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साइबर फ्रॉड का बढ़ता कहर: हरियाणा में हर महीने 40 करोड़ से अधिक की चोरी

गुरुग्राम  हरियाणा में साइबर फ्रॉड का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में राज्य ने डिजिटल धोखाधड़ी के कारण ₹850 करोड़ का नुकसान झेला, जिसमें केवल गुरुग्राम ने कुल मामलों का 20 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। यह जानकारी पीएस साइबर मानेसर के सब-इंस्पेक्टर विकास बेनीवाल ने “नॉक आउट डिजिटल फ्रॉड” नामक राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम में दी, जिसे हरियाणा पुलिस और बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल) द्वारा संयुक्त रूप से गवर्नमेंट कॉलेज, सिधरावली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के लगभग 250 छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी पर विस्तार से बताते हुए बेनीवाल ने कहा, “लोगों के शिकार होने की सबसे बड़ी वजह है—अज्ञानता, लालच और भय। फ्रॉडस्टर डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट स्कैम और टास्क-बेस्ड फ्रॉड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को अलग-थलग कर देते हैं, उनकी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उनकी जीवन भर की कमाई साफ कर देते हैं। जब भी कोई व्यक्ति आपसे पैसे या बैंक डिटेल मांगता है, तो बिना किसी संदेह के समझ लें कि वह फ्रॉडस्टर है। जागरूकता ही असली सुरक्षा है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम में ही 2024 में 25,000 से अधिक साइबरक्राइम मामले दर्ज हुए हैं। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ित को तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि इससे खोए हुए पैसे की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। पहले तीन घंटे इस तरह के मामलों में ‘गोल्डन पीरियड’ माने जाते हैं।” उन्होंने बताया कि अब तक रिपोर्ट हुए मामलों में 5,000 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। 2024-25 में हरियाणा पुलिस ने साइबर फ्रॉड मामलों से ₹100 करोड़ की रिकवरी की है। पूरे भारत में इसी अवधि में साइबर धोखाधड़ी के कारण नुकसान ₹22,800 करोड़ से अधिक पहुंच गया है—जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% अधिक है। जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेशपाल ने कहा, “हमारा देश तरक्की कर रहा है, और जैसे-जैसे हम मजबूत बन रहे हैं, साइबर फ्रॉड हमारे खिलाफ एक आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। इसलिए राष्ट्रव्यापी धोखाधड़ी जागरूकता बेहद जरूरी है। आपको सतर्क रहना चाहिए और आकर्षक ऑफर्स, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जाल से खुद को बचाना चाहिए। फ्रॉडस्टर विदेशों से काम करते हैं और हमारी लापरवाही का फायदा उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अपनी बैंक डिटेल साझा न करके, हर कदम से पहले सत्यापन करके और सतर्क रहकर कोई भी आसानी से साइबर फ्रॉड से खुद को बचा सकता है।” पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार ने कहा, “आज साइबर फ्रॉड एक व्यवसाय बन चुका है, जो देशभर में विभिन्न क्लस्टर्स के माध्यम से संचालित होता है। संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ हमारी कमजोरियां भी बढ़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है—जागरूकता। यदि आपको कभी साइबर फ्रॉड का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से ट्रांज़ैक्शन रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एक्सेस साझा न करें, संदिग्ध एपीके फाइलों से बचें, और हर प्लेटफॉर्म पर एक ही नंबर लिंक न करें।” इस अवसर पर गवर्नमेंट कॉलेज सिधरावली के प्रोफेसर पी.के. मलिक ने कहा, “भारत का युवा विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सतर्क और जानकारी पूर्ण रहकर वे अपने परिवारों और समुदायों की रक्षा कर सकते हैं।” बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल), जो भारत का सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है और बजाज फिनसर्व का हिस्सा है, एक राष्ट्रव्यापी वित्तीय साक्षरता और साइबर फ्रॉड जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल उपयोगकर्ताओं को विभिन्न तरह के खतरों के बारे में जानकारी देना और वित्तीय सुरक्षा के सर्वोत्तम उपाय सिखाना है। यह राष्ट्रव्यापी अभियान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2024 के फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें प्रारंभिक पहचान, स्टाफ जवाबदेही और जनसहभागिता को डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान करता है। इसमें ओटीपी, पिन साझा न करना, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड से बचना और अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने की सलाह शामिल है। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव वर्कशॉप, डिजिटल अवेयरनेस ड्राइव और प्रमुख शहरों एवं कस्बों में सामुदायिक पहुंच गतिविधियाँ शामिल हैं। यह पहल उन सामान्य वित्तीय धोखाधड़ियों पर ध्यान आकर्षित करती है, जो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऐसी वेबसाइटों के माध्यम से की जाती हैं, जो वित्तीय कंपनियों जैसी लगती हैं और उनके कर्मचारियों का झूठा प्रतिरूपण करती हैं।

साइबर फ्रॉड की बड़ी कुंडली उजागर! पंजाब पुलिस ने पकड़े 150+ म्यूल अकाउंट, लुधियाना में केस दर्ज

लुधियाना  पंजाब पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य में 150 से ज़्यादा एक्टिव "म्यूल अकाउंट" का पता लगाया है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन धोखाधड़ी से लूटे गए पैसे को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने के लिए करते थे। ये खाते ज्यादातर लुधियाना में पाए गए है। जिसके बाद राज्य साइबर सेल ने लुधियाना कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। लुधियाना पुलिस खाते के विवरण की जांच में जुटी मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस अब जानिए… क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?  इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन धोखाधड़ी से लूटे गए पैसे को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने के लिए करते थे। ये खाते ज्यादातर लुधियाना में पाए गए है। जिसके बाद राज्य साइबर सेल ने लुधियाना कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। लुधियाना पुलिस खाते के विवरण की जांच में जुटी     वरिष्ठ अधिकारियों को आशंका है कि ये खाते न केवल साइबर धोखेबाजों की मदद कर सकते हैं, बल्कि संगठित अपराध समूहों द्वारा भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे कानून और व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है।     राज्य साइबर क्राइम सेल से मिली जानकारी के आधार पर लुधियाना पुलिस ने खाते के विवरण की जांच और इसमें शामिल व्यक्तियों का पता लगाना शुरू कर दिया है। पुलिस के एस सीनियर अधिकारी ने पुष्टि की कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) (धोखाधड़ी) और 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज की गई है। मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस     उन्होंने कहा कि हमें 150 से ज़्यादा म्यूल अकाउंट के बारे में जानकारी मिली है। हमारी टीमें अब यह पता लगाने के लिए हर विवरण की जांच कर रही हैं कि उन्हें किसने बनाया और कौन उन्हें चला रहा है। अब धोखाधड़ी वाले खातों के नेटवर्क के पीछे के मास्टरमाइंड की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।     पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों या अवैध नकद लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था। जबकि म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल आमतौर पर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त आय को रूट करने के लिए किया जाता है।     इससे पहले अगस्त महीने में साइबर विंग ने चार लोगों -गौतम (23),एहसास (24),आकाश (20) सभी अमृतसर निवासी और अनमोल (21) निवासी अबोहर को फाजिल्का से गिरफ्तार किया था। जो कथित तौर पर लगभग दो वर्षों से इसी तरह का रैकेट चला रहे थे।     पुलिस ने उनसे 10.96 लाख रुपए, 9 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 32 डेबिट कार्ड, 10 सिम कार्ड, 15 बैंक पासबुक और एक चेक बुक बरामद की थी। जांच से पता चला कि गिरोह ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों से मामूली भुगतान पर बैंक खाते हासिल किए थे। फिर उनका इस्तेमाल साइबर अपराधों के माध्यम से चुराए गए पैसे को लेयर करने के लिए किया।     अवैध धन को बाद में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के माध्यम से विदेश भेजा गया। आरोपी दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित विदेशी हैंडलर्स द्वारा चलाए जा रहे कई टेलीग्राम ग्रुपों पर भी सक्रिय पाए गए। अब जानिए… क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?     म्यूल अकाउंट बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध धन को लॉन्ड्रिंग या स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। इन्हें उन व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा सकता है जिन्हें नौकरी के घोटालों, ऑनलाइन ऑफ़र या सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से "मनी म्यूल" बनने के लिए बहलाया-फुसलाया जाता है।     इसमें पैसा प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए कमीशन का वादा किया जाता है। इस तरह के खाते धोखेबाजों को चोरी किए गए धन के स्रोतों को छिपाने में मदद करते हैं और अक्सर फ़िशिंग घोटालों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अपराधों से जुड़े होते हैं।

फर्जी पीएनबी अफसर बन साइबर ठगों ने उड़ाए 10 लाख, पुलिस कर रही जांच

मुज्जफरपुर साइबर अपराधियों ने एक बार फिर बैंक अधिकारी बनकर ठगी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। इस बार शिकार बने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक रिटायर्ड कर्मचारी, जिनसे ठगों ने सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के नाम पर 10 लाख रुपये उड़ा लिए। मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई गई है और पुलिस जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर निवासी मो. खलीफ खान, जो पीएनबी की जवाहरलाल रोड शाखा में पेंशन डेस्क पर सहायक के पद पर कार्यरत थे, करीब आठ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे हर साल अपना लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराते हैं। इसी क्रम में 6 नवंबर को उन्होंने फॉर्म के माध्यम से सर्टिफिकेट अपडेट के लिए आवेदन किया था। पीड़ित के अनुसार, शनिवार को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिस पर पीएनबी बैंक का लोगो दिखाई दे रहा था। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका लाइफ सर्टिफिकेट वेरिफाई करना है और इसके लिए उन्हें एक ओटीपी भेजा जा रहा है। विश्वास में आकर मो. खलीफ खान ने ओटीपी साझा कर दिया। कुछ ही मिनटों में उनके दो बैंक खातों से कुल 10 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। खलीफ खान ने बताया कि यह रकम उनके पेंशन खाते से ही निकाली गई है। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में साइबर थाने के टीसी हिमांशु कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। ठगी ओटीपी के माध्यम से की गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

साइबर अपराध का पर्दाफाश: मध्यप्रदेश पुलिस ने देवघर से दो बदमाशों को किया गिरफ्तार

देवघर मध्यप्रदेश के पन्ना से पहुंची एक पुलिस टीम ने झारखंड के देवघर जिले में 2 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान हसन राजा और इरफान अंसारी के रूप में हुई है जिन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों पर आरोप है कि ये खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे। मधुपुर के उप संभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सत्येंद्र प्रसाद ने कहा, ‘‘दोनों आरोपी मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के पवई थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले एक सरकारी स्कूल के शिक्षक से 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने में शामिल थे। पीड़ित ने मध्यप्रदेश में पन्ना जिले के पवई थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा के आधार पर पुलिस ने पाथरोल थाना क्षेत्र के तीन युवकों की संलिप्तता की पहचान की।'' उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश से आई तीन सदस्यीय टीम ने पथरोल पुलिस की मदद से कसैया और बिलरिया गांवों में छापेमारी की तथा अमन राजा, हसन राजा और इरफान अंसारी को हिरासत में लिया गया। प्रसाद के मुताबिक, पूछताछ के बाद पुलिस ने अमन राजा को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया जबकि हसन राजा और इरफान अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया। एसडीपीओ ने बताया कि पुलिस ने इरफान अंसारी के घर से 3.5 लाख रुपये नकद, एक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, एक मोबाइल फोन, एक पासबुक और एक मोटरसाइकिल बरामद की, जबकि हसन राजा के घर से पांच लाख रुपये नकद, एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, सोने और चांदी के आभूषण तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद मध्यप्रदेश पुलिस उन्हें स्थानीय अदालत से अनुमति लेकर ट्रांजिट रिमांड पर पन्ना ले जाने की तैयारी कर रही है।  

97 लाख की साइबर ठगी: इंदौर की रिटायर्ड टीचर ठग के जाल में फंसी 14 महीनों तक

इंदौर साइबर अपराधियों ने सेवानिवृत्त शिक्षिका से 96 लाख 83 हजार 595 रुपये की ठगी कर ली। वह 14 महीनों तक ठगों के संपर्क में रही और उनके इशारों पर खातों में राशि जमा करवाती रहीं। पुलिस ने शुक्रवार रात अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठग के सभी खाते फर्जी पाए गए हैं। सिम कार्ड भी दूसरों के नाम से मिले हैं। ठगी जूना रिसाला निवासी कुमारी पुष्पा ठाकुर के साथ हुई है। 67 वर्षीय पुष्पा सेवानिवृत्त सहायक प्राध्यापक हैं। शिकायत में बताया कि 16 दिसंबर 2023 को राजीव शर्मा नामक व्यक्ति का कॉल आया था। उसने खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताया और पुष्पा को दो बीमा पॉलिसी की जानकारी दी। उसने कहा कि एक पॉलिसी चालू है और दूसरी सरेंडर नहीं हुई है। एक लाख रुपये की राशि एनईएफटी कर दें ताकि पॉलिसी की सरेंडर राशि खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।   आरोपी ने महिला से दस्तावेज भी मंगवा लिए आरोपित ने बाकायदा ई-मेल आईडी भेजी और महिला से दस्तावेज भी मंगवा लिए। आरोपित ने सात फरवरी 2025 तक महिला से कुल 96 लाख 83 हजार 595 रुपये जमा करवा लिए। बीमा कंपनी से डेटा लीक, ठग ने पॉलिसी बताकर ठगा महिला ने पुलिस को बताया कि उसने एसबीआई लाइफ से बीमा पॉलिसी ली थी। तीन साल तक 25 हजार रुपये जमा करती थी। बीच में रुपये जमा करना बंद कर दिए। कंपनी के कर्मचारी ने पॉलिसी सरेंडर करने की सलाह दी और 72 हजार रुपये मिले। मार्च 2020 में महिला ने दस वर्ष के लिए दूसरी पॉलिसी ले ली। 16 दिसंबर 2023 को ठग का कॉल आया और कहा कि पॉलिसी सरेंडर नहीं हुई है। उसमें लाखों रुपये जमा हैं। शक है बीमा कंपनी से ही ग्राहकों के डेटा लीक हो रहा है। गिरोह ने 23 बार में 32 खातों में जमा करवा रुपये एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार, ठगी का शिकार हुई महिला ने आरोपितों में राजीव शर्मा, अमित शर्मा, आर. गोस्वामी, एसके अहलुवालिया, सुब्रत बास, गुरमीत सिंह चंद्रा के नाम बताए हैं। ठग इनके नाम से ही कॉल लगाते थे। आरोपितों ने 23 बार में 32 खातों में रुपये ट्रांसफर करवाए हैं। 15 लाख 46 हजार रुपये तो बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से ट्रांसफर किए गए हैं।

देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन घोटाला: 23 करोड़ की ठगी, डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट!

नई दिल्ली  दिल्ली एनसीआर में डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. डिजिटल फ्रॉड करने वाले ज्यादातर बुजुर्ग लोगों को ही अपना शिकार बनाते हैं. राजधानी के गुलमोहर पार्क में रहने वाले पूर्व बैंक अधिकारी नरेश मल्होत्रा को लगभग डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट कर उनके खाते से 23 करोड रुपए का डिजिटल फ्रॉड किया गया. नरेश मल्होत्रा ने बताया कि पहली कॉल 1 अगस्त 2025 को आई थी. लैंडलाइन पर कॉल आया कि हम एयरटेल से बोल रहे हैं और आपको मुंबई पुलिस से कनेक्ट कर रहे हैं. क्योंकि आपके आधार से मुंबई के भायखला में नया नंबर जारी हुआ है और अगर आप ने कॉल डिस्कनेक्ट किया तो आप के घर की सारी लाइन काट दी जाएगी. क्या है पूरा मामला? नरेश मल्होत्रा ने बताया कि पहले लैंडलाइन पर फिर मोबाइल पर वॉट्सएप कॉल आया और सारी जानकारी दी. जिसमें कॉल करने वाले ने बताया कि आपके आधार से यह नंबर इशू है और इससे आपने टेरर फंडिंग की है, जिसके बाद आपको डिजिटल अरेस्ट किया जाता है. उन्होंने बोला कि आप पर PMLA एक्ट लगाया गया है क्योंकि आपके नंबर से गैंबलिंग, टेरर फंडिंग की गई है. फैमिली को अरेस्ट करने की धमकी उन्होंने धमकाया कि अगर आप बच्चों को बताओगे तो हम पूरी फैमिली को अरेस्ट कर लेंगे. नरेश मल्होत्रा ने बताया कि पहले मेरे खाते से सोमवार को आरटीजीएस करके 14 लाख रुपए निकाले और बाकी शेयर बेच बेचकर लगभग 4 सितंबर तक अलग-अलग ट्रांजैक्शन में लगभग 23 करोड़ रुपए भेजे. उनकी तरफ से आदेश मिलता था और मैं आरटीजीएस फॉर्म भर देता था, फिर उनको फोटो कॉपी भेजता था. फिर वह अकाउंट नंबर देते थे और बोलते थे कि बैंक जाकर इसमें पैसे भेजिए. बैंक कर्मचारियों ने भी बोला था कि आप इतना सारा पैसा क्यों निकल रहे हैं, हमारे पास छोड़ दो. लेकिन उन्होंने मुझे 14 या 16 सितंबर को अरेस्ट करने की धमकी दी और बोला कि अब ईडी की जांच शुरू हो चुकी है और हमने सारी डिटेल उनको दे दी है. अब आपको 5 करोड़ रुपए का पेमेंट देना है और सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर भेजा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का फर्जी ऑर्डर नरेश मल्होत्रा के मुताबिक उन्होंने बताया कि संसद मार्ग से भी एक डिजिटल आर्डर है और हमें आरबीआई की तरफ से भी इजाजत मिल गई है. आप इस खाते में पैसे ट्रांसफर कर दीजिए. फिर उनकी तरफ से एक प्राइवेट बैंक में पैसा ट्रांसफर करने को कहा गया, जो कोलकाता बेस्ट था. लेकिन मैंनें प्राइवेट बैंक में पैसा भेजने से मना कर दिया. तब उन्होंने मुझे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की तरफ से एक ऑर्डर दिया, जिसके बाद मैंने पैसा ट्रांसफर किया. उस दिन सुबह से मैंने चार अलग-अलग अकाउंट में पैसे भेजे. इसके बाद मैनें जब यह कहा कि अब आपको एक भी पैसा नहीं दूंगा. अब मैं सुप्रीम कोर्ट में जाकर खुद 5 करोड़ रुपए का चेक दे दूंगा तब उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी. दिल्ली पुलिस और साइबर सेल में शिकायत नरेश मल्होत्रा ने बताया कि मैंने 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस और साइबर सेल को शिकायत की. जिसके बाद से सभी मेरी पूरी मदद कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वह पूरा मामले पर सही जांच करेंगे. उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से इसमें बैंकों की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है. जिस खाते में एक हजार का बैलेंस है और उसमें करोड़ रुपए आए तो इस पर बैंक और आरबीआई को जांच करनी चाहिए. इसमें पूरी जिम्मेदारी बैंक की है. इन बैंकों की केवाईसी प्राइवेट कर्मचारी करते हैं. ना कस्टमर बैंक जाता है और ना यह कर्मचारी उनको बैंक आने देते हैं. इस तरह के फ्रॉड में बैंक की भी जिम्मेदारी होती है. NIA नियम भी है कि बिना केवाईसी के अकाउंट नहीं खोल सकते हैं. अगर यह कलेक्टिव बैंक पर पाबंदी करेंगे तो डिजिटल फ्रॉड को रोका जा सकता है.