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शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस पर किया तीखा हमला, सरकार को उखाड़ने का किया आह्वान

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि देश आतंक के दौर में डूब गया है. बांग्लादेश के इलाके और रिसोर्स को विदेशी हितों के लिए बेचने की एक धोखेबाजी भरी साजिश चल रही है. उन्होंने देश के लोगों से 'यूनुस सरकार को उखाड़ फेंकने' की अपील की. ​​बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की गतिविधियों पर बैन लगा दिया गया है. इसका रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया गया है. बांग्लादेश आज एक खाई के किनारे पर खड़ा है, एक देश जो बुरी तरह से तबाह और खून से लथपथ है. देश अपने इतिहास के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रहा है. राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में सबसे बड़े मुक्ति संग्राम में जीती गई मातृभूमि, अब कट्टरपंथी सांप्रदायिक ताकतों और विदेशी अपराधियों के भयानक हमले से तबाह हो रही है. हमारी कभी शांत और उपजाऊ जमीन एक घायल, खून से लथपथ जगह में बदल गई है. सच तो यह है कि पूरा देश एक बड़ी जेल, फांसी की जगह, मौत की घाटी बन गया है.' उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में चलाए गए एक पहले से रिकॉर्ड किए गए ऑडियो मैसेज में कहा. अगस्त 2024 में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद देश आने के बाद शेख हसीना का भारत में किसी सभा में यह पहला भाषण था. उन्होंने कहा कि हर जगह सिर्फ तबाही के बीच जिंदा रहने के लिए जूझ रहे लोगों की चीखें सुनाई देती हैं. जिंदगी के लिए एक बेताब गुहार, राहत के लिए दिल दहला देने वाली चीखें. हत्यारे फासिस्ट यूनुस, एक सूदखोर, एक मनी लॉन्ड्रर, एक लुटेरा, और एक भ्रष्ट, सत्ता का भूखा गद्दार ने अपने हर तरह के तरीकों से हमारे देश को सुखा दिया है, हमारी मातृभूमि की आत्मा को दागदार कर दिया है. 5 अगस्त, 2024 को, एक सोची-समझी साजिश में देश के दुश्मन, हत्यारे फासिस्ट यूनुस और उसके देश-विरोधी उग्रवादी साथियों ने मुझे जबरदस्ती हटा दिया, हालाँकि मैं सीधे तौर पर चुनी हुई जनता की रिप्रेज़ेंटेटिव हूँ. उस दिन से देश आतंक के एक ऐसे दौर में धकेल दिया गया है, जो बेरहम और दम घोंटने वाला है. डेमोक्रेसी अब देश निकाला में है. उन्होंने कहा, 'मानव अधिकार को रौंद दिया गया है. प्रेस की आजादी खत्म कर दी गई है. हिंसा, प्रताड़ना, और यौन उत्पीड़न बढ़ा है. महिलाओं और लड़कियों पर कोई रोक-टोक नहीं है. जान-माल की कोई सुरक्षा नहीं है. धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार जुल्म का सामना करना पड़ता है. कानून-व्यवस्था खत्म हो गई है.' अवामी लीग की लीडर ने कहा कि उग्रवादी चरमपंथियों के पागलपन ने पूरे देश में डर का माहौल बना दिया है. राजधानी से लेकर दूर-दराज के गांवों तक, भीड़ का आतंक, बड़े पैमाने पर लूटपाट, हथियारों के साथ डकैती और जबरन वसूली का बोलबाला है. हमारे सीखने के इंस्टीट्यूशन में अफरा-तफरी मची हुई है, और इंसाफ एक बुरा सपना बन गया है. इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि बांग्लादेश के इलाके और रिसोर्स को विदेशी हितों के लिए बेचने की एक धोखेबाजी भरी साजिश चल रही है. देश के साथ धोखा करके, खूनी फासीवादी यूनुस हमारी प्यारी मातृभूमि को एक मल्टीनेशनल लड़ाई की भट्टी की ओर धकेल रहा है. शेख हसीना ने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में, पूरे देश को एक साथ उठना चाहिए और हमारे महान लिबरेशन वॉर की भावना से जोश में आना चाहिए. उन्होंने यूनुस को 'राष्ट्रीय शत्रु' कहा. उन्होंने कहा, 'इस देश के दुश्मन की विदेशियों की कठपुतली सरकार को किसी भी कीमत पर उखाड़ फेंकने के लिए, बांग्लादेश के बहादुर बेटे-बेटियों को शहीदों के खून से लिखे संविधान की रक्षा करनी होगी और उसे फिर से बनाना होगा, अपनी आजादी वापस लेनी होगी, अपनी संप्रभुता की रक्षा करनी होगी और अपनी डेमोक्रेसी को फिर से जिंदा करना होगा. उन्होंने आगे कहा, 'आइए, हम सभी डेमोक्रेटिक सरकार बनाने और हत्यारे फासीवादी और उसके साथियों के धोखेबाज इरादों का जल्द से जल्द सामना करने की कसम खाएं. शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश 'एक बिना चुने हुए हिंसक सरकार से दबा हुआ है, जिसके झूठे वादों की जगह जल्द ही अफरा-तफरी, हिंसा, नफरत और भ्रष्टाचार ने ले ली है.' उन्होंने कहा, 'अराजकता और आपके डेमोक्रेटिक अधिकारों के कम होने का सामना करते हुए, आपकी हिम्मत और ताकत का रोज टेस्ट होता है. प्लीज अब हार न मानें. शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग आजाद बांग्लादेश की सबसे पुरानी और सबसे जरूरी पॉलिटिकल पार्टी है, जो अजीब तरह से हमारे देश की संस्कृति और लोकतंत्र से जुड़ी हुई है. बांग्लादेश की पॉलिटिकल और धार्मिक बहुलवाद की शानदार परंपराओं की रक्षक है. हमारे कानूनों और संविधान की पक्की समर्थक है. हमारे देश के पुरुषों और महिलाओं के लिए इस सबसे बुरे समय में हम आपसे छीनी गई उस खुशहाल मातृभूमि को वापस लाने में आपकी मदद करने का अपना पक्का इरादा दोहराते हैं. उन्होंने कहा, 'सबसे पहले गैर-कानूनी यूनुस सरकार को हटाकर डेमोक्रेसी वापस लाएं. जब तक बांग्लादेश के लोगों से यूनुस गुट का साया नहीं हटता, तब तक बांग्लादेश में कभी भी निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे. तभी हम अवामी लीग के साथ मिलकर लोगों को पावर वापस दिलाने का प्रोसेस शुरू कर सकते हैं. दूसरा, हमारी सड़कों पर रोजाना होने वाली हिंसा को खत्म करें. हमें देश को स्थिर करने, सिविक सर्विसेज को ठीक से काम करने देने और एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कानून-व्यवस्था को खत्म करना होगा, जिस पर हमारी इकॉनमी एक बार फिर फल-फूल सके. तीसरा, धार्मिक माइनॉरिटी ग्रुप्स, महिलाओं और लड़कियों, और हमारे समाज के सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा पक्की करने वाली पक्की गारंटी दें. उन्होंने कहा, 'अक्सर हम देखते हैं कि लोगों को उनकी पहचान और उनके विश्वास की वजह से टारगेट किया जाता है. यह खत्म होना चाहिए, और हर बांग्लादेशी को अपने समुदाय में सुरक्षित महसूस करना चाहिए. चौथा, पत्रकारों और बांग्लादेश अवामी लीग और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों को डराने, चुप कराने और जेल में डालने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली राजनीति से प्रेरित कानूनी कार्रवाई को खत्म करें. न्याय व्यवस्था में हमारा भरोसा वापस लाएं, … Read more

यूनुस के लिए बढ़ी टेंशन, अमेरिका ने आवामी लीग बैन हटाने पर की रोक, शेख हसीना की वापसी की अटकलें तेज

ढाका  बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले शेख हसीना की वापसी का रास्ता बनता दिख रहा है. मोहम्मद यूनुस की तानाशाही के खिलाफ अंतरिम सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज हो गया है. अमेरिका के प्रभावशाली सांसदों के एक समूह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यूनुस को शेख हसीना की पार्टी वामी लीग से बैन हटाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो यह चुनाव न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू मीक्स, बिल हुईजेंगा और सिडनी कैमलागर-डोव ने मंगलवार को बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को एक औपचारिक पत्र भेजा. इस पत्र में उन्होंने कहा कि किसी पूरे राजनीतिक संगठन पर प्रतिबंध लगाना लाखों मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से वंचित कर सकता है. अमेरिकी सांसदों ने यह पत्र ऐसे समय में भेजा है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जुलाई विद्रोह के बाद अवामी लीग और उसकी छात्र इकाई बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगा रखा है. सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय संकट के दौरान अंतरिम सरकार की भूमिका को समझते हैं, लेकिन किसी पार्टी को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना बुनियादी मानवाधिकारों और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी के सिद्धांत के खिलाफ है.पत्र में यह भी चेतावनी दी गई कि राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) को दोबारा उसी पुराने स्वरूप में शुरू करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है. अमेरिका से यूनुस ने की थी बात अमेरिकी सांसदों ने जोर दिया कि चुनाव ऐसा होना चाहिए जिसमें जनता शांतिपूर्ण तरीके से बैलेट के जरिए अपनी इच्छा व्यक्त कर सके और सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता पर भरोसा बहाल हो. यह पत्र ऐसे समय आया है जब यूनुस ने अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में व्यापार, टैरिफ, चुनाव, लोकतांत्रिक संक्रमण और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या पर चर्चा हुई. यूनुस ने कहा कि देश 12 फरवरी को चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और अंतरिम सरकार स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करेगी. शेख हसीना की बैकडोर से एंट्री! राजनीति में कहा जाता है कि नेता पद छोड़ सकता है, देश छोड़ सकता है, लेकिन उसका सियासी वजूद रातों-रात खत्म नहीं होता. बांग्लादेश में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भले ही देश से दूर हों, लेकिन उनकी पार्टी अवामी लीग का बेस इतना बड़ा है कि उसे बांग्लादेश के नक्शे से मिटाना नामुमकिन साबित हो रहा है. शेख हसीना को सत्‍ता से हटाने में अहम भूमिका न‍िभाने वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने चौंकाने वाला दावा किया है. उनका कहना है क‍ि शेख हसीना की पार्टी के नेता अब दूसरी पार्टियों के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में लौटने की तैयारी कर रहे हैं. इसे शेख हसीना की बैकडोर एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है. नाहिद इस्लाम के दावों ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. 5 अगस्त के बदलाव के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं. पार्टी के कई बड़े नेताओं पर मुकदमे दर्ज हैं. लेकिन अवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टियों में से एक है, जिसका हर गांव और कस्बे में अपना एक मजबूत वोट बैंक और कार्यकर्ता नेटवर्क है. नाहिद इस्लाम का दावा है कि विपक्षी पार्टियां खासकर खाल‍िदा ज‍िया की पार्टी बीएनपी और जमात-ए-इस्‍लामी अवामी लीग के इस विशाल वोट बैंक की ताकत को समझती हैं. द डेली स्टार के एक कार्यक्रम में नाहिद ने कहा, इन वोटों को अपने पाले में करने के लिए पर्दे के पीछे एक खेल चल रहा है. दूसरी पार्टियां अवामी लीग के नेताओं को ऑफर दे रही हैं कि अगर वे उनका समर्थन करें, तो उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे या उन्हें सुरक्षा दी जाएगी. शेख हसीना के शुरू हो गए अच्छे दिन बांग्लादेश में चारों तरफ से बरस रही नफरत की आग के बीच एक ही नाम गूंज रहा है और वो है ‘शेख हसीना’ का…यहां के उग्रवादी पूर्व प्रधानमंत्री की वापसी की डिमांड कर रहे हैं. हालांकि, शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि वो किसी धमकी से घबराती नहीं हैं, इस बीच चुपके से उनकी धमाकेदार वापसी की शुरुआत हो चुकी है. देश की एक बड़ी पोस्ट पर शेख हसीना का करीबी बैठ गया है. ये वही पोस्ट है जहां से शेख हसीना के खिलाफ लिए गए कई कानूनी एक्शन कैंसिल हो सकते हैं लेकिन अभी ऐसा कोई ऐलान नहीं हुआ है. कौन हैं शेख हसीना के करीबी? बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश में फांसी की सजा तक सुनाई जा चुकी है और उन्हें फंदे पर लटकाने के लिए मौजूदा सरकार बार-बार उनके प्रत्यर्पण की डिमांड कर रही है. बांग्लादेश में तबाही मचा रहे आंदोलनकारी भी शेख हसीना का ही नाम जप रहे हैं. इन सबके बीच हाल ही में यूनुस की आखों के सामने हसीना के करीबी जुबैर रहमान चौधरी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की कुर्सी पर जाकर बैठ गए हैं. बांग्लादेश राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने उनके नियुक्ति पत्र पर मुहर लगी है और बात पक्की हो चुकी है. कैसे दिखाई शेख हसीना के प्रति वफादारी? बताया जा रहा है कि अब जुबैर रहमान 27 दिसंबर को कुर्सी पर बैठेंगे और इसके बाद अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे. माना जा रहा है कि इस तारीख के बाद से शेख हसीना की देश में धमाकेदार वापसी की शुरुआत हो सकती है. अभी भले ही ऐसा कोई इशारा नहीं मिला है लेकिन रहमान, शेख हसीना के करीबी माने जाते हैं. बताया जाता है कि तख्तापलट के बाद से अपीलीय न्यायालय प्रभाग के न्यायाधीश पद पर रहते हुए रहमान के पास शेख हसीना के खिलाफ कई केसेस आए लेकिन उन्होंने ज्यादातर पर फैसला नहीं दिया. शेख हसीना के राज में क्या हुआ था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के राज में ही जुबैर का कद बढ़ा है. साल 2003 में जुबैर को जज के तौर पर पहली नियुक्ति मिली थी … Read more

पूर्व पीएम शेख हसीना ने कही चौंकाने वाली बात, अपनी सुरक्षा के चलते बांग्लादेश नहीं जाएंगी

नई दिल्ली ई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार को चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच देश लौटने की मांग को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई पॉलिटिक्स से प्रेरित है और उन्होंने जोर देकर कहा कि वह मौजूदा हालात में वापस नहीं जाएंगी, जबकि पिछले हफ्ते बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या समेत नई अशांति देखी गई.     हसीना ने कहा, "आप मेरी पॉलिटिकल हत्या का सामना करने के लिए मेरी वापसी की मांग नहीं कर सकते."  उन्होंने दोहराया कि उन्होंने चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस को यह मामला हेग ले जाने की चुनौती दी है, और भरोसा जताया कि एक इंडिपेंडेंट कोर्ट उन्हें बरी कर देगा. उन्होंने कहा कि वह तभी लौटेंगी, जब बांग्लादेश में एक कानूनी सरकार और एक इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियरी होगी. ANI के साथ एक ईमेल इंटरव्यू में अपनी बात बताते हुए, हसीना ने कहा कि इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) का फैसला कोई कानूनी काम नहीं था, बल्कि एक पॉलिटिकल काम था, और इसे "न्यायालय की आड़ में पॉलिटिकल हत्या" बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपना बचाव करने और अपनी पसंद के वकील अपॉइंट करने के अधिकार से वंचित किया गया, और आरोप लगाया कि ट्रिब्यूनल का इस्तेमाल "अवामी लीग का विच हंट" करने के लिए किया गया था. इन आरोपों के बावजूद, हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के संवैधानिक ढांचे पर उनका भरोसा कायम है. उन्होंने कहा, "हमारी संवैधानिक परंपरा मजबूत है, और जब कानूनी शासन बहाल होगा और हमारी ज्यूडिशियरी अपनी आजादी वापस पा लेगी, तो न्याय की जीत होगी." उनकी यह टिप्पणी नवंबर में बांग्लादेश की एक अदालत के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें हसीना को जुलाई-अगस्त 2024 के विद्रोह के संबंध में "मानवता के खिलाफ अपराधों" का दोषी पाया गया था. स्थानीय मीडिया ने बताया कि इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने मौत की सजा दी थी. ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के सभी पांच आरोपों में दोषी ठहराया. रिपोर्ट में कहा गया है कि फैसले का निष्कर्ष यह था कि हसीना ने पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के साथ मिलकर जुलाई-अगस्त आंदोलन के दौरान अत्याचारों को अंजाम दिया और उन्हें होने दिया. कानूनी कार्रवाई और हाल की हिंसा के इस बैकग्राउंड में, हसीना ने मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन पर लोकतांत्रिक वैधता की कमी और संस्थाओं को कमजोर करके और चरमपंथी तत्वों को मजबूत बनाकर देश को अस्थिरता की ओर ले जाने का आरोप लगाया. उन्होंने फरवरी में होने वाले चुनावों की क्रेडिबिलिटी पर भी सवाल उठाया, और अवामी लीग पर लगातार बैन का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "अवामी लीग के बिना चुनाव, चुनाव नहीं, बल्कि ताजपोशी है." उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस "बांग्लादेशी लोगों के एक भी वोट के बिना" सरकार चला रहे हैं, जबकि वे एक ऐसी पार्टी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने 9 नेशनल जनादेश जीते हैं. हसीना ने चेतावनी दी कि जब लोगों को अपनी पसंदीदा पार्टी को वोट देने का ऑप्शन नहीं दिया जाता, तो वोटर पार्टिसिपेशन हमेशा खत्म हो जाता है, जिससे बड़े पैमाने पर वोटिंग से वंचित होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में बनने वाला कोई भी एडमिनिस्ट्रेशन, मोरल अथॉरिटी की कमी महसूस करेगा और असली नेशनल मेल-मिलाप का मौका गंवा देगा. उन्होंने कहा कि ICT के फैसले ने उनके एक्सट्रैडिशन की मांग भी शुरू कर दी है, जिसे उन्होंने "तेजी से हताश और भटकते हुए यूनुस एडमिनिस्ट्रेशन" की तरफ से आने वाला बताकर खारिज कर दिया, जबकि दूसरे लोग इस कार्रवाई को पॉलिटिक्स से चलाया जा रहा "कंगारू ट्रिब्यूनल" मानते हैं. उन्होंने भारत की लगातार मेहमाननवाजी और पूरे भारत में राजनीतिक पार्टियों से मिले सपोर्ट के लिए शुक्रिया अदा किया. बांग्लादेश से निकलने के बारे में बताते हुए, हसीना ने कहा कि वह और खून-खराबा रोकने के लिए निकलीं, न कि इसलिए कि उन्हें जवाबदेही का डर था. इलाके के हालात को ध्यान में रखते हुए, हसीना ने भारत-बांग्लादेश के बिगड़ते रिश्तों पर बात की, जिसमें ढाका का भारतीय राजदूत को बुलाने का फैसला भी शामिल है. उन्होंने अंतरिम सरकार पर भारत के खिलाफ दुश्मनी भरे बयान जारी करने, धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रहने और कट्टरपंथियों को विदेश नीति पर असर डालने देने का आरोप लगाया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से बांग्लादेश का सबसे भरोसेमंद पार्टनर रहा है और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते गहरे और टिकाऊ हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि एक बार सही सरकार बहाल हो जाने पर रिश्ते स्थिर हो जाएंगे. भारत के खिलाफ बढ़ती भावना और भारतीय डिप्लोमैट्स की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर बात करते हुए, हसीना ने कहा कि यह दुश्मनी यूनुस राज में हिम्मत बढ़ाए गए कट्टरपंथियों की वजह से है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन ग्रुप्स ने भारतीय दूतावास, मीडिया ऑर्गनाइज़ेशन और अल्पसंख्यकों पर हमला किया था, और यूनुस ने दोषी आतंकवादियों को रिहा करते हुए ऐसे लोगों को बड़े पदों पर बिठाया था. उन्होंने कहा कि अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताएं सही हैं, और कहा कि एक जिम्मेदार सरकार डिप्लोमैटिक मिशनों की सुरक्षा करेगी और धमकी देने वालों पर केस चलाएगी, न कि उन लोगों को बचाएगी जिन्हें उन्होंने गुंडे बताया. शरीफ उस्मान हादी की हत्या का जिक्र करते हुए, हसीना ने कहा कि इस घटना से पता चलता है कि उन्हें हटाने के बाद कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है, और उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार के तहत स्थिति और खराब हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि हिंसा आम बात हो गई है, जिससे बांग्लादेश अंदर से अस्थिर हो रहा है और पड़ोसी देश परेशान हैं.     उन्होंने कहा, "जब आप अपनी सीमाओं के अंदर बेसिक व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते, तो इंटरनेशनल लेवल पर आपकी क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाती है." और इसे "यूनुस के बांग्लादेश की सच्चाई" बताया. हसीना ने कट्टरपंथी इस्लामी ग्रुप्स के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई, आरोप लगाया कि यूनुस ने कैबिनेट में कट्टरपंथियों को अपॉइंट किया है. दोषी आतंकवादियों को रिहा किया है और इंटरनेशनल टेरर नेटवर्क से जुड़े संगठनों को पब्लिक लाइफ में काम करने दिया है. … Read more

फांसी और 21 साल की कैद के बाद अब नई सजा—शेख हसीना पर कानूनी शिकंजा और कसा

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना को सोमवार को ढाका की एक विशेष अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। इससे पहले इस साल (2025) ही International Crimes Tribunal ने हसीना को “क्राइम्स एगेन्स्ट ह्यूमैनिटी” (2024 छात्र-आन्दोलन खूनखराबे) के लिए फांसी सुनाई थी। और इसके कुछ दिन बाद ही  ढाका कोर्ट  Special Judge Court-5   ने हाल ही में Sheikh Hasina को तीन भ्रष्टाचार-मामलों  में 21 साल की जेल की सजा सुनाई है।जमीन घोटाला मामले में   अदालत ने कुल तीन लोगों को दोषी करार ोदिया है । शेख हसीना (पूर्व प्रधानमंत्री), शेख रेहाना (हसीना की बहन),तुलिप रिजवाना सिद्दीक (शेख रेहाना की बेटी व ब्रिटिश सांसद)। ये तीनों राजुक (RAJUK) द्वारा किए गए प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में दोषी पाए गए।  क्या है पूरा मामला?     यह मामला पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट से संबंधित है, जो ढाका के पास राजुक द्वारा विकसित एक बड़ा आवासीय प्रोजेक्ट है।     आरोप था कि हसीना और उनके परिवार ने अपने प्रभाव का उपयोग करके इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में प्लॉट अवैध तरीके से हासिल किए।     मामला कई सालों से जांच में था, और हाल ही में गवाही व दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।   अदालत का निर्णय ढाका की विशेष अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया  और तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने कारावास की सजा सुनाई, जिसकी अवधि को लेकर आधिकारिक बयान विस्तृत रूप से सार्वजनिक होना बाकी है । हसीना पहले से ही कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनके खिलाफ विभिन्न आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले चल रहे हैं। अब एक और मामले में दोषी ठहराया जाना उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति को कमजोर करता है। तुलिप सिद्दीक जो ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सांसद हैं का नाम इस फैसले में शामिल होने से यह मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। ब्रिटेन की राजनीति और मीडिया में भी इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अवामी लीग के नेताओं ने इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया है। उनका कहना है कि विपक्षी सरकार हसीना परिवार को “कमजोर करने” की कोशिश कर रही है।मामले के जानकारों के अनुसार  हसीना की कानूनी टीम उच्च अदालत में अपील दाखिल करेगी। अगर सजा बरकरार रहती है तो हसीना और उनका परिवार लंबे समय तक राजनीतिक संकट में रह सकता है।  

बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना के लॉकर पर कार्रवाई, एजेंसियों का दावा—सोना और कीमती गिफ्ट मिले

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हाल ही में मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस फैसले के आधार पर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी भारतसरकार से की थी. बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की मुश्किलें कम होती नहीं नजर आ रहीं. शेख हसीना की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं. बांग्लादेश के एंटी करप्शन कमीशन (एसीसी) शेख हसीना के खिलाफ अब भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के नए मामले दर्ज करने की तैयारी में है. एसीसी ने शेख हसीना से संबंधित संपत्तियों की जांच तेज कर दी है. बांग्लादेश की सेंट्रल इंटेलिजेंस सेल और नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने हाल ही में शेख हसीना के बैंक लॉकर्स की जांच की थी. बांग्लादेशी एजेंसियों का दावा है कि शेख हसीना के दो लॉकर्स से नौ किलो से अधिक सोने के गहने और पीएम पद पर रहते हुए मिले महंगे गिफ्ट मिले हैं. शेख हसीना के लॉकर्स में सोने के गहने और महंगे गिफ्ट्स के साथ ही कई कीमती वस्तुएं भी मिली हैं. बांग्लादेशी अधिकारियों का यह भी कहना है कि इनमें से कई वस्तुओं को प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए या उसके बाद, घोषित नहीं किया गया था. एसीसी अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच की तैयारी में है. एसीसी की जांच का फोकस आय के स्रोत पर होगा. एजेंसी यह भी देखेगी कि इन संपत्तियों को पूर्व पीएम ने वैध प्रक्रिया के अनुसार अपनी संपत्ति घोषित की थी या नहीं. एसीसी इस बात की भी जांच करेगी कि शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहते क्या किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई थी? सूत्रों की मानें तो एसीसी पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ दो-तीन नए केस दर्ज करने की तैयारी में है. गौरतलब है कि छात्रों के आरक्षण विरोधी आंदोलन के बाद शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी थी. मोहम्मद युनूस की अगुवाई में अंतरिम सरकार के गठन के बाद शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है. बांग्लादेश में हालात ऐसे हैं कि अवामी लीग का लगभग हर प्रमुख नेता किसी न किसी मामले में वित्तीय जांच के दायरे में है. शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले अंतरिम सरकार में खोल दिए गए हैं. पहले से ही मुश्किलों में घिरीं शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं की मुश्किलें नए केस से और बढ़ सकती हैं.

पीएम मोदी की सराहना करते हुए हसीना के बेटे ने कहा—भारत ने मेरी मां को सुरक्षित रखा

नई दिल्ली / ढाका बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने भारत और पीएम मोदी की तारीफ की है. सजीब वाजेद ने पिछले साल बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान अपनी मां शेख हसीना की हत्या के प्रयास को रोकने का क्रेडिट भारत को दिया है. शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि भारत की वजह से उनकी मां की जान बची है. उन्होंने यूनूस सरकार और उनकी बांग्लादेशी न्यायिक प्रक्रिया की आलोचना की है. बांग्लादेश में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है. अमेरिका के वर्जीनिया में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने बांग्लादेश की मौजूदा यूनूस सरकार पर कानूनों में हेरफेर करने, जजों को बर्खास्त करने और शेख हसीना को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘भारत हमेशा एक अच्छा दोस्त रहा है. संकट के समय भारत ने मूल रूप से मेरी मां की जान बचाई है. अगर वह बांग्लादेश नहीं छोड़तीं, तो आतंकवादियों ने उन्हें मारने की योजना बनाई थी.’ ‘मोदी सरकार का आभारी’     उन्होंने शेख हसीना के अगस्त 2024 में भारत भागने का जिक्र करते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का हमेशा आभारी रहूंगा कि उन्होंने मेरी मां की जान बचाई. बता दें कि 5 अगस्त को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था. उस वक्त प्रदर्शनकारी उनके आवास तक घुस गए थे. आनन-फानन में वो जान बचाकर भारत आई थीं. तब से वह भारत में ही रह रही हैं. यूनुस पर खूब बरसे हसीना के बेटे शेख हसीना को मौत की सजा वाली कार्यवाही को बेटे वाजेद ने एक राजनीतिक नाटक बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हर चरण में उचित प्रक्रिया को दरकिनार किया है. उन्होंने कहा, ‘प्रत्यर्पण के लिए न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है. बांग्लादेश में एक सरकार है जो निर्वाचित नहीं है, असंवैधानिक और अवैध है. मेरी मां को दोषी ठहराने के लिए उन्होंने कानूनों में संशोधन किया ताकि उनके मुकदमे को तेजी से निपटाया जा सके. इसलिए ये कानून अवैध रूप से संशोधित किए गए.’ ‘जजों को बदला गया’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी मां को अपने बचाव के वकीलों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं दी गई. उनके वकीलों को अदालतों में भी प्रवेश नहीं करने दिया गया.’ उन्होंने आगे दावा किया कि न्यायाधिकरण की संरचना को एक पूर्वनिर्धारित फैसले को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था. शेख हसीना के बेटे ने कहा, ‘मुकदमे से पहले अदालत में सत्रह जजों को बर्खास्त कर दिया गया, नए न्यायाधीश नियुक्त किए गए, जिनमें से कुछ को बेंच पर कोई अनुभव नहीं था और वे राजनीतिक रूप से जुड़े हुए थे. इसलिए कोई उचित प्रक्रिया नहीं थी. प्रत्यर्पण के लिए उचित प्रक्रिया होनी चाहिए.’

शेख हसीना को मौत की सजा पर बांग्लादेश में बवाल, स्थानीय हिंसा में दो लोगों की जान गई

ढाका  बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले साल हुई हिंसा मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पड़ोसी देश एक बार फिर उबल पड़ा है। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृहमंत्री और शेख हसीना को सामूहिक हत्या का दोषी करार दिया था। वहीं अब आवामी लीग के समर्थक सड़कों पर उतर पड़े हैं। ढाका की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगहों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थानीय मीडिया की बात करें तो हिंसा में अब तक दो लोगों के मारे जाने की खबर है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार को फैसले के बारे में सारी जानकारी थी। इसीलिए ढाका में पहले ही पुलिस और सैन्य बल की तैनाती कर दी गई थी। मोहम्मद यूनुस के आवास की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद सोमवार को फैसला आने केबाद से ही ढाका की तनाव बढ़ गया है। आवामी लीग का कहना है कि न्यायाधिकरण ने यह फैसला अंतरिम सरकार और सेना के इशारे पर केवल राजनीतिक बदले की भावना से सुनाया है। ऐसे में आवामी लीग ने दो दिन के राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। शेख हसीना को देश की विशेष अदालत 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पिछले वर्ष जुलाई में हुए व्यापक विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड तथा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून को पांच साल की सजा दी है। मामून ने अपराध स्वीकार कर सरकारी गवाह बनने का निर्णय लिया था। न्यायाधिकरण ने हसीना और असदुज्जमां की संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश भी दिया है। फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया क्योंकि शेख हसीना इन दिनों भारत में रह रही हैं। मामून हिरासत में हैं। फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।" अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है। फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।" अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है। बंगलादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से शेख हसीना और असदुज्जमां को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध भेजने की घोषणा की है। मंत्रालय ने कहा कि मानवता के विरुद्ध दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को शरण देना किसी भी देश का गैरदोस्ताना कदम कदम होगा। दोनों देशों के बीच 2016 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया गया है। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बताया कि प्रत्यर्पण का अनुरोध पत्र ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग या नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के माध्यम से भेजा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शेख हसीना के खिलाफ तीन और मामले लंबित हैं, जिन पर निर्णय अभी बाकी है। जुलाई 2024 में आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी से उपजे छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण हसीना सरकार गिर गयी थी। पाँच अगस्त को वह भारत आ गयीं और प्रोफ़ेसर यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोह के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए कई साक्षात्कारों में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि गोलीबारी "बंगलादेश पुलिस के सामान्य हथियारों जैसी नहीं थी"।

ढाका में कूटनीतिक हलचल: शेख हसीना के इंटरव्यू पर बांग्लादेश का विरोध

ढाका  बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हालिया इंटरव्यू को लेकर तल्ख प्रतिक्रिया दी है। भारतीय मीडिया के साथ पूर्व पीएम हसीना का एक इंटरव्यू सामने आया है। इसे लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया। बांग्लादेशी मीडिया ने यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे को तलब कर औपचारिक रूप से नाराजगी जाहिर की। बांग्लादेशी मीडिया ने राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि भारतीय राजनयिक से नई दिल्ली को बांग्लादेश के उस अनुरोध से अवगत कराने को कहा गया था, जिसमें हसीना की मीडिया तक पहुंच रोकने की बात कही गई थी। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि हाल ही में एएफपी, रॉयटर्स और द इंडिपेंडेंट (यूके) ने पूर्व पीएम शेख हसीना का इंटरव्यू लिया था। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ। इस दौरान बांग्लादेश में भारी हिंसा देखने को मिली। पूर्व पीएम शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा। उस समय से पूर्व पीएम भारत में ही रह रही हैं। वहीं, बांग्लादेश में शेख हसीना के ऊपर अपराध और नरसंहार समेत अन्य कई आरोपों में मामला दर्ज है। हसीना ने बीते कुछ समय में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को भी इंटरव्यू दिए हैं। अपने इंटरव्यू के दौरान शेख हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार को जमकर घेरा। बांग्लादेश की सरकार का कहना है कि शेख हसीना के हालिया इंटरव्यू से देश में बवाल मच सकता है। शेख हसीना और दो अन्य के खिलाफ पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के मामले में इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने सजा सुनाने की तारीख पर फैसला सुनाया है। आईसीटी-1 ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ सजा सुनाने की तारीख 17 नवंबर तय की है। जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार, जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद, और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक इनाम चौधरी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय बेंच ने यह तारीख तय की।

बांग्लादेश लौटने को तैयार शेख हसीना! वापसी की रखी बड़ी शर्त, नोबेल विजेता यूनुस पर जमकर बरसीं

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश वापसी की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने इसके लिए शर्तें भी रखी हैं। उनका कहना है कि वे तभी स्वदेश लौटेंगी जब देश में भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र बहाल हो और उनकी पार्टी आवामी लीग पर लगी पाबंदी हटाई जाए। हसीना स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा समावेशी चुनावों की मांग कर रही हैं। यह बयान उस समय आया है जब आवामी लीग ने 13 नवंबर को बड़े पैमाने पर हड़ताल का एलान किया है। भारत के किसी गुप्त स्थान पर रह रही शेख हसीना ने इंटरव्यू में वर्तमान अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर भारत के साथ संबंधों को खराब करने तथा चरमपंथी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अपनी विदेश नीति की तुलना अंतरिम सरकार से करते हुए उन्होंने कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच के 'व्यापक एवं गहन' रिश्तों को यूनुस की मूर्खतापूर्ण कार्रवाइयों का डटकर मुकाबला करना चाहिए। हसीना ने भारत सरकार को शरण प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वे भारत सरकार तथा उसके लोगों के उदार स्वागत के लिए बेहद कृतज्ञ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश लौटने की उनकी प्रमुख शर्त वही है जो बांग्लादेशी जनता की इच्छा है, भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की बहाली। अंतरिम प्रशासन को आवामी लीग पर प्रतिबंध हटाना होगा तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव आयोजित करने होंगे। बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक शासित प्रधानमंत्री रह चुकी हसीना ने 5 अगस्त 2024 को हिंसक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के कई हफ्तों के बाद देश छोड़ दिया था। इस विशाल आंदोलन के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और अंत में भारत पहुंचना पड़ा, जिससे यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन संभव हुआ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी सरकार ने प्रदर्शनों को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया, तो 78 वर्षीय नेता ने कहा कि निश्चित रूप से स्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं थी और यह दुखद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन भयावह घटनाओं से कई सबक मिले हैं, लेकिन कुछ जिम्मेदारी उन तथाकथित छात्र नेताओं की भी है जिन्होंने भीड़ को भड़काया। हसीना ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया कि उन्होंने अगले साल फरवरी के चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आवामी लीग के बिना कोई भी चुनाव वैध नहीं होगा। उनका मानना है कि लाखों लोग उनका समर्थन करते हैं…यह हमारे देश के लिए एक सुनहरा अवसर गंवाना होगा, जहां जनता की सच्ची सहमति से शासन करने वाली सरकार की सख्त जरूरत है। मुझे भरोसा है कि यह मूर्खतापूर्ण प्रतिबंध हटा लिया जाएगा, चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में, आवामी लीग को बांग्लादेश की राजनीतिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनना चाहिए। हसीना ने कहा कि भारत हमेशा से बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार रहा है। उन्होंने यूनुस सरकार पर 'मूर्खतापूर्ण एवं आत्मघाती' कूटनीतिक चूक करके नई दिल्ली के साथ संबंधों को जोखिम में डालने का इल्जाम लगाया। उनका कहना था कि यूनुस की भारत विरोधी नीति मूर्खतापूर्ण और स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाली है, जो उन्हें एक कमजोर शासक के रूप में चित्रित करती है, जो अनिर्वाचित, अव्यवस्थित और चरमपंथियों के भरोसे पर टिका है।