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मुख्यमंत्री साय शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में हुए शामिल

शहीद गैंदसिंह के नाम पर चौक, मूर्ति स्थापना और सामाजिक केंद्रों की घोषणा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण

श्रीमंत शंकर देव के विचार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की नींव : डेका श्रीमंत शंकर देव के लेखनी से पूरा देश गौरवान्वित हुआ है : साय रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं। मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा। गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जन-हितैषी पहल, ‘मिशन कनेक्ट’ से चौपाल तक पहुँचा प्रशासन

गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है। गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान          विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाड़ियों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए। गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान            निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ। कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा           निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।         सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्ट' ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

बस्तर अंचल का होगा चहुंमुखी विकास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कांकेर जिले को 284 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने सहित कई घोषणाएं रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और इसके बाद बस्तर अंचल में तेजी से विकास दृष्टिगोचर होगा। मुख्यमंत्री साय आज कांकेर जिले पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम में 284 करोड़ रूपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री साय ने नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में परलकोट क्षेत्रवासियों के विकास के लिए विभिन्न घोषणाएं भी की गई, जिनमें नए शिक्षा सत्र से बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने की घोषणा की। उन्होंने संबलपुर से दुर्गूकोंदल होते हुए पखांजूर तक सड़क निर्माण, पखांजूर के मंडी गेट से अंजाड़ी नाला तक गौरवपथ, मछली मार्केट पखांजूर से नर-नारायण सेवा आश्रम तक सीसी सड़क, शासकीय कन्या शाला मैदान में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण, पखांजूर में फायर ब्रिगेड वाहन सेवा शुरू करने तथा सिविल अस्पताल पखांजूर में धनवंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स स्थापित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने जनसमुदाय को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रशासनिक कार्याेें में स्वच्छता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करने की इच्छा शक्ति के साथ लगातार विकास की ओर आगे बढ़ रही है।  साय ने बताया कि प्रधान मंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्पों का अनुसरण करते हुए प्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। दो साल की अल्पावधि में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास की स्वीकृति दी है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 08 लाख हितग्राहियों ने गृह प्रवेश भी कर लिया है। इसी तरह महतारी वंदन योजना में 70 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में नियद नेल्लानार, धरती आबा अभियान, पीएम जनमन जैसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही है, जिससे विकास कार्याे कों गति मिली है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को पुनः प्रारंभ किया गया। मेहनतकश किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की जा रही है। कार्यक्रम को कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग अंतागढ़ विधायक  विक्रमदेव उसेण्डी ने भी सम्बोधित किया।   मुख्यमंत्री साय ने नर नारायण सेवा आश्रम पहंुचे और वहां पूजा अर्चना कर तथा प्रदेशवासियांे की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण की सेवा है ध्येय से स्थापित किए गए इस आश्रम में आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाने का पुण्य कार्य किया जा रहा है। उन्होंने वहां आश्रम के संस्थापक स्वामी सत्यानंद परमहंस के तैलचित्र एवं प्रतिमा का विधिविधानपूर्वक पूजन किया। इसके पश्चात वे पखांजूर के मुख्य मार्ग पर स्थित परकोट विद्रोह के क्रांतिकारी शहीद गैंद सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनकी शहादत को नमन किया।     इस अवसर पर विधायक आशाराम नेताम, राज्य हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, पूर्व सांसद मोहन मण्डावी, पूर्व विधायक  मंतूराम पवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय बोले – विकास की रफ्तार बढ़ी, युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बालोद जिले के नगर पंचायत मुख्यालय गुण्डरदेही में 233 करोड़ रुपये की लागत से 103 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें ₹163.88 करोड़ के 61 कार्यों का भूमिपूजन तथा ₹69.82 करोड़ के 42 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गुण्डरदेही में एक सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के लिए ₹1 करोड़ तथा प्रत्येक वार्ड में विकास कार्यों हेतु ₹1 करोड़ की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज जिन विकास कार्यों का लोकार्पण शिलान्यास किया गया है, वे सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि अवसरों के नए द्वार हैं। उन्होंने कहा कि ₹1 करोड़ की लागत से बनने वाले व्यावसायिक परिसर से युवाओं को स्वरोजगार और व्यापार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं सड़क, पुल एवं अधोसंरचना के निर्माण से आवागमन सुगम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार हर वर्ग के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है, तेंदूपत्ता संग्राहकों को उच्चतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, और चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ कर आदिवासी श्रमिकों को राहत पहुंचाई जा रही है। वनोपज के मूल्य संवर्धन से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना से आमजन को देश की संस्कृति और विरासत से जोड़ा जा रहा है। वहीं प्रभावी पुनर्वास नीति के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति लौट रही है और बस्तर अंचल में विकास की नई रोशनी फैल रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार आज भी युवाओं को आत्मबल, राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी रजत जयंती मना रहा है और इस अवसर पर रायपुर में डिजिटल आदिवासी संग्रहालय का निर्माण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की एक विशेष सौगात है, जहां आदिवासी नायकों की गौरवगाथा सहेजी गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को विकास के नए आयामों तक ले जाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इस अवसर पर सांसद भोजराज नाग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि बस्तर, जो कभी लाल आतंक के लिए जाना जाता था, अब शांति, प्रगति और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ रहा है और इससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय का स्थानीय व्यापारियों द्वारा लड्डुओं से तौलकर अभिनंदन किया गया। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण पत्र वितरित किए।कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने स्वागत उद्बोधन में नगर की विकास आवश्यकताओं की जानकारी दी। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गोवा में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम, गोवा में आयोजित 'आदि लोकोत्सव' पर्व–2025 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 'आदि लोकोत्सव' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकोत्सव देश की आदिम संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत उत्सव है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी भव्य तथा व्यापक स्वरूप में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती दी और अपने अदम्य साहस से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुष ऐसे हैं, जिन्हें देश के इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशभर में सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज की महान वीरांगना थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके गौरव को स्थायी स्वरूप देते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है और यहां के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन जनजातीय नायकों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। मुख्यमंत्री साय ने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस डिजिटल संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है कि आज देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति के रूप में भी जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री मोदी की समावेशी सोच का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों का स्मरण किया और कहा कि उनके कार्यकाल में ही पहली बार देश में आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें उनके साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान पहले नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में होती थी, लेकिन आज वह तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और राज्य अब शांति, विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन क्षेत्रों में पहले निवेश नहीं आते थे, वहां अब उद्योग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य के आर्थिक भविष्य की नई दिशा तय कर रहे हैं।  

युवा ऊर्जा का राष्ट्रीय मंच बना बालोद, रोवर-रेंजर जंबूरी में बोले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ का बालोद जिला आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का नया केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला बालोद के ग्राम दुधली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार रोवर-रेंजर अपनी सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक जंबूरी छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का सुनहरा अवसर है। राष्ट्रीय स्तर के कैंपिंग, रोवर-रेंजर प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संध्याओं और सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभागी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बालोद की धरती पर उमड़ा यह उत्साह भारत की भावी पीढ़ी की ऊर्जा, समर्पण और संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के खेल, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित, प्रशिक्षित और आत्मविश्वासी युवा शक्ति ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने जंबूरी में भाग ले रहे सभी रोवर-रेंजरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका उत्साह और सेवा भाव छत्तीसगढ़ का परचम देश-दुनिया में और ऊँचाई तक ले जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से की सौजन्य भेंट

  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज गोवा प्रवास के दौरान गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच आपसी सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की

रायपुर की IPHL देश की पहली NQAS प्रमाणित प्रयोगशाला बनी – छत्तीसगढ़ ने स्थापित किया राष्ट्रीय मानक केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ को दी बधाई: मुख्यमंत्री  साय ने आभार व्यक्त किया, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने का संकल्प दोहराया रायपुर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे  पत्र में नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है। केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार  जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि  यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

स्वामी विवेकानंद ने दुनिया में बढ़ाया भारत की संस्कृति एवं सनातन का मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अल्पायु में ही संपूर्ण विश्व को भारत की सनातन संस्कृति, अध्यात्म और दर्शन से परिचित कराते हुए देश का सम्मान बढ़ाया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सेंड ऑफ सेरेमनी समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर प्रतिवर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है तथा राष्ट्रीय युवा उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह उत्सव भारत की युवा ऊर्जा, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण की भावना का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हम छत्तीसगढ़ वासियों के लिए यह बड़े सौभाग्य की बात है कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपना अधिकांश समय रायपुर में बिताया। बूढ़ा तालाब एवं डे-भवन जैसी पावन स्थलों की स्मृतियाँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए 75 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया गया है, जो पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। इनमें 45 युवा विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग से, 1 युवा डिजाइन फॉर भारत ट्रैक से तथा 29 प्रतिभागी सांस्कृतिक ट्रैक्स से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ के युवाओं का  प्रतिनिधित्व भारत की युवा शक्ति, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और विकसित भारत के संकल्प में सहभागी बनने का सुनहरा मौका है। उन्होंने कहा कि  छत्तीसगढ़ के युवा राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोकनृत्य, लोकगीत और युवा नेतृत्व का प्रदर्शन करेंगे। इससे छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू पूरे देश में बिखरेगी और राज्य गौरवान्वित होगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय स्तर पर चयनित सभी प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के युवा 9 जनवरी को नई दिल्ली पहुँचकर देश के विभिन्न प्रांतों से आए युवा कलाकारों एवं यंग लीडर्स से मुलाकात करेंगे और विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। 11 जनवरी को इसरो के गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला  से मिलेंगे और उनके अंतरिक्ष अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस पर यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  देश के युवा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की पहचान है और युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के प्रसिद्ध संदेश – “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – का उल्लेख करते हुए युवाओं से इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि जहाँ युवा समूह होता है, वहाँ ऊर्जा का स्वाभाविक संचार होता है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सपना है कि देश के यंग लीडर्स सभी क्षेत्रों में नेतृत्व करें। हमारी सरकार ने बेहतर व्यवस्थाओं के साथ विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक युवा महोत्सव का सफल आयोजन कराया है। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों की सराहना भी की। श्री साव ने भी सभी चयनित प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने मुख्य मंच से चयनित प्रतिभागियों को वेशभूषा किट प्रदान किए। साथ ही कुछ प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। इस मौके पर युवा आयोग अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण एवं प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।