samacharsecretary.com

ममता बनर्जी का हमला: ‘नफरत की राजनीति को बंगाल में जगह नहीं’—बाबरी मस्जिद मुद्दे पर प्रतिक्रिया

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास ने प्रदेश की राजनीति को तेज कर दिया है। यह काम सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर द्वारा किया गया है, ऐसे में भले ही टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया है लेकिन भाजपा का निशाना सीधा ममता बनर्जी पर ही है। इसी खींचतान के बीच शनिवार 6 दिसंबर को संहति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल की सदियों पुरानी सह-अस्तित्व की परंपरा को रेखांकित किया और एकता और सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए याद दिलाया कि बंगाल की पहचान अनेकतावाद में निहित है। बनर्जी ने लिखा, "मैं संहति दिवस/संप्रीति दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई देती हूँ। बंगाल एकता की धरती है, टैगोर, नज़रुल, रामकृष्ण और विवेकानंद की धरती है। यह मिट्टी कभी भी विभाजनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकी है और न कभी झुकेगी।" गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस छह दिसंबर को बाबरी मस्जीद गिराए जाने की याद में संहति दिवस मनाती है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम अपनी खुशियाँ साझा करते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन त्योहार सभी के लिए हैं। सांप्रदायिक नफरत की आग भड़काने और देश को नष्ट करने वालों के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। आइए, हम सब शांति और सद्भाव बनाए रखें।" गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया जब पार्टी के निष्कासित विधायक हुमायूँ कबीर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की शैली में एक मस्जिद की आधारशिला रख रहे थे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक-बहुल जिलों में अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करना है। इस घटनाक्रम से राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थक और तृणमूल कांग्रेस के समर्थक एक दूसरे के आमने सामने आकर खड़े हो गये हैं। दोनों पक्षों के इस रूख से राज्य के पहले से तनावपूर्ण सांप्रदायिक परिस्थितियों में तनाव और गहरा हो गया है। भाजपा समर्थक संगठन भी अपनी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक विशाल धार्मिक समागम आयोजित किया जा रहा है, जहाँ लगभग पाँच लाख लोगों के एकजुट होकर भगवद्गीता का पाठ करने की उम्मीद है। विशेषज्ञ इस कार्यक्रम को आगामी विधानसभा चुनावों के पहले हिंदू मतदाताओं को मजबूत करने के लिए एक बड़े प्रयास के रूप में देख रहे हैं। 'पंच लक्ष कंठे गीतापाठ' (पाँच लाख कंठों से गीता पाठ) नामक यह कार्यक्रम विभिन्न धार्मिक संगठनों की एक छत्र संस्था सनातन संस्कृति संसद द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस सामूहिक पाठ को बंगाल में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक पाठ बताया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि योग गुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री और पद्म भूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने वाले हैं। बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। आयोजकों ने हालांकि इस कार्यक्रम को विशुद्ध रूप से धार्मिक पहल बताया है, लेकिन भाजपा की प्रमुख हस्तियों की भागीदारी ने इसके राजनीतिक उद्देश्य के बारे में अटकलों को जन्म दिया है। सूत्रों ने पुष्टि की कि भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे वरिष्ठ नेताओं के इस आयोजन में शामिल होने की संभावना है। बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखे जाने और भाजपा के व्यापक गीता पाठ कार्यक्रम दोनों के लगभग साथ-साथ होने से बंगाल का राजनीतिक संघर्ष तीव्र हो गया है और प्रत्येक खेमा अपने मूल मतदाताओं को सक्रिय करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग कर रहा है, क्योंकि जल्द ही राज्य में चुनाव होने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर यूनीवार्ता को बताया, "शांति, एकता और साझा सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री का आह्वान बढ़ते ध्रुवीकरण को शांत करने और राज्य के उस दीर्घकालिक विश्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से है कि सामाजिक सामंजस्य ही बंगाल की पहचान को परिभाषित करता है, न कि धार्मिक टकराव।"  

हुमायूं करेंगे बाबरी मस्जिद का शिलान्यास, हाई कोर्ट ने जारी किया सख्त निर्देश, सुरक्षा में CISF और 3 लाख लोगों की भीड़

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आज बड़ी हलचल होने वाली है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में आज यानी 6 दिसंबर का दिन खास है. आज यानी छह दिसंबर को टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अपना वचन पूरा करने वाले हैं. जी हां, हुमायूं कबीर आज यानी शनिवार को ‘बाबरी मस्जिद जैसी ही एक मस्जिद का शिलान्यास करवाने वाले हैं. बेलडांगा में आज बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास समारोह है. यह एक विशाल कार्यक्रम होगा. इसके लिए सुरक्षा की पुख्ता तैयारी की गई है. माना जा रहा है कि मस्जिद का शिलान्यास सऊदी के मौलवी करेंगे. चलिए जानते हैं हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर कैसी तैयारी है और सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं. बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद के शिलान्यास समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है. यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है, जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. हुमायूं कबीर को इस मस्जिद की कीमत भी चुकानी पड़ी है. कांग्रेस और भाजपा से होते हुए टीएमसी में आए बागी नेता हुमायूं कबीर को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया गया. बाबरी मस्जिद के शिलान्यास को लेकर कैसी तैयारी? सत्तारूढ़ टीएमसी ने कबीर के इस रवैये को संगठन के लिए बार-बार शर्मिंदगी भरा कदम बताया था. कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे. कबीर ने संवाददाताओं से कहा कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग 3 लाख लोग इकट्ठा होंगे. उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है. हुमायूं कबीर ने क्या कहा?     कबीर ने कहा, ‘सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे.’ राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच (राष्ट्रीय राजगमार्ग)-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर तैयारियां उसी जोर-शोर से चल रही थीं जैसी आमतौर पर उच्च-स्तरीय राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए होती हैं. बिरयानी के 40 हजार पैकेट तैयार भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है. विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय निवासियों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा. उन्होंने कहा, ‘आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपये होगा.’ HC ने दिया सख्त निर्देश; CISF पहले से तैनात कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए जो भी आवश्यक हो, वह कदम तुरंत उठाए जाएं। यह निर्देश निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा 6 दिसंबर को प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम के मद्देनजर दिया गया है। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या में बाबरी का ढांचा ढहाया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने रुख के अनुसार कार्य करना होगा… मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था कड़ाई से कायम रखी जानी चाहिए और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। 8 महीने पहले भड़के थे दंगे हुमायूं कबीर का यह मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुर्शिदाबाद आठ महीने पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से उबरा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतने का दावा किया है। राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। उधर, उप सॉलिसिटर-जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि सीआईएसएफ की 19 कंपनियां पहले से इलाके में मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 3500 की संयुक्त सुरक्षा टुकड़ी, जिसमें आरएएफ की यूनिटें शामिल हैं, वे शुक्रवार शाम से रेजीनगर और आसपास के इलाकों में मोर्चा संभाल चुकी है। बीएसएफ की दो कंपनियां एनएच-12 की सुरक्षा के लिए तैयार रखी गई हैं। इसी बीच, निलंबन के एक दिन बाद विधायक कबीर को रेजीनगर थाने तलब किया गया, जहां उनसे कई घंटे पूछताछ हुई। कबीर का दावा- कुरान पढ़ी जाएगी, कोई राजनीति नहीं होगी पूरे विवाद के बीच हुमायूं कबीर दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी करते रहे। उन्होंने अपनी टीम से 30000 बिरयानी पैकेट मेहमानों के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही वे जमीअत उलेमा-ए-हिंद के कुछ अलग हुए गुटों और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मिले। उन्होंने पत्रकारों से कहा- मुख्य कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दो घंटे तक कुरान पढ़ी जाएगी। कोई भाषण नहीं होगा, कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा, न पार्टी के झंडे, न कोई राजनीतिक बयानबाजी। मैं 2,000 स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहूंगा। सब जानते हैं… यह कोई नई बात नहीं है। टीएमसी का आरोप- विपक्ष की साजिश टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि राज्य चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है और प्रतिद्वंदी दल टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ दोनों ही सतर्क मोड पर आ गई हैं। चौतरफ़ा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी। राज्यपाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल के लोगों से शांति बनाए रखने और भड़काऊ बयानों व अफवाहों से प्रभावित न होने का आग्रह किया। उन्होंने यह आग्रह तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई मस्जिद की आधारशिला रखने से पहले किया है। लोक भवन द्वारा सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे कि कहीं भी कोई अशांति न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने लोकभवन में तत्काल प्रभाव से 24×7 कार्यरत रहने वाला एक 'एक्सेस प्वाइंट सेल' बनाने का भी निर्देश दिया … Read more

बाबरी मस्जिद पर TMC विधायक का बड़ा दावा, 6 दिसंबर को नींव रखने की बात पर BJP आक्रामक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूं कबीर ने 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण का ऐलान किया है। इससे बीजेपी भड़क गई और टीएमसी पर जमकर निशाना साधा। टीएमसी विधायक हुमायूं के अनुसार, छह दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी जाएगी। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि 464 साल पहले, बाबर के मिलिट्री कमांडर ने यह मस्जिद (बाबरी मस्जिद) बनाई थी। उन्होंने मस्जिद तोड़कर राम मंदिर बनाया, और किसी ने इसका विरोध नहीं किया। जब मैं बाबर के नाम पर मस्जिद बनाना चाहता हूं तो वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्होंने आगे कहा, ''अगर सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद बनाने के खिलाफ कोई निर्देश दिया है, तो मुझे बताएं। अगर होम मिनिस्ट्री ने ऐसा कोई निर्देश जारी किया है कि बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जा सकती, तो मैं आगे नहीं बढ़ूंगा। तब मैं मस्जिद के लिए कोई दूसरा नाम सोचूंगा। अगर वे मेरा सिर काटना चाहते हैं, तो वे नींव रखने के कार्यक्रम के दौरान आ सकते हैं। मैं इसके लिए तैयार हूं। मैं उन्हें मुर्शिदाबाद आकर मेरा सिर काटने की चुनौती देता हूं। मैं खुद को शहीद करने के लिए तैयार हूं… हम बाबरी मस्जिद बनाएंगे।'' हालांकि, हुमांयू कबीर के इस इस ऐलान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने खुद को इससे दूर कर लिया और भाजपा ने आरोप लगाया कि लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। छह दिसंबर को अयोध्या में 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 33 साल पूरे होने वाले हैं, ऐसे में इस प्लान किए गए समारोह ने अल्पसंख्यकों की ज्यादा संख्या वाले मुर्शिदाबाद जिले में राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है, जहां इस साल अप्रैल में वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025 को लेकर विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुई थीं। कबीर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए हाल ही में कहा, "हां, मैं 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के मॉडल पर बनी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा। यह मस्जिद बहुत बड़ी होगी और असली ढांचे से प्रेरित होगी।" उन्होंने आगे कहा, "यह मेरा धार्मिक अधिकार है और स्थानीय लोगों की मांग है।" उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इमोशनल है और ज़ोर देकर कहा कि उनका प्लान एक पर्सनल संकल्प है, चुनावी गणित से जुड़ा नहीं है। पश्चिम बंगाल असेंबली में टीएमसी के चीफ व्हिप, निर्मल घोष ने पीटीआई को बताया, "पार्टी हुमायूं कबीर के टच में नहीं है। उनकी बातों या कामों का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। वह जो कुछ भी कह रहे हैं या कर रहे हैं, वह अपनी पर्सनल हैसियत से कर रहे हैं। पार्टी उनका सपोर्ट नहीं करती है और मामले को देख रही है।" मस्जिद के ऐलान से भड़के बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी वहीं, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने  आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर 'बाबरी मस्जिद' बनाने के वादे के साथ मुर्शिदाबाद में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सेंट्रल एजेंसियों से जांच करने को कहा कि क्या वह हाल ही में बांग्लादेश गए हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिले में अपने नंदीग्राम चुनाव क्षेत्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, अधिकारी ने कहा कि मुर्शिदाबाद, जो बांग्लादेश की सीमा से लगा है, पहले से ही इस साल की शुरुआत में वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट के विरोध के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा के सदमे से जूझ रहा है, और कबीर स्थिति को फिर से भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, "वह जिले में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी भी दंगों के सदमे से उबर रहा है, जिसमें जिहादी तत्वों ने दो हिंदुओं को मार डाला था। हिंदू मंदिर बना सकते हैं, मुसलमान मस्जिद बना सकते हैं, और ईसाई चर्च बना सकते हैं। लेकिन यह घोषणा करना कि 6 दिसंबर को एक मस्जिद की नींव रखी जाएगी और उसका नाम 'बाबरी मस्जिद' रखा जाएगा, यह संविधान और सुप्रीम कोर्ट की पूरी तरह से अवहेलना है।"

TMC के हुमायूं कबीर के मस्जिद निर्माण ऐलान पर उमा भारती ने जताई कड़ी प्रतिक्रिया

भोपाल  विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक साम्प्रदायिक मोड आ गया है. बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण की आधारशिला रखने का ऐलान किया है. 6 दिसंबर वही तारीख है जब 33 साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ दी गई थी.  टीएमसी विधायक के इस बयान पर बीजेपी नेता और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं प्रखर हिंदूवादी नेत्री उमा भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि इबादत के नाम पर बनी मस्जिद का हम सम्मान करेंगे लेकिन बाबर के नाम से बनी हुई इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था, ईंटे भी गायब हो गई थीं.  हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के विधायक और पूर्व मंत्री हैं.  हुमायूं कबीर ने 2021 में भरतपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. इस बार 2026 में विधानसभा चुनाव होने को हैं. 2021 में हुमायूं कबीर को 96 हजार 226 वोट मिले थे. उन्होंने बीजेपी के ईमान कल्याण मुखर्जी को 43 हजार 83 वोटों के मार्जिन से हराया था. 2016 में हुमायूं कबीर भरतपुर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें मात्र 1497 वोट मिले थे.  लेकिन जब वे टीएमसी में आए तो उनकी किस्मत बदल गई. हुमायूं कबीर ने कहा कि वह  6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे. इस दौरान मुस्लिम समाज के कई नेता शिरकत करेंगे. उन्होंने कहा कि यह निर्माण तीन साल में पूरा हो जाएगा. हुमायूं कबीर ने कहा कि इस कार्यक्रम में कई मुस्लिम मौलानाओं को न्योता दिया जाएगा.  हुमायूं कबीर बेलडांगा क्षेत्र में काफी असर रखते हैं और मुस्लिम समुदाय के बीच लोकप्रिय हैं. कबीर पहले भी विवादित बयान और राजनीतिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहे हैं. माना जाता है कि वे पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट चल रहे हैं, पर ममता बनर्जी की आलोचना से बचते रहे हैं. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं उमा भारती ने इस बयान पर काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "खुदा, इबादत, इस्लाम के नाम पर मस्जिद बने हम सम्मान करेंगे लेकिन बाबर के नाम से बनी हुई इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था, ईंटे भी गायब हो गई थीं." पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सलाह देते हुए उमा भारती ने कहा कि, "मेरी मित्र ममता बनर्जी जी को सलाह है कि बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की बात कहने वालों पर कार्रवाई करिए, बंगाल एवं देश की अस्मिता एवं सद्भाव के लिए आपकी भी जिम्मेवारी है."  6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी राम मंदिर आंदोलन के दौरान आज से 33 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों ने अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था. हिंदू संगठनों का दावा था कि यह मस्जिद भगवान राम के जन्मस्थान पर मुगल शासक बाबर द्वारा बनवाई गई थी. मुस्लिम संगठन इसे अपनी मस्जिद बताते थे. इस विध्वसं के बाद देश भर में कई जगहों पर साम्प्रदायिक दंगे हुए थे.  इस मामले में 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल की जमीन हिन्दू पक्ष को दी और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.  बाबरी मस्जिद ही क्यों? TMC MLA हुमायूं कबीर के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा  है कि, 'मस्जिद बनाना ठीक है, लेकिन खास तौर पर 'बाबरी मस्जिद' ही क्यों? जो विवाद पहले ही सुलझ चुका है, उसे राजनीतिक फायदे के लिए फिर से खोला जा रहा है. हमारा रिश्ता बाबर से नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज से है." टीएमसी विधायक के इस बयान पर बीजेपी नेता और बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेन्दु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है, "वह यह सब सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए कर रहे हैं. चुनाव पास आ रहे हैं. बेचारे मुसलमान TMC को छोड़ रहे हैं. जैसे 2021 में उन्होंने CAA को NRC कहकर सभी मुसलमानों को एक किया था, इस बार वे बाबरी मस्जिद के निर्माण पर चर्चा करके ऐसा कर रहे हैं."   हुमायूं कबीर के इस बयान पर टीएमसी की अबतक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है.   

TMC विधायक ने किया ऐलान: 6 दिसंबर को बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखी जाएगी

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के निर्माण की तैयारी चल रही है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के बयान पर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। टीएमसी MLA ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव 6 दिसंबर को रखने की घोषणा की। यह तारीख उत्तर प्रदेश के अयोध्या की बाबरी मस्जिद के विध्वंस की वर्षगांठ है। भरतपुर से विधायक ने पिछले साल इस मस्जिद का प्रस्ताव रखा था। हुमायूं कबीर ने एएनआई से बातचीत में शनिवार को कहा, 'हम 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। इसे पूरा होने में तीन साल लगेंगे। विभिन्न मुस्लिम नेता इस आयोजन में भाग लेंगे।' भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर तीखा हमला बोला है। इसने सत्तारूढ़ टीएमसी पर धर्म आधारित राजनीति और तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'कोई भी मंदिर या मस्जिद बना सकता है, लेकिन टीएमसी धर्म के नाम पर राजनीति करती है। 6 दिसंबर की तारीख चुनने के पीछे उनकी मंशा स्पष्ट है। सवाल यह है कि टीएमसी ने अब तक अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया है?' TMC पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप बीजेपी नेता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि टीएमसी का सेक्युलरिज्म धर्म-विशेष को लेकर है। उन्होंने कहा, 'जब वे बाबरी मस्जिद को फिर से स्थापित करने की बात करते हैं, तो मैं जानना चाहती हूं कि वे उस बाबरी मस्जिद में किसे बुलाएंगे? क्या वे उन रोहिंग्या लोगों को, जो अब SIR के डर से सीमा क्षेत्रों की ओर भाग रहे हैं? यह कुछ और नहीं बल्कि तुष्टिकरण की राजनीति है।' 6 दिसंबर को एकजुटता दिवस रैली निकालेगी TMC इस बीच, तृणमूल कांग्रेस 6 दिसंबर को एकजुटता दिवस रैली निकालने वाली है। इसकी तैयारियों की जिम्मेदारी पार्टी की युवा और छात्र शाखाओं को सौंपी गई है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में आयोजित इस रैली का आयोजन आमतौर पर तृणमूल का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ करता रहा है, लेकिन इस बार आयोजन की जिम्मेदारी पार्टी की अन्य शाखाओं को देकर अहम बदलाव किया गया है। इस साल की रैली मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी प्रतिमा के पास होगी, जहां पार्टी एक बड़ी जनसभा की योजना बना रही है। सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व चाहता है कि बड़ी संख्या में लोग जुटें क्योंकि यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब एसआईआर ने पूरे राज्य में राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

राम मंदिर के बदले मिलने वाली जमीन पर मस्जिद निर्माण की योजना रद्द, RTI में खुलासा

अयोध्या  अयोध्या में सदियों पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद खत्म हो चुका है। विवादित स्थल पर राम मंदिर बन चुका है, जिसे लगातार भव्य रूप दिया जा रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को जहां मस्जिद के लिए जमीन दी गई, वहां विकास की एक ईंट तक नहीं रखी गई है। और अब तो आरटीआई आवेदन के तहत निर्माण योजना ही खारिज होने की जानकारी मिली है, जो चौंकाने वाली है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक RTI (सूचना का अधिकार) के जवाब से पता चला है कि अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में बनने वाले मस्जिद के लेआउट प्लान को खारिज कर दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (NoC) जारी नहीं किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को अयोध्या के अहम फैसले में मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। 3 अगस्त, 2020 को तत्कालीन अयोध्या डीएम अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। मस्जिद ट्रस्ट ने 23 जून, 2021 को योजना की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। तब से, मंजूरी पर कोई अपडेट नहीं आया है। विभाग ने बताया ये है दिक्कत अखबार ने आरटीआई कार्यकर्ता के हवाले से लिखा है कि मस्जिद के लेआउट प्लान को मंजूरी न मिलने का कारण विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक एनओसी का नहीं मिलना है. इन प्रमाणपत्रों के बिना प्राधिकरण ने योजना को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. यह खुलासा उस समय हुआ है जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के उसी फैसले के तहत मंजूरी दी गई थी. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया या समयसीमा के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है. यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है, जब यह देखा जाता है कि राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि मस्जिद परियोजना अभी तक प्रारंभिक चरण में ही अटकी हुई है. इस खुलासे के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और संबंधित पक्ष इस मामले में आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि परियोजना को गति मिल सके. मस्जिद ट्रस्ट ने कही ये बात अखबार ने मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन के हवाले से लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें वह भूखंड आवंटित किया. मैं हैरान हूं कि सरकारी विभागों ने एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, अग्निशमन विभाग द्वारा की गई साइट जांच के दौरान यह पाया गया कि मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊंचाई के अनुसार अप्रोच रोड की चौड़ाई 12 मीटर होनी चाहिए. लेकिन मौके पर दोनों अप्रोच मार्ग 6 मीटर से अधिक नहीं थे और मुख्य अप्रोच मार्ग की चौड़ाई केवल लगभग 4 मीटर थी. ट्रस्ट सचिव ने बताया कि उन्हें एनओसी या खारिज किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा मुझे किसी अन्य विभाग द्वारा उठाई गई किसी भी आपत्ति की जानकारी नहीं है. NOC आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं मिली? 16 सितंबर 2025 को स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह की तरफ से दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में एडीए ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने आवेदन और जांच शुल्क के रूप में 4 लाख रुपये का भुगतान किया था। एडीए की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार- पीडब्ल्यूडी, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई और राजस्व विभाग और नगर निगम, जिला मजिस्ट्रेट और अग्निशमन सेवा से एनओसी मांगी गई थी। मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन अनिवार्य कर दी है और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें भूखंड आवंटित किया है। मैं इस बात से अवाक हूं कि सरकारी विभागों ने अपनी एनओसी क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद के लेआउट प्लान को क्यों खारिज कर दिया।" उन्होंने बताया कि "हालांकि अग्निशमन विभाग द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान यह पाया कि मस्जिद और अस्पताल की इमारत की ऊंचाई के अनुसार यह जरूरी था कि पहुंच मार्ग 12 मीटर चौड़ा होना चाहिए। जबकि मौके पर दोनों पहुंच मार्ग छह मीटर से अधिक नहीं थे। और मुख्य पहुंच मार्ग की चौड़ाई केवल चार मीटर थी। ट्रस्ट सचिव ने कहा कि उन्हें किसी एनओसी या अस्वीकृति के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा, मुझे किसी अन्य विभाग की आपत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।" उन्होंने कहा, "अब जब आरटीआई जवाब से हमें स्थिति स्पष्ट हो गई है, तो हम अपनी आगे की कार्रवाई तय करेंगे।"