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रेलवे की बड़ी खुशखबरी, जल्द शुरू होगी वंदे भारत की स्लीपर सर्विस

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे रेलयात्रियों को जल्द ही एक खास तोहफा देने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक रेलवे इसी महीने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू कर सकता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रेल से सफर करने वाले यात्री काफी समय से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह उनके एक बड़ी खुशखबरी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वंदे भारत ट्रेनों की तरह स्लीपर ट्रेनों के कोच को भी यात्रियों के आराम का ख्याल रखते हुए तैयार किया गया है। वहीं नवीनतम तकनीक पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए तैयार किया गया है। इसमें कई खास फीचर्स भी होंगे, जो अब तक किसी ट्रेन में देखने को नहीं मिले हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खासियतें वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम होगी। वहीं इसमें कई वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी भी होंगी। इनमें यूएसबी चार्जिंग सुविधा के साथ, पब्लिक अकाउंसमेंट सिस्टम और इनसाइड डिस्प्ले पैनल, सीसीटीवी कैमरे और मॉड्यूलर पैंट्री शामिल हैं। वहीं दिव्यांग यात्रियों के लिए खास बर्थ और शौचालय की भी सुविधा होगी। इसके अलावा प्रथम श्रेणी एसी कोच में गर्म पानी से शॉवर की सुविधा भी मिलेगी। रेल मंत्री ने क्या बताया? पिछले महीने गुजरात के भावनगर में एक कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर बहुत जल्द, सितंबर में आ रही है।" इससे पहले 25 जुलाई, 2025 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक चालू होने वाला है। वैष्णव ने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का पहला प्रोटोटाइप पहले ही तैयार हो चुका है। परीक्षणों और उससे प्राप्त अनुभव के आधार पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक जेल ही शुरू होने वाला है।" हालांकि इन ट्रेनों के लॉन्च की तारीख अभी फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं रूट को लेकर जानकारी भी सामने नहीं आई है। मार्ग पर अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।  

पर्यटकों के लिए खुशखबरी! कान्हा टाइगर रिजर्व में सफारी के झंझट होंगे आसान

मंडला   दुनियाभर में बाघों के आशियाने के लिए मशहूर और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व कान्हा नेशनल पार्क में अब पर्यटकों की एंट्री के लिए एक और गेट तैयार. बारिश के बाद 01 अक्टूबर से फिर से नेशनल पार्क शुरू होगा तो पर्यटकों को ये सुविधा मिलेगी. अभी एकमात्र गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. दूसरा गेट ज्यादा सुविधाजनक है. नेशनल पार्क के इस फैसले से स्थानीय लोगों के साथ ही, जिप्सी सफारी संचालकों, गाइड और होम स्टे संचालकों में खुशी की लहर है. अब पर्यटक कान्हा की सुंदर वादियों समेत वन्य जीवों खासकर टाइगर्स का दीदार इस गेट से भी कर सकेंगे. इससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. अब खटिया गेट के साथ ही सरही गेट भी खुला रहेगा गौरतलब है कान्हा नेशनल पार्क में अभी तक तक खटिया गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. लेकिन अब सरही गेट से भी पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है. प्रबंधन के इस फैसले से खुश होकर होम स्टे संचालकों के साथ सफारी करवाने वाले व गाइड ने एक साथ मिलकर नेशनल पार्क के फील्ड मैनेजर को धन्यावाद पत्र सौंपा. इन संचालकों का कहना है कि वर्ष 2008 से सरही गेट की शुरुआत हुई थी लेकिन टिकट और अन्य ऑनलाइन बुकिंग खटिया गेट से की जाती थी, जिससे हमारा रोजगार प्रभावित हो रहा था. दूसरे गेट से एंट्री की परमिशन मिलते ही खुशी की लहर गाइड के साथ ही जिप्सी संचालकों, होम स्टे संचालकों का कहना है कि वे लोग तभी से आर्थिक रूप से परेशान थे. सरही होमस्टे के संचालक दीपक यादव ने बताया "अब कान्हा नेशनल पार्क के ऑनलाइन पोर्टल में सरही गेट को भी शामिल किया गया. इससे लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही जंगल की सुरक्षा भी होगी." कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया "कुछ समय से मांग हो रही थी सरही गेट के वाहन भी दूसरे गेट जैसे खटिया गेट से ही जाते थे. सरही गेट के गाइड औऱ जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि जो वाहन इस गेट के हैं, उनका प्रवेश इसी गेट से किया जाए. इसे अनुमति दे दी गई है."  दुनिया में क्यों मशहूर है कान्हा टाइगर रिजर्व गौरतलब है कि बाघों के दीदार और इनकी आबादी के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में पहला स्थान रखता है. कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. इस बात को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दर्शाया गया था. रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. इसके साथ ही कान्हा टाइगर पूरी दुनिया में बाघों के लिए विख्यात है. यहां देश के साथ ही विदेश से भी लोग बाघों का दीदार करने आते हैं. यहां जंगल सफारी का अलग ही क्रेज है. 2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा नेशनल टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया का विस्तार 2074.31 वर्ग किलोमीटर तक है. यहां बाघों के अलावा बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की संख्या अधिक है. चूंकि यहां शाकाहारी जानवरों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए मांसाहारी जानवरों के लिए खासकर बाघों के लिए ये नेशनल पार्क सबसे उपयुक्त माना गया है. यहां के वन्य प्राणियों खासकर बाघों का दीदार करने के लिए फिल्मी सितारे और अन्य सेलिब्रिटी लगातार आते रहते हैं. मशहूर किक्रेटर महेंद्र सिंह धोनी और अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जैसे कई नामचीन लोग यहां का दौरा कर चुके हैं. कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 3 गेट, अब 2 गेट से एंट्री कान्हा नेशनल पार्क में मुख्य रूप से तीन एंट्री गेट हैं. मैन गेट खटिया है. इसके साथ ही मुक्की और सरही गेट हैं. खटिया गेट जबलपुर से आने वालों के लिए सुविधाजनक है, जबकि मुक्की गेट रायपुर और नागपुर से आने वालों के लिए बेहतर है. अभी तक खटिया गेट से ही लोगों को एंट्री मिलती थी लेकिन अब सरही गेट से 01 अक्टूबर से पर्यटकर प्रवेश कर सकेंगे. सरही गेट शुरू होने से विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को घूमकर खटिया गेट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहुंचें कान्हा नेशनल चाइगर पार्क गौरतलब है कि ये नेशनल पार्क अन्य टाइगर रिजर्व की तरह ही 1 अक्टूबर से 30 जून तक खुला रहता है. बारिश के मौसम में ये बंद रहता है. ये टाइगर रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में स्थित है. कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर, खजुराहो, नागपुर, मुक्की और रायपुर से सड़क के माध्यम से सीधा जुड़ा हुआ है. दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से आगरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 3 से ब्यावरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से भोपाल के रास्ते जबलपुर पहुंचा जा सकता है. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से मांडला जिला रोड से कान्हा पहुंचा जा सकता है. 

दिल्ली में सीएम यादव की उद्योगपतियों से बैठक, फोकस टेक्सटाइल सेक्टर

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज तीन सितंबर को दिल्ली में होने वाले "इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क" के इंटरैक्टिव सेशन में शामिल होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद रहेंगे। इंटरैक्टिव सेशन में टेक्सटाइल सेक्टर के निवेशकों और नीति-निर्माताओं की मौजूदगी में मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। केन्द्रीय मंत्री सिंह भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की बढ़ती वैश्विक भूमिका और पीएम मित्रा पार्क की अहमियत पर अपने विचार रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग कर राज्य में उपलब्ध अधोसंरचना, नीतिगत सहयोग और नए अवसरों की जानकारी देंगे। साथ ही टेक्सटाइल हब के रूप में पहचान बना रहे मध्य प्रदेश की विशेषताओं से निवेशकों को अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा यह भी बताया जाएगा कि कैसे पीएम मित्रा पार्क प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर को बदलने वाला साबित होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों और उद्योगपतियों के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश संबंधी प्रस्तावों और संभावनाओं पर भी संवाद करेंगे। इंटरैक्टिव सेशन में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय योजनाओं और टेक्सटाइल क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक अवसरों पर जानकारी देंगे। मध्य प्रदेश के उद्योग विभाग और टेक्सटाइल विभाग के अधिकारियों द्वारा निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध संसाधनों, क्लस्टर आधारित विकास और विशेष पैकेज का प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव और वस्त्र मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रोहित कंसल भी अपने विचार साझा कर टेक्सटाइल उद्योग में नई संभावनाओं और केंद्र सरकार की नीतियों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र सिंह टेक्सटाइल सेक्टर में मध्य प्रदेश की नीतिगत पहल, निवेश प्रोत्साहन योजनाओं और औद्योगिक परिदृश्य की विस्तृत जानकारी देंगे। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में प्रस्तावित पीएम मित्रा पार्क आधुनिक टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से युक्त एकीकृत हब के रूप में विकसित किया गया है। यह पार्क कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन का आधार बनेगा।  

खुशखबरी: अब डिलीवरी के दौरान महिलाओं को दर्द से मिलेगा आराम , नार्मल डिलीवरी अब आसान

सागर डिलीवरी के समय महिलाओं को असहनीय प्रसव पीड़ा से गुजरना पड़ता हैं, लेकिन अब सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज से अच्छी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां महिलाओं को बिना दर्द के डिलीवरी करने पर किया गया शोध सफल रहा है. इस रिसर्च के बाद महिलाएं मुस्कुराते हुए भी बच्चे को जन्म दे सकेंगी. सामान्य प्रसव भी बिना दर्द के होगा. इस रिसर्च को इंडियन जर्नल ऑफ एप्लाइड रिसर्च में पब्लिश किया गया है. इसके बाद यह सुविधा रेगुलर बेस पर मेडिकल कॉलेज में शुरू कर दी गई है. अब बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज संभवत प्रदेश का ऐसा केंद्र बन गया है, जहां महिलाएं इस तरह की डिलीवरी करवा सकती हैं, लेकिन यह मरीज की सहमति मिलने के बाद ही किया जाएगा. मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया विभाग में कार्यरत चेन्नई की डॉ. विनिशा ने 120 मरीजों पर उनकी अनुमति से इस शोध कार्य को पूरा किया.  यह रिसर्च करीब ढाई साल पहले शुरू की गई थी. इस प्रयोग से बच्चे और मां को कोई साइडइफेक्ट नहीं मिला है. डॉ. विनिशा ने बताया कि विभाग अध्यक्ष डॉ. सर्वेश जैन के गाइडेंस में उन्होंने यह रिसर्च की थी. रोपिवाकेन दवा के साथ पहली बार रिसर्च किया  मेडिकल कॉलेज में एनिस्थिया विभाग के अध्यक्ष डॉ.सर्वेश जैन ने बताया सामान्य प्रसव के लिए जब गर्भाशय में संकुचन अर्थात कॉन्ट्रैक्शन आते हैं तो दर्द का एहसास होता है ,यदि इस दर्द को स्पाइनल कॉर्ड के लेवल पर ही सुन्न की दवा डाल कर ब्लॉक कर दिया जाए तो मरीज का सामान्य प्रसव भी हो जाता है और कष्टकारी एहसास भी नहीं होता. चिकित्सा विज्ञान में यह तरीका दशकों से अपनाया जा रहा था, लेकिन अभी एक नई दवा रोपिवाकेन के साथ बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में तेलंगाना से आई पीजी स्टूडेंट डा विनिशा ने इस पर रिसर्च किया है. रोपिवाकेन के साथ आप और सुरक्षित तरीके से बिना दर्द के प्रसव कराया जा सकता है साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है मरीज को नि:शुल्क मिलेगी सुविधा सागर संभाग के किसी भी प्राइवेट सरकारी अस्पताल में रेगुलर बेसिस पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. जबकि महानगरों की प्राइवेट अस्पतालों में दर्द रहित सामान्य प्रसव के लिए मरीजों को 25 से 50 हजार रुपए अतिरिक्त वहन करने होते हैं. बीएमसी में यह सुविधा नि:शुल्क शुरू कर दी गई है. संबंधित महिलाएं एनेस्थीसिया विभाग में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं. प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन डॉक्टर्स से संपर्क कर सकते हैं.

इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट लागू, अवैध घुसपैठियों पर सख्ती

नई दिल्ली भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन मामलों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 1 सितंबर से लागू हो गया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को इसका नोटिफिकेशन जारी किया. यह बिल संसद के बजट सत्र के दौरान पारित हुआ था और 4 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंज़ूरी दी थी. अब इसे एक कानून के रूप में लागू कर दिया गया है. गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार व्यास द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है, "केंद्र सरकार इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 (13 ऑफ 2025) की धारा 1 की उपधारा (2) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए 1 सितंबर 2025 को लागू होने की तिथि घोषित करती है." इस ऐक्ट के तहत भारत में प्रवेश करने, ठहरने या बाहर जाने के लिए नकली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करने (यानी जालसाजी करने) वालों को अब 7 साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. न्यूनतम सजा 2 साल और न्यूनतम जुर्माना 1 लाख रुपये तय किया गया है. अगर कोई विदेशी नागरिक बिना वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट, जैसे बिना वीजा के भारत में प्रवेश करता है, तो उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड मिल सकते हैं. ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन को नए अधिकार इस ऐक्ट ने ब्यूरो ऑफ़ इमीग्रेशन को और मज़बूत बनाया है. अब यह एजेंसी अवैध विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट कर सकेगी और राज्यों के साथ सीधा कोऑर्डिनेशन करेगी. इसी के साथ, होटल, यूनिवर्सिटी, अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल और नर्सिंग होम को विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी समय-समय पर देना अनिवार्य कर दिया गया है. किसी भी संस्थान में अवैध विदेशी नागरिकों की आवाजाही पाए जाने पर उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा. एयरलाइंस और शिप कंपनियों पर भी सख्ती सभी इंटरनेशनल एयरलाइंस और शिप कंपनियों को भारत पहुंचने पर अपने पैसेंजर और क्रू का पूरा मैनिफेस्ट और एडवांस इन्फॉर्मेशन सिविल अथॉरिटी या इमीग्रेशन ऑफिसर को देना होगा. नया कानून लागू होने के बाद पुराने क़ानून को समाप्त कर दिया गया है. यह नया ऐक्ट विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन से जुड़े सभी मामलों को एक ही कानून के तहत लाता है. अलग-अलग चार कानून को किया गया समाप्त इससे पहले तक अलग-अलग चार कानून लागू थे, जिसमें पासपोर्ट (एंट्री इंटू इंडिया) ऐक्ट, 1920; रजिस्ट्रेशन ऑफ़ फॉरेनर्स ऐक्ट, 1939; फॉरेनर्स ऐक्ट, 1946 और इमीग्रेशन (कैरियर्स लाइबिलिटी) ऐक्ट, 2000 शामिल थे. अब ये सभी कानून समाप्त कर दिए गए हैं. गृह मंत्रालय का मानना है कि इस कानून से भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और इमीग्रेशन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा, साथ ही उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती होगी जो नकली पासपोर्ट या वीज़ा की आड़ में देश में रह रहे थे.

गुजरात की प्राचीन धरती पर मिशन मंगलयान-2 की तैयारी शुरू

अहमदाबाद  कांटेदार झाड़ियां, कठोर रेगिस्तानी इलाका, चंद लोगों की आबादी, न खेती न पानी… फिर भी गुजरात का यह गांव आज मंगलमय है. राज्य के कच्छ जिले में भुज से लगभग 100 किमी दूर स्थित है यह गांव. इसका नाम है मटानोमाध. यह गांव खेती या बसावट के लिए अनुपयुक्त है. लेकिन, अब इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) गुलजार करने वाली है. अब आप सोच रहे होंगे कि इस गांव में ऐसा क्या खास है जो इसरो की नजर पड़ी है. दरअसल, गांव की मिट्टी का मंगल ग्रह से सीधा कनेक्शन है. इसी कारण इसरो अब इस गांव को मंगलयान-2 मिशन का संभावित टेस्ट बेड बनने जा रहा है. दरअसल, यहां 2016 में खोजे गए जारोसाइट नामक खनिज की उम्र को हाल ही में 5.5 करोड़ वर्ष (पेलियोसीन काल) पुराना साबित किया गया है. यह मंगल पर मिले इसी खनिज से पूरी तरह मिलता-जुलता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पृथ्वी और मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास को जोड़ती है और इसरो को लाल ग्रह की सतह, खनिज विज्ञान तथा जैव रसायन का अध्ययन करने का धरत पर ब्लूप्रिंट देगी. अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी), सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) और लखनऊ के बिरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज के शोधकर्ताओं की टीम ने जर्नल ऑफ द जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया में पिछले महीने प्रकाशित अध्ययन में इसकी पुष्टि की. लीड रिसर्चर आदित्य धरैया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया- हमारी खोज न केवल पृथ्वी के भूवैज्ञानिक अतीत को मंगल से जोड़ती है, बल्कि एस्ट्रोबायोलॉजी (ग्रहों पर जीवन, उसके उद्गम और विकास का अध्ययन), खनिज अन्वेषण और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक स्थलीय ब्लूप्रिंट प्रदान करती है. रिसर्चर आदित्य धरैया अध्ययन के समय एसपीपीयू के जियोलॉजी डिपार्टमेंट में थे. मंगलयान-2 के लिए क्रांतिकारी यह खोज मंगलयान-2 के लिए क्रांतिकारी हो सकती है, जो 2026 में लॉन्च होने की योजना है और इसमें रोवर, हेलीकॉप्टर, स्काई क्रेन तथा सुपरसोनिक पैराशूट शामिल होंगे. जारोसाइट एक पीला, लोहे से भरपूर सल्फेट खनिज है, जो पृथ्वी पर ऑक्सीजन, लोहा, सल्फर और पोटैशियम युक्त खनिजों के पानी की मौजूदगी में प्रतिक्रिया से बनता है. मंगल पर इसका पता 2004 में नासा के ऑपरचुनिटी रोवर ने लगाया था, जो मंगल पर प्राचीन काल में पानी की मजबूत मौजूदगी का साक्ष्य था. मटानोमाध में यह खनिज क्ले में बारीक कणों के रूप में मिला, जो पानी मिलाने पर फैल जाता है. लैब टेस्ट में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह मिश्रण मंगल की सतह पर पाए जाने वाले सल्फेट्स और क्लेस से काफी मिलता है. धरैया ने कहा कि कच्छ में लाखों वर्ष पहले ज्वालामुखी गतिविधि प्रमुख थी. सल्फर युक्त ज्वालामुखी राख समुद्री जल से मिलकर जारोसाइट बना. यह दुर्लभ है, क्योंकि पृथ्वी पर यह आमतौर पर अवसादी चट्टानों में नहीं मिलता. यह साइट मंगल के लिए फील्ड-एनालॉग मिशनों का आदर्श स्थान बन सकती है, जहां रोवर की गति, उपकरण टेस्टिंग, ड्रिलिंग और भू-रसायन प्रयोग किए जा सकेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि जारोसाइट जैसे सल्फेट्स में जैविक अणु और जीवन समर्थक तत्व फंस सकते हैं, इसलिए मटानोमाध के सैंपल्स मंगल की प्राचीन रसायनिक क्रियाओं और जीवन की संभावना को समझने में मदद करेंगे. वैश्विक स्तर पर जारोसाइट मैक्सिको, कनाडा, जापान, स्पेन और अमेरिका के यूटा-कैलिफोर्निया में मिला है, लेकिन मटानोमाध की दुर्गमता इसे विशेष बनाती है. 2016 में एसएसी की टीम ने कच्छ में इसे पहली बार रिपोर्ट किया, जबकि केरल के वरकाला क्लिफ्स पर भी पाया गया, लेकिन वह पर्यटन स्थल होने के कारण शोध के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है. भारत में यह इकलौती साइट नहीं है भारत में मटानोमाध ही एक मात्र साइट नहीं है. इसरो का हिमालयन आउटपोस्ट फॉर प्लैनेटरी एक्सप्लोरेशन (होप) मिशन लद्दाख के हाई-एल्टीट्यूड गांव में मंगल और चंद्रमा की स्थितियों का सिमुलेशन कर रहा है. अगस्त में त्सो कार वैली (4500 मीटर ऊंचाई) में दो क्रू मेंबर्स ने 10 दिनों तक मंगल हेबिटेट के मॉडल में रहकर परीक्षण किया, जहां ऑक्सीजन कम, हवा पतली और तापमान शून्य से नीचे है. लद्दाख पर्यावरणीय परीक्षण के लिए, जबकि मटानोमाध भूविज्ञान और खनिज संरचना के लिए आदर्श है. मंगलयान-2 में चार पेलोड्स- मार्स ऑर्बिट डस्ट एक्सपेरिमेंट (MODEX), रेडियो ऑकल्टेशन, एनर्जेटिक आयन स्पेक्ट्रोमीटर और लैंगमुइर प्रोब होंगे. यह LVM3 रॉकेट से लॉन्च होगा और एयरोब्रेकिंग तकनीक से ऑर्बिट को कम करेगा. मॉम ने 74 मिलियन डॉलर की अपेक्षाकृत बहुत कम लागत में पहली कोशिश में सफलता पाई थी. इसने भारत को एशिया का पहला मंगल ऑर्बिटर बनाने वाला देश बनाया. अब मंगलयान-2 रोवर-हेलीकॉप्टर कॉम्बो के साथ जीवन की खोज करेगा.

अब साबित करना होगा काबिलियत! सुप्रीम कोर्ट ने कहा– 3 लाख शिक्षक दो साल में TET पास करें

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को लेकर नये नियम का फैसला सुना दिया है। जिसके बाद अकेले एमपी में तीन लाख शिक्षकों की चिंता बढा़ दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बाकी है, उन्हें दो साल में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की परीक्षा पास करनी होगी। अगर इस नियम को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इनके प्रमोशन से लेकर नौकरी तक का अधिकार संकट में पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर भी मध्य प्रदेश के शिक्षकों पर पड़ेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि इससे पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने शिक्षकों को TET परीक्षा पास करने के लिए पांच साल का समय दिया था। इसे बाद में 4 साल के लिए और बढ़ाया गया था। NCTE के इस निर्णय के खिलाफ उम्मीद्वारों ने कोर्ट का रुख किया था। एमपी के शिक्षकों पर क्यों लटकी तलवार? दरअसल, 1984-1990 तक एमपी में शिक्षकों की भर्ती (Teachers Appointment) मिनी पीएससी के माध्यम से की जाती थी। बाद में इनकी नियुक्ति का अधिकार नगर निगम और पंचायतों को मिल गया। इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को तब शिक्षाकर्मी कहा जाने लगा। वहीं 2018 में इनका संविलियन अध्यापकों के रूप में हुआ। लेकिन इनमें से किसी ने भी टेट पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। 2018 के बाद से प्रदेशभर के शिक्षकों की भर्ती कर्मचारी चयन मंडल कर रहा है। इस नियुक्ति के तहत ही TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया। TET नहीं तो जाएगी नौकरी, नहीं होगा प्रमोशन बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रमोशन पाने के लिए TET परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा जिन शिक्षकों की सेवाएं अभी पांच साल से ज्यादा अवधि तक बची हैं, वे सभी इस दायरे में आते हैं। जो भी शिक्षक इस परीक्षा को पास नहीं करेगा, उसे कंपलसरी रिटायरमेंट लेना होगा या इस्तीफा देना होगा। कोर्ट ने टीईटी को दो साल में पास करने की समय सीमा तय कर दी है। इन्हें मिली राहत हालांकि बेंच ने ऐसे शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें प्रमोशन का अधिकार नहीं मिलेगा। लेकिन यदि ये शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं, तो इन्हें TET परीक्षा पास करनी होगी। अल्पसंख्यक संस्थानों का मामला बड़ी बेंच को सौंपा इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर फिलहाल इस नियम को लागू करने से राहत दी है। इन संस्थानों के लिए ये मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। 2014 के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से बाहर रखने पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इससे समान और समावेशी शिक्षा को नुकसान पहुंचा है। कई दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है कि स्कूल छूट पाने के लिए खुद को अल्पसंख्यक घोषित कर रहे हैं। जिससे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। क्यों बदला नियम? अब तक कई राज्यों में, खासकर अल्पसंख्यक स्कूलों में, टीईटी की अनिवार्यता को दरकिनार किया जाता रहा था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश ने अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) से बाहर रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि आरटीई की छूट अब खत्म, यानी सभी स्कूलों को एक ही मानक पर खड़ा होना होगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि शिक्षण की गुणवत्ता पर अब कोई समझौता नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि 'बच्चों का शिक्षा पाने का अधिकार सर्वोपरि है। शिक्षकों को यह साबित करना होगा कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य हैं।' किस पर लागू होगा फैसला?       जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें अगले दो साल में टीईटी पास करना ही होगा।     जिनकी सेवा पांच साल से कम बची है, उन्हें छूट दी गई है। लेकिन प्रमोशन पाना है तो TET पास करना होगा।     नगर निगम, पंचायत और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षक, सभी को इस दायरे में लाया गया है।     लेकिन फिलहाल अल्पसंख्यक स्कूलों में इसे लागू नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक स्कूल मामलों को बड़ी बेंच को सौंपा गया है। तीन लाख शिक्षकों पर संकट मध्यप्रदेश में ही करीब 3 लाख शिक्षक इस आदेश से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो दो दशक से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं, लेकिन कभी पात्रता परीक्षा देने की जरूरत महसूस नहीं की। अब वही शिक्षक नौकरी बचाने की चुनौती के सामने खड़े हैं। अब नौकरी बचाने पास करनी होगी TET भोपाल की एक शिक्षिका वंदना सिंह का कहना है कि हमने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया है, जब यहां TET पास करना अनिवार्य किया, तभी TET परीक्षा पास कर ली थी। अब ऐसे शिक्षक जिन्होंने TET पास नहीं की उन्हें नौकरी बचाने के लिए परीक्षा देनी पड़ेगी। यह आसान नहीं है, लेकिन मजबूरी है। गुणवत्ता सुधार की पहल -सरकार और शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले को गुणवत्ता सुधार के नजरिए से देख रहे हैं। -अब हर शिक्षक को अपनी योग्यता साबित करनी होगी। -पढ़ाई में प्रोफेशनलिज़्म बढ़ेगा। -बच्चों को प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षक मिलेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भले ही शिक्षकों के लिए मुश्किल हो, लेकिन लंबे समय में यह स्कूल शिक्षा की रीढ़ को मजबूत करेगा। शिक्षक समुदाय की चिंता फैसले के बाद कई शिक्षक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से सेवा कर रहे शिक्षकों को अचानक परीक्षा में झोंकना अन्यायपूर्ण है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार इसके लिए विशेष ट्रेनिंग, कोचिंग और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराए ताकि, वे दोबारा पढ़ाई में सक्षम हो सकें। फेल हुए तो जाएगी नौकरी, सफल हुए तो नई पहचान यह फैसला अब सिर्फ नियम नहीं, बल्कि नौकरी और भविष्य की लड़ाई बन गया है। जिन शिक्षकों ने सालों तक बिना टीईटी पढ़ाया, उन्हें अब परीक्षा देनी होगी। असफल होने पर उन्हें रिटायरमेंट तक नौकरी का अवसर नहीं … Read more

इंदौर-उज्जैन रोड पर सिंहस्थ की दृष्टि से तैयार होगा नया ग्रीन फील्ड मार्ग

भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में अहम फैसले लिए गए। तय हुआ कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से शुद्ध जल पहुंचने के लिए लागू जल जीवन मिशन में अब पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए केंद्रांश ना मिलने के कारण पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। 8,358 पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए 2,813 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे इन परियोजनाओं से जुड़े सात लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने रखा था, जिसके स्वीकृति दी गई। 87 हजार करोड़ से अधिक की मिल चुकी है स्वीकृति 26 सितंबर 2023 को प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया था। अब तक प्रदेश में 20,765 करोड़ रुपये की लागत की 27,990 एकल ग्राम नल जल योजना और 60,786 करोड़ रुपये लागत वाली 148 समूह जल प्रदाय योजनाओं की स्वीकृति दी गई हैं।   15,947 एकल ग्राम योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष 12,043 के काम विभिन्न चरणों में हैं। विभिन्न कारणों से 8,358 योजनाओं के पुनरीक्षण की आवश्यकता हुई है। यदि पुनरीक्षण नहीं किया जाता है तो सात लाख परिवार घरेलू नल कनेक्शन से वंचित रह जाएंगे। इसे देखते हुए पुनरीक्षित लागत 9,027 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की अनुशंसा स्थायी वित्त समिति ने की। मूल स्वीकृत लागत 6,213.76 करोड़ रुपये है और जो वृद्धि हो रही है, वह राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होगी, इसलिए 2,813.21 करोड़ रुपये का भार प्रदेश सरकार वहन करेगी।   इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग पर फोरलेन, सर्विस रोड भी दिसंबर 2024 में स्वीकृत     इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग (48.05 किमी) अब सर्विस रोड के साथ बनेगा। इसमें 34 अंडर पास, दो फ्लाइ ओवर, एक रेलवे ओवर ब्रिज, सात मध्यम पुल के साथ दो बड़े जंक्शन बनाए जाएंगे।     परियोजना की लागत 2935.15 करोड़ रुपये आएगी। निर्माणकर्ता एजेंसी को 15 साल तक इसका रखरखाव करना होगा। यह मार्ग 2028 में होने वाले सिंहस्थ की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।     साथ ही उज्जैन शहर में हरिफाटक रेलवे क्रासिंग पर 980 मीटर लंबाई के नए फोर लेन रेलवे ओवर ब्रिज (लागत 371 करोड़) निर्माण की स्वीकृति भी दी गई। दो लेन का बनेगा नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग नर्मदापुरम-टिमरनी (72.18 किलोमीटर) मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी माडल पर करने की स्वीकृति दी गई। परियोजना में दो अंडर पास, चार बड़े पुल, 37 मध्यम पुल, 14 वृहद और 52 मध्यम जंक्शन निर्माण प्रस्तावित हैं। मार्ग निर्माण की लागत 972 करोड़ आएगी। कंपनी को 17 वर्ष तक रखरखाव का काम करना भी होगा।

भारी बारिश का कहर: हिमाचल में 6 NH और 1,311 सड़कें बंद, रेल संचालन रुका

शिमला हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मंगलवार को भी भारी बारिश जारी रही। सूबे में भारी बारिश से हालात बेहद खराब हो गए हैं। भारी बारिश के कारण रेल सेवा स्थगित कर दी गई है। छह राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 1,311 सड़कें बंद हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल्लू और मंडी में लगभग 2 हजार वाहन जहां तहां फंस गए हैं। स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने राज्य के कुछ इलाकों में भारी से ज्यादा भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश का रेड अलर्ट इस बीच मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा और कुल्लू जिलों के अलग-अलग हिस्सों में गरज चमक और वज्रपात के साथ भारी से ज्यादा भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के कुछ हिस्सों में भारी से ज्यादा भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उना, बिलासपुर और हमीरपुर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। 6 एनएच समेत 1,311 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में 6 राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 1,311 सड़कें बंद हैं। हिमाचल के मंडी में सबसे ज्यादा 289 सड़कें बंद हैं। शिमला में 241, चंबा में 239, कुल्लू में 169 और सिरमौर जिले में 127 सड़कें बंद बताई जाती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 3 (मंडी-धरमपुर रोड), एनएच 305 (औट-सैंज), एनएच 5 (ओल्ड हिंदुस्तान-तिब्बत रोड), एनएच 21 (चंडीगढ़-मनाली रोड), एनएच 505 (खाब से ग्रामफू रोड) और एनएच 707 (हाटकोटी से पोंटा) भी बंद हैं। मंडी-कुल्लू में 2,000 से ज्यादा वाहन फंसे बताया जाता है कि शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग-5 सोलन जिले के सनवारा में भूस्खलन के कारण बंद है। इससे दोनों ओर बड़ी संख्या में वाहन फंसे हुए हैं। यह राजमार्ग हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग के नाम से भी जाना जाता है। धरमपुर-कसौली सड़क भी अवरुद्ध होने का खतरा है। 'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, मंडी और कुल्लू में 2,000 से ज्यादा वाहन फंसे हैं। इससे यात्रियों और पर्यटकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सेब उत्पादक किसानों पर तगड़ी मार कटौला होकर जाने वाला वैकल्पिक मार्ग भी एक और भूस्खलन के बाद बंद कर दिया गया है, जिससे मंडी और कुल्लू के बीच यातायात के लिए तत्काल कोई रास्ता नहीं बचा है। इस दोहरी नाकेबंदी ने पूरे क्षेत्र में परिवहन सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। आंतरिक क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है। आंतरिक क्षेत्रों में सड़कें कई दिनों से बंद हैं। इसका सबसे बुरा असर सेब उत्पादक किसानों पर पड़ा है। किसान अपनी फसल को बाजारों तक भेजने में असमर्थ हैं। ट्रेन सेवाएं सस्पेंड सोमवार को शिमला-कालका रेलमार्ग पर भूस्खलन के बाद ट्रेनें रद्द कर दी गईं। अधिकारियों का कहना है कि ये ट्रेन सेवाएं 5 सितंबर तक स्थगित रहेंगी। राज्य में सबसे ज्यादा नैना देवी में सोमवार शाम से 198.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। रोहड़ू में 80 मिमी, जोत में 61.2 मिमी, बग्गी में 58.5 मिमी, कुकुमसेरी में 55.2 मिमी, नादौन में 53 मिमी, ओलिंदा में 50 मिमी, नंगल बांध में 49.8 मिमी, ऊना में 49 मिमी और बिलासपुर में 40.2 मिमी बारिश हुई है। बंद रहे स्कूल सूबे में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट को देखते हुए सोमवार को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नौ जिलों के स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया था। मंगलवार को शिमला, कांगड़ा, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, लाहौल एवं स्पीति और सोलन जिलों के अलावा कुल्लू जिले के बंजार, कुल्लू एवं मनाली उपमंडल में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सिंहस्थ-2028 के लिए गठित मंत्रीमंडलीय समिति की बैठक

धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते हों सुनिश्चित भीड़ प्रबंधन, आवागमन, पार्किंग और पदयात्रियों की सुविधा का रखे विशेष ध्यान कचरा प्रबंधन के लिए अद्यतन तकनीक का हो उपयोग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 महापर्व के सुव्यवस्थित संचालन के लिए दीर्घकालीन कार्ययोजना का समय-सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये। संबंधित विभाग उनके कार्यक्षेत्र में जारी गतिविधियों की निरंतर समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि सभी निर्माण कार्य दिसम्बर 2027 तक अनिवार्यत: पूर्ण हों। साथ ही भीड़ प्रबंधन तथा समस्त प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आवश्यक समन्वय भी इस अवधि तक सुनिश्चित कर लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में सिंहस्थ-2028 के लिए गठित मंत्रीमंडलीय समिति की चतुर्थ बैठक में ये निर्देश दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके, खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (स्वतंत्र प्रभार), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टैटवाल, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव उपस्थित थे। निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं में स्थानीय निवासियों को बनाएं सहभागी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ संबंधी निर्माण कार्यों तथा नगर के भीतर के मार्गों के चौड़ीकरण कार्य व अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय निवासियों को सहभागी बनाया जाए और उनके अभिमत को भी महत्व दिया जाए। सिंहस्थ के दौरान पदयात्रियों की सुविधा और वाहनों की पार्किंग का विशेष ध्यान रखा जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इसके संबंध में सूचनाओं की सरल, सहज उपलब्धता सभी तक हो। सिंहस्थ अवधि में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कचरा प्रबंधन के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन को सात जोन में विभाजित करते हुए पेयजल, स्वच्छता, आवागमन, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, आवास आदि का प्रबंधन किया जाए। नगर निगम और विकास प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित संस्थाओं की क्षमता विकास के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। उज्जैन सहित खण्डवा, मंदसौर और खरगोन में भी होंगे कार्य बैठक में कुल 2675 करोड़ रूपए लागत के 33 कार्य स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए गए। इनमें 25 कार्य उज्जैन, 3 खण्डवा, 2 मंदसौर और 3 खरगोन में होने हैं। इनमें नगरीयविकास एवं आवास विभाग के 21, लोक निर्माण के 6, रेलवे के 2 एवं पर्यटन, गृह, एमपीआरडीसी और जल संसाधन विभाग के एक-एक कार्य शामिल हैं। 12 किलोमीटर लंबे 6 लेन मार्ग से सभी घाटों को जोड़ा जाएगा मंत्री-मण्डलीय समिति की चतुर्थ बैठक में क्षिप्रा नदी के पश्चिमी भाग पर सिंहस्थ बायपास से मेला क्षेत्र को आने वाले सभी मार्गों को कनेक्ट करते हुए नदी के पास स्थित मंदिरों और सभी घाटों को जोड़ने वाले एमआर-22 को स्वीकृति प्रदान की गई। लगभग 194 करोड़ रूपए लागत से बनने वाले 12 किलोमीटर लंबे 6 लेन मार्ग से सभी घाटों को जोड़ा जाएगा और सिंहस्थ के दौरान इसका बस रैपिट ट्रांजिट के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इसी प्रकार सिंहस्थ बायपास से रामघाट तक पहुंचने के लिए बड़नगर रोड के विकल्प के रूप में कार्तिक मेला ग्राउण्ड से नईखेड़ी मार्ग को अनुमोदन प्रदान किया गया। लगभग 3 किलोमीटर लंबे 36.59 करोड़ रूपए लागत के इस फोरलेन मार्ग से सिंहस्थ बायपास से शंकराचार्य चौराहे तक के ट्रैफिक कंजेशन में कमी आएगी। इसी प्रकार इंदौर उज्जैन रोड से क्षिप्रा नदी के पश्चिम भाग को जोड़ने के लिए शनि मंदिर से जीवनखेड़ी रोड, इंदौर रोड से आने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी घाट और शनि मंदिर तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग किए जाने वाले शांतिधाम चौराहा से शनि मंदिर रोड और महाकाल मंदिर को रामघाट से सीधे जोड़ने व महाकाल आने वालों को चौड़ा मार्ग उपलब्ध कराने के लिए महाराज वाडा चौराहा से हरसिद्धि मंदिर चौराहा क्षिप्रा नदी तक के रोड को समिति ने अनुमोदन प्रदान किया। सुगम यातायात के लिए हो रही है पुख्ता व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में नरसिंहघाट रोड से दत्त अखाड़ा जोन, भूखीमाता मंदिर और नदी के पश्चिमी भाग को जोड़ने में वैकल्पिक रोड के रूप में उपयोग होने वाले कर्कराज पार्किंग से भूखीमाता मार्ग, लालपुल से एमआर-22 तक की 1.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग, भृतहरीगुफा से ऋणमुक्तेश्वर के बीच सुगम यातायात प्रबंधन के लिए 2 लेन मार्ग, गढ़कालिका मंदिर से पीर मत्स्येंद्रनाथ समाधि तक 2 लेन मार्ग को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार सुगम यातायात की पुख्ता व्यवस्था के लिए जूना सोमवारिया से पिपली नाका, अंकपात चौराहा मार्ग तक फोरलेन मार्ग, पिपली नाका से गढ़कालिका मंदिर ओखलेश्वर शमशान तक 6 लेन और सर्विस लेन, भैरवगढ़ जेल चौराहा से पिपलीना का 6 लेन सर्विस लेन, महाकाल पार्किंग से चौबीस खंबा सड़क तक फोरलेन, हरसिद्धि पाल से रामघाट रोड चौड़ीकरण, नीलकंठ द्वार से महाकाल चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण और मकाड़िया आम चौराहा से विराट नगर होते हुए कानीपुरा-तराना मार्ग तक सड़क निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा ग्रांड होटल परिसर बैठक में क्षिप्रा नदी पर 122 करोड़ रूपए लागत से लगभग 9 किलोमीटर लंबाई के घाटों के उन्नयन कार्य, छत्री चौक स्थित रीगल टॉकीज पर पार्किंग, प्लाजा व दुकानों के निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही ग्रांड होटल परिसर को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के उद्देश्य से अधिकारियों और स्टाफ क्वार्टर निर्माण तथा शहर के प्रमुख मार्गों के सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित परिवारों के लिए पंवासा में भूखंड आवंटन के लिए अधोसंरचना विकास के उद्देश्य से आवश्यक अधोसंरचना सुविधाएं विकसित करने के लिए 10 करोड़ 34 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में उज्जैन में रेलवे स्टेशन पर सुगम आवागमन के लिए पुल निर्माण, नईखेड़ी रेलवे स्टेशन, पंवासा फ्लैग स्टेशन, चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन कनेक्टिविटी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। ओंकारेश्वर में वर्तमान झूला पुल के समांतर होगा नए पुल का निर्माण बैठक में ओंकारेश्वर … Read more