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मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीधी जिले को देंगे विकास कार्यों की सौगात

बहरी में होगा लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण एवं हितलाभ वितरण कार्यक्रम भी होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को सीधी जिले के बहरी में आयोजित विभिन्न विभागों के हितग्राहियों के प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 201 करोड़ 64 लाख रुपये के 209 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 68 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 179 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 133 करोड़ 62 लाख रुपये लागत के 30 विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "एक बगिया मां के नाम'' योजना में 505 हितग्राहियों को 11 करोड़ 58 लाख रूपये की राशि से लाभान्वित करेंगे। विभिन्न विभागों के 179 कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बहरी में अनुसूचित जाति विभाग, आदिवासी विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, जिला पंचायत वाटरशेड, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 179 विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। इन कार्यों पर 68 करोड एक लाख 40 हजार रुपये की लागत व्यय की गई है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण विकास को मजबूती मिलेगी। 30 विकास कार्यों का होगा शिलान्यास मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वाटरशेड विकास), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीआईयू विभाग तथा लोक निर्माण विभाग (भवन/सड़क संभाग) के अंतर्गत कुल 30 विकास कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा। इन कार्यों पर कुल 133 करोड़ 62 लाख 67 हजार रुपये की लागत अनुमानित है। प्रशिक्षण एवं हितग्राही उन्मुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित बहरी में विभिन्न विभागों के हितग्राहियों का प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित होगा। इससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों तक सीधे पहुँचेगी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप जायसवाल, स्थानीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक सिंहावल श्री विश्वामित्र पाठक, विधायक सीधी श्रीमती रीती पाठक, विधायक धौहनी श्री कुंवर सिंह टेकाम, विधायक चुरहट श्री अजय सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंजू रामजी सिंह, पूर्व विधायक चुरहट श्री शरदेन्दु तिवारी तथा वरिष्ठ समाजसेवी श्री देवकुमार सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।  

मध्यप्रदेश से असम को दिये जायेंगे एक जोड़ा टाइगर और 6 मगरमच्छ

असम से आगामी 3 साल में 3 समूहों में आयेंगे 50 जंगली भैंस एक जोड़ा गेंडा और 3 कोबरा भी आयेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को गुवाहाटी प्रवास के दौरान असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान को लेकर चर्चा की। दोनों राज्यों के बीच में सहमति बनी कि असम से 50 जंगली भैंसे 3 समूहों में 3 साल में, गैंडे का एक जोड़ा और 3 कोबरा मध्यप्रदेश में लाये जायेंगे। इन्हें भोपाल के वन विहार में रखा जायेगा। मध्यप्रदेश इसके बदले में असम की मांग के अनुसार एक जोड़ा टाइगर और 6 मगरमच्छ देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में चीते के बाद अब भैंस पुनर्स्थापना से प्रदेश की जैव विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। यह प्रयास एक प्रजाति के संरक्षण के साथ ही प्रदेश के जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। सफल चीता पुनर्स्थापना के बाद जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना से राज्य के जैव विविधता संरक्षण क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ ही उन प्रजातियों की वापसी के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, जो कभी इस भूमि की पहचान हुआ करती थीं। मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी पिछले सौ वर्षों से भी अधिक समय पहले समाप्त हो चुकी थी। वर्तमान समय में देश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी ये हैं, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि कान्हा टाइगर रिज़र्व जंगली भैंसों के पुनःस्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है। अध्ययन में घास के मैदानों की गुणवत्ता, जल स्रोतों की उपलब्धता, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारकों का मूल्यांकन किया गया है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस संबंध में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) तथा भारत सरकार से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पुनर्स्थापन को चरणबद्ध और सुरक्षित ढंग से अंजाम दिया जाएगा। यह योजना दीर्घकालिक संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सोमनाथ हमारे आत्मबल, पुनर्जागरण और अविनाशी विश्वास का है प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि भगवान श्रीमहाकाल और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग हमारे प्रदेश में विद्यमान है और प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है। बार-बार ध्वस्त होकर भी सोमनाथ का पुनर्निर्माण यह उद्घोष है कि, शिव शाश्वत हैं, हमारी आस्था अडिग है और सनातन की चेतना अमर है। सोमनाथ हमारे आत्मबल, पुनर्जागरण और अविनाशी विश्वास का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था एवं भोपाल उत्सव मेला की सोमनाथ ज्योतिर्लिंग रूद्र पूजा और मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन के रवीन्द्र भवन- मुक्ताकाश परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री भगवान दास सबनानी, भोपाल उत्सव मेला के श्री मनमोहन अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री माखन सिंह और श्री राहुल कोठारी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिव ही सत्य और सनातन हैं। पंच महाभूतों से बने हमारे शरीर का शिव ही सनातन संस्कृति की मूल अवधारणाओं से परिचय कराते हैं। शिव ही हमारे विकारों का संहार करते हैं। सनातन के विरोध का भाव रखने वाली संस्कृतियां, वर्तमान में स्वयं आतंरिक संकट से ग्रस्त हैं। जबकि सदैव विश्व के कल्याण की कामना करने वाली भारतीय संस्कृति, संसार को एक परिवार मानते हुए आगे बढ़ रही है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जहां एक ओर श्री सोमनाथ महादेव का पुनर्निर्माण कराया वहीं प्रधानमांत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर की स्थापना की। उज्जैन में महाकाल जन-जन की श्रद्धा के केंद्र के रूप में विद्यमान हैं। यह इस तथ्य को स्थापित करता है कि सनातन आदि और अनंत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का आध्यात्मिक ज्ञान, उनकी आत्मीयता और मानवमात्र के प्रति प्रेम, सम्मानीय है। उनके द्वारा प्रसारित, सांस लेने की लयबद्ध सुदर्शन क्रिया की तकनीक ने कई लोगों के जीवन से तनाव, चिंता और अवसाद जैसे जटिल विकारों का निदान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रूद्र पूजन में भगवान भोलेनाथ से प्रदेशवासियों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने की कामना की।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है मीना समाज

मृत्यु भोज का विरोध, दहेज मुक्त और सादे विवाहों का समर्थन तथा सामूहिक विवाहों को प्रोत्साहन समाज की प्रशंसनीय पहल मैधावी विद्यार्थियों, युवाओं और सामाजिक गतिविधियों में योगदान देने वाले वरिष्ठ जन को किया सम्मानित मुख्यमंत्री रवीन्द्र भवन में आयोजित मीना समाज के सम्मेलन में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मीना समाज ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज बंधु अपने सामाजिक दायित्वों का भी बख़ूबी निर्वहन कर रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक उन्नति का सबसे मजबूत आधार है। पिछले वर्षों में लगभग 550 प्रतिभाओं का सम्मान इस बात का प्रमाण है कि मीना समाज, शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है। मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं का विरोध, दहेज मुक्त और सादे विवाहों का समर्थन एवं सामूहिक विवाह सम्मेलनों को प्रोत्साहन देकर समाज ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मजबूत संदेश दिया है। ऐसे प्रयास समाज को शिक्षित और कुरीतियों से मुक्त करते हुए समाज बंधुओं को प्रगति की राह पर अग्रसर करते हैं। यह प्रयास प्रदेश और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को भी नई दिशा देते हैं। राज्य सरकार मीना समाज के इन प्रयासों में पूरी तरह साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में आयोजित मीना समाज सम्मेलन और मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मध्यप्रदेश मीना समाज सेवा संगठन की ओर से तीन बड़ी मालाऐं पहनाकर स्वागत अभिनंदन और साफा बांधकर अंग वस्त्रम भेंट कर सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लिए पूर्व मंत्री श्री राम निवास रावत ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित, खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और पदक विजेयता एवं अन्य विधाओं में उपलब्धियां अर्जित करने वाले मीना समाज के 16 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक गतिविधियों के लिए दान देने तथा अन्य पहल करने वाले मीना समाज के वरिष्ठजन को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर विशेष रूप से उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मीना समाज पर श्री हरि की अत्यंत कृपा रही है, भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी मीना समाज की उत्पत्ति जन सामान्य को जल और जीवन का महत्व बताती है।मीना समाज में बहुत प्रतिभाएं हैं, समाज नवरत्नों से परिपूर्ण है और युवा पीढ़ी तो पढ़ाई तथा खेल में अपना लोहा मनवा रही है। समाज के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतें, यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज ने हर परिस्थिति में संघर्ष किया और परिवारों के लिए प्रगति की राह प्रशस्त की। मीना समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्थान के उद्देश्य से वर्ष 1980 में मीना समाज सेवा संगठन स्थापित किया गया था। संगठन के कार्यों के सकारात्मक परिणाम वर्तमान में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों के जीवन को सरल बनाने के लिए व्यवस्थाओं में कई नवाचार किए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में ही प्रदेश में देश की पहली तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं का कार्य आरंभ हुआ है। इन परियोजनाओं से श्योपुर, गुना सहित चंबल और मालवा का क्षेत्र सिंचित होगा, जिसका मीना समाज को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर जातिगत जनगणना का बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत इस वर्ष मकानों की गिनती होगी और आगामी कार्यवाही वर्ष 2027 में की जाएगी। जातिगत जनगणना से अतीत के कई उल्झे प्रश्नों का समाधान निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। समाज बंधु उद्योग धंधे लगाने और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें, राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों से ही भगवान श्रीराम अयोध्या में मुस्कुरा रहे हैं। भगवान श्रीराम की तरह भगवान श्रीकृष्ण भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार मीनेष बोर्ड के गठन पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज की धर्मशाला के निर्माण में राज्य शासन की ओर से सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मीना समाज शिक्षा, संस्कार और संगठन के बल पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और प्रदेश एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

विवाह संस्कार और रीति-रिवाज भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विवाह संस्कार और रीति-रिवाज हमारी भारतीय गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कर्नाटक के राज्यपाल गेहलोत नागदा में विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल नव दंपति को दिया आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विवाह संस्कार हमारी भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाणिग्रहण संस्कार भारतीय समाज में विशेष महत्व रखता है। विवाह के माध्यम से कन्या अपने नए जीवन की शुरुआत करती है और माता–पिता का आशीर्वाद उसके जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। ये सभी रीति–रिवाज हमारी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने नव दंपत्ति एवं परिवारजनों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नागदा में  राजेश धाकड़ के सुपुत्र के विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए। कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गेहलोत भी विवाह कार्यकम में शामिल हुए और उन्होंने नवविवाहित वर–वधू रितिक एवं वर्षा को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय दांपत्य जीवन की कामना की। कर्नाटक के राज्यपाल  गेहलोत और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवारजनों के साथ सामूहिक फोटो सेशन में सहभागिता की एवं सहभोज भी किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद  बाल योगी उमेशनाथ, घटिया विधायक  सतीश मालवीय, नागदा विधायक  तेजबहादुर चौहान, शाजापुर विधायक अरुण भीमावत सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

वर्ष 2026 को कृषि आधारित उद्योगों के विकास वर्ष के रूप में मनायेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शुभागमन – 2026 पर प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 के शुभ आगमन पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2026 नई ऊर्जा, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का संकल्प लेकर आया है। इसे हम मध्यप्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों के समग्र विकास वर्ष के रूप में मनायेंगे। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष 2025 में उद्योग और निवेश के क्षेत्र में हमें जो उपलब्धियां मिलीं, वे प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। वर्ष 2026 इसी बुनियाद को और भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार, समाज और जवाबदेह प्रशासन सबके संयुक्त प्रयासों से मध्यप्रदेश विकास, संस्कृति, नवाचार और कल्याण के पथ पर निरंतर अग्रसर है। विरासतों को सहेजकर हम किसानों, युवाओं, माताओं-बहनों और गरीब वर्ग के सशक्तिकरण के साथ 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आहवान करते हुए कहा है कि आइए, हम सब एकजुट होकर मध्यप्रदेश की विकास यात्रा को नये क्षितिज और नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।  

हर किसान के खेत तक पहुँचेगा सिंचाई के लिए जल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य सिंचाई के रकबे में हो रही है निरंतर वृद्धि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की खुशहाली की परिकल्पना को साकार करते हुए मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा प्रदेश को दी गई तीन बड़ी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने में सफलता मिलेगी। साथ ही प्रदेश की अन्य निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाऍ भी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगी। प्रदेश में गत दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। किसानों की तरक्की और खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि के अतिरिक्त पेयजल, उद्योगों, विद्युत उत्पादन आदि के लिए जल की उपलब्धता कराये जाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो अभियान के सपने को साकार करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। इस परियोजना से पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जाएगी। इस परियोजना से न केवल सिंचाई अपितु पेयजल एवं विद्युत उत्पादन का लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की दूसरी महत्वपूर्ण पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों आदि के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। प्रदेश में आकार ले रही तीसरी महत्वपूर्ण परियोजना तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना है, जो कि विश्व में अपने आप में एक अनूठा प्रयास है। इस परियोजना अंतर्गत वर्षा के दौरान ताप्ती नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिए उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों के मध्य सहमति बन चुकी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी की "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में सर्वोच्च स्थान पर है। प्रदेश में सिंचाई के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है। जल संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को राष्ट्रीय जल अवार्ड भी मिला है। केन-बेतवा राष्ट्रीय परियोजना परियोजना की लागत 44 हजार 605 करोड़ रूपये है। इससे सिंचाई 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी। परियोजना से बुन्देलखण्ड के 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ, निवाडी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 2 हजार ग्रामों के 7 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। साथ ही 44 लाख आबादी को पेयजल मुहैया हो सकेगा। परियोजना से 103 मेगावॉट विद्युत (जल विद्युत) और 27 मेगावॉट सौर उर्जा का उत्पादन होगा। भू-जल की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, पर्यटन एवं रोजगार के अवसर में भी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने परियोजना का भूमि-पूजन पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसम्बर 2024 को किया। परियोजना का कार्य प्रांरभ हो चुका है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय परियोजना परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रूपये है। इसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा 35 हजार करोड़ रूपये का है। परियोजना से मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 13 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर मालवा, शाजापुर, श्योपुर, ग्वालियर एवं भिण्ड में 6.16 लाख हेक्टेयर में नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिण्ड, मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा हो सकेगी। साथ ही लगभग 2 हजार 94 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी। मध्यप्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनायें इसमें शामिल की गई हैं। मेगा तापी रीचार्ज परियोजना पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुनः भरण वाली इस परियोजना की कुल लागत 19 हजार 244 करोड़ रूपये है। इसे 10 मई 2025 को महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के मध्य राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई। परियोजना से बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले की 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। अटल भू-जल योजना से भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 06 जिलों सागर- दमोह छतरपुर- टीकमगढ़-पन्ना एवं निवाडी के 09 विकासखंडों की 670 ग्राम पंचायत क्षेत्रों में जन सहभागिता से जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु भारत सरकार की सहायता से 314.44 करोड़ राशि की योजना 2020 से अक्टूबर 2025 तक क्रियान्वित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी राष्ट्रीय एवं राज्यीय परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई के रकबे को बढ़ाने और हर खेत तक पानी पहुँचाने में सफलता मिलेगी। राज्य सरकार ने सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना भी बनाई है, जिसे अमल में लाना शुरू कर दिया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- दुग्ध उत्पादन तथा प्रोसेसिंग में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार की अपार संभावनाएं

किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए पीपीपी मोड पर दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार हो मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक हुई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का भी आधार बनाया जाए। दुग्ध उत्पादन तथा उसकी प्रोसेसिंग व मार्केटिंग में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन कृषकों की आय बढ़ाने में भी प्रभावी रूप से सहायक है। सभी जिलों में समन्वित रूप से गतिविधियों संचालित करते हुए सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। सांची प्रोडेक्ट्स की ब्राण्डिंग में गोवंश और गोपाल को शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में वरिष्ठ विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों की दक्षता और क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम स्तर तक गतिविधियां संचालित की जाएं। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि दुग्ध संकलन व्यवस्था की मजबूत निगरानी हो। दूध खरीदी की कीमतें उत्पादकों के लिए लाभप्रद हों और खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो तथा दुग्ध उत्पादकों को उनका भुगतान नियमित रूप से समय-सीमा में प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीपीपी मोड पर निजी भागीदारी और डेयरी सहकारी समितियों के समन्वय से दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार किया जाए। इससे सम्पूर्ण प्रदेश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन प्रदान करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केन्द्रित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं। इससे डेयरी प्लांट संचालन में मदद मिलेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात सांची ब्राण्ड के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है तथा सांची डेयरी शुरू करने की मांग कई स्थानों से आ रही है। दुग्ध उत्पादकों को दूध मूल्य के नियमित एवं समय पर भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर तय किया गया है। दुग्ध संघों द्वारा दूध खरीदी मूल्यों में 2 रूपए 50 पैसे से 8 रूपए 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। अब तक 1241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है तथा 635 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। सम्पूर्ण डेयरी वेल्यू चैन का डिजीटाईजेशन करने के लिए भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, बुंदेलखंड तथा जबलपुर दुग्ध संघों में सॉफ्टवेयर क्रियान्वित किया गया है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ से मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई है। जिससे दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2029-30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी कवरेज का विस्तार करने प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन करने, प्रतिदिन 35 लाख लीटर दुग्ध विक्रय और 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता का लक्ष्य लेकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।  पिछले 2 वर्ष से बंद शिवपुरी डेयरी संयंत्र को प्रारंभ करने के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई है। जबलपुर में स्थापित 10 मेट्रिक टन क्षमता के पनीर प्लांट को पुन: आरंभ करने के लिए 5 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इंदौर में स्थापित 30 मेट्रिक टन क्षमता का दूध पाउडर संयंत्र प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से 3 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। बैठक में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमेन श्री मीनेश शाह, कार्यकारी निर्देशक, श्री एस. रघुपति, महाप्रबंधक श्री जिगनेश शाह, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोस्वामी, ग्रुप हेड श्री असीम निगम, ग्रुप हेड, डॉ. शुभंकर नंदा, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 3.77 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को अंतरित की 810 करोड़ रुपए भावांतर राशि

प्रदेश के हर युवा को रोजगार दिलाएगी सरकार विकास का कारवां यूं हीं चलता रहेगा – हमने जो कहा, वो करके भी दिखाया जावरा में बनेगा आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम, वन स्टॉप सेंटर भी बनाया जाएगा जावरा में हेरिटेज भवन निर्माण और स्कूल मरम्मत के लिए दिए जाएंगे 2-2 करोड़ रुपए ग्राम शुजापुर और पिपलौदा में बनेगा बालिका छात्रावास 145 करोड़ की लागत वाले 33 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन जावरा में हुआ सोयाबीन भावांतर राशि अंतरण का राज्य स्तरीय सम्मेलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर, केवल एक योजना नहीं किसानों के प्रति सरकार का श्रद्धाभाव है। भावांतर की राशि किसानों के अधिकार की राशि है। यह राशि किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार के संकल्प का प्रतीक है। किसानों के कल्याण के लिए हम कभी भी पीछे नहीं रहेंगे। नए वर्ष 2026 को हमने अन्नदाताओं के कल्याण को ही समर्पित किया है। अगले वर्ष हम कृषि उत्सव मनाएंगे। किसान भाइयों की समृद्धि का उल्लास मनाएंगे। आधुनिक तरीके से खेती, कृषि विस्तार सेवाएं और नई-नई तकनीकों को हम गांव-गांव तक पहुंचाएंगे, जिससे किसान भाई अपनी खेती-किसानी को और बेहतर बनाने के लिए सही समय पर सही निर्णय ले सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश की जनता से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है। प्रदेश के विकास का यह कारवां कभी रूकेगा नहीं। हम विकास के प्रकाश से किसी को भी वंचित नहीं रहने देंगे। प्रदेश की प्रगति में सबकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को अभी 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, इस राशि को 3 हजार रूपये तक बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और हुनरमंद युवा को हमारी सरकार रोजगार उपलब्ध कराएगी। प्रदेश के 32 लाख से अधिक किसानों को सरकार सोलर पम्प उपलब्ध कराएगी। सोलर पंप की कुल लागत पर हम किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान भी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रतलाम जिले के जावरा में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत किसानों को भावांतर राशि वितरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 3.77 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को 810 करोड़ रुपए की भावांतर राशि बैंकखातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की। इसमें रतलाम जिले के 12 हजार 386 किसान भी शामिल हैं, जिनके खातों में 20.74 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से भेजे गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की भावांतर राशि को मिलाकर हमारी सरकार अबतक प्रदेश के 6.25 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को करीब 1300 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का भुगतान कर चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करीब 145 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले 33 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर रतलाम जिलेवासियों को भी नये साल की अग्रिम सौगातें दीं। इसमें 18 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 127 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 21 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सभी विकास कार्य रतलाम जिले को सुंदर, स्वच्छ और नागरिक सुविधाओं के मामले में अव्वल बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मालवा के गांधी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की जीवनी पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सम्मेलन में आए किसानों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर जावरा नगर में एक आधुनिक आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि निराश्रित महिलाओं के अल्प आश्रय के लिए जावरा में वन स्टॉप सेंटर बनाया जाएगा। जावरा में हेरिटेज भवन के निर्माण और एक बेहद पुराने जीर्ण-शीर्ण स्कूल की सम्पूर्ण मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री ने इन दोनों कार्यों के लिए 2-2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बेटियां भी पढ़ाई-लिखाई में किसी से पीछे नहीं रहेंगी। उन्होंने रतलाम जिले के ग्राम शुजापुर और ग्राम पिपलौदा में एक-एक नवीन बालिका छात्रावास भवन बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का लाभ रतलाम जिले को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय परियोजना से राजस्थान के 15 जिले और मध्यप्रदेश के मालवा और चंबल अंचल के 15 जिले (30 से अधिक जिले) कृषि सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध पालन में भी वृहद स्तर पर वृद्धि करने की ओर तेजी से अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा क्षेत्र में करीब 5 हजार करोड़ रुपए लागत से एक नया आधुनिक फोर-लेन हाई-वे बनने जा रहा है। यह हाई-वे रतलाम जिले की सीमा से भी गुजरेगा। इस हाई-वे के निर्माण के लिए किसानों की सभी मांगे मानी जाएंगी। आवश्यकता हुई तो, भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि भी बढ़ा दी जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जावरा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे एक ऐसा व्यक्तित्व है जिनके कृतित्व से क्षेत्र आलोकिक हुआ है। डॉ. पांडे ने अपने परिश्रम से जन सेवा की मिसाल कायम की है। मुझे प्रसन्नता है कि मुझे उनका सानिध्य मिला है और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे के चरित्र को हमें अंगीकार करना चाहिए उनका व्यक्तित्व बहुआयामी रहा है। मध्यप्रदेश शासन की जनहित कार्य नीतियों का जिक्र करते हुए श्री तोमर ने कहा कि आज प्रदेश के लाखों किसान भावांतर जैसी योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार सफलतापूर्वक सर्वाहारा वर्ग के लिए कार्य कर रही है। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीड है। जहां-जहां फसलों को नुकसान हुआ प्रदेश सरकार द्वारा वहां किसानों को राहत राशि प्रदान की गई है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिनव रूप से जनकल्याणकारी कार्यों की शुरुआत की है। किसान के हित में कार्य करने वाले मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक हित में सदैव अग्रणी रहे हैं। कंषाना ने प्रदेश के किसानों की ओर से … Read more

महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर के शताब्दी समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच का संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संत परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और समाज सुधार की साझी विरासत से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को जबलपुर में महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह को इंदौर से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित इस संस्था ने आजादी से पहले और बाद में शिक्षा के क्षेत्र में महती भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों के आधार पर बाजीराव पेशवा, शिंदे, होलकर और गायकवाड़ राजवंशों ने मध्यप्रदेश के विकास और संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान दिया है। नई शिक्षा नीति और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नई शिक्षा नीति को लागू करने में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रदेश सरकार ने 55 जिलों में 'पीएम एक्सीलेंस कॉलेज' प्रारंभ किए हैं। साथ ही, पाठ्यक्रमों में लोकनायकों और जननायकों की जीवनियों को शामिल किया गया है, जिससे युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके। उन्होंने बताया कि सरकार ने खरगोन में टंट्या मामा विश्वविद्यालय, गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और ग्वालियर में रानी अवंतिबाई विश्वविद्यालय शुरू किये हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि अब केवल इतिहास पर गर्व करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा। श्री फडणवीस ने कहा कि यदि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर में मराठी भाषा सिखाने के लिए कोई नया उपक्रम या कोर्स शुरू करता है, तो महाराष्ट्र सरकार उसके लिए आवश्यक निधि और पूरा सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा, यहां तक कि मेडिकल और इंजीनियरिंग में भी मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 'स्वराज्य' के साथ 'स्वधर्म' और 'स्वभाषा' का नारा दिया था। उन्होंने पानीपत के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि मराठों ने केवल अपने साम्राज्य के लिए नहीं, बल्कि समूचे भारत की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि मराठी व्यक्ति कभी संकुचित विचार नहीं रखता बल्कि उसका दृष्टिकोण हमेशा राष्ट्रव्यापी और वैश्विक होता है। उन्होंने संस्था को भविष्य के लिए आगाह करते हुए कहा कि हमने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन का दौर देखा है, लेकिन अब दुनिया 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की लहर की ओर बढ़ रही है। इसका शिक्षा क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों का आह्वान किया कि वे अगले 25 से 50 वर्षों की योजना बनाएं और विद्यार्थियों को एआई की चुनौतियों के लिए तैयार करें। श्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री के मंत्र 'विकास भी और विरासत भी' का उल्लेख करते हुए कहा कि वही समाज आगे बढ़ता है, जिसे अपनी विरासत पर गर्व होता है। उन्होंने प्रशांत पाल द्वारा लिखित पुस्तकों का जिक्र करते हुए कहा कि अब भारत का सच्चा इतिहास साक्ष्यों के साथ सामने आ रहा है, जो पुरानी भ्रांतियों को तोड़ रहा है। श्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव की व्यस्तता के बावजूद वे इस कार्यक्रम में शामिल हुए, क्योंकि जहां महाराष्ट्र का नाम और शिक्षण का विषय जुड़ा हो, वहां वे आए बिना नहीं रह सकते। कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। जबलपुर के विकास की रूपरेखा में श्री फडणवीस का विजनरी योगदान: लोक निर्माण मंत्री सिंह लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर के विकास के वर्तमान स्वरूप की नींव रखने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस की अहम भूमिका रही है। उन्होंने श्री फडणवीस को एक 'विजनरी' नेता बताया। उन्होंने एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब श्री फडणवीस विधायक थे, तब उन्होंने जबलपुर प्रवास के दौरान देर रात 'बड़ा फुहारा' और 'छोटा फुहारा' जैसी घनी बस्तियों का दौरा किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि इच्छाशक्ति हो तो जबलपुर तेजी से आगे बढ़ सकता है। उनके द्वारा सुझाए गए बिंदुओं पर ही शहर के विकास की रूपरेखा तैयार की गई। मंत्री श्री सिंह ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में अधोसंरचना विकास के लिए वे महाराष्ट्र के नवाचारों का अनुसरण करेंगे और वहां के 'इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल' का अध्ययन करेंगे।  स्थानीय भाषा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक : परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे स्वयं इस विद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं और यहां उन्होंने 4 महीने तक शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि 40-42 साल पहले जबलपुर में अच्छी शिक्षा के लिए महाराष्ट्र हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च और मॉडल स्कूल जैसे कुछ ही प्रतिष्ठित संस्थान थे। उन्होंने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि अब स्थानीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति, जैसे रामायण और गीता को भी शिक्षण पद्धति में शामिल किया जा रहा है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अजय विश्नोई, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, वरिष्ठ समाज सेवी व चिंतक प्रशांत पाल, अखिलेश जैन, नगर अध्यक्ष  रत्नेश सोनकर, प्रख्यात चिकित्सक डॉ. जामदार सहित महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के पदाधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।