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सूखे खेतों में पानी पहुँचने पर मिट्टी उगलती है सोना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के सूखे खेतों में जब सिंचाई का पानी पहुंचता है तो मिट्टी सोना उगलती है। किसान कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए उनके खेतों में सिंचाई की भरपूर व्यवस्था की जाएगी, जिससे वे वर्ष भर फसलें ले सकें। सिंचाई का रकबा बढ़ाने और हर खेत किसान के खेत तक पानी पहुंचाने के लिये मध्यप्रदेश के बजट 2026-27 में जल प्रदाय योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये है। प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचित रकबे में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। शीघ्र ही प्रदेश में सिंचाई के रकबे को 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में जल प्रदाय योजनाओं के लिये जो प्रावधान किये गये हैं, उनमें मुख्य रूप से नर्मदा घाटी विकास के अंतर्गत एन.वी.डी.ए. के सभी बिजली बिलों के लिए 689 करोड़ रुपये, सेंधवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 500 करोड़ रुपये, सांवेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना में 400 करोड़ रुपये, आई.एस.पी. कालीसिंध उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना फेस-2 में 400 करोड़ रुपये, बरगी नहर व्यपवर्तन योजना में 399 करोड़ रुपये, चिंकी बोरास बैराज संयुक्त बहुउद्देशीय माइक्रो सिंचाई परियोजना में 350 करोड़ रुपये, सरदार सरोवर के डूब प्रभावित क्षेत्र का भू-अर्जन तथा अन्य कार्यों पर खर्च के लिये 308 करोड़ रुपये, एन. बी. कम्पनी लिमिटेड का निवेश में 303 करोड़ रुपये, खण्डवा उद्वहम माइक्रो सिंचाई योजना में 300 करोड़ रुपये, नर्मदा (आई.एस.पी.) पार्वती लिंक परियोजना फेस 3 एवं 4 में 300 करोड़ रुपये, शहीद इलाप सिंह माइक्रो सिंचाई योजना में 300 करोड़ रुपये, महेश्वर-जानापाव (लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर) उद्वहन सिंचाई योजना में 200 करोड़ रुपये, निवाली उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 200 करोड़ रुपये, मोरण्ड गंजाल परियोजना से संबंधित स्थापना व्यय के लिए 200 करोड़ रुपये, राघवपुर परियोजना के लिए 150 करोड़ रुपये, शङ्कर पेंच लिंक संयुक्त परियोजना में 150 करोड़ रुपये, धार उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 150 करोड़ रुपये, शेर सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये बसानिया परियोजना में 100 करोड़ रुपये और अपर बुढ़नेर सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये, हाट पिपल्या सिंचाई योजना के में 100 करोड़ रुपये, अपर नर्मदा परियोजना में 100 करोड़ रुपये, बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये, माँ रेवा उद्वहन सिंचाई परियोजना में 100 करोड़ रुपये, सोंडवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये, भू अर्जन के लिये मुआवजा के लिये 100 करोड़ रुपये, सिंचाई एवं पेयजल योजनाओं का सौर उर्जीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये, हण्डिया बैराज परियोजना में 100 करोड़ रुपये, नर्मदा नदी के किनारे घाट निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये, मुख्य अभियंता आई.एस.पी. के अधीन संचालित सभी योजनाओं के स्थापना व्यय के लिए 74 करोड़ रुपये, मुख्य अभियंता आर.ए.बी.एल.एस. के अधीन संचालित सभी योजनाओं के स्थापना व्यय में 66 करोड़ रुपये, मुख्यालय स्थापना के लिए 53 करोड़ रुपये, दूधी परियोजना में 50 करोड़ रुपये, कुक्षी उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये, मछरेवा सिंचाई योजना के लिए 50 करोड़ रुपये और खालवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रावधान शामिल हैं। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत किये गए प्रावधानों में बांध तथा संलग्न कार्य के लिए 3062 करोड़ रुपये, केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 1000 करोड़ रुपये, कार्यपालिक स्थापना के लिए रुपये 992 करोड़, नहर तथा उससे संबंधित निर्माण कार्य के लिए 450 करोड़ रुपये, बांध तथा नहरें के लिए 312 करोड़ रुपये, लघु एवं लघुतम सिंचाई योजनाएं के लिए 300 करोड़ रुपये, कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के लिए 290 करोड़ रुपये, लघु सिंचाई योजनाओं के लिए 200 करोड़ रुपये, नहरें तथा तालाब के लिए 198 करोड़ रुपये, अन्य लघु सिंचाई निर्माण कार्य के लिए 115 करोड़ रुपये और निर्वाचित कृषक संस्थाओं को राशि की व्यवस्था के लिए 61 करोड़ रुपये के प्रावधान शामिल हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी से ग्वालियर के कृषि मंथन में कृषि वैज्ञानिकों को दिया संदेश

कृषि में शोध बढ़ायेंगे, मंडी निर्यात नीति भी लायेंगे सरसों को भी लायेंगे भावांतर के योजना में दलहन-तिलहन, औषधीय और मसाला फसलों का भी बढ़ा रहे उत्पादन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। इनके अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह वर्ष 'खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक' की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा। इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से कृषि विश्वविद्यालय परिसर, ग्वालियर में हो रहे 'कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026' को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। हम जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाले हैं। हम कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि हम खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। 'कृषि मंथन' राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और कृषि विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे। वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।  

ड्रोन, एआई, स्मार्ट सिंचाई और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा, कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक के साथ आगे आएंगे तो मध्यप्रदेश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में बल्कि कृषि आधारित उद्योगों, जैविक उत्पादों और एग्री-एक्सपोर्ट में भी देश में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बास्केटबाल कॉम्पलेक्स में एक निजी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित “किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ” कार्यक्रम में रूबरू हुए। साथ ही युवाओं और विशेषज्ञ किसानों से संवाद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाना, किसान कल्याण की नीतियों पर संवाद स्थापित करना, आधुनिक खेती और तकनीक को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, किसान, कृषि वैज्ञानिक एवं उद्यमी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद कार्यक्रम में प्रश्नों के जवाब में कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और राज्य को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह वर्ष कृषि और किसानों को समर्पित कर किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में युवा किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर मुख्यमंत्री से सीधे संवाद भी किया। इस दौरान रोबोट द्वारा भी मुख्यमंत्री जी से कृषि विकास को लेकर प्रश्न किया गया। इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से कहा कि यदि वे नई तकनीक, ड्रोन, जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ेंगे, तो न केवल अपनी आय बढ़ा सकेंगे बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में युवाओं की भागीदारी से उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात में वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों और युवाओं के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ लेकर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई तकनीकों—जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि प्रबंधन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से कृषि को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। भावांतर योजना के तहत किसानों को समर्थन मूल्य के अंतर की राशि प्रदाय की जा रही है। सरकार द्वारा कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सब्सिडी योजनाएं तथा किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, कृषि यंत्रीकरण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। प्रदेश ने गेहूं, सोयाबीन, चना और अन्य फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, नर्मदा परियोजनाओं के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने, माइक्रो इरिगेशन को प्रोत्साहन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा फसल विविधीकरण जैसी पहलों से किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश में बिजली की सरप्लस उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। किसानों को 24 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। सोलर पंप पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे प्रदेश में लगातार सिंचाई के रकबे में वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जिसे वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन रही है। आज कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के माध्यम से तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आधुनिक एवं नवाचार आधारित खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों का सम्मान भी किया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फीता काटकर “किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ” कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर युवाओं द्वारा लगायी गई कृषि आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और सराहना की। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, विधायक राकेश गोलू शुक्ला, रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़ और महेन्द्र हार्डिया, सुमित मिश्रा सहित संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, आयोजक राजेश राठौर राज राठौर भी मौजूद थे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात से जनसामान्य को देश हित और सबके विकास के लिए प्रेरित किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म है। देश में मैदानी स्तर पर घटित होने वाली सूक्ष्मतम गतिविधियों का वे ध्यान रखते हैं और उन्हें देशवासियों से साझा करते हैं। किसानों द्वारा एक ही स्थान पर विविध फसलें लेने के लिए किया गया नवाचार हो या केरल में बच्चे के अंगदान का मामला हो मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिलनाडु की पूर्व प्रधानमंत्री सुजयललिता को याद करना देश की विविधता को अभिव्यक्ति देने के समान है। प्रधानमंत्री मोदी के विचारों में समग्रता और सबके विकास की सोच प्रकट होती है। प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम की यह विशेषता है कि इस संवाद में कभी राजनैतिक विषय नहीं आते, वे सदैव देश हित को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका यह विजन हम सबके लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात कार्यक्रम के श्रवण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस लाइन स्थित स्टेडियम में दिव्यांग खिलाड़ियों तथा स्थानीय रहवासियों के साथ मन की बात कार्यक्रम का श्रवण किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, विधायक भगवान दास सबनानी, राहुल कोठारी, रविन्द्र यति उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अन्नदाता, युवा, महिला, गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश के कोने-कोने में विकास, जनकल्याण के लिए हो रहे नवाचारों और पहल का ध्यान रखना और उन्हें देशवासियों से नियमित तौर पर साझा करना सराहनीय है। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई एम्पैक्ट समिट-2026 के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिट में प्रदेश के कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही पहल को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश के हित में एआई का किस प्रकार अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सकता है, इस पर विचार करना ही हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा।  

प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांग कह कर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले निशक्तजनों की इच्छा शक्ति को किया प्रोत्साहित

प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से किया प्रदेश को गौरवान्वित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है। उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है। इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है। मुख्मयंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस लाइन स्टेडियम में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग खिलाड़ियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया। पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि विश्व में पहली बार एक ऐसा आयोजन हो रहा है जहां खेल की गूंज लगातार 100 घंटे तक रहेगी। दिन हो या रात दिव्यांग खिलाड़ी अपने प्रयासों से एक नया इतिहास बचेंगे। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन खेल महोत्सव में 25 टीमों के 350 खिलाड़ी भाग लेंगे। यह महोत्सव 26 फरवरी तक जारी रहेगा। स्थानीय विधायक भगवानदास सबनानी ने सभी का आभार माना। कार्यक्रम में अजय जामवाल, राहुल कोठारी, रविन्द्र यति और दिव्यांग खिलाड़ी उपस्थित रहे ।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज दतिया को देंगे 532 करोड़ रूपये के विकास की सौगातें

सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का करेंगे लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दतिया जिले की तहसील सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में 532 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें मुख्य रूप से सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का लोकार्पण शामिल हैं। साथ ही सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसई सहित अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सनकुआ धाम के समीप स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में पूजन-अर्चन भी करेंगे। कृषि उपज मंडी प्रांगण सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 299.32 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और 233.24 करोड़ रुपये की लागत के 21 कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करेंगे। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित करेंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में की इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सहभागिता

निर्भय होकर एआई से प्रदेश के विकास की सभी संभावनाओं पर करेंगे काम प्रदेश में एआई बेस्ड डेटा सेंटर की स्थापना के लिए निवेशक आमंत्रित मध्यप्रदेश जल्द लांच करेगा स्टेट एआई मिशन कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सुशासन में एआई का करेंगे उपयोग धार्मिक पर्यटन बढ़ाने और सिंहस्थ महाकुंभ के समुचित नियोजन एवं प्रबंधन में करेंगे एआई का इस्तेमाल   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कोई भी नई तकनीक तभी सार्थक है, जब वह मानवता के हित में अवसरों से भरपूर और कारगर हो। हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) को नवाचार के साथ सबके विकास, सामाजिक समरसता, सुशासन और देश-प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साधन के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत आज डिजिटल परिवर्तनों को अपनाकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में एआई कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन उद्योग और प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एआई के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ेगी, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और आम नागरिक तक योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प का आह्वान करते हुए कहा कि देश के विकास के लिए सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हम सब एकजुट होकर एआई के माध्यम से भारत को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। एआई तकनीक हमारे लिए अवसर भी है और जिम्मेदारी भी। शीघ्र ही मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन लांच करेगा, जो शासन प्रणाली, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक अवसरों को तकनीक आधारित रूप में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के समापन सत्र में सहभागिता की। उन्होंने भारत मंडपम् स्थित भोपाल मीडिया सेंटर में नेशनल मीडिया करेस्पांडेंट्स से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के भविष्य और इसके इस्तेमाल पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एआई से निर्भय होकर देश के हित में काम करने पर जोर दिया है। हमारी सरकार प्रदेश की समृद्धि के लिए सभी चुनौतियों से उबरकर तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें मध्यप्रदेश भी अपनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश, भारत का 5वां बड़ा राज्य है। राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एआई की मदद से सही समय पर बीमारियों की पहचान और उनका निदान एवं सुदूर अंचलों तक बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। मध्यप्रदेश में नए-नए उद्योग स्थापित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त भूमि और पानी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई को “नये जमाने की नई वैज्ञानिक विधा” बताते हुए इसके जिम्मेदारीपूर्ण और मानवीय उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई तकनीकी प्रगति के माध्यम के साथ मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने का सशक्त साधन भी है। भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है कि एआई का विकास और उपयोग भारतीय मानवीय मूल्यों के संरक्षण के साथ हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में प्रतिभा, संसाधन और दृष्टि, तीनों का अद्वितीय संगम मौजूद है। सही दिशा में एआई का उपयोग कर हम अपने देश को वैश्विक एआई परिदृश्य में अग्रणी भूमिका में ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य इसकी तकनीकी श्रेष्ठता, नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशिता में निहित है। यह हम पर है कि हम इसका उपयोग किस तरह, किस दिशा में और किस लक्ष्य के लिए कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश देश के मध्य में स्थित है। हमारे पास पर्याप्त लैंड बैंक है। प्रदेश में एआई आधारित एक बड़ा डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस डेटा सेंटर की स्थापना के लिए हमने बड़े निवेशकों और कम्पनियों को भी आमंत्रित किया है। एआई के जरिए प्रदेश के तकनीकी विकास और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण को गति मिलेगी। प्रदेश के नागरिकों के कल्याण के लिए हम हर सेक्टर में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। किसानों और युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका क्रांतिकारी सिद्ध होगी। किसानों के लिए फसलों में होने वाली बीमारियों की सही समय पर जांच और उपचार करने से उत्पादन में लाभ मिलेगा। बहुफसलीय खेती को बढ़ाने, किसानों को बिजली-पानी और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने, प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और आवागमन सुगम बनाने सहित हर सेक्टर में एआई का भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के बड़े और छोटे शहरों में आईटी पार्क बनाए जा रहे हैं। हमारे युवाओं में टैलेंट की कमी नहीं है। युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है। एआई के माध्यम से भी लाभ देने पर विचार किया जा रहा है। प्रदेश में एआई सेक्टर के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट सपोर्ट, इंडस्ट्री में उपयोग, रिसर्च और इनोवेशन से जुड़कर इंडस्ट्री रिसर्च सेंटर को प्रोत्साहन देकर आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लिए हम आगे बढ़ेंगे। एआई स्टार्ट-अप को सरकार के साथ काम करने का अवसर देने के लिए भी हम काम कर रहे हैं। एमएसएमई में नए शोध को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर नई संभावनाओं की ओर देख रहा है। इस सेक्टर में भी एआई के उपयोग को भविष्य में प्रोत्साहन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा राज्य कृषि क्षेत्र में समृद्ध होता जा रहा है। मध्यप्रदेश गेहूं और धान उत्पादन में अग्रणी है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए फल उद्यान, बागवानी फसलों और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग हमारे सभी किसानों को एआई का भरपूर लाभ दिलाने में मदद करेगा। प्रदेश सरकार कृषि उत्पादन सहित हर सेक्टर में एआई के उपयोग के लिए तैयार है। एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर में भी एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्य में सिकल सेल एनीमिया से लड़ने में भी एआई का लाभ लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के प्रदेश में सबसे … Read more

आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश के लिए उपयुक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कर्मयोगी बनें" की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम "कर्म योगी शिक्षाविद्" की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने "अभ्युदय मध्यप्रदेश" का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। 'कर्मयोगी बने' कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।  

रोड शो के साथ विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण व भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषक कल्याण वर्ष के पहले राज्य स्तरीय विशाल एवं भव्य किसान सम्मेलन 18 फरवरी बुधवार को ग्वालियर जिले के ग्राम कुलैथ में शुभारंभ करेंगे। वे 87.86 करोड़ रुपए लागत के 41 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। किसान सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सांसद भी भारत सिंह कुशवाह सहित अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उन्नत खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों को हितलाभ वितरित करेंगे। कुलैथ में उन्नत कृषि तकनीक पर प्रदर्शनी भी लगेगी। प्रदर्शनी में उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती व पशु नस्ल सुधार को प्रमुखता से शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान सम्मेलन में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर स्थानीय किसानों की पारंपरिक बैलगाड़ी-दौड़ होगी। साथ ही भगवान कृष्ण आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति भी होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कुरवाई विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने माना आभार

कोठा डैम बैराज परियोजना 83 गांव को सिंचाई और 325 गांव को मिलेगी पेयजल की सुविधा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और विधायक श्री हरि सिंह सप्रे के नेतृत्व में विदिशा जिले के कुरवाई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोठा के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में भेंट की। किसानों ने कोठा बैराज डैम परियोजना के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र के लगभग 83 गांवों को सिंचाई सुविधा और 325 गांवों को पेयजल का लाभ प्राप्त होगा। ग्रामीणों द्वारा बैराज डैम पर लगभग 10 फीट ऊंचा पुल निर्माण कर वाहनों के आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।