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भारत के खिलाफ नई चाल! बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश की साजिश का खुलासा

नई दिल्ली बांग्लादेश में जहां एक ओर जमीनी स्तर पर भारत विरोधी प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. ठीक इसी तरह समुद्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. पिछले दो महीने से भारत ने एक तरह के असामान्य पैटर्न को नोटिस किया है. बंगाल की खाड़ी में लगातार बड़ी संख्या में बांग्लादेश की मछली पकड़ने वाली नौकाएं भारतीय जलसीमा में प्रवेश कर रही हैं.  यह मामला 15 दिसंबर को उस समय सुर्खियां बटोरी, जब बांग्लादेश नौसेना के एक गश्ती पोत ने 16 मछुआरों को ले जा रहे एक भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी, जिससे वह पलट गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं तेज हो गई हैं. शेख हसीना सरकार के तख्तापलटन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी से भारत मे अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है. यूनुस पहले यह दावा भी कर चुके हैं कि बांग्लादेश पूरे क्षेत्र में महासागर का संरक्षक है, जिसे लेकर भारत में असहजता है. इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास मछली पकड़ने वाले भारतीय मछुआरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. सोमवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब आरोप लगा कि बांग्लादेश नौसेना के एक जहाज ने सीमा के पास पश्चिम बंगाल के 16 मछुआरों को ले जा रहे भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी जहाज की लाइटें बंद थीं, जिससे रात में भारतीय ट्रॉलर उसे देख नहीं सका. FB Parmita नाम का यह ट्रॉलर पलट गया, जिससे सभी मछुआरे समुद्र में जा गिरे. सुबह करीब 6 बजे भारतीय तटरक्षक बल ने 11 मछुआरों को बचाया. पांच अब भी लापता हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक मछुआरे की भाले जैसे हथियार से हत्या कर दी गई. बचे हुए मछुआरों ने आरोप लगाया है कि ट्रॉलर पर सवार सभी लोगों को मारने की कोशिश की गई.  बांग्लादेशी जहाज ने उस समय टक्कर मारी जब मछुआरे जाल डालने की तैयारी कर रहे थे. एक मछुआरे ने बताया कि राजदुल अली शेख नामक व्यक्ति को भाले से मारा गया. सुंदरबन मरीन फिशरमैन वर्कर्स यूनियन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. हालांकि, भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि भारतीय ट्रॉलर ने समुद्री सीमा पार की थी या बांग्लादेश नौसेना का जहाज भारतीय जलसीमा में दाखिल हुआ था. उधर, बांग्लादेश ने इन रिपोर्टों को भ्रामक बताते हुए दावा किया है कि उसका गश्ती पोत घटनास्थल से 12 मील दूर था. इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है. विदेश मामलों के विशेषज्ञ रमन मूर्ति ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि यह उकसावा है. वे भारत के साथ टकराव चाहते हैं. यही उनके दयनीय अस्तित्व का एकमात्र रास्ता है.  एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित उकसावा है, जिसका मकसद हमें फंसाना है. भारतीय जलसीमा में बांग्लादेशी नौकाएं यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं की भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में घुसपैठ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. 16 दिसंबर को ही भारतीय तटरक्षक बल ने दो बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भारतीय जलसीमा में घुसने के आरोप में पकड़ा.  यह कोई अकेली घटना नहीं है. बीते कुछ महीनों में भारत कम से कम आठ बांग्लादेशी नौकाओं और करीब 170 मछुआरों को पकड़ चुका है. भारत-विरोधी भावनाओं के साथ इन घटनाओं का बार-बार होना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है. भारत-विरोधी बयानबाजी में तेजी बांग्लादेश में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से इस तरह की गतिविधियों में इजाफा हुआ है. बांग्लादेश सरकार के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने न सिर्फ पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाई हैं, बल्कि कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और पहले प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों को भी जगह दी है. इसी बीच, नवंबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख ने बांग्लादेश का तीन दिवसीय दौरा किया. 1971 के बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी नौसेना का कोई अधिकारी बांग्लादेश के उच्चस्तरीय दौरे पर रहा. एक संसदीय समिति ने यहां तक कहा है कि ढाका में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत को 1971 के युद्ध के बाद से सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. शुक्रवार को बांग्लादेश में एक बार फिर भारत-विरोधी प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली. यह हिंसा कट्टरपंथी नेता और भारत विरोधी बयानबाजी  के लिए कुख्यात शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की, जिसे नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी.

शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में पत्रकारों पर हमला, ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रथम आलो’ के दफ्तर में आग लगाई गई

ढाका  बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद दंगाइयों ने आधी रात वहां के मीडिया प्रतिष्ठानों के दफ्तर में जमकर धमाल मचाया. दंगाइयों ने बांग्लादेश के अंग्रेजी दैनिक अखबार 'द डेली स्टार' के दफ्तर को आग लगा दी, इस दौरान बिल्डिंग के छत पर दर्जनों पत्रकार तीन घंटे तक फंसे रहे. ये इन पत्रकारों के लिए मौत से होकर गुजरने का अनुभव था.  'द डेली स्टार' का ऑफिस अब पूरी तरह से जल चुका है. बलवाइयों ने बांग्लादेश के दूसरे अखबार प्रथम आलो के दफ्तर को भी जला दिया है.  यह हमला अखबार के कारवान बाज़ार ऑफिस में हुआ, जिसके बाद पास की प्रोथोम आलो बिल्डिंग में तोड़फोड़ और आगजनी हुई. एक पत्रकार के मुताबिक बाहर से एक फोन कॉल आया जिसने स्टाफ को चेतावनी दी कि भीड़ द डेली स्टार के परिसर की ओर बढ़ रही है.  9वीं मंजिल पर फंसे 28 पत्रकार, नीचे सुलगती आग न्यूज़रूम में मौजूद स्टाफ ने शुरू में नीचे जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक एक भीड़ बिल्डिंग की निचली मंजिलों पर पहुंच चुकी थी, उन्होंने यहां तोड़फोड़ शुरू कर दी और बाद में उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी.  'द डेली स्टार' में हिंसा की पूरी रिपोर्ट बांग्लादेश की वेबसाइट बीडीन्यूज24 में छपी है. रिपोर्ट के अनुसार जब प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस के निचले हिस्से में आग लगा दी तो वहां से धुएं का गुबार निकल पड़ा. इस वजह से पत्रकार बाहर नहीं निकल पाए.  इसके बाद पत्रकारों का एक ग्रुप 9वीं मंजिल की छत पर चला गया. पत्रकार ने बताया कि वहां 28 लोग थे.  कुछ देर बाद बिल्डिंग का एक कैंटीन वर्कर बाहर की आग बुझाने वाली सीढ़ी का इस्तेमाल करके नीचे उतरा. जमीन पर पहुंचते ही भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पीटा. इस घटना के बाद किसी और ने सीढ़ी का इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं की.  बाद में फायर फाइटर्स आए और निचली मंजिलों पर लगी आग को काबू में किया. इसके बाद फायर सर्विस के चार लोग फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए छत पर गए. हालांकि, नीचे तोड़फोड़ जारी रहने के कारण पत्रकार नीचे आना नहीं चाह रहे थे. वहीं नीचे बिल्डिंग में आग भी लगी हुई थी. इस दौर में इन पत्रकारों ने ऊपर रहना ही मुनासिब समझा. और छत का दरवाज़ा बंद कर दिया गया.  दंगाइयों ने की ऊपर चढ़ने की कोशिश फायर सर्विस के स्टाफ ने उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की, इन लोगों ने पत्रकारों से कहा कि आर्मी के जवान बिल्डिंग के बाहर मौजूद हैं. लेकिन जब कई हमलावर छत पर आ गए और दरवाजा पीटने लगे तो फिर से घबराहट फैल गई. छत पर मौजूद फायर फाइटर्स भी घबरा गए.  इस दौरान पत्रकारों ने मदद का इंतजार करते हुए छत पर रखे गमलों से दरवाजे को बंद करने की कोशिश की. बाद में एडिटर्स काउंसिल के प्रेसिडेंट और न्यू एज के एडिटर नूरुल कबीर, फोटोग्राफर शाहिदुल आलम के साथ भीड़ को शांत करने की कोशिश में बिल्डिंग के सामने गए. बाद में नूरुल कबीर के साथ बदसलूकी की गई. पत्रकारों के अनुसार बाद में सैनिकों ने सीढ़ियों के एक तरफ से रास्ता दिया, जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने बिल्डिंग में घुसने और तोड़फोड़ और लूटपाट जारी रखने के लिए किया.  हम खुशकिस्मत थे… इस दौरान छत पर और बिल्डिंग के अंदर फंसे डेली स्टार के स्टाफ को फायर-एग्जिट सीढ़ियों से नीचे उतारा गया और बिल्डिंग के पीछे के रास्ते से बाहर निकाला गया. एक पत्रकार ने कहा, "हम खुशकिस्मत थे. हम एक बड़ी आपदा से बच गए. मुझे नहीं पता कि देश किस दिशा में जा रहा है."इस घटना के बाद 'द डेली स्टार' का न्यूज रूम जल गया है और इस ग्रुप ने फिलहाल अखबारों का फिजिकल और ऑनलाइन प्रकाशन बंद करने का फैसला किया है. इधर उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के मुख्य प्रशासक मोहम्मद यूनुस ने रात को देश को संबोधित किया.  मोहम्मद यूनुस ने कहा, "इस क्रूर हत्या में शामिल सभी अपराधियों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा और उन्हें अधिकतम सजा दिलाई जाएगी. इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी." यूनुस ने कहा, "मैं एक बार फिर स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि उस्मान हादी पराजित ताकतों, फासीवादी आतंकवादियों के दुश्मन थे. उनकी आवाज को दबाने और क्रांतिकारियों को डराने का नापाक प्रयास पूरी तरह विफल किया जाएगा. कोई भी डर, आतंक या खूनखराबे के ज़रिए इस देश की लोकतांत्रिक प्रगति को नहीं रोका जा सकता." बता दें कि 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया था. जहां उसकी मौत हो गई. 

भारत का सख्त फैसला: बांग्लादेश में अशांति के बीच ढाका का वीजा सेंटर बंद

ढाका बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत ने बुधवार को अपना भारतीय वीजा आवेदन केंद्र (आईवीएसी) अस्थायी रूप से बंद कर दिया। यह केंद्र ढाका के जमुना फ्यूचर पार्क में स्थित है और राजधानी में सभी भारतीय वीजा सेवाओं का मुख्य, एकीकृत केंद्र माना जाता है। आईवीएसी ने एक बयान में कहा कि सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए बुधवार को दोपहर 2 बजे के बाद केंद्र बंद कर दिया गया। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों की आज आवेदन जमा करने की अपॉइंटमेंट थी, उनकी तारीख आगे के लिए पुनर्निर्धारित की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को किया था तलब इससे पहले नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया। मंत्रालय ने ढाका में भारतीय मिशन के आसपास कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा सुरक्षा माहौल बिगाड़ने की कथित योजनाओं पर गंभीर चिंता जताई। 'अंतरिम सरकार करे भारतीय मिशनों और कार्यालयों की सुरक्षा' विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अपने राजनयिक दायित्वों के तहत वहां स्थित भारतीय मिशनों और कार्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। साथ ही, बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल को लेकर भारत की कड़ी चिंता से भी दूत को अवगत कराया गया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनयिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता बढ़ गई है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अपने नागरिकों और मिशनों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शेख हसीना को मौत की सजा पर बांग्लादेश में बवाल, स्थानीय हिंसा में दो लोगों की जान गई

ढाका  बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले साल हुई हिंसा मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पड़ोसी देश एक बार फिर उबल पड़ा है। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृहमंत्री और शेख हसीना को सामूहिक हत्या का दोषी करार दिया था। वहीं अब आवामी लीग के समर्थक सड़कों पर उतर पड़े हैं। ढाका की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगहों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थानीय मीडिया की बात करें तो हिंसा में अब तक दो लोगों के मारे जाने की खबर है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार को फैसले के बारे में सारी जानकारी थी। इसीलिए ढाका में पहले ही पुलिस और सैन्य बल की तैनाती कर दी गई थी। मोहम्मद यूनुस के आवास की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद सोमवार को फैसला आने केबाद से ही ढाका की तनाव बढ़ गया है। आवामी लीग का कहना है कि न्यायाधिकरण ने यह फैसला अंतरिम सरकार और सेना के इशारे पर केवल राजनीतिक बदले की भावना से सुनाया है। ऐसे में आवामी लीग ने दो दिन के राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। शेख हसीना को देश की विशेष अदालत 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पिछले वर्ष जुलाई में हुए व्यापक विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड तथा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून को पांच साल की सजा दी है। मामून ने अपराध स्वीकार कर सरकारी गवाह बनने का निर्णय लिया था। न्यायाधिकरण ने हसीना और असदुज्जमां की संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश भी दिया है। फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया क्योंकि शेख हसीना इन दिनों भारत में रह रही हैं। मामून हिरासत में हैं। फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।" अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है। फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।" अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है। बंगलादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से शेख हसीना और असदुज्जमां को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध भेजने की घोषणा की है। मंत्रालय ने कहा कि मानवता के विरुद्ध दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को शरण देना किसी भी देश का गैरदोस्ताना कदम कदम होगा। दोनों देशों के बीच 2016 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया गया है। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बताया कि प्रत्यर्पण का अनुरोध पत्र ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग या नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के माध्यम से भेजा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शेख हसीना के खिलाफ तीन और मामले लंबित हैं, जिन पर निर्णय अभी बाकी है। जुलाई 2024 में आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी से उपजे छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण हसीना सरकार गिर गयी थी। पाँच अगस्त को वह भारत आ गयीं और प्रोफ़ेसर यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोह के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए कई साक्षात्कारों में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि गोलीबारी "बंगलादेश पुलिस के सामान्य हथियारों जैसी नहीं थी"।

पाकिस्तान की नई रणनीति? दशकों बाद बांग्लादेश में दिखा उसका युद्धपोत

बांग्लादेश बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार हटने और मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार गठित होने के बाद से ही भारत के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ता ही जा रहा है। अब पाकिस्तानी सेना का एक युद्धपोत बांग्लादेश के कटगांव पोर्ट पर पहुंच गया है। 1971 के युद्ध के बाद पहली बार है जब यहां कोई पाकिस्तानी पोत पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी नौसेना का पीएनएससैफ (PNF SAIF) युद्धपोत चटगांव पहुंचा है। बांग्लादेशी नौसेना ने पाकिस्तानी युद्धपोत का जबरदस्त स्वागत भी किया। पाकिस्तान का युद्धपोत चटगांव पहुंचना भारत के लिए चुनौती वाली बात है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान किसी तरह से भारत की घेराबंदी करने का प्लान बना रहा है। 1971 के बाद से ही बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं लेकिन पिछले कुछ महीने में सब कुछ बदल गया है। इस समय पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख ऐडमिरल नावीन अशरफ भी बांग्लादेश की यात्रा पर हैं। पाकिस्तान के टॉप मिलिट्री कमांडर जनरल साहिर श्मशाद मिर्जा कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की यात्रा पर गए थे। उन्होंने मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात की थी। बता दें कि बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त में हिंसक छात्र आंदोलन हुआ था। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था। फिलहाल वह भारत की शरण में हैं। वहीं मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। अफगानिस्तान से खराब होते संबंधों के बीच पाकिस्तान बांग्लादेश में नई संभावनाएं तलाश कर रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और भारत के बीच संबंध लागातार मजबूत हो रहे हैं। वहीं अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस्तांबुल में तीसरे चरण की शांति वार्ता का भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। ऐसे में वह चाहता है कि बांग्लादेश से करीबी बढ़ाकर भारत को धौंस दिखाने की कोशिश की जाए। हालांकि बांग्लादेश में यह स्थिति कब तक रहेगी यह भी कहा नहीं जा सकता है। फरवरी में ही बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। आवामी लीग ने यूनुस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।  

ऑपरेशन सिंदूर में ढेर हुआ था J-10CE, अब बांग्लादेश बना चीन के इस जेट का खरीदार

ढाका  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिनों के सैन्य टकराव ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी J-10CE फाइटर जेट की नाकामी सामने आई थी. लेकिन अब बांग्लादेश इस जेट को खरीदने की योजना बना रहा है. 20 J-10CE जेट्स के लिए 2.2 अरब डॉलर का सौदा हो रहा है. ये खबर भारत के लिए नई चिंता पैदा कर रही है. ऑपरेशन सिंदूर क्या था? चीनी जेट की फेलियर की पूरी कहानी ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत की तरफ से पाकिस्तान पर हवाई हमला था. भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तानी एयर फोर्स (PAF) के 12-13 जेट्स मार गिराए, जिनमें 4-5 F-16 भी शामिल थे. J-10CE की पूरी परफॉर्मेंस फेल रही. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक PAF J-10CE जेट को ऑपरेशन के दौरान हार्ड लैंडिंग हो गई, जो क्रैश की तरह लग रही थी. कुछ रिपोर्ट्स में इसे पायलट की गलती या दबाव बताया गया. कुल मिलाकर, चीनी हथियारों ने कई जगह फेलियर दिखाया – जैसे रडार सिस्टम और मिसाइल गाइडेंस में खराबी.  पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके चीनी हथियार बहुत अच्छा काम किए लेकिन हकीकत में भारी नुकसान हुआ. ये ऑपरेशन चीनी टेक्नोलॉजी की कमजोरियों को उजागर करने वाला था.  बांग्लादेश क्यों खरीद रहा है ये 'फेल' जेट? डील की डिटेल्स ऑपरेशन सिंदूर की नाकामी के बावजूद, बांग्लादेश अपनी एयर फोर्स को मॉडर्न बनाने के लिए J-10CE पर दांव लगा रहा है. 20 J-10CE जेट्स का सौदा 2.2 अरब डॉलर का है. इसमें ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और दूसरे खर्चे शामिल हैं. J-10CE चीन के J-10C का एक्सपोर्ट वर्जन है। ये मल्टीरोल फाइटर जेट तेज उड़ान भरता है. हवा-से-हवा, हवा-से-जमीन हमले कर सकता है. हर जेट की बेस प्राइस 60 मिलियन डॉलर है, यानी 20 के लिए 1.2 अरब. बाकी 820 मिलियन ट्रेनिंग और शिपिंग पर जाएंगे. जेट्स 2026-2027 में मिलेंगे. पेमेंट 10 सालों (2036 तक) में होगा. बांग्लादेश ने अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया. बांग्लादेश एयर फोर्स के पास अभी 212 विमान हैं, जिनमें 44 फाइटर जेट. ज्यादातर 36 पुराने चीनी F-7 हैं, जो कोल्ड वॉर के जमाने के हैं. 8 MiG-29B मॉडर्न हैं. कुछ रूसी Yak-130 लाइट अटैक के लिए. J-10CE इन पुरानी मशीनों को रिप्लेस करेंगे और नेशनल एयर डिफेंस मजबूत करेंगे. हाल ही में बांग्लादेश में एक F-7 जेट क्रैश हुआ, जो चीनी हथियारों की पुरानी समस्याओं को दिखाता है. लेकिन बांग्लादेश चीन पर भरोसा कर रहा है. भारत और इलाके के लिए क्या मतलब? नई चुनौतियां ये डील भारत के लिए खतरे की घंटी है. पूर्वी बॉर्डर पर बांग्लादेश की हवाई ताकत बढ़ेगी. J-10CE ऑपरेशन सिंदूर में फेल हुआ. अगर बांग्लादेश के पास ये जेट्स आए, तो भारत को दो-मोर्चे (पाकिस्तान-चीन) के अलावा तीसरा मोर्चा झेलना पड़ सकता है. चीन भारत को घेरने के लिए बांग्लादेश जैसे पड़ोसियों को हथियार बेच रहा है. अमेरिका भी पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइलें दे रहा है. साउथ एशिया में तनाव बढ़ रहा है. एक्सपर्ट्स कहते हैं, भारत को अपनी राफेल, S-400 जैसी सिस्टम्स को अपग्रेड करना होगा और डिप्लोमेसी से पड़ोस संभालना पड़ेगा. जानिए इस फाइटर जेट की ताकत J-10C फाइटर जेट चौढ़ी पीढ़ी से थोड़ा बेहतर फाइटर जेट है. जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर जंग के लिए जाना जाता है. इसमें एडवांस एवियोनिक्स, AESA राडार है. साथ ही ये कई तरह के हथियारों को लेकर हमला करने की क्षमता रखता है. इसे चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री बनाती है. इस फाइटर जेट को एक पायलट उड़ाता है.     55.5 फीट लंबे जेट का विंगस्पैन 32.2 फीट है.      मैक्सिमम टेकऑफ वजन 19,227 किलोग्राम है.      यह अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है.      इसकी कॉम्बैट रेंज 550 किलोमीटर और फुल रेंज 1850 किलोमीटर है.      यह अधिकतम 2205 km/hr की अधिकतम गति से उड़ान भर सकता है.     इसमें इंटरनल फ्यूल 4950 लीटर आता है. जबकि तीन ड्रॉप टैंक्स लगाकर इसे और बढ़ाया जा सकता है. कितने तरह के हथियार लगा सकते हैं इसमें 1 ग्रिजनेव शिपुनोव डीएसएच-23 तोप लगी होती है. इसके अलावा इसमें 11 हार्डप्वाइंट्स होते हैं, जिसमें हथियार लगाए जाते हैं. यह फाइटर जेट 90 मिलिमीटर के अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स भी लगा सकता है. इसके अलावा इसमें हवा से हवा में मार करने वाली चार तरह की मिसाइलें लग सकती हैं. या फिर हवा से सतह पर मार करने वाली दो तरह की मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- केडी-88 स्टैंडऑफ लैंड अटैक मिसाइल और वाईजे-91 एंटी-रेडिएशन मिसाइल.  इसमें लेजर गाइडेड बम, ग्लाइड बम, सैटेलाइट गाइडेड बम, अनगाइडेड बम लगा सकते हैं. या फिर इन सभी हथियारों का मिश्रण लगाया जा सकता है. वह हमले और मिशन के आधार पर तय किया जाता है. अगर बांग्लादेश इस फाइटर जेट को भारतीय सीमा के पास तैनात करता है तो भारत की तीनों सेनाओं को अलर्ट पर आना होगा. 

‘भारत से दिक्कत है…’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस का विवादित बयान फिर चर्चा में

ढाका  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक बार फिर भारत पर तीखी टिप्पणी की है. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में यूनुस ने आरोप लगाते हुए कहा कि फिलहाल भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं क्योंकि भारत को उनके देश के छात्रों द्वारा किए गए हालिया आंदोलन पसंद नहीं आए. यूनुस ने कहा, "हमें अभी भारत के साथ कुछ दिक्कते हैं. उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि बांग्लादेश में छात्र क्या कर रहे हैं. और वे शेख हसीना की मेजबानी कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ये सारी समस्याएं पैदा कीं और अपने कार्यकाल में कई युवा लोगों को मारने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया. यही चीज भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव पैदा कर रही है. उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से लगातार भारत की ओर से फर्जी खबरें और प्रचार फैला रहे हैं, जिसमें इस आंदोलन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. वे इसे इस्लामी आंदोलन और छात्रों को तालिबानी बता रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. वे तो यहां तक कहते हैं कि मैं भी तालिबानी हूं. हालांकि मेरे पास दाढ़ी नहीं है और मैं घर पर ही रहा. फिर भी, मेरा प्रचार लगातार जारी है. यूनुस ने जोर देते हुए कहा कि इसलिए मुझे सामने आकर अपनी पहचान दिखानी पड़ी. उन्होंने कहा, "देखिए, यह मुख्य तालिबान है. यही स्थिति वास्तविकता में है." बता दें कि यह टिप्पणी तब आई है जब बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार न्यूयॉर्क में हैं और संयुक्त राष्ट्र की सत्र में भाग लेने आए हैं. यूनुस का कहना है कि भारत के साथ यह तनाव केवल छात्रों के आंदोलनों और मीडिया प्रचार के कारण उत्पन्न हुआ है और इसे राजनीतिक रूप से बढ़ाया जा रहा है.

लिटन दास चमके, बांग्लादेश ने हॉन्ग कॉन्ग को 7 विकेट से रौंदा

दुबई  एशिया कप 2025 के मैच नंबर-3 में गुरुवार (11 सितंबर) को बांग्लादेश का सामना हॉन्ग कॉन्ग से हुआ. दोनों टीमों के बीच ग्रुप-बी का यह मुकाबला अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला गया. इस मुकाबले में बांग्लादेश ने हॉन्ग कॉन्ग को सात विकेट से हराया. मुकाबले में हॉन्ग कॉन्ग ने निर्धारित 20 ओवर्स में 7 विकेट पर 143 रन बनाए थे. जवाब में बांग्लादेश ने 14 गेंद बाकी रहते टारगेट हासिल कर लिया. एशिया कप 2025 में हॉन्ग कॉन्ग की ये लगातार दूसरी हार है. हॉन्ग कॉन्ग को अपने पहले मुकाबले में अफगानिस्तान के हाथों 94 रनों से हार का सामना करना पड़ा था. दूसरी ओर बांग्लादेशी टीम ने मौजूदा टूर्नामेंट में दमदार आगाज किया है. टारगेट का पीछा करते हुए बांग्लादेश की शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही. परवेज हुसैन इमोन 19 रनों के निजी स्कोर पर आयुष शुक्ला का शिकार बने. वहीं दूसरे सलामी बल्लेबाज तंजीद हसन तमीम (14 रन) को अतीक इकबाल ने पवेलियन भेजा. यहां से कप्तान लिटन दास और तौहीद हृदोय ने 95 रनों की पार्टनरशिप करके बांग्लादेश का काम आसान कर दिया. लिटन दास ने 6 चौके और एक छक्के की मदद से 39 बॉल पर 59 रन बनाए. वहीं हृदोय ने 36 गेंदों का सामना करते हुए 1 चौके की मदद से नाबाद 35 रनों का योगदान दिया. विकेट पतन: 24-1 (परवेज हुसैन इमोन, 2.6 ओवर), 47-2 (तंजीद हसन तमीम, 5.4 ओवर), 142-3 (लिटन दास, 17.1 ओवर) ऐसी रही हॉन्ग कॉन्ग की बल्लेबाजी टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी हॉन्ग कॉन्ग की टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने दूसरे ही ओवर में अंशुमान रथ (4 रन) का विकेट गंवा दिया, जो तस्कीन अहमद का शिकार बने. फिर अनुभवी बल्लेबाज बाबर हयात (14 रन) को तंजीम हसन साकिब ने बोल्ड कर दिया. यहां से जीशान अली और निजाकत खान के बीच तीसरे विकेट के लिए 41 रनों की पार्टनरशिप हुई. जीशान ने 3 चौके और एक छक्के की मदद से 34 गेंदों पर 30 रन बनाए. जीशान को तंजीम हसन साकिब ने आउट किया. फिर कप्तान यासिम मुर्तजा और निजाकत खान ने चौथे विकेट के लिए 46 रनों की पार्टनरशिप की, जिसने हॉन्ग कॉन्ग को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. निजाकत ने 40 गेंदों का सामना करते हुए 42 रन बनाए, जिसमें दो चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. वहीं यासिम मुर्तजा ने 2 छक्के और 2 चौके की मदद से 19 बॉल पर 28 रनों का योगदान दिया. बांग्लादेश की ओर से तस्कीन अहमद, तंजीम हसन साकिब और रिशाद हुसैन ने दो-दो विकेट झटके.

PAK की फीकी शुरुआत, बांग्लादेश से पहले मुकाबले में करारी शिकस्त

ढाका  बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 20 जुलाई (रविवार) को ढाका के शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेला गया. इस मुकाबले में मेजबान बांग्लादेश ने पाकिस्तानी टी पर 7 विकेट से धमाकेदार जीत हासिल की. मुकाबले में बांग्लादेश ने 111 रनों का लक्ष्य 15.3 ओवर्स में ही हासिल कर लिया. टी20 सीरीज का अगला मुकाबला 22 जुलाई (मंगलवार) को इसी मैदान पर खेला जाएगा. पहले टी20 में बांग्लादेश की जीत के हीरो रहे सलामी बल्लेबाज परवेज हुसैन इमोन और तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान रहे. परवेज हुसैन इमोन ने 39 गेंदों पर नाबाद 56 रन बनाए, जिसमें 5 छक्के और 3 चौके शामिल रहे. परवेज हुसैन इमोन और तौहीद हृदोय (36 रन) के साथ बीच तीसरे विकेट के लिए 73 रनों की साझेदारी हुई, जिसमें बांग्लादेश का काम आसान कर दिया. गेंदबाजी में बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान ने कमाल कर दिखाया. मुस्ताफिजुर ने 4 ओवर्स में सिर्फ 6 रन देकर 2 विकेट लिए. उन्होंने डेथ ओवर्स में पाकिस्तान की रन गति पर पूरी तरह नियंत्रण रखा. तेज गेंदबाज तस्कीन अहमद ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 22 रन देकर 3 विकेट लिए. पाकिस्तान के लिए किसने बनाए सबसे ज्यादा रन? टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तानी टीम 19.3 ओवर्स में सिर्फ 110 रनों पर सिमट गई. सलामी बल्लेबाज फखर जमां को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं सका. जमां ने 34 बॉल पर 44 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और एक सिक्स शामिल रहा. पाकिस्तानी टीम की हालत इतनी खराब थी कि टॉप-6 में से पांच बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके. पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बीच तालमेल का भी अभाव दिखा. फखर जमां और मोहम्मद नवाज रन आउट हुए. पाकिस्तानी टीम के लिए गेंदबाजी में डेब्यूटेंट सलमान मिर्जा ने लगातार ओवरों में तंजीद हसन और कप्तान लिटन दास को आउट करके उम्मीद जगाई. लेकिन उन्हें बाकी गेंदबाजों का साथ नहीं मिला. फील्डिंग में चूक भी पाकिस्तानी टीम को भारी पड़ा. तौहीद हृदोय को दो बार जीवनदान मिला, जिससे बांग्लादेश मैच में पूरी तरह हावी हो गया और उसने आसान जीत हासिल की. परवेज हुसैन इमोन 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए.    

बांग्लादेश में रैली के दौरान खूनी संघर्ष, 4 की मौत, कई घायल, अवामी लीग ने कहा- सेना ने निहत्थों पर चलाई गोलियां

ढाका  लंबे वक्त से अशांत चल रहे बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा और झड़प की घटनाएं हुई हैं। बुधवार को गोपालगंज में National Citizen Party (NCP) नेशनल सिटीजन पार्टी की एक रैली में हिंसा भड़क उठी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई। गोपालगंज बांग्लादेश की निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का होमटाउन भी है। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, मृतकों की पहचान गोपालगंज शहर के उदयन रोड के संतोष साहा के 25 वर्षीय पुत्र दीप्तो साहा, रमज़ान काज़ी, 18, 30 साल के सोहेल राणा और 24 साल के इमोन हैं।  ये हिंसा गोपालगंज में शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाली छात्रों की पार्टी एनसीपी के आंदोलन से पहले हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को गोपालगंज वर्चुअल रणक्षेत्र में तब्दील रहा. यहां दिन भर आगजनी, हिंसा और फायरिंग होती रही. डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों को गोली लगने के बाद घायल अवस्था में गोपालगंज जनरल अस्पताल लाया गया था. उन्होंने बताया कि गोली लगने से घायल नौ और लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.  गोपालगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की चार अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं. यहां सड़कों पर टैंक गश्त लगा रही हैं. अधिकारियों ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.  बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में बुधवार रात 8 बजे से 22 घंटे का कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा है कि एनसीपी पर हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बांस के डंडों और ईंट-पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों की पुलिस और सेना और अर्धसैनिक बल बीजीबी सहित सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई. ढाका ट्रिब्यून के अनुसार एनसीपी गोपालगंज में म्यूनिसिपल पार्क में एक जनसभा कर रही थी, तभी कथित तौर पर अवामी लीग और उसकी प्रतिबंधित छात्र शाखा के कार्यकर्ताओं ने भीड़ पर हमला कर दिया.  बता दें कि बाग्लादेश में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) एक नई राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन 28 फरवरी 2025 को हुआ. यह पार्टी अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद शुरू हुए छात्र-नेतृत्व वाले "मॉनसून क्रांति" और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट (ADSM) से उभरी. NCP का नेतृत्व नाहिद इस्लाम नाम का छात्र नेता कर रहा है. नाहिद इस्लाम और उसकी पार्टी बांग्लादेश को मुजीबवाद से मुक्ति का नारा देते हैं.  एनसीपी नेता ने दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि गोपालंगज में सब कुछ नियंत्रण में है, हालांकि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा नहीं था. इससे पहले दोपहर करीब 1:45 बजे लगभग 200-300 स्थानीय अवामी लीग समर्थक लाठी-डंडों के साथ सीएनपी रैली स्थल पर पहुंचे. जब हमला शुरू हुआ तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पास के अदालत परिसर में शरण लेते देखे गए. कार्यक्रम स्थल पर मौजूद एनसीपी नेता और कार्यकर्ता भी तुरंत वहां से चले गए. एनसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हमला करने वाले अवामी लीग के समर्थक हैं. हिंसा पर अवामी लीग ने क्या कहा? वहीं अवामी लीग का आरोप है कि इस हिंसा को बांग्लादेश की सेना और एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है. अवामी लीग ने एक्स पर लिखा है, "बिना किसी डर के बांग्लादेशी सेना ने गोपालगंज में एक नागरिक को प्रताड़ित किया. तस्वीर में उसे घसीटते हुए लेते जाया देखा जा सकता है, ताकि पूरे देश में भय का माहौल पैदा किया जा सके.  अवामी लीग का कहना है यह बदकिस्मत नागरिक उन हजारों लोगों में शामिल था जो यूनुस शासन द्वारा राज्य प्रायोजित दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, जिसमें हत्या, मनमानी गिरफ़्तारियां, नजरबंदी, अपराध की बढ़ती लहर और देश के संस्थापक पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े प्रतीकों को उनके जन्मस्थान गोपालगंज से मिटाने की नवीनतम साजिश शामिल थी.  शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा कि यूनुस और इस्लामिक उपद्रवियों द्वारा समर्थित भीड़ द्वारा फैलाई गई अपराध की लहर के सामने सशस्त्र बलों की पूर्ण निष्क्रियता की वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम जोर देकर कहते हैं कि इस क्रूर कार्रवाई के साथ बांग्लादेशी सेना ने दिखा दिया है कि उसने अपनी तटस्थता त्याग दी है. अवामी लीग ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और सेना द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने और बंगबंधु की विरासत की रक्षा के लिए खड़े हुए नागरिकों की हत्या करने के बाद एनसीपी नेताओं ने एक कदम और आगे बढ़कर "अवामी लीग" कहे जाने वाले किसी भी व्यक्ति का सफाया करने का आह्वान किया. अवामी लीग ने सेना द्वारा फायरिंग और हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. 'मुजीबवाद से मुक्ति दिलाएंगे' इस हमले के बाद एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम और एनसीपी के दूसरे नेता हसनत अब्दुल्ला ने "मुजीब की विरासत" के अवशेषों को मिटाने का वादा किया. एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने घोषणा की कि अगर उनके रैली स्थल पर हुए हमले के लिए तुरंत न्याय नहीं मिला, तो उनकी पार्टी अपने हाथों से "गोपालगंज को मुजीबवाद से मुक्त" कराने के लिए वापस आएगी. इस्लाम ने कहा, "अगर पुलिस बल विफल रहे तो हम न्याय ज़रूर दिलाएंगे" एनसीपी के एक दूसरे नेता ने कहा एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "गोपालगंज में हत्यारी हसीना के एजेंटों ने हम पर हमला किया है. पुलिस बस खड़ी है, तमाशा देख रही है और पीछे हट रही है." बेशक कोई नहीं बख्शे जाएंगे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में की हिंसा पूरी तरह से अक्षम्य है. युवा नागरिकों को उनके क्रांतिकारी आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए शांतिपूर्ण रैली आयोजित करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का शर्मनाक उल्लंघन है. मोहम्मद यूनुस के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि, "यह जघन्य कृत्य जिसे कथित तौर पर प्रतिबंधित अवामी लीग के छात्र लीग के सदस्यों और एएल कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है, बेशक बख्शे नहीं जाएंगे. अपराधियों की शीघ्र पहचान की जानी चाहिए और उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. बांग्लादेश के किसी भी नागरिक के खिलाफ इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है." बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से अपदस्थ किए जाने के एक साल पूरे होने … Read more