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छिंदवाड़ा में 9 और राजस्थान में 2 बच्चों की मौत, कफ सिरप में मिलावट की जांच शुरू

छिंदवाड़ा  सर्दी खांसी के चलते दूषित कप सिरप पीने से छिंदवाड़ा जिले में किडनी फेल होने से पिछले 20 दिनों में सात बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बच्चों ने नागपुर के निजी अस्पतालों में दम तोड़ा। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने कहा है कि आरंभिक जांच रिपोर्ट में दूषित कप सीरप से बच्चों की किडनियां फेल होने से मौतें हुई हैं। संबंधित कप सिरप को जिले में प्रतिबंधित कर दिया गया है। मामले में आगे जांच जारी है। हालांकि, सवाल यह है कि जिले में कफ सिरप पर पाबंदी लगा दी गई है, लेकिन इस दूषित दवा को बेचने वाले और बनाने वालों को कौन सजा देगा? उन्हें सरकारी कार्रवाई की खुराक कब मिलेगी? छिंदवाड़ा के सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाडे ने बताया कि पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच परासिया क्षेत्र में 6 मासूमों की मौत हुई है। 5 बच्चे अभी भी छिंदवाड़ा और नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। 27 सितंबर को बच्चों के सैंपल पुणे लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आ सकेगी। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नांदुलकर ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें से कई की किडनी बायोप्सी जांच कराई गई। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कफ सिरप में मिला डायएथिलीन ग्लायकॉल दूषित पाया गया है। यही सिरप इन बच्चों को दिया गया था, जिससे उनकी किडनी फेल हुई। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौतों के मामले में नागपुर लैब से आई किडनी बायोप्सी रिपोर्ट में टॉक्सिन मीडिएटेड इंजरी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित रूप से डाय एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) से सिरप में कंटेमिनेशन हुआ हो सकता है, जिससे बच्चों की किडनी पर घातक असर पड़ा।  दोनों राज्यों को मिलाकर अब तक कुल 11 मौतें हुई हैं. छिंदवाड़ा में परासिया के अनुविखीभागीय दंडाधिकारी शुभम यादव ने बताया कि कल देर रात तक छिंदवाड़ा में नौ बच्चों की मौत हो चुकी है. उन्होंने बताया कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. 1 अक्टूबर तक छह मौतें दर्ज की गई थीं. रोग निगरानी के लिए सरकार की नोडल एजेंसी, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के अस्पतालों और अन्य स्थलों से पानी और कीटविज्ञान संबंधी दवाओं के नमूने कलेक्ट किए हैं, जहां कथित रूप से दूषित कफ सिरप के सेवन के कारण गुर्दे की विफलता से कई बच्चों की मौत हो गई थी. राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने बच्चों की मौत पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि माताओं द्वारा दी गई दवाइयां सरकारी सिफारिश या अस्पताल के प्रिस्क्रिप्शन से नहीं थीं. उन्होंने कहा कि ऐसे हादसे होने पर विभाग की कोई भूमिका नहीं होती है, क्योंकि यह उनके दायरे से बाहर है. 'स्वास्थ्य विभाग का कोई रोल नहीं…' गजेंद्र सिंह खीमसर ने बच्चों की मौत के मामले पर बयान दिया है. मंत्री ने कहा, "इस हादसे में स्वास्थ्य विभाग का कोई रोल नहीं है. यह उनके डिपार्टमेंट के दायरे से बाहर है. यह हादसा उन दवाइयों से हुआ है, जो माताओं ने बच्चों को दीं. ये दवाइयां सरकारी अस्पताल के प्रिस्क्रिप्शन या सिफारिश से नहीं थीं." दायरे से बाहर, फिर भी करेंगे जांच… मंत्री खीमसर ने इस पूरे मामले को विभाग के दायरे से बाहर बताया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि फिर भी वह जब जयपुर जाएंगे तो इसकी और जांच करेंगे. उन्होंने साफ किया कि माता-पिता द्वारा बिना सरकारी सिफारिश के दवा देने से हुए इस हादसे की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की नहीं है. पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के नतीजे आने के बाद, उन्हें राज्य औषधि अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा. सूत्रों ने पीटीआई को बताया, "राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (आरएमएससीएल) ने सिरप के 19 बैचों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है और स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों, डॉक्टरों और दवा संचालकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है."

कफ सिरप से फिर मासूमों की जान गई, मध्यप्रदेश-राजस्थान में दहशत

छिंदवाड़ा  मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 3 और बच्चों की मौत हो गई है। किडनी फेल होने की वजह से पिछले 28 दिनों में अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। उधर, राजस्थान में भी दो बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप को लेकर खौफ बढ़ता जा रहा है। हालांकि, दोनों ही राज्यों में अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि मौत की वजह कफ सिरप ही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में 4 सितंबर के बाद कई ऐसे बच्चों की मौत हुई है, जिनमें लक्षण एक जैसे पाए गए। जान गंवाने वाले सभी बच्चों में शुरुआत में सर्दी-खांसी और बुखार जैसे लक्षण थे। कहा जा रहा है कि इन बच्चों ने खास किस्म की कफ सिरप ली थी, जिसके बाद इनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में किडनी फेल होने से मौत हो गई। छिंदवाड़ा के एसडीएम शुभम यादव ने बताया कि बीमार बच्चों की निगरानी की जा रही है और संभावित वजहों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'एहतियात के तौर पर हमने 1420 बच्चों की लिस्ट बनाई है, जो हाल के दिनों में वायरल जैसे लक्षण से ग्रसित रहे हैं। हमने प्रोटोकॉल बनाया है कि जैसे ही कोई बच्चा दो दिन से अधिक बीमार रहता है तो उसे सीधे सिविल अस्पताल लाते हैं। 6 घंटे की मॉनिटरिंग में रखते हैं। केस बिगड़ने की आशंका होती है तो जिला अस्पताल भेजते हैं और ठीक रहता है तो घर भेजते हैं और आशा वर्कर से कहते हैं कि सप्ताह में कम से कम दो दिन घर जाकर फॉलोअप लें।' एसडीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भेजी गईं टीमें सैंपल्स की जांच कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा, 'पानी और मच्छर से संबंधित जांचें टीमों ने की हैं। अभी तक की रिपोर्ट नॉर्मल आई है। एक सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी गई थी, वह भी नॉर्मल है। पानी के कुछ सैंपल सीएसआईआर की नीरी इंस्टीट्यूट में भेजे गए हैं, रिपोर्ट अभी नहीं आई है।' उन्होंने कहा कि जिन 9 बच्चों की मौत हुई है उनमें से 6 के परिवारों से बात हुई है। इनमें से पांच ने एक तरह की और एक ने दूसरी कफ सिरप ली थी। इनके सैंपल की जांच की जा रही है। बाल रोग विभाग के प्रमुख और असोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन नांदुरकर ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'जो मौतें हुईं और किडनी में दिक्कत हुई, उनमें एक Coldrif कफ सिरप को जिम्मेदार बताया जा रहा है। लेकिन यह जांच का विषय है। किडनी में दिक्कत कई वजहों से हो सकती है, कोई इंफेक्शन हो सकता है, कोई हैवी मेटल, डिहाड्रेशन, जहर या किसी दवा की वजह से हो सकती है। सभी चीजों के सैंपल ले लिए हैं, रिपोर्ट आनी बाकी है। एक आशंका कफ सिरप को लेकर हैं, क्योंकि सभी बच्चों ने यह ली थी। इसलिए इसके सैंपल को भी जांच के लिए भेजा गया है। जब रिपोर्ट आएगी तभी साफ हो पाएगा कि यह कफ सिरप कितनी जिम्मेदार है।'