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रतलाम में पोल्ट्री फार्म में मिली एमडी ड्रग फैक्ट्री, 100 किलो केमिकल जब्त, 3 आरोपी गिरफ्तार

रतलाम  पिपलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खाली पड़े पोल्ट्री फार्म में संचालित एमडी ड्रग फैक्ट्री का राजफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तीन से अधिक आरोपितों को एमडी ड्रग बनाते हुए पकड़ा है। फिलहाल पुलिस ने अधिकारिक रूप से आरोपितों की जानकारी और जब्त मशरूका का खुलासा नहीं किया है। दोपहर तीन बजे पुलिस मामले का खुलासा करेगी। जानकारी के अनुसार खेत में बने इस पोल्ट्री फार्म में अवैध रूप से एमडी ड्रग तैयार की जा रही थी। सूचना मिलने पर थाना पिपलौदा पुलिस, साइबर सेल जावरा एवं एसडीओपी संदीप मालवीय व थाना प्रभारी रमेश कोली के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने दबिश दी। सूत्रों के अनुसार छापे के दौरान पुलिस द्वारा करीब 600 ग्राम एमडी ड्रग और 100 किलो से अधिक संदिग्ध केमिकल बरामद करने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि इन केमिकल्स का उपयोग एमडी ड्रग बनाने में किया जा रहा था। पहले भी पकड़ी गया था अवैध माल     गौरतलब है कि इससे पहले 16 जनवरी को जावरा के कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। रात करीब 1 बजे मस्जिद के पीछे स्थित एक मकान पर दबिश देकर यह कार्रवाई की गई थी। मकान दिलावर खान पठान का बताया गया, जहां करीब एक वर्ष से अवैध गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। उस दौरान पुलिस ने मौके से 10 किलो से अधिक एमडी ड्रग, बड़ी मात्रा में केमिकल से भरे ड्रम, एमडी निर्माण में प्रयुक्त उपकरण, 12 बोर की बंदूक, 91 जिंदा कारतूस, दो मोर तथा चंदन की लकड़ियां बरामद की थीं। करीब ढाई माह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में अवैध ड्रग निर्माण के नेटवर्क की गंभीरता उजागर हुई है। पुलिस जल्द ही पूरे गिरोह का करेगी खुलासा फिलहाल पुलिस ने बोरखेड़ा मामले में पकड़े गए आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों के नाम-पते और नेटवर्क का पूरा खुलासा नहीं किया गया था। पुलिस का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।

लुधियाना में ट्रक से 3100 किलो चूरा पोस्त बरामद, 3 लग्जरी गाड़ियां जब्त, आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार

लुधियाना  पंजाब के लुधियाना जिले में 27 मार्च को नशा तस्करी के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली। थाना जमालपुर की पुलिस टीम ने एक ट्रक से 3100 किलोग्राम चूरा पोस्त (भुक्की) बरामद किया। यह कार्रवाई जमालपुर चौक और थाना लाडोवाल क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर की गई। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने ट्रक के साथ तीन अन्य लग्जरी वाहनों को भी जब्त कर लिया है और अज्ञात तस्करों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। कैसे मिली पुलिस को सूचना पुलिस के अनुसार एसआई दलवीर सिंह अपनी टीम के साथ जमालपुर चौक पर गश्त कर रहे थे। इसी दौरान एक मुखबिर ने उन्हें ट्रक में भारी मात्रा में नशीला पदार्थ होने की सूचना दी। मुखबिर ने ट्रक का नंबर HR64A-5376 बताया और कहा कि उसमें चूरा पोस्त लोड है। उसने यह भी बताया कि तस्करों ने सप्लाई के बाद ट्रक को लाडोवाल क्षेत्र में खड़ा किया हुआ है। ऐसे बिछाया गया जाल जानकारी के अनुसार 27 मार्च को एसआई (SI) दलवीर सिंह पुलिस पार्टी गश्त और संदिग्धों की चेकिंग के संबंध में जमालपुर चौक पर मौजूद थी। इसी दौरान एक खास मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी कि एक ट्रक जिसका नंबर HR64A-5376 है और जिस पर गिल कैच लिखा हुआ है उसमें भारी मात्रा में चूरा पोस्त लोड किया गया है। मुखबिर ने बताया कि तस्करों ने जमालपुर इलाके में सप्लाई देने के बाद ट्रक को थाना लाडोवाल के अंतर्गत आने वाले एक सुनसान इलाके में खड़ा किया हुआ है। छापेमारी और बरामदगी: ट्रक के साथ लग्जरी गाड़ियां भी जब्त पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए बताए गए ठिकाने पर रेड की। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी भागने में सफल रहे। जब पुलिस ने वहां खड़े सफेद रंग के ट्रक की तलाशी ली ट्रक के अंदर बोरियों में भर-भरकर चूरा पोस्त रखा गया था। इतना ही नहीं पुलिस ने मौके से तीन और गाड़ियां भी बरामद की हैं जिनका इस्तेमाल नशे की छोटी खेप को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने के लिए किया जाना था। जब्त किए गए वाहनों में महिंद्रा बोलेरो: नंबर PB10CC-3767 इसुजु (ISUZU): नंबर PB11CF-1759 महिंद्रा स्कॉर्पियो: नंबर PB13BS-2020 है NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने ट्रक और तीनों लग्जरी गाड़ियों सहित कुल 31 किलो चूरा पोस्त को कब्जे में लेकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 15-61-85 NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इन वाहनों के मालिकों का रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि मुख्य तस्करों तक पहुंचा जा सके। बड़ा नेटवर्क होने की आशंका इतनी बड़ी मात्रा में नशे की बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि इसके पीछे कोई बहुत बड़ा अंतर्राज्यीय गिरोह काम कर रहा है। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह नशा कहां से लाया गया था और लुधियाना के किन-किन इलाकों में इसकी सप्लाई होनी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान लगभग हो चुकी है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। सुनसान इलाके में बिछाया गया जाल सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत बताए गए स्थान पर पहुंची। यह इलाका काफी सुनसान था, जहां ट्रक खड़ा मिला। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोग अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस को मौके पर कोई भी आरोपी नहीं मिला, लेकिन ट्रक वहीं खड़ा मिला। ट्रक से भारी मात्रा में नशा बरामद जब पुलिस ने ट्रक की तलाशी ली तो उसमें बोरियों में भरा हुआ चूरा पोस्त मिला। जांच के दौरान कुल 3100 किलो नशीला पदार्थ बरामद हुआ। इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी ने पुलिस को भी चौंका दिया और इसे हाल के समय की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। तीन लग्जरी गाड़ियां भी जब्त पुलिस ने ट्रक के अलावा मौके से तीन अन्य वाहनों को भी कब्जे में लिया। इनमें महिंद्रा बोलेरो (PB10CC-3767), इसुजु (PB11CF-1759) और महिंद्रा स्कॉर्पियो (PB13BS-2020) शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल छोटी-छोटी खेप को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने के लिए किया जाना था। NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने बरामद नशीले पदार्थ और वाहनों को जब्त कर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 15, 61 और 85 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही वाहन मालिकों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि मुख्य तस्करों तक पहुंचा जा सके। बड़े नेटवर्क की जांच शुरू पुलिस अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में नशे की बरामदगी किसी बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह की ओर इशारा करती है। जांच की जा रही है कि यह चूरा पोस्त कहां से आया और लुधियाना के किन इलाकों में इसकी सप्लाई होनी थी। अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की पहचान लगभग हो चुकी है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अंबेडकरनगर में ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश, 20 करोड़ की मेफेड्रोन जब्त

अंबेडकरनगर/अहमदाबाद  गुजरात एटीएस ने ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर (Ambedkar Nagar) जिले में चल रही अवैध मेफेड्रोन (MD) फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. इस ऑपरेशन में करीब 20 करोड़ रुपये की ड्रग्स और केमिकल जब्त किए गए हैं. कार्रवाई के दौरान खेत में छिपाकर बनाई गई फैक्ट्री से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ है. इस मामले में दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले गुजरात में तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी. इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं. एटीएस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. इस पूरे मामले की शुरुआत 1 मार्च को मिली एक खुफिया सूचना से हुई थी. गुजरात एटीएस के डिप्टी एसपी एसएल चौधरी को सूचना मिली थी कि अहमदाबाद में ड्रग्स की सप्लाई हो रही है. इसके आधार पर गोमतीपुर इलाके से शफात अहमद फारूकी को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से 4.6 ग्राम एमडी बरामद की गई थी. शुरुआती पूछताछ में उसने ड्रग्स सप्लाई करने वाले दो अन्य लोगों के नाम बताए. इसके बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नेटवर्क को ट्रेस करना शुरू किया. यहीं से यूपी कनेक्शन सामने आया. शफात की निशानदेही पर एटीएस ने अहमदाबाद के दाणीलीमड़ा इलाके में रहने वाले सोहेल मिर्जा और फरहान पठान को गिरफ्तार किया. सोहेल के पास से 300 ग्राम एमडी बरामद हुई. तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह ड्रग्स उन्हें उत्तर प्रदेश से मिल रही थी. इससे जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई. एटीएस को यह भी पता चला कि असली सप्लायर यूपी में बैठे हैं. इसके बाद टीम ने पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि सोहेल को 300 ग्राम एमडी यूपी के पंकज और कपिल ने सप्लाई की थी. ये दोनों आरोपी खुद ड्रग्स बनाते थे और फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजते थे. गुजरात एटीएस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए दोनों का लोकेशन ट्रेस किया. लोकेशन उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर जिले में मिली. इसके बाद अहमदाबाद से एटीएस की टीम यूपी के लिए रवाना हुई. स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया गया. संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाकर रेड की तैयारी की गई. ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा एटीएस की टीम ने आंबेडकरनगर पुलिस के साथ मिलकर रामपुर करई इलाके में एक खेत में छापा मारा. यहां एक टीन शेड बनाया गया था, जो बाहर से देखने पर पोल्ट्री फार्म जैसा लगता था. लेकिन अंदर मेफेड्रोन बनाने की फैक्ट्री चल रही थी. इसी जगह से पंकज और कपिल को गिरफ्तार किया गया. दोनों पिछले करीब चार महीने से यहां ड्रग्स बना रहे थे. फैक्ट्री को बेहद गुप्त तरीके से तैयार किया गया था ताकि किसी को शक न हो. यह पूरा ऑपरेशन बेहद योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था. रेड के दौरान एटीएस को बड़ी सफलता मिली. मौके से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन, 88 किलो 2-ब्रोमो-4 मिथाइल प्रोपियोफेनोन और 200 किलो केमिकल बरामद किया गया. इन सभी की बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है. जांच में यह भी सामने आया कि बरामद 88 किलो केमिकल से करीब 25 किलो और एमडी बनाई जा सकती थी. यानी यह फैक्ट्री बड़े स्तर पर ड्रग्स उत्पादन कर रही थी. एटीएस ने पूरे सामान को जब्त कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों में कपिल (31) और पंकज (30) शामिल हैं. कपिल 12वीं पास है जबकि पंकज 10वीं तक पढ़ा है. दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले चार महीने से ड्रग्स का कारोबार कर रहे थे. गुजरात एटीएस उन्हें यूपी से अहमदाबाद लेकर गई है. कोर्ट में पेश करने के बाद 12 दिन का रिमांड हासिल किया गया है. रिमांड के दौरान उनसे नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा. अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन का डेटा खंगाला जा रहा है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ड्रग्स की सप्लाई देश के किन-किन हिस्सों में की गई. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इन्हें ड्रग्स बनाने की तकनीक और कच्चा माल कहां से मिला. एटीएस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.

MDMA निर्माण का बड़ा नेटवर्क फटा मंदसौर में, जब्त 1886 किलो केमिकल, 100 किलो ड्रग्स बनने से बचाई गईं जानें

मंदसौर  वायडी नगर पुलिस ने विजय हाउसिंग सोसायटी के एक किराए के मकान में चल रही एमडी ड्रग्स बनाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से 1886.6 किलो घातक केमिकल जब्त किया है। जांच में टीसीएसए, एमएमए और एसिटोलोन जैसे रसायनों की पुष्टि हुई. प्रतापगढ़ निवासी आरोपी श्रेयांस मोगरा ने 1 जनवरी 2026 को खुद को लहसुन-प्याज का व्यापारी बताकर यह मकान लिया था। आरोपी वर्तमान में तस्करी के एक अन्य मामले में प्रतापगढ़ जेल में बंद है। मामला तब खुला जब मकान मालकिन ललिता जैन ने मकान खाली कराने के लिए पुलिस को आवेदन दिया। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देशन में टीम ने ताला तोड़ा तो 10 ड्रमों में केमिकल का स्टॉक मिला। पुलिस आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करेगी। एमडीएमए के खिलाफ 3 साल में दर्जनों कार्रवाई ड्रग तस्करों ने अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर और डोडा चूरा की तस्करी के अलावा अब नए और खतरनाक ड्रग एमडीएमए को स्थानीय तौर पर बनाने की छोटी-छोटी फैक्ट्रियां तैयार कर ली हैं. तस्कर इसे दुनिया भर के बाजारों में खपाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले 3 सालों के दौरान मध्य प्रदेश के मालवा इलाके के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के अलावा राजस्थान के झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में एमडीएमए बनाने की दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां पकड़ी गई. हाल ही में रतलाम जिले के ग्राम चिकलाना में भारी मात्रा में एमडीएमए की ड्रग बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री पर कार्रवाई हुई. यहां चंदन और राष्ट्रीय पक्षी मोर की तस्करी करने का भी खुलासा किया गया. इसके पहले भोपाल में एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी. उसके कनेक्शन भी मंदसौर जिले से मिलने की बात सामने आई थी. इसी तरह नीमच जिले में भी पिछले 2 सालों के दौरान 4 बड़ी कार्रवाई हुई है. जिनमें पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. 2025 में 448 आरोपियों की गिरफ्तारी 6 अक्टूबर 2024 को भोपाल में 1814 करोड़ की एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया था. इस मामले के कनेक्शन मंदसौर से जुड़े हुए होने की बात सामने आई थी. पिछले साल 2025 अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर, स्मैक और डोडा चूरा की तस्करी के मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत 166 प्रकरण दर्ज किए. जिसमें 448 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई. 295 करोड़ की संपत्ति फ्रिज पुलिस ने इन मामलों में 13273 किलो डोडा चूरा, 61 किलो अफीम, 7 किलो एमडीएमए ड्रग, 2011 किलो गांजा, 55 ग्राम स्मैक, 2 किलो अल्फा झेलम केमिकल जब्त करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. जिनके कानूनी प्रकरण अभी देश की विभिन्न न्यायालय में चल रहे हैं. इस मुहिम में मंदसौर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इन तस्करों की अवैध संपत्तियों पर कानून के तहत कार्रवाई करते हुए 295 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की है. साथ ही इस कानून के अंतर्गत बड़े तस्करों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने अभी 7 तस्करों के खिलाफ देश की विभिन्न कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किए हैं.

करोड़ों की हेरोइन सहित नशा तस्कर गिरफ्तार

फिरोजपुर. सीआईए स्टाफ फिरोजपुर की पुलिस ने पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम तहत कार्रवाई करते हुए एसएसपी फिरोजपुर भूपिन्द्र सिंह के दिशा निर्देशानुसार नशा तस्करों के खिलाफ चलाई मुहिम तहत गश्त व चैकिंग के दौरान मिली सूचना के अधार पर करोड़ों रुपए की डिलीवरी देने के लिए आए नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से भारी मात्रा में हेरोइन बरामद करने में सफलता हासिल की है। उक्त मामलें में पुलिस ने गिरफ्तार किए नशा तस्कर के खिलाफ थाना आरफके में एनडीपीएस एक्ट तहत मामला दर्ज किया है। जानकारी देते हुए एसएसपी फिरोजपुर भूपिन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने नशा बेचने वाले लोगों को गिरफ्तार करने के लिए उच्चाधिकारियों व पंजाब सरकार के निर्देशानुसार मुहिम चलाई हुई है। उन्होंने बताया कि उक्त मुहिम तहत थाना सीआईए स्टाफ फिरोजपुर के इंस्पैक्टर मोहित धवन को बीते दिन गश्त व चैकिंग के दौरान फिरोजपुर से मल्लांवाला रोड परगांव अटारी के नजदीक सूचना मिली थी कि सोनू सिंह पुत्र महिन्द्र सिंह वासी गांव किलचे हालवासी गांव भंबा सिंह वाला उर्फ मतड़ हेरोइन बेचने का आदि है और आज भी वह हेरोइन लेकर आगे डिलीवरी देने के लिए कच्चा बांध गांव अक्कू वाला में खड़ा किसी का इंतजार कर रहा है। जिस पर पुलिस ने छापेमारी करके सोनू को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 6 किलो 38 ग्राम हेरोइन बरामद की है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने गिरफ्तार नशा तस्कर सोनू से पूछताछ कर रही है कि वह हेरोइन की डिलीवरी किसे देने के लिए आया था और अभी इस मामलें में ओर भी अहम सुराग हाथ लगने की संभावना है, जिसका खुलासा आने वाले समय में किया जाएगा। 

NCB की कार्रवाई: बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पकड़ा गया ब्राजीलियन नागरिक और 4.776 किलो कोकीन

बेंगलुरु    नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक ब्राज़ीलियन नागरिक से 4.776 kg कोकीन ज़ब्त की है। 'X' पर एक पोस्ट में, NCB ने कहा कि यह प्रतिबंधित पदार्थ, जिसकी गैर-कानूनी बाज़ार में कीमत लगभग 23.88 करोड़ रुपये है, उस यात्री के चेक-इन बैगेज से बरामद किया गया जो साओ पाउलो से दोहा होते हुए बेंगलुरु आया था।   'X' पोस्ट में कहा गया, "बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ा ड्रग बस्ट। NCB ने एक ब्राज़ीलियन नागरिक के चेक-इन बैगेज से 4.776 kg कोकीन ज़ब्त की। ज़ब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थ की गैर-कानूनी बाज़ार में कीमत लगभग 23.88 करोड़ रुपये है। आरोपी साओ पाउलो से दोहा होते हुए बेंगलुरु आया था। अधिकारियों ने कोकीन मिला कपड़ा रखने वाले छिपे हुए कम्पार्टमेंट वाले चार मॉडिफाइड हैंडबैग बरामद किए।" NCB के मुताबिक, अधिकारियों को चार मॉडिफाइड हैंडबैग मिले जिनमें छिपे हुए कम्पार्टमेंट थे और उनमें कोकीन मिला कपड़ा था।   आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है, और आगे की जांच चल रही है। NCB ने लोगों से 1933 पर MANAS हेल्पलाइन के ज़रिए नशीले पदार्थों के बारे में जानकारी शेयर करने की अपील की है, और जानकारी देने वालों की गोपनीयता का भरोसा दिलाया है। इस बीच, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मैसूर में एक इंटर-स्टेट ड्रग ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, साथ ही एक गुप्त ड्रग बनाने वाली लैब का भी पता लगाया है।   NCB द्वारा 31 जनवरी को शेयर किए गए एक 'X' पोस्ट में, एजेंसी ने 10 करोड़ रुपये की ड्रग्स के साथ 25.6 लाख रुपये कैश, एक SUV और 500 kg से ज़्यादा अलग-अलग केमिकल ज़ब्त किए। 'X' पोस्ट में कहा गया, "NCB ने एक बड़े इंटर-स्टेट ड्रग ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और मैसूर में एक खुफिया ड्रग बनाने वाली लैब का पता लगाया है। इस मामले में अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये (स्ट्रीट वैल्यू) की ड्रग्स, 25.6 लाख रुपये कैश, एक टोयोटा फॉर्च्यूनर और 500 kg से ज़्यादा अलग-अलग केमिकल ज़ब्त किए गए हैं।"  

दिल्ली–एनसीआर में NCB का बड़ा एक्शन: 262 करोड़ की ड्रग सप्लाई चेन में विदेशी–भारतीय लिंक बेनकाब

 नई दिल्ली  दिल्ली–एनसीआर के बीचों-बीच चल रहे एक हाई-प्रोफाइल सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की परतें उस वक्त खुलनी शुरू हुईं, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिल्ली के एक फार्महाउस पर रेड मारी. किसी भी रूटीन छापे की तरह शुरू हुए इस ऑपरेशन में ऐसे क्लू मिले जिससे आगे चलकर 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई.  अधिकारियों  के मुताबिक यह केस सिर्फ ड्रग पकड़ने का नहीं है बल्कि एक ऐसे अदृश्य नेटवर्क को उजागर करने का है, जिसे विदेशी ऑपरेटर अपने भारतीय ग्राउंड स्टाफ के जरिए रिमोट से कंट्रोल कर रहे थे. और इस नेटवर्क के बीचोबीच खड़ा था एक 25 साल का युवक शेन वारिस जो खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताता रहा, लेकिन अंदर से इस पूरे रैकेट का भरोसेमंद रनर मिला. डियो/फोटो बॉस को भेजना अनिवार्य था. पूरी बातचीत ऐसे चलती थी मानो कोई वीडियो गेम का रिमोट कंट्रोलर विदेश से भारत में मौजूद चरित्र को चला रहा हो. अचानक उभरा एक नाम एस्थर किनिमी पूछताछ के दौरान शेन ने एक और नाम खखेला. एस्थर किनिमी, नागालैंड की रहने वाली, दिल्ली में किराए के एक फ्लैट में रहने वाली महिला का. यही एस्थर, शेन के मुताबिक, पहले भी एक कंसाइनमेंट उसे हैंडओवर कर चुकी थी, जिसे बाद में एक पोर्टर राइडर के जरिए आगे भेजा गया था. शेन ने न सिर्फ उसका पता दिया, बल्कि फोन नंबर और उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ और संदिग्धों का ज़िक्र भी किया. यह इनपुट NCB के लिए ब्रेकथ्रू मोमेंट था. 20 नवंबर की रात लगभग 11 बजे, NCB की टीम चुपचाप छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 पहुँची. चार मंज़िला जैन हाउस की चौथी मंज़िल का एक फ्लैट यही था एस्थर का ठिकाना. दरवाज़ा खुलते ही टीम को कमरे में फैली एक अजीब-सी गंध महसूस हुई. कुछ ही मिनटों में अलमारी, बेडबॉक्स और स्टोर रूम की सर्च शुरू हुई. उसके बाद जो सामने आया उसने टीम को भी कुछ क्षणों के लिए रोक दिया . 328.54 किलो मेथाम्फेटामाइन. इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू करीब 262 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैगों में भरी दर्जनों पैकेट्स, हर पैकेट पर विदेशी पैकिंग की सील और कमरे में मौजूद पाउडर के कण. यह बरामदगी दिल्ली–एनसीआर की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग पकड़ों में शामिल हो गई. एस्थर को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में पता चला कि  ड्रग बनाने वाले लैब्स देश से बाहर थे लॉजिस्टिक्स को देश के अलग-अलग शहरों से कंट्रोल किया जाता था. हर रनर को सिर्फ उसका हिस्सा पता होता था. बताया जा रहा है कि उनकी पेमेंट पूरी तरह डिजिटल और मल्टी-लेयर चैन के जरिये होती थी. शेन और एस्थर जैसे लोग नेटवर्क की फॉरवर्ड यूनिट थे जो सिर्फ हैंडलिंग और मूवमेंट देखते थे. असली ऑपरेटर विदेश में बैठा था. न ही उसका नाम सामने आया और न ही लोकेशन अभी तक स्पष्ट है. लेकिन शेन के फोन से मिले डेटा, कॉल लॉग और क्लाउड बैकअप ने साफ कर दिया कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा है.  तीन दिनों तक चला ऑपरेशन, कई राज्यों में भेजे गए अलर्ट NCB ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तीन दिन में कई लोकेशनों पर रेड कीं. राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, अमरोहा और पंजाब के कुछ पॉइंट्स तक इनपुट भेजे गए. टीम ने स्पष्ट किया है कि  नेटवर्क के कम से कम 7 और लोग सक्रिय भूमिका में हैं.  कुछ लोग कूरियर/राइडर के रूप में इस्तेमाल हुए. कुछ लोग किराए के फ्लैट के इंतजाम करते थे. फंडिंग चैनल अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. विदेशी बॉस कौन है इस पर इन्वेस्टिगेशन जारी है. ड्रग के पैकेट्स की सील से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह माल कई चरणों में भारत पहुंचा था. और एस्थर का फ्लैट एक स्टोरेज–क्यूम–ट्रांजिट हब के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था. NCB की नजर अभी और बड़ी मछलियों पर NCB के अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ सप्लाई–डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से कहीं ज्यादा संगठित है. जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अब तक के सुराग बताते हैं कि  भारत के कई शहरों में स्लीपर यूनिट्स मौजूद हैं.

बच्चों की मौत के बाद छिंदवाड़ा में जांच तेज, डॉक्टर गिरफ्तार, दवा कंपनी पर कार्रवाई

छिंदवाड़ा किडनी खराब होने से बच्चों की मौत के मामले में श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स और डॉक्टर प्रवीण सोनी पर हत्या का मुकदमा पुलिस ​ने दर्ज किया है। छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र राजपाल चौक से डॉक्टर प्रवीण सोनी को देर रात एसपी की स्पेशल टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडेय ने बताया कि परासिया बीएमओ डॉक्टर अंकित सहलाम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ​एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की ‘एडल्ट्रेशन ऑफ ड्रग’ (दवाओं में मिलावट) और ‘हत्या की कोटि में आने वाले अपराधिक मानव वध’ जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इन धाराओं में अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। छिंदवाड़ा जिले में एक कफ सिरप त्रासदी ने हड़कंप मचा दिया है। संदिग्ध कफ सिरप के सेवन से अब तक 14 मासूम बच्चों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक 10 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। प्रयोगशाला रिपोर्ट में सिरप में हानिकारक रसायन पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से दो कफ सिरप पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगा दिया है और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।