल करतीहै। बाढ़ के दौरान भी उत्तर और पश्चिमी कमांड ने राहत सामग्री पहुंचाने में ड्रोन का खूब इस्तेमाल किया गया। इस युद्धाभ्यास में दोनों कमांड को अलग-अलग नाम दिया गया है। एक का नाम सूर्यादेश और दूसरे का चंद्रादेश है। दोनों अलग-अलग देशों के तौर पर एक दूसरे के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं। इन ड्रोन से बम बरसाए जा रहे हैं और उनसे बचने में भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमें समझ में आ गया है कि कैसे दुश्मन के ड्रोन से निपटा जा सकता है और कैसे दुश्मन को ड्रोन से पस्त किया जा सकता है। इस अभ्यास में शामिल अधिकारियों ने कहा कि सेना के अलावा अब ड्रोन का इस्तेमाल खेती में भी किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने 'ड्रोन दीदी' स्कीम भी चलाई है जिसके तहत महिलाओं को ड्रोन की ट्रेनिंग दी जाती है।

जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में मुठभेड़ जारी, चार जैश आतंकी घेरे में, एक जवान शहीद

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में शुक्रवार देर रात से ही सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. बताया जाता है कि दूदू बसंतगढ़ की पहाड़ियों पर जैश के 3 से 4 आतंकवादियों को संयुक्त बलों ने घेर लिया. जिसके बाद से लगातार गोलीबारी जारी है. इस गोलीबारी में एक जवान घायल हो गया था. जिसके बाद जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन बचाया नहीं जा सका. शुक्रवार रात 8 बजे से ही जारी है मुठभेड़ अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया. विशिष्ट सूचना के आधार पर, सेना, विशेष अभियान समूह (एसओजी) और पुलिस ने सोजधार के ऊंचाई वाले इलाके से लगे दूदू पुलिस थाना क्षेत्र में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप मुठभेड़ हुई. जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मुठभेड़ जारी है. एसओजी, पुलिस और भारतीय सेना की संयुक्त टीमें मौके पर मौजूद हैं. इससे पहले, व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर कहा था कि "किश्तवाड़ के सामान्य इलाके में एक खुफिया-आधारित अभियान में, व्हाइट नाइट कोर के सैनिकों ने रात लगभग 8 बजे आतंकवादियों से संपर्क स्थापित किया". एक साल में इस इलाके में हुई हैं कई मुठभेड़ पिछले एक साल में इस इलाके में कई मुठभेड़ें हुई हैं. बीते 26 जून को दूदू-बसंतगढ़ के जंगल में हुई मुठभेड़ में आतंकवादी हैदर को मार गिराया था. हैदर पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का एक शीर्ष कमांडर था, जो पिछले चार वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय था. इससे पहले 25 अप्रैल को बसंतगढ़ क्षेत्र में छिपे हुए आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया था.   

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक ढेर, तीन जवान घायल

कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुड्डार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों पर छिपे आतंकियों ने फायरिंग कर दी, जिसके बाद गोलीबारी तेज हो गई. पहले जानकारी सामने आई थी कि इलाके में 3 से 4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया है. फिलहाल सुरक्षाबलों ने क्षेत्र को घेर लिया है और ऑपरेशन जारी है. आतंकियों की तलाश के दौरान बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के तीन जवान गोलीबारी के दौरान घायल हो गए हैं, जिसमें एक सेना के अधिकारी हैं. घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. कुलगाम एनकाउंटर के दौरान अब तक ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया है. वह सेब के बागान से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया. कहा जा रहा है कि गुड्डार इलाके में घिरे आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के हैं. सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की. उनकी तलाश की जा रही है. भारतीय सेना ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। वहीं, सीआरपीएफ ने कहा कि सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया, जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हो गए। इंटरनेशनल बॉर्डर से पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है. जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने कल देर शाम सीमा स्तंभ के पास संदिग्ध हलचल देखी थी. तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और इस दौरान एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ लिया गया. सुरक्षा बलों ने उसे मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. फिलहाल उसकी पहचान और सीमा पार से आने के मकसद की जांच की जा रही है. बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ के बाद ही उसके इरादों और पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी. सीमा पर सुरक्षा को देखते हुए इलाके में गश्त और सर्चिंग और तेज कर दी गई है.

भारतीय सेना में रीवा की बेटी आयुषी वर्मा का चयन, लेफ्टिनेंट पद पर मिली सफलता

रीवा  मध्य प्रदेश के रीवा की रहने वाली छात्रा आयुषी वर्मा ने जिले का नाम रोशन कर दिया है। यूपीएससी सीडीएस की परीक्षा में उन्होंने देशभर में 24वीं रैंक हासिल की है। छात्रा का सिलेक्शन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर हुआ है। यूपीएससी सीडीएस का रिटेन एग्जाम देने बाद उनके 5 इंटरव्यू हुए जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की। आयुषी वर्मा ने स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही सेना में जाने का मन बना लिया था। पोस्टर देखकर किया सेना में जाने का फैसला आयुषी वर्मा ने कहा कि जब मैं स्कूल जाती थी उसे समय रीवा की रहने वाली अवनी चतुर्वेदी का सिलेक्शन भारतीय वायुसेना में हुआ था। उनके सिलेक्शन के बाद पूरे शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए थे। इस होर्डिंग्स और पोस्टर को देखकर ही मैंने सोचा था कि मैं भी सेना में जाऊंगी। आयुषी वर्मा ने बताया कि वह ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद संभालेंगी। रीवा में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए इंदौर गईं। इंदौर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने सीडीएस का एग्जाम दिया और उसमें सफलता हासिल कर भारतीय सेना में शामिल हुई हैं। आयुषी ने बताया कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सीडीएस की तैयारी शुरु कर दी थी। वह अपना ज्यादातर वक्त किताबों के साथ ही गुजारती थीं। कैसा है फैमिली बैकग्राउंड आयुषी वर्मा के पिता रमेश वर्मा एक विद्यालय में सपोर्ट टीचर हैं। उन्होंने कहा कि आयुषी बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज थी। पढ़ाई के अलावा वह जूडो-कराटे की भी अच्छी खिलाड़ी है। उसने अपना एक लक्ष्य निर्धारित किया और जमकर पढ़ाई की और मेहनत का परिणाम है कि वह सीडीएस जैसी परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। आयुषी की मां का नाम ममता वर्मा है और वह गृहणी हैं। मां ममता वर्मा ने कहा कि मेरा बेटा भी सेना में जाना चाहता था। उसने भी सीडीएस की परीक्षा पास कर ली थी लेकिन कुछ मेडिकल कारणों के वजह से नहीं जा पाया। आज बेटी ने उन सपनों को साकार कर दिया है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई: बांदीपोरा में एनकाउंटर, 2 आतंकी मारे गए

बांदीपोरा  जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज सेक्टर में सुरक्षाबलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। सेना ने गुरुवार को बताया कि इस दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है। सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गुरेज सेक्टर में एक संयुक्त अभियान शुरू किया था।" सेना ने बताया कि घुसपैठ की कोशिश को भांपते हुए सतर्क जवानों ने घुसपैठियों को ललकारा। इसके जवाब में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सेना ने आगे कहा, "जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए प्रभावी ढंग से गोलीबारी की और दो आतंकवादियों को मार गिराया।" अधिकारी ने बताया कि इलाके में अभी भी तलाशी अभियान जारी है।

चेतक-चीता हेलिकॉप्टर की जगह नई हल्की मशीनें, इंडियन आर्मी और एयरफोर्स को बड़ा तोहफा

नईदिल्ली  इंडियन आर्मी और एयरफोर्स अपने पुराने चेतक और चीता हेलिकॉप्टरों को हटाकर करीब 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया है। इन नए हेलिकॉप्टरों को रिकॉनेसेन्स और सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) के तौर पर बांटा गया है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और 80 हेलिकॉप्टर वायुसेना को दिए जाएंगे। ये हेलिकॉप्टर दिन और रात दोनों समय में काम कर सकेंगे। रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य तकनीकी जरूरतें तय करना, खरीद प्रक्रिया पर निर्णय लेना और संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करना है। इसमें भारतीय कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा जो विदेशी कंपनियों (OEMs) के साथ साझेदारी करके हेलिकॉप्टर बना सकें। इनका उपयोग कई अन्य कामों के लिए किया जाएगा, जैसे…     दुश्मन की निगरानी और जानकारी जुटाना     कम संख्या में सैनिकों को मिशन पर ले जाना     जरूरत पड़ने पर जल्दी प्रतिक्रिया देने वाली टीमों को ले जाना     जमीन पर लड़ाई में मदद देना     घायल सैनिकों को निकालना और राहत-बचाव कार्य     जरूरत पड़ने पर नागरिक प्रशासन की मदद करना डिफेंस मिनिस्ट्री और भी हेलिकॉप्टर खरीदेगा डिफेंस मिनिस्ट्री ने अन्य प्लेटफॉर्म के साथ और भी यूटिलिटी हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना बनाई है। संसद में पेश रक्षा मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-स्तरीय रडार, हल्के लड़ाकू विमान (LCA), मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर, और मिड-एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी खरीदे जाएंगे। इसके अलावा, मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 156 हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी है, जिसकी कीमत 45,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। ये हेलिकॉप्टर भी सेना और वायुसेना में बांटे जाएंगे और चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात होंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है। भारतीय वायुसेना देश में ही लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ट्रेनर विमान, मिसाइल, ड्रोन और रडार बनाने पर जोर दे रही है, ताकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। भारत ने अमेरिका से हथियार-विमानों की खरीद रोकी, रक्षा मंत्री का अमेरिका दौरा भी रद्द टैरिफ विवाद के बीच भारत ने अमेरिका से नए हथियार और विमान खरीद की योजना रोक दी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने 3 भारतीय अफसरों के हवाले से यह जानकारी दी है। ट्रम्प के 50% टैरिफ लगाने के बाद इसे भारत की पहली ठोस प्रतिक्रिया माना जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रक्षा मंत्री आने वाले हफ्तों में डिफेंस डील के लिए अमेरिका जाने वाले थे। अब यह दौरा रद्द कर दिया गया है। भारत अमेरिका से P8i निगरानी विमान, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल्स और जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल खरीदने वाला था। टैरिफ के चलते यह सौदा भी रोक दिया गया है।