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आदित्य ठाकरे की बढ़ीं मुश्किलें? दिशा सालियान के पिता ने भेजा ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस

मुंबई सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में दिशा के पिता सतीश सालियन ने दोनों से हर्जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दोनों नेताओं ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की। आपको बता दें कि दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। पुलिस ने इस घटना को दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की। इसके छह दिन बाद एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हो गई। दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ नए सिरे से जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए। इस घटना के करीब छह साल बाद सीबीआई ने कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है। 500 करोड़ रुपये का नोटिस 500 करोड़ रुपये के इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन के इरादों पर सवाल उठाने और उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को दुर्भावनापूर्ण बताया था। वकील द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है, “मेरे मुवक्किल सतीश सालिया पर ये सारे आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर लगाए गए हैं। सतीश सालियान की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाया गया। एक दुखी पिता को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। वह सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता हैं।” इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर यह गलत दावा करने का भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच पहले ही कर ली थी और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया था कि सालियन का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा था। अनिल देशमुख ने इस दावे का समर्थन किया। 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने कहा था कि दिशा सालियन केस आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की एक साजिश थी। सार्वजनिक माफी की मांग सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग की है। इस माफीनामे को सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए। वीडियो माफीनामा कम से कम तीन मिनट लंबा होना चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए।

दिशा सालियान के पिता ने भेजा 500 करोड़ का मानहानि नोटिस, सात दिन में मांगी माफी

फिल्म मैनेजर दिशा सालियान की मौत एक गुत्थी बन गई है. दिशा की मौत के केस में कई बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं. अब दिशा के पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. हाल ही में सीबीआई ने सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया था. अब उन्होंने दोनों नेताओं को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. नोटिस में दोनों के कुछ बयानों पर आपत्ति जताई गई है. सतीश सालियन ने माफी मांगने, बयान वापस लेने और 500 करोड़ का हर्जाना देने की मांग की है. इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है. यह कानूनी नोटिस वकील अनुष्का सोनावणे के जरिए भेजा गया है. नोटिस में दोनों नेताओं से बिना शर्त, स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने को कहा गया है. माफी को सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों में प्रकाशित कराने की मांग की गई है. इसके लिए प्रिंट मीडिया में ए4 आकार का विज्ञापन देने और राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रमुख न्यूज चैनलों के साथ-साथ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कम से कम तीन मिनट का बिना शर्त वीडियो माफीनामा जारी करने को कहा गया है. दिशा के पिता की मांग नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने सतीश सालियान के बयानों और कानूनी कार्रवाई को लेकर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक आरोप लगाए. सतीश का कहना है कि उनकी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि सीबीआई पहले ही दिशा सालियान मामले की जांच कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है. नोटिस के मुताबिक, सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका दावा है कि याचिका में कई आरोपों, परिस्थितियों, विरोधाभासों और दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मेंशन किया गया था. नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने इस मामले की सुनवाई में हस्तक्षेप किया. उन्होंने केवल कानूनी पहलुओं पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सतीश सालियान की नीयत और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने सतीश की कानूनी लड़ाई को राजनीतिक साजिश और उन्हें परेशान करने की कोशिश बताया. सतीश सालियान ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि इन्हें बिना किसी ठोस सबूत के लगाया गया. नोटिस में अनिल देशमुख के पिछले साल दिए गए उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने सतीश की याचिका को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था. सतीश का कहना है कि देशमुख खुद इस मामले में निष्पक्ष व्यक्ति नहीं थे, इसलिए उनका बयान और भी गंभीर और दुर्भावनापूर्ण था. क्या दिशा की मौत हत्या थी? दिशा सालियान के पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत को लेकर सवाल उठाते आ रहे हैं. 2025 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की दोबारा जांच की मांग की. उनके वकील ने कोर्ट में  दावा किया कि दिशा के साथ पहले यौन हिंसा हुई और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. ये भी आरोप लगाया गया कि मामले को दबाने के लिए प्रभावशाली लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका रही. इन आरोपों की पुष्टि अभी CBI की जांच का विषय है. दिशा सालियान की मौत की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की थी. पुलिस की जांच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था. मार्च 2025 में सामने आई मुंबई पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में भी दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया था और उनकी मानसिक परेशानी का जिक्र किया गया था. यानी अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुराने निष्कर्षों से अलग कोई नया और ठोस सबूत सामने आता है.

दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा ट्विस्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर CBI करेगी जांच

मुंबई  दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद मामले में बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने और जांच CBI को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। उनकी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि, कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया गया है। जांच के दौरान सबूत मिलने पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। CBI को क्या-क्या करना होगा? सतीश सालियान की ओर से पेश अधिवक्ता नीलेश ओझा ने कोर्ट के आदेश के बाद बताया कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, कोर्ट ने CBI को सतीश सालियान का बयान दर्ज करने, FIR रजिस्टर करने और जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। इसके अलावा मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया है। ओझा के मुताबिक, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में जिस व्यक्ति के खिलाफ सबूत मिलेगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सिर्फ नाम या आरोप के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। ओझा ने यह भी कहा कि अगर CBI जांच के बाद कोई नेगेटिव रिपोर्ट दाखिल करती है तो सतीश सालियान को उस रिपोर्ट पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा। छह साल पुराने मामले में क्यों आया नया मोड़? दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे दुर्घटना से हुई मौत की रिपोर्ट (ADR) के तौर पर दर्ज किया था और जांच के बाद इसे आत्महत्या का मामला बताया था। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। पुलिस और SIT की ओर से पहले अदालत में कहा गया था कि जांच में किसी तरह की आपराधिक साजिश या फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला। 2025 में पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच से यौन या शारीरिक हमले के संकेत नहीं मिले। लेकिन सतीश सालियान ने बाद में अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ताजा जांच और FIR की मांग की। उनका आरोप था कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और हत्या हुई और मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को प्रभावित किया गया। ये आरोप अभी आरोप मात्र हैं और जांच के अधीन हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए थे गंभीर सवाल अगस्त में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि जब परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया था तो FIR दर्ज करने में क्या बाधा थी? अदालत ने यह भी सवाल किया था कि 14वीं मंजिल से गिरने के मामले में मेडिकल रिपोर्ट और चोटों से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं। 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने CrPC की धारा 174 के तहत हुई लंबी जांच की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि ऐसी जांच किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में ‘क्लीन चिट’ देने का विकल्प नहीं हो सकती और मामले को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। इसी सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 2 सितंबर को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। बिना सबूत किसी को भी आरोपी न माना जाए' हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक जांच में किसी के खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं, तब तक किसी को भी आरोपी न माना जाए। अदालत ने कहा, "अगर कोई गंभीर अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस) बनता है, तो इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। अगर कोई गंभीर अपराध नहीं बनता है, तो जजों ने जांच अधिकारी (I.O.) को आदेश दिया है कि वे सक्षम अदालत में मामले को बंद करने की उचित प्रक्रिया शुरू करें।" दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की इजाजत दी गई है। CBI दर्ज करेगी FIR, वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे जांच हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इसके बाद CBI जांच को आगे बढ़ाएगी। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि जांच के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो सके। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक बिल्डिंग से गिरने के बाद हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर कई सवाल और आरोप सामने आए तथा दिशा के पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की। सतीश सालियान का बयान भी दर्ज होगा CBI जांच के दौरान दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा। उनके आरोपों और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि किसी मामले में कानूनी रूप से उचित जांच और प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष और न्यायिक रूप से स्वीकार्य क्लोजर मिल सके। आदित्य ठाकरे को लेकर कोर्ट का अहम रुख मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम राजनीतिक और कानूनी बहस के दौरान सामने आता रहा है। हालांकि, CBI जांच का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी … Read more

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान की मौत में किसी भी तरह के संदेह की कोई गुंजाइश नहीं

मुंबई   महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान (28) की मौत में किसी भी तरह के संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। दिशा, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं, 9 जून, 2020 को मलाड की एक इमारत की 12वीं मंजिल से कथित तौर पर कूद गई थीं। सरकार की हाई कोर्ट दी गई इस रिपोर्ट में आदित्य ठाकरे का भी जिक्र किया गया है। कहा गया है कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका का विरोध किया। सतीश सालियान अपनी बेटी के लिए न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी के साथ बर्बरतापूर्ण बलात्कार, हत्या की गई और इसे राजनीतिक रूप से दबाने की कोशिश की गई। दिशा सालियान के पिता ने की थी याचिका दिशा सालियान के पिता ने मांग की कि मामले की जांच शहर की पुलिस की SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से CBI को सौंपी जाए। साथ ही, शिवसेना (UBT) के MLA आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। मुंबई पुलिस का क्या दावा राज्य सरकार की ओर से मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र नागरकर ने जवाब दाखिल किया। उन्होंने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप आधारहीन और निराधार हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। नहीं मिला कोई सीमन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन और या शारीरिक हमले के कोई संकेत नहीं मिले। जांच में न ही सीमन या योनि में कोई जख्म पाया गया। जवाब में दिशा के बॉयफ्रेंड रोहन रॉय के फ्लैट से गिरने की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। उस रात दोस्तों के साथ पार्टी चल रही थी। दिशा सालियान की फ्रेंड्स ने क्या कहा राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान के पिता ने उनकी मौत के बारे में जो आरोप लगाए हैं, वे आधारहीन और निराधार हैं। उन्होंने शहर की पुलिस SIT से जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग की है। दिशा की सहेलियों ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ विवाद और अपने बिजनेस डील पूरी नहीं होने के कारण मानसिक तनाव में थी। बहुत नशे में थी दिशा सालियान दिशा की फ्रेंड्स ने कहा कि अपनी मौत से पहले वह बहुत ज्यादा नशे में थी। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने भी इसकी पुष्टि की है। जवाब में कहा गया है कि उस रात मौजूद सभी दोस्तों के बयान एक जैसे हैं। जवाब में कहा गया है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, दिशा ने अपनी मर्जी से खिड़की से छलांग लगा दी…. और आत्महत्या कर ली। सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ नहीं मिला राज्य सरकार ने यह भी कहा कि रोहन रॉय ने भी कहा कि पूरी घटना में कोई अन्य स्पष्ट गड़बड़ी और/या संदेह नहीं था। चार स्वतंत्र गवाहों ने दिशा के गिरने की आवाज सुनी और उसे घायल अवस्था में देखा। उसने गोल गले की टी-शर्ट और क्रीम कलर की फुल पैंट पहनी हुई थी। उसके दोस्त उसे अस्पताल ले गए। इमारत के सभी छह CCTV कैमरों में कोई भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी गई। जवाब में कहा गया है कि SIT की जांच के नतीजे पहले के जांच अधिकारी के निष्कर्षों के साथ मेल खाते हैं। SIT आगे की जांच कर रही है। जवाब में यह भी बताया गया है कि पिता ने कई रिकॉर्डेड बयानों में या उनकी पत्नी वासंती ने, जिनका बयान एक मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया था, अपनी बेटी की मौत के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया और न ही किसी पर संदेह जताया। उन्होंने जांच पर भी अविश्वास नहीं जताया। आदित्य ठाकरे को बताया निर्दोष आदित्य ठाकरे ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले में सुनवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि आदेशों से उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वह महाराष्ट्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित परिवार से हैं और उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं। बुधवार को हाई कोर्ट ने सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। क्या है दिशा सालियान केस यह मामला 2020 का है, जब दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तब से, इस मामले में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह आत्महत्या थी, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि यह हत्या थी। अब, बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। देखना यह है कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।