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केंद्रीय बजट 2026: एमपी के रेलवे नेटवर्क के लिए 7500 करोड़ का फंड, इस मंडल को मिलेगा बड़ा लाभ

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 

केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश को बड़ा झटका, सिंहस्थ पैकेज नहीं मिला, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ की घोषणा

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू 'महिला अमृत मित्र' की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 'महिला अमृत मित्र' को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है।

बांग्लादेश के बजट में कटौती, चाबहार परियोजना के लिए सरकार ने किया ईरान को शून्य फंडिंग का ऐलान

नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस बार के केंद्रीय बजट में उसके विकास के लिए दी जाने वालीराशि चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के मुताबिक बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि दी जाएगी। उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं इस बार के आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई राशि नहीं आवंटित की गई है। बता दें कि भारत चाबहार परियोजना में हिस्सेदार रहा है औऱ वह 100 करोड़ की मदद हर साल करता आ रहा था। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है। चाबहार ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित बंदरगाह है जो कि वैश्विक समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच बनाता है। यह पाकिस्तान की सीमा के पूर्व में ग्वादर पोर्ट के पास है। चीन बी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए ग्वादर को विकसित कर रहा है। ऐसे में यह चाबहार परियोजना भारत के लिए संतुलन बनाने के लिए अहम है। जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका में तनाव की वजह से भारत इस बार चाबहार को कुछ नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान 20,516 करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान 21,742 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल 22,118 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि 2025-26 के बजट में बांग्लादेश के लिये 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमान में यह राशि 34.48 करोड़ रुपये कर दी गई थी। अप्रैल में खत्म हो रही है अमेरिका से मिली छूट भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत 2025-26 के लिए कुल विदेश साझेदारी विकास मद में 6,997 करोड़ रुपये है, जो विदेश मंत्रालय को किए गए आवंटन का 31 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश साझेदारी विकास मद के तहत कुल आवंटन में से 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्रों, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़कों, पुल जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर जमीनी स्तर की सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक विभिन्न प्रकार की पहलों के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता राशि 120 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

पीएम मोदी बोले—बजट से मजबूत होगी स्किल और सस्टेनेबिलिटी, नागरिक ही देश की सबसे बड़ी पूंजी

नई दिल्ली पीएम मोदी ने रविवार को बजट पर कहा, 'देश में रिफॉर्म एक्सप्रेस चल पड़ी है। जो बदलाव किए गए हैं वो एक्सप्रेशन से भरे हुए भारत के साहसिक प्रतिभाशाली युवाओं को खुला आसमान देते हैं।' उन्होंने कहा कि बजट से रिफॉर्म्स को नई गति मिलेगी। ये स्किल, स्केल और सस्टेनेबिलिटी को मजबूत करने का प्रयास है। सबसे बड़ी पूंजी नागरिक, इसी में निवेश किया। पीएम ने कहा कि यह एक ऐसा यूनिक बजट है, जिसमें फिसकल डेफिसिट कम करने पर फोकस है। इसके साथ बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का समन्वय है। यह देश की ग्लोबल भूमिका को नए सिरे सशक्त करता है।

किस सेक्टर पर बरसेगा बजट का पैसा? स्वास्थ्य-शिक्षा के खर्च को लेकर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का बजट पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाएं की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में देश के परिवहन और रक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक पैसा लगाया है। दोनों ही क्षेत्रों पर करीब 6-6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी राशि रखी गई है।   वित्त मंत्री ने ट्रांसपोर्ट पर सबसे अधिक 5,98,520 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है। वहीं, रक्षा क्षेत्र पर 5,94,585 रुपये खर्च किए जाएंगे। होम अफेयर्स पर 2,55,234 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव है। कृषि कार्यों और इससे जुड़ी गतिविधियों पर 1,62,671 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। शिक्षा पर 1,39,289 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं ऊर्जा पर 1,09,029 करोड़ रुपये और हेल्थ पर 1,04,599 करोड़ रुपये का निवेश होगा। बजट 2026 में किस सेक्टर को कितना पैसा शहरी विकास पर 85,522 करोड़, आईटी और टेलिकॉम सेक्टर पर 74560 करोड़, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री पर 70296 करोड़, सोशल वेलफेयर पर 62362 करोड़, साइंटिफिक डिपार्टमेंट्स पर 55,756 करोड़, टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन पर 45500 करोड़, एक्सटर्नल अफेयर्स पर 22,119 करोड़, फाइनेंस पर 20,649 करोड़ और नॉर्थ ईस्ट डिवलेपमेंट के लिए 6812 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। रुपया कहां से आएगा और कहां जाएगा बजट डॉक्युमेंट्स में सरकार ने यह बताया है कि पैसा कहां से कितना आएगा और कहां कितना खर्च होगा। इसके मुताबिक बजट का 24 पर्संट हिस्सा सरकार उधार लेगी। 21 फीसदी हिस्सा इनकम टैक्स से और 18 पर्सेंट कॉर्पोरेशन टैक्स से आता दिख रहा है। 4 पर्सेंट कस्टम से और 6 फीसदी यूनियन एक्साइज ड्यूटीज से आएगा। नॉन-डेब्ट कैपिटल से 2 फीसदी की प्राप्ति होगी। नॉन टैक्स रेवेन्यू से 10 फीसदी और जीएसटी और अन्य टैक्सों से 15 फीसदी हिस्सा मिलने की उम्मीद है। रुपया कहां कितना जाएगा, इसके ब्योरे में बताया गया है कि सर्वाधिक 22 फीसदी हिस्सा राज्यों को टैक्स का हिस्सा देने में जाएगा। ब्याज देनदारी पर 20 फीसदी खर्च होगा। केंद्रीय योजनाओं पर 17 फीसदी हिस्सा खर्च होगा। बड़ी सब्सिडी पर 6 फीसदी, डिफेंस पर 11 फीसदी, केंद्र प्रयोजित योजनाओं पर 8 फीसदी पैसा खर्च होगा। सिविल पेंशन पर 2 फीसदी और अन्य मदों में 7 फीसदी पैसा लगेगा।  

Budget :जबलपुर में नया फ्लाईओवर: 300 करोड़ की लागत, ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

जबलपुर  यातायात को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक और फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई जा रही है। गढ़ा त्रिपुरी चौक से मेडिकल के बीच बनने वाले इस फ्लाईओवर का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है। दो किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग दो किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से बायपास, मेडिकल कॉलेज, तिलवारा और धनवंतरी नगर की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। आवासीय और चिकित्सा क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक का हिस्सा आवासीय, शैक्षणिक क्षेत्रों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को जोड़ता है। यहां निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही अधिक रहती है। सीमित सड़क चौड़ाई और अवैध कब्जों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई लेग बनाने पर भी विचार इस फ्लाईओवर को बहुउपयोगी बनाने के लिए इसके कई लेग तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आसपास के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जा सकेगा और मुख्य मार्ग के साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी ट्रैफिक का बेहतर वितरण संभव होगा। 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित फ्लाईओवर की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तकनीकी सर्वेक्षण और डिजाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इसी विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर पहले से मौजूद है। साथ ही सगड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर निर्माणाधीन है और बंदरिया तिराहे पर भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है।  

वैश्विक निवेश की निगाहें भारत पर: बजट 2026 में क्या है निवेशकों की उम्मीदें?

नई दिल्ली यूक्रेन-रूस युद्ध, गाजा संकट, लाल सागर में तनाव, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और अमेरिका-यूरोप में ऊंची ब्याज दरों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब भारत के बजट 2026 पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक संस्थाएं आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला मान रही हैं। IMF और World Bank की ताजा रिपोर्टों के अनुसार 2026 में वैश्विक विकास दर 2.7-3% के आसपास रहने की संभावना है।  यूरोप ऊर्जा संकट और युद्ध के असर से जूझ रहा है जबकि  चीन रियल एस्टेट और डिमांड संकट में है। वैश्विक उद्योगों की भारत से उम्मीदें क्यों वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियाँ और निर्यात मांग में गिरावट जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अमेरिकी टैरिफों और निर्यात बाधाओं से भारतीय निर्यातकों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान की उम्मीद उद्योगों को बजट से है।पहले  World Bank ने भारत की ग्रोथ अनुमान को थोड़ा कम कर 6.3% कर दिया था, यह वैश्विक आर्थिक दबाव और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर किया गया था। हालांकि  संशोधन में यह स्वीकार किया गया कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और घरेलू खपत तथा सेवा निर्यात इसे आगे ले जा रहे हैं।     अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक भारत के बजट 2026 से उम्मीद कर रहे हैं।     IMF ने भारत के लिए 2025-26 के GDP अनुमान को 6.6% तक अपग्रेड किया है।     यह दिखाता है कि वास्तव में भारत वैश्विक मंदी के बीच भी प्रगति कर रहा है।     मैन्युफैक्चरिंग और Make in India को टैक्स प्रोत्साहन।     सेमीकंडक्टर, EV, ग्रीन एनर्जी में सब्सिडी।     स्टेबल टैक्स पॉलिसी और आसान निवेश नियम।     डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर खर्च।     Bloomberg और Reuters के अनुसार, बजट के फैसले तय करेंगे कि ग्लोबल सप्लाई चेन चीन से भारत की ओर कितनी तेजी से शिफ्ट होती है।    रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक असर     NATO और एशिया-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच भारत के डिफेंस बजट में बढ़ोतरी पर दुनिया की नजर।     स्वदेशी हथियार और रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा     इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से लॉजिस्टिक्स और व्यापार  मजबूत होगा     विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बजट इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।  वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए चुनौती     मुनाफे में फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड (FII) आउटफ्लो और रुपया की कमजोरी ने भी भारत के लिए विनिमय दर संबंधी जोखिम पैदा कर दिए हैं, जिससे बजट में पूंजी आकर्षण और निवेश-सहायक उपायों की मांग बढ़ी है।     चीन सस्ता उत्पादन केंद्र बना हुआ है।     वियतनाम, बांग्लादेश और मैक्सिको प्रतिस्पर्धा में शामिल।     भारत को स्किल, लॉजिस्टिक्स और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर तेज सुधार जरूरी।  

बजट सरप्राइज: शादीशुदा दंपतियों को मिल सकती है भारी टैक्स छूट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। खबर है कि वित्त मंत्रालय वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने की तैयारी में है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो पति-पत्नी मिलकर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को होगा, जहां एक ही कमाने वाला सदस्य है। अभी ऐसे परिवार दूसरे जीवनसाथी की छूट और टैक्स स्लैब का पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। क्या है सिस्टम फिलहाल भारत में टैक्स सिस्टम ऐसा है कि शादीशुदा होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है, अलग PAN, अलग छूट और अलग कटौती मिलती हैं। अगर पत्नी की इनकम नहीं है, तो उसकी बुनियादी छूट सीमा बेकार चली जाती है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि USA और Germany की तरह भारत में भी जॉइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प होना चाहिए, जहां परिवार को एक इकोनॉमिक यूनिट माना जाता है। जॉइंट टैक्सेशन में पति-पत्नी की कुल इनकम जोड़कर टैक्स लगाया जाएगा और इसके लिए अलग टैक्स स्लैब हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है। जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को ₹3 लाख तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा ₹6 लाख या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मिडिल क्लास फैमिली को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, मेडिकल इंश्योरेंस और दूसरे कटौती को भी बेहतर तरीके से एडजस्ट किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने की बात कही जा रही है। सरचार्ज पर भी राहत मिल सकती है साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी ₹50 लाख से ज्यादा इनकम पर सरचार्ज लगता है, लेकिन जॉइंट टैक्सेशन में इसकी सीमा ₹75 लाख या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे हाई टैक्स ब्रैकेट में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अब सबकी नजरें यूनियन बजट 2026-27 पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट सेशन 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा।

मध्य प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति के लिए रोलिंग बजट पर काम

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार तीन साल का रोलिंग बजट तैयार करेगी। प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति- विकसित मध्य प्रदेश 2047 पर केंद्रित वर्ष 2026-27, वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के लिए त्रिवर्षीय रोलिंग बजट तैयार किया जाएगा। इसके लिए 15 सितंबर से 30 सितंबर तक विभागवार बैठकें होंगी। 31 अक्टूबर को नई योजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे और एक अक्टूबर से 15 नवंबर तक द्वितीय चरण की चर्चा की जाएगी। बता दें कि इससे पहले बजट निर्माण में 28 से 31 जुलाई तक विभागीय प्रशिक्षण और प्रारंभिक चर्चा की जा चुकी है। इसके अलावा इस बार भी राज्य सरकार द्वारा शून्य आधार बजटिंग की प्रक्रिया को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित बजट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। शून्य आधार बजटिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर योजना के पीछे ठोस उद्देश्य हो, उसका समाज पर प्रभाव दिखे और प्रत्येक व्यय राज्य की विकास प्राथमिकताओं से मेल खाता हो। बजट स्वीकृति के पहले हर योजना का होगा मूल्यांकन प्रत्येक योजना के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे होगा और उसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। इस प्रक्रिया में गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त करने और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत करने पर भी विचार किया जाएगा। दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें होंगी आयोजित बजट निर्माण के लिए दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। 31 मार्च 2026 को समायोजन प्रस्तावों की अंतिम तिथि रखी गई है। वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की भी गणना अलग होगी। विभागों को अपने स्थायी खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, भत्तों की गणना करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के वेतन में तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि जोड़ी जाएगी। महंगाई भत्ते की गणना क्रमश: 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत और 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। संविदा कर्मचारियों के वेतन में चार प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का भी प्रविधान रहेगा। अजा-अजजा उपयोजना के लिए न्यूनतम बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सेगमेंट कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। आफ-बजट व्यय और केंद्रीय योजनाओं पर भी रहेगी निगरानी जिन विभागों को भारत सरकार से सीधे फंड प्राप्त होता है, उन्हें वह राशि भी बजट प्रस्ताव में दर्शानी होगी। इसके अलावा, आफ-बजट ऋण, प्रोत्साहन योजनाओं का वित्तीय असर, और नवीन योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बजट की तैयारी के लिए जो आइएफएमआइएस प्रणाली अपनाई गई है, उसमें तय समय के बाद प्रविष्टि की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा में दर्ज करें और विभागीय बैठक के पूर्व पूरी जानकारी तैयार रखें।