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भारत से नहीं, अब चीन से संपर्क करेंगे: बंगाल में बीजेपी जीत पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया

ढाका  पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के तुरंत बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश की तरफ से एक बड़ा बयान आया है। बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर कहा है कि इसके लिए अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने एक बयान में यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश अब भारत का इंतजार नहीं कर सकता और इसीलिए अब चीन का रुख करेगा। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने इस समझौते को अपने देश के लिए बहुत जरूरी बताया। बता दें कि खलीलुर रहमान जल्द ही चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। बीजिंग की आधिकारिक यात्रा से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चीन में बातचीत के एजेंडे में तीस्ता परियोजना भी होगी। बंगाल में बीजेपी की सरकार पर क्या बोले रहमान? बांग्लादेशी विदेश मंत्री का यह बयान तब आया है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा की जीत पर पूछे गए सवालों पर रहमान ने कहा, “देखिए, पश्चिम बंगाल में अभी सरकार नहीं बनी है। वे क्या सोचते हैं या क्या करेंगे, यह उन्हें कहना है। उनका मन पढ़ना मेरा काम नहीं है। हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते, हमें अपना काम करना है।” तीस्ता पर क्या है विवाद? गौरतलब है कि तीस्ता नदी को लेकर दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इसका विरोध करती है। 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब बांग्लादेश गए थे, तब इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश हुई थी। एक योजना के तहत तीस्ता का करीब 37.5 फीसदी पानी बांग्लादेश को और 42.5 फीसदी भारत को मिलने की योजना पर बात हुई थी। हालांकि बंगाल के विरोध के कारण यह बात आगे नहीं बढ़ सकी। 1983 में हुआ था अस्थायी समझौता इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के समय भी बांग्लादेश को उम्मीद थी कि कोई हल निकलेगा, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बता दें कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो पर ही समझौता हुआ है, गंगा और कुशियारा। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है। चीन के पास पहुंचा बांग्लादेश तीस्ता समझौते में देरी को देखते हुए बांग्लादेश ने 2019 में 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' शुरू की और शेख हसीना की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन से मदद मांगी थी। अब रहमान ने एक बार फिर चीन से सहयोग लेने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक रहमान तीन दिवसीय इस दौरे पर वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान तीस्ता समझौते पर मदद के अलावा बांग्लादेश चीन से कम ब्याज दर पर कर्ज की मांग करेगा। वहीं बांग्लादेश चीन से निवेश भी मांगेगा। इससे पहले जुलाई के विद्रोह के बाद चीन की ओर से निवेश की गति धीमी रही है, जिसे अब नई सरकार फिर से रफ्तार देना चाहती है। वहीं चीन ने भी बांग्लादेश को करीबी पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार बताते हुए संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।

बांग्लादेश में भूकंप के तेज झटके, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में महसूस हुआ असर

कोलकाता पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित कई शहरों में शुक्रवार दोपहर (27 फरवरी) को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 रही। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग दहशत के चलते घरों से बाहर आ गए। जानकारी के मुताबिक कोलकाता में दोपहर करीब 1.20 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो रिपोट्स के अनुसार बांग्लादेश में केंद्रित भूकंप का नतीजा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) ने बताया कि शुक्रवार को बांग्लादेश में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। ईएमएससी ने बताया कि भूकंप का केंद्र 35 किलोमीटर (21.75 मील) की गहराई पर था। बांग्लादेश के ढाका के अगरगांव स्थित बीएमडी भूकंपीय केंद्र से दक्षिण-पश्चिम पश्चिम बंगाल में रिक्टर स्केल पर 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी झटके महसूस किए गए। कोलकाता शहर से सामने आए वीडियो में लोग अपने घरों से बाहर भागते दिखाई दिए। 'सोफा और पंखा हिल रहे थे, हम भागने लगे' कोलकाता के एक स्थानीय ने बताया कि हम अपने सोफे पर बैठे थे, जब हमें अचानक झटके महसूस हुए। हम अपने घर से बाहर भागे। सोफा और पंखा हिल रहे थे, टेबल पर रखी एक बोतल नीचे गिर गई। हम सब नीचे भागे। फिलहाल अभी किसी नुकसान की खबर नहीं वहीं सोशल मीडिया पर भी भूकंप को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई। यूजर्स ने बताया कि उन्होंने भूकंप के तेज झटके महसूस किए और अपने घरों में पंखे और अन्य चीजें हिलती हुई देखीं। फिलहाल अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

तारिक रहमान बने बांग्लादेश PM, भारत से जुड़ा अहम फैसला और यूनुस के फरमान को किया पलट

ढाका  बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्ते को बेहतर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को भारत के लोगों के लिए वीजा सेवाएं फिर से बहाल कर दी है, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की सरकार ने करीब दो महीने पहले सस्पेंड कर दिया था. भारत-बांग्लादेश वीजा सर्विस बहाल भारतीय नागरिकों के लिए सभी कैटेगरी के वीजा बहाल कर दिए गए हैं, जिनमें मेडिकल और पर्यटन वीजा भी शामिल हैं. पिछले साल दिसंबर में बिजनेस और वर्क वीजा पर रोक नहीं लगाई गई थी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार (20 फरवरी) सुबह सेवाएं बहाल कर दी गईं. बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के तीन बाद ये फैसला लिया गया, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार का संकेत है. क्या भारत भी बहाल कर सकता है वीजा सर्विस? बांग्लादेश के सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने गुरुवार (19 फरवरी 2026) को बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भी सभी वीजा सेवाएं पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. बीडी न्यूज24 के अनुसार उन्होंने कहा, 'मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा वर्तमान में जारी किए जा रहे हैं. ट्रेवल सहित अन्य कैटेगरी वीजा को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.' उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर टिकी है.' उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी प्रकार के भारतीय वीजा सामान्य रूप से जारी होने लगेंगे. बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन पर हुआ था हमला तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर गया है. बांग्लादेश में कट्टरपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था. दिसंबर 2025 में राजनयिक तनाव के मद्देनजर दोनों देशों के बीच कांसुलर और वीजा सेवाएं रोक दी गई थीं. सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत की सूचना मिलने के बाद 18 दिसंबर की रात प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप ने चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया और पत्थर फेंके थे. इसके बाद भारत ने वहां 21 दिसंबर से अगले आदेश तक कामकाज निलंबित कर दिया.  

बांग्लादेश की संसद में अल्पसंख्यकों की संख्या सिर्फ 4, कितने हैं हिंदू? तारिक रहमान ने बुलंद किया एकता का नारा

ढाका  बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को बंपर जीत मिली है, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे, रहमान का PM बनना तय माना जा रहा है। उनकी पार्टी को गुरुवार के चुनावों में 209 सीटों के साथ संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है। हालांकि अल्पसंख्यकों की बात करें तो उन्हें चुनाव में महज 4 सीटें मिली हैं। आम चुनावों में विजयी चारों अल्पसंख्यक BNP से हैं। हिंदुओं की बात की जाए तो नए बांग्लादेशी संसद में उनका प्रतिनिधित्व ना के बराबर होगा। चुनाव में महज 2 हिंदू उम्मीदवारों को जीत मिल पाई। इन उम्मीदवारों के नाम गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। दोनों ने अपनी अपनी सीट पर जमात के उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की है। जानकारी के मुताबिक जहां रॉय BNP की पॉलिसी बनाने वाली स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं, वहीं चौधरी पार्टी के प्रमुख वाइस प्रेसिडेंट में से एक होने के साथ-साथ इसके टॉप लीडरशिप के सीनियर सलाहकार और रणनीतिकार भी हैं। इसके अलावा तीसरे विजयी अल्पसंख्यक उम्मीदवार सचिन प्रू हैं, जो BNP के सीनियर लीडर है। वे बौद्ध धर्म से आते हैं। वहीं चौथे माइनॉरिटी कैंडिडेट, दीपेन दीवान भी बौद्ध धर्म से आते हैं और उन्होंने दक्षिण-पूर्वी रंगमती पहाड़ी जिले की सीट से जीत हासिल की है। 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने लड़ा था चुनाव गौरतलब है कि 17 करोड़ जनसंख्या वाले बांग्लादेश में 8 फीसदी आबादी हिंदू है। देश के चुनाव आयोग के मुताबिक हालिया चुनावों में 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं। बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने सबसे ज्यादा 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इसके बाद लेफ्ट-विंग बांग्लादेश साम्यबादी दल (BSD) ने आठ, बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी (BMJP) ने आठ और लेफ्ट-विंग बांग्लादेश समाजवादी दल (BASOD) ने सात अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। BNP ने छह और जातीय पार्टी ने चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारा था। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी ने इतिहास में पहली बार एक माइनॉरिटी हिंदू कैंडिडेट को नॉमिनेट किया था। तारिक रहमान ने दिया है भरोसा बता दें कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के शासन काल में बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नरक समान बन गया था। यहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले, हिंसा और क्रूरता की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने बांग्लादेश में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देने की बात कही है। रहमान जल्द ही अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह लेंगे। संसदीय चुनावों में भारी जीत के एक दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 60 वर्षीय रहमान ने कहा, "हमारे रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि राष्ट्रीय एकता हमारी सामूहिक ताकत है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी।" रहमान ने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी।

बांग्लादेश में नए पीएम के शपथ ग्रहण में शामिल होंगे 12 देशों के प्रमुख

ढाका. बांग्लादेश के आम चुनवाों में बीएनपी को बड़ी जीत मिलने के बाद प्रधानमंत्री समेत पूरे मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण 17 फरवरी को होने जा रहा है। इस समारोह का दिलचस्प पहलू यह है कि यह राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जा रहा है जबकि अभी तक शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित होते रहे हैं। समाचार पत्र 'प्रोथोम आलो' और 'इत्तेफाक' में प्रकाशित खबर के अनुसार, समारोह के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नव-निर्वाचित सांसदों को पद की शपथ दिलाएंगे, जबकि संविधान के अनुसार यह शपथ अध्यक्ष शिरीन शरमिन चौधरी द्वारा दिलाई जानी चाहिए। इन देशों को भेजा गया है न्योता बांग्लादेश में प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए भारत-पाकिस्तान समेत 13 देशों को न्योता भेजा गया है। इनमें चीन, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं। बीएनपी चीफ तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। बता दें कि बांग्लादेश ने भारत को न्योता भेजा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ढाका जाना असंभव ही है। 17 तारीख को ही प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पूर्व निर्धारित बैठक होने वाली है। ऐसे में किसी प्रतिनिधि को ढाका भेजा जा सकता है। पीएम मोदी का ढाका जाना मुश्किल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारिक रहमान को सबसे पहले बधाई देने वाले नेताओं में शामिल थे। उनके संदेश के बाद बीएनपी ने कहा, "बांग्लादेश अपने सभी नागरिकों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, समावेशिता और प्रगतिशील विकास को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हम आपसी सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और अपने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता के मार्गदर्शन में, भारत के साथ रचनात्मक रूप से जुड़कर अपने बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।' शपथ ग्रहण के दौरान कई चुनौतियां तारिक रहमान के एक प्रमुख सहयोगी ने नाम न उजागर की शर्त पर बताया कि मौजूदा परिस्थितियों ने मामलों को थोड़ा जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा, '' पिछली संसद की अध्यक्ष को सांसदों को शपथ दिलानी होती है, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और अज्ञात स्थान पर रह रही हैं, जबकि उपाध्यक्ष जेल में हैं। इन परिस्थितियों में राष्ट्रपति संविधान में तय प्रावधान के अनुसार किसी और को शपथ दिलाने के लिए चुन सकते हैं।'' इससे पहले, कैबिनेट सचिव शेख अब्दुर राशिद ने कहा था कि संविधान के अनुरूप राष्ट्रपति नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे, लेकिन उन्होंने समारोह की तारीख नहीं बताई। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 13वें संसदीय चुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद 15 वर्ष से अधिक समय तक शासन करने वालीं शेख हसीना को सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा था, जिसके बाद अल्पसंख्यकों पर व्यापक हमले भी हुए थे।

PM मोदी को बुलाया जा सकता है बांग्लादेश के तारिक रहमान शपथ ग्रहण समारोह में, BNP दे सकती है न्योता

नई दिल्ली बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर BNP ने भारत के साथ संबंधों में एक 'नई शुरुआत' करने का संकेत दिया है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा बीएनपी सभी क्षेत्रीय राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित कर सकती है. तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पीटीआई से बात करते हुए स्पष्ट किया है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने का है. उन्होंने कहा, 'भारत को यह समझना होगा कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का अस्तित्व नहीं बचा है. BNP ने भारत से अपील की है कि वह शेख हसीना जैसी "आतंकवादी" को अपनी जमीन पर पनाह न दे, जिन्होंने बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास किया. हुमायूं कबीर के अनुसार, यदि भारत 'पड़ोसी प्रथम' की नीति के तहत सम्मानजनक व्यवहार करता है, तो दोनों देश विकास के नए आयाम छू सकते हैं. पीएम मोदी और तारिक रहमान की बातचीत चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान से फोन पर बात की और उन्हें इस शानदार जीत की बधाई दी. बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण रही, जिसमें पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया. पीएम मोदी ने तारिक रहमान को अपनी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण भी दिया है.  

BNP ने मारी बाज़ी: बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी की जीत, 3 हिंदू सांसद भी बने

ढाका  बांग्लादेश के 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव के नतीजों ने पूरे साउथ एशिया में हलचल मचा दी है. लगभग दो दशक के लंबे इंतजार के बाद, तारिक रहमान की लीडरशिप वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता में जबरदस्त वापसी की है. ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, BNP ने 299 में से 212 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. वहीं, कभी राजनीतिक रूप से हाशिए पर रहने वाली जमात-ए-इस्लामी 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है. BNP के ‘हिंदू फेस’ ने लहराया जीत का परचम इस चुनाव में अल्पसंख्यकों की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजर थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BNP के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले तीन हिंदू उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है. गयेश्वर चंद्र रॉय: ढाका-3 सीट से जीत हासिल की. उन्होंने जमात के शाहीनूर इस्लाम को 15 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया. नितई रॉय चौधरी: मगुरा-2 सीट से कंफर्टेबल जीत दर्ज की. इन्हें BNP के भीतर अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है. एडवोकेट दीपेन देवान: रांगामाटी संसदीय सीट से जीत हासिल कर संसद पहुंचे. इनके अलावा, अल्पसंख्यक समुदाय के ही सचिंग प्रू ने बंदरबन निर्वाचन क्षेत्र से BNP के लिए एक और सीट जीती. हालांकि, जमात-ए-इस्लामी की ओर से एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को हार का सामना करना पड़ा. संविधान बदलने पर लगी मुहर  चुनाव के साथ-साथ बांग्लादेश में एक बड़ा रेफरेंडम (जनमत संग्रह) भी हुआ, जिसमें जनता से संविधान सुधारों पर राय मांगी गई थी. चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 4.8 करोड़ लोगों ने ‘हां’ में वोट दिया, जबकि 2.25 करोड़ लोगों ने ‘ना’ कहा. इन सुधारों के बाद अब बांग्लादेश में कोई भी व्यक्ति 10 साल से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं रह पाएगा. साथ ही न्यायपालिका को ज्यादा आजादी देने और दो सदनों वाली संसद (Bicameral Parliament) बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है. जमात का उदय  अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया था. इसका सीधा फायदा BNP और जमात को मिला. जमात ने ढाका की 15 में से 6 सीटों पर कब्जा किया है, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है. हालांकि, महिलाओं और रूढ़िवादी नीतियों पर जमात के पुराने स्टैंड के कारण वे BNP को मात नहीं दे पाए. दूसरी ओर, जमात ने नतीजों में देरी और ‘धांधली’ का आरोप लगाते हुए आंदोलन की धमकी भी दी है. क्या होगा आगे? मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार अब सत्ता तारिक रहमान को सौंपेगी. तारिक रहमान फिलहाल प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रहमान को जीत की बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही सभी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर दिए जाएंगे.

दो-तिहाई बहुमत के साथ BNP की वापसी, जमात को बड़ा झटका; मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई

ढाका  सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है.  तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई. इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं. कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन? BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं. बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है. The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे.  जगह-जगह से हिंसा की खबरें लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं. बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए. वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था. देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा. वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए 'विपक्ष की राजनीति' नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे." PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनावों में उनकी पार्टी की बड़ी जीत के बाद बधाई देते हुए PM मोदी का बयान दोबारा पोस्ट किया. PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं." बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को गर्मजोशी से बधाई दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत को बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेशी लोगों के भरोसे को दर्शाती है." उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह बांग्लादेश में पहला बड़ा चुनाव था. 17 साल के वनवास के बाद तारिक रहमान की पार्टी की सत्ता में वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' है. भारत ने इस बधाई संदेश के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नई सरकार के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा. आपको बता दें कि बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोट डाले गए थे और शाम को ही मतगणना शुरू हो गई है. अभी तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें रहमान की पार्टी वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतकर 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को बधाई दी है लेकिन समर्थकों से जश्न न मनाने की अपील की है.पार्टी ने कहा कि विजय उत्सव के बजाय कार्यकर्ता और समर्थक पूरे देश में शुक्रवार की नमाज़ अदा करें और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.  तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत पर US ने दी बधाई बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए तारिक रहमान और BNP को बधाई देने वाला यूनाइटेड स्टेट्स पहला देश बन गया. बांग्लादेश में US के राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा, "बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान … Read more

ICC का चौंकाने वाला फैसला: बांग्लादेश को दंड की बजाय मिला इनाम, जानें क्यों

 नई दिल्ली जब किसी बड़े टूर्नामेंट से कोई देश आखिरी वक्त पर खुद हटता है तो आमतौर पर उम्मीद यही होती है कि उस देश को इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे. लेकिन ICC पुरुष टी20 वर्ल्ड कप  के मामले में ऐसा नहीं हुआ. बांग्लादेश को इस टूर्नामेंट से हटने पर सज़ा नहीं, बल्कि फायदा मिला. ऐसा क्यों हुआ आज इसी के बारे में हम आपको बताएंगे… पहले एक नजर पूरे विवाद पर वर्ल्ड कप के पूरे विवाद के केंद्र में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) था. बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के मैचों के लिए अपनी राष्ट्रीय टीम भेजने से इनकार कर दिया था. जब आईसीसी ने उसकी ये बात नहीं मानी तो बीसीबी ने वर्ल्ड कप के बहिष्कार का ऐलान कर दिया. बांग्लादेश के इस एक्शन के बाद पाकिस्तान ने ड्रामेबाजी शुरू की और भारत के साथ होने वाले मैच का बहिष्कार करने की बात कही.  इस पूरे नाटक के बाद माना जा रहा था की आईसीसी बांग्लादेश पर तगड़ा एक्शन लेगा.  लेकिन जुर्माना या किसी तरह की कार्रवाई झेलने के बजाय, BCB को भविष्य की मेज़बानी का आश्वासन मिला और उसके खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं लिया गया. ICC का ये नरम रुख क्यों? अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का यह रुख, जो दंडात्मक होने के बजाय सहयोगी दिखता है, कई लोगों को विरोधाभासी और चिंता पैदा करने वाला लगा. यहां समझते हैं कि आखिर बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप से हटने पर सज़ा क्यों नहीं दी गई. ICC ने पुष्टि की कि टी20 वर्ल्ड कप से हटने के बावजूद बांग्लादेश पर किसी तरह का वित्तीय, खेल या प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. यह फैसला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और BCB के साथ हुई गहन बातचीत के बाद लिया गया. इतना ही नहीं, बांग्लादेश को 2031 पुरुष वनडे वर्ल्ड कप से पहले एक और ICC टूर्नामेंट की मेज़बानी का भरोसा भी दिया गया है. ICC ने कहा कि बांग्लादेश वैश्विक क्रिकेट के विकास में एक अहम और प्राथमिक देश बना हुआ है. BCB अध्यक्ष अमिनुल इस्लाम बुलबुल ने इस फैसले का स्वागत किया और ICC व अन्य क्रिकेट बोर्डों के साथ सहयोग जारी रहने की बात कही.  बांग्लादेश को सज़ा क्यों नहीं मिली? लाहौर की बैठक को सिर्फ मध्यस्थता नहीं, बल्कि कड़ी सौदेबाज़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका और ICC की मजबूरियां साफ दिखीं. पाकिस्तान का शुरुआती बहिष्कार बांग्लादेश के लिए दबाव बनाने का ज़रिया था. लेकिन जैसा कि पहले ही अनुमान लगाया गया था, पाकिस्तान का रुख बदला जा सकता था. ICC के लिए भारत-पाकिस्तान मैच का होना बेहद ज़रूरी था. यह मुकाबला कई अन्य मैचों से ज़्यादा कमाई करता है. इसके अलावा, ICC को उन छोटे बोर्डों की भी चिंता थी जो उसकी केंद्रीय फंडिंग पर निर्भर हैं. बांग्लादेश ने इस स्थिति को समझते हुए, पाकिस्तान के समर्थन के साथ हालात को अपने पक्ष में मोड़ लिया. नतीजा यह हुआ कि ICC ने अपना सबसे बड़ा मैच बचा लिया, पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया और बांग्लादेश को बिना किसी सज़ा के भविष्य की गारंटी मिल गई. अगर बांग्लादेश को सज़ा मिलती तो? अगर ICC ने बांग्लादेश को दंडित किया होता, तो इसके गंभीर असर होते. आर्थिक जुर्माना BCB की हालत और खराब कर देता, फैंस में नाराज़गी बढ़ती और क्रिकेट ढांचे पर असर पड़ता. बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बाज़ारों में से एक है, जहां 20 करोड़ से ज़्यादा क्रिकेट प्रेमी हैं. ICC इस बाज़ार को नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठा सकता. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, टी20 वर्ल्ड कप से हटने के कारण BCB को लगभग 325 करोड़ टका (करीब 27 मिलियन डॉलर) का नुकसान हो सकता है. कुल मिलाकर 2025-26 में उसकी आय 60 प्रतिशत तक गिर सकती थी. पूर्व कप्तान तमीम इक़बाल ने भी चेताया था कि भावनाओं में लिया गया फैसला आने वाले 10 साल तक असर डाल सकता है. बांग्लादेश को दी गई राहत सिर्फ निष्पक्षता का मामला नहीं थी, बल्कि आर्थिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश भी थी. इसी वजह से टी20 वर्ल्ड कप से हटने के बावजूद बांग्लादेश को सज़ा नहीं, बल्कि फायदे मिले.

बांग्लादेश चुनाव: प्रधानमंत्री कौन बनेगा? सर्वे में इशारा, भारत विरोधी जमात की स्थिति कमजोर

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले माहौल काफी गर्म हैं। इस बार बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतें भी चुनाव में पूरा जोर लगा रही हैं। वहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग को बैन कर दिया गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार चल रही है। वहीं अब उम्मीद है कि बांग्लादेश को पूर्णकालिक प्रधानमंत्री मिल जाएगा। किसके बीच है मुकाबला इस बार बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की अगुआई वाली बीएनपी और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बीच है। जमात-ए-इस्लामी का प्रमुख मुद्दा ही अल्पसंख्यकों और भारत के विरोध में रहता है। वहीं बीएनपी का अजेंडा भी भारत के समर्थन में कभी नहीं रहा है। क्या कहता है चुनाव पूर्व का सर्वे बांग्लादेश के अखबार प्रथोमोलो ने इस चुनाव को लेकर सर्वे करवाया है। इसके मुताबिक बीएनपी को 200 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं और तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री हो सकते हैं। तारिक रहमान लंबे समय के बाद ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे है। सर्वे के मुताबिक बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) पूर्ण बहुतम मिल सकता है। वहीं भारत विरोधी जमात की हालत बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि वह विपक्ष की भूमिका अदा कर सकता है। जमात-ए-इस्लामी शफीकुर्रहमान के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है। सर्वे में बताया गया है कि बीएनपी 200 से ज्यादा सीटें जीत सकती है वहीं, जमात-ए-इस्लामी 50 के आसपास सीटें जीत सकता है। बांग्लादेश की जातीय पार्टी के खाते में 3 सीटें जा सकती हैं। बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जाने का अनुमान है। बता दें कि बांग्लादेश की संसद निर्वाचिन के लिए कुल सीटों की संख्या 350 है। 300 सदस्यों को जनता चुनती है और 50 सदस्यों का सीधा निर्वाचन होता है। भारत की तरह बांग्लादेश में भी सांसदों का कार्यकाल पांच साल का होता है। बांग्लादेश में बनेगी किसकी सरकार? सर्वे ने किया इशारा बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है. इसके बाद अब कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार प्रचार नहीं कर सकेगा. मतदान संसद की कुल 300 में से 299 सीटों पर होगा. एक सीट पर चुनाव नहीं हो रहा है. इसके साथ ही मतदाता जुलाई चार्टर पर एक जनमत संग्रह में भी हिस्सा लेंगे. इस चुनाव के लिए भारत ने कोई चुनाव पर्यवेक्षक नहीं भेजा है. वहीं अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसका विरोध शेख हसीना कर रही हैं. बांग्लादेश में चुनाव प्रचार 22 जनवरी से शुरू हुआ था. इस दौरान 299 सीटों के लिए 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता वोट डालेंगे. चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच माना जा रहा है. एक तरफ तारिक रहमान के नेतृत्व वाला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन है, जिसे 33 से 35 फीसदी समर्थन अकेले ही मिलने का अनुमान है. दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन है, जिसे 30 से 34 फीसदी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है. सबसे बुरी खबर तो जमात-ए-इस्लामी के लिए है. निकल गई जमात-ए-इस्लामी की अकड़ अन्य सर्वे क्या कहते हैं? हालांकि एक अन्य सर्वे में मुकाबला काफी करीबी बताया गया है. इस सर्वे के मुताबिक बीएनपी गठबंधन को 44.1 फीसदी और जमात गठबंधन को 43.9 फीसदी वोट मिल सकते हैं. इसमें कहा गया है कि जमात गठबंधन 105 सीटों और बीएनपी गठबंधन 101 सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है. चुनाव के नतीजे 13 फरवरी को घोषित किए जाएंगे. चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह भी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने देश के लोगों से 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ-साथ होने वाले जनमत संग्रह में 'हां' में वोट देने और उनके प्रस्तावित सुधार पैकेज का समर्थन करने की जोरदार अपील की। यूनुस ने सोमवार देर रात वरिष्ठ सचिवों और शीर्ष नौकरशाहों को संबोधित करते हुए कहा, ''यदि जनमत संग्रह के दौरान 'हां' में अधिक वोट मिलते हैं तो बांग्लादेश के भविष्य का निर्माण अधिक सकारात्मक तरीके से होगा।'' यूनुस ने कहा कि जनमत संग्रह के दौरान यदि लोग 'हां' में वोट करते है तो इससे ''कुशासन'' दूर करने में मदद मिलेगी। यूनुस का प्रशासन जटिल 84-सूत्रीय सुधार पैकेज को लेकर जनता का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले कई हफ्तों से सक्रिय अभियान चला रहा है।