samacharsecretary.com

ई-चालान सिस्टम हुआ और स्मार्ट, 1500 नई हैंडहेल्ड मशीनें तैनात

नई दिल्ली  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने चालान और यातायात प्रबंधन सिस्टम में एक बड़ा तकनीकी बदलाव शुरू किया है, जिसका उद्देश्य यातायात नियमें के उल्लंघन को अधिक पारदर्शी, नागरिक अनुकूल, प्रभावी और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। लोग मौके पर ही भर सकेंगे चालान इस पहल के तहत अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग मौके पर ही UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी विभिन्न डिजिटल भुगतान सुविधाओं से अपने चालान का भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए फील्ड में तैनात ट्रैफिक पुलिस अधिकारी हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग करेंगे। मामले में क्या बोले ट्रैफिक के अडिशनल पुलिस कमिश्नर ई चालान मशीनों से फिलहाल चालान के साथ-साथ पुराने चालानों का भी डिजिटल भुगतान सड़क पर तैनात ट्रैफिक कर्मियों की सहायता से किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा तो कम होगी ही साथ ही कैश रहित लेनदेन को भी बढ़ावा मिलेगा। अडिशनल पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) विजयंता गोयल आर्या ने बताया कि चालान का भुगतान डिजिटल रूप में करने की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दिल्लीभर में फील्ड अधिकारियों को लगभग 1,500 नई ई-चालान मशीनें बांटी की जा रही है। कई आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं खास मशीन ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय टोडापुर में कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ये मशीनों बांटकर इस मुहिम की शुरूआत की गई है। इन हैंडहेल्ड डिवाइस के माध्यम से तेज चालान जेनरेशन, तुरंत भुगतान प्रक्रिया, गाड़ी और उल्लंघनकर्ता की फोटो कैप्चर करने, गाड़ी को टो किए जाने की सूचना गाड़ी मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजने और बेहतर डेटा और रेकॉर्ड प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जुड़ चुकी ई चालान प्रणाली जनसुविधा को और बेहतर बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ई-चालान प्रणाली को अब भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) से भी जोड़ दिया गया है। इससे कोई भी व्यक्ति किसी भी UPI मोबाइल ऐप्लीकेशन से वर्तमान और पुराने दोनों प्रकार के कंपाउंडेबल चालानों का सुरक्षित, सरल और सहज भुगतान कर सकेंगे। ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई नई मशीनों और डिजिटल भुगतान के बारे में बताने के लिए सभी फील्ड अधिकारियों, जिनमे सर्किल ट्रैफिक इंस्पेक्टर भी शामिल है, उनको ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसमें ई-चालान प्रणाली के संचालन, डिजिटल भुगतान प्रक्रिया और शिकायत निवारण संबंधी प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस आधुनिक तकनीक और स्मार्ट प्रवर्तन समाधानो के माध्यम से यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने, चालान भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, नागरिको को सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है

दिल्ली के ट्रैफिक पर ऋषि सुनक की चुटकी: बोले, ‘एआई भी यहां बेबस है’

नई दिल्ली ऋषि सुनक ने राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इंपैक्ट समिट के कार्यक्रम में पहुंचने में देरी होने पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिल्ली के ट्रैफिक पर तंज कसा। उन्होंने मंच से कहा कि सेशन के लेट शुरू होने की जिम्मेदारी उनकी है और मजाकिया लहजे में जोड़ा “एआई बहुत सारी समस्याओं को कम कर सकता है, लेकिन दिल्ली का ट्रैफिक कम करना उसके लिए भी मुश्किल है।” उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। सुनक का यह बयान दिल्ली के भारी ट्रैफिक की ओर इशारा करता है, जो अक्सर बड़े आयोजनों और व्यस्त समय में और बढ़ जाता है। भारत से अच्छी इसके लिए कोई जगह नहीं-सुनक ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट में भारत की जमकर सराहना करते हुए कहा कि एआई ट्रांसफॉर्मेशन पर चर्चा के लिए भारत से बेहतर जगह कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से केवल विकसित देशों को ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों को भी बड़ा लाभ मिलने वाला है। सुनक के मुताबिक, दुनिया को एक ऐसे नियमित फोरम की जरूरत है जहां तकनीक और एआई पर गंभीर चर्चा हो सके। सुनक ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हुआ है, जहां यह समझने का मौका मिल रहा है कि एआई किस तरह वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकता है। उनके अनुसार, यह मंच विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और एआई के फायदे को व्यापक रूप से साझा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट के इस सेशन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबके लिए होना चाहिए, और इसी उद्देश्य से इस मंच पर “एआई इंपैक्ट” पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एआई की क्षमता को बहुत अच्छी तरह समझा है, इसलिए यहां इसे बड़े स्तर पर लागू करने की बात हो रही है। सुनक के अनुसार, एआई से आम जनता को वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए बड़ा टैलेंट पूल, मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सपोर्टिव टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की जरूरत होती है, और भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुनक ने यह भी कहा कि एआई को लेकर दुनिया में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। उनके मुताबिक, भारत में एआई को लेकर जबरदस्त आशावाद और भरोसा है, जबकि पश्चिमी देशों में फिलहाल चिंता ज्यादा दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे के अंतर को पाटना केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नीतिगत चुनौती भी है। अब एआई पर वैश्विक बहस तकनीक से आगे बढ़कर रणनीति पर केंद्रित हो गई है। सुनक के शब्दों में “मुद्दा अब यह नहीं है कि ये उपकरण क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि देश इनके साथ क्या करना चुनते हैं।” ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट में कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हाशिये का विषय नहीं, बल्कि सरकारों की केंद्रीय जिम्मेदारी बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व केवल नए आविष्कार करने से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि किसी देश द्वारा उस तकनीक को किस तरह लागू किया जाता है और समाज तक उसका लाभ कैसे पहुंचाया जाता है। सुनक के मुताबिक, भारत एआई के क्षेत्र में नेतृत्व करने की मजबूत स्थिति में है। इसके पीछे उन्होंने तीन प्रमुख कारण बताए गहरी प्रतिभा संपदा (टैलेंट पूल),मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी के प्रति बेहद सकारात्मक जनमानस उन्होंने कहा कि इन कारकों के कारण भारत में एआई की व्यापक स्वीकार्यता दिखाई दे रही है, जो देश को न केवल एआई अपनाने बल्कि समाज में इसके बड़े पैमाने पर उपयोग और तैनाती का उदाहरण पेश करने में सक्षम बनाती है।