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कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक और नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक एवं नवीन तकनीकों की दी गई जानकारी ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण की नवीन प्रणाली से कराया अवगत भोपाल  कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत झाबुआ जिले के 6 विकासखण्ड में निरंतर कृषि रथ के माध्यम से कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों द्वारा प्रति दिन 3 ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अभी तक 296 ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर लगभग 20250 किसानों से सम्पर्क स्थापित किया गया है। किसानों को उनकी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का निराकरण करने के साथ ही कृषि एवं संबंद्ध विषयों पर नवीन एवं वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं उन्हें जायद के मौसम में तिलहनी फसलों की बुवाई करने की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है, साथ ही किसानों को कृषि रथ के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित अनुशंसा अनुसार संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन, फसल बीमा तथा शासन द्वारा उर्वरक वितरण की नवीन वितरण प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन के माध्यम से पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण व्यवस्था की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है। अब उनके रकबे के आधार पर उर्वरक उपलब्धता की जाएगी, किसानों को उर्वरक लेने के लिए अब लम्बी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा साथ ही उनके पंजीकृत मोबाईल फोन पर खाद के उपलब्धता की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों जायद मौसम की फसलों की जानकारी के साथ ही सूक्ष्म सिंचाई यंत्रो जैसे ड्रीप, स्प्रिंकलर आदि के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ ही उद्यामनिकी फसलों तथा पशु पालन विभाग अंतर्गत दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की जानकारी भी दी जा रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। कृषि रथ द्वारा ग्राम मानिकपुरा में कृषकों को प्राकृतिक और जैविक खेती का समझाया महत्व  टीकमगढ़ ज़िले के सभी विकासखंडों में कृषि रथ एक माह के लिए चलाये जा रहे हैं। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय के द्वारा कृषि से सम्बद्ध अन्य विभागों को भी निर्देशित किया गया है कि कृषि रथ के माध्यम से विभागों में संचालित योजनाओं का कृषकों के मध्य प्रचार-प्रसार प्रसार करें। इसी तारतम्य में कृषि रथ के माध्यम से ग्राम पंचायत गणेशगंज के ग्राम मानिकपुरा में भ्रमण कर कृषकों को प्राकृतिक खेती/जैविक खेती करने के लिये प्रोत्साहित, नरवाई नहीं जलाने और मृदा परीक्षण कराने का महत्व समझाया गया। कृषि रथ द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए तैयार की गई ई-टोकन व्यवस्था और ई-विकास पोर्टल की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशुपालन विभाग में संचालित कृषक हितेषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कृषि रथ के साथ नोडल अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, संबंधित विकासखंडों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, आत्मा योजना  एवं संबंधित विभागों का मैदानी अमला उपस्थित रहा।  

6720 ग्राम पंचायतों में किया जा चुका किसान पाठशाला का आयोजन

किसान पाठशाला 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान हुईं लाभान्वित  लखनऊ योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को आधुनिक खेती व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को बाराबंकी में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर से किसान पाठशाला 8.0 रबीः 2025-26 का शुभारंभ किया था। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह पाठशाला 29 दिसंबर तक चलेगी। 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसानों को दिया गया प्रशिक्षण  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में कराए जाने के लिए जनपदीय व मंडलीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया था। इस क्रम में 12 दिसंबर से 21 दिसंबर (10 दिन) तक 6720 ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/ किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं एवं कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 6.98 लाख किसानों में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान शामिल हैं।  अब तक लगभग दो करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाती है।

माहू के प्रकोप से बालोद जिले के खेत बर्बाद, किसान चिंतित

बालोद बालोद जिले के गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के किसान इन दिनों एक विकट आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम परसाडीह में लगभग एक हजार एकड़ में बोई गई धान की फसल में से करीब 500 एकड़ फसल माहू नामक बीमारी के प्रकोप से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। छोटे-बड़े सभी किसान इस अनपेक्षित आपदा से हताश हैं और अपनी तबाह हुई फसलों को देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। किसानों की आंखों से आंसू ग्राम परसाडीह के किसान गोपाल साहू ने अपनी कर्ज और बर्बाद हुई फसल की व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह छोटे किसान हैं और कर्ज लेकर खेती करते हैं। इस बार माहू बीमारी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कमाई का एकमात्र जरिया ही तबाह हो गया है। अपनी बर्बाद फसल के कारण वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक अन्य किसान, सामंत साहू, जिन्होंने 25 एकड़ में खेती की थी, बताया कि उनकी केवल 10 एकड़ फसल ही सुरक्षित बची है, जबकि 15 एकड़ पूरी तरह से नष्ट हो गई है। उन्होंने अपनी फसलों पर लगभग ₹1,00,000 की दवाइयों का छिड़काव भी किया, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। माहू के प्रकोप से खेत अब पूरी तरह बंजर हो गए हैं और किसानों की उम्मीदें टूट चुकी हैं। इस विपदा से प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन के पास मुआवजे की मांग को लेकर आवेदन जमा किए हैं। किसानों की सरकार से काफी उम्मीदें हैं।

किसान ने ₹40 हजार के सिक्कों से की स्कूटी की खरीदारी, शोरूम मालिक भी हुआ भावुक

जशपुर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला मुख्यालय में मेहनत की कमाई का एक अद्भुत दृश्य सामने आया, जिसने देवनारायण होंडा शोरूम में मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया. यहाँ एक किसान अपने परिवार के साथ स्कूटी खरीदने पहुंचा, लेकिन भुगतान का तरीका सबसे हटकर था. किसान ने स्कूटी की कीमत का एक बड़ा हिस्सा सिक्कों में चुकाया. वह बोरे में भरकर 10 और 20 रुपये के सिक्के लेकर आया था, जिनकी कुल कीमत 40 हज़ार रुपये थी. किसान ने बताया कि उसने ये पैसे पिछले 6 महीनों की कड़ी मेहनत से बचाकर इकट्ठे किए थे. खास बात यह रही कि सिक्कों की इस बड़ी राशि को गिनने में शोरूम के कर्मचारियों को घंटों का समय लगा. स्कूटी की बाकी की राशि का भुगतान किसान ने नोटों में किया. किसान की सादगी और उसकी कड़ी मेहनत से प्रभावित होकर, शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने एक मिसाल पेश की. आनंद गुप्ता ने न सिर्फ खुशी-खुशी इन सिक्कों को स्वीकार किया, बल्कि किसान की मेहनत को सम्मान देते हुए किसान परिवार को स्कूटी के साथ एक खास उपहार भी भेंट किया. यह कहानी न केवल स्कूटी खरीदने के एक अनोखे तरीके को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि मेहनत की कमाई का मूल्य कितना बड़ा होता है.