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सुशासन का नया चेहरा बना बस्तर मॉडल, डिजिटल सिस्टम और जमीनी प्रशासन ने रचा इतिहास

​रायपुर.  प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी 'फौती नामांतरण' (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है। ​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा 'सक्रिय मॉडल' (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य  जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है। 'सक्रिय अभियान': एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच ​आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस 'रिएक्टिव' (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा। ​इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है। ​प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब 'त्रिमूर्ति' ने संभाला मोर्चा ​इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी। ​इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति' ने इस अभियान को संभाला। डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने 'जन्म एवं मृत्यु पंजीयक' के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से 'विलम्ब पंजीयन' की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए। तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला 'वंश वृक्ष' तैयार किया। पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई। ​ बस्तर की तहसीलों में सुशासन का 'सेचुरेशन' ​जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं। ​बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत 'सेचुरेशन' (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं। ​प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है। ​भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है। ​अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं। ​बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं। ​इस … Read more

मिशन कर्मयोगी से दक्ष हो रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी

सीएम योगी के नेतृत्व में जारी मिशन कर्मयोगी अभियान में अब तक 3,900 कर्मचारी पंजीकृत, 21,150 कोर्स पूरे डिजिटल प्रशिक्षण से कार्यकौशल को निखारते हुए जनता को पारदर्शी, तेज और प्रभावी सेवाएं प्रदान कर रहे अधिकारी और कर्मचारी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक दक्षता और सुशासन के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। इसके तहत समाज कल्याण विभाग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल ‘मिशन कर्मयोगी अभियान’ को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। इस अभियान के तहत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से अपने कार्यकौशल को निखारते हुए जनता को पारदर्शी, तेज और प्रभावी सेवाएं प्रदान करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं। दक्षता और पारदर्शिता की नई मिसाल समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि सितंबर 2025 तक विभाग के 3,900 अधिकारी, नियमित/संविदा कर्मचारी एवं शिक्षक iGOT Karmayogi पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इन सभी ने अब तक 21,150 कोर्स पूरे किए हैं, जिनमें कुल 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। आंकड़ों के अनुसार 2,759 कर्मचारियों ने कम से कम एक कोर्स पूरा किया है। 2,289 कर्मचारियों ने तीन या उससे अधिक कोर्स पूरे किए हैं। वहीं 1,611 कर्मचारी तीन से कम कोर्स तक सीमित रहे हैं और 1,141 अभी प्रशिक्षण पूरा करने की प्रक्रिया में हैं। दक्षता से ही बढ़ेगी सेवा की गुणवत्ता मंत्री असीम अरुण ने कहा कि “मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक सरकारी अधिकारी और कर्मचारी को दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। इस प्रशिक्षण से सरकारी कर्मचारियों में नई कार्यशैली, नीति निर्माण की समझ और प्रबंधन कौशल विकसित हो रहे हैं, जिससे जनता को अधिक गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी। नई तकनीक, पारदर्शिता और तनावमुक्त कार्यसंस्कृति की ओर कदम iGOT Karmayogi प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऐसे विषय शामिल हैं जो कर्मचारियों को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाते हैं, बल्कि उन्हें कार्यस्थल पर सकारात्मक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।0मुख्य कोर्स में शामिल Yoga Break at Workplace तनावमुक्त और उत्पादक कार्यसंस्कृति के लिए है। वहीं, POSH Act 2013 कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा की जागरूक करता है। Procurement Process on GeM पारदर्शी क्रय प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए लागू है। National Education Policy 2020, Basics of AI, और Right to Information (RTI) Act नीति, तकनीक और पारदर्शिता के आयामों को समझने हेतु है। योगी सरकार की डिजिटल सुशासन नीति को मिल रही गति राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अंतर्गत मिशन कर्मयोगी जैसे अभियानों से न केवल सरकारी कामकाज की गति बढ़ रही है, बल्कि जवाबदेही और नागरिक संतुष्टि में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सभी विभागों को iGOT Karmayogi पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से जारी है, ताकि “प्रशासन जनता के लिए अधिक सुलभ और जवाबदेह बने।