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बस्तर प्रवास को लेकर प्रशासन सतर्क, मुख्य सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर. राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों की बैठक भारत की राष्ट्रपति   द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) में बस्तर पंडुम के शुभारंभ के अवसर पर 7 फरवरी 2026 के प्रस्तावित प्रवास पर विविध तैयारियों के संबंध में अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक ली। मुख्य सचिव   विकासशील ने राष्ट्रपति महोदया के प्रवास अवसर पर सुरक्षा, चिकित्सा, आवागमन सहित तमाम जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बस्तर कलेक्टर से की जा रही तमाम व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसी तरह से मुख्य सचिव ने रायपुर कलेक्टर से भी जानकारी लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में जनसम्पर्क एवं संस्कृति विभाग के सचिव   रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव   अविनाश चंपावत, गृह विभाग की सचिव   नेहा चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव   अमित कटारिया, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन, कृषि क्षेत्र में नई पहल

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन भोपाल राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त , सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि (प्रत्येक से एक) , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधि(प्रत्येक से एक-एक) , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी (संयुक्त सचिव स्तर) सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास (राज्य मिशन संचालक NMEO-OS) को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।     राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन,  और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी। समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे (इंफास्ट्रक्चर) और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों (कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि) के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जाएंगे।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का पुनर्गठन

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति पुनर्गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का पुनर्गठन राज्य स्तरीय समन्वय समिति को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में किया गया पुनर्गठित मुख्य सचिव की देखरेख में पुनर्गठित हुई राज्य स्तरीय समन्वय समिति भोपाल सिंचाई के लिए सोलर पम्प स्थापना की "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" के क्रियान्वयन के लिए मंत्रि-परिषद की 18 नवम्बर 2025 को हुई बैठक के निर्णय अनुसार राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित "राज्य स्तरीय समन्वय समिति" का पुनर्गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में सचिव ऊर्जा, वित्त, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सदस्य होंगे। सचिव नवीन नवकरणीय ऊर्जा को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति द्वारा योजना के सभी घटकों अंतर्गत प्रगति की नियमित समीक्षा की जायेगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच आवश्यक समन्वय बनाना, योजना की प्रगति नियमित (अधिकतम 3 माह) में समीक्षा करना जिससे समय-सीमा में लक्ष्य की प्राप्ति हो सके। योजना को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करना तथा योजना क्रियान्वयन के संबंध में भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ समन्वय करना और राज्य में योजना क्रियान्वयन में सुधार के उपाय सुझाना जैसे समिति द्वारा कार्य किये जायेंगे।  

सरकार ने बनाई राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी, मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन भोपाल       प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की तीन नदी परियोजनाओं के कमांड क्षेत्र विकास आधुनिकीकरण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया गया है।     सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, वन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, प्रमुख अभियंता, जल संसाधन,  अभियांत्रिकी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, आयुक्तकमाण्ड क्षेत्र विकासभोपाल, मुख्य अभियंता, केन्द्रीय जल आयोग, भोपाल और मुख्य अभियंता (बोधी), जल संसाधन, भोपाल समिति में सदस्य होंगे। सचिव, जल संसाधन, को सदस्य सचिव बनाया गया है।      कमाण्ड क्षेत्र विकास का आधुनिकीकरण (MCAD) के लिए आयुक्त (केड) जल संसाधन विभाग नोडल अधिकारी होंगे। गाइडलाइन के अनुसार राज्य स्तरीय स्टियरिंग कमेटी (SLSC) योजना के समुचित प्रबंधन एवं समन्वय के लिए उत्तरदायी रहेगी। समिति ये कार्य करेगी      राज्य स्तरीय वार्षिक कार्य योजना अनुमोदित करना और उसके क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा करना। कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति तथा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करना और कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शन/निर्देश देने का कार्य समिति करेगी। 

आयुक्त नगरीय प्रशासन की अध्यक्षता में जी-हब क्रियान्वयन इकाई का गठन

भोपाल  राज्य शासन द्वारा जी हब पहल के अन्तर्गत शहरी क्षेत्र को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही जी-हब क्रियान्वयन इकाई समिति भी गठित की गयी है। इस पहल द्वारा चिन्हित नगरीय क्षेत्र के आर्थिक विकास की रणनीति तथा इसे प्राप्त करने के लिए रोडमैप तैयार किया जायेगा। इस कार्य में नीति आयोग द्वारा सहयोग प्रदान किया जायेगा। मध्यप्रदेश शासन द्वारा भोपाल आर्थिक क्षेत्र (भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन एवं सीहोर) के लिए एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र (इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, रतलाम, शाजापुर एवं खंडवा) को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के लिए इकोनॉमिक प्लान तैयार करने का अनुरोध नीति आयोग को भेजा जा चुका है। संचालन समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास, वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम, उदयम, पर्यावरण, वन, गृह, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, ऊर्जा, स्कूल शिक्षा, सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया है। संचालन समिति के कार्य अंतर्गत राज्य स्तर पर G-Hub Initiative की दिशा एवं रणनीति निर्धारण करना, भोपाल आर्थिक क्षेत्र एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र के लिए इकोनॉमिक प्लान तैयार करने के लिए नीति आयोग एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जायेगा। अंतर्विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना, प्रगति की नियमित समीक्षा करना और अन्य राज्यों/अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने के लिए मार्गदर्शन देना जैसे काम समिति द्वारा किये जायेंगे। जी-हब क्रियान्वयन अंतर्गत भोपाल आर्थिक क्षेत्र मे अध्यक्ष आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को बनाया गया है। आयुक्त-भोपाल एवं नर्मदापुरम, जिला कलेक्टर-भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम एवं सीहोर और नगर निगम आयुक्त-भोपाल, मुख्य नगरपालिका अधिकारी- राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, एवं सीहोर समिति में सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया हैं। जी-हब क्रियान्वयन अंतर्गत इंदौर आर्थिक क्षेत्र मे अध्यक्ष आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को बनाया गया है। आयुक्त इंदौर एवं उज्जैन, जिला कलेक्टर-इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, रतलाम, शाजापुर एवं खंडवा और मुख्य नगरपालिका अधिकारी-धार, खरगोन एवं शाजापुर सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया हैं। जी-हब क्रियान्वयन (भोपाल एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र) के कार्य अंतर्गत संबंधित रीजन (भोपाल/इंदौर) के लिए बेसलाइन डेटा संग्रहण एवं आर्थिक प्रोफाइल तैयार करना, नीति आयोग द्वारा साझा किए गए प्रारूपों, प्रश्नावलियों एवं अन्य इनपुट्स के अनुसार डेटा एकत्रित कर समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना, जिलों एवं नगरीय निकायों से सुझाव, आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं का संकलन कर इकोनॉमिक प्लान का प्रारूप तैयार किया जायेगा। निवेश, उद्योग, अवसंरचना, शहरी विकास, कृषि, स्वास्थ्य एवं सामाजिक क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को पहचानकर कार्य योजना बनाना, स्थानीय स्तर पर परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करना तथा पीएम गति शक्ति एवं अन्य राष्ट्रीय राज्य स्तरीय योजनाओं के साथ उनका समन्वय करना, संचालन समिति को समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट एवं समीक्षा विवरण प्रस्तुत करना, कार्यक्रम की निगरानी एवं मूल्यांकन सुनिश्चित करना तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम सुझाना और अन्य राज्यों एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन कर क्षेत्रीय योजनाओं में उनका समावेश किया जायेगा।  

मादक पदार्थ नियंत्रण को लेकर बड़ी पहल, राज्य में बनी नार्को कोऑर्डिनेशन समिति

भोपाल  मध्य प्रदेश शासन ने नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन (एनसीओआरडी) समिति का पुनर्गठन किया गया है। यह समिति राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी, उनकी अवैध खेती और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। समिति में गृह, चिकित्सा शिक्षा, सामाजिक न्याय, वन, कृषि, वाणिज्यिक कर और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव शामिल होंगे। साथ ही पुलिस महानिदेशक, एनसीबी, डीआरआई, सीबीएन, ईडी, राज्य एड्स नियंत्रण समिति, डाक विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी सदस्य बनाए गए हैं। यह समिति राज्य में नशे की रोकथाम से जुड़े सभी पहलुओं पर नीति और रणनीति तैयार करेगी। इसके तहत ड्रग्स की तस्करी पर निगरानी, बंदरगाहों और सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाले अवैध परिवहन को रोकना, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना और नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा समिति राज्य में फोरेंसिक जांच क्षमता को बढ़ाने, अवैध मादक फसलों की खेती वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक विकास कार्यक्रम चलाने और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड के उपयोग की निगरानी भी करेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि इस समिति के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी पर सख्त नियंत्रण किया जा सके और समाज में नशा मुक्त वातावरण तैयार किया जाए। 

जिलों से विलेज एक्शन प्लान शीघ्र तैयार करने की अपेक्षा : मुख्य सचिव जैन

भोपाल  मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने कहा कि नवाचारी प्रयासों से समस्याओं के वैकल्पिक समाधान तलाशें और आदर्श प्रक्रियाएं अपनाएं। जनजातीय विकास की योजनाएं संवेदनशील प्रकृति की होती हैं, इसलिये समय-सीमा का ध्यान रखा जाये। मुख्य सचिव  जैन कलेक्टर कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन जनजातीय विकास कार्यों, आदि कर्मयोगी अभियान, पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजाति उत्कर्ष अभियान, वन अधिकार अधिनियम संबंधी विषयों पर कलेक्टर-कमिश्नर से यह बात कही। प्रमुख सचिव जनजाति कार्य  गुलशन बामरा ने प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत सभी जिले शीघ्र ही प्रत्येक ग्राम का विलेज एक्शन प्लान तैयार कर ग्राम सभा से अनुमोदन करवाये। विलेज एक्शन प्लान के आधार पर डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान तैयार होगा और डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान के आधार पर स्टेट एक्शन प्लान तैयार होगा। इस प्रकार तैयार हुए प्लान का नई दिल्ली में प्रस्तुतिकरण होगा और सर्वश्रेष्ठ प्लान को पुरस्कृत किया जाएगा। कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आदि कर्मयोगी अभियान में 14 हजार 40 लक्षित गांव के 10 हजार 893 विलेज एक्शन प्लान बन चुके हैं। इन गांवों में 11 हजार 394 आदि सेवा केंद्र स्थापित हो चुके हैं। आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान जन धन, जाति प्रमाण-पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज जारी किए गए उनकी संख्या 17 लाख 70 हजार 745 है। प्रतुतिकरण में बताया गया कि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट कार्य हुआ है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में शिवपुऱी, मैहर, रायसेन, कटनी और भिंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। लंबित जाति प्रमाण पत्र जारी करने में जबलपुर, रायसेन और सिवनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सभी जिलों से अधोसंरचनात्मक कार्य जैसे हॉस्टल निर्माण, सड़क निर्माण, आंगनवाड़ी भवन निर्माण, बहुउद्देशीय सेंटर निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिये गये।  बामरा ने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 15 नवंबर को राष्ट्रव्यापी जनजाति गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। सभी जिलों से पीएम जनमन के अंतर्गत आने वाली योजनाओं में निर्धारित कार्यों को 15 नवंबर से पहले पूरा कर ले। अपर मुख्य सचिव‍वन  अशोक बर्णवाल ने जिला कलेक्टर्स से वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दिसंबर 2025 तक पूर्व के निरस्त दावों का पुनः परीक्षण कर निराकरण करने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि सामाजिक सामुदायिक वन संधारण के संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों की मान्यता के लिए जिलेवार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप दिसंबर तक कार्रवाई पूरी करें और लंबित दावों का निराकरण करें। वन ग्रामों के राजस्व गांव में परिवर्तन करने के लिए अपनाई गई आदर्श प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश जिलों को दिये, जिससे सभी वन अधिकार-पत्र धारकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। वर्तमान में 29 जिलों में कुल 792 वन ग्रामों के परिवर्तन की कार्यवाही प्रचलन में है। संरक्षण क्षेत्र में स्थित 66 वन ग्रामों में कार्रवाई शेष है। इन वन ग्रामों की बाहरी सीमाओं का निर्धारण एवं नक्शा तैयार किया जाना है और कब्जे तथा वयस्कता का निर्धारण कराकर वन अधिकार पत्र के लिए पात्रता निर्धारित की जाना है। वन अधिकार के दावों का निराकरण करने में भोपाल, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर छतरपुर ने उच्च प्रदर्शन किया है। उत्कृष्ट कार्यों का हुआ प्रेजेन्टेशन आदि सेवा केन्द्रों की स्थापना में बड़वानी खरगोन, नरसिंहपुर, सीहोर और इंदौर जिलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सत्र में बैतूल जिले ने आदि कामयोगी अभियान शिवपुरी ने पीएम जनमन आवास, शहडोल ने पीएम जनमन आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र एवं आयुष्मान कार्ड वितरण संबंधी कार्य एवं बालाघाट ने वन अधिकार दावों के निराकरण पर प्रस्तुतिकरण दिया।  

मंत्री बैंस ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, कहा—शिक्षक हैं ज्ञान और मूल्यों के स्तंभ

चंडीगढ़ पंजाब में अब कोई भी शिक्षक पढ़ाने के सिवाय गैर शैक्षिक कार्य नहीं करेगा। शिक्षामंत्री हरजोत बैंस ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से इस संदर्भ में सभी विभागों को सख्त हिदायत जारी करें। शिक्षामंत्री ने साफ कहा कि शिक्षकों के लिए कक्षाएं सबसे ज्यादा जरूरी कार्य हैं न कि अन्य कार्य। कई जिलों में शिक्षकों को कक्षाओं से हटाकर रुटीन प्रशासनिक कामों में लगाने की रिपोर्टों पर शिक्षामंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस रिवायत को शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के साथ घोर अन्याय करार दिया। उन्होंने शिक्षण ड्यूटी को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिक्षक अपनी मुख्य जिम्मेदारी पर ही ध्यान केंद्रित करें। मुख्य सचिव को लिखे पत्र में मंत्री बैंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षक केवल साधारण सरकारी कर्मचारी नहीं हैं – वे ज्ञान और मूल्यों के ध्वजवाहक हैं, जिन्हें पंजाब के भविष्य को दिशा देने की पवित्र जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें कक्षाओं की जगह विभिन्न प्रशासनिक कामों में लगाना न केवल उनके साथ बल्कि हमारे बच्चों के साथ भी अन्याय है। ऐसा करने से बच्चों की शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है। बताते चलें कि इस संदर्भ में सूबे के शिक्षक भी मांग कर रहे थे, जिस पर अब शिक्षा मंत्री संज्ञान ले लिया है। मंत्री ने आरटीई एक्ट का दिया हवाला मंत्री ने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 की धारा 27 का हवाला देते हुए कहा कि यह धारा गैर-शैक्षिक उद्देश्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगाती है। यह मनाही केवल कुछ विशेष मौकों जैसे दस वर्षीय जनगणना, आपदा राहत कार्य और स्थानीय संस्थाओं, राज्य विधानसभाओं या संसदीय चुनावों में ड्यूटी पर लागू नहीं होती। शिक्षा मंत्री बैंस ने बताया कि यह व्यवस्था बहुत सोच-समझकर लागू की गई थी ताकि शिक्षकों का समय और ऊर्जा क्लासरूम शिक्षण पर केंद्रित रह सके, जो हमारे समाज की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि कई बार जरूरी सरकारी काम हो सकते हैं, लेकिन ऐसे कार्यों के लिए शिक्षक को पहला विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कक्षाओं में उनकी मौजूदगी के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। लिखित अनुमति लेना अनिवार्य पत्र में मुख्य सचिव को निर्देश देते हुए मंत्री बैंस ने कहा कि सभी प्रशासनिक विभागों और जिला अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं कि आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 27 में बताई गई ड्यूटी के अलावा शिक्षकों की कोई भी गैर-शैक्षिक ड्यूटी न लगाई जाए। ऐसी कोई भी स्थिति, जहां शिक्षकों की तैनाती आवश्यक हो, ऐसी किसी भी तैनाती से पहले स्कूल शिक्षा विभाग से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए।

झारखंड प्रशासन में बड़ा बदलाव: अविनाश कुमार को मिली मुख्य सचिव की जिम्मेदारी

रांची झारखंड सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया है। बता दें कि झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी बीते मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गईं। अलका तिवारी के स्थान पर विकास आयुक्त और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही अविनाश कुमार को अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के अवर सचिव विनोद कुमार ने इस आशय की अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के नए मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अविनाश कुमार की कार्यकुशलता व अनुभव से राज्य प्रशासन को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीएम ने उम्मीद जताई कि इससे सरकार के जनसेवा के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त अलका तिवारी को भावभीनी विदाई दी। सीएम ने कहा कि निवर्तमान मुख्य सचिव ने अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अनुभव और योगदान को देखते हुए अलका तिवारी को राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नामित किया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके सेवा काल की सराहना करते हुए कहा कि तिवारी ने सदैव ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य किया। उन्होंने राज्य प्रशासन को एक नई दिशा दी और प्रशासनिक परंपराओं को मजबूती दी। उल्लेखनीय है कि अविनाश कुमार 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ज्ञातव्य है कि अलका तिवारी ने एक नवंबर 2024 को झारखंड के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके पति डी के तिवारी भी झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं।  

विकासशील बने छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव, वरिष्ठ IAS अधिकारियों को पछाड़ते हुए संभाली कमान

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी विकासशील को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. वे छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव होंगे और मुख्य सचिव अमिताभ जैन की जगह लेंगे. विकासशील 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. शासन ने उनका आदेश जारी कर दिया है. वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर होंगे.  सीनियर अधिकारियों को किया सुपरसीड आईएएस विकासशील की नियुक्ति में 4 सीनियर अधिकारियों को सुपरसीड किया गया है. इन अफसरों में रेणु पिल्ले, सुब्रत साहू, अमित अग्रवाल और मनोज कुमार पिंगुआ शामिल हैं. पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब पौने चार साल तक मुख्य सचिव रहेंगे. बतां दे कि मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में अब तक 12 मुख्य सचिव रह चुके हैं. विकासशील 13वें मुख्य सचिव होंगे.  30 सितंबर को लेंगे पदभार वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. इसी दिन शाम को वे विकास शील को औपचारिक रूप से पदभार सौंपेंगे. पदभार के बाद विकासशील मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. परंपरा के अनुसार, जिस दिन नया मुख्य सचिव पदभार ग्रहण करता है, उस दिन कोई बड़ी मीटिंग नहीं होती, सिर्फ सीएम से मुलाकात होती है. अगले दिन मंत्रालय में अफसरों की बैठक आयोजित की जाएगी.  जानिए कौन है IAS विकासशील विकासशील का जन्म 10 जून 1969 को उत्तरप्रदेश में हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीई, बाद में एमई किया. 4 सितंबर को 1994 में IAS सर्विस जॉइन की. उस समय मध्यप्रदेश कैडर के अफसर थे. बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उन्होंने कैडर छत्तीसगढ़ चुन लिया. वे बिलासपुर और रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कई अहम पदों पर काम भी कर चुके हैं. 2018 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. स्वास्थ्य कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव रहे. जल शक्ति मंत्रालय में पेयजल और स्वच्छता विभाग में जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक रहें. जनवरी 2024 से एशियन डेवलपमेंट बैंक में कार्यकारी निदेशक के सलाहकार पद पर पोस्टेड थे.  पौने चार साल का होगा कार्यकाल नए मुख्य सचिव विकास शील का जन्म जून 1969 में हुआ था। इस हिसाब से जून 2029 में वे 60 साल के होंगे। यानी 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब 3 साल 9 महीने तक मुख्य सचिव रहेंगे। लंबे कार्यकाल की दृष्टि से वे छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्य सचिव होंगे। सबसे लंबा कार्यकाल अमिताभ जैन का रहा है, जिन्होंने चार साल 10 महीने तक यह जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद विवेक ढांड ने 3 साल 11 महीने तक पद पर काम किया था। विकासशील की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबा कार्यकाल मिलने के कारण उनसे शासन की योजनाओं और नीतियों को निरंतरता और स्थायित्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सीएस की रेस में शामिल रहे इन 4 अफसरों को पछाड़ा- CS पद के लिए क्या होती है योग्यता ? मुख्य सचिव बनने के लिए 30 से 33 साल की प्रशासनिक सेवा की आवश्यकता होती है। आमतौर पर मुख्यमंत्री राज्य के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त करते हैं। इस पद के लिए कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है। इस दौरान कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए राज्य के मुख्यमंत्री की मंजूरी की आवश्यकता होती है।