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जांच एजेंसियां न जुटा पाईं सबूत, छत्तीसगढ़ में 76 CRPF जवानों की हत्या के सभी आरोपी हाईकोर्ट से बरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। अदालत ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है। जांच में गंभीर खामियां नजर आईं चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने जांच और अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है। यह आदेश पांच मई को पारित किया गया था और गुरुवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीआरपीएफ कर्मियों पर बड़ा हमला आदेश में कहा गया है कि सीआरपीएफ कर्मियों पर हुए एक बड़े हमले के मामले में आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा गया। ऐसा प्रत्यक्ष सबूतों की कमी कि परिस्थितिजन्य सबूतों के अधूरेपन, जांच में प्रक्रियागत खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद, आरोपियों के दोष को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण किया गया है। अप्रैल 2010 में हुआ था हमला यह मामला छह अप्रैल, 2010 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। यह हमला तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़मेटला गांव के जंगलों में हुआ था। यह जगह अब सुकमा जिले में है। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का एक दल, राज्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर इलाके में गश्त पर था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कथित तौर पर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मारे गए थे 76 जवान सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इनमें 75 सीआरपीएफ के और एक राज्य पुलिस का जवान शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक था। जांच के बाद, 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कोंटा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया। बाद में इस मामले को दंतेवाड़ा स्थित सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सभी 10 आरोपियों को कर दिया बरी सुनवाई के बाद सात जनवरी, 2013 को दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में विफल रहा है। आरोपियों पर थें ये धाराएं आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा करना और हत्या के साथ डकैती डालना शामिल था। बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए, राज्य सरकार ने 2014 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले के 10 आरोपियों जिन्हें सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, में से दो की मौत हो चुकी है। अहम सबूतों को नहीं समझ पाई अदालत हाईकोर्ट में महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने यह दलील दी कि निचली अदालत अहम सबूतों को ठीक से समझने में नाकाम रही। इन सबूतों में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज एक आरोपी का इकबालिया बयान और घटनास्थल से बरामद विस्फोटक शामिल थे। कोर्ट ने गवाही की अर्जी कर दी थी खारिज राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उस अर्जी को खारिज करके गलती की, जिसमें हमले के चश्मदीद गवाह रहे सीआरपीएफ के सात घायल जवानों की गवाही कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह कहा कि आरोपियों को हत्याओं से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत या चश्मदीद गवाह की गवाही मौजूद नहीं थी, और किसी भी चश्मदीद गवाह ने उन्हें अपराधी के तौर पर नहीं पहचाना था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिया गया कथित इकबालिया बयान किसी भी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं होता है। घटनास्थल से नहीं बरामद हुए हथियार वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन विस्फोटकों और हथियारों का जिक्र किया गया था, वे अपराध स्थल से बरामद हुए थे, न कि आरोपियों के कब्ज़े से, साथ ही, जब्त की गई चीजों के विस्फोटक होने की पुष्टि करने वाली फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। अदालत ने की तीखी टिप्पणी  इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि सीआरपीएफ के 75 कर्मियों की जान जाने के बावजूद, जिसमें राज्य पुलिस का एक सदस्य भी शामिल था, कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में, अभियोजन एजेंसियां अपराध के असली अपराधियों की पहचान स्थापित करने या इस तरह के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें न्याय के दायरे में लाने में सक्षम नहीं हुई हैं। विश्वसनीय सबूत नहीं पेश किया अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर भी उतना ही दुख हुआ कि इतने गंभीर मामले को, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ, अंततः इस तरह से निपटाया गया कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया जा सका। नतीजतन, निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इन परिस्थितियों में, हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के आदेश को विकृत, अनुचित या तर्क या न्यायिक औचित्य को चुनौती देने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने जांच में पाई गई कमियों पर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली गंभीर अपराधों की जांच में, खासकर उन मामलों में जिनमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ हो और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, जांच के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य को यह निर्देश भी दिया कि वह जांच की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम … Read more

झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर ड्रोन ‘नेत्रा’ और ‘स्विच’ से सुरक्षा बलों को मिली निर्णायक बढ़त

रांची झारखंड में माओवादियों के विरुद्ध अभियान में हाल के वर्षों में मिली सफलता के पीछे उन्नत तकनीक, हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस नेत्रा की भूमिका भी सराहनीय है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इस हाईटेक ड्रोन की नजर से माओवादी लाख कोशिश के बावजूद नहीं बच पा रहे हैं। बोकारो व हजारीबाग के वन क्षेत्र में एक-एक करोड़ के इनामी कई बड़े माओवादियों के विरुद्ध सफल अभियान की बात हो या फिर सारंडा में एक साथ 17 माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने का वीरता पूर्ण कार्य हो, माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल जवानों के साथ नेत्रा कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। नेत्रा हाईटेक है। यह सीआरपीएफ के लगभग सभी कैंप में है। यह पांच किलोमीटर तक का चक्कर लगाने में सक्षम है। घने जंगल क्षेत्र में सूक्ष्म गतिविधियों तक को देखने में सक्षम है। अगर कोई छुप जाए तो नहीं दिखेगा, लेकिन वह कब तक छुपेगा। सीआरपीएफ का यह नेत्रा दिनभर उड़ता रहता है। कहीं भी हल्की भी हलचल दिखती है तो उसे यह नेत्रा अपने कैमरे में कैद कर लेता है। देता है सटीक लोकेशन, सुरक्षा कैंपों की भी करता है निगरानी किसी भी कैंप की सुरक्षा में संतरी ड्यूटी लगाई जाती है। जंगल में सुरक्षा बलों के कैंप के बीच में अगर 10 किलोमीटर की भी दूरी है तो नेत्रा उस दूरी को नाप देता है। दोनों सुरक्षा कैंपों के बीच से कोई गुजरेगा तो यह हाईटेक ड्रोन उसे आसानी से अपने कैमरे में कैद कर सुरक्षा बलों को इसकी सूचना दे देगा। यह सटीक लोकेशन देता है। अगर माओवादी कहीं दिखे तो उनके लॉन्गीट्यूड व लेटीट्यूड के साथ लोकेशन मिलने पर अभियान में शामिल सुरक्षा बल आसानी से उनकी घेराबंदी कर लेते हैं, जिससे उनके बचकर भागने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है। यह घने जंगल में भी इंसान की मौजूदगी की जानकारी ले लेता है। रात व कम रोशनी में भी यह बेहद प्रभावी है। स्विच ड्रोन भी है बेहद कारगर माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों के पास एक अन्य ड्रोन भी है, जिसका नाम स्विच है। यह बिना आवाज के कम ऊचाई पर उड़ान भरता है और माओवादियों के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने के लिए इसमें भी लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता है। एक साल के भीतर मिली बड़ी सफलताएं     21 अप्रैल 2025 : बोकारो जिले के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी पर सुरक्षा बलों व पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ बड़े माओवादी मारे गए।     16 जुलाई 2025 : बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र के बिरहोरडेरा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का इनामी माओवादी कुंवर मांझी ढेर। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक जवान परनेश्वर कोच बलिदान हो गए थे।     15 सितंबर 2025 : हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन, 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेम्ब्रम व दस लाख का इनामी बीरसेन गंझू मारा गया।     17 अप्रैल 2026 : हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आपरेशन कोतीनीर चलाया, जिसमें 15 लाख का इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो सहित चार माओवादी ढेर हो गए।     22 जनवरी 2026 : पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी अनल दा सहित 17 माओवादी ढेर। आपरेशन मेगाबुरू में मिली यह सफलता।     माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों का ड्रोन कैमरा बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। इनकी बदौलत बेहतर तरीके से अभियान चल रहा है। – साकेत कुमार सिंह, आईजी सीआरपीएफ, झारखंड चैप्टर  

सेंट्रल फोर्स की भर्ती संकट: 93 हजार पद खाली, CRPF में 27 हजार, इस्तीफों में 86% का उछाल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  संसद में बताया कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) और असम राइफल्स में कुल 93,139 पद खाली हैं। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री  नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में दी।सबसे ज्यादा पद CRPF में 27,124 खाली हैं, वहीं CISF में 28,342 पद खाली हैं। सबसे कम खाली पद असम राइफल्स में 3,749 हैं। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक (RFID) का उपयोग शामिल है। 5 साल में CAPF में इस्तीफे 86% बढ़े CAPF में इस्तीफों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। 2021 में 1,255 कर्मियों ने इस्तीफा दिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,333 हो गई, यानी करीब 86% की बढ़ोतरी।  भर्ती प्रक्रिया का नया रास्ता राज्य मंत्री राय ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के जरिए हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से रिक्तियों को भरने में तेजी आएगी। इस्तीफों की alarming बढ़ोतरी सरकार के मुताबिक CAPF में इस्तीफों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। 2021 में 1,255 के मुकाबले 2025 में 2,333 कर्मियों ने इस्तीफा दिया, जो कि लगभग 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। हालांकि, सुसाइड, आपसी हत्या और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों में कमी आई है, जो एक सुकून भरी बात है। भारत टैक्सी का नया विस्तार इस बीच, भारत टैक्सी ने अपने राइड-हेलिंग सेवा का विस्तार करने का ऐलान किया है। सहकारी क्षेत्र की इस सेवा को अगले 2 से 3 वर्षों में सभी बड़े शहरों तक पहुँचाया जाएगा। सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल ने कहा कि यह सेवा वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में कार्यरत है। अब तक 4 लाख ड्राइवर इस सेवा से जुड़ चुके हैं। ग्रीन एक्सप्रेसवे का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट सरकार ने ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने का एक बड़ा निर्णय लिया है। यह एक्सप्रेसवे सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इससे दिल्ली-चेन्नई की दूरी 320 किलोमीटर घट जाएगी। साथ ही, दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी। गडकरी बोले- सूरत से कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनेगा सरकार सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाएगी। इससे दिल्ली-चेन्नई दूरी 320 किमी घटेगी। गडकरी ने कहा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पूरा होने पर दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी।     2025 में एक लाख से ज्यादा पेंशन शिकायतें दर्ज- सरकार ने लोकसभा में बताया कि पोर्टल पर 2025 में 1.07 लाख पेंशन शिकायतें मिलीं। औसत निपटान समय 19 दिन रहा।     पीएम सूर्य घर योजना से 31 लाख लोग लाभान्वित- सरकार ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 6 मार्च 2026 तक 31.12 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगे। लक्ष्य 2027 तक एक करोड़ घरों का है।     वरिष्ठ पदों पर SC/ST प्रतिनिधित्व का डेटा नहीं- संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पदों पर एससी/एसटी प्रतिनिधित्व का अलग डेटा नहीं रखा जाता। पदोन्नति में ग्रुप-ए की शुरुआती श्रेणी तक 15% एससी और 7.5% एसटी आरक्षण है।     टीवी विज्ञापनों में चमत्कारी दावे नहीं कर सकते- सरकार ने कहा कि निजी टीवी चैनलों के सभी विज्ञापन केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, 1995 के एडवरटाइजिंग कोड के तहत होंगे। चमत्कारी गुणों के दावे प्रतिबंधित हैं, उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।    

टॉयसन की राह पर CRPF के K9 सोल्जर्स, आतंक के खिलाफ तैयार खास फोर्स

नई दिल्ली भारत की सुरक्षा में तैनात जवानों की बहादुरी की कहानियां अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कई बार असली हीरो वो होते हैं जो बोल नहीं सकते, फिर भी देश के लिए जान जोखिम में डाल देते हैं. ऐसी ही एक इंस्‍पायरिंग स्‍टोरी है टायसन की, जो भारतीय सेना की एलीट यूनिट 2 पैरा स्‍पेशल फोर्सेस का हाईली ट्रेंड के9 सोल्‍जर है. जम्‍मू-कश्‍मीर के हॉस्‍टाइल टेरेन में हुए एक हाई-रिस्‍क काउंटर-टेरर ऑपरेशन के दौरान टायसन ने जो साहस दिखाया, उसने साबित कर दिया कि बैटलफील्‍ड में करेज किसी इंसान या जानवर की पहचान से नहीं, बल्कि उसकी ट्रेनिंग और डेडिकेशन से तय होता है. क्‍यों मिसाल बनी ऑपरेशन में टायसन की बहादुरी?     जम्‍मू-कश्‍मीर में इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर 2 पैरा एसएफ को एक टेररिस्‍ट हाइडआउट की जानकारी मिली थी. इलाके का टेरेन बेहद चैलेंजिंग था. ऊंचे पहाड़, घने जंगल और खराब मौसम ने इस ऑपरेशन को बेहद मुश्किल बना दिया था. .     आतंकियों के पास मॉर्डन वैपेंस की मौजूदगी ने इस ऑपरेशन को बेहद हाई-रिस्‍क ऑपरेशन बना दिया था. स्‍पेशल फोर्सेस ने हाइडआउट को कॉर्डन किया और टायगर को आगे बढ़ने का इशारा दिया गया. मिलिट्री के9 को अक्सर फर्स्‍ट कॉन्‍टैक्‍ट रोल में डिप्‍लॉय किया जाता है क्योंकि उनकी सेंसिंग एबिलिटी इंसानों से कई गुना तेज होती है.     टायसन बिना किसी हेजिटेशन के हाइडआउट की ओर चार्ज कर गया. उसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. गोलियों की आवाज और एक्‍सप्‍लोजन के बीच भी टायसन पीछे नहीं हटा. ऑपरेशन के दौरान टायसन को गोली लग गई, बावजूद इसके उसने मिशन नहीं छोड़ा.     उसकी मौजूदगी और ट्रैकिंग कैपेबिलिटी ने कमांडोज को आतंकियों की एक्‍जैक्‍ट पोजिशन पहचानने में मदद की. इसके बाद 2 पैरा एसएफ ने डिसाइसिव असॉल्‍ट किया और तीन आतंकियों को मार गिराया, जिनमें आतंकी सैफुल्‍लाह भी शामिल था.     ऑपरेशन पूरा होने के बाद टायसन को तुरंत एयरलिफ्ट किया गया और एडवांस्‍ड मेडिकल केयर दी गई. अब उसकी कंडीशन स्‍टेबल है. तरालु से शुरू हुई थी टायसन की ट्रेनिंग जर्नी     टायसन की जांबाजी के पीछे कई महीनों की इंटेंस ट्रेनिंग है, जो उसने सीआरपीएफ के डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्‍कूल में हासिल की थी.     कर्नाटक के तरालु में स्थित इस प्रीमियर इंस्‍टीट्यूशन में टायसन ने 7 फरवरी 2022 से 22 दिसंबर 2022 तक ट्रेनिंग ली. यहां डॉग्स को सिर्फ कमांड्स ही नहीं, बल्कि कॉम्‍बैट बिहेवियर भी सिखाया जाता है.     यहां के9 टीम्स को मल्‍टी-टास्किंग रोल्‍स के लिए तैयार किया जाता है, जिसमें इन्‍फैंट्री पेट्रोल, एक्‍सप्‍लोसिव डिटेक्‍शन, असॉल्‍ट ऑपरेशंस, ट्रैकिंग एंड सर्च मिशन शामिल हैं.     सीआरपीएफ के इस डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्‍कूल की शुरूआत 27 अगस्‍त 2011 को सिर्फ 15 पप्‍स और 6 ब्रीडिंग डॉग्स से हुई थी. बेंगलुरु सिटी सेंटर से लगभग 25 किलोमीटर दूर यह कैंपस मॉडर्न फैसिलिटीज से लैस है.     यहां बेल्जियन शेफर्ड मलिनोइस और डच शेफर्ड जैसी एलीट ब्रीड्स को पुलिस सर्विस के9 के तौर पर प्र‍िशिक्षत किया जाता है. आरपीएफ अब तक अपने इस सेंटर में 1377 से अधिक के9 टीम्स ट्रेंड कर ऑपरेशन एरिया में डिप्‍लॉय कर चुकी है. सीआरपीएफ ने खड़ी की K9 सोल्‍जर्स और हैंडलर्स की फौज     सीआरपीएफ के अनुसार, दिसंबर 2025 तक डीबीटीएस ने 1377 K9 सोल्‍जर्स की फौज खड़ी कर ऑपरेशन एरिया में तैनात कर दिया है. साथ ही, 824 डॉग हैंडलर्स और 183 मास्‍टर ट्रेनर्स को भी प्रशिक्षित किया गया है.     बेंगलुरु स्थित इस डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्‍कूल में अब तक 1431 पप्‍स ब्रीड किए गए हैं. इन के9 सोल्‍जर्स ने देशभर में ऑपरेशंस (Operations) के दौरान 6207 किलो से अधिक एक्‍सप्‍लोसिव्स रिकवर करने में मदद की है.     ऑल इंडिया पुलिस कंपटीशन (AIPDM) 2018 के दौरान सीआरपीएफ के डीबीटीएस में ट्रेंड के9 बैशा डॉग ने नारकोटिक डिटेक्‍शन ब्रॉन्‍ज मेडल मेडल जीता था.     के9 जुबान डॉग ने नेशनल काउंटर-IED एक्‍सरसाइज में फर्स्‍ट पोजिशन हासिल किया था. इसके अलावा, के9 रेमो डॉग ने एक्‍सप्‍लोसिव डिटेक्‍शन में ब्रॉन्‍ज मेडल हासिल किया था.     सीआरपीएफ के9 डैनबी और के9 वास्‍ट डॉग को पेरिस ओलंपिक्‍स 2024 सिक्‍योरिटी फ्रेमवर्क में शामिल किया गया था. वहीं, के9 बैशा ने ऑल इंडिया पुलिस कंपटीशन (AIPDM) 2025 में गोल्‍ड मेडल जीता था. क्या डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर में भारतीय ब्रीड के डॉग्‍स को भी ट्रेंड किया जाता है? डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर में फॉरेन ब्रीड्स के साथ-साथ अब इंडिजिनस यानी भारतीय डॉग ब्रीड्स को भी ऑपरेशनल रोल्स के लिए तैयार किया जा रहा है. पायलट प्रोजेक्ट्स के तहत मुधोल हाउंड, कोंबाई, मोंग्रेल और पंडिकोना जैसी भारतीय नस्लों के डॉग्‍स को ट्रेन किया जा रहा है. इन डॉग्स की खासियत यह है कि ये भारतीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से एडॉप्ट हो जाते हैं. इन्हें ट्रैकिंग, सर्विलांस और सिक्योरिटी ऑपरेशन्स जैसे ऑपरेशंस के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे ये फोर्स मल्टिप्लायर्स के रूप में उभर रहे हैं. सेना या फोर्स से रिटायर होने वाले डॉग्‍स का क्‍या होता है? ओपेरा — सीनियर के9 केयर सेंटर एक विशेष फैसिलिटी है, जिसे नवंबर 2024 में शुरू किया गया ताकि सर्विस डॉग्स को रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन मिल सके. ये डॉग्स अपने करियर के दौरान कई हाई-रिस्क मिशंस और ऑपरेशन्स का हिस्सा रहते हैं, इसलिए उनकी रिटायरमेंट लाइफ की देखभाल बेहद जरूरी होती है. इस सेंटर में उन्हें सुरक्षित शेल्टर, नियमित मेडिकल केयर और वेटरनरी सपोर्ट दिया जाता है.

शहीद CRPF हेड कांस्टेबल को अंतिम विदाई, राज्यपाल ने कहा – देश हमेशा रहेगा कृतज्ञ

रांची झारखंड के चाईबासा के सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट में शहीद सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लश्कर को रांची के धुर्वा स्थित सीआरपीएफ कैंप की 133वीं बटालियन में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर अंतिम सलामी दी। इस मौके पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), आईजी सीआरपीएफ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने शहीद जवान के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। पुलिस मुख्यालय की जानकारी के अनुसार, यह हमला चाईबासा के मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ एक सघन अभियान के दौरान हुआ। इनामी नक्सलियों की सक्रियता को देखते हुए सीआरपीएफ जवान नक्सलियों की धरपकड़ में लगे थे कि इसी बीच शुक्रवार को आईईडी विस्फोट हो गया। इस विस्फोट में सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर समेत तीन जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें हेड कांस्टेबल महेंद्र लश्कर भी शामिल थे। महेंद्र लश्कर असम के नौगांव के निवासी थे और वे 60 बटालियन में तैनात थे। गंभीर रूप से घायल होने पर उनका इलाज राउरकेला के अस्पताल में किया जा रहा था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। राज्यपाल गंगवार ने शहीद महेंद्र लश्कर के बलिदान को याद करते हुए कहा कि हमारी रक्षा के लिए हमारे जवानों का यह त्याग और साहस राष्ट्र के लिए कभी भुलाया नहीं जा सकता। श्रद्धांजलि सभा के पश्चात शहीद महेंद्र लश्कर का पार्थिव शरीर उनके पैतृक राज्य असम भेजा जाएगा। वहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

उधमपुर में हुआ बड़ा हादसा, CRPF बंकर व्हीकल पलटा – 2 की जान गई, 12 घायल

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया. यहां सीआरपीएफ का एक बंकर व्हीकल दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा बसंतगढ़ इलाके के कंडवा क्षेत्र में हुआ, जहां सड़क पर अचानक वाहन बेकाबू होने के बाद पलट गया. इस हादसे में 2 सीआरपीएफ जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य जवान घायल हो गए. जानकारी के अनुसार, बंकर वाहन में कुल 23 जवान सवार थे. जैसे ही वाहन कंडवा-बसंतगढ़ मार्ग पर पहुंचा, तो वहां वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया. हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों को पता चला तो तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. सभी घायल जवानों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस मामले को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संदीप भट ने कहा कि हादसे में दो जवानों की जान चली गई और घायल जवानों का इलाज जारी है. वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हादसे को लेकर अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में दुख व्यक्त किया है. उन्होंने personally जिला उपायुक्त सलोनी राय से बात की है. उन्होंने कहा कि राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है. मंत्री ने यह भी बताया कि स्थानीय लोग भी सहायता के लिए आगे आए हैं. फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब सड़क और वाहन का बैलेंस बिगड़ना हादसे की वजह मानी जा रही है.