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धान के GI टैग पर सियासत तेज: दिग्विजय सिंह बोले- हक नहीं मिला तो करूंगा अनशन

भोपाल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश की धान को अब तक जीआई टैग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि धान को जल्द जीआई टैग नहीं दिया गया तो वे अनशन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों को नहीं मिलता दाम दिग्विजय सिंह के अनुसार प्रदेश में एक लाख से अधिक किसान बासमती धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका सहित कई देशों में बासमती चावल करीब 300 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को इसके लिए सिर्फ 35 से 40 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं।   किसानों को उचित लाभ नहीं उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का क्षेत्र भी बासमती उत्पादक किसानों का बड़ा इलाका है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जीआई टैग देने की मांग भी की है।

दिग्विजय सिंह की RSS पर टिप्पणी, मानहानि केस खारिज करने से कोर्ट का इनकार

भोपाल  कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर से जुड़ी एक टिप्पणी के चक्कर में फंसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है। 8 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया साइट पर किए गए एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर की एक तस्वीर साझा करके उसके कैप्शन में लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वह दलितों, पिछड़े वर्गों, मुसलमानों और भूमि, जल व जंगल से जुड़े मुद्दों पर गोलवलकर के विचारों से परिचित हैं? इस पोस्ट को लेकर ठाणे निवासी और संघ के स्वयंसेवक शशिकांत चंपानेकर ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दायर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघ की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। याचिका के दाखिल होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी। राज्यसभा सांसद ने इस याचिका को खारिज करने की अपील करते हुए तर्क दिया कि यह मामला कानूनन विचारणीय नहीं है। इस पर सिविल जज राजेश बी. खंडारे ने कहा कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में वैध कारण बनता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस नेता की तरफ से दलील दी गई कि याचिका कर्ता को यह मुकदमा दायर करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि संघ न तो कोई पंजीकृत संस्था है और न ही कानूनी व्यक्ति है। ऐसे में वह मुकदमा दायर नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कोई व्यक्तिगत सदस्य संघ और गोलवलकर की ओर से हर्जाना कैसे मांग सकता है? इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि आपराधिक मानहानि कानून के तहत किसी पहचाने जाने योग्य समूह की मानहानि की जा सकती है और उस समूह का कोई आहत सदस्य कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े गंभीर और विचारणीय मुद्दे हैं, जिनका फैसला केवल साक्ष्य दर्ज होने के बाद ही किया जा सकता है, न कि वाद खारिज करने के चरण पर। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस वाद को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिका में कारण बनता है, संघ सदस्य के मुकदमा दायर करने के अधिकार को इस चरण पर कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं कहा जा सकता और वाद के मूल्यांकन या कोर्ट फीस की पर्याप्तता जैसे मुद्दे बिना सुधार का अवसर दिए वाद खारिज करने का आधार नहीं बन सकते।

UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।  

तीसरी पारी पर ब्रेक! दिग्विजय सिंह राज्यसभा से बाहर—राजनीतिक मोहभंग या कांग्रेस का मास्टरप्लान?

भोपाल 2 बार राज्यसभा के सांसद रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार अपर हाउस में जाने से मना कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म होने वाला है। एमपी में कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखें तो वो आसानी से तीसरी बार राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा है- 'मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।' दिग्विजय सिंह के ऐलान के बाद कई सवाल बन रहे हैं, जिनमें से दो की चर्चा तेजी से हो रही है। पहला- अगर दिग्विजय सिंह नहीं तो कौन जा रहा है राज्यसभा? दूसरा- क्या उनका राज्यसभा से मोहभंग हो गया है या फिर कांग्रेस में कोई सीक्रेट प्लान बन रहा है?   उनकी जगह कौन जा रहा है राज्यसभा? उनकी जगह या फिर कौन राज्यसभा जा रहा है, इसका जवाब दिग्विजय सिंह ने गोल-मोल करते हुए दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान, जब उनसे पूछा गया- 'मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आपको पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्यसभा सीट से अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को भेजा जाना चाहिए'- इस पर आपका क्या कहना है? इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा- “ये मेरे हाथ में नहीं है।” कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति की तरफ इशारा अब दूसरा सवाल उठ रहा है क्या दिग्विजय सिंह का मोहभंग हो गया है या कांग्रेस और राहुल गांधी कोई सीक्रेट प्लान पर काम कर रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह द्वारा अपना नाम पीछे खींच लेना 'व्यक्तिगत निर्णय नहीं' है। ये 'कांग्रेस आलाकमान की सोची समझी रणनीति' है बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस केवल सदन में सरकार को घेरने की बजाय धरातल पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में युवाओं को आगे लाने की तैयारी हो रही है। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा रही हैं। विधानसभा चुनाव की चल रही है तैयारी? साल 2017-18 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में नर्मदा परिक्रमा का आयोजन किया गया था। ये परिक्रमा करीब 3300 किलोमीटर लंबी थी। इसे कांग्रेस के लिए मजबूती के तौर पर देखा गया था। जैसे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के द्वारा कार्यकर्ताओं और लोगों पहुंच बनाई थी, ठीक ऐसा ही प्रभाव नर्मदा परिक्रमा का देखने को मिला था। इसका प्रभाव 2018 के एमपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह से कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान कराया जा सकता है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में संगठन और नए नेताओं को मजबूत दिशा दे सके। दिग्विजय सिंह की हार-जीत का सफर आपको बताते चलें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वो 1993 से 2003 तक लगातार 2 बार एमपी के सीएम रहे हैं। हालांकि 2003 में कांग्रेस की सत्ता गई तो उनकी राजनीति में विराम सा लग गया था। लेकिन एक दशक की शांति के बाद 2013 में उनकी फिर वापसी हुई और 2014 से राज्यसभा के सांसद हैं। इस बीच 2019 और 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  

दिग्विजय सिंह का बड़ा फैसला, राज्यसभा सीट छोड़कर फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की सियासी हवा का रूख जल्द बदल सकता है, क्योंकि राज्यसभा सांसद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह एक बार फिर से प्रदेश की राजनीति में एक्टिव हो सकते हैं। वह दो बार के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब तीसरी बार वह राज्यसभा नहीं जाएंगे। वह प्रदेश स्तरीय राजनीति में सक्रिय होकर कांग्रेस की जमीन को मजबूत करेंगे। प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होंगे राजा साहब साल 2028 में विधानसभा चुनाव और साल 2029 में लोकसभा चुनाव हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा का साल 2018 के विधानसभा चुनावों में गहरा प्रभाव था। जिसमें उन्होंने गांव-गांव पैदल यात्रा की थी। उस दौरान कांग्रेस की सत्ता में वापसी भी हो पाई थी। इन्हीं कारणों को देखते हुए पार्टी आलाकमान से दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह प्रदेश की राजनीति में अपना पूरा समय देना चाहते हैं। जिस पर पार्टी आलाकमान ने भी मुहर लगा दी है। हालांकि, अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। कांग्रेस को मजबूत करनी होगी जमीन पिछले महीने ही दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में दिग्विजय सिंह प्रजेंटेशन दे चुके हैं। जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने के लिए बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर पर मजबूत होना होगा। इस दौरान उन्होंने बताया था कि बूथ से जिला स्तर तक एक्टिव होने पर सीधा कार्यकर्ताओं से जुड़ाव होगा। राज्यसभा की रेस में कमलनाथ समेत ये नेता दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा जाने की रेस में कमलनाथ, अरूण यादव, मीनक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल समेत कई नेता रेस में हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रबल संभावना है कि कमलनाथ को दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा भेजा जा सकता है। साथ ही उन्हें सक्रिय भूमिका भी दी जा सकती है। बता दें कि, मार्च में राज्यसभा सीट खाली हो रही है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार के सांसद रह चुके हैं। वह 2018 से मार्च 2020 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय पर्यटन मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) कई महत्तवपूर्ण पद संभाल सकते हैं। दिग्विजय सिंह से मांगी राज्यसभा सीट प्रदेश कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखते हुए कि यह सर्वविदित है कि आपके मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान के लिए सदैव याद किया जाएगा। आगे मिथुन अहिरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की लगभग 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति आबादी की भावना और अपेक्षा को आपके समक्ष रखते हुए मैं आपसे यह आग्रह करता हूँ कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा, बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगा।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से मचा घमासान, ग्वालियर-चंबल में क्यों पसरी है खामोशी?

ग्वालियर  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह संघ और भाजपा की प्रशंसा करने से अपने ही दल के राजनीतिक भंवर में फंसे नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री की पोस्ट से कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। इस घमासान में उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में खामोशी है। अंचल में दिग्विजय सिंह के कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेता भी पक्ष और विपक्ष में बोलने से फिलहाल बच रहे हैं। केवल उनके पुत्र जयवर्धन और डॉ. गोविंद सिंह ही पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में खड़े नजर आए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अंचल के कांग्रेसी शीर्ष नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो पोस्ट कर लिखा है कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है। पूर्व मुख्यमंत्री की निष्टा पर संदेह करना गलत पूर्व मुख्यमंत्री के नजदीकी माने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने नईदुनिया के संपर्क करने पर कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है। पूर्व मुख्यमंत्री संघ व भाजपा के घोर विरोधी हैं। उनके द्वारा की गई पोस्ट संघ और भाजपा के संबंध में पोस्ट प्रशंसा नही, व्यंग्य है। यह हैं खामोश ग्वालियर-चंबल अंचल में पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थकों की लंबी फौज है। इसके साथ ही उनके विरोधियों की संख्या भी कम नही हैं, लेकिन उनकी पोस्ट पर समर्थकों व विरोधियों की अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है। पूर्व मंत्री केपी सिंह, राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह सरीखे नेता खामोश हैं। संघ व भाजपा के संगठन की प्रशंसा की थी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो वायरल किया। इसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फर्श पर बैठे नजर आ रहे हैं। यह फोटो वायरल करने के साथ उन्होंने संघ और भाजपा के संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा की। इस पोस्ट के बाद दिग्विजय सिंह कांग्रेसियों के टारगेट पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दे दिया और नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल निरुपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए शीर्ष नेतृत्व पर दबाव की राजनीति है।

दिग्विजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग, सरला मिश्रा केस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को दिया ज्ञापन

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए आजकल दिन अच्छे नहीं चल रह हैं। पहले BJP RSS पर लेकर दिए बयान को लेकर उन्हें पार्टी के भीतर ही विरोध सहना पड़ा । अब एक पुराने मामले में उनको कांग्रेस पार्टी से हटाने के लिए मांग उठी है। दिग्विजय सिंह को पार्टी से निष्कासित करने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है। यह ज्ञापन कांग्रेस नेत्री रही स्वर्गीय सरला मिश्रा के भाई अनुराग मिश्रा ने दिया है। अनुराग मिश्रा ने जीतू पटवारी को ज्ञापन सौंपकर दिग्विजय को पार्टी से बाहर करने की मांग कर डाली है। आपको बता दें कि  सरला मिश्रा हत्याकांड में दिग्विजय सिंह पर संगीन आरोप हैं. वहीं कोर्ट ने भी 28 साल पुराने सरला मिश्रा हत्याकांड फिर से जांच के आदेश दिए हैं. इसी साल अप्रैल में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठाया था कि 90 फीसदी जलने के बाद कोई पीड़ित मौत से पहले बयान कैसे दे सकता है।यही नहीं बयान देने के बाद उस पर साइन कैसे कर सकता है.पुलिस ने सरला मिश्रा केस में वर्ष 2000 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके मौत को खुदकुशी बताया गया था. लेकिन सरला के भाई अनुराग मिश्रा ने जांच को फिर से शुरू करने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी ।  कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह Digvijay Singh के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उनके RSS संबंधी बयान को लेकर फेसबुक पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने कहा कि इससे पार्टी की वैचारिक लड़ाई कमजोर हुई, जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है। निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लिखा- वैचारिक दोगलापन या घर वापसी की छटपटाहट! कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालनेवाले दिग्विजयसिंह पर कब होगी कार्रवाई? दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा मार दिया है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के नाते उनकी यह जिम्मेदारी बनती थी कि वे पार्टी के वैचारिक संघर्ष को धार देते, न कि विपक्षी खेमे का गुणगान कर अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ते। सुर्खियों में बने रहने की उनकी इस 'ऊल-जलूल' बयानबाजी ने आज हर सच्चे कांग्रेसी के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। दो दशक में पार्टी को खोखला किया फेसबुक पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजयसिंह के हस्तक्षेप के कारण पार्टी के कई समर्पित नेता हाशिए पर चले गए। पिछले दो दशकों से प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में उनका जबर्दस्त हस्तक्षेप रहा है। संगठनात्मक फैसलों से लेकर नेतृत्व चयन तक में दिग्विजय सिंह की निर्णायक भूमिका रही है। उनकी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति और अंदरूनी खींचतान के कारण पार्टी को खासा नुकसान हुआ। निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह की राजनैतिक निष्ठा और विरासत पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा है कि अनेक पुस्तकों, राजनेताओं की जीवनियों और शोध पत्रों में राघोगढ़ राजघराने का हिंदू महासभा से जुड़ाव का उल्लेख किया गया है। निधि चतुर्वेदी के अनुसार RSS व बीजेपी के नेता राम माधव ने दावा किया था कि दिग्विजय सिंह के पिता बलभद्र सिंह हिंदू महासभा के समर्थन से विधायक बने थे। स्वयं दिग्विजय सिंह भी हिंदू महासभा के सदस्य के रूप में नगरपालिका में पदासीन हुए थे। क्या था सरला मिश्रा हत्याकांड? महिला कांग्रेस कार्यकर्ता सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को भोपाल स्थित अपने घर में जली हुई हालत में मिली थीं. उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पांच दिन बाद उनकी मौत हो गई. सरला के परिवार ने इसे हत्या बताया था और आरोप लगाया कि इसमें दिग्विजय सिंह और उनके भाई लक्ष्मण सिंह का हाथ था. सरला की मौत के बाद मध्य प्रदेश में सियासी तूफान आ गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भी मामले को दबाने के भी आरोप लगे थे. पिछले साल सरला के भाई अनुराग मिश्रा ने मामले को बंद करने के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विरोध याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने भोपाल की एक कोर्ट को शिकायतकर्ता समेत केस के गवाहों के बयान दर्ज करने और यह जांच करने के लिए कहा था कि क्या केस को बंद करना कानून के मुताबिक था. साल 2000 में पुलिस ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट इसी साल अप्रैल में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया था कि 90 फीसदी जलने के बाद कोई पीड़ित मौत से पहले बयान कैसे दे सकता है. बयान देने के बाद उसपर साइन कैसे कर सकता है. दरअसल पुलिस ने सरला मिश्रा केस में साल 2000 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें इसे खुदकुशी बताया गया था. हालांकि अनुराग इससे संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने जांच को फिर से शुरू करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि केस की जांच अधूरी थी.

‘दिग्विजय सिंह BJP में शामिल होने की कोशिश में’, MLA पन्नालाल शाक्य का बड़ा बयान

 गुना दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की CWC बैठक से पहले दिग्विजय सिंह के बयान ने सियासत गर्मा दी है. दिग्विजय सिंह ने RSS और BJP में अनुशासन की तारीफ करते हुए तस्वीर शेयर की थी. कांग्रेस नेता की बयानबाजी को लेकर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खुलासा किया है. विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''दिग्विजय सिंह BJP में आने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, इसलिए RSS और BJP की विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं.'' गुना विधायक ने दिग्विजय सिंह को लेकर खुलासा करते हुए कहा, ''वे किसके संपर्क में हैं ये ऊपरवाले (हाईकमान) ही जानते हैं. दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, इसलिए उनके विषय में ज्यादा क्या कहा जाए.'' चरनोई' और 'मंदिर माफी' की जमीन पर घेरा BJP विधायक ने दिग्विजय सिंह के मंदिर माफी की जमीन पर रोक लगाने वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. कहा कि सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय के शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट हुई थी. मंदिर माफी की कितनी जमीन बची है, पहले उसकी तलाश कर ली जाए. मंदिर माफी की जमीन बचाने के लिए दिग्विजय सिंह राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. वे केवल वोटबैंक को देखते हुए बयानबाजी करते हैं. यदि उन्हें मंदिर माफी की जमीन की इतनी ज्यादा चिंता है तो फिर चरनोई (गौ चर भूमि) की जमीन के बारे में क्यों नहीं बोलते? गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''गायों के लिए आरक्षित चरनोई जमीन पर माफियाओं ने कब्जा जमा लिया. मंदिरों के रखरखाव के लिए अंग्रेजी शासन में जमीनें दी गई थीं और मुगल शासन में मवेशियों के लिए चरनोई भूमि आरक्षित की गई थी. लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन में तो सभी सरकारी जमीनें ही बंट गई. अब गाय कहां खड़ी होंगी? गाय अगर वोट दे रही होतीं तो जमीनें बच जातीं? लेकिन गाय तो मूक है यानी बोल नहीं सकती.''   BJP विधायक पन्नालाल शाक्य पन्नालाल शाक्य के बयान अक्सर चर्चाओं में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने मंच से गुना कलेक्टर को लेकर भी नसीहत दी थी. पन्नालाल ने कलेक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बदनाम करना चाहते हैं. वहीं, एक अन्य बयान में पन्नालाल शाक्य ने लोकसभा सीट पर बैठने की भी इच्छा जाहिर की थी.

दिग्विजय सिंह का कांग्रेस से पलटवार, कहा- RSS नहीं तो शिवसेना से सीखो, कांग्रेस को दी नसीहत

भोपाल  BMC यानी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस में तनातनी जारी है। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले दल ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सीख लेने की सलाह दी है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की तरफ से हाल ही में आरएसएस की तारीफ की गई थी, जिसपर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, 'आरएसएस पूरे देश में 60-70 लाख स्वयं सेवकों के माध्यम से देश की सेवा कर रहा है। हालांकि, वो राजनीति में सक्रिय नहीं होते, लेकिन पीछे से राजनीतिक दलों की मदद करते हैं। हम तो यही कहेंगे कि आरएसएस का जो संगठन है, जो अनुशासन है, मातृभूमि के प्रति जो समर्पण है, उससे कांग्रेस को सीखना चाहिए। दिग्विजय सिंह वही बात कर रहे हैं, जो सब बात करते हैं।' इस दौरान उन्होंने संघ की जमकर तारीफ की। दुबे ने कहा, 'देखिए आरएसएस देश की परंपरा चलाने वाली, धरोहर चलाने वाली सांस्कृतिक संगठन है। तो उसके जैसा कौन बन पाएगा। जो नरेंद्र मोदी जी को उठाकर प्रधानमंत्री बना सकती है संगठन। जो सारे बड़े बड़े हिन्दुत्व के आंदोलन में आगे रहती है। हमारी शिवसेना के भी साथ आंदोलन में भी आरएसएस साथ रहती है।' उन्होंने कहा, 'ऐसी आरएसएस से कांग्रेस नहीं सीखेगी, तो क्या कांग्रेस से कांग्रेस सीखेगी। जहां खुद ही नहीं पता कि कांग्रेस में क्या अनुशासन है, क्या रणनीति है, क्या उनकी बैठकें हैं, कौन कहां गठबंधन करेगा, कौन क्या बनाएगा। कुछ पता ही नहीं है। सब राम भरोसा चल रहे हो आप।' दिग्विजय ने क्या कहा दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। फोटो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, 'कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।' विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं।

RSS पर तारीफ, कांग्रेस पर सवाल—दिग्विजय सिंह अब भी अपने स्टैंड पर कायम

 नई दिल्ली/भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) की तारीफ कर सनसनी फैला दी है। कई तरह की अटकलों के बीच वह अब भी अपने बयान पर ना सिर्फ कायम हैं, बल्कि दोहरा भी रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की संगठन शक्ति का खुद को प्रशंसक बताते हुए अब कांग्रेस में सुधार की गुंजाइश भी बताई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी मुद्दे पर आंदोलन तो अच्छे से खड़ा कर लेती है, लेकिन इसे वोटों में नहीं बदल पा रही है। दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में सीडब्ल्यूसी की बैठक के इतर न्यूज एजेंसी एनआई से बातचीत करते हुए कम से कम दो बार खुद को आरएसएस की संगठन क्षमता का प्रशंसक बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं तो शुरू से इस बात को कहता रहा हूं कि आरएसएस की विचाराधारा का मैं विरोधी हूं, क्योंकि वे ना तो पूरी तरह से संविधान को मानते हैं, ना कानून को मानते हैं और अपंजीकृत संस्था है जिस पर कोई कानून लागू नहीं होता। लेकिन उनकी संगठन क्षमता का प्रशंसक इसलिए हूं क्योंकि एक ऐसी संस्था जिसका पंजीयन नहीं है वह आज इतनी शक्तिशाली हो गई कि देश के प्रधानमंत्री लाल किले से कहते हैं कि यह विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ है, अरे भई एनजीओ है तो आपका नियम और कानून कहां चले गए। लेकिन मैं इनकी संगठन क्षमता का प्रशंसक हूं।’ कांग्रेस की क्या कमी बताई यह पूछे जाने पर कि क्या आपको कांग्रेस की संगठन क्षमता कमजोर दिख रही है? वरिष्ठ नेता ने कहा, 'इतना मैं कह सकता हूं कि इसमें सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन में सुधार की गुंजाइश रहनी चाहिए।' एक अन्य सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मैं कई बार कह चुका हूं कि कांग्रेस आंदोलन की पार्टी तो है और होना भी चाहिए कि हर बाद पर माहौल बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी इस मामले में होशियार है, अच्छी तरह आंदोलन बनाती है। लेकिन इसको वोटों में परिवर्तित करने में हम कमजोर पड़ते हैं।' उन्होंने कहा कि संगठन को नीचे तक मजबूत करने की आवश्यकता है। मोदी के जमीन पर बैठे हुए तस्वीर दिखा की थी तारीफ दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक से पहले शनिवार को भाजपा और आरएसएस की ‘संगठन शक्ति’ की तारीफ कर अपने दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी। कार्य समिति की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं और उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, ‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’