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PF खाताधारकों के लिए अहम खबर: EPFO के नियमों में बदलाव पर सरकार का बड़ा अपडेट

नई दिल्ली लोकसभा में सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत चल रहे EPFO 3.0 रिफॉर्म्स पर विस्तृत जानकारी दी है। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि इस पहल का मकसद सिस्टम को ज्यादा तेज, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। खासतौर पर क्लेम सेटलमेंट को फास्ट करना, प्रोसेस को आसान बनाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध कराना इसमें शामिल है। क्या होगा बदलाव सबसे बड़ा बदलाव सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम (CPPS) को लेकर आया है। मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से EPFO के सभी फील्ड ऑफिस इस सिस्टम को पूरी तरह अपना चुके हैं। इस नए सिस्टम की मदद से हर महीने 70 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को समय पर और बिना गलती के पेंशन मिल रही है। यानी अब पेंशन के भुगतान में देरी या गड़बड़ी की शिकायतें काफी हद तक कम हो गई हैं। क्लेम सेटलमेंट के मामले में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। सरकार के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में 25 फरवरी 2026 तक ₹5 लाख तक के कुल 3.52 करोड़ से ज्यादा क्लेम ऑटो मोड में सेटल किए गए हैं। यही नहीं, कुल एडवांस क्लेम्स में से करीब 71.37% ऑटोमैटिक तरीके से निपटाए गए, जिनके जरिए लगभग ₹51,620 करोड़ की राशि जारी की गई। इससे साफ है कि अब लोगों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा। EPF अकाउंट ट्रांसफर अब काफी आसान नौकरी बदलने पर EPF अकाउंट ट्रांसफर भी अब काफी आसान हो गया है। पहले जहां इस प्रक्रिया में नियोक्ता की मंजूरी और कई स्टेप्स लगते थे, अब KYC अपडेट होने पर यह काम खुद-ब-खुद हो रहा है। 25 फरवरी 2026 तक करीब 70.5 लाख ऑटो ट्रांसफर क्लेम्स बिना किसी दखल के प्रोसेस हो चुके हैं। वहीं 21 लाख से ज्यादा ट्रांसफर क्लेम ऐसे हैं, जो कर्मचारियों ने खुद बिना नियोक्ता की मदद के जमा किए। एक बड़ा डिजिटल अपग्रेड अगर EPFO 3.0 को आसान भाषा में समझें, तो यह एक बड़ा डिजिटल अपग्रेड है, जिसमें कागजी काम कम करके पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑटोमेटेड बनाया गया है। पहले जहां क्लेम सेटलमेंट में 20 दिन तक लग जाते थे, अब वही काम 3 दिन से भी कम समय में हो रहा है। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को काफी राहत मिल रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल (EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने) पर फिलहाल कोई ठोस ऐलान नहीं हुआ है। सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पर विचार चल रहा है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में लाखों पेंशनर्स की नजर अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई है।

कर्मचारियों के लिए जरूरी अपडेट, EPFO FY26 की ब्याज दरों पर मार्च में अहम बैठक

नई दिल्ली होली से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को लेकर अहम फैसला ले सकता है। खबर है कि 2 मार्च 2026 को केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक होना है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ (PF) जमा पर मिलने वाली ब्याज दर पर अहम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। वर्तमान में EPF पर 8.25% ब्याज मिलता है। चर्चा है कि आगामी महीनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों को देखते हुए ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रख सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  हालांकि यह सब अनुमान हैं, अंतिम फैसला वित्त और श्रम और रोज़गार मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही माना जाएगा। फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इन मुद्दों पर भी हो सकती है चर्चा ईपीएफओ कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। पीएफ से आंशिक निकासी की प्रक्रियाओं को और सरल बनाने के लिए नए पोर्टल और नियमों की घोषणा की जा सकती है। इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करने के साथ विद्ड्रॉल और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं। हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है। इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर 2025 को हुई थी। क्या है पूरी प्रक्रिया ? सबसे पहले निवेश और लेखा परीक्षा समिति (FIAC) वित्तीय वर्ष के लिए EPFO निवेश पर ब्याज दर तय करने के लिए बैठक करती है और फिर ​CBT बैठक में ब्याज दर की सिफारिश की जाती है। इसके बाद प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है। मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही इसे आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया जाता है और वित्तीय वर्ष के अंत तक ब्याज की राशि सदस्यों के खातों में जमा होनी शुरू हो जाती है। EPFO : कब कितनी रही है ब्याज दर     वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की थी। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत से अधिक है।     इससे पहले 2021-22 में 8.10% 2020-21 EPF दर 8.5 फीसदी (PF Interest Rate), 2018-19 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत थी।     EPFO ने साल 2023-24 के लिए 1,07,000 करोड़ की इनकम पर 8.25% ब्याज दिया, जो लगभग 13 लाख करोड़ की मूल राशि के आधार पर इसका हाईएस्ट रिटर्न है, जबकि साल 2022-23 में 91,151.66 करोड़ की इनकम पर दिए गए 8.15% से बढ़ोतरी थी।  

पीएफ निवेशकों के लिए खबर: EPFO ब्याज दर पर 11 दिन में फैसला होने वाला

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO वित्त वर्ष 2026 के लिए पीएफ अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्याज में संशोधन करके इसे बढ़ाएगा या फिर PF Interest Rate यथावत रहेंगे, इस पर ऐलान महज 11 दिन बाद होने वाला है. इसे लेकर अगले महीने की शुरुआत में 2 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी, जिसमें पीएफ ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है.  स्थिर रह सकता है ब्याज! बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को होने वाली बैठक में PF Interest Rates पर फैसला होने की उम्मीद है.फिलहाल, पीएफ खाते पर सरकार की ओर से 8.25% का ब्याज दिया जा रहा है और ऐसे उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इसे इसी स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये लगातार तीसरी बार होगा, जब मेंबर्स को उनके भविष्य निधि जमा पर 8.25% का ही ब्याज मिलेगा. रिपोर्ट की मानें, तो EPFO ब्याज को स्थिर रखने का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी ग्राहकों को स्थिर और निरंतर ब्याज दर देते रहना है. ईपीएफओ के पास इस फाइनेंशियल ईयर में 8.25% ब्याज दर बनाए रखने के लिए अपने निवेश से पर्याप्त अधिशेष होगा.  मनसुख मंडाविया करेंगे बैठक का नेतृत्व  PF Interest Rate के प्रस्ताव पर ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा चर्चा करते हुए निर्णय लिया जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे. इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर को हुई थी. उसमें कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिनमें पीएफ के पैसों की निकासी को आसान आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की घोषणा की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बोर्ड सदस्यों के लिए लेन-देन को सरल बनाने के लिए और अधिक सुधारों पर विचार किया जा सकता है. इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करना, विद्ड्रॉल में तेजी और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं. हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए ये अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निवेश के नए रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है. मतलब साफ है कि अगर इनकम पर दबाव पड़ता है तो इससे अगले वित्तीय वर्ष से कम रिटर्न पर विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है.  ईपीएफओ कहां-कहां करता है निवेश?  गौरतलब है कि EPFO करीब 28 लाख करोड़ रुपये के कोष मैनेज करता है. संगठन नए निवेश का 45 से 65% हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) में निवेश करता है. इसके अलावा करीब 20 से 45% अन्य ऋण साधनों (Debt Instruments) में निवेश किया जाता है. वहीं 5 से 15% तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों के जरिए इक्विटी में लगाया जाता है, जबकि 5% तक शॉर्ट टर्म कर्ज साधनों में निवेश किया जाता है. निवेश का यह मैनेजमेंट ईपीएफओ बैलेंस को सुरक्षा और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, क्योंकि अधिकांश रकम अपेक्षाकृत स्थिर ऋण साधनों में ही निवेश की जाती है. इस तरह से आरक्षित कोष उन वर्षों में रिटर्न को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है, जबकि निवेश से होने वाली इनकम कम होती है. 

UPI से सीधे PF निकालें! EPFO का नया नियम 1 अप्रैल से लागू

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक अहम बदलाव की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 से PF का पैसा निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। नए सिस्टम के तहत कर्मचारी अपने PF अकाउंट से सीधे UPI के जरिए पैसा निकाल सकेंगे। इसका मतलब यह है कि अब लंबी प्रक्रिया, फॉर्म भरने और कई दिनों तक इंतजार करने की परेशानी काफी हद तक खत्म हो सकती है। इस फैसले से करीब 8 करोड़ EPFO मेंबर्स को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। PF निकासी की प्रक्रिया बिल्कुल उसी तरह आसान होगी, जैसे रोजमर्रा में मोबाइल से UPI पेमेंट किया जाता है। UPI से PF निकालने की सुविधा कैसे काम करेगी नई व्यवस्था में EPFO मेंबर अपने बैंक अकाउंट से जुड़े UPI ID का इस्तेमाल कर सकेंगे। PF से जितनी रकम निकालने के लिए वे पात्र होंगे, वह उन्हें पहले ही सिस्टम में दिखाई देगी। इसके बाद UPI पिन डालकर रकम सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। पैसा खाते में आने के बाद मेंबर उसे UPI पेमेंट, ATM से कैश निकालने या किसी भी जरूरत के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। तकनीकी तैयारी अंतिम चरण में लेबर मिनिस्ट्री और EPFO मिलकर इस नए सिस्टम को लागू करने पर काम कर रहे हैं। फिलहाल कुछ सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है, ताकि लॉन्च के बाद किसी तरह की रुकावट न आए। योजना यह भी है कि PF की पूरी रकम एक साथ निकालने के बजाय एक हिस्सा खाते में सुरक्षित रहे और बाकी जरूरत के समय UPI के जरिए निकाला जा सके। इससे एक तरफ रिटायरमेंट के लिए बचत बनी रहेगी और दूसरी तरफ तुरंत पैसों की जरूरत भी पूरी हो सकेगी। अभी PF निकालने का क्या है तरीका वर्तमान में PF निकालने के लिए कर्मचारियों को ऑनलाइन या ऑफलाइन क्लेम फाइल करना पड़ता है। हालांकि ऑटो-सेटलमेंट सिस्टम लागू होने के बाद अब क्लेम आमतौर पर तीन दिन के भीतर निपटा दिए जाते हैं। सरकार पहले ही ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर चुकी है। इसके अलावा अक्टूबर 2025 में PF की आंशिक निकासी के नियमों को भी आसान किया गया। पहले जहां 13 अलग-अलग नियम थे, उन्हें अब तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है। बीमारी, पढ़ाई, शादी, घर खरीदने या खास परिस्थितियों में योग्य राशि का 100 प्रतिशत तक PF निकाला जा सकता है। नए नियमों से क्या होगा फायदा नए नियमों के अनुसार, शिक्षा के लिए कर्मचारी 10 बार और शादी के लिए 5 बार PF निकाल सकते हैं। किसी भी तरह की आंशिक निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की नौकरी पूरी होना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि मेंबर के PF खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि बनी रहनी चाहिए, ताकि उस पर 8.25 प्रतिशत सालाना ब्याज और कंपाउंडिंग का लाभ मिलता रहे। समय से पहले फाइनल PF सेटलमेंट के लिए वेटिंग पीरियड 12 महीने और पेंशन निकासी के लिए 36 महीने तय किया गया है।  

PF के पैसे अब ATM से होंगे निकाले, AI करेगी सुविधा प्रदान, 8 करोड़ लाभार्थियों के लिए बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली अधिकतर लोगों की ये शिकायतें होती हैं कि PF निकालना सबसे कठिन काम है. अभी भी देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जो केवल जटिल प्रक्रिया की वजह से पीएफ अमाउंट निकाल नहीं पाते. लेकिन अब सबकुछ आसान होने वाला है इसी साल से, सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है, और भविष्य निधि संगठन यानी EPFO अब अपने सिस्टम को पूरी तरह से बदलने जा रहा है. EPFO 3.0 के तहत ये बदलाव हो रहा है.  वैसे तो पिछले कुछ महीनों से PF निकासी से जुड़े नियम आसान हुए हैं, जिससे क्लेम सेटलमेंट में तेज उछाल आया है, क्योंकि क्लेम दौरान पहले Error के आने पर लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब ऑनलाइन गलती सुधारने की सुविधा दी गई है, जिससे सिस्टम बेहतर हुआ है, लेकिन EPFO 3.0 को अब बेहद हाईटेक माना जा रहा है, यानी सबकुछ डिजिटल होगा, और यूजर फ्रेंडली.  EPFO 3.0 में क्या-क्या बदलाव होंगे? सबसे बड़ा बदलाव यह है कि EPFO अब बैंक की तरह काम करेगा. अभी तक अगर किसी कर्मचारी को PF से जुड़ी कोई समस्या होती थी, तो उसे उसी क्षेत्रीय EPFO का दफ्तर जाना पड़ता था, जहां उसका अकाउंट जुड़ा होता था. लेकिन EPFO 3.0 लागू होने के बाद देश के किसी भी EPFO दफ्तर से अपना काम कराया जा सकेगा. यह सुविधा खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जो नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलते हैं. बड़ा बदलाव EPFO की वेबसाइट में भी देखने को मिलेगा, वेबसाइट और पोर्टल को पूरी तरह से यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है, इसमें AI आधारित भाषा अनुवाद टूल जोड़ा जाएगा, जिससे कि EPFO से जुड़ी जानकारियां और दूसरी भारतीय भाषाओं में भी आसानी से उपलब्ध होगी. अंग्रेजी के अलावा हिन्दी, मराठी, तमिल समेत अन्य तमाम भाषाओं में इससे जुड़ी जानकारियों मिलेंगी.  UPI से PF निकालने की सुविधा EPFO 3.0 के तहत एक बहुत बड़ा बदलाव यह है कि अब PF का पैसा UPI के जरिए निकाला जा सकेगा. इसके लिए BHIM ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा. यह सुविधा अप्रैल-2026 तक शुरू होने की संभावना है. यानी आप PF खाते में जमा राशि ATM से भी निकाल सकेंगे.    बता दें, पहले PF से पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग कारण और नियम थे, जो काफी उलझन भरे थे. अब इन्हें सिर्फ 3 कैटेगरी में बांट दिया गया है.  1. Essential Needs: यह कैटेगरी जीवन से जुड़ी अहम जरूरतों के लिए PF निकासी की जा सकती है, जिसमें गंभीर बीमारी, शिक्षा और शादी शामिल हैं.   2. Housing Needs: यह कैटेगरी घर के सपने को पूरा करने के लिए है. घर खरीदने के लिए, या घर बनवाने के लिए, या फिर होम लोन चुकाने के लिए PF अमाउंट को निकाल सकते हैं.  3. Special Situations: यह उन हालात के लिए है, जब नौकरी चली जाए.  पहले, शिक्षा, विवाह या इलाज जैसे कारणों से निकालने के लिए सदस्य को कई वर्षों की सेवा पूरी करनी पड़ती थी. लेकिन EPFO 3.0 में सेवा अवधि सभी कैटेगरी के लिए एक समान 12 महीने कर दी गई है. शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार निकासी कर सकते हैं.  सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF सदस्य 75% तक फंड तुरंत निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25% राशि खाते में बनी रहती है, जिससे भविष्य में मिलने वाले ब्याज और सेवानिवृत्ति सुरक्षा को नुकसान न पहुंचे. अगर कोई सदस्य बेरोजगार हो जाता है और एक साल तक नौकरी नहीं पाता, तो फिर वे पूरे PF बैलेंस यानी 100% फंड को निकाल सकते हैं. खुद सुधार सकते हैं ये गलतियां  पिछले साल जनवरी में यानी जनवरी- 2025 में EPFO ने बड़े फैसले लिए थे. जिसके तहत कर्मचारी अपना नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति, जॉइनिंग और लीविंग डेट जैसी सामान्य गलतियों को खुद ऑनलाइन सुधार सकते हैं, इसके लिए न तो नियोक्ता की मंजूरी चाहिए और न ही EPFO की.  गौरतलब है कि EPFO में करीब 8 करोड़ एक्टिव सदस्य हैं और इसका कुल फंड लगभग 28 लाख करोड़ रुपये है. आने वाले समय में लेबर कोड लागू होने के बाद EPFO को असंगठित क्षेत्र के कामगारों का फंड भी संभालने की जिम्मेदारी मिल सकती है. EPFO 3.0 का पूरा डिजिटल सिस्टम अभी टेस्टिंग और रोलआउट स्टेज में है.

EPFO का बड़ा फैसला, अब UPI के जरिए आसानी से निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब PF खाते से पैसा निकालने के लिए लंबे फॉर्म और बैंक वेरिफिकेशन की झंझट नहीं रहेगी. नया नियम UPI आधारित निकासी को संभव बनाता है, जिससे सेकंडों में पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर होगा. यह सुधार खासकर सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लिए राहत है, जो इमरजेंसी में PF पर निर्भर रहते हैं. NPCI के साथ साझेदारी से शुरू हुई यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक PF निकालने की प्रक्रिया बेहद लंबी और पेपरवर्क से भरी होती थी. कर्मचारी को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, बैंक वेरिफिकेशन और कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता था. इस कारण निकासी में कई बार हफ्तों का इंतजार करना पड़ताथा. यही वजह थी कि EPFO ने तकनीकी बदलाव की ओर कदम बढ़ाया और UPI को PF निकासी से जोड़ने का फैसला किया. नए नियम से कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा. अब मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे अचानक आने वाले खर्चों में PF तुरंत मददगार बनेगा.पेपरवर्क खत्म होने से क्लेम रिजेक्शन की संभावना भी घटेगी. पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जाएगा. यह सुविधा PF को बैंक खाते जितना लिक्विड बना देगी. UPI आधारित निकासी NPCI के सहयोग से शुरू की गई है. शुरुआत BHIMUPI से होगी और धीरे-धीरे Paytm, PhonePe, GPay जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़ेंगे. RBI की गाइडलाइन के अनुसार, सामान्य ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1 लाख प्रतिदिन होगी, जबकि मेडिकल, एजुकेशन और IPO से जुड़े मामलों में यह सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई जाएगी. इससे सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने की गारंटी मिलेगी. लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बदलाव कर्मचारियों को पेपरवर्क से मुक्त करेगा और क्लेम रिजेक्शन कम करेगा. उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम डिजिटल इंडिया की रणनीति को मजबूत करेगा और कर्मचारियों को वित्तीय आत्मनिर्भरता देगा. फिनटेक सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि UPI प्लैटफॉर्म पर PF निकासी जुड़ने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापक होगा. EPFO ने संकेत दिया है कि शुरुआत छोटे अमाउंट से होगी और धीरे-धीरे बड़े अमाउंट पर भी यह सुविधा लागू होगी. कर्मचारियों को EPFOऐप पर अपनी UPI ID लिंक करनी होगी और KYC अपडेट रखना होगा. आने वाले समय में यह सुधार PF को रिटायरमेंट प्लानिंग का और भी मजबूत स्तंभ बना देगा.

PF से जुड़ी खुशखबरी: EPFO का नया फैसला नौकरी बदलते कर्मचारियों के लिए

नई दिल्ली कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने नया सर्कुलर जारी किया है, जिससे नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बड़ा फायदा मिलेगा। अब वीकेंड या सरकारी छुट्टियों की वजह से सर्विस में ब्रेक नहीं माना जाएगा, जिससे डेथ क्लेम से जुड़े विवाद काफी हद तक खत्म हो सकते हैं। क्यों लिया गया यह फैसला पहले कई मामलों में दो नौकरियों के बीच वीकेंड या छुट्टियों के कारण कर्मचारी की सर्विस को टूटा हुआ माना जाता था, जिससे उनके परिवार को बीमा और पेंशन से जुड़े फायदे नहीं मिल पाते थे। EPFO ने बताया कि कई ऐसे मामले सामने आए, जहां कर्मचारी की मौत के बाद EDLI क्लेम सिर्फ मामूली गैप की वजह से खारिज कर दिया गया या कम रकम दी गई। इस गड़बड़ी को खत्म करने के लिए नया सर्कुलर जारी किया गया है। लगातार सर्विस की नई परिभाषा अब यदि किसी कर्मचारी की एक नौकरी खत्म होने और दूसरी नौकरी शुरू होने के बीच केवल वीकली ऑफ, नेशनल हॉलीडे, गजटेड हॉलीडे, स्टेट हॉलीडे या रिस्ट्रिक्टेड हॉलीडे आते हैं, तो इसे लगातार सर्विस माना जाएगा। EPFO ने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरी बदलते समय अधिकतम 60 दिनों तक का गैप होने पर भी सर्विस कंटिन्यूअल मानी जाएगी। EDLI क्लेम में परिवारों को बड़ी राहत EPFO ने EDLI स्कीम के तहत मिलने वाले न्यूनतम भुगतान को बढ़ा दिया है। अब नॉमिनी या कानूनी वारिस को कम से कम 50,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, भले ही कर्मचारी ने लगातार 12 महीने की सर्विस पूरी न की हो। यह लाभ तब भी मिलेगा जब कर्मचारी के पीएफ खाते में औसत बैलेंस 50,000 रुपये से कम हो। किन मामलों में मिलेगा न्यूनतम भुगतान नया नियम उन मामलों पर भी लागू होगा, जहां कर्मचारी की मौत उसके आखिरी पीएफ योगदान के छह महीने के अंदर होती है, बशर्ते वह नियोक्ता के रिकॉर्ड में दर्ज हो। इसका मतलब यह है कि अब परिवार को बीमा क्लेम के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा।

PF पर संकट? बड़े खर्चों में अब किस पर भरोसा करेंगे लोग

 नई दिल्ली हमारे देश में अधिकतर लोग रिटायरमेंट फंड को लेकर गंभीर नहीं हैं. पेंशन की व्यवस्था पर ज्यादातर नौकरी-पेशा लोग तो चर्चा ही नहीं करते, क्योंकि वो इसके प्रत‍ि न तो जागरुक है और न ही उन्हें इसकी पूरी जानकारी है. इसे आप पढ़े-लिखे लोगों की समस्या कहें या मजबूरी, लेकिन सच यही है. रिटायरमेंट फंड और पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा उदासीनता तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में है. दरअसल, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए PF का अमाउंट एक बड़ा सहारा होता है. छोटी-छोटी राशि हर महीने जुड़कर एक बड़ा फंड बन जाता है. प्राइवेट जॉब करने वालों के ल‍िए तो उनके लिए PF का पैसा मुसीबत का साथी होता है. नौकरी छूट गई तो PF के पैसे से आर्थिक चुनौतियां थोड़ी कम हो जाती हैं. परिवार में कोई बीमार है, कर्ज लेने से अच्छा है कि PF का पैसा निकालकर इलाज करवा लेते हैं. बच्चों की पढ़ाई या शादी में पैसे कम पड़ रहे हैं, तो PF अकाउंट से निकाल लेते हैं. घर खरीदना है, पीएफ खाते में वर्षों से पड़ी जमापूंजी को निकाल लेते हैं. देश में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए PF के पैसे मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा इन्हीं कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं. यहां गौरतलब है क‍ि देश में जब सबसे अधिक लोग प्राइवेट जॉब करते हैं. PF में बड़े बदलाव की तैयारी आज PF राशि पर चर्चा का मूल कारण सरकार का नया कदम है. सरकार कह रही है कि चंद महीने के बाद से आप चुटकी में पीएफ फंड को निकाल सकते हैं, प्रक्रिया आसान हो जाएगी. EPFO खातों को UPI और ATM से लिंक कर दिया जाएगा. ये सबकुछ मार्च-2026 तक पूरा होने का दावा किया जा रहा है. PF निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छी बात है. क्योंकि लोगों को अभी भी PF अमाउंट निकालने में परेशानी होती है. सरकार का कहना है कि जिस तरह से लोग अपने बैंक खाते से पैसे निकाले हैं, ठीक उसी तरह की व्यवस्था PF फंड को निकालने के लिए कर दी जाएगी, इसपर काम तेजी से चल रहा है.  यानी डिजिटल युग में PF खाते से पैसे निकालना तो बेहद आसान हो जाएगा, लेकिन इसका एक बड़ा साइड इफेक्ट भी द‍िखना तय है. लोगों की बचत पर ग्रहण लगने वाला है. जब मन करे PF अकाउंट से फंड निकालने की सुविधा मिल जाएगी तो जरा सोचिए- फिर कितने और कौन लोग होंगे, जो PF खातों में वर्षों तक राशि बचाकर रखेंगे. छोटी-छोटी जरूरतों पर लोग ATM पहुंच जाएंगे. ऐसे में PF अमाउंट कितने दिन तक अकाउंट में टिका रहेगा, ये बड़ा सवाल है? घर खरीदना, बीमारी, पढ़ाई या शादी जैसे मौकों पर जो PF फंड आज सहारा बन जाता है, भविष्य में ये व‍िकल्प आपके पास नहीं रहेगा.  फिर सेविंग को लेकर क्या विकल्प? तुरंत PF निकासी की सुविधा लागू होते ही कोई भी अपने आपको PF अमाउंट निकालने में सहज पाएगा. चाहे, जिनके पीएफ अकाउंट में 10 लाख रुपये जमा हो या फिर 10 हजार. मोबाइल खरीदना और शॉपिंग जैसे काम के लिए भी लोग बेधड़क PF से पैसे निकालने लग जाएंगे. आदत इतनी बिगड़ सकती है कि सैलरी की तरह ही जैसे ही हर महीने PF अकाउंट में अमाउंट डिपॉजिट होगी, चंद दिन के बाद खुद जाकर निकाल लिया करेंगे.  वैसे ही देश में रिटायरमेंट फंड को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं. भले ही आज निकासी प्रोसेस में समस्या की वजह से लोग PF फंड नहीं निकाल पा रहे हैं, लेकिन इसी आड़ में मोटा अमाउंट जमा हो जा रहा है. तुरंत PF फंड निकासी की सुविधा से भले ही कोई 20 साल तक नौकरी कर लेगा, परंतु अधिकतर लोगों के EPFO खाते में जमापूंजी के नाम पर चंद रुपये बचेंगे, क्योंकि वो तो समय-समय पर UPI और ATM का लाभ लेकर PF के पैसे को निकाले जा चुके होंगे. अब कुछ आंकड़ों को देखते हैं, जिससे आपको पता चल जाएगा कि कैसे बचत पर ग्रहण लगने वाला है. नियम के मुताबिक, कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ही कर्मचारी के मूल वेतन का 12% पीएफ में योगदान करते हैं. जिसमें कुछ कुछ हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में जाता है. वित्त वर्ष 2023-24 में EPFO के सदस्य 7.37 करोड़ थे, यानी मौजूदा समय में 8 करोड़ के आसपास लोग EPFO से जुड़े हैं. EPFO का कुल PF कॉर्पस (FY25) में करीब 25 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत की सबसे बड़ी रिटायरमेंट सेविंग फंड में से एक है. यह राशि साल-दर-साल बढ़ रही है. लेकिन नई व्यवस्था लागू होते ही ये राशि घटने लगेगी, फिर ये पैसा कहां जाएगा?  PF की आड़ में जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे लोग ये भी हो सकता है कि लोग PF का पैसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाना शुरू कर दे, क्योंकि PF पर फिलहाल 8.25 फीसदी ब्याज दर निर्धारित है. जबकि म्यूचुअल फंड में इससे ज्यादा की संभावना रहती है. शेयर बाजार से तो लोग PF के मुकाबले दोगुने-तिगुने ब्याज की कल्पना कर लेते हैं. ऐसे में एक सुरक्षित निवेश से पैसे निकालकर लोग जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे. अब PF की तुलना में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कितना फायदा होगा, वो तो समय ही बताएगा. सच्चाई ये भी है कि भारत में कुल सकल बचत दर करीब 31 फीसदी है. वहीं सेबी के हालिया सर्वे के मुताबिक केवल 10% भारतीय परिवार ही म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों में निवेश करते हैं. शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 15% का है, जबकि ग्रामीण इलाकों में महज 6% है. हालांकि युवा पीढ़ी में अब बचत का रुझान बढ़ा है. लेकिन वो तेजी से जोखिम भरे शेयर बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं.  सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अब भी करीब 69% भारतीय हाउसहोल्ड बैंक में डिपॉजिट या FD में पैसा रखना पसंद करते हैं. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% शहरी लोगों ने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अब तक कोई निवेश नहीं किया है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है. यानी देश में आधी से ज्यादा आबादी के पास रिटायरमेंट फंड को लेकर कोई प्लान नहीं है. पेंशन की बात करें तो देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन अधिकतम … Read more

EPFO खाताधारकों को मिलेगा तोहफा, 2024-25 के लिए बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर, जानें ताजा अपडेट

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कर्मचारियों और पीएफ खाताधारकों के लिए एक अच्छी खबर है। नए साल में केन्द्र सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो EPFO वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर बढ़ सकती है। इसका फैसला नए साल 2026 में लिया जा सकता है ।हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है।अंतिम फैसला केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा और फिर वित्त मंत्रालय मंजूरी देगा।वर्तमान में 8.25% ब्याज दर है। नए साल में बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर दरअसल, मई में वित्त मंत्रालय भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की थी जिसका ब्याज कर्मचारियों के खातों में क्रेडिट कर दिया गया है।अब नए वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर तय होना है, जिसका इंतजार है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ पर ब्याज दर बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।सरकार इसे बढ़ाकर लगभग 8.75 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रही है। यदि ब्याज दर 8.75 प्रतिशत तक बढ़ती है तो इसका असर पीएफ बैलेंस पर दिखाई देगा।अगर किसी कर्मचारी के खाते में लगभग 6 लाख रुपये जमा हैं, तो 8.75 प्रतिशत की दर से उसे तकरीबन 52,000 रुपये तक और 5 लाख रुपये की राशि जमा है, तो उसे 43,750 रुपये के आसपास ब्याज मिल सकता है। यह पूरी रकम सीधे रिटायरमेंट फंड में जोड़कर मिलेगी। यदि ब्याज दर बदलती नहीं है तो 6 लाख पर 49,500 रुपये और 5 लाख की रकम पर 41,250 रुपये तो मिलेंगे ही। EPFO : कब कब कितनी रही है ब्याज दर     वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी रखी है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ईपीएफओ ने भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की थी, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत से अधिक है।     इससे पहले 2021-22 में 8.10% 2020-21 EPF दर 8.5 फीसदी (PF Interest Rate), 2018-19 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत थी। EPFO ने साल 2023-24 के लिए 1,07,000 करोड़ की इनकम पर 8.25% ब्याज दिया, जो लगभग 13 लाख करोड़ की मूल राशि के आधार पर इसका हाईएस्ट रिटर्न है, जबकि साल 2022-23 में 91,151.66 करोड़ की इनकम पर दिए गए 8.15% से बढ़ोतरी थी। EPFO : इन 4 तरीकों से चेक कर सकते है बैलेंस     Umang APP से: अपने फोन में UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) ऐप को इंस्टॉल करें। अब ऐप को ओपन करके उसमें लॉग-इन करें।इसके बाद ‘EPFO Option’ पर क्लिक करें और ‘Employee Centric Services’ पर जाएं। अब ‘view passbook’ पर क्लिक करें। इसके बाद आपको UAN नंबर दर्ज करना होगा, जिसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) आएगा। ओटीपी डालने के बाद पीएफ अकाउंट लॉग-इन हो जाएगा। अब आपको पीएफ पासबुक शो होगी।     SMS से : SMS से PF बैलेंस जानने के लिए EPFO के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS करें।इसके लिए EPFO UAN LAN (भाषा) टाइप करना होगा। अगर आपको अंग्रेजी में जानकारी चाहिए तो LAN की जगह ENG लिखें। हिंदी में जानकारी के लिए LAN की जगह HIN लिखें।हिंदी में अकाउंट की जानकारी लेने के लिए EPFOHO UAN HIN लिखकर इसे 7738299899 नंबर भेज दें और मैसेज आपके मोबाइल पर आ जाएगा।     Missed Call से: इन तरीकों के अलावा आपके पास मिस्ड कॉल का भी ऑप्शन है। इसके लिए आपको अपने UAN रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर मिस्ड कॉल करना है। यहा आपको अपने नए योगदान और बैलेंस के विवरण के साथ एक SMS मिल जाएगा।     EPFO से : सबसे वेबसाइट पर लॉग इन कर ई-पासबुक पर क्लिक करें। ई-पासबुक पर क्लिक करने पर एक नए पेज पर आ जाएंगे। जहां आपको अपना यूजर नाम (UAN नंबर), पासवर्ड और कैप्चा भरना होगा और फिर नया पेज खुलेगा । यहां मेंबर आईडी का चुनाव करना होगा।यहां ई-पासबुक पर अपना ईपीएफ बैलेंस मिल जाएगा।  

ईपीएफओ में सुधार की तैयारी, सैलरी कैप बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी

नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अनिवार्य PF और पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाकर अपने पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है.  सरल शब्‍दों में कहें तो EPFO वेतन की मौजूदा सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये करने का प्रस्‍ताव है. पहले यह 6,500 रुपये थी.इस कदम के पीछे का मकसद 1 करोड़ से ज्‍यादा कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ की सामाजिक सुरक्षा में लाने का है.  यह तय करती है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कौन स्वतः नामांकित है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह बहुत बुरी बात है कि 15,000 रुपये से थोड़ा ज़्यादा कमाने वाले इतने सारे लोगों के पास पेंशन कवर नहीं है और बुढ़ापे में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्‍होंने पुरानी पेंशन सीमाओं को अपडेट करने पर जोर दिया.  अभी क्‍या है नियम?  मौजूदा नियमों के तहत, केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ही ईपीएफ और ईपीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे थोड़ा भी ज्‍यादा कमाने वाले लोग इससे बाहर निकल सकते हैं और नियोक्ताओं को उन्हें रजिस्‍टर्ड करने की कोई बाध्यता नहीं है. इससे शहरी निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मामूली वेतन पाने के बावजूद, औपचारिक सेवानिवृत्ति बचत के बिना रह जाता है. 25000 रुपये हो सकती है ये लिमिट रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईपीएफओ इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकता है और अगले साल की शुरुआत में केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने की उम्मीद है. श्रम मंत्रालय के एक डाटा से पता चलता है कि सीमा में ₹10,000 की वृद्धि से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस कवरेज के अंतर्गत आ सकते हैं. ट्रेड यूनियनें लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग कर रही हैं, उनका तर्क है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत और वेतन स्तरों के बीच मौजूदा सीमा पुरानी हो चुकी है. ईपीएफओ फंड बढ़ेगा कर्मचारियों के लिए, इस बदलाव से मासिक अंशदान बढ़ेगा, ईपीएफ कोष बढ़ेगा और पेंशन भुगतान में सुधार होगा. वर्तमान में, कर्मचारी मूल वेतन का 12% योगदान करते हैं, जो नियोक्ता द्वारा बराबर किया जाता है, जो अपना हिस्सा ईपीएफ और ईपीएस के बीच विभाजित करते हैं. हाई सैलरी बेस से दोनों पक्षों का योगदान बढ़ेगा. नियोक्ताओं के लिए प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी.