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सरगुजा ओलंपिक में एमसीबी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 8 स्वर्ण सहित 26 पदकों से गूंजा संभाग

सरगुजा ओलंपिक में एमसीबी का ऐतिहासिक प्रदर्शन  8 स्वर्ण सहित 26 पदकों से गूंजा संभाग मो.कासिम जिला प्रतिनिधि एमसीबी  मनेन्द्रगढ़/एमसीबी संभाग स्तरीय सरगुजा ओलंपिक में एमसीबी जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 21 से 23 मार्च तक अंबिकापुर में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में जिले ने 8 स्वर्ण, 14 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर कुल 26 पदकों के साथ अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान अंतरराष्ट्रीय पहलवान गीता फोगाट की प्रेरणादायक मौजूदगी ने खिलाड़ियों में नया उत्साह भरा, वहीं समापन समारोह में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर भाइचुंग भूटिया की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवपूर्ण बना दिया। एमसीबी के खिलाड़ियों ने ट्रैक एंड फील्ड, कुश्ती, कराते और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 100 मीटर दौड़ में टी. होमेश्वर राव ने शानदार गति दिखाई, भाला फेंक में कुमारी अनिता सिंह ने सटीकता का परिचय दिया, ऊंची कूद में आनंद कुमार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जबकि कराते में कुमारी आराधना मार्को और 62 किलोग्राम कुश्ती में सीमा सिंह ने स्वर्ण पदक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया। कबड्डी में भी एमसीबी का दबदबा कायम रहा, जहां जूनियर बालक, जूनियर बालिका और सीनियर बालक वर्ग की टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर टीम वर्क और रणनीति का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया। कांस्य पदक विजेताओं में सुरेंद्र सिंह (कराते 67 किग्रा), शनि लुइश (कुश्ती 57 किग्रा), कंचन सिंह (ऊंची कूद) तथा तीरंदाजी में शिवम, मुकेश और चंदन ने उल्लेखनीय प्रदर्शन कर जिले की उपलब्धियों में योगदान दिया। इस ऐतिहासिक सफलता पर कलेक्टर डी. वेंकट राहुल ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिले की उभरती खेल प्रतिभाओं और उनके कठिन परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। जिला खेल अधिकारी विनोद जायसवाल ने भी इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह सफलता भविष्य में और बड़े लक्ष्यों की दिशा में प्रेरणा बनेगी। एमसीबी की इस उपलब्धि ने न केवल सरगुजा संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में जिले को एक मजबूत खेल शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।

अंदरूनी इलाकों में लौटी पढ़ाई की रौनक, बस्तर के 123 स्कूलों में फिर गूंजी घंटी

सुकमा। नक्सलवाद के काले साये को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का उजाला एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। शासन की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान नक्सलियों के दहशत से बंद हुए सुकमा जिले के सैकड़ों स्कूलों के दरवाजे अब बच्चों के लिए पूरी तरह खुल चुके हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। पुनर्जीवित हुई शिक्षा व्यवस्था दस्तावेज के मुताबिक, वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के कारण कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे। इनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक शालाएं शामिल थीं। प्रशासन के निरंतर प्रयासों से इन सभी स्कूलों को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्तमान में ऐसे स्कूलों की संख्या शून्य है, जो पूर्व में माओवादी प्रभाव के कारण बंद थे। प्रमुख उपलब्धियां और बुनियादी ढांचा शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरस्थ इलाकों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का जाल बिछाया गया है। पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) वर्तमान में 16 पोटा केबिन संचालित हैं, जिनमें 6,722 छात्र दर्ज हैं। छात्रावास सुविधा 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 (कक्षा 6वीं से 12वीं) के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं और टाइप-4 (कक्षा 9वीं से 12वीं) के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं। नियद नेल्लानार योजना से नई शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में विकास की गति को और तेज करते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत शामिल गांवों में 07 नवीन प्राथमिक शालाएं खोली गई है। इन स्कूलों में अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। भविष्य की कार्ययोजना को देखते हुए प्रशासन ने 19 और नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। जमीनी स्तर पर आ रहे ये बदलाव न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि इन क्षेत्रों में विश्वास की एक नई किरण भी जगा रहे हैं। शासन ने ‘पहले’ और ‘अब’ की तस्वीरों के साथ विकास के इस परिवर्तन को प्रमाणित भी किया है, जो स्पष्ट करता है कि बंदूक की गूंज पर अब स्कूलों में बच्चों के ककहरा की गूंज और किताबों की सरसराहट भारी पड़ रही है।

बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026: 9,800+ धावकों के साथ बस्तर ने वैश्विक स्तर पर हासिल किया नया मुकाम

बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026: 9,800 से अधिक धावकों के साथ रचा इतिहास, वैश्विक मंच पर चमका बस्तर समृद्ध और विकसित बस्तर बनाने का प्रयास : वन मंत्री केदार कश्यप रायपुर बस्तर की ऐतिहासिक और नैसर्गिक धरा उस समय गौरवशाली क्षण की साक्षी बनी, जब ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ में उत्साह का अभूतपूर्व जन सैलाब उमड़ा और 9,800 से अधिक पंजीकृत धावकों ने भाग लेकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते स्वरूप, बढ़ती शांति और शासन की ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियों की सफलता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।        बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ बस्तर के जगदलपुर स्थित लालबाग से प्रारम्भ होकर चित्रकोट जल प्रपात के समीप समापन पश्चात आयोजित समारोह के अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने मैराथन के विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि समृद्ध और विकसित बस्तर बनाने का प्रयास के साथ बस्तर क्षेत्र में बस्तर हैरीटेज मैराथन 2026 का आयोजन एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर बदल रहा है, बस्तर जो चार दशक से अशांत क्षेत्र रहा अब शांति का गढ़ बन रहा है। यहाँ के युवा खेल गतिविधियों के साथ ही देश के प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफल हो रहे हैं। शांति के इस माहौल में बस्तर मैराथन में देश-विदेश के कई राज्यों और प्रदेश के अन्य जिलों तथा बस्तर संभाग के खिलाड़ी शामिल हुए।उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते भविष्य में पुनः भव्य आयोजन की आशा व्यक्त की।              समारोह में विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ हाफ मैराथन आयोजन के बाद बस्तर हैरिटेज मैराथन का आयोजन शांति, विकास और समृद्धि का नया अध्याय है । अब बस्तर में विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति दी जाएगी इसी का एक प्रयास मैराथन का आयोजन  है । इस अवसर पर सांसद बस्तर महेश कश्यप और विधायक विनायक गोयल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मैराथन के विजेताओं को बधाई दी।            'बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का मुख्य आकर्षण 42 किलोमीटर की फुल मैराथन रही, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से हुई और समापन ‘भारत का नियाग्रा’ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तट पर हुआ। आयोजन को समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसे 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी और 5 किमी की श्रेणियों में विभाजित किया गया था। 21 किमी दौड़ पोटानार तक, 10 किमी दौड़ कुम्हरावंड तक, जबकि 5 किमी की दौड़ लालबाग से दलपत सागर रानीघाट तक आयोजित की गई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।            खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन द्वारा 25 लाख रुपये की आकर्षक इनामी राशि घोषित की गई थी। साथ ही स्थानीय धावकों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा का अवसर देने हेतु ‘बस्तर कैटेगरी’ का विशेष प्रावधान रखा गया और बस्तर जिले के निवासियों के लिए पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया।               विशेष बात यह रही कि इस मैराथन में मांझी- चालकी समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन की सामाजिक समावेशिता और अधिक सुदृढ़ हुई। इस भव्य आयोजन ने न केवल खेल भावना को प्रोत्साहित किया, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, शांति और विकास की नई तस्वीर को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।              इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, महापौर संजय पांडेय, ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि, मांझी- चालकी, कमिश्नर डोमन सिंह, आई जी सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे ।

शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश बस्तर की वादियों में गूँजेगी बदलाव की नई आहट, बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुनर्वासित जनों में अभूतपूर्व उत्साह खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार की घोषणा  रायपुर बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन  2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत जगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।           बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है।  इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।              इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।          बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।             स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।           अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।         आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।         … Read more

बस्तर में साक्षरता महापर्व, 22 मार्च को नव-साक्षर करेंगे उल्लास महापरीक्षा में भागीदारी

बस्तर में साक्षरता का महापर्व : 22 मार्च को उल्लास महापरीक्षा में अपना हुनर दिखाएंगे नव-साक्षर जगदलपुर बस्तर जिले में शिक्षा और ज्ञान की अलख जगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। इसी कड़ी में रविवार 22 मार्च को जिले भर में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत महापरीक्षा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर को लेकर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले के जन-जन से जुड़ने और इस अभियान को सफल बनाने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा उन बुजुर्गों और युवाओं के लिए स्वावलंबन की एक नई शुरुआत है, जो किसी कारणवश अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे।     कलेक्टर श्री छिकारा ने जिले के सभी विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय साक्षरता केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक नव-साक्षरों को इस महापरीक्षा में शामिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने मैदानी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों, प्रेरकों और स्वयंसेवकों को निर्देशित किया है कि वे घर-घर जाकर परीक्षा के प्रति उत्साह का माहौल बनाएं, ताकि कोई भी नव-साक्षर इस अवसर से वंचित न रह जाए। कलेक्टर का मानना है कि जब जिले का हर नागरिक पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणना करना सीख जाएगा, तभी बस्तर विकास की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा हो सकेगा। इस महापरीक्षा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है कि सुदूर वनांचलों में रहने वाले प्रतिभागियों को भी परीक्षा देने में कोई असुविधा न हो। आगामी 22 मार्च को होने वाले इस मूल्यांकन में प्रतिभागियों की पढ़ने, लिखने और साधारण अंकगणित की क्षमता को परखा जाएगा, जिसके बाद सफल उम्मीदवारों को बुनियादी साक्षरता का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र न केवल उनकी शैक्षणिक योग्यता का प्रतीक होगा, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी पैदा करेगा। कलेक्टर ने जिले के प्रबुद्ध नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे अपने आसपास के नव-साक्षरों को प्रोत्साहित कर परीक्षा केंद्र तक लाने में अपनी सहभागिता निभाएं, ताकि बस्तर जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का सपना साकार हो सके।

छत्तीसगढ़ में मौसम का यू-टर्न: बस्तर में बारिश और तेज हवा की चेतावनी

रायपुर छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से बस्तर संभाग के कई जिलों में शुक्रवार से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 13 से 15 मार्च के बीच बस्तर क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यदि बारिश होती है तो तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार और झारखंड के बीच समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बादल छाने और बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं। जगदलपुर, बीजापुर समेत बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। प्रदेश में बढ़ रही गर्मी फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजनांदगांव में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि रायपुर और बिलासपुर संभाग के अधिकांश जिलों में पारा लगभग 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वहीं न्यूनतम तापमान के मामले में अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान करीब 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि राज्य में मार्च के दूसरे और तीसरे पखवाड़े में गर्मी और तेज हो सकती है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई गई है।

छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक दिन: बस्तर में 280 जोड़े बने हमसफ़र, सिटी ग्राउंड में बना विश्व कीर्तिमान

जगदलपुर बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर का प्रतिष्ठित सिटी ग्राउंड मंगलवार 10 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य नजारे का गवाह बना, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 280 जोड़ों ने एक ही मंडप के नीचे अपने नव-दाम्पत्य जीवन की सामूहिक शुरुआत की। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह ने उस वक्त और भी गौरव हासिल कर लिया, जब पूरे प्रदेश में एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसी कड़ी में जगदलपुर का यह आयोजन अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समारोह का आगाज एक भव्य बारात के साथ हुआ, जिसमें 280 वरों के साथ उनकी माताएं हाथों में कलश और दीप लेकर परंपरा अनुसार चल रही थीं। बस्तर की पारंपरिक बाजा मोहरी की सुमधुर स्वर लहरियों के बीच निकली इस बारात ने पूरे शहर को उल्लास से भर दिया। विवाह मंडप में हरिद्रालेपन, सप्तपदी और जयमाला जैसी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं और हवन से उठने वाले सुगंधित द्रव्यों ने समूचे वातावरण को महका दिया। नव-वधुओं ने वरों के साथ एकसूत्र में बंधकर नए जीवन का संकल्प लिया, जिससे सिटी ग्राउंड का माहौल अत्यंत भावुक और उत्साहजनक हो गया। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर नव विवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना गरीब माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि पूर्व में निर्धन परिवारों को बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए अपनी संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ती थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में इस जिम्मेदारी को उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2005 में मात्र 5 हजार रुपये की सहायता राशि से शुरू हुई यह योजना आज 50 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है, जो गरीब परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने, जिनमें महापौर श्री संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी और जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री पदलाम नाग शामिल थे। इन सभी ने नव-दंपत्तियों को सुखमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर सुश्री नंदिनी साहू, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री मनोज सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी में यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के 11 सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को मिली भावभीनी विदाई

जगदलपुर. बस्तर जिला प्रशासन ने वर्ष के अंतिम दिन बुधवार 31 दिसम्बर को कलेक्टोरेट स्थित आस्था कक्ष में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बस्तर जिला अंतर्गत विभिन्न विभागों में कार्यरत रहे अपने 11 सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को भावभीनी विदाई दी। कलेक्टर हरिस एस. के निर्देशानुसार प्रशासन ने संवेदनशीलता और सुशासन का परिचय देते हुए सभी सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही पेंशन भुगतान आदेश, ग्रेच्युटी भुगतान आदेश और भविष्य निधि भुगतान आदेश प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन ने सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को शॉल, श्रीफल और पुष्प गुच्छ भेंट कर आत्मीयता के साथ सम्मानित किया। प्रशासन की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदाई की बेला में ही कर्मचारियों के हाथों में उनके पेंशन भुगतान आदेश, ग्रेच्युटी भुगतान आदेश और भविष्य निधि भुगतान आदेश सौंप दिए गए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री प्रतीक जैन ने सेवानिवृत्त हो रहे सहयोगियों की कार्यशैली की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी शासकीय सेवा के क्षेत्र में अत्यंत अनुभवी हैं और अपने-अपने कार्यों में पूरी तरह निपुण हैं। भले ही आज आप शासकीय दायित्वों से मुक्त हो रहे हैं, लेकिन आपका संचित अनुभव समाज के लिए अमूल्य है। मेरी आप सभी से अपील है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी आप सक्रिय रहें और अपने दीर्घकालीन अनुभवों का लाभ समाज और नई पीढ़ी को प्रदान करते रहें। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के स्वस्थ, सुदीर्घ और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। विदाई की इस बेला में प्रशासन द्वारा त्वरित गति से किए गए भुगतान और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मिले सम्मान से सेवानिवृत्त शासकीय सेवक बेहद अभिभूत और प्रसन्न नजर आए। हाथों-हाथ पेंशन और ग्रेच्युटी के आदेश प्राप्त करना उनके लिए एक सुखद अनुभव था। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल बहुत ही सराहनीय और राहत भरी है, जिससे उन्हें सेवा के अंतिम दिन ही भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिल गई है। इस अवसर पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री अनिल कुमार पाठक ने पेंशनरों को मिलने वाले समस्त हितलाभों के बारे में विस्तार से बताया और बदलते दौर के साथ तालमेल बिठाने के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया और उपयोगिता समझाई। कार्यक्रम में सहायक कोषालय अधिकारी सुश्री ममता ध्रुव और श्री नरेंद्र सिंह नाग सहित कोषालय एवं अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के परिजन भी मौजूद रहे।

नए साल के जश्न से पहले बस्तर पुलिस सतर्क: शांति-सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम

जगदलपुर नए वर्ष के स्वागत को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस दौरान शहर और ग्रामीण इलाकों में विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों की तैयारियां जोरों पर है। हालांकि बीते वर्षों के अनुभवों को देखते हुए इन आयोजनों के दौरान विवाद, अव्यवस्था और हादसों की आशंका भी बनी रहती है। खासकर शराब के नशे में वाहन चलाने से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कई बार लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। इन सभी संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए बस्तर पुलिस इस बार पहले से ही पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। करीब डेढ़ सौ सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कंट्रोल रूम से 24 घंटे शहर पर निगरानी रखी जा रही है। बस्तर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग ने बताया कि नए वर्ष को लेकर पुलिस ने एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिस पर सभी थाना प्रभारियों को सख्ती से अमल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नए वर्ष के दौरान जिन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहां आयोजनकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। ध्वनि विस्तारक यंत्रों के सीमित और तय मानकों के अनुसार उपयोग के साथ-साथ ऐसे गानों या भीड़भाड़ से बचने को कहा गया है, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर हो रही कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाग ने बताया, शहर में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्रवाई की जा रही है, जिसे नए वर्ष तक और अधिक सख्ती के साथ चलाया जाएगा। इसके साथ ही शहर में लगाए गए करीब डेढ़ सौ सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। इन कैमरों की मदद से अवैध गतिविधियों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं ई-चालान काटकर संबंधित वाहन चालकों के पते पर भेजे जा रहे हैं। चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात किए गए हैं। कुल मिलाकर नए वर्ष का जश्न शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मनाया जा सके, इसके लिए बस्तर पुलिस हर स्तर पर मुस्तैद और पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।

पल्स पोलियो : बस्तर में 1.25 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दवा

बस्तर बस्तर जिले में रविवार को पोलियो के खिलाफ जंग को और मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के तहत पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। रविवार 21 दिसंबर को इस मेगा अभियान में 0 से 5 वर्ष के 1 लाख 24 हजार 377 बच्चों को पोलियो की जीवन रक्षक दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि कोई भी बच्चा वंचित न रहे, और शत-प्रतिशत कवरेज हासिल हो। कलेक्टर हरिस एस ने बताया कि विभिन्न विभागों के मैदानी अमले के साथ समन्वय स्थापित कर प्रचार-प्रसार किया गया है। हर गांव, हर पारे-टोले तक संदेश भी पहुंचाया गया है, जिससे कि 100 प्रतिशत बच्चों को दवा पिलाया जा सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने बताया कि जिले में कुल 498 बूथ स्थापित किए गए है, जिनमें जगदलपुर शहरी क्षेत्र में 72 बूथ शामिल हैं। इसके अलावा, 100 सुपरवाइजर, 1992 टीकाकरण कार्यकर्ताओं, 20 मोबाइल टीम और 24 ट्रांजिट टीम तैनात रहेंगी। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मोबाइल टीमें बाजारों, मेला-मड़ई, ईंट भट्टों, भवन निर्माण स्थलों, घुमंतु बसाहटों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर आने-जाने वाले बच्चों को दवा पिलाई जाएगी। सीएमएचओ डॉ. बसाक ने बताया  कि यह अभियान न केवल पोलियो को जड़ से समाप्त करेगा, बल्कि हर्ड इम्युनिटी को मजबूत बनाकर वातावरण में मौजूद वाइल्ड पोलियो वायरस को निष्क्रिय कर देगा।