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चिकित्सा घोटाले में ED की रेड, रायपुर में करोड़ों की संपत्ति पर कसा शिकंजा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर में चिकित्सा उपकरण एवं री-एजेंट खरीद घोटाले के संबंध में बड़ी कार्रवाई की है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी ने छत्तीसगढ़ में शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक संस्थाओं और राज्य के अधिकारियों सहित अन्य सहयोगियों के आवासीय व कार्यालय परिसरों में 30 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक छापेमारी अभियान चलाया। 40 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त इस दौरान 20 स्थानों पर तलाशी ली गई। छापे के दौरान बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा, डीमैट खातों में शेयर और वाहनों के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति सामने आई। विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। ईडी ने कहा- अभी और खुलासे होंगे ईडी ने इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी जांच के तहत की गई है, जिसमें कई और खुलासे संभावित हैं। 

शराब घोटाले की रकम से प्रॉपर्टी में निवेश, चैतन्य बघेल पर ED की बड़ी कार्रवाई का दावा

रायपुर  छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार चैतन्य बघेल को लेकर ईडी ने बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि चैतन्य ने शराब घोटाले से प्राप्त 1000 करोड़ रुपए से अधिक आय का प्रबंधन किया। साथ ही अपनी रियल एस्टेट परियोजना के विकास के लिए 16.7 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया। चैतन्य राज्य के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे हैं। चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई को उनके 38वें जन्मदिन पर भिलाई के मानसरोवर कॉलोनी स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। चैतन्य को उसी दिन रायपुर की एक अदालत ने 5 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया था। मंगलवार को उन्हें उसी अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है। एजेंसी ने एक बयान में दावा किया कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपए की आपराधिक आय प्राप्त हुई थी। उन्होंने उस रकम का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट परियोजना के विकास में किया था। ईडी के बयान में आरोप लगाया गया है कि आपराधिक आय का इस्तेमाल चैतन्य बघेल की परियोजना के ठेकेदारों को नकद भुगतान और बैंक खातों के माध्यम से किया गया था। एजेंसी ने कहा कि जूनियर बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों नामक एक स्थानीय व्यवसायी के साथ सांठगांठ की। फिर उसकी कंपनियों का उपयोग करके एक योजना तैयार की। इसके तहत उन्होंने ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने के नाम पर अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपए प्राप्त किए। ईडी ने कहा कि बैंकिंग ट्रेल से पता चलता है कि संबंधित लेनदेन के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से रकम प्राप्त किया। एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त 1000 करोड़ रुपए से अधिक की आय का प्रबंधन किया। ईडी के बयान में कहा गया है कि चैतन्य छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को घोटाले से मिले रकम को हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर (रायपुर के मेयर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बड़े भाई) और अन्य के साथ समन्वय करते थे। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि इस शराब घोटाले से प्राप्त रकम को आगे निवेश के लिए बघेल परिवार के प्रमुख सहयोगियों को भी सौंप दिया गया था। इसकी जांच की जा रही है। ईडी ने कहा है कि कथित घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ। इससे शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबों में 2100 करोड़ रुपए से अधिक रकम गए। ईडी के अनुसार यह घोटाला 2019 और 2022 के बीच रचा गया था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का शासन था। ईडी ने इस मामले में जनवरी में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा के अलावा अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, भारतीय दूरसंचार सेवा अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और कुछ अन्य को गिरफ्तार किया था। ईओडब्ल्यू/एसीबी ने पिछले साल 17 जनवरी को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड सहित 70 व्यक्तियों और कंपनियों को नामजद किया था।

ऑनलाइन सट्टेबाजी केस में नया मोड़:Meta और Google को ED ने भेजा समन, हाजिर होने को कहा

नई दिल्ली भारत में टेक्नोलॉजी कंपनियों और कानून विभाग दोनों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों Google और Facebook की पेरेंट कंपनी Meta को समन भेजा है। यह समन भारत में तेजी से फैल रहे अवैध ऑनलाइन सट्टा ऐप्स को प्रमोट और एडवर्टाइज करने के मामले में भेजा गया है। ED की मानें तो Google और Meta ने ऐसे कई ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन पब्लिश किए और एल्गोरिदम के जरिए उन्हें प्रमोट किया, जिससे उनका एडवर्टाइजमेंट और यूजेस दोनों तेजी से बढ़े। इस तरह के ऐप्स को बढ़ावा देना Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के अंतर्गत एक गंभीर अपराध माना जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन कंपनियों ने सट्टा ऐप्स से एडवर्टाइजमेंट रेवन्यू भी जेनरेट किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिला। कब और कहां होनी है पूछताछ? Google और Meta के सीनियर अधिकारियों को 21 जुलाई, 2025 को दिल्ली स्थित ED के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। उनसे पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जाएगी कि क्या इन कंपनियों को अवैध सट्टा ऐप्स की गतिविधियों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर उनके साथ व्यावसायिक संबंध बनाए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ED ने सट्टा या ड्रग रैकेट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी या मीडिया फिगर्स पर शिकंजा कसा हो। इससे पहले प्रकाश राज, राणा दग्गुबाती और विजय देवरकोंडा जैसे फिल्म स्टार्स को भी इसी तरह की जांच के लिए बुलाया गया था। अब जांच का दायरा बढ़कर टेक कंपनियों तक पहुंच गया है। सरकार की गाइडलाइंस की अनदेखी? भारत सरकार की ओर से 2022 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी किया था कि वे सट्टा और जुए से जुड़े ऐप्स के विज्ञापन ना दिखाएं। इसके बावजूद इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई विज्ञापन लगातार देखने को मिले, जिनमें स्किल बेस्ड गेमिंग के नाम पर सट्टे से गतिविधियों को प्रमोट किया गया। इस मामले में अब आगे क्या होगा? ED इन कंपनियों के विज्ञापन डाटा, पेमेंट ट्रांजैक्शन्स और एल्गोरिदमिक प्रिफरेंसेज की गहराई से जांच करेगी। अगर यह पाया गया कि इन कंपनियों ने सट्टा प्लेटफॉर्म्स से पैसा लेकर उन्हें प्रमोट किया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला ना सिर्फ भारत में बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी टेक कंपनियों की जवाबदेही और जिम्मेदारियों को लेकर बहस शुरू कर सकता है।

दुर्ग : होटल सागर इंटरनेशनल के मालिक विजय अग्रवाल के ठिकानों पर ED की रेड

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के एक बड़े कारोबारी के घर ईडी की टीम पहुंची है. ईडी की रेड दुर्ग जिले में पड़ी है. दीपक नगर दुर्ग में छत्तीसगढ़ के एक बड़े कारोबारी, होटल व्यवसायी और सागर होटल के मालिक विजय अग्रवाल के बंगले पर ईडी छापे की कार्रवाई जारी है. दुर्ग में होटल व्यवसायी के घर ईडी: सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह 6:00 बजे दो गाड़ियों में सवार होकर ईडी के अधिकारी होटल व्यवसायी के घर पहुंचे.उन्होंने पहले गेट पर तैनात निजी सुरक्षा गार्ड से परिचय पत्र दिखाकर दरवाजा खुलवाया, फिर घर के अंदर प्रवेश कर पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया. दुर्ग में सागर होटल के मालिक के घर ईडी बताया जा रहा है कि ईडी अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों को जांच में सहयोग करने की बात कही और घर में मौजूद दस्तावेजों की गहनता से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों में खलबली मच गई है. छापेमारी की कार्रवाई जारी है. सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवान साथ में तैनात हैं. सुबह 6 बजे 2 गाड़ियों में पहुंचे ईडी के अधिकारी  कौन है विजय अग्रवाल: विजय अग्रवाल दुर्ग स्टेशन के सामने स्थित सागर होटल के मालिक हैं और स्थानीय होटल व्यवसाय में उनका मजबूत दबदबा है. ईडी की इस कार्रवाई का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन अनुमान है कि यह दबिश वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी हो सकती है. होटल व्यवसायी के घर ईडी 4 जुलाई को भिलाई में ईडी का छापा: ईडी पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में सक्रिय है. बीते 4 जुलाई को ईडी ने कारोबारी सौरभ आहूजा के बड़े भाई को पूछताछ के लिए रायपुर स्थित ईडी दफ्तर बुलाया था. ईडी को शक था कि राजस्थान के जयपुर में शादी के बहाने सौरभ आहूजा ने कई महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात और नेटवर्किंग की योजना बनाई है. मामला ऑनलाइन बेटिंग एप से जुड़ा हुआ है. 5 जुलाई को सोना तस्करी सिंडिकेट पर ईडी की कार्रवाई: विदेशी मूल की तस्करी का सोना खरीदने और आपूर्ति के मामले में ईडी ने कार्रवाई करते हुए रायपुर सोना तस्करी सिंडिकेट के दो सदस्यों सचिन केदार और पुरुषोत्तम कावले की 3.76 करोड़ की संपत्ति अस्थायी तौर पर कुर्क की थी. 

सुब्बा रेड्डी के खिलाफ ईडी का शिकंजा, बेंगलुरु में पांच जगहों पर एक साथ कार्रवाई

बेंगलुरु प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्नाटक के विधायक एसएन सुब्बा रेड्डी और उनके परिजनों के खिलाफ विदेशी संपत्तियों को कथित तौर पर छुपाने को लेकर जांच शुरू कर दी है। फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफईएमए) की धारा 37 के तहत ईडी ने बेंगलुरु के 5 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। विधायक सुब्बा रेड्डी के आवास, उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठान और करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर ईडी तलाशी अभियान चला रही है। यह छापेमारी कथित तौर पर उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने और अवैध निवेश के आरोपों के आधार पर की जा रही है। ईडी के मुताबिक, एसएन सुब्बा रेड्डी और उनके परिजनों पर विदेशी खातों में भारी राशि जमा कराने समेत मलेशिया, हांगकांग और जर्मनी में अचल संपत्तियों में निवेश करने के आरोप हैं। कथित तौर पर इन संपत्तियों और निवेशों को भारतीय अधिकारियों से छुपाया गया, जो फेमा कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। ईडी उनकी अवैध विदेशी संपत्ति की जांच कर रही है। कर्नाटक के अलावा, हरियाणा में भी ईडी की टीमें सक्रिय हैं। ईडी ने हरियाणा में प्रोबो ऐप संचालित करने वाली कंपनी पर शिकंजा कसते हुए 284 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रीज कर दी है। गुरुग्राम और जिंद में ईडी ने प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटर्स सचिन सुभाषचंद्र गुप्ता और आशीष गर्ग के ठिकानों पर छापेमारी की। पीएमएलए के तहत यह कार्रवाई की गई। ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य कंपनी की ऐप और वेबसाइट प्रोबो के माध्यम से पूरे भारत में चल रही अवैध सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। बता दें कि प्रोबो ऐप और वेबसाइट को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन वास्तव में यह लोगों को ‘हां या ना’ जैसे सवालों पर पैसे लगाने के लिए प्रेरित करता है, जो जुए और सट्टेबाजी का एक रूप है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें साधारण सवालों के जवाब देकर पैसे कमाने का प्रलोभन दिया गया, लेकिन यह वास्तव में एक सट्टेबाजी योजना थी। इस स्कीम में लोग अधिक मुनाफे की उम्मीद में बार-बार पैसे लगाते रहे और अंततः अपनी रकम गंवा बैठे।  

ED का नया रडार: विजय देवरकोंडा और राणा दग्गुबाती समेत कई सितारों पर जांच शुरू

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तेलंगाना में एक बड़े सट्टेबाजी घोटाले की जांच के तहत 29 फिल्मी हस्तियों, यूट्यूबर्स और इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है।  साउथ फिल्म इंडस्ट्री एक नए विवाद के घेरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तेलंगाना के 29 फिल्मी सितारों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर्स के खिलाफ अवैध सट्टेबाजी ऐप्स के प्रचार के आरोप में जांच शुरू की है। इस लिस्ट में मशहूर अभिनेता विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती, प्रकाश राज, निधि अग्रवाल, मंचु लक्ष्मी, और कई अन्य जाने-माने नाम शामिल हैं। मामले की शुरुआत कैसे हुई? इस मामले की नींव मियापुर के एक व्यवसायी फणिंद्र शर्मा द्वारा दर्ज की गई शिकायत से रखी गई। शर्मा ने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत के कई प्रमुख फिल्मी सितारे और सोशल मीडिया चेहरों ने अवैध सट्टेबाजी ऐप्स का प्रचार किया है, जिससे हजारों युवा और मध्यम वर्गीय परिवार वित्तीय नुकसान झेल रहे हैं।शिकायत में कहा गया कि इन ऐप्स को प्रचारित करने वाले सितारे उन्हें "आसान कमाई का जरिया" बताकर लोगों को आकर्षित कर रहे थे। इस पर साइबराबाद पुलिस ने 19 मार्च 2025 को 25 प्रमुख हस्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता, तेलंगाना गेमिंग एक्ट, और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं लगाई गईं। अब मामला पहुंचा ईडी तक साइबराबाद पुलिस की एफआईआर के आधार पर अब यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंच चुका है। ईडी ने इसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज किया है और उन सभी हस्तियों के बैंक रिकॉर्ड, प्रमोशन फीस, टैक्स डिटेल्स और अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच शुरू कर दी है।सूत्रों के मुताबिक, इन ऐप्स के ज़रिए हजारों करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है, जो वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की श्रेणी में आता है। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को लुभाने के लिए सेलेब्स का प्रभाव जानबूझकर इस्तेमाल किया गया। कौन-कौन हैं जांच के दायरे में? ईडी जिन प्रमुख चेहरों की जांच कर रही है, उनमें शामिल हैं:     विजय देवरकोंडा     राणा दग्गुबाती     प्रकाश राज     निधि अग्रवाल     मंचु लक्ष्मी     अनन्या नागल्ला     प्रणीता सुभाष     एंकर श्रीमुखी     श्यामला     यूट्यूबर हर्षा साई, बय्या सनी यादव, और लोकल बॉय नानी जैसे सोशल मीडिया प्रभावशाली चेहरे। सेलेब्स की सफाई और प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर संबंधित हस्तियों ने अपनी सफाई देना शुरू कर दिया है: विजय देवरकोंडा की टीम ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने केवल A23 नामक कौशल-आधारित गेमिंग प्लेटफॉर्म का प्रचार किया था, जिसका अनुबंध 2023 में समाप्त हो गया था। प्रकाश राज ने बताया कि उन्होंने 2016 में एक ऐप का प्रचार किया था, लेकिन जब उन्हें इसकी प्रकृति समझ में आई तो उन्होंने तत्काल दूरी बना ली। वहीं राणा दग्गुबाती ने कहा कि उन्होंने जो भी प्रचार किया है, वह पूरी तरह कानूनी अनुपालन के तहत था। ईडी की इस कार्रवाई से टॉलीवुड में हड़कंप मच गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि आमतौर पर ये सितारे युवा पीढ़ी के आदर्श माने जाते हैं। ऐसे में उनके प्रचार से प्रेरित होकर कई लोग इन ऐप्स में फंसते चले गए।  

डिबॉक इंडस्ट्री और नेचुरो इंडिया बुल कंपनी के मालिक के ठिकानों पर ED की रेड

जयपुर जयपुर में ईडी ने डिबॉक इंडस्ट्रीज और नेचुरो इंडिया बुल कंपनी पर छापामारी की। रेड के दौरान नकदी के अलावा करीब 100 करोड़ रुपये कीमत वाली लग्जरी कारें भी सीज की गईं। इनमें रोल्स रॉयस, बेंटले, मर्सडीज, लैंडक्रूजर जैसी महंगी कारें शामिल हैं। कई ठिकानों पर छापामारी हुई। इसमें कंपनी के संचालक मुकेश मनवीर का घर भी शामिल था। संचालक पर 100 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोप है। ये छापामारी वैशाली नगर, लोहिया कॉलोनी, टोंक, कोटा सहित कई ठिकानों पर हुई, लेकिन रेड का केंद्र बिन्दु जयपुर में मुकेश मनवीर का घर ही था। ईडी के मुताबिक संचालक के घर से 78 लाख रुपये की नकदी समेत 100 करोड़ रुपये की कीमत की कारें सीज की गई हैं। ई़डी की ये कार्रवाई मुकेश के अलावा कंपनी के अन्य शीर्ष नेतृत्व वाले कर्मचारियों के साथ भी हो रही है। जानकारी के मुताबिक कंपनी के प्रमोटर्स गौरव जैन, ज्योति समेत कई अन्य पर भी ईडी कार्रवाई कर रही है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अपने आपको टेलीफोन एडवायजरी कमेटी में बतौर सदस्य बताता है। उसने अपने ऑफिस के बाहर एक पोस्टर लगा रखा है, जिसमें उसने अपने आपको एडवाइजर होने का दावा किया है। उसके राजनीतिक संबंध भी रहे हैं। फिलहाल 100 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है और ईडी जांच-पड़ताल में जुटी हुई है। मुकेश इससे पहले चुनाव भी लड़ चुका है। उसने साल 2019 में लोकसभा का चुनाव शिवसेना के प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था। उस दौरान चुनाव प्रचार में बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत भी शामिल हुई थीं। हालांकि मुकेश को इस चुनाव में बुरी हार का सामना करना पड़ा था। उसे महज 4900 वोट मिल थे, मतलब इतने कम वोट की जमानत तक जब्त हो गई थी। कंपनी के शेयर का दाम पंहुचा आसमान पर  ईडी जांच में सामने आया है कि डिबॉक कंपनी ने फर्जी फर्म और निदेशक बनाकर कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट कराया था. इसके बाद छह महीनों में शेयर के दाम 8 रुपये से 153 रुपये तक पहुंचा दिए गए. इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामला सामने आया है. आरोपी ने इस काली कमाई को रियल एस्टेट, होटल, रिसॉर्ट, वेडिंग बैंक्वेट हॉल और बहुमंजिला आवासीय योजनाओं में निवेश किया. टोंक रोड, चाकसू में एक बड़ी हाउसिंग स्कीम भी प्लान की गई थी. चुनाव भी लड़ चुका है आरोपी  गौरतलब है कि आरोपी मुकेश महावर 2019 में टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट से शिवसेना के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुका है. उस चुनाव में प्रचार के लिए अभिनेत्री राखी सावंत भी पहुंची थीं, लेकिन मुकेश को सिर्फ 4,900 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई थी. फिलहाल ईडी की टीम इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है.