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पलायन पर लगी रोक, गांव में रोजगार से श्रमिकों को मिला सहारा; प्रतिदिन ₹300 की मजदूरी से संवर रही जिंदगी

माटी में रोजगार- प्रतिदिन 300 रुपए की मजदूरी से श्रमिक परिवारों को मिला मजबूत आर्थिक आधार, पलायन पर लगी रोक ​डबरी, तालाब, बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड और सैंड फिल्टर निर्माण से बदली गाँवों की सूरत ​वीबी-जी राम जी योजनारू धमतरी में संवर रहे गाँव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई रफ़्तार ​रायपुर,  छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आजीविका संवर्धन और आधारभूत संरचना के सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित ‘वीबी-जी राम जी योजना’ धमतरी जिले के गाँवों की दिशा और दशा बदलने में मील का पत्थर साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से जहाँ एक ओर जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे बुनियादी ढाँचों का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय श्रमिकों को उनके गाँव में ही नियमित आजीविका उपलब्ध कराकर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। वर्षा जल के संचयन और भू-जल पुनर्भरण में अभूतपूर्व सुधार           ​धमतरी जिले के चारों विकासखंडों, धमतरी, कुरुद, मगरलोड और नगरी में योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के निर्माण एवं जीर्णाेद्धार कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आजीविका डबरी, निजी एवं सामुदायिक तालाबों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल के संचयन और भू-जल पुनर्भरण में अभूतपूर्व सुधार आया है। इसके साथ ही जल स्रोतों में सैंड फिल्टर के निर्माण से ग्रामीणों को स्वच्छ जल प्रबंधन की सुविधा मिल रही है। गाँवों में स्वच्छता और गरिमा को प्राथमिकता देते हुए छात्राओं की सुविधा के लिए बालिका शौचालयों का निर्माण कराया गया है, जबकि जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नालियों की सफाई और गहरीकरण का कार्य निरंतर जारी है। इसके अलावा, ग्रामीणों को आवश्यक सामुदायिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गाँव-गाँव में मुक्तिधाम शेड का निर्माण भी किया जा रहा है। श्रमिकों को नियमित मिल रहा है काम        ​वीबी-जी राम जी योजना ने ग्रामीण श्रमिक परिवारों के जीवन में स्थायित्व ला दिया है। विभिन्न निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों को नियोजित किए जाने से उन्हें अपने क्षेत्र में ही नियमित काम मिल रहा है, जिससे काम की तलाश में दूसरे राज्यों या शहरों में होने वाले पलायन पर काफी हद तक अंकुश लगा है। योजना के अंतर्गत प्रतिदिन 300 रुपए की निर्धारित मजदूरी मिलने और नियमानुसार उसका समय पर भुगतान होने से श्रमिक परिवार अपने दैनिक खर्चों और बच्चों की आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। इस प्रकार यह योजना रोजगार और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ते हुए गाँवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण कर रही है। परिसंपत्तियों का निर्माण और स्थानीय स्तर पर आजीविका का सृजन करना है        ​जिला पंचायत धमतरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण और स्थानीय स्तर पर आजीविका का सृजन करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण विकास के कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि निर्मित परिसंपत्तियों का दीर्घकालिक लाभ ग्रामीणों को मिल सके। जिले में संचालित सभी विकास कार्यों की प्रगति पर प्रशासनिक निगरानी रखी जा रही है, ताकि स्वीकृति के अनुरूप कार्य निर्धारित मानकों पर पूरे हों और श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जा सके।         ​वर्तमान में रोजगार प्राप्त कर रहे श्रमिकों के साथ-साथ भविष्य में इन स्थायी सुविधाओं का उपयोग करने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना वरदान सिद्ध हो रही है। धमतरी जिले में वीबी-जी राम जी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण स्वावलंबन और समावेशी विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है।

सुधा सखियां संभालेंगी पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, गांवों में बढ़ेंगी सुविधाएं

पटना बिहार सरकार ने पशुपालन एवं दुग्ध क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की घोषणा की थी। वर्तमान में करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। इस संख्या को बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करने का लक्ष्य है। इसके तहत महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र तथा दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। पशु चिकित्सा में प्राथमिक दायित्व 'सुधा सखियों' को सौंपने की तैयारी चल रही है। सहकार से समृद्धि योजना के तहत गांव में डेयरी उत्पादक सहकारी समिति का गठन किया जा रहा है। इसके लिए सुधा सखियों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, संतुलित पशु आहार एवं कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी आवश्यक सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इससे प्राथमिक पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुगम हो सकेगी। पशुपालकों को आवश्यक पशु स्वास्थ्य एवं पशुपालन संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी। इसका सीधा लाभ दूध के उत्पादन पर होगा। साथ ही पहल से दो बड़े लाभ होंगे एक तरफ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता और स्थायी रोजगार का अवसर मिलेगा। दूसरी तरफ, पशुपालकों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ के मार्गदर्शन एवं सेवाएं मिल सकेगी। विदित हो कि सुधा सखियां पंचायत स्तर पर सेवा आधारित प्रोत्साहन राशि लेकर कार्य करने वाली स्थानीय जीविका दीदियां हैं। सात हजार जीविका दीदियां बन चुकी पशु सखी काम्फेड एवं जीविका के संयुक्त प्रयास से सात हजार जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये प्रशिक्षित पशु सखियां अब अपने-अपने गांवों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण दे रही हैं।

पंजाब रोडवेज कर्मचारियों के नियमितीकरण की जगी उम्मीद, परिवहन मंत्री के साथ होगी अहम बैठक

चंडीगढ़. पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारियों के लिए आज का दिन बेहद अहम रहने वाला है। लंबे समय से स्थायी करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ आज दोपहर यानि सोमवार अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में परिवहन विभाग के सचिव समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित मांगों पर आज कोई ठोस फैसला हो सकता है। कर्मचारी नेताओं के अनुसार बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा 1300 से अधिक कच्चे कर्मचारियों को स्थायी करना होगा। इसके अलावा पंजाब रोडवेज के नए अधिनियम को लागू करने, डिपो में नई बसें शामिल करने और कर्मचारियों के खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामले वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी जाएगी। पहले भी हुई हैं बेनतीजा बैठकें रोडवेज कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इन मांगों को लेकर सरकार के साथ पहले भी कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकला। पिछली बैठक भी स्थगित कर दी गई थी और इसे 30 सितंबर को कराने की बात कही गई थी। पिछले दो-तीन महीनों से कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। चक्का जाम तक हो चुका है। कर्मचारियों ने सरकार को पहले ही चेतावनी दी है कि यदि बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा। चुनाव से पहले कर्मचारियों का सरकार पर दबाव चुनाव से पहले कर्मचारी अपनी वर्षों पुरानी मांगों को पूरा कराने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। रोडवेज कर्मचारी यूनियन नेता शमशेर सिंह और रेशम सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारियों की मांगे लंबे समय से लंबित है लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। सरकार को कई बार इस मामले में अल्टीमेटम दिया जा चुका है, लेकिन अब सरकार को अंतिम चेतावनी दी गई है कि अगर कर्मचारियों की मांगों पर कोई फैसला नहीं किया तो पूरे प्रदेश में बसों का चक्काजाम होगा। 10 सालों से भी ज्यादा पुराना है संघर्ष 10 सालों से भी अधिक समय से कच्चे कर्मचारी रेगुलर करने की मांग कर रहे हैं जो की कोर्ट का भी फैसला है। रोडवेज विभाग में नई बसों को लेकर भी पिछले 5 साल से कोई काम नहीं हुआ है। रोडवेज में आउटसोर्स सिस्टम को बिल्कुल बंद किया जाना चाहिए और पहले से काम करें सभी आउटसोर्स कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को विभाग रेगुलर करें यही सभी कर्मचारियों की मांग है।

छत्तीसगढ़ के 10 हजार युवाओं के लिए रोजगार का मौका, रायपुर में 7-8 अक्टूबर को रोजगार मेला

छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर रायपुर में 7-8 अक्टूबर को सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा राज्यस्तरीय रोजगार मेला रायपुर रोजगार की तलाश कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़ा अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार आगामी 7-8 अक्टूबर को रायपुर में दो दिवसीय राज्यस्तरीय रोजगार मेला आयोजित कर रही है। इस रोजगार मेले में करीब 10 हजार युवाओं को नौकरियां मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताओं और हुनर वाले युवा इस मेले में हिस्सा लेकर नौकरियां पा सकते हैं।                  कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा यह मेला बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र में उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए अब तक 62 कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से 9,449 रिक्त पदों की जानकारी सरकार को मिली है।अन्य कंपनियों से भी संपर्क जारी है, जिससे उपलब्ध अवसरों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इस मेले के माध्यम से स्थानीय कंपनियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की निजी कंपनियों को भी एक मंच पर लाया जा रहा है।                 रोजगार मेले के दूसरे दिन (8 अक्टूबर) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब चयनित युवाओं को ऑफर लेटर वितरित करेंगे। यह आयोजन युवाओं को रोजगार से जोड़ने और स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा, ‘राज्य सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। रोजगार मेले के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर दिलाने का प्रयास है।’ विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर             इस मेले में दसवीं और बारहवीं पास युवाओं से लेकर आईटीआई, डिप्लोमा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए रिक्तियां उपलब्ध हैं। कृषि स्नातक, सामान्य स्नातक तथा एमबीए और एमसीए सहित स्नातकोत्तर योग्यताधारी युवा भी अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए मशीन ऑपरेटर, असेंबली ऑपरेटर, फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन और मेंटेनेंस इलेक्ट्रिशियन जैसे पद भी रिक्तियों में शामिल हैं। मैकेनिकल इंजीनियर और गुणवत्ता निरीक्षक के पदों के लिए भी रिक्तियां प्राप्त हुई हैं।             इनके अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलीकॉलर,  रिलेशनशिप मैनेजर, सेल्स एग्जीक्यूटिव और सेल्स ऑफिसर जैसे पदों पर काम करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए भी रोजगार मेले में रिक्तियां उपलब्ध हैं। साथ ही बैंकिंग, फाइनेंस और मानव संसाधन (एचआर) से संबंधित अवसर भी मेले में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं देखभाल के क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ और केयर टेकर सहित  सुरक्षा सेवाओं में गार्ड और सुपरवाइजर, जबकि परिवहन तथा सामान की आवाजाही से जुड़े कामों में ड्राइवर, डिलीवरी कर्मी, बाइक राइडर और पिकर-पैकर जैसे पद भी इसमें शामिल हैं। अभ्यर्थी अपनी योग्यता, रुचि और संबंधित पद की पात्रता देखकर आवेदन कर सकेंगे। ये कंपनियां एवं संस्थाएं लेंगी हिस्सा             रोजगार मेले के लिए क्वेस कॉर्प, रैंडस्टैड इंडिया, राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स-सतलज टेक्सटाइल्स, वर्द्धमान टेक्सटाइल्स, जेनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसी कंपनियों ने रिक्तियां उपलब्ध कराई हैं। इनके अलावा इंस्टाकार्ट, स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल, स्वतंत्र माइक्रोफिन, एनआईआईटी, आइसेक्ट, शांता टेक्नो, राजत इक्विपमेंट्स और फर्स्ट फ्लाई कॉर्पाेरेट भी इनमें शामिल हैं। ई-रोजगार पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन            रोजगार मेले में आवेदन और चयन प्रक्रिया को सुगम तथा व्यवस्थित बनाने के लिए ई-रोजगार पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से प्राप्त रिक्तियोंको पोर्टल पर प्रदर्शित किया जा रहा है। इच्छुक युवा आधिकारिक पोर्टल www.erojgar.cg.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, घर बैठे पदों की जानकारी देख सकते हैं और अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें मेले से पहले ही उपलब्ध रोजगार अवसरों को समझने का समय मिलेगा।             नियोजक भी पोर्टल पर अभ्यर्थियों की प्रोफाइल और आवेदन देख सकेंगे। इनके आधार पर जरूरत के अनुसार उम्मीदवारों की सूची तैयार करने तथा प्रारंभिक चयन प्रक्रिया संचालित करने की सुविधा होगी।                इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में छत्तीसगढ़ रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों और प्लेसमेंट कैंप में 9,463 अभ्यर्थी चयनित हुए थे।रोजगार विभाग के   आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 311 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर में रोजगार मेले आयोजित हुए जिनमें 5,314 अभ्यर्थी चयनित हुए।जबकि 2025-26 में 245 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, बलौदाबाजार एवं दुर्ग में आयोजित रोजगार मेले में 4,149 अभ्यर्थी चयनित हुए। वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक राज्य में 224 प्लेसमेंट कैंप और रोजगार मेलों का आयोजन हो चुका है, जिनमें 8,878 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं।

नौकरी बनाम रोजगार: बिहार में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक टकराहट

पटना  बंपर जीत के नायक और नीतीश कुमार की पसंद बने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रोजगार पर अटैक शुरू कर दिया हे । इसका संकेत उन्होंने पहले ही कैबिनेट में नौकरी देने की घोषणा कर अपनी तेवर साफ कर दिया है। सम्राट चौधरी ने नौकरियों की बौछार के साथ-साथ रोजगार की वृद्धि के लिए चुनौती भी स्वीकार करते फर्स्ट कैबिनेट से ही सम्राट चौधरी ने न केवल राज्य सरकार के फोरम पर बल्कि निजी फोरम पर उद्योग का दरवाजा खोलने की उम्मीद दिखा दी है। मगर, सम्राट चौधरी के रोजगार से जुड़े फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तंज कसा है। नौकरियों का खोला पिटारा वो कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही झलकने लगते हैं। नौकरियों को लेकर बहुत कुछ ऐसा ही पहले कैबिनेट की बैठक से ही दिखने लगा। नीतीश नीत सरकार के स्लोगन के साथ मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने अपना इरादा साफ कर लिया कि वे हर हाल में एक करोड़ जनता को रोजगार देंगे। घोषणाओं में नौकरी/रोजगार     बिहार पुलिस में दारोगा (एसआई) के 20,937 पदों पर बहाली और प्रोन्नति का रास्ता साफ। इनमें से 50 फीसदी पद पदोन्नति और 50 फीसदी सीधी नियुक्ति से भरे जाएंगे।     भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ (नालंदा) और गया जैसे शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात पुलिस के 485 नए पद सृजित किए गए हैं। साथ ही पहले से सृजित 1,606 पदों को भी शामिल किया गया है।     बिहार के 208 प्रखंडों में खुलने वाले डिग्री कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 44 पदों के हिसाब से कुल 9,152 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।     पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत अभियंत्रण संभाग का गठन और इसके लिए 63 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। रोजगार बढ़ाने पर जोर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नौकरी से ज्यादा महत्व रोजगार को दिया। इस लिहाजन उद्योगपतियों के साथ बैठक करने के बाद सम्राट चौधरी के निशाने पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट है। बिहार सरकार (सम्राट चौधरी) ने राज्य में औद्योगीकरण और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और नौकरियों के अवसर की घोषणा की है। इनका मानना है कि मक्का, केला, मखाना की प्रोसेसिंग यूनिट बिठा कर रोजगार देने की दिशा में बिहार आगे बढ़ सकता है। राज्य की नई 'न्यू एज इंडस्ट्री' रणनीति के तहत 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की योजना है। तेजस्वी यादव को क्यों लगी मिर्ची? इन सबके बीच आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार का नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम लिए बिना ही कहा कि नाम बदलने के विशेषज्ञ भाजपाइयों, खासकर बिहार के 'नए-नवेले मुख्यमंत्री' को नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि बिहार पिछले 21 वर्षों में औद्योगिक उत्पादन में बेहद पीछे लेकिन लेबर सप्लाई में अव्वल रहा है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार पलायन रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे बिहार के मजदूर मजबूर होकर घर से दूर रहने को विवश हैं। दरअसल, अलग-अलग डिपार्टमेंट में हाल के दिनों में कई वैकेंसी आई है। नौकरी को लेकर सम्राट चौधरी अपनी हर सभा में बयान दे रहे हैं। बिहार में लगभग 2.97 करोड़ परिवार हैं। तेजस्वी ने चुनावी वादे में हर घर में नौकरी की बात कही थी। रोजगार वाला मुद्दा हाईजैक होते देख तेजस्वी ने कहा कि बिहार का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर देना चाहिए।

बलौदाबाजार : वीबी-ज़ी राम जी अंतर्गत ग्राम पंचायतो में रोजगार दिवस का आयोजन

बलौदाबाजार : वीबी-ज़ी राम जी अंतर्गत ग्राम पंचायतो में रोजगार दिवस का आयोजन 4821 संचालित कार्यों में 32072 श्रमिक नियोजित बलौदाबाजार जिले मे विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) अंतर्गत रोजगार दिवस का आयोजन किया जा रहा है। कुल 4821 कार्य संचालित है जिसमें 32072 श्रमिक नियोजित है।  सभी विकासखंड के ग्राम पंचायतों में पंजीकृत श्रमिको को रोजगार उपलब्ध कराते हुए कार्यक्षेत्र पर रोजगार दिवस का आयोजन किया गया साथ ही विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन अधिनियम 2025 के प्रावधानों, लाभों और क्रियान्वयन के तरीकों के बारे में बताया गया।नया कानून ग्रामीण रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है, जो मनरेगा की जगह लेगा और इसमें 100 दिन की बजाय 125 दिन का गारंटीड रोजगार प्रदान किया जाना शामिल है।  इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार की अधिक अवसर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण। योजना में कार्यो की पारदर्शिता एवं जवाबदेही के लिए डिजिटलाईजेशन एवं टेक्नालाजी का उपयोग करते हुए जल सरंक्षण, भूजल पूर्नभरण, वाटरशेड विकास, सिंचाई, वनीकरण, एवं जल स्रोतो के कार्यो को बढ़ावा देना है। विकसित भारत -जी राम जी अधिनियम 2025 में जल संरक्षण एवं जल संबंधित कार्यो को बढ़ावा मिलेगा।मूलभूत ग्रामीण अवसरंचना सुदृढ़ होगी। आजिविका के अवसर एवं अनुकुलन क्षमताओ का विकास होगा।मजदूरी रोजगार गारंटी तथा 07 दिवस में मजदूरी भुगतान की गारंटी।तय समय में काम नही मिलने पर बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान है। जिले के सभी जनपद पंचायतों के समस्त ग्राम पंचायतों में इस अधिनियम के अंतर्गत सभी कार्य अब ज़ीआईएस आधारित युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से योजना बनाकर क्रियान्वित किये जायेंगे जिससे विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण  के कार्यो को अधिक पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी तरीके से कराया जा सकेगा। सभी कार्यरत श्रमिको की उपस्थिति में QR कोड की जानकारी दी गई, जिसमें तीन वर्षो के महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत स्वीकृत कार्यो के साथ-साथ आय-व्यय की जानकारी प्राप्त किया जा सकता है।

सर्वे 2025 में दावा: देश में बेरोजगारी घट रही है, 61.3 करोड़ लोग काम पर; महिलाओं का वेतन वृद्धि पुरुषों से ज्यादा

नई दिल्ली देश में बेरोजगारी दर 2025 में थोड़ी घटकर 3.1% हो गई है। यह आंकड़ा 2024 में 3.2% था, यानी मामूली सुधार जरूर हुआ है। यह जानकारी सरकार के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2025 में सामने आई है, जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने जारी किया है। रिपोर्ट बताती है कि रोजगार के मामले में देश में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और यह सुधार लगभग हर सेक्टर और पुरुष-महिला दोनों में देखने को मिला है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 3.3% से घटकर 3.1% हो गई, जबकि महिलाओं की बेरोजगारी दर 3.1% पर ही स्थिर रही।  गांवों में स्थिति ज्यादा बेहतर अगर ग्रामीण और शहरी इलाकों की बात करें तो गांवों में स्थिति ज्यादा बेहतर दिख रही है। ग्रामीण बेरोजगारी दर 2.5% से घटकर 2.4% हो गई, जो यह दिखाता है कि गांवों में लोगों को काम मिलने की स्थिति मजबूत हो रही है। खास बात यह है कि गांवों में महिलाओं की बेरोजगारी दर सिर्फ 2.1% रही, जो पुरुषों (2.6%) से भी कम है। वहीं शहरों में बेरोजगारी दर ज्यादा है, पुरुषों के लिए 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4%। लैंगिक और क्षेत्रीय विश्लेषण सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों की बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जो 2024 के 3.3% से घटकर 2025 में 3.1% पर आ गई है. वहीं, महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर 3.1% पर स्थिर बनी हुई है।  ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच श्रम अवशोषण की क्षमता में भी अंतर देखा गया. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 2.4% दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के 2.5% से कम है. विशेष रूप से, ग्रामीण भारत में महिलाओं की बेरोजगारी दर केवल 2.1% रही, जो इसी क्षेत्र के पुरुषों (2.6%) की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाती है. शहरी क्षेत्रों में, पुरुषों के लिए यह दर 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4% रही।  रोजगार की प्रकृति में बदलाव: स्वरोजगार से वेतनभोगी नौकरियों की ओर रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार की गुणवत्ता में आया सुधार है. आंकड़ों से पता चलता है कि देश में स्वरोजगार की हिस्सेदारी 57.5% से घटकर 56.2% रह गई है. इसके विपरीत, 'नियमित वेतनभोगी नौकरियों' में वृद्धि देखी गई है, जो 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई है. यह वृद्धि पुरुषों (25.4% से 26.5%) और महिलाओं (16.6% से 18.2%) दोनों के लिए समान रूप से दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण का संकेत है।  क्षेत्रीय बदलाव और आय में वृद्धि औद्योगिक भागीदारी के मामले में, कृषि क्षेत्र अभी भी सबसे बड़ा नियोक्ता बना हुआ है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी 44.8% से घटकर 43.0% रह गई है. निर्माण क्षेत्र में भी 12.3% से गिरकर 12% की मामूली गिरावट आई है. दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार हुआ है, जो 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गया है, और सेवा क्षेत्र भी 12.2% से बढ़कर 13.1% पर पहुँच गया है।  श्रमिकों की औसत आय में भी सम्मानजनक वृद्धि देखी गई है. नियमित वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत मासिक आय 5.8% की वृद्धि के साथ ₹24,217 हो गई है, जबकि महिलाओं की आय में 7.2% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब ₹18,353 है. स्वरोजगार श्रेणी में भी पुरुषों की आय में 6% और महिलाओं की आय में 8.8% का इजाफा हुआ है।  सर्वेक्षण का पैमाना यह व्यापक सर्वेक्षण देश भर के 2,70,472 घरों (1,48,718 ग्रामीण और 1,21,754 शहरी) में किया गया था, जिसमें कुल 11,48,634 व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) ग्रामीण क्षेत्रों में 80.5% (पुरुष) और 45.9% (महिला) के साथ मजबूत बनी हुई है, जो भारत की आर्थिक विकास यात्रा में श्रम शक्ति की सक्रिय भूमिका की पुष्टि करती है।  खेती अभी भी सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र रोजगार के प्रकार में भी बदलाव देखने को मिला है। खुद का काम करने वालों की हिस्सेदारी थोड़ी घटी है, 2024 में 57.5% से घटकर 2025 में 56.2% रह गई। लेकिन अच्छी बात यह है कि नियमित सैलरी वाली नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है, जो 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई। इसका मतलब है कि लोगों को ज्यादा स्थायी नौकरियां मिल रही हैं। वहीं दिहाड़ी मजदूरी लगभग 20% के आसपास ही बनी हुई है। सेक्टर के हिसाब से देखें तो खेती अभी भी सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, लेकिन इसमें थोड़ी गिरावट आई है, 44.8% से घटकर 43%। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग (कारखानों) में रोजगार बढ़ा है और सर्विस सेक्टर (जैसे होटल, ट्रांसपोर्ट, अन्य सेवाएं) में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में हल्की गिरावट देखी गई। पुरुषों और महिलाओं की कमाई भी बढ़ी कमाई के मामले में भी सुधार दिखा है। सैलरी वाले काम में पुरुषों की औसत कमाई करीब 5.8% बढ़कर ₹24,217 हो गई, जबकि महिलाओं की कमाई 7.2% बढ़कर ₹18,353 हो गई। खुद का काम करने वालों और महिलाओं की आमदनी में भी अच्छा इजाफा हुआ है। हालांकि दिहाड़ी मजदूरों में पुरुषों की कमाई लगभग स्थिर रही, जबकि महिलाओं की कमाई थोड़ी बढ़ी। शिक्षा और काम में भागीदारी की बात करें तो शहरों में लोगों की पढ़ाई का स्तर ज्यादा है, जबकि गांवों में थोड़ा कम है। गांवों में पुरुषों की काम में भागीदारी 80.5% और महिलाओं की 45.9% रही, जो पिछले साल के बराबर है। 

लाखों परिवारों को मिला स्थायी सहारा, गांवों में मजबूत हुई आजीविका

महिला मेट्स को 111 करोड़ से अधिक का किया गया भुगतान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों का चयन महिला मेट के रूप में किया जा रहा लखनऊ उत्तर प्रदेश में रोजगार गारंटी व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में अब तक 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में मिसाल कायम की गई है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी (मनरेगा) से महिलाओं की आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है। महिला नेतृत्व को मिला नया मंच ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक करीब 32 हजार महिला मेट्स को कार्य सौंपा गया है। महिला मेटों को 111 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है। समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान प्रणाली से महिलाओं का विश्वास सरकारी योजनाओं पर और मजबूत हुआ है। स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका सरकार की रणनीति के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को महिला मेट के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों में महिला नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता को भी नया आयाम मिला है। समय पर भुगतान से बढ़ा भरोसा वित्तीय वर्ष 2025–26 में 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय से भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रोजगार गारंटी प्रणाली में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लगातार मजबूत हो रही है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल रहा है। गांवों में बने आय के नए स्रोत प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी के अंतर्गत अब तक 6703 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों को गति मिली है, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता देकर समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर कदम रोजगार गारंटी व्यवस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गांवों में आजीविका का स्थायी आधार तैयार हो रहा है। लाखों परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और प्रदेश में मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्पष्ट तस्वीर उभरकर सामने आ रही है।