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मध्यप्रदेश में झमाझम बारिश का दौर, कई जिलों में रिकॉर्ड टूटा; ग्वालियर-मुरैना में अलर्ट जारी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में इस समय मानसून की सक्रियता कम हो गई है। फिलहाल प्रदेश में कोई प्रभावी मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिससे ज्यादातर जिलों में तेज बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, लोकल वेदर सिस्टम के कारण कुछ इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में 28.6 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक सामान्य से 47 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है। यह कोटे का 77% है। पूर्वी हिस्से में बादल जमकर बरसे हैं। हालांकि, अगले 4 दिन तक प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव नहीं है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना जिलों में अगले 24 घंटे में भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) हो सकती है। वहीं रीवा और सतना में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात को तेज वर्षा के आसार हैं। अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे शहरों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश के उत्तरी हिस्सों में मानसून की प्रमुख प्रणाली सक्रिय है, जिससे मध्यप्रदेश में इसका असर सीमित हो गया है। इस कारण प्रदेश के कई जिलों में बारिश की तीव्रता कम है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। मंगलवार को ग्वालियर, मुरैना और भिंड में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। वहीं, भोपाल में सुबह से धूप खिली है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 51% और पश्चिमी हिस्से यानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 43% बारिश अधिक हुई है। सोमवार को दिनभर के दौरान प्रदेश के कुछ शहरों में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई। दतिया में 14 मिमी, खजुराहो में 5 मिमी, नौगांव में 3 मिमी, इंदौर में 1 मिमी, उज्जैन में 0.4 मिमी, रीवा और सतना में 1-1 मिमी और सिवनी में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कम बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में भी हल्की वृद्धि देखी जा रही है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में तापमान कुछ इस प्रकार रहा-     भोपाल: अधिकतम 31.0°C, न्यूनतम 24.2°C     इंदौर: अधिकतम 30.2°C, न्यूनतम 21.7°C     ग्वालियर: अधिकतम 31.2°C, न्यूनतम 26.4°C     जबलपुर: अधिकतम 32.8°C, न्यूनतम 24.4°C अगले 24 घंटे विशेष रूप से ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन जिलों के नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जिन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है। एमपी में बाढ़ से 2 माह में 275 मौतें पूरे मध्यप्रदेश की बात करें तो बाढ़ के दौरान हुए हादसों में 275 लोगों की जान जा चुकी है। मानसून की आमद के बाद से जून और जुलाई के ये आंकड़े सरकार ने खुद विधानसभा में बताए हैं। 1657 पशुओं की भी मौत हुई है। बारिश के चलते ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (RRDA) की 254 से अधिक सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। 293 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए जबकि 3 हजार 687 मकानों में आंशिक नुकसान हुआ है। कुल 3980 मकानों को नुकसान पहुंचा है। पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा नदी ने विकराल रूप ले लिया था। खेत-मंदिर और पुल डूब गए थे। वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए थे। उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के उफान पर आने से चित्रकूट में कई दुकानों में पानी भर गया था। गुना में सबसे ज्यादा 45 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। निवाड़ी में 45.1 इंच, मंडला-टीकमगढ़ में 44 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है।  

बिजली उपभोक्ताओं को झटका, हाफ बिल योजना अब सिर्फ 100 यूनिट तक

रायपुर   राज्य सरकार द्वारा हाफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन किया गया है। अब प्रतिमाह दी जाने वाली 400 यूनिट की छूट के स्थान पर 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत रियायत दी जाएगी। वर्तमान में राज्य के 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 31 लाख परिवार (करीब 70%) ऐसे हैं जिनकी खपत 100 यूनिट प्रतिमाह से अधिक नहीं है। अतएव हाफ बिजली बिल की छूट सीमा के इस पुनरीक्षण के बावजूद इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ता परिवारों को योजना का लाभ पहले की ही तरह मिलता रहेगा। प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता परिवार हाफ बिजली योजना से पूर्ववत लाभान्वित होते रहेंगे। इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत हाफ बिजली बिल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इन परिवारों को 30 यूनिट तक की मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पहले की तरह प्राप्त होती रहेगी, साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के अन्य सभी लाभों से भी यथावत् लाभान्वित रहेंगे।  राज्य सरकार गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को गति दे रही है, जिसके अंतर्गत 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना पर केंद्र सरकार से ₹78,000/- तथा राज्य सरकार से ₹30,000/- की कुल ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है। 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 75% (₹90,000/-) का अनुदान उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। यह उत्पादन वर्तमान में हॉफ बिजली बिल योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट की छूट) से भी अधिक है। 400 यूनिट तक औसत खपत करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल आमतौर पर ₹1000/- से अधिक होता है, जो सोलर प्लांट की स्थापना के बाद लगभग शून्य हो जाएगा। इस प्रकार के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल योजना से “मुफ्त बिजली बिल” योजना की ओर अग्रसर होंगे, और दीर्घकालिक बचत प्राप्त करेंगे। उपभोक्ता स्वयं की छत पर उत्पादित बिजली के अतिरिक्त शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर प्राप्त कर सकेंगे अतिरिक्त आय रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने वाले उपभोक्ता अपनी छत पर उत्पादित बिजली का उपयोग करने के साथ-साथ शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत शेष लागत उपभोक्ता स्वयं वहन कर सकते हैं, या फिर बैंक से न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण की मासिक किस्त लगभग ₹800/- होगी, जो कि वर्तमान में 400 यूनिट पर देय औसत बिजली बिल ₹1000/- से भी कम है। इस प्रकार, उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को कम करते हुए भविष्य में आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादक बन सकते हैं। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को राहत देने, तथा उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त और दूरदर्शी प्रयास है। यह योजना राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत के पथ पर अग्रसर करेगी।

रेप केस में कांग्रेस विधायक पर दोबारा जांच के निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त आदेश

अटेर  भिंड के अटेर से कांग्रेस विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के खिलाफ दर्ज रेप केस की जांच एक बार फिर शुरू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए जांच की निगरानी भोपाल रेंज के डीआईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी है. बता दें कि ये मामला 2018 का है. इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति कई बार गरमा चुकी है. अब ये मामला एक बार फिर तूल पकड़ चुका है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत कटारे की गिरफ्तारी पर रोक को बरकरार रखा. लेकिन ये राहत उन्हें तभी मिलेगी, जब वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्य प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. बता दें कि हेमंत कटारे मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यदेव कटारे के बेटे हैं. एक-दूसरे पर दर्ज कराई थी FIR यह मामला वर्ष 2018 का है, जब भोपाल में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही 21 वर्षीय छात्रा ने विधायक हेमंत कटारे पर रेप और अपहरण के गंभीर आरोप लगाए थे. छात्रा की शिकायत पर भोपाल के महिला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. दूसरी ओर, हेमंत कटारे ने इसे भी राजनीतिक साजिश बताते हुए छात्रा पर ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की फिरौती मांगने का आरोप लगाया था. कटारे की शिकायत पर छात्रा को गिरफ्तार भी किया गया था. छात्रा की आत्महत्या से मामला और उलझा छात्रा ने जेल से छूटने के बाद कटारे और पुलिस पर मिलकर उसे झूठे आरोप में फंसाने की बात मीडिया से कही थी. उसने कटारे यौन शोषण के आरोप लगाए थे. मामला तब और जटिल हो गया जब 2019 में छात्रा ने प्रयागराज में आत्महत्या कर ली. इस घटना ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया था. वहीं, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस प्रकरण में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर फिर से जांच की मांग की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब यह मामला फिर चर्चा में आ गया है. भिंड जिले के अटेर से कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के खिलाफ रेप केस की जांच फिर से शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हेमंत कटारे के खिलाफ दर्ज मामले की जांच भोपाल रेंज के डीआईजी की निगरानी में कराने का आदेश दिया है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच की निगरानी DIG स्तर के अधिकारी करेंगे। हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि फिलहाल हेमंत कटारे की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें। सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्यप्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, एएजी अमित शर्मा और अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे। वहीं, हेमंत कटारे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गगन गुप्ता ने पक्ष रखा। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की निगरानी डीआईजी भोपाल करेंगे, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक हेमंत कटारे की गिरफ्तारी नहीं की जाए, यदि वे जांच में पूरा सहयोग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चार सप्ताह में जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। भूपेंद्र सिंह बोले- कांग्रेस विधायक पर रेप केस में रिपोर्ट बदली पूर्व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने उप नेता प्रतिपक्ष और अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे पर दर्ज रेप केस में एफएसएल रिपोर्ट बदले जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेटर लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। 

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दुनिया को कहा अलविदा, दिल्ली के अस्पताल में हुआ निधन

नई दिल्ली पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। उनका लंबे समय दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले सत्यपाल मलिक समाजवादी विचारधारा से निकले नेता थे। एक सांसद से लेकर गवर्नर तक का सफर तय करने वाले सत्यपाल मलिक आखिरी कुछ सालों में भाजपा से जुड़े थे और कई राज्यों में गवर्नर के तौर पर सेवाएं दीं। हालांकि बीते कुछ सालों से वह सरकार के खिलाफ मुखर थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था। सत्यपाल मलिक के एक्स अकाउंट से भी उनकी मौत की जानकारी दी गई। इसी एक्स अकाउंट पर आखिरी बार उनके निजी सहायक ने 9 जुलाई को बताया था कि उनकी हालत गंभीर है। खुद को चौधरी चरण सिंह का शिष्य बताने वाले सत्यपाल मलिक किसान आंदोलन के समर्थन में मुखर हुए थे और सरकार की तीखी निंदा की थी। यही नहीं उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में कई राज्यों में दौरे किए थे और सरकार से अपील की थी कि वह तीन विवादित बिलों को वापस ले ले। पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलने के कारण भी वह काफी चर्चा में थे। पांच साल में कुल 5 राज्यों के गवर्नर रहे थे सत्यपाल मलिक वह 2017 से 2022 के दौरान बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर और मेघालय तक कुल 5 राज्यों में गवर्नर रहे। 1970 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 1974 में बागपत से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से उतरे थे और जीत हासिल की थी। उन्हें जम्मू-कश्मीर में गवर्नर के कार्यकाल के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ही दौर में राज्य से आर्टिकल 370 हटा था और सूबे का पुनर्गठन करके लद्दाख को अलग एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। हालांकि इसी कार्यकाल को लेकर वह विवादों में भी रहे। खुद पर चार्जशीट दाखिल होने पर जताई थी हैरानी उन्होंने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर करप्शन का आरोप लगाया था और फिर इसी केस में उनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट पर अस्पताल से ही सत्यपाल मलिक ने ऐतराज जताया था और कहा था कि आखिर यह क्या हो रहा है। जिस शख्स ने करप्शन का आरोप लगाया था, उसके ही खिलाफ जांच शुरू कर दी गई और अब चार्जशीट दाखिल की गई है। सत्यपाल मलिक ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी सरकार का मुखर विरोध किया था और विपक्ष के समर्थन में वोट देने की अपील की थी।  

भारत ने ट्रंप की टैरिफ धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया, अमेरिका और ईयू के डबल स्टैंडर्ड को उजागर किया

नई दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मंच पर एक नया तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी की धमकी दी है। उनका दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। लेकिन यह कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई देती है। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक बयान फिर से वायरल हो रहा है जिससे इस कहानी में अमेरिका का पाखंड साफ दिख रहा है। गार्सेटी ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। तो फिर अब यह पलटवार और धमकियां क्यों? क्या यह अमेरिका का पाखंड है या ट्रंप का कूटनीतिक दोगलापन? आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं। अमेरिका का दोहरा चेहरा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, उसने इस अवसर का लाभ उठाया। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में भी योगदान दिया। उस समय अमेरिका ने भारत के इस कदम को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया। भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने स्पष्ट कहा था कि भारत का रूस से तेल खरीदना वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है। पिछले साल 2024 में 'कॉन्फ्रेंस ऑन डायवर्सिटी इन इंटरनेशनल अफेयर्स' में बोलते हुए गार्सेटी ने कहा, "भारत ने रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल को मूल्य सीमा (प्राइस कैप) पर खरीदे। यह कोई उल्लंघन नहीं था, बल्कि यह नीति का हिस्सा था, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इसे पूरा किया।" लेकिन अब वही अमेरिका भारत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी की कोई परवाह नहीं।" यह बयान न केवल भारत की ऊर्जा नीति को गलत ठहराता है, बल्कि यह भी भूल जाता है कि भारत का यह कदम अमेरिका की सहमति से ही उठाया गया था। भारत की ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। 2022 के बाद से भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35-40% रूस से आता है। यह सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रूस के अलावा भी तेल आपूर्ति के विकल्प हैं, जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई और ब्राजील। लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर अंकुश लगता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की मजबूरियों पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अनुचित है, खासकर तब जब ये देश स्वयं रूस से व्यापार कर रहे हैं।" भारत ने आंकड़ों के साथ दिखाया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का व्यापार हुआ, जो भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है। यह सवाल उठता है कि जब यूरोप और अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ट्रंप का दोगलापन: भारत बनाम चीन ट्रंप की धमकियों में एक और विरोधाभास साफ दिखता है। वह भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ और पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन चीन के मामले में उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम है। चीन रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस के कुल तेल निर्यात का 47% खरीदता है। फिर भी, ट्रंप ने चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी भारत के खिलाफ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के लिए चीन एक बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और ट्रंप शायद चीन के साथ व्यापार युद्ध को और तीव्र नहीं करना चाहते। दूसरी ओर, भारत को एक आसान निशाना माना जा रहा है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों में मित्रता का तत्व मजबूत है। अपने मुनाफे के लिए भारत पर निशाना अमेरिका ने यूक्रेन के साथ हाल ही में एक रेयर अर्थ मिनरल्स डील की है, जिसके तहत वह यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों, जैसे लिथियम, टाइटेनियम और रेयर अर्थ तत्वों, का दोहन करना चाहता है। यह डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज हाई-टेक उद्योगों, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते इन संसाधनों का खनन मुश्किल हो रहा है, इसलिए वह युद्ध को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस डील के जरिए अमेरिका न केवल अपनी खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता को भी कम करना चाहता है, जो इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, जब अमेरिका रूस को सीधे तौर पर प्रभावित करने में असमर्थ रहा, तो उसने रणनीति बदलकर रूस के करीबी सहयोगियों, जैसे भारत, को निशाना बनाना शुरू किया। टैरिफ का भारत पर असर ट्रंप की धमकी अगर हकीकत बनती है, तो भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को 83 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं … Read more

पं. प्रदीप मिश्रा के आयोजन से पहले कुबेरेश्वर धाम में अफरा-तफरी, भगदड़ में 2 की मौत

सीहोर   मध्य प्रदेश के सीहोर मे स्थित कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ मचने से 2 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। वहीं 10 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है। बताया जा रहा है कि घायलों में कईयों की हालात गंभीर बनी हुई है। घायलों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। कुबरेश्वेर धाम में मची भगदड़ दरअसल, 6 अगस्त को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की अगुवाई में कांवड़ यात्रा निकाली जानी है. यात्रा से पहले सीवन नदी घाट से कुबेश्वर धाम तक भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. हालात यह हैं कि इंदौर भोपाल हाइवे पर जाम की स्थिति बन गई है. इसी बीच कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ मच गई. घटना में घबराहट और अत्यधिक भीड़ के चलते दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई है. जबकि दो महिला गंभीर हैं. वहीं 8 से 10 लोगों का स्वास्थ्य खराब होने से उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया है. गर्मी और उमस बनी कारण, अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि शुरूआती जानकारी में बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर के समय कुबेरेश्वर धाम परिसर में बढ़ती भीड़ और गर्मी-उमस के कारण कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई. यहां अफरा-तफरी और भगदड़ के हालात निर्मित हो गए. इनमें से दो महिलाओं की हालत गंभीर है, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल सीहोर ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. मृत महिलाओं की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस घटना की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. वहीं, कई अन्य श्रद्धालु भी बेचैनी, घबराहट और चक्कर जैसी समस्याओं से पीड़ित बताए जा रहे हैं. जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल आने की सूचना भी है. कौन हैं प्रदीप मिश्रा, कुबेरेश्वर धाम से नाता बता दें पंडित प्रदीप मिश्रा एक मशहूर कथावाचक हैं. वे सीहोर के रहने वाले हैं. उनकी कथा मध्य प्रदेश के साथ-साथ देशभर में आयोजित की जाती है. वहीं सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्री की कथा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां मौजूद शिव मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. वहीं सावन के मौके पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. 17 अगस्त को कांवड़ यात्रा में शामिल होने देश और प्रदेश से श्रद्धालु सीहोर के कुबेरेश्वर धाम पहुंचे थे. हालात यह थे कि सारे होटल, लॉज सब फुल चल रहे हैं. साल 2023 में भी मची थी भगदड़ गौरतलब है कि कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले 16 फरवरी साल 2023 में रुद्राक्ष वितरण के दौरान भी भगदड़ मची थी. तब एक महाराष्ट्र के नाशिक की 53 वर्षीय मंगल बाई नाम की महिला की मौत हो गई थी. जबकि 4 लोग लापता हुए थे. इसके बाद दूसरे दिन 17 फरवरी को एक 3 साल के बच्चे अमोघ भत्त की मौत हो गई थी. बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को रुद्राक्ष महोत्सव रोकना पड़ा था. जानकारी के मुताबिक, कल पंडित प्रदीप मिश्रा की कावड़ यात्रा निकलने वाली है। उसके चलते 1 लाख श्रद्धालु अभी तक सीहोर आ चुके हैं।  

NDA ने ऑपरेशन सिंदूर-महादेव को बताया अहम कदम, पीएम मोदी को किया गया सम्मानित

नईदिल्ली  भाजपा नीत राजग संसदीय दल (NDA Parliamentary Party Meeting) की बैठक संसद भवन में शुरू हो गई है. इस बैठक का आयोजन संसद भवन के ऑडिटोरियम में हो रहा है. पीएम मोदी जब इस बैठक में शामिल होने पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए पीएम मोदी को एनडीए सांसदों द्वारा सम्मानित किया गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माला पहनाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. एनडीए संसदीय दल की बैठक में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता पर प्रस्ताव पारित हुआ. एनडीए की महिला सांसद अग्रिम पंक्ति में बैठीं. पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई. नए सांसदों का प्रधानमंत्री से परिचय कराया गया. एनडीए संसदीय दल की बैठक से जुड़े अपडेट पढ़ें… – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया अमेरिका द्वारा पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करना, तथा पहलगाम हमले की निंदा करते हुए ब्रिक्स समिट में जॉइंट डिक्लेरेशन जारी होना, पाकिस्तान द्वारा अपनी धरती पर फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक रुख की जीत को दर्शाता है.  – प्रस्ताव में कहा गया कि एनडीए संसदीय दल इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रदर्शित असाधारण नेतृत्व की सराहना करता है. उनके अटूट संकल्प, दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने न केवल राष्ट्र को उद्देश्यपूर्ण दिशा दी है, बल्कि सभी भारतीयों के हृदय में एकता और गौरव की नई भावना भी जगाई है. – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, 'हमारे सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अटूट प्रतिबद्धता को एनडीए संसदीय दल सलाम करता है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया. उनका साहस हमारे राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है. हम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.' राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की यह बैठक काफी समय के बाद हो रही है और संसद के चालू सत्र में चल रहे गतिरोध के बीच पहली बैठक है. पीएम मोदी के अपने संबोधन में तिरंगा यात्रा और विपक्ष के खिलाफ रणनीति पर भी चर्चा कर सकते हैं. एनडीए की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को अपने उम्मीदवार की घोषणा 21 अगस्त तक करनी होगी, जो नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है और संसद का मानसून सत्र भी इसी दिन समाप्त हो रहा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं, और इसकी वर्तमान संख्या 782 है. यदि विपक्ष अपना उम्मीदवार घोषित करता है, तो 9 सितंबर को चुनाव होना तय है. यह बैठक संसद के एक ऐसे सत्र (मानसून सेशन) के मध्य में हो रही है, जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिवसीय चर्चा के अलावा अब तक कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है. विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने किया गुना में वर्षा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

गुना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अतिवृष्टि/बाढ़ से जनता को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। कोई चिंता न करें, सरकार आपके साथ है। प्रत्येक प्रभावित परिवार का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति की जाए। सरकार द्वारा ‘डीबीटी प्रणाली’ के माध्यम से सहायता राशि सीधे प्रभावितों के खातों में पहुंचाई जाएगी। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को गुना में बाढ़/अति वर्षा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। उन्होंने जिले के विभिन्न वर्षा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा भी की। इस दौरान केन्‍द्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री ने कैंट क्षेत्र, पटेल नगर में घर-घर जाकर प्रभावित नागरिकों से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न्यू टेकरी रोड स्थित पवन कॉलोनी पहुँचकर वर्षा से प्रभावित परिवारों से भेंट कर हालात जाने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत दिनों हुई भारी वर्षा ने जिले में 32 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा है, जिससे अभूतपूर्व स्थिति निर्मित हुई। इस चुनौती का प्रशासन ने तत्परता एवं समन्वय के साथ सामना किया। गुना न्यू सिटी कॉलोनी की एक बुजुर्ग महिला सहित 170 नागरिकों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। विभिन्न जलाशयों में जलस्तर बढ़ने से राहत कार्यों की गति तेज की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि एनडीआरएफ की 70 सदस्यीय टीम द्वारा सघन बचाव कार्य किए गए। विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं एवं प्रशासनिक अमले ने मिलकर भोजन पैकेट वितरण, अस्थायी आश्रय स्थल की स्थापना तथा आवश्यक सामग्री वितरण जैसे राहत कार्य किए। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले दिनों में और भी वर्षा संभावित है, इसलिए प्रशासन पूर्ण सतर्कता बरते। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी है कि वे हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़े रहें। यह हर्ष की बात है कि केन्द्रीय मंत्री सिंधिया निरंतर संपर्क में रहते हुए राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने डॉ. यादव प्रभावित नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि शासन हर हाल में उनके साथ है, किसी भी प्रकार की कठिनाई में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने सभी बहनों का रक्षाबंधन के साथ स्वागत करने पर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बहनों ने राखी बांधकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान विधायक पन्‍नालाल शाक्‍य, जिला पंचायत अध्‍यक्ष अरविन्‍द सिंह धाकड़, पूर्व मंत्री महेन्‍द्र सिंह सिसोदिया, पूर्व विधायक राजेन्‍द्र सिंह सलूजा, संभाग आयुक्‍त ग्‍वालियर मनोज खत्री, आईजी अरविन्‍द सक्‍सेना सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

सरकार का पहला कर्त्तव्य है नागरिकों की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सभी प्रभावितों को शीघ्र प्रदान किया जायगा मुआवजा : केंद्रीय मंत्री सिंधिया मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण प्रभावितों को सहायता राशि वितरित शिवपुरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को शिवपुरी जिले के ग्राम पचावली पहुंचकर हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित स्‍थानीय नागरिकों को मकान क्षति तथा खाद्यान्न के लिए सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने ग्राम पचावली में ग्रामवासियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन, कोलारस विधायक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व विधायक प्रहलाद भारती, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी, पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनहानि, पशुहानि अथवा फसल क्षति जैसी हर स्थिति में सरकार पीड़ितों के साथ है। प्रभावित परिवार को राहत राशि सीधे उनके खाते में प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे बाढ़ प्रभावितों के दुख-दर्द जानने आए हैं। सरकार हर हाल में प्रभावित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का पहला कर्तव्य हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतिवर्षा से उत्पन्न परिस्थितियाँ हमारे लिए परीक्षा की घड़ी हैं। जनता के सहयोग और प्रशासन के समर्पण से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया है। उन्‍होंने कहा कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्रों में राहत कार्य निरंतर जारी रहेंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। शासन-प्रशासन पूरी मुस्‍तैदी के साथ राहत कार्यों में लगा है। उन्‍होंने बाढ़ प्रभावितों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि चिंता न करें, दुख की घड़ी में सरकार आपके साथ है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि हम सुख-दुख के हर क्षण प्रभावितों के साथ हैं। संकट की घड़ी में हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार औसत वर्षा से कहीं अधिक वर्षा हुई है, जिसके कारण सिंध नदी में उफान आया और पचावली सहित 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि ग्वालियर से दो हेलीकॉप्टर राहत कार्य के लिए भेजे गए थे। मौसम प्रतिकूल होने के कारण वे प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राहत दलों के संयुक्त प्रयासों से प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। लगभग 400 लोगों की जान बचाई गई और प्रभावितों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई। उन्होंने कहा कि मक्का एवं सोयाबीन की फसल को व्यापक क्षति हुई है, जिसकी भरपाई के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए।  

आर्थिक मोर्चे पर भारत का कमाल, 110 अरब डॉलर से अमेरिका-चीन की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली भारत में सेमीकंडक्‍टर का उपयोग बड़े स्तर पर होता है और अब भारत कंजम्‍प्‍शन के अलावा, मैन्‍युफैक्‍चरिंग भी करने लगा है. भारत में तेजी से चिप (India Semiconductor Market) बनाने का काम हो रहा है, जिस कारण सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री ग्रो कर रही है. घरेलू च‍िप मार्केट 2023 में 38 अरब डॉलर तक था और वित्त वर्ष 2024-25 में 45 से 50 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 100 से 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  अगर भारत यह टारगेट हासिल कर लेता है तो वह US चीन की कैटेगरी में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्रीज ट्रिलियन डॉलर की हैं. 2023 में चीन का सेमीकंडक्‍टर मार्केट 177.8 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 32 फीसदी हिस्‍सा है. वहीं मैन्‍युफैक्चरिंग की बात करें तो यह 16 से 18% उत्‍पादन करता है. अमेरिका का चिप मार्केट साल 2023 में 130 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 25 फीसदी है, लेकिन US 12 फीसदी ही उत्‍पादन करता है.  भारत उभरता हुआ चिप मार्केट  भारत का साल 2024 में कुल सेमीकंडक्‍टर मार्केट 45 अरब डॉलर था, जो कुल ग्‍लोबल मार्केट में 1 फीसदी उत्‍पादन करता है. हालांकि भारत का चिप मार्केट 16% ग्रोथ से बढ़ रहा है यानी 2030 तक इसकी ग्‍लोबल मार्केट में 6.21 फीसदी तक की हिस्‍सेदारी होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत ग्‍लोबल सेमीकंडक्‍टर मार्केट में एक उभरता हुआ देश है.  इस वजह से बढ़ रहा सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन  एक ऑफिशियल स्‍टेटमेंट के मुताबिक, इस ग्रोथ को 76000 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम जैसी सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन बढ़ रहा है. इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) जैसे ग्‍लोबल सहयोग ने इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाया है.  फॉक्‍सकॉन और एचसीएल का ज्‍वाइंट वेंचर  देश का चिप निर्माण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर धीरे-धीरे साइज बदल रहा है. मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्‍टर मिशन के तहत एक सेमीकंडक्‍टर निर्माण सुविधा को मंजूरी दी, जो HCL और फॉक्‍सकॉन के बीच एक ज्‍वाइंट वेंचर है. यह प्‍लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और PC जैसे उपकरणों के लिए डिस्‍प्‍ले ड्राइवर चिप्‍स का निर्माण करेगा. इस प्‍लांट को 20 हजार वेफर मंथली की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है. इससे मंथली 36 मिलियन चिप्‍स का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है.  भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है और पांच मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट अभी बन रही हैं. भारत सिर्फ एक मार्केट ही नहीं, बल्कि एक उत्‍पादन सेंटर के तौर पर भी महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए भी तैयार है.