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कांग्रेस का बड़ा एक्शन: जिला अध्यक्ष तैयार करेंगे विवादित नेताओं की सूची, अनुशासनहीनों पर गिरेगी गाज

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में अक्सर अपने ही नेताओं के कारण पार्टी की मुसीबतें बढ़ती रहती हैं। कई नेता सीधे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तक को निशाने पर ले लेते हैं। अब पार्टी लाइन से हटकर अक्सर विवादित बयान देने वाले कांग्रेसियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। एमपी कांग्रेस अब ऐसे विवादित नेताओं की लिस्ट तैयार करने जा रही है जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं। जिला अध्यक्ष बनाएंगे विवादित बयानवीरों की लिस्ट एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी फोरम पर सीनियर लीडर्स ने कई बार यह विषय उठाया है कि कई कार्यकर्ता ऐसे हैं जो अक्सर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते हैं। ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए अब पार्टी कड़ा फैसला लेने जा रही है। सोशल मीडिया पर भी पार्टी के खिलाफ लिखने वाले होंगे चिन्हित कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने सभी जिला अध्यक्षों को भेजे पत्र में लिखा है कि पार्टी को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और फैसलों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं। इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। चिन्हित करें नोटिस दें न मानें तो एक्शन लें पत्र में कहा गया है कि प्रदेश प्रभारी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तय किया है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पहले नोटिस जारी करें। यदि इसके बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं होता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें और इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजें। जिले में कार्रवाई नहीं हो सकती तो सबूतों के साथ प्रदेश को रिपोर्ट भेजें पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन नेताओं के खिलाफ जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं है, उनके मामलों की पूरी जानकारी और साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए, ताकि उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। संगठन ने जिला इकाइयों से इस काम को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

‘सीनियर नेताओं को किया जा रहा इग्नोर’… पंजाब कांग्रेस में रंधावा का बड़ा हमला, हाईकमान पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया। चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए। एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया। चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा। इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा… राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।  

उज्जैन: कांग्रेस नेता प्रतापसिंह गुर पर किसान को रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप, जांच की मांग तेज

उज्जैन  उज्जैन जिले के ग्राम डेलचीबुजुर्ग में खेत के पास खाई खोदने का विरोध करने पर एक किसान और उसके परिवार को रिवाल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता प्रतापसिंह गुर ने किसान को धमकाया था। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। महिदपुर रोड पुलिस ने बताया कि डेलचीबुजुर्ग निवासी किसान गोविंद सेन व उसका भाई 18 जून की शाम करीब साढ़े छह बजे ईसनखेड़ी तिराहे के पास स्थित खेत पर रखा सूकला भरने गया था। इसी दौरान कांग्रेस नेता प्रतापसिंह गुर्जर अपने दो साथियों के साथ वहां पहुंचा और जेसीबी मशीन बुलाकर खेत के समीप खाई खुदवाने लगा। खेत के पास खाई खोदने का विरोध करने पर विवाद किसान का आरोप है कि उसने और उसके भाई ने खेत के पास खाई खोदने का विरोध किया तो प्रतापसिंह और उसके साथ आए लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने अपने स्वजनों को मोबाइल फोन से सूचना दी। कुछ देर में उसके पिता दिनेश सेन, चाचा राजाराम सेन, मुन्नालाल सेन तथा अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए। शिकायत के अनुसार स्वजनों ने जब विवाद शांत कराने का प्रयास किया तो प्रतापसिंह गुर ने कमर से रिवाल्वर निकालकर उनकी ओर तान दी और कहा कि जेसीबी यहीं चलेगी, यहां से चले जाओ, नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा। घटना के बाद पीड़ित परिवार थाने पहुंचा और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें प्रतापसिंह के हाथ में रिवाल्वर नजर आ रही है। वह किसान को धमकाते हुए भी दिखाई दे रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खेत का विवाद है। मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज किए गए हैं।

राज्य कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष, दावेदारों के नामों से बढ़ी सियासी हलचल

रायपुर  छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।

राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस का दिग्गज नेता को मौका देने पर बढ़ी चर्चा

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। आंकड़ों के हिसाब से यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जा रही थी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि अब इस सीट पर किसी बड़े और भरोसेमंद चेहरे को उतारने की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में तेजी से उभरा है। पार्टी हाईकमान को यह समझ आ रहा है कि अगर कमलनाथ मैदान में उतरते हैं, तो किसी भी विधायक के लिए क्रॉस वोटिंग करना आसान नहीं होगा। उनकी पकड़ संगठन और विधायकों दोनों पर मजबूत मानी जाती है, जिससे तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में सुरक्षित जा सकती है। हालांकि, राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को बताया जा रहा है। वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्वीकार्यता है। वहीं, दिग्विजय सिंह पीसी शर्मा के नाम पर जोर दे रहे हैं, जबकि सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल और बाला बच्चन जैसे नाम भी चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए 58 वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास तकनीकी रूप से 66 विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की वोटिंग को लेकर संशय और कुछ संभावित समीकरणों ने यह संख्या प्रभावी रूप से कम कर दी है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। हरियाणा में हुई क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं भी कांग्रेस नेतृत्व के लिए चेतावनी बनी हुई हैं। इसी वजह से दिल्ली दरबार इस बार पूरी सावधानी से फैसला लेना चाहता है। यदि भाजपा आदिवासी कार्ड खेलती है, तो बाला बच्चन जैसे नाम भी अचानक मजबूत हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकती है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के अलग-अलग समीकरणों के बीच कमलनाथ ही एक ऐसे नेता माने जा रहे हैं, जिन पर सभी पक्ष सहमति बना सकते हैं। अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है। फैसला चाहे मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में जाए या कमलनाथ के नाम पर मुहर लगे, इतना तय है कि राज्यसभा की यह तीसरी सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

कांग्रेस विधायक का विवादित बयान: ट्रंप पर गोली चलनी थी, भारत में भी जनता का मूड ऐसा

नई दिल्ली अमेरिका में वाइट हाउस संवाददाताओं (WHCA) के वार्षिक रात्रिभोज कार्यक्रम में गोलीबारी की चर्चाएं दुनियाभर में हैं। इधर, भारत में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने विवादित बयान दे दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गोलियां चलनी ही थीं। साथ ही कहा है कि भारत में भी लोगों की यही भावना है। हमले में ट्रंप सुरक्षित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडेट्टीवार ने कहा, 'ट्रंप दुनिया में दबदबना बनाना चाहते थे और दूसरे देशों को अस्थिर करना चाहते थे। जैसी करनी वैसी भरनी…। चूंकि चीजें ऐसी नहीं हुईं, जैसी उन्होंने उम्मीद की थी तो ये होना ही था।' उन्होंने कहा कि भारत में भी जनता का मूड कुछ अलग नहीं है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'चूंकि यहां लोग बाहर नहीं आ रहे हैं, तो भ्रम बना हुआ है कि सब ठीक है। लेकिन लोगों की भावना वैसी ही है कि भारत को तबाह किया जा रहा है।' कांग्रेस विधायक ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘इतने उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया आमतौर पर दिखाती है कि नेतृत्व कैसा है।’ वाइट हाउस में गोलीबारी यह घटना  रात करीब 8:34 बजे की है, जब मेहमानों को रात्रिभोज परोसा जा रहा था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप, एसोसिएशन की अध्यक्ष वेइजिया जियांग और 'मेंटलिस्ट' ओज पर्लमैन के साथ बातचीत करते नजर आ रहे थे। पर्लमैन वॉशिंगटन हिल्टन में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में अपना शो पेश करने वाले थे। खुफिया सेवा के अधिकारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और द्वितीय महिला उषा वेंस को सुरक्षा घेरा बना कक्ष से बाहर ले गए। कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और घोषणा की कि सुरक्षाकर्मियों ने कैलिफोर्निया के एक व्यक्ति को पकड़ लिया है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि रात्रिभोज में हथियारों के साथ घुसने की कोशिश करने वाला आरोपी प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहता था और उसके परिवार ने पहले ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष इसे लेकर चिंता जताई थी। हमलावर की हुई पहचान अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सोमवार को अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। न्याय विभाग के कार्यवाहक प्रमुख टोड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी ट्रेन से कैलिफोर्निया से वाशिंगटन आया था और कार्यक्रम से कुछ दिन पहले ही उस होटल में ठहरा था, जहां यह समारोह आयोजित किया गया था।

शाजापुर: 12 नामजद समेत 150 कांग्रेसियों पर केस दर्ज, SP ने कहा- सुरक्षा चूक पर TI होंगे जिम्मेदार

शाजापुर   शाजापुर। किसानों के समर्थन में कांग्रेस द्वारा कलेक्ट्रेट कार्यालय घेराव मामले में 12 कांग्रेसियों खिलाफ नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर लालघाटी थाने में मामला दर्ज किया गया है। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में घुसकर विरोध प्रदर्शन किया था। इन पर हुआ मामला दर्ज लालघाटी पुलिस ने भीड़ का नेतृत्व कर रहे है कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह, कांग्रेस के कालापीपल के पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी, सीताराम पवैया, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयंत रामवीर सिंह सिकरवार, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष कमल चौधरी, पूर्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष इरशाद खान सहित अन्य कांग्रेसियों के खिलाफ पुलिस ने धारा 223(ए), 132,191,(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है।  कुणाल चौधरी ने जिला प्रशासन पर साधा निशाना कुणाल चौधरी ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि शाजापुर प्रशासन एक बार फिर गुलामी पर लग चुका है। सरकार किसानों का गेहूं नहीं खरीद पा रही है और ऐसे मामले पर जब कांग्रेस किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करती है तो प्रशासन के द्वारा उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सीधा जवाब दो कब किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा, कब वसूली बंद की जाएगी। ना हम अंग्रेजों से डरे ना आप से डरेंगे। हमें जेल में डालकर आप खुश होंगे तो हमें जेल में डाल दीजिए, लेकिन किसानों का पैसा दो, किसानों के कर्ज को माफ करो। भारी पुलिस बल के बावजूद चूक प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही कड़े इंतजाम किए थे। मौके पर 5 निरीक्षक, 4 उप निरीक्षक, 4 सहायक निरीक्षक, 10 प्रधान आरक्षक, 12 आरक्षक और 5 महिला आरक्षक सहित करीब 40 पुलिसकर्मी तैनात थे। इसके अलावा एडिशनल एसपी घनश्याम मालवीय और एसडीएम मनीषा वास्कले सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। बावजूद इसके, प्रदर्शनकारियों का कलेक्टर कक्ष तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। एफआईआर पर पर्दा डालने की कोशिश? मामले में यह भी सामने आया कि पुलिस प्रशासन शुरुआती स्तर पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी को सार्वजनिक करने से बचता रहा। थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने पहले प्रकरण दर्ज होने से इनकार किया, लेकिन बाद में दस्तावेज सामने आने पर कार्रवाई की पुष्टि हुई। इन नेताओं पर दर्ज हुआ मामला पुलिस ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह, पूर्व विधायक व राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी समेत मनीष परमार, राधेश्याम मालवीय, सीताराम पवैया, जयंत सिकरवार, राजकुमार कराड़ा, इरशाद खान, इरशाद नागौरी, शकील वारसी, आशुतोष शर्मा और कमल चौधरी को नामजद आरोपी बनाया है। सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(ए), 132 और 191(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने शुक्रवार से धरपकड़ शुरू करने के संकेत दिए हैं। SP बोले—TI देंगे जवाब सुरक्षा में चूक के सवाल पर एसपी यशपाल सिंह राजपूत ने जिम्मेदारी थाना प्रभारी पर डालते हुए कहा कि मौके की पूरी स्थिति और तैनाती की जानकारी टीआई ही स्पष्ट करेंगे। वहीं, थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। कांग्रेस का तेवर बरकरार दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने साफ किया है कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि वे जनता के मुद्दों को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कुल मिलाकर, शाजापुर की यह घटना अब कानून-व्यवस्था और सियासी टकराव दोनों का बड़ा मुद्दा बन गई है, जिस पर आने वाले दिनों में और गर्माहट देखने को मिल सकती है।

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस में बढ़ी हलचल, तीन दावेदारों पर मंथन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर चुनाव होना है। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है और दिग्विजय सिंह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे अब राज्यसभा नहीं जाएंगे। इसके बाद मध्यप्रदेश काग्रेस में हलचल तेज है और मध्यप्रदेश से तीन नाम चर्चाओं में है। आंकड़ों के हिसाब से एक सीट कांग्रेस को मिलना तय है। मौजूदा सदस्य दिग्विजय सिंह ने भले ही दोबारा राज्यसभा में जाने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने अपने खास समर्थक पीसी शर्मा (pc sharma) का नाम आगे बढ़ा दिया है। इधर, दिल्ली की पसंद मीनाक्षी नटराजन है तो दलित कोटे से सज्जन सिंह वर्मा ताल ठोक रहे हैं। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होने वाले हैं। मध्यप्रदेश में विधायकों की संख्या के हिसाब से दो सीट भाजपा और एक कांग्रेस के पास जाना तय है। इसके चलते कांग्रेस में अंदरूनी घमासान चल रहा है। दावेदारों की फेहरिस्त में सांसद रही मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर है, जिसे कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (rahul gandhi) आगे बढ़ा सकते हैं। मध्यप्रदेश मे इस वक्त राज्यसभा के 11 सांसद है। इनमें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म होने वाला है।  वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने भी दांव खेलते हुए कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा (pc sharma) का नाम आगे कर दिया। उनका तर्क है कि कांग्रेस के पास मजबूत ब्राह्मण नेता नहीं है। शर्मा को बनाने से बड़े समाज की पार्टी को सहानुभूति मिलेंगी। इधर, सांसद रहे सज्जन सिंह वर्मा (sajjan singh verma) भी राज्यसभा जाना चाहते हैं। हालांकि उनके साथ विडंबना है कि लॉबिंग करने वाला दिल्ली में कोई बड़ा नेता नहीं है। हालांकि उन्हें विश्वास है कि पार्टी दलित कार्ड खेलते हुए उन्हें मौका दे सकती है। कांग्रेस के लिए जीत आसान नहीं राज्यसभा सदस्य बनने के लिए 58 वोट की आवश्यकता है तो कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे। उसमें विधायक मुकेश मल्होत्रा (mukesh malhotra) को सुप्रीम कोर्ट ने विधायक बने रहने की राहत तो दे दी है, लेकिन वोटिंग का अधिकार छीन लिया। बुधवार को दतिया विधायक राजेंद्र भारती (rajendra bharti) को कोर्ट ने जेल भेज दिया। उनके वोट को लेकर भी संकट खड़ा है। इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी उन्हें नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास 63 वोट ही बचे हैं जिसमें से पांच वोट क्रॉस वोटिंग में चले गए तो खेल बदल जाएगा। तीसरी सीट भी भाजपा के पास जा सकती है। ऐसा ही कुछ जादू भाजपा हरियाणा में दिखा चुकी है। देखें राजनीतिक गणित 0-कांग्रेस के विधायक मकेश मल्होत्रा वोट नहीं डाल पाएंगे। कोर्ट ने हाल ही में उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया था, लेकिन वे अपील में चले गए तो उन्हें स्टे दे दिया, लेकिन वोट नहीं डाल पाएंगे। 0-विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे ने बजट सत्र में पारिवारिक कारण बताकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कटारे ने साफ कर दिया है कि उनका किसी से कोई विवाद भी नहीं है और वे भाजपा में जाने का सोच भी नहीं सकते हैं। 0- इसके अलावा बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर भी दल बदल कानून के तहत मामला चल रहा है। 0-कल ही दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया। गुरुवार को उन्हें तीन साल की सजा सुना दी। अब ऐसी स्थिति में वे विधायक रहेंगे तो ही वोट डाल पाएंगे।

छतरपुर कांग्रेस के खिलाफ कुर्की का नोटिस, बिजली बिल न चुकाने पर बढ़ी मुश्किलें

छतरपुर   कांग्रेस कार्यालय छतरपुर में उस वक्त हड़कम्प मच गया जब कार्यालय को कुर्क करने का नोटिस जारी कर दिया गया. यह नोटिस MPEB द्वारा कांग्रेस कार्यालय के बाहर चस्पा किया गया था. दरअसल, कांग्रेस कार्यालय छतरपुर ने लंबे समय से बिजली का बिल नहीं भरा था और बार-बार सूचना के बाद भी बिल नहीं दिया, जिसके बाद MPEB ने अब कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी है. कांग्रेस ने नहीं चुकाया इतना बिजली बिल नोटिस की जानकारी लगते ही आम जनता सहित कोंग्रेसी नेता भी हैरान रह गए. वहीं, जिला अध्यक्ष गगन यादव ने कहा, '' हमें अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह बीजेपी की साजिश लग रही है. जानकारी के मुताबिक बिल नहीं चुकाए जाने पर MPEB के अधिकारियों ने कांग्रेस कार्यालय जाकर पूछताछ की थी लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कांग्रेस कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया. एमपीईबी के मुताबकि कांग्रेस कार्यालत का 10 हजार 101 रु का बिल बकाया है और उन्हें भुगतान का अंतिम अवसर पहले ही दिया जा चुका है. ये लिखा है कुर्की नोटिस में MPEB के द्वारा चिपकाए गए नोटिस में लिखा है, '' आपके द्वारा विद्युत कनेक्शन क्रमांक 1201021567 के विद्युत बिल का भुगतान नियत तिथि के अंदर भुगतान नहीं किया गया है. यह कि आपके उक्त विद्युत कनेक्शन पर बकाया राशि रु. 10101 का बिल भुगतान हेतु लंबित है. अतः मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल अंडर टेकिंग (बकाया राशि) वसूली अधिनियम 1959 की धारा 147 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आपको यह नोटिस प्रेषित किया जा रहा है, कि आप कंपनी की बकाया राशि इस नोटिस प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर जमा कर दें अन्यथा उक्त राशि उपरोक्त अधिनियम की धारा 6 के अनुसार बकाया भू-राजस्व के रूप में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत एक पक्षीय कार्रवाई करते हुये राजस्व अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति कुर्की की कार्रवाई कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी. क्या बोले छतरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष जब मामले में छतरपुर कोंग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव से बात की तो उन्होंने कहा, '' मुझे जानकारी नहीं है लेकिन आप ने बताया तो पता चला है, हम दिखवाते हैं. सिर्फ 10 हजार रु के लिए नोटिस चिपकाना उचित नहीं है. यह बीजेपी की साजिश लग रही है. वहीं, जब मामले में MPEB के अधिकारी केएस घोसी से बात की गई तो उन्होंने कहा, '' यह रूटीन प्रकिया है. अभी मार्च चल रहा है इसलिए नोटिस भेजे जा रहे हैं. कुछ लोग नोटिस ले लेते हैं, वहीं कुछ नहीं लेते तो चस्पा करने पड़ते हैं. शहर में बिजली का 9 करोड़ बकाया जिसकी वसूली के लिए लगातार प्रयास चल रहा है.''

सदन में कांग्रेस का वॉकआउट, धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने से रोके जाने का लगाया आरोप

चंडीगढ़ नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान उनका प्रश्न शामिल न करने पर सवाल उठाए हैं। बाजवा ने कहा कि मेरा सवाल कृषि नीति को लेकर था।   पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान उनका प्रश्न शामिल न करने पर सवाल उठाए हैं। बाजवा ने कहा कि मेरा सवाल कृषि नीति को लेकर था। पहले सवाल का नंबर कुछ और था लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया और प्रश्नकाल को खत्म कर दिया है। मंत्री कृषि नीति पर जवाब नहीं देना चाहते थे जिस कारण ही ऐसा किया गया हैं। बाजवा ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। यह गलत प्रथा अपनाई जा रही है। कांग्रेस के नेताओं ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाॅकआउट कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और आरोप लगाया कि उन्हें राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का समय नहीं दिया जा रहा है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार को अवैध माइनिंग और नशे के मुद्दे पर कड़ी आलोचना का निशाना बनाया। इसके बाद बेअदबी के मामलों का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर बोलते हुए बाजवा ने कहा कि चार साल बीत जाने के बावजूद भी बेअदबी मामलों के आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर ‘आप’ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेसी नेताओं ने विरोध जताते हुए विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जनता के मुद्दे उठाने के लिए पंजाब विधानसभा में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जाता।