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US-बांग्लादेश डील: ट्रंप ने टैरिफ घटाए, यूनुस की भी की सराहना

ढाका  भारत के बाद अमेरिका ने बांग्लादेश से भी डील कर ली है। खबर है कि अमेरिका सरकार ने बांग्लादेश पर लगाए टैरिफ को कम किया है। साथ ही कुछ कपड़ा उत्पादों पर शुल्क शून्य करने का भी फैसला किया है। खास बात है कि यह डील ऐसे समय पर हुई है, जब खबरें थीं कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस डील जल्द ही अमेरिका के साथ सीक्रेट डील करने वाले हैं। अमेरिका ने बांग्लादेश पर लगाए 20 फीसदी टैरिफ को घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही कुछ ऐसे कपड़ों पर जवाबी टैरिफ शून्य कर दिया है, जिन्हें बनाने का सामान अमेरिका से आयात किया जाता है। सोमवार को दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय समझौता हुआ। दोनों देशों की तरफ से औपचारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह समझौता प्रभाव में आ जाएगा। खबर है कि बांग्लादेश की तरफ से कॉमर्स एडवाइजर शेख बशीरुद्दीन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलील उर रहमान की तरफ से दस्तखत किए गए। जबकि, अमेरिकी पक्ष की तरफ से राजदूत जेमीसन ग्रीर मौजूद रहे। ग्रीर ने इस समझौते के लिए यूनुस और उनकी वार्ताकार टीम की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा है कि यह समझौता अमेरिकी व्यापार नीति में बांग्लादेश की स्थिति को मजबूत करेगा। गारमेंट सेक्टर को बड़ी राहत दरअसल, गारमेंट सेक्टर बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। बांग्लादेश को निर्यात से करीब 80 प्रतिशत आय इसी से होती है। इसमें 40 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं और इनमें मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि कम टैरिफ रेट बांग्लादेशी निर्माताओं को अमेरिका बाजार में टिके रहने का मौका देंगे। पहले कितना था टैरिफ बीते साल अप्रैल में अमेरिका ने जवाबी शुल्क का ऐलान किया था। उस दौरान बांग्लादेश पर 37 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। बाद में अगस्त में इसे घटाकर 20 प्रतिशत किया गया था। अब ताजा समझौते के बाद यह घटकर 19 फीसदी पर आ गया है।

बांग्लादेश को लाहौर का न्योता: सीक्रेट मीटिंग और रात की फ्लाइट के पीछे की पूरी कहानी

 ढाका शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे (8 फरवरी) बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ‘बुलबुल’ ढाका के हज़रत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में थे. उस वक्त बीसीबी के कुछ अधिकारी सो रहे थे, तो कई को यह भी पता नहीं था कि उनके अध्यक्ष कहां जा रहे हैं. बुलबुल की इस अचानक यात्रा की जानकारी बीसीबी के डायरेक्टर्स को तब मिली, जब उनके व्हाट्सऐप ग्रुप पर एक मैसेज आया. मैसेज में बताया गया कि अमीनुल इस्लाम बुलबुल लाहौर के लिए रवाना हो चुके हैं. बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक, बुलबुल ने मैसेज में लिखा, 'इस यात्रा की पुष्टि सिर्फ 90 मिनट पहले हुई है. मैं अभी एयरपोर्ट पर हूं. इतने कम समय में किसी को फोन नहीं कर पाया. बैठक 8 फरवरी को लाहौर समय के अनुसार शाम 4 बजे होगी. मैं 9 फरवरी की शाम तक लौट आऊंगा.' हालांकि इस मैसेज से यह तो साफ हो गया कि बुलबुल लाहौर जा रहे हैं, लेकिन उनके अपने बोर्ड के सदस्य भी यह नहीं जान पाए कि आखिर इस दौरे का मकसद क्या है. टी20 वर्ल्ड कप विवाद से जुड़ी थी यह यात्रा अमीनुल इस्लाम बुलबुल की यह आधी रात की उड़ान आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बड़े विवाद से जुड़ी थी. बांग्लादेश पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है, जबकि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोलंबो में होने वाला मैच खेलने से इनकार कर दिया था. पाकिस्तान ने यह फैसला बांग्लादेश के समर्थन में लिया था. इसी बीच खबरें आईं कि पाकिस्तान अपने फैसले पर यू-टर्न ले सकता है. ऐसे में लाहौर में होने वाली आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की बैठक काफी अहम हो गई. इसी बैठक में अमीनुल इस्लाम बुलबुल की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए. सवाल यह था कि क्या बुलबुल पाकिस्तान के समर्थन में वहां पहुंचे थे? या यह किसी तरह की सौदेबाजी का संकेत था? और अगर सौदा हो रहा था, तो किस बात पर? यह भी हैरानी की बात रही कि जब कई लोग ज़ूम के जरिए बैठक में शामिल हुए, तो फिर बीसीबी प्रमुख को खुद लाहौर जाकर मौजूद रहने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि बैठक का एजेंडा बांग्लादेश से ज्यादा पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था. खासकर तब, जब बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप में शामिल कर लिया गया है. बांग्लादेश के क्रिकेट अध्यक्ष क्यों पहुंचे पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमीनुल इस्लाम बुलबुल रविवार को लाहौर पहुंचे, जहां उन्हें पीसीबी के सीईओ सलमान नसीर ने रिसीव किया. पीसीबी ने सोशल मीडिया पर उनका स्वागत करते हुए एक वीडियो भी साझा किया. दरअसल, पाकिस्तान ने 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाला टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार तब किया था, जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत आने से मना कर दिया था. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समर्थन से बांग्लादेश ने आईसीसी से अपने मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की थी. आईसीसी ने यह मांग ठुकरा दी और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया. इसके बाद यह पूरा विवाद और गहरा गया.  5 घंटे की बैठक, लेकिन फैसला अधूरा लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी के बीच करीब 5 घंटे तक चली बैठक के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. पाकिस्तान ने आईसीसी को बताया कि वह भारत के खिलाफ मैच खेलने पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से सलाह के बाद ही करेगा. बैठक में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के बदले तीन शर्तें रखीं— 1. आईसीसी रेवेन्यू में ज्यादा हिस्सा 2. भारत-पाक द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली 3. खिलाड़ियों के बीच अनिवार्य हैंडशेक प्रोटोकॉल खबरों के मुताबिक, बुलबुल और पीसीबी प्रमुख नक़वी के बीच अलग से वन-ऑन-वन बैठक भी हुई. तो आखिर बैठक में बांग्लादेश क्यों था? भले ही बांग्लादेश अब वर्ल्ड कप से बाहर हो चुका है, लेकिन लाहौर बैठक में उसकी मौजूदगी अहम मानी जा रही है. बीसीबी लगातार पाकिस्तान के रुख के साथ खड़ा रहा है और यह मौजूदगी पाकिस्तान की मोलभाव की ताकत बढ़ाने वाली मानी जा रही है. भारत-पाकिस्तान मैच दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले मुकाबलों में से एक है. इससे आईसीसी को ब्रॉडकास्ट, स्पॉन्सरशिप और विज्ञापन से करोड़ों की कमाई होती है. इसका असर बाकी छोटे बोर्ड्स, जैसे बांग्लादेश, की सालाना कमाई पर भी पड़ता है. बांग्लादेशी खेल पत्रकार देब चौधरी के मुताबिक, आईसीसी बांग्लादेश के जरिए पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है. अगर यह मैच होता है, तो बांग्लादेश को भी आईसीसी की कमाई में हिस्सा मिल सकता है, जिससे वर्ल्ड कप से बाहर होने का आर्थिक नुकसान कुछ हद तक कम हो जाएगा. खेल और राजनीति की जटिल कहानी अमीनुल इस्लाम बुलबुल की रात 1 बजे की यह अचानक उड़ान भले ही उनके अपने बोर्ड के लिए रहस्य रही हो, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि बांग्लादेश क्रिकेट किस तरह पाकिस्तान के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ गया है. यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल और राजनीति को अलग करना आसान नहीं है.

भारत-बांग्लादेश व्यापार में बड़ा बदलाव: तीन साल में 15 हजार करोड़ का कारोबार होगा भारत के हाथ, निर्यात होगा दोगुना

नई दिल्‍ली  अमेरिका के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता होने से भारत के कपड़ा निर्यात को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलने की उम्‍मीद है. कपड़ा निर्यात संगठनों ने अनुमान लगाया है कि महज तीन साल में परिधान निर्यात बढ़कर दोगुना होने की पूरी उम्‍मीद है. अभी भारत से अमेरिका को होने वाला कपड़ा निर्यात करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना का है, जो तीन साल के भीतर बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा पहुंच सकता है. देश में कपड़ा निर्यात का हब माने जाने वाले तिरुप्‍पुर के कपड़ा उद्योग निर्यातकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते के बाद अगले तीन वर्षों में अमेरिका को कपड़ों का निर्यात दोगुना होकर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुचने की उम्मीद है. तिरुप्पुर निर्यातक संघ के अध्यक्ष के एम सुब्रमणियन ने कहा कि चेन्नई से लगभग 450 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तिरुप्पुर में भी इस अवधि के दौरान रोजगार सृजन में लगभग पांच लाख की वृद्धि होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि इस डील ने 5 लाख नौकरियों के भी अवसर बनाए हैं. 5 साल में जबरदस्‍त बढ़ोतरी भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत दोनों पक्ष दोतरफा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए सुब्रमणियन ने कहा कि हम इस कदम का स्वागत करते हैं. यह समझौता महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तिरुप्पुर को अगले 5 वर्षों में जबरदस्त वृद्धि मिलेगी. अभी 15 हजार करोड़ का है निर्यात उन्होंने बताया कि वर्तमान में तमिलनाडु से कपड़ों का निर्यात 15,000 करोड़ रुपये का है और इस समझौते के बाद इसके अगले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. सुब्रमणियन ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते के कारण पांच लाख और नए रोजगार पैदा होंगे. तिरुप्पुर के एक अन्य उद्यमी और स्टारलाइट एक्सपोर्टर्स के संस्थापक एम. रथिनसामी ने कहा कि इस सौदे से तमिलनाडु को अमेरिका से और अधिक ऑर्डर मिलेंगे. बांग्‍लादेश को पीछे छोड़ देंगे तिरुप्पुर निर्यातक संघ के कार्यकारी समिति सदस्य रथिनासामी ने कहा कि पहले कुछ ऑर्डर बांग्लादेश और अन्य देशों को जाते थे. इस समझौते के बाद हमें (अमेरिका से) और अधिक ऑर्डर मिलेंगे. यह समझौता सीधे तौर पर बांग्‍लादेश के लिए भी बड़ा झटका है. बांग्‍लादेश पर इससे पहले कम टैरिफ होने की वजह से अमेरिका के कई ऑर्डर वहां से जाते थे, जबकि अब भारत पर टैरिफ बांग्‍लादेश से भी कम हो गया है. लिहाजा आने वाले समय में अमेरिका से ज्‍यादा ऑर्डर मिलने का अनुमान है.

बांग्लादेश को अमेरिका का गुलाम बनाने की तैयारी में यूनुस? चुनाव से पहले सीक्रेट डील पर हलचल

ढाका  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की तब पड़ोसी बांग्लादेश में चिंताएं बढ़ गईं क्योंकि बांग्लादेश भी अमेरिका के साथ एक समझौता करने जा रहा है. ये चिंता इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह सीक्रेट रखा गया है. प्रस्तावित समझौते को लेकर सवाल ऐसे भी उठ रहे हैं कि क्या गैर-निर्वाचित मोहम्मद यूनुस प्रशासन के पास ऐसा समझौता करने का जनादेश भी है या नहीं. यह घटनाक्रम उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया गया है कि 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने वाली इस्लामी साजिश के साथ-साथ यूनुस प्रशासन को अमेरिकी डीप स्टेट का समर्थन मिला था. अमेरिका के साथ समझौता सीक्रेट रखा गया है जिसे लेकर बांग्लादेश के निर्यातक संगठनों और खासकर उसके अहम टेक्सटाइल सेक्टर के हितधारकों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि समझौते की शर्तें बांग्लादेशी निर्यात को और नुकसान पहुंचा सकती हैं. बांग्लादेश के कुल निर्यात का 90 फीसदी से ज्यादा रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स का है. ट्रंप के टैरिफ की वजह से बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा है और अगर अमेरिका के साथ कोई सीक्रेट समझौता हो जाता है तो बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले क्षेत्रों को यह प्रभावित कर सकता है. इससे बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है. समझौते की वैधता पर उठ रहे सवाल समझौते की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील बांग्लादेश में चुनाव से महज तीन दिन पहले 9 फरवरी को हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि चुनाव से ठीक पहले और अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यूनुस प्रशासन यह समझौता क्यों कर रहा है. बांग्लादेशी अखबार ‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यूनुस प्रशासन ने अमेरिका के साथ एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे, जिसके चलते समझौते के ड्राफ्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं है. बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और बुद्धिजीवी अनु मुहम्मद ने कहा है कि यूनुस प्रशासन की यह जल्दबाजी और झोल-झाल सिर्फ अमेरिका के साथ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि आम चुनाव से ठीक पहले जल्दबाजी में बंदरगाह लीज पर दिया जा रहा, हथियार आयात किए जा रहे और अमेरिका के साथ 'अधीनता' वाले समझौते साइन किए जा रहे हैं. अनु मुहम्मद ने सवाल किया कि 9 फरवरी के बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते से आखिर किसके हित सध रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये समझौते पूरी तरह गैर-पारदर्शी, अव्यावहारिक और अनियमित तरीके से आगे बढ़ाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी 'लॉबिस्ट' सलाहकार बनकर यूनुस प्रशासन के भीतर बैठाए गए हैं, जो इन समझौतों को किसी भी कीमत पर कराना चाहते हैं. यह भी आरोप हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से ही अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. ट्रेड डील को लेकर चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब रिपोर्टें हैं कि अमेरिकी डिप्लोमैट्स जमात के साथ बातचीत कर रहे हैं. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में जमात को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. कोलकाता में एक वर्चुअल प्रोग्राम को संबोधित करते हुए 2 फरवरी को शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश एक 'फर्जी' चुनाव की ओर बढ़ रहा है, जिसका मकसद विदेशी हितों के प्रति वफादार कमजोर सरकार बनाना है. उन्होंने यूनुस शासन पर इस्लामवादियों के समर्थन से चलने और अपारदर्शी तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया. रोचक बात ये हैं कि 12 फरवरी को बांग्लादेश सिर्फ नई सरकार के लिए वोटिंग नहीं करेगा, बल्कि जुलाई चार्टर पर भी मुहर लगाएगा या उसे खारिज करेगा. इस चार्टर को खुद मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है और ‘यस वोट’ के पक्ष में कैंपेन चला रही है. 2024 के हसीना-विरोधी प्रदर्शनों के बाद तैयार किया गया यह चार्टर संविधान में संशोधन करेगा. माना जा रहा है कि यह संशोधन अंतरिम शासन की तरफ से की गई कथित गड़बड़ियों का भी बचाव करेगा. जल्दबाजी में समझौता क्यों कराना चाहती है यूनुस सरकार? अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया, तो बांग्लादेश पर 37 फीसदी का भारी टैरिफ लगा. जून 2025 में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन किया, जिससे टैरिफ पर बातचीत सीक्रेट हो गई. जुलाई में अमेरिका ने अचानक टैरिफ घटाकर 35 फीसदी और अगस्त में 20 फीसदी कर दिया. ढाका स्थित ‘डेली सन’ के मुताबिक, बांग्लादेश के वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने कहा है कि अमेरिका से 9 फरवरी की तारीख मिली है और उसी दिन समझौते पर दस्तखत होंगे. सबसे ज्यादा चिंता निर्यातकों, खासकर गारमेंट सेक्टर में है. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट इनामुल हक खान ने कहा कि बिना किसी परामर्श के यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली है. उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले समझौते पर दस्तखत करना ठीक नहीं है, क्योंकि इसके दूरगामी असर होंगे. यूनुस प्रशासन के जाने के कुछ ही दिनों बाद यह समझौता लागू कराने की जिम्मेदारी एक निर्वाचित सरकार पर आ जाएगी, जिसका इस समझौते की बातचीत में कोई रोल नहीं रहा. सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के वरिष्ठ फेलो देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि सवाल यह भी है कि क्या आने वाली सरकार के हाथ पहले से ही बांधे जा रहे हैं. डर क्यों फैला रहा है यह समझौता? समझौते की शर्तें किसी को नहीं पता. नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट के चलते समझौते के बाद प्रभावित होने वाले पक्ष पूरी तरह अंधेरे में हैं. चिंता सिर्फ निर्यातकों तक सीमित नहीं है, घरेलू बाजार पर निर्भर कारोबारी भी डरे हुए हैं. ढाका चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष तस्कीन अहमद ने कहा कि ड्राफ्ट की जानकारी न होने से इसके असर का आकलन करना मुश्किल है और इसे चुनाव से पहले साइन करने से बचा जा सकता था. ये चिंताएं जायज भी हैं क्योंकि शेख हसीना की सरकार को हटाने और यूनुस को सत्ता में लाने में अमेरिका पर संलिप्तता के आरोप लगे थे. बांग्लादेशी पत्रकार साहिदुल हसन खोकन के मुताबिक, हसीना को हटाने में अमेरिका सीधे तौर पर भले ही शामिल … Read more

भीड़ बनी जल्लाद! बांग्लादेश में एक महीने में 21 मौतें, सैकड़ों महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार

ढाका बांग्लादेश में जनवरी महीने के दौरान भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और जेल हिरासत में मौतों की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन मानबाधिकार शोंग्स्कृति फाउंडेशन (MSF) की मासिक रिपोर्ट ने देश की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार हालात को “खतरनाक और जटिल” करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में भीड़ हिंसा में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 10 थी। एमएसएफ ने कहा कि भीड़ हिंसा पर राज्य की ओर से ठोस और सख्त कार्रवाई न होने से दंडहीनता की संस्कृति को बढ़ावा मिला है, जिससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अज्ञात शवों की बरामदगी में इजाफा हुआ है। जनवरी में 57 अज्ञात शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।जेल हिरासत में मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। जनवरी में 15 कैदियों की जेल में मौत हुई, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 9 था। इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में दो लोगों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई। एमएसएफ ने इन मौतों के लिए चिकित्सकीय लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल प्रशासन की खामियों को जिम्मेदार ठहराया। आगामी 13वें राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा में भी तेजी देखी गई। जनवरी में चुनावी झड़पों में चार लोगों की मौत और 509 लोग घायल हुए, जबकि दिसंबर में सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजनीतिक मामलों में अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाए जाने की प्रवृत्ति खतरनाक रूप से बढ़ी है। दिसंबर में जहां 110 अज्ञात आरोपी दर्ज किए गए थे, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 320 हो गई। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक रही। जनवरी में 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 बलात्कार और 11 सामूहिक बलात्कार के मामले शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले भी बढ़े हैं। मंदिरों और मूर्तियों में चोरी, तोड़फोड़ और नुकसान की 21 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दिसंबर में यह संख्या सिर्फ छह थी। एमएसएफ ने सरकार से सभी मानवाधिकार उल्लंघनों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि न्याय व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो सके।

बांग्लादेश चुनाव में ”हिंदुओं को मार डालो’ बोलकर भड़का रहे उम्मीदवार

ढाका. बांग्लादेश में मु. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार को रोकने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस बीच फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले देश में माहौल और अधिक सांप्रदायिक हो गया है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरें आम हो गई हैं और यूनुस सरकार एक्शन लेने की बजाय इन्हें छिटपुट घटनाएं बताकर जिम्मेदारी लेने से बचने की कोशिश कर रही है। इन सब के बीच अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चुनाव में वोट के लिए बांग्लादेशी उम्मीदवार हिंदुओं पर हमलों को जानबूझकर बढ़ावा दे रहे हैं। खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि वोट पाने के लिए हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने की एक सोची-समझी रणनीति बनाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में बीते दिनों इस तरह की सांप्रदायिक आक्रामकता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह डर और चेतावनी के बल पर वोट हासिल करने के लिए तैयार की गई एक योजना है। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने पड़ोसी देश के मौजूदा हालातों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। सूत्रों ने कहा कि कट्टर मौलवियों और स्थानीय नेताओं के बीच सांठगांठ बनी है और इन मौलवियों को कई मौकों पर नफरत भरे बयान देते और जनता से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट ना देने की अपील करते देखा गया है। सांसद उम्मीदवार का कबूलनामा रिपोर्ट में बांग्लादेश के एक सांसद उम्मीदवार का भी हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक उम्मीदवार ने स्वीकार किया है कि कई सालों से, देश के राजनेताओं ने चुनाव जीतने के लिए हिंदू इलाकों पर हमले और यहां तक की हिंदुओं को मार डालने के लिए भड़काने की रणनीति का इस्तेमाल किया है। बांग्लादेशी का कहना है कि इन हमलों को अंजाम देने वालों को अब ‘इस्लाम के सैनिक’ बोल कर इनका महिमामंडन भी किया जा रहा है।

वर्ल्ड कप में लॉटरी का मौका: बांग्लादेश आउट होने के बाद टीम को मिलेगा आश्चर्यजनक स्थान

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने में अब केवल दो हफ्ते का वक्त बचा है. लेकिन पिछले 3 हफ्ते से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के बीच तनाव चरम पर है. बांग्लादेश लगातार भारत से अपने मैच श्रीलंका या पाकिस्तान में शिफ्ट कराने की जिद पर अड़ा है. लेकिन अब आईसीसी ने एक सख्त अल्टीमेटम बांग्लादेश को दे दिया है. आईसीसी ने साफतौर पर कह दिया है कि बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप के मैच भारत में ही खेलने होंगे. ICC ने बांग्लादेश को 21 जनवरी तक की अंतिम समय-सीमा दे दी है. ICC ने साफ कर दिया है कि अगर बांग्लादेश भारत आने से इनकार करता है, तो उसकी जगह दूसरी टीम को शामिल कर लिया जाएगा. यानी बांग्लादेश की वर्ल्ड कप से ही छुट्टी हो जाएगी. अब सवाल ये है कि अगर बांग्लादेश बाहर होता है तो फिर कौन सी टीम उसकी जगह खेल सकती है. इस टीम को मिलेगा मौका अगर बांग्लादेश ने आईसीसी की बात नहीं मानी तो फिर उसकी जगह स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिल जाएगा. दरअसल, आईसीसी टी20 रैंकिंग में बांग्लादेश 9वें नंबर पर है. इसके बाद अफगानिस्तान, आयरलैंड, जिम्बॉब्वे, और नीदरलैंड का नाम आता है. लेकिन ये सभी टीमें वर्ल्ड कप का हिस्सा हैं. इसके बाद 14वें नंबर पर स्कॉटलैंड का नाम आता है. यानी अगर बांग्लादेश बाहर हुआ तो फिर आईसीसी स्कॉटलैंड को चांस देगा. ICC का सब्र खत्म, टूर्नामेंट शुरू होने में सिर्फ 3 हफ्ते ESPNcricinfo की रिपोर्ट के मुताबिक, टूर्नामेंट की शुरुआत में अब सिर्फ तीन हफ्ते बचे हैं और ICC का सब्र जवाब दे चुका है. बांग्लादेश का पहला मुकाबला 7 फरवरी को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ होना है. इसके बाद 9 फरवरी को इटली के खिलाफ और 14 फरवरी को इंग्लैंड के खिलाफ भी बांग्लादेश कोलकाता में ही खेलेगा. ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच 17 फरवरी को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल के खिलाफ होना तय है. शेड्यूल बदलना मुमकिन नहीं ICC का मानना है कि इतने कम समय में शेड्यूल बदलना लॉजिस्टिक्स, ब्रॉडकास्टिंग और टिकटिंग के लिहाज से नामुमकिन है, खासकर तब जब भारत में कोई ठोस सुरक्षा खतरा मौजूद नहीं है. बांग्लादेश के सभी प्रस्ताव ICC ने ठुकराए बांग्लादेश की ओर से दिया गया प्रस्ताव भी ICC ने खारिज कर दिया है. BCB ने सुझाव दिया था कि बांग्लादेश और आयरलैंड के ग्रुप आपस में बदल दिए जाएं, ताकि बांग्लादेश अपने सभी मैच श्रीलंका में खेल सके. हालांकि, क्रिकेट आयरलैंड ने साफ कर दिया है कि उसे अपने मैचों को लेकर “पक्की गारंटी” मिल चुकी है और उसके कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा. ICC का कहना है कि ग्रुप बदलने से ब्रॉडकास्टर्स, टिकट पार्टनर्स और बाकी टीमों के साथ बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा. सुरक्षा रिपोर्ट में भारत को लेकर कोई सीधा खतरा नहीं ICC द्वारा सभी 20 टीमों के साथ साझा की गई एक स्वतंत्र सुरक्षा रिपोर्ट में भारत को मीडियम टू हाई थ्रेट लेवल की कैटेगरी में रखा गया है, जो पहले के बड़े टूर्नामेंट्स जैसा ही है. सबसे अहम बात यह है कि इस रिपोर्ट में बांग्लादेश के लिए किसी खास या सीधे खतरे की पहचान नहीं की गई है. ICC यह बात कई बार BCB को समझा चुका है, लेकिन बांग्लादेश सरकार के समर्थन के चलते BCB अपने फैसले पर अड़ा हुआ है. अगर अगले 72 घंटों में बांग्लादेश अपना रुख नहीं बदलता है, तो लगभग तय है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 बांग्लादेश के बिना ही आगे बढ़ेगा.

बांग्लादेश में पेट्रोल के पैसे मांगने पर हिंदू युवक की हत्या

ढाका. बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय हिंदू कर्मचारी रिपन साहा की एक एसयूवी (SUV) सवार ने कुचलकर हत्या कर दी। आरोप है कि यह हमला तब हुआ जब रिपन ने पेट्रोल भरवाने के बाद बिना पैसे दिए भाग रहे ग्राहक को रोकने की कोशिश की। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे 'करीम फिलिंग स्टेशन' पर हुई। एक काली रंग की एसयूवी पंप पर आई और उसमें 5,000 टका (लगभग 3,710 भारतीय रुपये) का तेल भरवाया गया। तेल भरवाने के बाद जब ड्राइवर ने बिना भुगतान किए गाड़ी भगाना शुरू किया तो रिपन साहा उसे रोकने के लिए गाड़ी के सामने खड़े हो गए। आरोपी ने गाड़ी रोकने के बजाय रिपन के ऊपर चढ़ा दी और मौके से फरार हो गया। रिपन की मौके पर ही मौत हो गई। BNP नेता और ड्राइवर गिरफ्तार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया है और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अबुल हाशेम गाड़ी का मालिक है जो कि ठेकेदारी करता है। वह विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का सदस्य है और इसके युवा संगठन 'जुबो दल' का पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा कार ड्राइवर कमल हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जियाउर रहमान ने पुष्टि की है कि आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस घटना का कोई सांप्रदायिक कोण है या यह केवल एक आपराधिक कृत्य था। चुनाव से पहले हिंसा का साया यह हत्या ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले सांप्रदायिक हिंसा तेजी से बढ़ रही है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने आरोप लगाया है कि केवल दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की गई हैं। परिषद का कहना है कि इस हिंसा का उद्देश्य अल्पसंख्यक मतदाताओं को डराना और उन्हें अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने से रोकना है। हाल ही में नरसिंगडी में एक जौहरी की हत्या और मैमनसिंह में एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में खिंचाव है। भारत ने बार-बार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। रिपन साहा जैसी घटनाएं इन कूटनीतिक संबंधों को और अधिक जटिल बना रही हैं।

बांग्लादेश में हिंदू रिपन साहा की गाड़ी से रौंदकर हत्या, हत्यारा तारिक रहमान की पार्टी से जुड़ा

ढाका   बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का सिलसिला रुक ही नहीं रहा है. शुक्रवार को राजबाड़ी जिले के सदर उपजिले में एक हिंदू युवक को फिर धर्म आधारित हत्या का शिकार होना पड़ा. वो पेट्रोल पंप पर काम करता था और उसने जब फ्यूल के पैसे मांगे तो एक कार चालक ने जानबूझकर उसे कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान 30 वर्षीय रिपन साहा के रूप में हुई है. रिपन साहा राजबाड़ी के गोलांदा मोड़ के पास स्थित करीम फिलिंग स्टेशन में काम करता था. बताया जा रहा है कि एक काली लैंड क्रूजर कार ने पेट्रोल भरवाने के बाद पैसे दिए बिना वहां से निकलने की कोशिश की. जब रिपन साहा ने कार को रोककर पेट्रोल के पैसे मांगे, तो चालक ने जानबूझकर गाड़ी आगे बढ़ा दी और उसे कुचल दिया. इस हमले में रिपन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आरोपी वाहन लेकर फरार हो गए. जान-बूझकर हिंदू को कुचला राजबाड़ी सदर थाने के प्रभारी अधिकारी खोंदकार जियाउर रहमान ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और उसके मालिक अबुल हाशेम को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की राजबाड़ी जिला इकाई का पूर्व कोषाध्यक्ष बताया जा रहा है. वहीं, वाहन चालक कमाल हुसैन को भी हिरासत में ले लिया गया है. पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़ित कार के सामने खड़ा था क्योंकि पेट्रोल का भुगतान नहीं किया गया था. उसी दौरान उसे कुचल दिया गया और आरोपी फरार हो गए. इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाएगा. BNP के राज में भी होगी हिंदुओं की हत्या? यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की एक और कड़ी मानी जा रही है.पिछले एक महीने में यह ऐसी दसवीं हत्या है. इससे पहले इसी सप्ताह फेनी जिले के डागनभुइयां उपजिला में एक अन्य हिंदू युवक समीर दास की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी. 27 साल के ऑटो-रिक्शा चालक का शव सोमवार को एक खेत से बरामद किया गया था. इन घटनाओं को लेकर भारत ने 9 जनवरी को गहरी चिंता जताई थी और कहा था कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर नजर बनाए हुए है. भारत ने उम्मीद जताई थी कि बांग्लादेश सरकार इस तरह की साम्प्रदायिक हिंसा पर सख्त कार्रवाई करेगी. हालांकि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरम सरकार इस पर कोई कदम नहीं उठा रही है. अब रिपन दास की हत्या में बीएनपी के नेता का हाथ होने के बाद सवाल ये भी उठ रहा है कि बांग्लादेश की आने वाली सरकारों में भी हिंदुओं का यही हाल रहेगा?

बांगलादेश में BNP नेता अजीजुर रहमान की हत्या, लोगों के भड़के विरोध के बाद सेना ने संभाला इलाका

ढाका  बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा में और तेजी आ रही है. ढाका में BNP नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मुसब्बिर ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्वयंसेवी इकाई है. करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में बेहद करीब से गोली मारी गई, जिससे मुसब्बिर की मौके पर ही मौत हो गई. बेहद करीब से मारी गई गोली पुलिस के अनुसार, सुपर स्टार होटल के पास, बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नजदीक हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं. ये इलाका भीड़भाड़ वाला व्यावसायिक क्षेत्र है. मौके पर ही मुसब्बिर की हालत गंभीर हो गई. गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारियों के मुताबिक, घायल की हालत स्थिर है. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के तेजगांव डिविजन के अतिरिक्त उपायुक्त फजलुल करीम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में दो लोगों को गोली लगी थी. मुसब्बिर को पहले निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई. उन्हें पेट में गोली लगी थी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घायलों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद एक को आगे के इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया. जांचकर्ताओं ने बताया कि हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की और फिर फरार हो गए. बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. मुसब्बिर पहले ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे. स्वेच्छासेबक दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्वयंसेवी इकाई है. उन्हें रात करीब 8.30 बजे (स्थानीय समय) ढाका के करवान बाजार इलाके में निशाना बनाया गया. पुलिस के मुताबिक हमला सुपर स्टार होटल के पास हुआ, जो बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नजदीक स्थित एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं, जिससे मुसब्बिर की मौके पर ही मौत हो गई. गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारियों ने बताया कि घायल व्यक्ति की हालत स्थिर है. मुसब्बिर के पेट में गोली लगी ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के तेजगांव डिवीजन के अतिरिक्त उपायुक्त फजलुल करीम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में दो लोगों को गोली मारी गई. करीम के अनुसार, मुसब्बिर को बाद में पंथपथ इलाके के एक निजी अस्पताल में मृत घोषित किया गया. उन्होंने बताया कि मुसब्बिर के पेट में गोली लगी थी. स्थानीय मीडिया के अनुसार, घायलों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद उनमें से एक को आगे के इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया. जांचकर्ताओं ने बताया कि हमलावर कई राउंड फायरिंग करने के बाद मौके से फरार हो गए. तलाशी अभियान शुरू सुरक्षा बलों ने हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी. यह हत्या ऐसे समय में हुई है, जब बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले आदर्श आचार संहिता लागू है. कुछ ही दिन पहले एक अलग घटना में जुबो दल के एक नेता को गोली मारी गई थी. इससे पहले 12 दिसंबर को भारत-विरोधी रुख के लिए चर्चित नेता उस्मान हादी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. सड़कों पर तैनात हुई सेना इस गोलीकांड के बाद करवान बाजार इलाके में तनाव फैल गया. मंगलवार देर रात लोगों के एक समूह ने सार्क फाउंटेन चौराहे को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया. करीब रात 10.30 बजे सेना के जवान मौके पर पहुंचे और सड़क खाली कराई, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और यातायात बहाल कराया. हालांकि बाद में प्रदर्शनकारी फिर लौट आए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और वाहनों को सावधानीपूर्वक गुजरने दिया. किसी भी तरह की आगे की अशांति को रोकने के लिए पुलिस और सेना की टुकड़ियां कई घंटों तक इलाके में तैनात रहीं. BNP नेता की मौत के बाद क्या है हाल? घटना के बाद करवान बाजार इलाके में तनाव फैल गया. देर रात कुछ लोगों ने सार्क फाउंटेन चौराहे पर सड़क जाम कर दी, जिससे यातायात ठप हो गया. रात करीब 10:30 बजे सेना के जवान मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को हटाकर रास्ता खुलवाया. हालांकि कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी फिर लौट आए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और वाहनों को सावधानीपूर्वक गुजरने दिया. पुलिस और सेना की टुकड़ियां कई घंटों तक क्षेत्र में तैनात रहीं ताकि किसी भी नई अशांति को रोका जा सके. अधिकारियों ने कहा कि हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी है. गौरतलब है कि बांग्लादेश में इसी साल चुनाव होने वाले हैं. हाल के दिनों में बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. कुछ दिन पहले एक जूबो दल नेता को भी गोली मारी गई थी, जबकि 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की भी हत्या हो चुकी है. चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.