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लखीमपुर में 213 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, हजारों को मिला भूमि अधिकार

 लखीमपुर खीरी सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी के एक और गांव का नाम बदलने का ऐलान किया। लखीमपुर खीरी में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने खीरी जिले के गांव मियांपुर का नाम बदलने की घोषणा की। सीएम योगी ने कहा, गुरुदेव के नाम पर मियांपुर को अब रविंद्रनगर के नाम से जाना जाएगा। सीएम योगी ने तत्कालीन सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पहले की सरकारों ने पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम मियांपुर रख दिया था, लेकिन गांव में एक भी मियां नहीं था। सीएम योगी ने 331 हिंदू बांग्लादेशी परिवारों को सौगात देते हुए कहा, डबल इंजन सरकार में सभी वर्ग का विकास हुआ है। 1971 में पाकिस्तान के बंटवारे पर सीएम योगी ने कहा, पाकिस्तान के अभी और टुकड़े होंगे। पाकिस्तान की वजह से हिंदुआ पर बहुत अत्याचार हुआ है। शनिवार को लखीमपुर खीरी पहुंचे सीएम योगी ने 213 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके बाद जनसभा को संबोधित किया। सीएम योगी ने बांग्लादेश से विस्थापित विभिन्न हिंदू परिवारों को संक्रमणीय एवं असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि न्याय का वह क्षण है, जिसने इतिहास की अधूरी तमन्ना को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धर्म की व्याख्या परहित सरिस धरम नहीं भाई के रूप में की गई है और इसी भावना के साथ डबल इंजन सरकार पिछले नौ वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में पहली बार थारू समुदाय, जो महाराणा प्रताप को अपना पूर्वज मानता है, उसे भूमि अधिकार उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वर्तमान वंशजों को भी अधिकार पत्र दिए गए हैं, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों ने बसाया तो था, लेकिन स्वामित्व अधिकार नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से विस्थापित परिवार वर्षों पूर्व भारत आए थे और अपने साथ पीड़ा, असुरक्षा तथा अनिश्चित भविष्य लेकर आए थे। अब उन्हें भारत की धरती पर सम्मान और अधिकार मिल रहे हैं। सपा-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा, हिंदू-सिख के मरने पर विपक्षी दल नहीं बोलते हैं। सपा के लोग जिन्ना का महिमामंडल करते हैं। सपा की पहचान सिर्फ सैफई से है। कांग्रेस-सपा सरकार में सिर्फ वादे होते थे। सीएम योगी ने पाकिस्तान को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के पाप की वजह से वहां के हिंदू विस्थापित हुए। कांग्रेस ने विस्थापितों को कोई अधिकार नहीं दिया सीएम योगी ने कहा, कांग्रेस ने विस्थापितों को कोई अधिकार नहीं दिया, उल्टा गांव का नाम रख दिया मियांपुर। पाकिस्तान जाति में बांटने वाला सबसे बड़ा विश्वासघाती रहा है। हम हिंदू परिवारों को न्याय दे रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों की हत्या पर कांग्रेस, सपा, टीएमसी का मुंह सिल जाते हैं। हिंदुओं, सिखों, जैनों की संपत्ति पर कब्जों पर बोलने में विपक्ष के होठ सिल जाते हैं। योगी ने कहा कि इन परिवारों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत अधिकार दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस कानून का विरोध किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चंदन चौकी में मुख्यमंत्री ने दिया भौमिक अधिकार पत्र सीएम योगी ने खीरी को कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। चंदन चौकी में सीएम योगी ने थारू समाज के 4356 परिवारों को 5338 हेक्टेयर जमीन का अधिकार पत्र भी सौंपा। सीएम योगी ने 1955 में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए 2350 परिवारों को 4251 हेक्टेयर जमीन का अधिकार पत्र भी दिया। सीएम ने कहा कि अब थारू और पूर्वी समाज के लोगों को न वन विभाग परेशान करेगा और न राजस्व और पुलिस विभाग। अब लेखपाल कागजों में हेरफेर कर उनकी जमीन पर कोई दबंग का कब्जा करा पाएगा।

सीएम योगी लखीमपुर में 331 परिवारों को देंगे जमीन का मालिकाना हक

लखीमपुर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आज यानी कि शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण करेंगे. साथ ही 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी करेंगे. इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री के एक्स पर पोस्ट करके दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्स से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि लखीमपुर खीरी की पावन धरती पर आज अधिकार, विकास और अपने पक्के आवास का स्वप्न एक साथ साकार होंगे. बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण एवं 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया जाएगा. साथ ही, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबियां भी प्रदान की जाएंगी. ये सभी कार्य डबल इंजन सरकार के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सम्मान और सुविधा पहुंचाने के संकल्प का प्रतीक हैं. आजादी के बाद से इन परिवारों को नहीं मिली थी जमीन आजादी के बाद से अब तक बांग्लादेश से आए हिंदू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला था. लखीमपुर खीरी, धौरहरा और मोहम्मदी में 417 करोड़ की 213 पर 8 योजनाओं का सीएम लोकार्पण, शिलान्यास करेंगे. चंदन चौकी पलिया में सीएम थारू जनजाति के 4556 परिवारों को भौमिक अधिकार पत्तों का आवंटन करेंगे. साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला में 817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी करेंगे. पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों को भी मिलेगी जमीन आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. जिसके तहत विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर राज्य के चार ज़िलों में बसे 12000 से ज़्यादा परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. योग्य परिवारों को एक एकड़ तक की ज़मीन पर मालिकाना हक मिलेगा, बशर्ते कि वह ज़मीन सीलिंग सीमा के अंदर न हो और खलिहान, चरागाह या तालाब जैसी श्रेणियों में न आती हो. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह फ़ैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. खन्ना ने कहा कि कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) 2026' के तहत 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है. खन्ना ने बताया कि इस संशोधन के तहत इन परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक देने के लिए धारा 76(1) में नए प्रावधान जोड़े गए हैं. मंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पलायन करके पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर ज़िलों में बसे 12,380 परिवारों को इस कदम से फ़ायदा होगा. खन्ना के अनुसार लाभार्थियों में वे लोग शामिल हैं जो 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019' के तहत भारतीय नागरिकता के योग्य हैं, साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े परिवार या विभिन्न योजनाओं के तहत पुनर्वासित किए गए परिवार भी इसमें शामिल हैं. इस प्रकार है पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों की आबादी ज़िलावार ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी में ऐसे 2,350 परिवार हैं, पीलीभीत में 4,000, बिजनौर में 3,856 और रामपुर में 2,174 परिवार हैं. उन्होंने कहा कि ये परिवार, जो लगभग 70 वर्षों से राज्य में रह रहे हैं, ज़मीन का मालिकाना हक न होने के कारण काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रहे थे; इनमें खेती के लिए बैंक से कर्ज़ लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने में आने वाली दिक्कतें भी शामिल थीं.

लखनऊ, सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार कसेगी शिकंजा

लखनऊ लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्मार्ट फोन की लत बीमारी बन गई है। हार्ट शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। किडनी खराब होने पर व्यक्ति डायलिसिस के सहारे जीवन जी सकता है। लेकिन अगर हार्ट ब्लॉकेज हुआ तो दूसरे लोक की यात्रा हो जाएगी। सीएम ने कहा कि दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कम उम्र के लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह खराब जीवनशैली और खान-पान है। अब न हमारे उठने का समय तय है न सोने का। शारीरिक गतिविधियां घटी हैं। नियमित कसरत छोड़ लोग आराम पसंद हो गए हैं। हर व्यक्ति का करीब चार से पांच घंटे स्मार्ट फोन में खप रहा है। नतीजतन लोग दिल, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। शुक्रवार को यह गंभीर चिंता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जाहिर की। अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में पहली बार कान्फ्रेंस का आगाज हुआ। नॉन कम्युनिकेबल डीसीज चिंता का विषय- योगी कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की तरफ से नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल (एनआईसी) का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नौ से 10 साल पहले यूपी बीमारू राज्य था। अब ग्रोथ इंजन के रूप में प्रदेश तरक्की की राह पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन कम्युनिकेबल डीसीज के बढ़ते मामले चिंता का विषय है। भारत में प्राचीन काल से समय पर सोना, जागना, पौष्टिक भोजन लेना। यह सब स्वस्थ्य दिनचर्या का हिस्सा थी। समय तेजी से बदल रहा है। लोग देर रात तक जाग रहे हैं। फास्ट फूड व डिब्बा बंद भोजन पसंद कर रहे हैं। उसके परिणाम सबके सामने हैं। बीमारी हमे घेर रही हैं। हमारे सामने चुनौतियां खड़ी कर रही है। इलाज के खर्च की चिंता कम हुई चिंता से निपटने के दो रास्ते हैं। पहला बचाव व दूसरा इलाज। बचाव पक्ष पर अधिक काम करने की जरूरत है। चुनौतियों से निपटने के लिए जीवनशैली बदलें। सरकार इलाज व जागरुकता फैलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। आठ से 10 साल पहले यदि कोई गंभीर बीमारी की चपेट में आता था। तो परिवार पैसे व बेहतर की चिंता करता था। विशेषज्ञ डॉक्टर व मेडिकल संस्थानों की कमी थी। अब दोनों ही समस्याओं को हल किया जा रहा है। मुफ्त इलाज के दायरे में शिक्षक, रसोईए भी प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना शुरू की गई। भारत के 55 से 60 करोड़ लोगों को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। पांच लाख रुपये का मुफ्त इलाज मुहैया कराया जा रहा है। यूपी में आयुष्मान के दायरे में न आने वालों को सीएम योजना से कवर किया गया। शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, स्कूल के रसोईयों को योजना के दायरे में लाया गया है। सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा मुख्यमंत्री ने कहाकि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार फंदा डाल रही है। यूपी में ऐसे लोग थे जिनके पास एक भी गाय-भैंस नहीं थी, लेकिन हजारों टन खोया और पनीर की आपूर्ति का दम रखते थे। पिछले साल दीपावली में ऐसे लोगों की सूची तैयार कराई गई। बड़े पैमाने पर सुबह चार बजे एक साथ छापेमारी कराई। हजारों कुंतल मिलावटी खोआ व पनीर बरामद किया गया था। ऐसे लोगों की पहचान व छापेमारी का अभियान जारी हैं। बीमार भारत आत्मनिर्भर व संशक्त नहीं हो सकता दिल, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर समेत दूसरी बीमारियों ने चुनौती खड़ी कर दी है। अभी भी गरीब मेहनतकश को दिल की बीमारी कम होती है। लेकिन हो गई तो उसका इलाज पर आने वाले खर्च की फिक्र करने की जरूरत नहीं है। इलाज तो मुफ्त मिल सकता है लेकिन इंसान की कार्यक्षमता कैसे बचाई जा सकती है? उसे बढ़ाना कठिन कार्य है। लिहाजा सेहत को लेकर अभी से चौकन्ना हो जाएं। स्वस्थ्य नगारिक से ही स्वस्थ्य समाज होगा। सशक्त भारत के निर्माण के लिए अच्छी सेहत जरूरी है। बीमार भारत विकसित, सशक्त व आत्मनिर्भर नहीं हो सकता है। मुख्यमंत्री ने अच्छी सेहत के लिए टिप्स दी मुख्यमंत्री ने कहा कि हमे सेहत के लिए खुद ही संजीदा रहने की जरूरत है। खानपान की आदते सुधारें। फास्ट फूड से तौबा करें। घर की बनी पौष्टिक वस्तुओं का ही सेवन करें। योग करें। समय पर जागने की आदत डाले। नियमित कसरत करें। स्मार्ट फोन का इस्तेमाल रात में न करें। दिन में भी फोन का जरूरत पर ही प्रयोग करें। डॉक्टर सेहत के प्रति जागरुक करने का बीड़ा उठाएं। प्रचार प्रसार करें। इसका समाज पर प्रभाव अधिक पड़ेगा। इस कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष, अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित देवगन, लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ऋषि सेट्ठी, पीजीआई कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. सतेंद्र तिवारी, डॉ. शरद चन्द्रा, डॉ. गौरव चौधरी डॉ. अखिल शर्मा समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।

प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य, अफवाह फैलाने वालों और कालाबाजारी करने वालों पर कसा शिकंजा

लखनऊ  यूपी में पेट्रोल-डीजल और गैस की कालाबाजारी को लेकर सीएम योगी ऐक्शन में हैं। सीएम योगी ने प्रदेश में तेल और गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैंसीएम योगी के निर्देश के बाद अब तक 233 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। जबकि 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके अलावा 237 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की जा रही है। खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त ने शुक्रवार को यहां बताया कि 12 मार्च से शुरू हुए इस अभियान के तहत यूपी में 19,882 स्थानों पर छापेमारी और निरीक्षण किए गये। एलपीजी वितरकों के खिलाफ 33 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि गैस की कालाबाजारी में संलप्ति अन्य व्यक्तियों के खिलाफ 200 प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं। कार्रवाई पूरे प्रदेश में एक साथ चलाकर कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है। यूपी में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य मुख्यमंत्री ने विभिन्न मंचों से स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाकर बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में प्रशासन ने निगरानी बढ़ाते हुए ऐसे तत्वों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कार्रवाई के दौरान आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। राज्य के 12,888 पेट्रोल पंपों के माध्यम से नियमित बिक्री हो रही है, जबकि 28 मार्च से एक अप्रैल तक बिक्री के आंकड़े भी सामान्य स्तर पर रहे हैं। गैस की आपूर्ति को लेकर विभाग सतर्क वर्तमान में प्रदेश में 97,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1,26,000 किलोलीटर डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर समन्वय किया जा रहा है। एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी विभाग सतर्क है। प्रदेश के 4,107 गैस वितरकों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए राज्य स्तर पर 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है, वहीं जिला प्रशासन को भी लगातार फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।

समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के हित में दो बड़े कार्य किए। सुबह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विकास योजनाओं व तकनीक से जोड़ा तो शाम को वंचित व कमजोर वर्ग के कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का अंतरण किया। सीएम ने गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 33,334 आश्रित परिवारों को भी 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विचार भी प्रकट किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि समाजवाद के नाम पर परिवारवादी गरीबों का हक खा जाते थे। लेकिन, गरीबों के हक पर डकैती डालने वालों को मालूम है कि अब ऐसा किया तो जेल जाना पड़ेगा। सरकार उनके बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी। सीएम ने बच्चों को दिया परिश्रम का मूलमंत्र  सीएम ने बच्चों से कहा कि यह छात्रवृत्ति इसलिए है कि आप और मेहनत कर सकें। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता। छात्रवृत्ति संबल का काम कर रही है, यह आपकी मंजिल नहीं है, आपकी मंजिल परिश्रम है। परिश्रम से प्राप्त अंक ही मंजिल पर ले जाएंगे। यदि मेहनत में कोताही बरती, छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग किया और परिणाम खराब आया तो यह स्वतः ही बाधित हो जाती है। ऐसी नौबत न आने पाए।  जब संवेदना का हिस्सा बनती है सेवा तो ‘सबका साथ-सबका विकास’ होता है सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख बच्चों को 4800 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई। जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती है तो सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति-संप्रदाय नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेरणादायी मंत्र सबका साथ-सबका विकास बिना भेदभाव सभी समुदायों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के शत-प्रतिशत, पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों, सामान्य वर्ग के अतिगरीब व अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की पढ़ाई के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिले, सरकार की पहले ही दिन से यह मंशा थी।  सपा ने प्रदेश को इतना लूटा कि हमारी सरकार को 2017-18 के साथ 2016-17 के बच्चों की भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी थी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में समाजवादी पार्टी ने अनुसचित जाति-जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति ही नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तब तक प्रदेश को इतना लूट डाला था कि खाते में पैसा ही नहीं था। जो राशि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आई थी, उसे भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो 2017-18 के साथ ही हमें 2016-17 के बच्चों को भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी।  पहले तकनीक का उपयोग नहीं होता था, छात्रवृत्ति के पैसे में मनमानी करते थे अधिकारी  सीएम योगी ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम होती थी और उसमें भी तकनीक का उपयोग नहीं होता था। पैसा जिले में जाता था, वहां समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मनमानापन करते थे। छात्रों को 500 की बजाय 200-250 रुपये ही छात्रवृत्ति मिल पाती थी। पीएम ने तकनीक पर ध्यान देने को कहा, जिससे आज एक क्लिक पर 28 लाख छात्रों के खाते में 3350 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह दर्शाता है कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है।  2017 के पहले हर क्षेत्र में था भ्रष्टाचार, आधी राशि खा जाते थे सपा के गुंडे सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों व नवजात शिशुओं के पोषण आहार, कुपोषित माताओं के पोषाहार, छात्रों की छात्रवृत्ति, विकास योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ समेत सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार था। सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उनका बयान था कि सरकार एक हजार रुपये पेंशन राशि क्यों देती है। उनके समय में दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये मिलते थे, वह भी समय से नहीं। छह महीने में एक साथ 1800 रुपये जाते थे, लेकिन इसमें से दिव्यांग को केवल 900 रुपये मिलते थे और 900 रुपये इनके लोग चट कर जाते थे। विधवा-वृद्धजन पेंशन के रूप में 500 रुपये मिलते थे, छह महीने में एक साथ 3000 रुपये जाते थे। इसमें से 1500 रुपये सपा के गुंडे और बाबू हड़प कर जाते थे। सपा शासन में आधी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। यूपी में आज 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन राशि सीधे अकाउंट में मिलती है। कटौती करने वालों को मालूम है कि गरीबों के हिस्से में डकैती डालेगा तो उसकी जगह जेल होगी और सरकार बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी।  समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे सहायता राशि  सीएम योगी ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का जिक्र किया, कहा कि इसके लाभार्थियों को पेंशन व 30 हजार रुपये की राशि भी दी जा रही है। इसके तहत आज 100 करोड़ रुपये जारी हुए हैं। 2025-26 में 1.36 लाख से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3039 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी जा चुकी है। पहले यह राशि गरीबों को नहीं मिलती थी। बच्चों की सहायता, माताओं का राशन, गरीबों व वंचितों को मिलने वाली सरकार की सहायता समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे। गरीब लाचार-हताश होकर भटकते थे।  सपा के काले कारनामों के कारण ‘बीमारू’ बना था यूपी सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुंडे समानांतर सरकार चलाते थे। वंचित, दलितों की सुनवाई नहीं होती थी। सपा प्रदेश में चार बार सत्ता में आई, लेकिन एक भी दलित महापुरुष-संत व सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुष के प्रति सम्मान का भाव नही रखा। कन्नौज में बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम सपा सरकार ने बदल दिया, हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर … Read more

इस साल आंगनवाड़ी में 5 हजार कार्यकत्रियों व 60 हजार सहायिकाओं की भर्ती का लक्ष्य: सीएम योगी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित आंगनवाड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि इस वर्ष 5,000 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और 60,000 से अधिक सहायिकाओं की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनकी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही 6 वर्ष से छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का लाभ उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के तहत 3 लाख से अधिक कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्थाओं पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा, पहले प्रदेश में पोषाहार वितरण पर शराब माफिया का नियंत्रण था। कुपोषित बच्चों व माताओं के हक पर डकैती डाली जाती थी। वर्तमान सरकार ने इस माफिया तंत्र को समाप्त कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को बिना सिफारिश नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं, साथ ही स्मार्टफोन और आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग उपकरण उपलब्ध कराकर पोषण एवं बाल विकास कार्यक्रमों को डिजिटल और प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के पास स्मार्टफोन न होने से उनके काम का रियल टाइम डाटा नहीं मिल पाता था। डाटा अपलोड ना होने की वजह से हमारी रैंकिंग कम रहती है। लखनऊ की तरह स्मार्टफोन वितरण का कार्यक्रम सभी जनपदों में होना है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका और बड़ी होने वाली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 3 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए भी आंगनवाड़ी केंद्र में ही प्री-प्राइमरी स्कूल का संचालन होना है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में बेसिक शिक्षा के तहत चलने वाले 27,000 केंद्र भी आंगनवाड़ी को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। एक बच्चे को छह वर्ष की उम्र तक विकसित करने में आंगनवाड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री व सहायिका को यशोदा मैया की उपाधि दी है। यशोदा मैया ने जिस भूमिका का निर्वहन कृष्ण कन्हैया के लिए किया था, वही भूमिका आज के परिप्रेक्ष्य में आपकी है। यह अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है। उस सम्मान की गरिमा की रक्षा करना, उसके अनुरूप देश के भविष्य को गढ़ना, उसको तराशना, आगे बढ़ाना, उसकी नींव को मजबूत करना यह महती जिम्मेदारी आपके ऊपर है। कुपोषण रूपी दुश्मन से लड़ाई में सारथी हैं आप सीएम ने कहा कि अगर नवजात सुपोषित और मां स्वस्थ है, तो भारत का भविष्य सशक्त है। इसी के लिए पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इन तमाम प्रयासों में और बीमारी या कुपोषण रूपी दुश्मन से लड़ाई में आप सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं सारथी की भूमिका में रही हैं। इसीलिए सफल परिणाम हमारे सामने हैं।  450 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास मुख्यमंत्री ने कहा कि 137 करोड़ की लागत से आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण होना है। बाल विकास परियोजना के कार्यालय भवनों का शिलान्यास भी किया गया है। 313 करोड़ की लागत से प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल विकास कार्यालयों का निर्माण हो चुका है, उसका भी आज एक साथ यहीं से उद्घाटन संपन्न हुआ है। यह अभियान सुपोषित-साक्षर-सशक्त भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, आशा व एएनएम ने महामारी से बचाया सीएम योगी ने कहा कि विपत्ति के समय में भी मैंने आंगनवाड़ी, आशा बहनों और एएनएम द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों को नजदीक से देखा है। कोरोना कालखंड में फ्रंटलाइन के रूप में हमारी ये कार्यकत्रियां स्वयं को बचाते हुए दूसरों को भी सुरक्षित रखने का कार्य कर रही थीं। पीएम मोदी की कोरोना प्रबंधन योजना को धरातल पर उतारते हुए ये कार्यकत्रियां स्क्रीनिंग के साथ-साथ आवश्यक सुविधाएं प्रत्येक घर तक पहुंचा रही थीं। परिणाम यह रहा कि इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में कोविड का उत्कृष्ट प्रबंधन संभव हुआ और हमने अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने में सफलता पाई। 1 करोड़ 70 लाख से अधिक बच्चों को स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से जोड़ा मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में संभव अभियान के तहत हमने 1 करोड़ 70 लाख से अधिक बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण व स्क्रीनिंग से जोड़ा। डेढ़ लाख बच्चे कुपोषित पाए गए, इनमें 80 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से मुक्त किए जा चुके हैं। बौनापन की दर 48% से घटकर 37% हो गई है। यदि यह डाटा मोबाइल फोन के माध्यम से समय पर अपलोड होता रहेगा, तो राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की स्थिति और बेहतर होगी। फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से प्रतिमाह 1 करोड़ 56 लाख लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार वितरित कराया जा रहा है। ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य उत्तर प्रदेश है। कुपोषित माताओं के पोषाहार पर काबिज था शराब माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 35 लाख बच्चों को प्रतिदिन प्रोटीन-युक्त, कैलोरी-संतुलित गर्म पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ा है। क्या यह 2017 से पहले संभव था?  नहीं, क्योंकि 2017 से पहले पोषाहार का वितरण कौन करता था?  उत्तर भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया जिसे सरकार ने पैसा लेकर ठेका दे रखा था, वही इसका वितरण तय करता था। मैं भौंचक था, जब 2017 में हमारी सरकार बनी, तो मुझे इस बात की जानकारी मिली कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया महिला एवं बाल विकास विभाग में भी घुसा हुआ था। सभी काम शराब माफिया ही करता था। राशन भी वही तय करता था। कहीं पहुंचता था, कहीं नहीं। गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि कोई खाने योग्य स्थिति में नहीं होता था। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य के रूप में जाना जाता था। बचपन ही कुपोषित हो जाए, तो राज्य को बीमारू होना ही था। यह पाप कौन करता था? ये वही लोग हैं जो जाति के नाम पर समाज को बांटकर समाज की सुरक्षा में सेंध लगाते हैं और कुपोषित बच्चों व माताओं के पोषाहार पर डकैती डालते थे। ये वही लोग हैं जो आज नारेबाजी करके अव्यवस्था पैदा करते हैं। 2017 से … Read more

नोएडा का किस्सा सुनाकर Yogi Adityanath बोले— सत्ता से मोह छोड़ो, कुर्सी स्थायी नहीं

नोएडा नोएडा को इंटरनेशल एयरपोर्ट का तोहफा देने के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर याद किया कि कैसे इस शहर को अपशगुन मान लिया गया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह उन्हें भी नोएडा जाने से रोकने की कोशिश की गई और उन्होंने इसे अस्वीकार करते हुए चार लाख घर खरीददारों को उनका हक दिलवाया। योगी ने इस दौरान कहा कि उनसे कहा गया था कि नोएडा जाने पर कुर्सी चली जाती है तो उन्होंने कहा कि इसे एक दिन जाना ही है तो मोह में क्यों पड़ना? लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने उनकी सरकार के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा में आए बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने उस अंधविश्वास का जिक्र करते हुए अपना अनुभव साझा किया जिसमें कहा जाता था कि नोएडा जाने वाले सीएम की कुर्सी चली जाती है। यही वजह थी कि कुछ मुख्यमंत्रियों ने पूरे कार्यकाल में एक बार नोएडा आने का साहस नहीं जुटाया। लेकिन सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इस अंधविश्वास को तोड़ा। पहले कार्यकाल में कई बार वह नोएडा आए। ना सिर्फ उन्होंने पहला कार्यकाल पूरा किया, बल्कि दोबारा यूपी के सीएम बने। योगी ने पूरी कहानी साझा करते हुए कहा, 'मैं आस्था में विश्वास करता हूं, सबकी आस्था का भी सम्मान करता हूं, लेकिन अंधविश्वास को कतई नहीं मानता। एक दम नहीं मानता। मुझे बोला गया था कि नोएडा नहीं जाना। मैंने कहा क्यों तो कहा कि वहां सीएम नहीं जाते। मैंने कहा कि क्या नोएडा यूपी से बाहर है। कहा कि यह मान्यता है कि सीएम उतर जाएंगे कुर्सी से। मैंने कहा कि एक दिन कुर्सी को जाना ही है तो हम कुर्सी के मोह में क्यों पड़ें। मैं जाऊंगा जरूर और मैं गया वहां पर। जब मैं गया तो देखा कि क्यों ये लोग बोलते थे, गया तो पता चला कि वहां 4 लाख मामले थे बायर्स और बिल्डर के। आप सोचो 15 साल, 10 साल, 20 साल पहले लोगों ने अपने जीवनभर की कमाई बिल्डर को दे दी और बिल्डर पैसा दबाए बैठा है। मकान नहीं दे रहा है। कई हाईराज बिल्डिंग खंडहर में बदल गई थी। 4 लाख लोगों को मकान दिलाए, मुनाफे में अथॉरिटी: योगी मैंने बैठक की नोएडा अथॉरिटी की, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की। सीईओ आए उन्होंने कहा कि साहब हमारे ऊपर 6 हजार करोड़ का कर्जा है, दूसरी अथॉरिटी ने कहा कि हमारे ऊपर 3 हजार करोड़ का कर्जा है। मैंने कहा कि मैं कहां फंस गया हूं, सब भीखमंगे हैं। अब मैं इन भीखमंगों से कहूं कि 4 लाख लोगों को मकान दूं, तो मैं फंस गया वहां पर। मैंने कहा कि मेरी स्थिति बहुत अजीब सी है। मैंने बायर्स से बात की, वे रो रहे थे। कह रहे थे कि जीवनभर की कमाई लगा दी, मकान नहीं मिला। बैंक का कर्ज भर रहे हैं। मैं बिल्डर से मिला तो वे भी रोए, कि हमने पैसा लगाया लेकिन उस समय की सरकारों ने हमें पूरी तरह निचोड़ दिया, हमारी सामर्थ्य नहीं है। मैंने कहा कि सामर्थ्य हो या नहीं इनको मकान तो देना पड़ेगा। आप मकान दीजिए मैं पॉलिसी बनाता हूं। फिर हमने रिफॉर्म किए। भ्रष्ट तत्वों को बाहर किया। आज मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि 4 लाख लोगों को मकान दे चुके हैं। जो अथॉरिटी कहती थी कि कर्ज में हैं, वह 6 हजार करोड़ के सरप्लस में हैं। आज दुनिया का सबसे अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश वहीं पर है।' अखिलेश यादव पर कसा तंज जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के अगले ही दिन दादरी पहुंचे अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वे विकास में बाधाएं खड़ी करते थे। उन्होंने कहा, 'ये उस अंधविश्वास को मानने वाले लोग कौन थे, जो भारत की आस्था पर अंगुली उठाते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए वहां नहीं गए लेकिन अपनी विभाजनकारी राजनीति के लिए फिर आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा पहुंच गए। भाइयों-बहनों इनके चेहरे को देखो तो। उस समय वहां के विकास के लिए ये लोग बॉटलनेक थे, विकास में बाधाएं खड़ी कीं। आज किस मुंह से विकास की बात करते हैं।'

नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ-समर्थ युवा बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला

योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ लखनऊ पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है। सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है। योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़,  रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी। मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई।  वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

यूपीसीडा की पहल से 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹800 करोड़ निवेश प्रस्तावित

योगी सरकार के विजन को मिली गति, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ा भरोसा अब तक 61 परियोजनाओं को स्वीकृति, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश से किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें लगभग ₹800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। सरकार की उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 के तहत निवेशकों को निजी भूमि पर लॉजिस्टिक्स और भंडारण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता और टैक्स छूट दी जा रही है। इसी नीति के प्रभाव से निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इन नई स्वीकृत परियोजनाओं में 5 साइलो, 2 वेयरहाउसिंग और 1 लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो उन्नाव, औरैया, बलरामपुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ समेत विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में विकास होगा, जिससे प्रदेश की कृषि और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी। 61 परियोजनाओं को मिल चुकी मंजूरी, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश इन 8 नई परियोजनाओं के साथ ही अब तक यूपीसीडा द्वारा वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 और पीआईपी नीति के अंतर्गत कुल 61 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएं करीब 810 एकड़ भूमि पर विकसित होंगी और इनमें ₹12,900 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से अनाज के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं मिलेंगी तथा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस क्लस्टर और आधुनिक वितरण केंद्रों के विकास को गति मिलेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के अवसर भी उत्पन्न होंगे। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। इसके लिए मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, कोल्ड चेन, साइलो और वितरण केंद्रों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लगातार बेहतर किया जा रहा है। प्राधिकरण का प्रयास है कि नीति के तहत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन निवेशकों तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाए जाएं। सरकार न केवल निवेश आकर्षित करने, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

सीएम योगी का बड़ा संदेश: जवान बेफिक्र रहें, परिवार की सुरक्षा सरकार करेगी

लखनऊ  ‘आप बेफिक्र होकर देशसेवा कीजिए। आपके परिवार समेत प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सेवा, सहूलियत, सुरक्षा और सम्मान सरकार के जिम्मे है। सरकार इसे लेकर पहले दिन से गंभीर है।’ ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में आए सैनिकों से कहीं। मुख्यमंत्री ने सैनिकों की समस्याएं सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया कि निश्चिंत होकर घर जाइए। सरकार हर समस्या का उचित निराकरण कराएगी। ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से पुलिस, जमीनी विवाद, आर्थिक सहायता व स्थानांतरण आदि से जुड़े मामले भी आए। सीएम ने एक-एक कर सबकी समस्याओं को सुना, प्रार्थना पत्र लेकर अधिकारियों को समय सीमा के अंदर उनके उचित निस्तारण का निर्देश दिया। ‘जनता दर्शन’ में कई जनपदों से सैनिक भी आए। इनमें से कुछ मामले जमीनी विवादों के भी थे। सीएम योगी ने इनके प्रार्थना पत्र लिए और स्थानीय जिला-प्रशासन व पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश की सीमा व आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों से संपर्क करें। उनकी समस्याओं का हर हाल में समयसीमा के अंदर उचित निराकरण कराएं और पीड़ित परिवार को संतुष्ट करें। ‘जनता दर्शन’ में पुलिस, जमीनी विवाद, आर्थिक सहायता और स्थानांतरण से जुड़े मामले भी आए। सीएम योगी ने पीड़ितों के प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि जमीनी विवाद में सभी पक्षों को सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इलाज के लिए आर्थिक सहायता के मामले पर सीएम ने मरीज के परिजनों से कहा कि आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करते हुए अस्पताल से एस्टीमेट बनवा लीजिए। सरकार हर तबके की मदद के लिए तत्पर है। आप मरीज की देखभाल कीजिए, इलाज की चिंता सरकार पर छोड़ दीजिए, सरकार पूरी मदद करेगी। धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। वहीं जनता दर्शन को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''लोकहित एवं सुशासन के प्रति दृढ़ संकल्पित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 'जनता दर्शन' में आए लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हेतु निर्देशित किया।''