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बांग्लादेश में 18 दिन में छठा मामला: हिंदू युवक की हत्या, अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ रही हिंसा

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ताजा मामला नरसिंदी जिले का है, जहां किराना व्यापारी मणि चक्रवर्ती की बदमाशों ने हत्या कर दी. यह घटना सोमवार रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मणि चक्रवर्ती चारसिंदुर बाज़ार में अपनी किराना दुकान चलाते थे. चारसिंदुर बाजार, नरसिंदी के पलाश उपजिला क्षेत्र में आता है. मणि चक्रवर्ती साधरचर यूनियन, शिबपुर उपजिला के रहने वाले थे और मदन ठाकुर के बेटे थे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रोज की तरह मणि चक्रवर्ती अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मणि चक्रवर्ती को बचाने की कोशिश करते हुए अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई. इस वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मणि चक्रवर्ती एक शांत और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे और उनकी जानकारी में उनका किसी से कोई विवाद नहीं था. खुले बाजार में इस तरह की बेरहमी से की गई हत्या ने व्यापारियों और आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है. स्थानीय समुदाय के जागरूक लोगों ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के एक व्यापारी की इस तरह सार्वजनिक तौर पर हत्या बेहद चिंताजनक है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.

भारत में T20 विश्व कप खेलने से बांग्लादेश का इनकार, ICC से बदला वेन्यू चाहा

ढाका बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने फैसला किया है कि वह टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। अब बांग्लादेश के एक समाचार वेबसाइट द डेली स्टार के अनुसार, बीसीबी ने टी20 विश्व कप के लिए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया है। खेल मंत्रालय ने बीसीबी को दिए थे निर्देश इससे पहले, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री ने बीसीबी को निर्देश दिया था कि वह आईसीसी से बांग्लादेश के मुकाबले श्रीलंका में आयोजित करने की मांग उठाने कहा था। बांग्लादेश के खेल मंत्रालय का मानना है कि मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीसीबी के अध्यक्ष और बांग्लादेश के पूर्व कप्तान अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने के बाद बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाई थी। चार लीग मैच बांग्लादेश को भारत में खेलने हैं बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है। आईपीएल का विवाद आईसीसी तक पहुंचा दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई।  केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बीसीबी बौखला गया है और यही कारण है कि उसने भारत में अपनी टीम भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला क्रिकेट की वैश्विक संस्था आईसीसी को लेना है जिसके अध्यक्ष जय शाह हैं। बीसीसीआई की भी आई थी प्रतिक्रिया बांग्लादेश के खेल मंत्रालय ने जब बीसीबी को टी20 विश्व कप मैच भारत के बजाए श्रीलंका में कराने की बात कही थी तो इस पर बीसीसीआई की भी प्रतिक्रिया आई थी। बीसीसीआई सूत्र ने कहा था कि सूत्र ने कहा था, आप किसी की मनमर्जी पर खेल का प्रारूप नहीं बदल सकते। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। विपक्षी टीमों के बारे में सोचिए। उनके हवाई टिकट, होटल सब बुक होते हैं। साथ ही हर दिन तीन-तीन मैच होने हैं, यानी एक मैच श्रीलंका में होना है। प्रसारण दल भी मौजूद है। इसलिए यह कहना आसान है, करना मुश्किल। कार्यक्रम में अब बदलाव असंभव है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में एक महीने का समय बचा है।

बांग्लादेश में खोकन दास की अस्पताल में मौत, तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान, क्रूरता का शिकार हुआ युवक

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे बर्बर हमलों ने एक और जान ले ली है. ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाने वाले खोकन चंद्र दास पर बुधवार रात इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी. खोकन चंद्र दास के परिवार ने बताया कि वह बुधवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. हमले में गंभीर रूप से झुलसे खोकोन दास किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ सकी, लेकिन उनका चेहरा और सिर बुरी तरह झुलस गया था. स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, बाद में हालत बिगड़ने पर ढाका रेफर किया गया, जहां शुक्रवार तड़के उनकी मौत हो गई. खोकन दास अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का छोटा कारोबार चलाते थे. यह गांव ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित है. घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इसे धार्मिक आधार पर हो रही हिंसा बताते हुए कहा कि यह सिलसिला बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों जगह चिंताजनक रूप से जारी है. पार्टी ने पिछले साल मुर्शिदाबाद में हुई हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि बंगाली हिंदुओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे. लगातार हो रहे हैं हमले खोकन दास का नाम अब उन हिंदुओं की बढ़ती सूची में जुड़ गया है, जिन पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में कथित तौर पर धार्मिक कारणों से जानलेवा हमले हुए हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के मामलों में इजाफे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है. बांग्लादेश में हिंसा की यह कड़ी नई नहीं है. इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि पहले उन्हें मार डाला गया और फिर शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया. उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. इसके बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. हालांकि अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच बांग्लादेश सरकार ने दावा किया कि अमृत मंडल एक आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति था और उगाही के विवाद में भीड़ ने उसे निशाना बनाया. वहीं 29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी नोमान मिया (29) को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में दावा किया कि गोली “मजाक में” चली थी. भारत ने भी कई बार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार शत्रुता” पर गंभीर चिंता जताते हुए हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है. वहीं बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां करते हैं.

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मंसूबे बुलंद, बैनर लगाकर नरसंहार की धमकी दे रहे

चटगांव  बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है. एक ताजा घटना में चटगांव के राउजान उपजिला में एक बैनर सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है. बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. ‘हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का वजूद मिटा देंगे’ स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई. इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं. यूनुस हिंदुओं का नामोनिशान मिटवा देंगे क्या? बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में अब तक 4 हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि देश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान से लगातार हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है.     जोगेश चंद्र रॉय को 7 दिसंबर को बेरहमी से गला रेतकर मार डाला गया. जोगेश के साथ उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की भी हत्या कर दी गई, दोनों का शव उनके घर के अंदर से मिला.     18 दिसंबर 2025 को भालुका में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला और शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा.     इसी महीने राजबारी जिले में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक को भी भीड़ के पीट-पीटकर मार डालने की खबरें आईं. 24 दिसंबर को देर रात उनके ऊपर अचानक हमला हुआ और उन्हें बचने तक का मौका नहीं मिला, 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इसके अलावा मंगलवार को हिंदुओं को घर में जिंदा जलाने के मकसद से उनके घरों में आग लगा दी गई थी और अब उन्हें नरसंहार के बैनर ने और दहशत फैला दी है. सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध हो गया है? यूनुस के राज में हिंदुओं की यूं ही हत्या होती रहेगी और वे उन्हें मरते देखेंगे?

भारतीय समुदाय के लिए खतरा: बांग्लादेश में हादी के साथियों ने जारी किया 24 दिन का अल्टीमेटम

ढाका  इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की मौत के मामले में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घर में ही घिर गई है। अब मंच ने 24 दिनों में हत्या का ट्रायल पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही तीन मांग भी रखी हैं, जिनमें बांग्लादेश में रहकर काम कर रहे भारतीयों के परमिट रद्द करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अंतरिम सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। द डेली स्टार के अनुसार, इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने रविवार को ढाका के शाहबाग से यूनुस सरकार को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, 'हत्यारे, मास्टरमाइंड, सहयोगी, भागने में मदद करने वालों और पनाह देने वालों समेत पूरे स्क्वॉड का ट्रायल अगले 24 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश की संप्रभुता को बचाने के लिए भारतीयों को जारी वर्क परमिट भी रद्द किए जाने चाहिए।' मंच की मांग है कि अगर भारत शरण पाए दोषियों को लौटाने से इनकार करता है, तो उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में केस दर्ज कराया जाए। हत्यारों के भारत में प्रवेश के दावे खारिज मेघालय की सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश पुलिस के उन दावों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया कि हादी के हत्यारे भारतीय राज्य में दाखिल हो गए हैं। मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रमुख, महानिरीक्षक (IG) ओ पी उपाध्याय ने कहा कि ये दावे निराधार और भ्रामक हैं। उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किसी व्यक्ति ने हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की हो। बीएसएफ को ऐसी किसी घटना की न तो सूचना मिली है और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट मिली है।' मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गारो पर्वतीय क्षेत्र में संदिग्धों की मौजूदगी के दावे की पुष्टि करने के लिए 'कोई जानकारी या खुफिया प्रमाण नहीं' है। अधिकारी ने कहा कि स्थानीय पुलिस इकाइयों को इस तरह की किसी गतिविधि की सूचना नहीं मिली है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। ढाका महानगर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिन में दावा किया था कि हादी हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्ध 'स्थानीय सहयोगियों की मदद से' हलुआघाट सीमा के रास्ते मेघालय में प्रवेश कर गए हैं।

‘हत्याओं को इग्नोर नहीं किया जा सकता’: MEA ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर यूनुस राज पर जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत का रुख अब बहुत आक्रामक है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि भारत विरोधी झूठे नैरेटिव को भारत पहले ही खारिज कर चुका है. कानून व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना पूरी तरह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है. भारत हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी शत्रुता पर गहरी चिंता जताता है. MEA ने मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हालिया हत्या की निंदा करते हुए कहा कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2900 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं को मीडिया की अतिशयोक्ति या महज राजनीतिक हिंसा बताकर खारिज नहीं किया जा सकता. जायसवाल ने कहा कि ये घटनाएं कोई मीडिया का बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया आंकड़ा नहीं है. यह एक कड़वी हकीकत है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता. इसके साथ ही अमेरिका में H-1B वीजा के संकट को लेकर भी भारत ने वॉशिंगटन में आवाज उठाई है. कई भारतीयों की नौकरी और पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है. सरकार ने साफ किया है कि वह अपने नागरिकों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी. क्या बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार को झुठला रही है यूनुस सरकार? बांग्लादेश में हालात बद से बदतर हो चुके हैं. हिंदुओं के साथ ईसाई और बौद्ध भी वहां असुरक्षित हैं. जायसवाल ने साफ कहा कि सुरक्षा देना अंतरिम सरकार का काम है. 2900+ घटनाओं का सबूत अब दुनिया के सामने है. इसे राजनीतिक हिंसा बताकर टालना बिल्कुल गलत है. भारत वहां की हर पल की खबर ले रहा है. अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाना बंद होना चाहिए. दोषियों को कड़ी सजा दिलाना वहां की सरकार की जिम्मेदारी है. भारत ने स्पष्ट किया कि इसे मीडिया का बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मामला नहीं कहा जा सकता. यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का समर्थन, तारिक रहमान की वापसी को उसी नजरिए से देखने की अपील बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ी एक अन्य अहम घटना पर MEA ने कहा कि भारत वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करता है. BNP नेता तारिक रहमान की वापसी को भी इसी व्यापक लोकतांत्रिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए. भारत का जोर इस बात पर है कि बांग्लादेश में स्थिरता, समावेश और कानून का राज कायम रहे. बॉन्डी बीच आतंकी हमले पर ऑस्ट्रेलिया से संपर्क में भारत एक अलग प्रेस ब्रीफिंग में MEA प्रवक्ता ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच आतंकी हमले से जुड़े जिम्मेदार लोगों को लेकर आई रिपोर्ट्स की जानकारी भारत को है. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी इस मामले में भारतीय एजेंसियों के संपर्क में हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सूचना साझा करने को बेहद अहम मानता है. H-1B वीजा अपॉइंटमेंट रद्द होने से भारतीयों की मुश्किलें, अमेरिका से उठाया मुद्दा H-1B वीजा अपॉइंटमेंट कैंसिलेशन के सवाल पर MEA ने बताया कि कई भारतीय नागरिकों ने वीजा शेड्यूल और री-शेड्यूल में देरी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं. वीजा जारी करना संबंधित देश का संप्रभु अधिकार है, फिर भी भारत ने नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह चिंता उठाई है. MEA के अनुसार, देरी के चलते पढ़ाई और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ा है. सरकार अमेरिकी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव को कम किया जा सके.

बांग्लादेश में पुलिस की चुप्पी पर सवाल, अधिकारी बोले- हस्तक्षेप से हो सकती थी गोलीबारी

ढाका  बांग्लादेश में भीड़तंत्र काम कर रहा है जहां पुलिस स्थिति को संभालने में नाकाम दिख रही है. इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा से भारी नुकसान हुआ है. बीते गुरुवार को दंगाइयों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख अखबारों के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया. पुलिस वहां खड़ी देखती रही लेकिन दंगाइयों को रोकने की कोशिश नहीं की. अब ढाका महानगर पुलिस (DMP) के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम एंड ऑपरेशन्स) एसएन एमडी नजरुल इस्लाम ने कहा है कि भीड़ हिंसा के खिलाफ पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई इसलिए नहीं की, क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशाना बनने का डर था. उन्होंने बताया कि करवान बाजार में 'प्रथम आलो' और 'द डेली स्टार' के दफ्तरों पर हुए हमलों, तोड़फोड़ और आगजनी के दौरान अगर पुलिस हस्तक्षेप करती तो गोलीबारी हो सकती थी, जिससे दो से चार लोगों की मौत भी हो सकती थी. एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा? जब उनसे पूछा गया कि क्या DMP प्रथम आलो, द डेली स्टार और उदिची पर हुए हमलों को रोकने में सक्षम थी, तो नजरुल इस्लाम ने कहा, 'हम सक्षम हैं. यह नहीं कि हम हर घटना को रोक सकते हैं. पिछले अनुभवों के आधार पर, जब जनभावना भड़क जाती है तो राज्य अधिकतम संसाधनों का इस्तेमाल करता है. करवान बाजार की घटना वाले दिन अगर हम हस्तक्षेप करते, तो गोलीबारी हो सकती थी और संभवतः दो से चार लोगों की जान जा सकती थी, इसके बाद पुलिस पर भी हमले होते.' उन्होंने आगे कहा, 'उस दिन दो-चार पुलिसवाले मारे जाते… आप जानते हैं कि पुलिस बल एक साल पहले ही एक बड़े आघात से गुजरा है और हम फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आने वाले हैं. अगर पुलिस बल में फिर कोई हताहत होता, तो मैं इस बल के साथ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण हम वहां कार्रवाई में नहीं जा सके. किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई. इतनी बड़ी घटना में भी जान-माल का नुकसान न होना, मैं इसे हमारी उपलब्धि मानता हूं.'   

बांग्लादेश में युवा नेता को गोली लगी, अस्पताल में गंभीर हालत

 ढाका      बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शरीफ उस्मान हादी के बाद अब खुलना में एक और छात्र नेता को अज्ञात हमलावरों में गोली मार दी. घायल अवस्था में छात्र नेता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही है.  पुलिस ने बताया कि खुलना में सोमवार को नेशनल सिटिजन्स पार्टी के केंद्रीय श्रमिक संगठन के नेता मोहम्मद मोतालेब सिकदर को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी. गोली उनके कान के पास से निकल गई, जिससे वह घायल हो गए हैं. कान के पास से निकली गोली द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, सोनडांगा मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अनिमेष मंडल ने बताया कि बदमाशों ने सुबह करीब 11:45 बजे शहर के गाजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास मोहम्मद मोतालेब के सिर को निशाना बनाकर गोली चलाई. उन्हें गंभीर हालत में खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था. वहीं, डॉक्टरों के हवाले से पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोतालेब खतरे से बाहर हैं. गोली उसके कान के एक तरफ से अंदर गई, स्किन को भेदते हुए दूसरी तरफ से निकल गई. रैली की कर रहे थे तैयारी एनसीपी के खुलना महानगर पालिका के आयोजक सैफ नवाज ने प्रोथोम आलो को बताया कि मोतलेब सिकदर एनसीपी के श्रमिक संगठन जातीय श्रमिक शक्ति के केंद्रीय आयोजक और खुलना मंडल संयोजक थे. पार्टी कुछ दिनों में खुलना में एक संभागीय श्रमिक रैली आयोजित करने वाली थी और मोतालेब सिकदर उसी की तैयारियों में जुट हुए थे. बता दें कि इससे पहले ढाका-8 से सांसद पद के उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में हमलावरों ने गोली मार दी थी, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई थी. ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एवरकेयर अस्पताल में प्रारंभिक उपचार के बाद, उसे बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए 15 दिसंबर को सिंगापुर रेफर कर दिया गया था. गुरुवार रात (18 दिसंबर) को सिंगापुर जनरल अस्पताल में हादी मौत हो गई. इसके बाद पूरे बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई.   

बांग्लादेश संकट पर थरूर का हस्तक्षेप: शांति बहाली के उपाय बताए, यूनुस को दिया संदेश

ढाका  बांग्लादेश में जारी हिंसा को लेकर भारत में कई लोकप्रिय शख्सियतों ने अपनी चिंता जाहिर की है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पड़ोसी देश में प्रेस के ऊपर हो रहे हमलों को लेकर भी दुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर नहीं बल्कि उस देश के बहुलतावाद पर सीधा हमला है। जनता की आवाज मतपेटी के जरिए सुनी जानी चाहिए, न ही हिंसा और हुडदंग के जरिए। इतना ही नहीं हिंसा को खत्म करने के लिए भी थरूर ने यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को कुछ सलाह दी।   सोशल मीडिया साइट एक्स पर बांग्लादेश हिंसा पर थरूर ने अपनी राय साझा की। उन्होंने लिखा, "बांग्लादेश से आ रही खबरों को लेकर मैं चिंता में हू्ं। प्रोथोम आलो और द डेली स्टार के ऑफिस पर हुए टारगेटेड हमले ने केवल दो संस्थानों पर हमला नहीं किया है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और बहुलतावाद पर हमला किया है। मैं संपादक महफूज अनाम और अन्य साहसी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हूं।" इससे इतर थरूर ने खुलना और राजशाही में बंद हुए भारतीय सहायक उच्चायोग को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "सुरक्षा खतरों के बढ़ने के कारण खुलना और राजशाही में भारतीय सहायक उच्चायोग का बंद होना एक बड़ा झटका है। इससे छात्रों, मरीजों और गरीब परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा। 12 फरवरी 2026 को होने वाले प्रस्तावित चुनाव से पहले ऐसी हिंसा और असहिष्णुता का माहौल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक है। केरल सांसद ने केवल घटना को लेकर अपने विचार ही नहीं रखे, बल्कि बांग्लादेश को इस समस्या से निकलने के लिए सलाह भी दी। उन्होंने लिखा, "एक स्थिर और समृद्ध पड़ोस के लिए, अंतरिम सरकार को कई चीजें सुनिश्चित करनी होगी। इनमें सबसे पहले पत्रकारों की सुरक्षा, पत्रकारों को अपनी जान बचाने के लिए हड़बड़ी में संदेश पोस्ट करने की नौबत नहीं आनी चाहिए, जबकि उनके ऑफिस को आग लगाई जा रही है। किसी भी तरह से भीड़ तंत्र को हावी नहीं होने दिया जा सकता।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए थरूर ने दूसरे नंबर पर राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को महत्वता दी। उन्होंने लिखा,"राजनयिक मिशनों को सुरक्षित क्षेत्र बने रहना चाहिए, ताकि लोगों के बीच संपर्क और संबंध बने रहें। निशाने पर आए दूतावास और वाणिज्य दूतावास को अतिरिक्त सुरक्षा दी जानी चाहिए। इसके अलावा शांति कि बहाली, अगर देश संक्रमण काल से किसी भी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ बाहर निकलना चाहता है और उसे भीड़ तंत्र की जगह पर राजनैतिक संवाद को अपनाना होगा। इसके लिए मुख्य सलाहकाकर यूनुस को नेतृत्व करना चाहिए।" बकौल थरूर, बांग्लादेश में स्थिरता पूरे क्षेत्र के लिए अहम है। उन्हें उम्मीद है कि वहां शांति लौटेगी और ऐसा सुरक्षित माहौल बनेगा कि जनता की आवाज मतपेटी से सुनी जाएगी, न कि हिंसा और डर के जरिए। गौरतलब है कि पिछले साल शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश लगातार जल रहा है। इसके बाद यह आग थोड़ी ठंडी हुई, लेकिन एक छात्र नेता हत्या के बाद माहौल फिर से बिगड़ने लगा है। कट्टरपंथी लोगों ने इस घटना के लिए सबसे पहले तो भारत को जिम्मेदार ठहराया फिर उसके बाद भारतीय राजनियक मिशनों को निशाना बनाया। इतना ही नहीं इन्हीं कट्टरपंथियों ने एक हिंदु युवक को पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को सार्वजनिक रूप से पेड़ से टांगकर आग लगा दी गई।  

हिंदू युवक की हत्या से बांग्लादेश में हड़कंप, मुहम्मद यूनुस के ऐक्शन के बाद 7 गिरफ्तारी

बांग्लादेश बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को यह जानकारी दी है। यूनुस ने कहा कि रैपिड एक्शन बटालियन ने मैमनसिंह के बालुका में 27 साल के सनातन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या के मामले में संदिग्धों को हिरासत में लिया है। यूनुस ने कहा, "रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने मैमनसिंह के बालुका में 27 साल के सनातन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सात लोगों को संदिग्ध के तौर पर गिरफ्तार किया है।" बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारेक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), इरशाद अली (39), निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन अकन (46) के रूप में हुई है। यूनुस ने कहा कि ये गिरफ्तारियां इलाके में RAB यूनिट्स की समन्वित कार्रवाई के बाद हुई हैं। उन्होंने कहा, "RAB-14 ने अलग-अलग जगहों पर ऑपरेशन चलाकर उपरोक्त संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।" इस बीच बांग्लादेश के एक प्रमुख युवा नेता का शव शुक्रवार को सिंगापुर से ढाका लाए जाने के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपने नागरिकों से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गयी हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया । युवा नेता शरीफ उस्मान हादी को छह दिन पहले गोली मार दी गयी थी। वह जुलाई में सरकार के विरूद्ध हुए हिंसक प्रदर्शनों में एक प्रमुख चेहरा थे। पुलिस के अनुसार, हादी का शव सिंगापुर से ढाका पहुंचने के कुछ ही समय बाद, कथित कट्टरपंथी दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने राजधानी में वामपंथी विचारधारा वाली उदिची शिल्पीगोष्ठी के मुख्य कार्यालय में आग लगा दी। देश के विभिन्न हिस्सों में बृहस्पतिवार रात हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं जिनमें चट्टगांव में भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास पर पथराव भी शामिल है। ये घटनाएं मुख्य सलाहकार मोहम्मद युनूस द्वारा टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए हादी की मौत की पुष्टि करने के बाद हुईं। इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी का शव कड़ी सुरक्षा और व्यापक जन शोक के बीच बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की उड़ान से स्थानीय समयानुसार शाम लगभग छह बजे हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एचएसआईए) पर लाया गया। यह जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने बिमान के महाप्रबंधक (जनसंपर्क) बोशरा इस्लाम के हवाले से दी।