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एशियन गेम्स में नीरू ढांडा का जलवा: तीन पदक जीतकर रचा इतिहास, मिला बड़ा सम्मान

नई दिल्ली जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराने वाली स्टार निशानेबाज नीरू ढांडा को एक और बहुत बड़ा सम्मान मिला है। ट्रैप शूटिंग में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाली नीरू को 4 अक्टूबर को होने वाले समापन समारोह के लिए भारतीय दल का आधिकारिक ध्वजवाहक चुना गया है। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में नीरू तिरंगा थामकर भारतीय दल की अगुवाई करेंगी। एक ही एशियन गेम्स में नीरू के नाम रहे तीन-तीन मेडल आइची-नागोया खेलों में नीरू का सफर बेहद शानदार और यादगार रहा है। उन्होंने प्रतियोगिता में अपने सटीक निशानों के दम पर एक नहीं बल्कि पूरे तीन पदक (दो गोल्ड और एक सिल्वर) भारत की झोली में डाले। नीरू ने अपने पदक अभियान का आगाज महिलाओं की टीम ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर किया था। इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में जिस तरह का प्रदर्शन किया उसने उन्हें एशियाई खेलों के इतिहास में अमर कर दिया। पहला गोल्ड जीतकर बनाया कीर्तिमान टीम इवेंट में सिल्वर जीतने के बाद नीरू ढांडा का असली जादू व्यक्तिगत स्पर्धा में देखने को मिला। उन्होंने फाइनल में बेहतरीन लय बरकरार रखते हुए गोल्ड पर निशाना साधा। इसके साथ ही वह एशियाई खेलों के इतिहास में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बन गईं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी के लिए एक नया अध्याय लिख दिया। एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता दूसरा गोल्ड व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक सोना जीतने के बाद भी नीरू का जलवा थमा नहीं। उन्होंने मिक्सड टीम ट्रैप स्पर्धा में साथी निशानेबाज कीनन चेनाई के साथ मिलकर एक और स्वर्णिम सफलता हासिल की। भारतीय जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में 34 का स्कोर बनाकर कतर (32 अंक) को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि चीन (23 अंक) को कांस्य से ही संतोष करना पड़ा। इस मुकाबले में नीरू और कीनन की जोड़ी ने एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड भी कायम किया।  

हरमनप्रीत सिंह ने रचा इतिहास, भारत को लगातार दूसरी बार एशियन चैंपियन बनाने वाले पहले कप्तान बने

नागोया  एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में भारतीय टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह और जुगराज सिंह ने गोल किए। ये दोनों गोल पेनल्टी कॉर्नर पर आए। भारतीय पुरुष टीम एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीती है। इसके साथ ही हरमनप्रीत सिंह ने इतिहास रच दिया है। वह भारत को लगातार दूसरी बार एशियन चैंपियन बनाने वाले पहले भारतीय कप्तान बने हैं। पुरुषों से पहले भारत की महिला टीम ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। महिला टीम ने फाइनल में चीन को मात दी थी। यह पहला मौका है, जब एशियन गेम्स में भारत की महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों ने गोल्ड मेडल जीता है। भारत की पुरुष टीम पांचवीं बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही है। वहीं, महिला टीम दूसरी बार गोल्ड जीती है। भारत ने की शानदार शुरुआत भारत ने इस मैच में हमेशा की तरह शानदार शुरुआत की और 10वें मिनट में गोल कर 1-0 की बढ़त बना ली। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया और टीम को मैच में आगे कर दिया। हालांकि, मलेशिया ने 4 मिनट बाद ही गोल कर मैच में बराबरी कर ली। मलेशिया के लिए सिल्वरस सेलो ने गोल दागा। पहले क्वार्टर का खेल 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ। भारत ने दूसरे क्वार्टर में बनाई बढ़त भारत ने मैच के दूसरे क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर पर दूसरा गोल कर मलेशिया पर 2-1 की बढ़त बना ली। जुगराज ने 23वें मिनट पर बेहतरीन गोल किया। इसके बाद मलेशिया की टीम गोल करने के लिए छटपटाने लगी और बेहद आक्रामक खेल दिखाया। इसी प्रयास में उनसे गलतियां भी हुईं। हालांकि, दूसरे क्वार्टर के अंत तक स्कोर 2-1 से भारत के पक्ष में था। तीसरे क्वार्टर में भी भारत का गोल भारत ने तीसरे क्वार्टर में मलेशिया की टीम को पूरी तरह से दबाव में ला दिया। लगातार पेनल्टी कॉर्नर बनाकर भारत ने मलेशिया के खिलाड़ियों को दबाव में डाला और उनसे गलती होने पर पेनल्टी शूट हासिल कर लिया। हार्दिक ने मैच के 42वें मिनट में आसानी से पेनल्टी शूट पर गोल किया और टीम इंडिया 3-1 से आगे हो गई। यहां से भारत की जीत दिख रही थी, लेकिन सतर्क रहना जरूरी था। पांचवें क्वार्टर में चित हुआ मलेशिया पांचवें क्वार्टर के 54वें मिनट में शिलानंद ने फील्ड गोल कर भारत को 4-1 से आगे कर दिया। इसके बाद टीम के लिए पहला गोल करने वाले कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 57वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर टीम के लिए आखिरी गोल भी किया। इसके साथ ही टीम इंडिया ने फाइनल मैच 5-1 से जीतकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 लगाकर कुमकुम मोहद ने जीता गोल्ड, महिला रिकर्व में भारत का पहला स्वर्ण

नई दिल्ली  एशियन गेम्स 2026 में भारत की 17 वर्षीय युवा तीरंदाज कुमकुम मोहद ने इतिहास रच दिया है। महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के बेहद उतार-चढ़ाव और रोमांच से भरे फाइनल मुकाबले में कुमकुम ने दक्षिण कोरिया की दिग्गज तीरंदाज ओह येजिन को शूट-ऑफ में पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। एशियन गेम्स के इतिहास में यह पहला मौका है जब भारत ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीता है। इसके साथ ही मौजूदा एशियाई खेलों में कुमकुम का यह दूसरा स्वर्ण पदक है जबकि भारतीय तीरंदाजों का इस साल यह 5वां गोल्ड रहा। शुरुआती सेट में पिछड़ने के बाद की शानदार वापसी गोल्ड मेडल मुकाबले की शुरुआत भारतीय तीरंदाज के लिए आसान नहीं रही। दक्षिण कोरिया की ओह येजिन ने पहला सेट 29-27 से जीतकर बढ़त बनाई। इसके बाद दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला और सेट 29-29 से बराबर रहा जिससे कुमकुम 1-3 से पिछड़ गईं। हालांकि, दबाव के बावजूद 17 साल की कुमकुम ने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे सेट में लगातार तीन परफेक्ट 10 लगाकर शानदार वापसी की और मुकाबले को 3-3 से बराबर कर दिया। सांस रोक देने वाले मोड़ पर पहुंचा मुकाबला चौथे सेट में एक 8 के स्कोर के कारण कुमकुम को सेट गंवाना पड़ा और वह 3-5 से पीछे हो गईं। अब पांचवां सेट कुमकुम के लिए करो या मरो का बन चुका था। यहां भारतीय सनसनी ने अपने अदम्य साहस और सटीक निशानेबाज़ी का मुजाहिरा करते हुए पांचवां सेट जीता और मुकाबले का स्कोर 5-5 से बराबर कर लाइव मैच को शूट-ऑफ में धकेल दिया। शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 से रचा इतिहास शूट-ऑफ में गोल्ड मेडल का फैसला केवल एक-एक तीर से होना था। दबाव के इस पल में दक्षिण कोरिया की ओह येजिन चूक गईं और केवल 8 का स्कोर ही कर सकीं। इसके ठीक बाद कुमकुम मोहद ने बिना किसी झिझक के सटीक निशाना साधते हुए परफेक्ट 10 जड़ा और भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिला दिया। पहले ही लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का टिकट पक्का कर चुकीं कुमकुम की इस अविश्वसनीय खिताबी जीत से पूरे देश में खुशी की लहर है।  

प्रणवी उर्स का ऐतिहासिक गोल्ड, एशियन गेम्स में पहली बार भारतीय महिला ने गोल्फ में जीता स्वर्ण

नई दिल्ली भारत के लिए आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स-2026 काफी ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं। आज यानी शनिवार को भी भारत के हिस्से कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियां आई हैं जिनमें से एक है गोल्फ में महिला खिलाड़ी प्रणवी उर्स का गोल्ड मेडल। प्रणवी एशियन गेम्स में गोल्फ में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। प्रणवी के इस प्रदर्शन से भारतीय टीम भी सिल्वर मेडल अपने नाम करने में सफल रही। प्रणवी ने कुल 15 अंडर 265 के स्कोर के साथ गोल्ड पर कब्जा जमाया। चीन की यिन रुओनिंग के हिस्से सिल्वर आया तो वहीं सिंगापुर की शैनन टन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मेरा नाम होगा पहला इस जीत के बाद प्रणवी खुशी से फूली नहीं समा रही हैं और उन्हें अपने आप पर इस बात का गर्व है कि वह एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा, "मुझे कोई भी काम सबसे पहले करना पसंद है। लोग आगे और भी बहुत कुछ करेंगे, लेकिन मेरा नाम हमेशा पहला ही रहेगा।" प्रणवी के अलावा सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम में अदिति अशोक (फाइनल राउंड में 67) और दीक्षा डागर (फाइनल राउंड में 77) शामिल थीं। अदिति ने पिछले एशियाई खेलों में सिल्वर जीता था। इस बार वह टू-ओवर 282 के कुल स्कोर के साथ संयुक्त रूप से 14वें स्थान पर रहीं। वहीं दीक्षा 12-ओवर के कुल स्कोर के साथ संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर रहीं। टीम मेडल का फैसला इस बात से लिया जाता है कि लीडरबोर्ड पर दो सर्वश्रेष्ठ स्कोरर कौन हैं। ऐसी स्थिति में भारत का कुल स्कोर 14-अंडर 546 का रहा। चीन के पास गोल्ड गया। उसका स्कोर 22-अंडर 538 रहा। 2002 के बाद पहला मेडल प्रणवी ने इस मेडल के साथ ही लंबा सूखा खत्म किया है। उनका यह मेडल 2002 में शिव कपूर के पुरुषों के व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड जीतने के बाद भारत का पहला गोल्फ गोल्ड मेडल है। यह 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों के बाद भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन भी था। उसी साल गोल्फ को इन खेलों में शामिल किया गया था।  

बारिश से धुला श्रीलंका-बांग्लादेश सेमीफाइनल तो किसे मिलेगा ब्रॉन्ज? जानें Asian Games का नया नियम

नई दिल्ली एशियन गेम्स 2026 में बारिश के कारण कई खेलों पर असर पड़ा है। इससे सबसे ज्यादा प्रभाव क्रिकेट पर हुआ है। बारिश के कारण कोई भी क्वार्टरफाइनल नहीं खेला जा सका। भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान की टीमें बिना कोई मैच खेले ही सेमीफाइनल में पहुंच गईं। अब तक एशियन गेम्स 2026 में 12 क्रिकेट मैच हुए हैं। इनमें से सिर्फ 5 ऐसे रहे हैं, जिनमें बारिश के कारण सीधा असर नहीं हुआ है। चारों क्वार्टर फाइनल से पहले ग्रुप स्टेज के मुकाबलों में भी बारिश ने खलल डाला था। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सेमीफाइनल मैच भी बारिश के कारण 13 ओवर का ही हुआ था। जापान में बारिश का कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में इस इवेंट के बॉन्ज और गोल्ड मेडल मैच भी बारिश की भेंट चढ़ सकते हैं। हालांकि, अब बारिश होने पर कम रैंकिंग वाली टीम को नुकसान नहीं होगा, जैसा कि क्वार्टर फाइनल में हुआ था। बारिश होने पर किसे मिलेगा मेडल? बारिश होने पर दोनों टीमों को मेडल दे दिया जाएगा। इस स्थिति में क्रिकेट में बांग्लादेश और श्रीलंका दोनों टीमों को ब्रॉन्ज मेडल मिलेगा। हालांकि, ऐसा कोई फैसला लेने से पहले मैच के अधिकारी पूरे कोशिश करेंगे कि कम से कम 5 ओवर का मैच हो जाए। जापान की पिच भी बहुत बेहतर नहीं हैं। ऐसे में कम ओवर का मैच होने पर भी बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट लगाना आसान नहीं होगा। फाइनल में होंगे 2 गोल्ड मेडल एशियन गेम्स के नए नियमों के अनुसार अगर फाइनल में बारिश हो जाती है तो भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों को गोल्ड मेडल दे दिया जाएगा। मजेदार बात यह है कि इस स्थिति में किसी भी टीम को सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा। हालांकि, भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में बेहद मजबूत नजर आई है और 5 ओवर का मैच होने पर भी गोल्ड मेडल आसानी से अपने नाम करने की क्षमता रखती है। श्रीलंका के खिलाफ मैच में भारत ने अपना दबदबा दिखाया था।

नारी शक्ति का कमाल, 4×400 रिले में भारत को गोल्ड; पदकों का अर्धशतक पूरा

नागोया भारी बारिश और ठंडे मौसम के बीच मंगलवार को 'नारी शक्ति' ने भारत को सुनहरी सफलता दिलाते हुए एशियन गेम्स की पदक तालिका में टॉप-10 में पहुंचा दिया। सुबह शूटिंग में नीरू ढांडा ने गोल्ड जीता तो शाम को भारत की झोली में एथलेटिक्स से विमिंस 4X400 मीटर रिले का भी गोल्ड आ गया। इसके साथ ही मंगलवार को एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकों का अर्धशतक पूरा हो गया। छह गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल 52 मेडल के साथ भारत 10वें स्थान पर पहुंच गया। कमाल की दौड़ लगाई भारत की किरण पहल, पूवम्मा माचेत्रा, प्राची और विथ्या रामराज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विमिंस 4X400 मीटर रिले में गोल्ड मेडल जीता। इन खेलों में एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। भारतीय टीम ने तीन मिनट 29.69 सेकंड का समय निकाला। यह विथ्या का इन खेलों में तीसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 400 मीटर हर्डल रेस में नेशनल रिकॉर्ड के साथ ब्रॉन्ज मेडल और मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले में सिल्वर मेडल जीता था। पहले बैटन एक्सचेंज में तीसरे पर थे भारत ने लेन छह से रिले की शुरुआत की और किरण को शुरुआती लेग की जिम्मेदारी सौंपी गई। किरण ने तीसरे स्थान पर बैटन को पास किया, जिससे पूवम्मा पर अंतर को कम करने की जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने दूसरे लेग में शानदार प्रदर्शन किया और भारत को आगे की दौड़ में शामिल किया। इसके बाद उन्होंने प्राची को बैटन सौंपा। प्राची ने भारत को मेडल की दौड़ में मजबूती से बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि विथ्या को एंकर लेग के लिए अच्छी स्थिति में बैटन मिले। इसके बाद आखिरी लेप विथ्या के नाम रहा। विथ्या ने जल्द ही अपनी लय पकड़ ली और आगे चल रही धावकों से अंतर कम करना शुरू कर दिया। 200 मीटर के निशान के आसपास विथ्या ने अपनी गति तेज की। विथ्या ने दौड़ के आखिरी हिस्से में अपना संयम बनाए रखा और सबसे पहले फिनिश लाइन पार की। इससे पहले गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर, स्नेहा सत्यनारायण और हरिता भद्रा ने 4X100 मीटर मिक्स्ड रिले फाइनल में 41.06 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाया। कायम रही 44 साल की परंपरा रिले में जीत के साथ भारत ने इस इवेंट के इतिहास में अपना साख एशियन गेम्स गोल्ड मेडल जीता और 1982 एशियाड के बाद से हर सीजन में पदक जीतने के अपने 44 साल पुराने सिलसिले को बरकरार रखा। भारत ने इससे पहले इस स्पर्धा में 2018 में गोल्ड मेडल जीता था। इस साल बहरीन (3:30.21) दूसरे और चीन (3:31.02) तीसरे स्थान पर रहा है।  

भारत ने जापान को 2-0 से दी मात, एशियन गेम्स हॉकी के सेमीफाइनल में एंट्री

 नई दिल्ली भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। टीम इंडिया एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की प्रबल दावेदार है। शनिवार को खेले गए मुकाबले में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत ने जापान को 2-0 से तो हराया, लेकिन प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। अभिषेक और हरमनप्रीत सिंह के गोलों की बदौलत भारत ने जीत तो हासिल कर ली, लेकिन सच कहें तो उनका प्रदर्शन देखने लायक नहीं था। उन्होंने कई मौके गंवा दिए। कुछ पेनल्टी कॉर्नर के मौकों पर तो वे बुनियादी चीजें भी ठीक से नहीं कर पाए। यकीन करना मुश्किल है। खैर, अब यह तथ्य है कि इस जीत के साथ भारत एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में पहुंच गया है, हालांकि, उसे आगे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। विश्व कप के बाद भारत की दमदार वापसी बता दें कि भारत के लिए इस साल की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी। एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम 8वें स्थान पर रही थी। इस अभियान के बाद टीम इंडिया ने सही समय पर अपनी लय वापस पा ली है। एशियन गेम्स में उन्होंने अब तक चार मैचों में चार जीत दर्ज की हैं और वर्तमान में 12 अंकों के साथ पूल ए तालिका में जापान से आगे शीर्ष पर हैं। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया (13-1), श्रीलंका (16-1) और दक्षिण कोरिया (8-2) पर शानदार जीत के साथ की। यह प्रदर्शन एशियन गेम्स में भारतीय टीम के दबदबे को दिखाता है। आज के मैच का ऐसा रहा हाल पूल ए में आज खेले गए मुकाबले की बात करें तो भारत के लिए पहले क्वार्टर में के आखिरी मिनटों में अभिषेक ने गोल करके एक शून्य से टीम इंडिया को बढ़त दिला दी। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में किसी भी टीम ने कोई गोल नहीं किया। हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे रहा। लेकिन इसके बाद तीसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने मैच के 40वें मिनट में गोल कर दिया। भारत 2-0 से आगे हो गया। हालांकि, इसके बाद चौथे क्वार्टर में कोई गोल नहीं हो सका। भारत के पास गोल करने के बहुत से मौके आए, लेकिन टीम इंडिया के खिलाड़ी चूक गए। भारत के लिए यह प्रदर्शन जीत में जरूर तब्दील हुआ लेकिन आगे आने वाले बड़े मुकाबलों में जिनमें फाइनल और सेमीफाइनल हैं, यह प्रदर्शन आईडियल बिल्कुल नहीं है। भारत बनाम जापान फुल टाइम स्कोर भारत -2 जापान- 0 भारत ने जापान को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

भारत ने रचा इतिहास, ईरान को 40-34 से हराकर कबड्डी में जीता स्वर्ण पदक

नई दिल्ली  भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीत लिया है। ईरान के खिलाफ हुए फाइनल में भारत को 40-34 से जीत मिली। उम्मीद के मुताबिक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले हाफ में ईरान के पास 18-17 की बढ़त थी। इसके बाद दूसरे हाफ ने टीम इंडिया ने दमदार वापसी की और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। सुनील कुमार टीम के कप्तान एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम की कप्तानी सुनील कुमार कर रहे हैं। 29 साल के सुनील हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले हैं। वह 2022 एशियन गेम्स में भी टीम का हिस्सा थे। वह मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप में खेलते हैं। सुनील नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के प्रिंसिपल चीफ कमर्शियल मैनेजर के ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करते हैं। पीकेएल में सुनील का दमदार रिकॉर्ड प्रो कबड्डी लीग में सुनील यू मुंबा के लिए खेलते हैं और टीम के कप्तान भी हैं। सुनील प्रो कबड्डी लीग के इतिहास के तीसरे सबसे सफल डिफेंडर हैं। 179 मैचों में उनके 442 टैकल पॉइंट्स हैं। उन्होंने 35 सुपर टैकल किए हैं तो 27 मैचों में हाई 5 भी किया है। 2015 और 2016 में जूनियर नेशनल जीतने के बाद सुनील को पीकेएल सीजन 4 के लिए पटना पाइरेट्स ने चुना। इसके बाद में वे जयपुर पिंक पैंथर्स में चले गए। 2022 उनकी कप्तानी में जयपुर की फ्रेंचाइजी चैंपियन बनी। सुनील कुमार के कबड्डी का सफर उनके गांव से ही शुरू हुआ था। उनके चाचा के लड़के कबड्डी के खिलाड़ी थे। उन्हें देखकर ही सुनील ने इस खेल में कदम रखा था।

2 गेम हारकर भी नहीं मानी हार, अनाहत सिंह ने पलटा मैच और जीता सेमीफाइनल

नागोया  एशियन गेम्स 2026 में भारत की अनाहत सिंह ने स्कॉश के फाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही 18 साल की इस खिलाड़ी ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। हालांकि, उनकी फॉर्म को देखते हुए उनसे गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही है। सेमीफाइनल मैच में हार की कगार पर पहुंचने के बाद भी वह पूरी तरह शांत थीं और दबाव का उन पर कोई असर नहीं दिखा। इसके बाद उनकी तुलना पूर्व भारतीय क्रिकेटर धोनी से हो रही है, जो हमेशा दबाव भरे हालातों से टीम इंडिया को मैच जिताते थे। अनाहत भी सेमीफाइनल मैच में शुरुआती 2 गेम हार गई थीं। तीसरा गेम हारते ही वह बाहर हो जातीं और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ता। हालांकि, भारत की इस युवा खिलाड़ी को हार मंजूर नहीं थी। उन्होंने तीसरा गेम करीबी अंतर से जीता। इसके बाद अगले दो गेम आसानी से जीतकर फाइनल में जगह बना ली। जापानी खिलाड़ी का होम ग्राउंड सपोर्ट नहीं आया काम जापानी खिलाड़ी ने इस मैच में शुरुआती दो सेट अपने नाम कर जीत लगभग तय कर ली थी। घरेलू मैदान में उनके पास फैंस का भी पूरा समर्थन था। ऐसे में उनके लिए तीन में से एक गेम जीतना आसान था। वहीं, अनाहत के ऊपर बेशुमार दबाव था। हालांकि, वह दबाव में ही निखरती चली गईं और जीत हासिल की। मैच में क्या हुआ? जापान की वतानबे सतोमी ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए पहला गेम 11-9 के अंतर से जीता। दूसरे गेम में भी उन्होंने 13-11 के अंतर से जीत हासिल की। तीसरे गेम में अनाहत ने बाजी पलट दी। उन्होंने 12-10 के अंतर से जीत दर्ज की। चौथे गेम में उन्होंने जापानी खिलाड़ी को चारो खाने चित करते हुए 11-6 के अंतर से जीत दर्ज की और पांचवें गेम में जीत का अंतर 11-3 हो गया। अंत में अनाहत ने 3-2 के अंतर से मैच अपने नाम किया।

12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़ीं; अब एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज

नई दिल्ली हिमाचल प्रदेश के चंबा के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंची सीमा की कहानी जितनी संघर्ष भरी है, उतनी ही भावुक भी. 10,000 मीटर में कांस्य जीतकर इतिहास रचने वाली 25 साल की इस धाविका ने नागोया जाने की बात अपनी 78 साल की मां तक को नहीं बताई थी. वजह थी मां की चिंता. सीमा जानती थीं कि अगर मां को पता चल गया कि बेटी जापान में एशियन गेम्स खेलने जा रही है, तो वह पूरी रात सो नहीं पाएंगी. इसलिए सीमा ने एक छोटा सा 'राज' रखा और मां को यही समझने दिया कि वह हमेशा की तरह बेंगलुरु के ट्रेनिंग कैंप में हैं. 'मां को बताया तो एक दिन सो नहीं पाएंगी' सीमा ने पदक जीतने के बाद अपनी मां के बारे में बताया, 'मेरे पिता नहीं हैं. मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र करीब 78 साल है. मेरा जन्म तब हुआ था, जब वह 45 साल की थीं. जब भी मैं बाहर जाती हूं, वह बहुत तनाव में आ जाती हैं. इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियन गेम्स के लिए जापान जा रही हूं.' उन्होंने बताया कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है. ऐसे में ट्रेनिंग कैंप या प्रतियोगिता के लिए बाहर जाते समय सीमा उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं देतीं. परिवार में सिर्फ बड़ी बहन को सब पता रहता है. सीमा नागोया रवाना होने से पहले अपनी बड़ी बहन को पूरी जानकारी देकर गई थीं. अब ऐतिहासिक कांस्य जीतने के बाद उम्मीद है कि यह खबर मां तक भी पहुंच गई होगी. सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हो सकता है मेरी बहन ने उन्हें बता दिया हो. शायद वे टीवी पर मुझे देख रही हों. वरना मां यही सोच रही होंगी कि मैं अभी बेंगलुरु में हूं.' 12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़ीं सीमा का सफर किसी आसान रास्ते की कहानी नहीं है. चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली सीमा ने महज 12 साल की उम्र में पिता को खो दिया था. बचपन में वह नंगे पैर दौड़ती थीं और मवेशी चराती थीं. गांव में जब उन्होंने एथलेटिक्स को करियर बनाने की कोशिश की तो लोगों ने भी सवाल उठाए, लेकिन मां ने बेटी का साथ नहीं छोड़ा. आज उसी बेटी ने एशियन गेम्स में भारत के लिए 10,000 मीटर का कांस्य जीतकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा दिया. सीमा ने  कांस्य पदक (32:50.05) जीता. वह एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय हैं. उनसे पहले 2010 के एशियन गेम्स में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था. सीमा के लिए यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है. उन्होंने कहा, 'यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और अपना सपना पूरा किया.' सोना जीतने निकली थीं, कांसे से नहीं मानीं 10,000 मीटर की रेस को सीमा ने बेहद रणनीतिक बताया. उनके मुताबिक खिलाड़ियों की नजर समय पर नहीं, बल्कि पदक पर थी. उन्होंने कहा, 'रेस काफी रणनीतिक थी. हर कोई पदक के लिए दौड़ रहा था. मैंने भी सोचा कि मुझे पदक के लिए लड़ना है, क्योंकि यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. हर खिलाड़ी अपने देश के लिए गोल्ड जीतना चाहता है.' सीमा भी सोना जीतने के इरादे से उतरी थीं, लेकिन कांस्य से उन्हें संतोष करना पड़ा. हालांकि उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है. 28 सितंबर को फिर ट्रैक पर उतरेंगी सीमा सीमा अब 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में उतरेंगी. 10,000 मीटर का कांस्य जीतने के बाद उनका लक्ष्य साफ है- पदक का रंग बदलना. उन्होंने कहा, 'मैंने गोल्ड जीतने के लिए लड़ाई की, लेकिन कांस्य जीता. मैं खुश हूं. अब मेरा अगला इवेंट 28 सितंबर को 5000 मीटर है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी और पदक का रंग बदलना चाहूंगी.' पिछले साल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत जीत चुकीं सीमा ने अपनी तैयारी का श्रेय कोच स्कॉट साइमन को भी दिया. उनके मुताबिक ओलंपिक चैम्पियनों के साथ ट्रेनिंग ने सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी बढ़ाई है. और शायद यही सीमा की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है- जिस बेटी को मां की चिंता से बचाने के लिए अपना ठिकाना छिपाना पड़ा, वही बेटी अब देश के लिए मेडल जीतकर मां तक अपनी खबर पहुंचा रही है.