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आशा भोसले के निधन से संगीत जगत शोक में, 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

मुंबई भारतीय संगीत की सबसे मशहूर और हर तरह के गाने गाने वाली गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार (12 अप्रैल) के दिन उनका 92 साल की उम्र में निधन हो गया। वहीं आज (13 अप्रैल) उनका अंतिम संस्कार होगा। अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे सेलेब्स दिवंगत आशा भोसले के परिवार ने रविवार के दिन एक बयान जारी किया था। उन्होंने उस बयान में कहा था, ‘ओम शांति। आप हमेशा अमर रहेंगी, आशा भोसले जी। आशा भोसले के अंतिम दर्शन सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कासा ग्रांडे टावर A, सेनापति बापट मार्ग, लोअर परेल में होंगे। इसके बाद शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा।’ ऐसे में सेलेब्स अब आशा भोसले को अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं। 12000 से ज्यादा गाने किए रिकॉर्ड भारत की सबसे मशहूर पार्श्व गायिकाओं में से एक मानी जाने वाली आशा ने अपने सात दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 12,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए हैं। उन्होंने कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में गाने गाए हैं। उन्हें सिनेमा के क्षेत्र में देश के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

जब आशा भोसले ने विरासत-ए-खालसा उद्घाटन में किया शबद गायन, सिख संगत हुई भावविभोर

रूपनगर/चंडीगढ़. विख्यात गायिका आशा भोसले अपने जीवन में चाहे मात्र एक बार ही जिला रूपनगर के आनंदपुर साहिब क्षेत्र में आई थीं, लेकिन उनके आनंदपुर साहिब दौरे की यादें आज भी आनंदपुर वासियों के दिलों में ताजी हैं। भोसले 2001 के दौरान उस वक्त आनंदपुर साहिब की धरती पर आई थीं, जब पंजाब में स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिअद-भाजपा गठबंधन वाली सरकार थी। उन दिनों आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा का निर्माण युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा था, क्योंकि 2002 में विधानसभा चुनाव आने वाला था। उस वक्त तत्कालीन बादल सरकार द्वारा आनन-फानन में विरासत ए खालसा के पहले फेज के उद्घाटन की घोषणा कर दी गई । नवंबर 2001 में विरासत-ए-खालसा के पहले फेज का उद्घाटन भी कर दिया गया। पंजाब सरकार ने विशेष निमंत्रण पर बुलाई थी उद्घाटन के वक्त पांचों तख्तों के जत्थेदारों के साथ श्री श्री रविशंकर सहित अनेकों संत व हस्तियां आनंदपुर साहिब पहुंची थीं, जिनमें विख्यात गायिका भोसले भी शामिल थीं, जिन्हें पंजाब सरकार द्वारा विशेष निमंत्रण पर बुलाया गया था। उस वक्त को यादगार बनाने के लिए आशा भोसले द्वारा एक मात्र हारमोनियम तथा तबले की संगत में मेरे साहेब मेरे साहेब तू निमानिमानी, अरदास करी प्रभु अपने आगे सुन सुन जीवां तेरी बाणी शबद का गायन करते हुए उन पलों को यादगार बना दिया था। आशा भोसले ने धरती पर टेका था माथा  उस वक्त उनका कहना था कि आज वो इस धरती पर आकर खुद को धन्य समझ रही हैं, जिस धरती पर दशमेश पिता ने खालसा पंथ की स्थापना की तथा जिस धरती पर सिख पंथ के पांच महान तख्तों में से एक तख्त श्री केसगढ़ साहिब है। उस वक्त आशा भोसले ने इस धरती पर माथा भी टेका था। आज आशा भोसले चाहे इस संसार को अलविदा कह गई हैं, लेकिन उनकी आनंदपुर साहिब से जुड़ी मात्र कुछ घंटे की यादें हमेशा ताजा रहेंगी।

एक जैसा अंत: Lata Mangeshkar की तरह ही उसी उम्र, दिन और अस्पताल में Asha Bhosle का निधन

नई दिल्ली. भारतीय संगीत के आकाश से आज एक ऐसी धवल और सुरीली किरण ओझल हो गई, जिसकी चमक ने सात दशकों तक सात सुरों को रोशन किया था। स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 12 अप्रैल 2026 की उस मनहूस दोपहर ने संगीत प्रेमियों के कानों में एक ऐसा सन्नाटा भर दिया है, जिसे भरने के लिए अब कोई दूसरी आवाज नहीं होगी। 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। आशा ताई का जाना केवल एक गायिका का जाना नहीं है, बल्कि उस चंचल, बहुमुखी और जादुई आवाज के अध्याय का अंत है, जिसने शास्त्रीय संगीत से लेकर क्लब डांस नंबर्स तक को अपनी रूह से सींचा था। दिन रविवार, उम्र 92 साल और ब्रीच कैंडी अस्पताल कुदरत के खेल भी बड़े निराले और अक्सर हैरान कर देने वाले होते हैं। आशा भोसले के निधन की खबर के साथ ही एक ऐसा गजब का संयोग उभरकर सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। इसे नियति का संकेत कहें या दो बहनों के बीच का अटूट आत्मिक बंधन आशा ताई और उनकी बड़ी बहन भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रस्थान में एक अद्भुत समानता दिखी है। गजब का संयोग अस्पताल: दोनों बहनों ने मुंबई के 'ब्रीच कैंडी अस्पताल' में ही अपनी अंतिम सांसें लीं। आयु: लता दीदी का निधन भी 92 वर्ष की आयु में हुआ था और आशा ताई ने भी इसी पड़ाव पर दुनिया को अलविदा कहा। दिन: दोनों ही महान हस्तियों के निधन का दिन 'रविवार' रहा। ऐसा लगता है मानो सुरों की ये दो देवियां, जिन्होंने मंगेशकर परिवार का नाम दुनिया के कोने-कोने में गुंजायमान किया, उन्होंने स्वर्ग की यात्रा के लिए भी एक ही मार्ग और एक ही मुहूर्त चुना। वह आवाज जो कभी बूढ़ी नहीं हुई आशा भोसले की सबसे बड़ी खूबी उनकी आवाज़ की अमर जवानी थी। जहाँ लता मंगेशकर की आवाज़ में गंगा की पवित्रता और ठहराव था, वहीं आशा ताई की आवाज़ में किसी पहाड़ी झरने सी चंचलता और समंदर सी गहराई थी। उन्होंने महलों की बंदिशों को भी गाया और गलियों की शोखी को भी। 'दम मारो दम' की मादकता हो या 'इन आंखों की मस्ती' का ठहराव, उन्होंने हर सुर को अपना बना लिया। संगीत जगत के जानकारों का कहना है कि आशा ताई ने संघर्ष को अपना आभूषण बनाया। अपनी बड़ी बहन की विशाल छाया के बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने सिखाया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, वह अपना रास्ता खुद बना लेती है। संगीत के एक युग का सूर्यास्त आशा ताई के जाने से भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की अंतिम कड़ी टूट गई है। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया। उनके निधन से न केवल बॉलीवुड बल्कि विश्व संगीत जगत शोक में डूबा है। आज ब्रीच कैंडी अस्पताल के बाहर जो भीड़ जुटी है, वह केवल प्रशंसकों की नहीं है, बल्कि उन लोगों की है जिन्होंने आशा ताई के गीतों में अपनी मोहब्बत तलाशी, अपनी तन्हाइयां साझा कीं और अपनी खुशियां मनाईं। ब्रीच कैंडी अस्पताल के उसी गलियारे ने आज फिर एक इतिहास को विदा किया है। 92 साल का वह सुरीला सफर, जो रविवार के सूरज के साथ ओझल हो गया, अब सिर्फ हमारी स्मृतियों और ग्रामोफोन के रिकॉर्ड्स में ज़िंदा रहेगा। आशा ताई, आपकी आवाज़ की खनक और वह चंचल मुस्कान हमेशा यह याद दिलाती रहेगी कि- 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना…' क्योंकि आपकी यादों से नजरें चुराना अब मुमकिन नहीं।

संगीत जगत में शोक की लहर, आशा भोसले को नेताओं और हस्तियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर और आवाज की जादूगर आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं रहीं. 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. आशा ताई के निधन पर आज देश की नामी हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं. राजनीति के दिग्गजों ने भी  आशा भोसले को याद किया. पीएम मोदी,अमित शाह से लेकर कई राजनेताओं ने आशा भोसले के निधन पर अपने-अपने तरीके से याद किया. एक स्वर्णिम युग का अंत-पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने आशा भोसले के निधन पर लिखा कि  यह जानकर बेहद दुख हुआ. आशा भोसले जी का जाना भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत है. उनकी आवाज ने न केवल दशकों तक करोड़ों लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि वह भारतीय संस्कृति की एक ऐसी पहचान थीं, जिसकी जगह शायद कभी नहीं भरी जा सकेगी.उनकी आवाज की बहुमुखी प्रतिभा (versatility) ऐसी थी कि उन्होंने हर भाव और हर पीढ़ी के लिए यादगार गीत दिए,उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक प्रेरणा बनी रहेगी.उनके परिवार और दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति मेरी भी गहरी संवेदनाएं. उनके गीतों की गूंज हमेशा हमारे दिलों में बनी रहेगी.     उपराष्ट्रपति ने ऐसे किया याद महान गायिका आशा भोसले जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ. उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना. आशा जी की बहुमुखी आवाज ने उन्हें सहजता से विभिन्न शैलियों में बदलाव करने, भावपूर्ण गजलों और पारंपरिक भजनों में महारत हासिल करने की अनुमति दी, जिससे भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी गई. उनकी सदाबहार आवाज और संगीतमय विरासत लाखों लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.      मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन- अमित शाह आशा ताई के निधन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं.आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया. हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी. अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी. आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी. उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं. आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी.ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ॐ शांति शांति शांति…  भारत के संगीत क्षेत्र की अपरिमित क्षति- नितिन गडकरी भारतीय संगीत जगत की मशहूर और दिग्गज हस्ती गायिका पद्म विभूषण आशा भोसले जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि.उनके साथ मेरे पारिवारिक संबंध रहें है. उनका जाना भारत के संगीत क्षेत्र की अपरिमित क्षति है. अपनी विलक्षण प्रतिभा से आशा जी ने संगीत के क्षितिज पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. नया दौर, तीसरी मंज़िल, हरे रामा हरे कृष्णा, उमराव जान के साथ साथ इजाजत और रंगीला जैसे वक़्त और पीढ़ियों के साथ बदलती कई मशहूर फिल्में और गीत आशा जी ने अपने स्वर से अजरामर किए है. प्लेबैक सिंगर के रूप में भी उन्होंने कई यादगार गाने दिए.संगीत के क्षेत्र में उनका 'स्वर' और उनका महत्वपूर्ण योगदान पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा.ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को संबल दे. ॐ शांति       दुनिया ने एक महान शख़्सियत को खो दिया-केजरीवाल दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने आशा भोसले के निधन पर कहा कि पद्म विभूषण आशा भोसले जी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ.आज संगीत की दुनिया ने एक महान शख़्सियत को खो दिया। उनका जाना देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है.वो अपने अनगिनत मधुर गीतों के माध्यम से हमेशा अमर रहेंगी.विनम्र श्रद्धांजलि…      उनके मधुर स्वर सदैव देशवासियों के मन में गूंजते रहेंगे- सीएम योगी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आशा भोसले के निधन पर कहा कि भारतीय संगीत जगत की स्वर-सम्राज्ञी, महान सुर-साधिका, 'पद्म विभूषण' आशा भोसले जी का निधन अत्यंत दुःखद एवं कला जगत की अपूरणीय क्षति है.उनकी अद्वितीय गायकी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं.उनके मधुर स्वर सदैव देशवासियों के मन में गूंजते रहेंगे. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति और शोकाकुल परिजनों एवं प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!     आज साज खामोश हैं और सुर अधूरे से लग रहे हैं- शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अपनी खनकती आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आदरणीय आशा भोंसले जी हमारे बीच नहीं रहीं.उनके जाने से संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया.आज साज खामोश हैं और सुर अधूरे से लग रहे हैं, सुरों की देवी आशा ताई भले ही देह रूप में विदा हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज हमारी स्मृतियों में गूंजती रहेगी। विनम्र श्रद्धांजलि!    

सुरों की दुनिया में शोक की लहर: आशा भोसले ने दुनिया को कहा अलविदा

नई दिल्ली बॉलीवुड की लेजेंडरी सिंगर्स में से एक आशा भोसले ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. वो 92 साल की थीं. आशा भोसले को 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. अस्पताल के डॉक्टर प्रति समदानी ने कन्फर्म किया था कि सिंगर उनकी केयर भी हैं. सिंगर की पोती ने बताया था कि चेस्ट इंफेक्शन और थकान के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी है. मगर अब खबर आई है कि आशा भोसले का निधन हो गया है. आशा भोसले ने 40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने लेजेंडरी डायरेक्टर बिमल रॉय, राज कपूर के साथ-साथ लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर, सरदार मलिक, सज्जाद हुसैन, एस मोहिंदर, ए आर रहमान संग काम किया था. उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की सबसे बड़ी गायिकाओं में से एक थीं. मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह सुरीली आवाज वाली थीं. आशा ने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड में 1950 के दशक में चलाया. हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई. 1952 में आई फिल्म 'संगदिल' में उन्होंने गाने गाए थे. म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया. उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म 'परिणीता' में आशा भोसले को साइन किया था. इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म 'बूट पोलिश' में काम दिया. लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था. मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म 'नया दौर' के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा. इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे. बॉलीवुड में आशा ने बनाई अलग पहचान मोहम्मद रफी के साथ आशा भोसले की जोड़ी उस जमाने में सुपरहिट थी. दोनों ने मिलकर 'मांग के साथ तुम्हारा', 'साथी हाथ बढ़ाना' और 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' को गाया था. साहिर लुधियानवी के बोल और रफी संग आशा की आवाज का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता था. उन्होंने 60 के दशक की फिल्म 'गुमराह', 'हमराज', 'आदमी और इंसान' संग कई और में अपनी आवाज दी. 1966 में उन्होंने आर डी बर्मन के साथ फिल्म 'तीसरी मंजिल' के लिए गाने गाए थे, जिन्हें खूब सराहा गया. इसके बाद वो दौर आया जब आशा भोसले ने बॉलीवुड के हिट डांस नंबर गाने शुरू किए. कहा जाता है कि जब उन्होंने पहली बार 'आजा आजा' गाने को सुना था तो उन्हें लगा था कि वो वेस्टर्न म्यूजिक ट्यून पर नहीं गा पाएंगी. बर्मन ने इसे बदलने का ऑफर दिया, मगर आशा ने मना कर दिया. बाद में उन्होंने इसे एक चैलेंज की तरह लिया और 10 दिन रिहर्सल करने के बाद इसे रिकॉर्ड किया था. आज भी ये गाना लोगों की जुबान पर है. 'आजा आजा' के बाद आशा ने 'ओ हसीना जुल्फों वाली', 'ओ मेरे सनम रे', 'पिया तू अब तो आजा' और 'ये मेरा दिल' जैसे बढ़िया गाने गाए, जो हर पार्टी की जान बन गए थे. गजल गायिकी ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड 1981 में आशा भोसले ने गजल गायिकी में अपना हाथ आजमाया. उन्होंने फिल्म 'उमराव जान' में 'दिल चीज क्या है', 'इन आंखों की मस्ती के', 'ये क्या जगह है दोस्तों' और 'जुस्तजू जिसकी थी' जैसी गजलों को गाकर सभी का दिल खुश कर दिया था. इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खय्याम थे, जिन्होंने आशा की आवाज को लो पिच पर ला दिया था. इन्हीं गजलों ने उन्हें उनका पहला नेशनल अवॉर्ड दिलवाया. इसके बाद उन्हें फिल्म 'इजाजत' के अपने गाने 'मेरा कुछ सामान' के लिए अपना दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला. 1995 में आशा भोसले ने 62 साल की उम्र में एक्ट्रेस उर्मिला मतोंडकर को अपनी आवाज दी. उर्मिला की फिल्म 'रंगीला' के गाने 'तन्हा तन्हा' और 'रंगीला रे' उन्होंने गाए. 2000 में दशक में आई 'लगान' के गाने 'राधा कैसे न जले', फिल्म 'प्यार तूने क्या किया' के गाने 'कमबख्त इश्क', फिल्म 'लकी' के गाने 'लकी लिप्स' को आशा भोसले ने ही गाया था. ये सभी गाने आगे चलकर सुपरहिट हुए. आशा के नाम है ये रिकॉर्ड साल 2013 में आशा भोसले ने अपना एक्टिंग डेब्यू किया था. 79 साल की आशा को फिल्म 'माई' में एक 65 साल की महिला के रोल में देखा गया था, जो अल्जाइमर की मरीज है. महिला को उसके बच्चे छोड़ जाते हैं. अपने काम के लिए क्रिटिक्स से आशा भोसले को तारीफ मिली थी. मई 2020 में आशा ने आशा भोसले ऑफिशियल के नाम से अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया था. हिंदी, बंगाली, मराठी समेत आशा भोसले ने अपने करियर में 20 भाषाओं में गाने गाए. इसके चलते उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था. जनवरी 2025 में आशा भोसले को दुबई में एक कॉन्सर्ट करते देखा गया था. 91 साल की आशा, जिन्हें प्यार से आशा ताई बुलाया जाता था, दमदार अंदाज में परफॉर्म करती दिखीं. उन्होंने इस कॉन्सर्ट में पंजाबी सिंगर करण औजला के हिट गाने 'तौबा तौबा' को गाया था. ये गाना विक्की कौशल की फिल्म 'बैड न्यूज' का था. ऐसे में विक्की के अतरंगी स्टेप्स को आशा भोसले ने भी कॉपी किया और स्टेज पर धूम मचाई थी.

आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज जारी

मुंबई.  दिग्गज सिंगर आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट की वजह से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती किया गया है। फिलहाल उनका इमरजेंसी मेडिकल सर्विस यूनिट में ट्रीटमेंट चल रहा है। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टर प्रतीत समदानी के मुताबिक 92 साल की आशा भोसले को शनिवार को यानी 11 अप्रैल को कार्डियक अरेस्ट आया है जिस वजह से उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती किया गया। फिलहाल परिवार की तरफ से कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है। हालांकि फैंस को जबसे ये खबर मिली है सभी उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। बता दें कि आशा भोसले का जन्म म्यूजिक फैमिली में हुआ। वह दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती मंगेशकर है। पिता की मौत के बाद आशा भोसले ने सिंगिंग शुरू की। आशा भोसले का पहला गाना चला चला नाव बाला है फिल्म माझा बल से। उन्होंने हिंदी फिल्मों में सावन आया गाने से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने अपने करियर में राधा कैसे ना जले, शरारा, कभी तो नजर मिलाओ और सपने में मिती है जैसे कई हिट गाने दिए।