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मुंबई मेयर चुनाव की रेस में बीजेपी के 3 नाम, शिंदे की रणनीति क्या होगी?चौंका सकता है उद्धव गुट

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव नतीजे आने के तीन हफ्ते के बाद अब मुंबई में बीएमसी के मेयर चुनाव काउंटडाउन शुरू हो गया है. मुंबई से सटे सभी शहरों में मेयर चुने जाने के बाद अब कहीं जाकर बीएमसी की बारी है. बीएमसी मेयर पद के लिए 11 फरवरी को चुनाव है, जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है. ऐसे में सभी की निगाहे लगी है कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा?  मुंबई का मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है. ऐसे में मेयर के लिए 6 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और 7 फरवरी तक चलेगी.  इसके बाद 11 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है और उसी दिन मेयर और डिप्टीमेयर के लिए चुनाव होंगे.  बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है.  ऐसे में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर अपने मेयर बना सकती है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे शिंदे के साथ बैलेंस बनाकर अपना मेयर बनाती है?  बीएमसी का मेयर चुनाव बना रोचक मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए 114 नगर सेवकों की जरूरत होती है. बीएमसी में बीजेपी के पास सबसे अधिक 89 नगर सेवक हैं जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 नगर सेवक हैं तो कांग्रेस के पास 24 सीटें है.  शरद पवार की पार्टी एनसीपी के पास महज एक पार्षद है तो अजित पवार की एनसीपी के 3 पार्षद हैं. राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 पार्षद हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के 8  और समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद हैं.  मुंबई में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 नगर सेवक हो रहे हैं. इस तरह से महायुति को स्पष्ट बहुमत का नंबर होने के बावजूद मेयर पद के लिए दोनों की सहमति  नहीं बन पा रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी मेयर के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके मुकाबले को रोचक बना दिया है. शिंदे-बीजेपी में कैसा बनेगा फॉर्मूला बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एकनाथ शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिदे बीएमसी में 29 पार्षद लेकर किंगमेकर के रोल में है, जिनके समर्थन के बिना बीजेपी के सियासी मंसूबे के कामयाब नहीं होंगे.  बीजेपी अजित पवार की एनसीपी के पार्षद को मिलाकर भी अपना मेयर नहीं बना सकती है. ऐसे में शिंदे के साथ ही सहमति का फॉर्मूला बनाना होगा. शिंदे भी मुंबई में अपना मेयर चाहते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से मांग भी उठा चुके हैं. ऐसे में बीजेपी बीएमसी में कब्जा जमाने के लिए डिप्टीमेयर का पद शिंदे की शिवसेना को देने का ऑफर दे सकती है. इसके बाद ही बीजेपी अपना मेयर बना पाएगी, लेकिन उसके लिए शिंदे की रजामंदी जरूरी है.  उद्धव ठाकरे का क्या है सियासी गेम  मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव है.  शिवसेना (यूबीटी) मुंबई मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का दांव चल सकती है. मेयर चुनाव को लेकर शुक्रवार दोपहर मातोश्री में पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे.  मेयर चुनाव को लेकर इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी बीएमसी में अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(यूबीटी) के नेता किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी कर सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए हैं. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने?  BMC मेयर के लिए BJP से रेस में 3 नाम  बैठक होगी और नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा. बीजेपी की ओर से मेयर पद के लिए तीन नामों पर चर्चा हो रही है. इनमें राजश्री शिरवलकर, ऋतु तावड़े और शीतल गंभीर का नाम शामिल है.  वहीं, डिप्टी मेयर का पद शिंदे गुट की शिवसेना के खाते में जाएगा. शिवसेना को दिए जाने वाले डिप्टी मेयर के पद के लिए दो नामों पर चर्चा हो रही है. इसमें तृष्णा विश्वासराव और यामिनी जाधव का नाम शामिल है. वहीं स्थायी समिति के अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा. मुंबई महानगरपालिका में सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण की घोषणा की गई है. इसलिए, मुंबई की बागडोर एक महिला के हाथों में होगी. क्या मुंबई में मेयर चुनाव निर्विरोध होंगे?  एबीपी माझा के मुताबिक, मुंबई मेयर को लेकर चर्चा के बीच यह भी खबर है कि ठाकरे की शिवसेना मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी. इस संबंध में ठाकरे की शिवसेना के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लोग काम कर रहे हैं. इसलिए, ठाकरे की शिवसेना की ओर से 7 फरवरी को महापौर पद के लिए आवेदन दाखिल करने की संभावना है.  बीएमसी चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद, ठाकरे की शिवसेना (UBT) अपना उम्मीदवार उतारेगी. बीजेपी-शिंदे गठबंधन के 138 सदस्य हैं, जिनमें बीजेपी के 89 और शिंदे शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं. इसलिए, बीजेपी के मेयर के चुनाव में कोई समस्या नहीं होगी. कैसे की जाती है स्थायी समिति की गणना? स्थायी समिति के नतीजों के बाद आए आंकड़ों के अनुसार, विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों को 13-13 सदस्य मिले. इसलिए, स्थायी समिति में अपनी ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शिंदे शिवसेना और बीजेपी ने एनसीपी के अजित पवार गुट की मदद लेने का फैसला किया है. शिंदे शिवसेना ने अपना गुट रजिस्टर्ड करा लिया है और अजित पवार गुट एनसीपी के साथ सहयोगी गुट के रूप में पंजीकरण कराने के लिए बातचीत चल रही है. हालांकि, … Read more

मुंबई मेयर की कुर्सी की दौड़ में लॉटरी के बाद 5 महिलाएं, जानें कौन है सबसे आगे?

मुंबई देश के सबसे अमीर नगर निगम मुंबई की बीएमसी में अब वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. आरक्षण लॉटरी के बाद यह आधिकारिक से तय हो गया है कि मुंबई का अगला मेयर 'ओपन कैटेगरी महिला' से होगा.इस फैसले ने मुंबई में राजनीतिक महिला चेहरों के लिए मेयर बनने का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अब सवाल यही है कि किस महिला पार्षद की किस्मत का सितारा बुलंद होगा?  मुंबई की मेयर महिला बनेगी, यह बात पक्की हो गई है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के पास बीएमसी में बहुमत का नंबर गेम भी है, जिसके चलते आसानी से वो अपना मेयर बना सकते हैं. इसके बावजूद बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. बीएमसी के मेयर पद का पद लॉटरी सिस्टम के जरिए महिला कोटे में गया है. ऐसे में अब बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मुंबई का मेयर पद देगी ये सवाल अब उठने लगा है. ऐसे में कई नाम सियासी चर्चाओं में है, जिन्हें लेकर कयास लगाए जा रहे हैं?  बीजेपी के पक्ष में बीएमसी का नंबर गेम मुंबई नगर नगिम की 227 सीटों में से बीजेपी ने 89 और उसकी सहयोगी शिंदे की शिवसेना ने 29 पार्षद सीटों पर जीत दर्ज किए हैं. इस तरह बीजेपी-शिवसेना के पास राज्य के कुल 227 में से 118 पार्षद है, जो बहुमत के 114 से 4 पार्षद ज्यादा हैं. इस तरह महायुति आपसी सहमति से मुंबई के बीएमसी में अपना मेयर चुन सकते हैं, क्योंकि नंबर गेम उनके पक्ष में है.  उद्धव ठाकरे के अगुवाई शिवसेना (यूबीटी)के पास 65 पार्षद हैं तो कांग्रेस के 24 पार्षद हैं. इस तरह से महाविकास अघाड़ी बहुमत के नंबर से बहुत ही पीछे हैं. ऐसे में बिना शिंदे के समर्थन से उद्धव किसी भी सूरत में अपना मेयर नहीं बना सकते हैं. शिंदे फिलहाल बीजेपी के साथ है और मेयर पद को लेकर बार्गेनिंग कर रहे हैं.  मुंबई मेयर की कमान फिर महिला के हाथ महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग के द्वारा बीएमसी सहित सभी 29 नगर निगम के मेयर पद के आरक्षण का फैसला लॉटरी ड्रॉ के जरिए तय किया गया है. पिछली बार बीएमसी में विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के पास होने के कारण, नियमानुसार इस बार इसे अनारक्षित (Open Category) रखने का निर्णय लिया गया है. इस तरह से मुंबई के मेयर का पद महिला के लिए तो रिजर्व है, लेकिन किसी जाति के लिए नहीं है. ऐसे में कोई महिला निर्वाचित पार्षद, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से आता हो, मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकती है.  बीएमसी में मेयर पद महिला के लिए रिजर्व किए जाने के बाद सभी प्रमुख पार्टियों शिवसेना (दोनों गुट), भाजपा, कांग्रेस और राकांपा के पास अपने सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने की छूट होगी. लेकिन मुकाबला संख्या बल और समर्थन के जरिए तय होगा.मेयर पद के ओपन महिला होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब पार्टियों को किसी खास वर्ग के उम्मीदवार की तलाश नहीं करनी होगी. कौन महिला पार्षद बनेगी मुंबई की मेयर?  बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. ऐसे में सवाल उठने लगा कि बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मेयर पद की कुर्सी सौंपने का फैसला करेगी. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना में से किसी का मेयर बनना है लेकिन इन दोनों के सामने जीती गईं महिलाओं में से किसी के एक चुनना है. बीजेपी अपने महिला पार्षदों में से किसी एक को मेयर बना सकती है. बीजेपी वार्ड नंबर 2 से जीतीं तेजस्वी घोसालकर को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. इसके अलावा वार्ड 13 से राणी द्विवेदी, वार्ड 14 से सीमा शिंदे, वार्ड 15से जिज्ञासा शाह, वार्ड 16 से श्वेता कोरगावकर और वार्ड 17 से चुनाव जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी मेयर की रेस में है. रानी द्विवेदी वार्ड नंबर 13 से चुनाव जीती हैं. राणा बीजेपी महाराष्ट्र की सचिव और प्रवक्ता है. बीजेपी की उपाध्यक्ष रह चुकी और  पूर्व में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी थी. इसके अलावा श्वेता कोरगावकर का नाम आता है जो वार्ड नंबर 16 से चुनाव जीती हैं. वार्ड नंबर 14 से जीतने वाली सीमा शिंदे का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है. इनके अलावा वार्ड नंबर 15 से जीतने वाली जिज्ञासा शाह और वार्ड 17 से जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी हैं. तेजस्वी घोसालकर सबसे प्रबल दावेदार बीजेपी की जीती महिला पार्षदों में मेयर पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में से तेजस्वी घोसालकर का नाम है. तेजस्वी दिवंगत शिवसेना (यूबीटी) पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं.तेजस्वी घोसालकर के पति फरवरी 2022 में फेसबुक लाइव के दौरान कारोबारी मॉरिस नोरोन्हा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. तेजस्वी घोसालकर शिवसेना ठाकरे गुट की पूर्व कॉर्पोरेटर हैं. तेजस्वी घोसालकर 2017 के मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में शिवसेना ठाकरे गुट से वार्ड नंबर 1 से जीती थीं. इस बार बीएमसी चुनाव ऐलान से ठीक पहले तेजस्वी घोसालकर बीजेपी में शामिल हो गईं थी. उन्होंने बीजेपी ने वार्ड नंबर 1 से उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद से मेयर पद के प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा है. उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की है और माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें मेयर बना सकती है. बीएमसी में बीजेपी के कुल 49 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं, वहीं शिंदे गुट के पास 19 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं. ऐसे में किस महिला को बीएमसी की कमान मिलेगी, तस्वीर दिलचस्प हो गई है.

मार्कर इंक पर बवाल: बीएमसी चुनाव में धांधली का दावा, राज ठाकरे ने चुनाव आयोग को घेरा

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया जारी है। इस बीच कुछ वोटर्स ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि उनके अंगुलियों पर लगाया गया मार्कर का निशान आसानी से साफ हो जाता है। इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने भी चिंता जाहिर की है। वोट डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है। सरकार ने तय कर लिया है कि इस चुनाव को किसी भी तरह जीतना है। ये वही तरीका है जो उन्होंने विधानसभा चुनावों में अपनाया था। पहले अमिट स्याही इस्तेमाल होती थी, लेकिन अब मार्कर का उपयोग किया जा रहा है। ये मार्कर सैनेटाइजर से आसानी से साफ हो जाता है। ऐसे चुनाव जीतकर सत्ता में आना लोकतंत्र नहीं कहला सकता। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए पूछा कि विकास की बात करने वाले लोग अगर वोट की सच्चाई को मिटाकर दोबारा वोट डाल सकते हैं, तो ये किस तरह का विकास है? राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार और आयोग मिलकर लोकतंत्र के नियमों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बीएमसी चुनाव में सत्ता को जीत मिल सके। उन्होंने वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई। राज ठाकरे का आरोप है कि मुख्यमंत्री फडणवीस की सरकार जानबूझकर विपक्ष को हाशिए पर डाल रही है। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि जो सिस्टम है, उसमें सत्ता पक्ष किसी भी हद तक जीतना चाहता है। मनसे प्रमुख का कहना है कि जब हमने डुप्लिकेट वोटर्स का मुद्दा उठाया, तो चुनाव आयोग ने दूरी बना ली। वीवीपीएटी मशीनों पर सवाल उठाए, तो अनसुना कर दिया गया। राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद भी उम्मीदवार घर-घर जाकर मिल रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने सत्ताधारी पार्टी को पैसे बांटने की सुविधा देने के लिए ये अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन पूरी तरह सत्ता पक्ष के हाथ की कठपुतली बना हुआ है। ये मरते हुए लोकतंत्र का संकेत है। दरअसल, इस मामले में मामला तब और गंभीर हो गया, जब दादर के छाबिलदास स्कूल में एक डुप्लिकेट वोटर पकड़ा गया। इसके बाद राज ठाकरे ने अपने समर्थकों और शिवसेना कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और वोटिंग बूथों की निगरानी करें ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि धोखाधड़ी से चुनाव जीतना असली जीत नहीं है। उनकी पार्टी ऐसे गड़बड़ियों को रोकने के लिए काम कर रही है, लेकिन लोकतंत्र की लंबी उम्र को लेकर गहरी चिंता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि चुनाव आयोग ही चुनाव से जुड़ी सभी चीजों का फैसला करता है। मार्कर पेन पहले भी इस्तेमाल होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर संदेह है तो आयोग अलग पेन इस्तेमाल करे। यहां तक कि ऑयल पेंट भी इस्तेमाल कर सकते हैं। फडणवीस ने यह भी चेतावनी दी कि संस्थान और चुनाव प्रक्रिया पर लगातार शक करना सही नहीं है। बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने जांच का आदेश दिया। कई शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने नए निर्देश दिए कि वोटर्स की अंगुलियों पर जो इंक लगाई जाए, वह त्वचा में अच्छी तरह से लगे ताकि आसानी से न मिट सके। नगर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने पारंपरिक इंडलेबल इंक की जगह मार्कर किट उपलब्ध कराई थी। चुनाव आयोग का कहना है कि ये मार्कर 2012 से हर लोकल बॉडी चुनाव में इस्तेमाल हो रहे हैं।

आनंद दुबे बोले—BJP के जोरदार प्रदर्शन में कांग्रेस के लिए मुंबई में मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली BMC चुनाव में अकेले लड़ने का संकेत दे चुकी कांग्रेस अब सहयोगियों के निशाने पर है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में शामिल शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस की बिहार चुनाव में हार पर तंज कसा है। पार्टी नेता आनंद दुबे ने कहा कि मुंबई में कांग्रेस 2-4 सीटों पर सिमट जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां भी कांग्रेस को लगता है वो बहुत ताकतवर है, वो वहां जाकर हार जाती है। इसके अलावा उन्होंने पूर्व कांग्रेस सांसद हुसैन दलवाई के दिल्ली बलास्ट को लेकर दिए बयान पर भी आपत्ति जताई है।  दुबे ने कहा, 'महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस अकेला ही राष्ट्रीय पक्ष है, तो उसे कभी-कभी राष्ट्रीय पक्ष होने का सपना याद आ जाता है। अभी बिहार में जो दुर्दशा हुई, उसे लगता है कांग्रेस भूल गई है। कांग्रेस कभी-कभी अति आत्मविश्वास में बह जाती है। हरियाणा के चुनाव में हार हुई, महाराष्ट्र के चुनाव में हार हुई, अभी बिहार में हार हुई। देश में जहां कांग्रेस को लगता है कि वह बहुत ताकतवर है, वहां हार जाती है।' उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में तो जीतते हुए हार गई। वजह असमन्वय…। अब सुन रहे हैं कि महाराष्ट्र इकाई में जो नेता हैं, वो स्वयंबल की बात कर रहे हैं। आप स्वतंत्र हैं, चाहे जैसे लड़ें। इससे फर्क नहीं पड़ता…।' उन्होंने कहा, 'ये जो महाराष्ट्र इकाई के नेता हैं, ये कभी-कभी बहुत उत्साहित हो जाते हैं। उन्हें नहीं पता कि उनकी नाव में एक छेद है। बीच समंदर में जाकर डूब जाएंगे। हमारी नाव में बैठ जाएंगे, तो नैया पार हो जाएगी…। हमारी नाव में बैठोगे तो नाव पार हो जाएगी, नहीं तो बीजेपी के तूफान में और बीजेपी की लहरों में कहां डूब जाओगे पता नहीं चलेगा। बड़े बुजुर्गों की बात याद रखनी चाहिए। बड़े बुजुर्ग कह गए हैं कि जब आंधी तूफान आए, तब बैठ जाना चाहिए। कांग्रेस को यह समझ नहीं आ रहा है।' MNS के साथ वाले दावे पर उठाए सवाल शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, 'कांग्रेस को लगता है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के आने से उत्तर भारतीय नाराज हो जाएंगे। बिहार में कौन सा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना था। बिहार में आरजेडी के साथ रहकर कांग्रेस 61 से 6 सीटों पर आ गई। मुंबई में तो लगता है कि 2-4 सीटों पर आ जाएगी। फिर कांग्रेस स्वतंत्र पार्टी है।' बिहार चुनाव के नतीजे हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था और महज 6 पर जीत हासिल कर सकी थी। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के खाते में 25 सीटें आई थीं। जबकि, एनडीए ने 200 सीटों से ज्यादा जीतकर बिहार में सरकार बनाने का दावा पेश किया।