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बाप ही बने सियासी दुश्मन: KCR ने बेटी कविता पर गिराई गाज, पार्टी से किया सस्पेंड

निज़ामाबाद तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा सियासी ड्रामा सामने आया है. पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने अपनी बेटी और एमएलसी के. कविता को पार्टी से निलंबित कर दिया है. यह फैसला तब आया है जब कविता ने कुछ दिन पहले खुलेआम पार्टी नेताओं पर आरोप लगाए और खुद के खिलाफ साजिश रचने की बात कही. भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने पार्टी की एमएलसी के. कविता के हालिया बयानों और कथित एंटी-पार्टी गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने यह कड़ा कदम उठाया. कविता, जो निज़ामाबाद स्थानीय निकाय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से मतभेद रखती रही हैं. अमेरिका यात्रा से लौटने के बाद सोमवार को उन्होंने हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री हरिश राव और सांसद संतोष, पूर्व मुख्यमंत्री KCR की छवि खराब करने के जिम्मेदार हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि मौजूदा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी उन्हें समर्थन दे रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं. कविता ने यह भी कहा कि अगर KCR पर केस दर्ज होता है तो पार्टी के अस्तित्व का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. उन्होंने कलेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर CBI जांच पर भी चिंता जताई. यह पहला मौका नहीं है जब कविता ने पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना की हो. पिछली अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि KCR उनके लिए 'भगवान' जैसे हैं, लेकिन उनके आसपास 'राक्षस' हैं. इस बार उन्होंने सीधे तौर पर हरिश राव और संतोष को निशाने पर लिया है. इसके अलावा, कविता ने बीआरएस की पिछड़ी वर्ग (BC) आरक्षण नीति पर असहमति जताई और कहा कि उनके खिलाफ लगातार साजिशें रची जा रही हैं. पार्टी नेतृत्व ने उनके इन बयानों और लगातार बढ़ते मतभेदों को देखते हुए उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया.

एमपी में कांग्रेस को बड़ा झटका, विधायक निर्मला सप्रे केस में हाईकोर्ट ने याचिका ठुकराई

इंदौर   एमपी में विधायक निर्मला सप्रे दलबदल केस में कांग्रेस को झटका लगा है। इंदौर हाईकोर्ट ने उनकी सदस्यता रद्द किए जाने को लेकर कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यह याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की इंदौर बैंच ने फैसला सुनाते हुए इसे अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ यानि जबलपुर हाईकोर्ट के समक्ष याचिका प्रस्तुत करने को कहा है। बीना की एमएलए निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गईं। इसपर कांग्रेस उनकी सदस्यता निरस्त करने की मांग कर रही है। पार्टी ने इस संबंध में विधानसभाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को लिखित पत्र भेजा। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई इसमें बताया गया कि बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीती विधायक निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो गई हैं पर उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। संविधान की अनुसूची 10 का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया कि इसमें विधायक द्वारा दल बदलने पर विधानसभा से सदस्यता निरस्त किए जाने का प्रावधान है। इंदौर हाईकोर्ट ने याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र दिया गया था लेकिन निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में याचिका लगाई गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की इस याचिका को इंदौर हाईकोर्ट ने  खारिज कर दिया। जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने यह निर्णय दिया।

बैठक में बड़े फैसले: जल जीवन मिशन को रफ्तार, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट को हरी झंडी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें प्रदेश के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, रेलवे ओवरब्रिज और स्वास्थ्य से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख रहे। कैबिनेट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 'जल जीवन मिशन" के अंतर्गत पुनरीक्षित योजनाओं की बढ़ी हुई लागत को राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह योजना 80 हजार करोड़ रुपये की है। इसमें बड़ी 20 हजार करोड़ की नल जल योजना को स्वीकृत दी गई है।  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंत्री – परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम की 125 वीं कड़ी में मध्यप्रदेश का 2 बार उल्लेख करने पर उनका आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर में संपन्न टूरिज्म कॉन्क्लेव में 3500 करोड रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे ग्वालियर, चंबल के साथ-साथ सागर संभाग में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विषय विशेष पर निवेश प्रोत्साहन के लिए हो रही समिट का प्रदेश को लाभ मिल रहा है।आगामी 11 से 13 अक्टूबर को इसी क्रम में भोपाल में ट्रेवल मार्ट आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदनावर धार में 2000 एकड़ क्षेत्र में विक मोहन कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी     नल-जल योजना के लिए 8,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता ।7. 27990 एकल गांव और 148 समूह जल योजना को मंजूरी।     इंदौर से उज्जैन तक ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर सर्विस रोड बनाने और उज्जैन में नए ओवरब्रिज के निर्माण को मंजूरी।उज्जैन निर्माण के लिए 371 करोड़ और     इंदौर-उज्जैन हाईटेक रोड निर्माण के लिए 2935.15 करोड़ खर्च होंगे।     72 km की 972.16 करोड नर्मदा पुरम से टिमरनी मार्ग 2 लाइन बनाई जाएगी यह भी हाइब्रिड NOT मॉडल पर बनाया जाएगा     शहडोल फुटबॉल खिलाड़ियों की विदेश में कोचिंग की तैयारी।विदेशी खिलाड़ी ने शहडोल के खिलाड़ियों को कोच करने का प्रस्ताव दिया। फुटबॉल की कोचिंग के लिएशहडोल के खिलाड़ियों को भेजा जाएगा बाहर     धार जिले में बन रहे पीएम मित्र पार्क के संंबंध में 3 सितंबर को दिल्ली में रोड शो का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश -विदेश के उद्योगपति सहभागिता करेंगे। इस अवसर पर भू-आवंटन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जाएगी।एक रुपए प्रतिवर्ग मीटर प्रीमियम और 120 रुपए प्रति फीट विकास शुल्क में जमीन एलॉट की जाएगी। इनके फॉर्म 22 अगस्त से 11 सितंबर तक मिलेंगे। इसमें 2 हजार करोड़ से ज्यादा लागत आएगी और तीन लाख नौकरियों का सृजन होगा। साथ ही एक लाख और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। सित हो रहे पीएम-मित्र पार्क से पश्चिम मध्यप्रदेश में मेट्रोपॉलिटन एरिया विकास के स्वप्न को साकार करने में मदद मिलेगी… इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग बैठक में 48.05 किमी लंबाई वाले 4 लेन ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी गई। परियोजना की कुल वित्तीय लागत: ₹2935.15 करोड़, निर्माण मॉडल: हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल। इसमें शामिल हैं: 34 अंडरपास, 2 फ्लाईओवर, 1 आरओबी, 7 मध्यम पुल, 2 बड़े जंक्शन और सड़क सुरक्षा उपाय। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का संबोधन बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम की 125वीं कड़ी में मध्यप्रदेश का दो बार उल्लेख करने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में ग्वालियर में संपन्न टूरिज्म कॉन्क्लेव में ₹3500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।इसी क्रम में आगामी 11 से 13 अक्टूबर तक भोपाल में ट्रेवल मार्ट आयोजित किया जाएगा। बदनावर पीएम-मित्र पार्क सीएम ने कहा कि धार जिले के बदनावर में 2000 एकड़ में विकसित हो रहा पीएम-मित्र पार्क पश्चिमी मध्यप्रदेश में मेट्रोपॉलिटन एरिया विकास के सपने को साकार करने में मदद करेगा। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग बैठक में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड (एक्सेस कंट्रोल) मार्ग के 4-लेन के काम को मंजूरी दी गई। इसमें  पेव्ड शोल्डर, दोनों तरफ दो-लेन सर्विस रोड और हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत निर्माण कार्य किया जाएगा। इसे 17 माह में पूरा किया जाएगा। यहां अतिरिक्त रोड बनाई जा रही है।  नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग कैबिनेट ने नर्मदापुरम-टिमरनी के बीच 72 किलो मीटर मार्ग के दो-लेन मय पेव्ड शोल्डर का हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत निर्माण कार्य स्वीकृत किया। इसके लिए भूमि-अर्जन सहित कुल 972.16 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।  उज्जैन रेलवे ओवरब्रिज बैठक में उज्जैन शहर के हरिफाटक रेलवे क्रॉसिंग पर 4-लेन 980 मीटर लंबाई के नवीन रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। इस परियोजना में अतिरिक्त 2 लेन सहित रैंप का कार्य किया जाएगा। 371 करोड़ की मंजूरी दे दी है। परियोजना पर भूमि-अर्जन सहित कुल 371.11 करोड़ रुपये व्यय होंगे।

बड़ा झटका! शरजील इमाम-उमर खालिद और अन्य आरोपी जेल में ही रहेंगे

नई दिल्ली फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे के 10 आरोपियों को मंगलवार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा। दंगों की कथित साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में अदालत ने शरजील इमाम, उमर खालिद जैसे आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। शरजील इमाम और उमर खालिद के अलावा मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की याचिकाओं को रद्द किया गया है और फिलहाल इन्हें जेल में ही रहना होगा। एक अन्य बेंच ने आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने आदेश पारित किया। वहीं, जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जमानत के खिलाफ क्या थीं दलीलें अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए दलील थी कि यह सिर्फ और सिर्फ दंगों का मामला नहीं है बल्कि एक ऐसा मामला है जहां दंगों की साजिश पहले से ही एक भयावह मकसद और सोचे-समझे षडयंत्र के साथ बनाई गई थी। अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह वैश्विक स्तर पर भारत को बदनाम करने की एक साजिश थी और केवल लंबी कैद जमानत का आधार नहीं हो सकती। उन्होंने दलील दी थी, 'अगर आप अपने देश के खिलाफ कुछ भी करते हैं, तो बेहतर होगा कि आप बरी होने तक जेल में ही रहें।' दंगों में हुई थी 53 लोगों की मौत उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 के दंगों के कथित ‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में यूएपीए और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। लंबे समय से लंबित थी याचिका शरजील इमाम, खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं 2022 से उच्च न्यायालय में लंबित थी और समय-समय पर विभिन्न पीठों द्वारा इन पर सुनवाई की गई है।  

रायपुर: राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार 2024-25 के लिए 64 शिक्षक चयनित

रायपुर शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्य एवं सेवाओं के लिए राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार वर्ष 2024-25 हेतु प्रदेशभर के कुल 64 शिक्षकों का चयन किया गया है। राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार अंतर्गत चयनित शिक्षकों को आगामी 5 सितम्बर शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार, चयनित शिक्षकों में प्राचार्य, प्राचार्य (एल.बी.), प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता (एल.बी.), सहायक शिक्षक (एल.बी.) सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं। पुरस्कार हेतु चयनित शिक्षकों में रायपुर जिले से प्रधान पाठक गोपाल राम यादव एवं सहायक शिक्षक एल.बी. श्रीमती कामिनी साहू, धमतरी से प्रधान पाठक श्रीमती किरण साहू एवं सहायक शिक्षक एल.बी. कु. प्रीति शांडिल्य का नाम शामिल है। इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला से प्रधान पाठक से श्रीमती प्रियंका गोस्वामी एवं व्याख्याता एल.बी. श्री समय लाल काठे, राजनांदगांव से प्राचार्य डॉ. शोभा श्रीवास्तव एवं प्रधान पाठक श्री मुन्हेलाल लिल्हारे, दंतेवाड़ा से प्रधान अध्यापक श्रीमती सुमन जॉर्ज एवं सहायक शिक्षक एल.बी. श्रीमती सुनीता अजीत, कबीरधाम से व्याख्याता श्री रमेश कुमार चंद्रवंशी एवं व्याख्याता श्रीमती कामिनी जोशी, सरगुजा से शिक्षक श्रीमती बंदना महथा एवं व्याख्याता श्रीमती अनिता मंदिलवार का नाम शामिल है। नारायणपुर जिला से शिक्षक एल.बी. श्री उमेश कुमार सलाम एवं प्रधान अध्यापक सुश्री सविता यादव, जशपुर से प्रधान पाठक श्रीमती सरिता नायक एवं प्रधान पाठक श्री प्रवीण कुमार पाठक, कोरिया से व्याख्याता/(प्रभारी प्रचार्य) श्री अमित लाल गुप्ता एवं जेल शिक्षक श्रीमती विवेक सिद्धकी का नाम शिक्षक सम्मान पुरस्कार के लिए चयन किया गया है।  इसी प्रकार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला से व्याख्याता एल.बी. श्री राजेश कुमार द्विवेदी एवं प्रधान पाठक श्रीमती मीना जायसवाल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई से प्रधान अध्यापक श्री किशोर कुमार शर्मा एवं सहायक शिक्षक एल.बी. श्री राजेश कुमार प्रजापति, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी से प्रधान पाठक श्रीमती संध्या साहू एवं व्याख्याता एल.बी. श्री संजय देवांगन का नाम शामिल है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला से शिक्षक एल.बी. श्रीमती चन्द्रमुखी मेहता, दुर्ग से शिक्षक एल.बी. श्री नरोत्तम कुमार साहू एवं श्रीमती शिक्षक एल.बी. श्रीमती खेमलता गोस्वामी, कोरबा से शिक्षक एल.बी. श्रीमती मधुलिका एवं प्रधान पाठक श्रीमती प्रिया दुबे, सूरजपुर से प्रधान पाठक श्रीमती रंजय कुमार सिंह एवं व्याख्याता एल.बी श्री प्रदीप कुमार जायसवाल, बलौदाबाजार-भाटापारा से शिक्षक एल.बी. श्री मोहन लाल वर्मा एवं व्याख्याता एल.बी. श्री जगदीश साहू, मुंगेली से व्याख्याता एल.बी. श्रीमती दुर्गा तिवारी एवं सहायक शिक्षक एल.बी. श्रीमती सुधारानी शर्मा, कोण्डागांव से प्रभारी प्राचार्य श्री मनोज कुमार डड़सेना एवं शिक्षक एल.बी. श्री शिवचरण साहू, रायगढ़ से सहायक शिक्षक एल.बी. श्री टिकेश्वर प्रसाद पटेल एवं प्रधान पाठक श्री नंद किशोर सतपथी का नाम शामिल है। सुकमा जिला से सहायक शिक्षक श्रीमती अंजु बारसे एवं शिक्षक एल.बी. श्री गंगाधर राना, गरियाबंद से सहायक शिक्षक एल.बी. श्री खोमन लाल सिन्हा एवं शिक्षक एल.बी. श्रीमती दिप्ती मिश्रा, सक्ती से शिक्षक एल.बी. श्री संजीव कुमार चंद्रवंशी एवं सहायक शिक्षक एल.बी. श्रीमती नीरा साहू, बालोद से व्याख्याता एल.बी. श्री नरोत्तम कुमार यदु एवं सहायक शिक्षक एल.बी. सुश्री एनुका सार्वा का नाम शामिल है। जांजगीर-चांपा जिला से व्याख्याता श्री अमृत लाल साहू एवं व्याख्याता एल.बी. श्रीमती प्रतीक्षा सिंह, बेमेतरा से शिक्षक एल.बी. श्रीमती सुनीता राजपूत एवं शिक्षक एल.बी. श्रीमती केवरा सेन, महासमुंद से व्याख्याता एल.बी. श्री जगदीश सिन्हा एवं व्याख्याता एल.बी डॉ. श्रीमती ज्योति किरण चंद्राकर, बिलासपुर से व्याख्याता एल.बी. श्रीमती शांति सोनी एवं प्रधान पाठक श्री शिव कुमार छत्रवाणी का नाम शामिल है। बस्तर से व्याख्याता श्रीमती सईदा खान एवं व्याख्याता/प्रधान अध्यापक श्रीमती देवश्री गोयल, उत्तर बस्तर कांकेर से व्याख्याता श्रीमती कुसुम जैन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से प्राचार्य श्रीमती आरती तिवारी एवं प्रधान पाठक एल.बी. कु. साबरा निशा, बीजापुर से प्रधान पाठक श्री जगदीश तोरेंम एवं व्याख्याता एल.बी. श्री अरूण कुमार सिंह का चयन राज्यपाल सम्मान समारोह के लिए किया गया है।

PM मोदी ने दिया करारा जवाब, बोले- मां राजनीति में नहीं थीं, फिर गाली क्यों?

नई दिल्ली बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के एक मंच से पीएम नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई थी। अब इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि यह देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। उन्होंने कहा, मां ही तो हमारा संसार होती है। मां ही हमारा स्वाभिमान होती है। इस समृद्ध परंपरा वाले बिहार में कुछ दिनों पहले जो हुआ, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से मेरी मां को गालियां दी गईं। ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि ये देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। इसके आगे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मुझे पता है… आप सबको भी, बिहार की हर माँ को ये देख-सुनकर कितना बुरा लगा है! मैं जानता हूं, इसकी जितनी पीड़ा मेरे दिल में है, उतनी ही तकलीफ मेरे बिहार के लोगों को भी है।’ पीएम मोदी ने कहा कि मेरी मां का तो राजनीति से कोई लेना-देना भी नहीं रहा है, फिर उन्हें गालियां क्यों दी गईं। पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इतनी सारी माताओं और बहनों के आगे मैं अपना दुख साझा कर रहा हूं ताकि यह पीड़ा आप माताओं और बहनों के आशीर्वाद से झेल पाऊं। पीएम मोदी ने कहा, ‘माताओं-बहनों आज से 20 दिन बाद नवरात्रि शुरू हो रही है। उसके 50 दिन बाद छठी मैया की पूजा होगी। छठ का पर्व मनाया जाएगा। मैं बिहार की जनता के सामने मां को गाली देने वालों से कहना चाहता हूं कि मोदी तो तुम्हें एक बार माफ कर भी देगा, लेकिन भारत की धरती ने मां का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं किया है। इसलिए आरजेडी और कांग्रेस को सात बहिनी से और छठी मैया से माफी मांगनी चाहिए।’ आरजेडी और कांग्रेस के नेता जहां भी जाएं, जिस गली में जाएं। उन्हें एक ही आवाज सुनाई देनी चाहिए कि मां को गाली नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे। इज्जत पर वार नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे। गाली देने वालों की सोच है- महिलाएं कमजोर होती हैं पीएम मोदी ने कहा कि देश की नारी का सशक्तीकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके जीवन की मुश्किलें कम करने के लिए एनडीए सरकार लगातार काम कर रही है। मैं आपको वादा करता हूं कि बिना थके और बिना रुके मैं काम करता रहूंगा। पीएम मोदी ने कहा कि माताओं को गाली देने वाले लोगों का यह मानसिकता रही है कि महिलाएं कमजोर होती हैं।  

MPCA में महाआर्यमन सिंधिया का दबदबा, निर्विरोध अध्यक्ष घोषित

इंदौर  मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) की कमान अब सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी के हाथों में आ गई है. 29 साल की उम्र में महानार्यमन सिंधिया ने एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालकर नया इतिहास रच दिया है. पदभार ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री और पूर्व अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित एमपीसीए के तमाम सदस्य मौजूद रहे. MPCA के चुनाव में महानआर्यमन को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है. इसे पहले 37 वर्ष की उम्र में माधवराव सिंधिया MPCA के अध्यक्ष बने थे. उनके बाद 35 वर्ष की उम्र में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमान संभाली. अब कमान सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी संभालेगी. माधवराव सिंधिया ने 37 साल की उम्र में संभाला पद माधवराव सिंधिया ने 37 साल की उम्र में जब MPCA अध्यक्ष का पद संभाला था, तब वे अपने वक्त के एक सक्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने मध्य प्रदेश में क्रिकेट को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई. उनके बाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस जिम्मेदारी को संभाला और अपने सक्रिय नेतृत्व से संगठन को नई दिशा दी.अब महानआर्यमन सिंधिया ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए 29 वर्ष की कम उम्र में MPCA अध्यक्ष बनकर अपने परिवार के गौरव को और बढ़ाया है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर 26 की उम्र में बने अध्यक्ष देश में सबसे युवा प्रदेश क्रिकेट संगठन अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर थे, जिन्होंने मात्र 26 वर्ष की उम्र में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का पद संभाला था. उन्होंने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ की अध्यक्षता करते हुए खेल को नए आयाम दिए. उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ ने बेहतर परिणाम हासिल किए और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. इससे पहले गोवा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष विपुल फड़के सबसे युवा माने जाते थे. वे 32 वर्ष की उम्र में यह पद संभाल रहे थे, उन्होंने इस पद पर रहते हुए गोवा में क्रिकेट के विकास में अहम भूमिका निभाई. अब महानआर्यमन सिंधिया 29 वर्ष की उम्र में यह मुकाम हासिल कर चुके हैं. इससे यह साफ जाहिर होता है कि भारतीय क्रिकेट संगठन में युवा नेतृत्व को अब अधिक अवसर मिल रहे हैं. अब महानआर्यमन सिंधिया ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए 29 वर्ष की कम उम्र में MPCA अध्यक्ष बनकर अपने परिवार के गौरव को और बढ़ाया है. उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि युवा नेतृत्व के लिए रास्ते खोलने की जरूरत है ताकि देश के खेल और खिलाड़ियों को बेहतर मौका मिल सके. अनुराग ठाकुर का नाम भी इस लिस्ट में महत्वपूर्ण है, जो अपने समय में देश के सबसे युवा प्रदेश क्रिकेट अध्यक्ष थे. उन्होंने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ की अध्यक्षता करते हुए खेल को नए आयाम दिए. उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ ने बेहतर परिणाम हासिल किए और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. विपुल फड़के भी गोवा क्रिकेट एसोसिएशन के सबसे युवा अध्यक्ष माने जाते थे. 32 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस पद पर रहते हुए गोवा में क्रिकेट के विकास में अहम भूमिका निभाई. लेकिन अब महानआर्यमन सिंधिया ने यह रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर सिंधिया परिवार का यह लगातार तीसरा दौर है. इससे यह भी पता चलता है कि परिवार में क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि और प्रतिबद्धता है. महानआर्यमन सिंधिया के नेतृत्व में MPCA से मध्य प्रदेश के क्रिकेट खिलाड़ियों को नए अवसर मिलेंगे और राज्य का क्रिकेट विकास और भी मजबूत होगा. युवा और ऊर्जा से भरपूर महानआर्यमन सिंधिया ने क्रिकेट संगठन में नए तरीके से सुधार और विकास की उम्मीद जगाई है. उनकी कम उम्र और आधुनिक सोच से MPCA के कार्यों में नई जान आएगी. इससे मध्य प्रदेश के क्रिकेट के स्तर में सुधार होगा और प्रदेश से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभर कर आएंगे. इस तरह, भारत में क्रिकेट संगठन के नेतृत्व में युवा नेताओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो देश के खेल क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का कारण बनेगी. महानआर्यमन सिंधिया की यह उपलब्धि न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत है. तीसरी पीढ़ी को मिली कमान आपको बता दें कि, क्रिकेट प्रशासन में सिंधिया परिवार का दशकों से दबदबा रहा है। सिंधिया परिवार का क्रिकेट की राजनीति से नाता तीन पीढ़ियों से है। स्वर्गीय माधवराव सिंधिया एमपीसीए की कमान संभाल चुके हैं। जबकि, महाआर्यमन से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस पद की कमान संभाल चुके हैं। ऐसे में अब युवा नेतृत्व को इसकी कमान सौंपी गई है। महाआर्यमन बने सबसे युवा अध्यक्ष, दादा-पिता का रिकॉर्ड तोड़ा महाआर्यमन सिंधिया 29 साल की उम्र में एमपीसीए के अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्होंने अपने दादा स्व. माधवराव सिंधिया और पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस मामले में पीछे छोड़ा है। अब तक एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष का रिकॉर्ड ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम था। लेकिन, ज्योतिरादित्य 35 साल की उम्र में अध्यक्ष बने थे। वहीं स्व. माधवराव सिंधिया ने 37 साल की आयु में पहली बार एमपीसीए के अध्यक्ष बने थे। गौरतलब है कि वर्तमान में महाआर्यमन सिंधिया जीडीसीए के उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश क्रिकेट प्रीमियर के चेयरमैन बने हैं।

हाईकोर्ट का आदेश: महाकाल मंदिर में प्रवेश का फैसला कलेक्टर करेंगे, पुरानी व्यवस्था बहाल

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री पर रोक और वीआईपी प्रवेश की अनुमति के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट का फैसला आ गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कलेक्टर के आदेश को सही माना है और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. यानी आम भक्तों को गर्भगृह में अभी प्रवेश नहीं मिलेगा और निर्णय लेने का अधिकार कलेक्टर के पास ही रहेगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार कलेक्टर के पास ही रहेगा। फिलहाल यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। इंदौर के वकील दर्पण अवस्थी ने जनहित याचिका लगाई थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को फैसला सुनाया। कोर्ट के निर्णय के अनुसार, जब तक कोई नया आदेश नहीं आता, गर्भगृह में प्रवेश व्यवस्था पूर्ववत बनी रहेगी, यानी आम भक्त गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और यह अधिकार केवल कलेक्टर के विवेक पर आधारित रहेगा। याचिका में व्यवस्था को बताया था भेदभावपूर्ण 18 अगस्त को इंदौर निवासी याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। एडवोकेट शास्त्री ने तर्क दिया था कि दूर-दराज से आने वाले आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता, जबकि प्रभावशाली लोगों को विशेष अनुमति मिल जाती है। यह व्यवस्था भेदभावपूर्ण और अनुचित है। वीआईपी कल्चर के खिलाफ दायर की गई थी याचिका दरअसल, इस तथाकथित 'वीआईपी कल्चर' को चुनौती देते हुए इंदौर के निवासी दर्पण अवस्थी ने 18 अगस्त को अपने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि देशभर से लाखों भक्त उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें केवल बाहर से ही दर्शन करना पड़ता है. वहीं वीआईपी लोगों को सीधे गर्भगृह में एंट्री मिल जाती है और वो परिवार सहित वहां जाकर पूजा-अर्चन करते हैं. याचिकाकर्ता ने इसे आम भक्तों के साथ भेदवाभ और अन्याय बताया था. वर्तमान व्यवस्था को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने एक-दो दिन में रिव्यू पिटीशन लगाने की बात कही है। उनका कहना है कि यह मामला महाकाल के लाखों आम भक्तों का है जोकि दूर-दराज से यहां आते हैं। कोर्ट में तर्क देते हुए अधिवक्ता शास्त्री ने गर्भगृह में प्रवेश की वर्तमान व्यवस्था को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया।  हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत बताकर रद्द की याचिका    हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सोमवार को इस याचिका पर फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने ये कहते हुए इस याचिका को रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता ने अपनी व्यक्तिगत समस्या को लेकर याचिका लगाई गई है. कोर्ट ने कहा, "मंदिर के गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलना चाहिए और किसे नहीं मिलना चाहिए ये उज्जैन कलेक्टर के विवेकाधिकार में है. इसपर कलेक्टर और मंदिर प्रशासन ही अंतिम फैसला लेंगे." यानी पहले जैसे व्यवस्था थी वही जारी रहेगी. इसका मतलब है कि अभी आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं याचिकाकर्ता इंदौर बैंच द्वारा याचिका खारिज होने पर तर्पण अवस्थी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की तैयारी में हैं. याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने बताया, "हाईकोर्ट ने याचिका को व्यक्ति विशेष का मामला बताकर खारिज कर दिया. जबकि ये व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है. ये याचिका उन सभी आम भक्तों के लिए थी जिन्हें मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलता, जबकि वीआईपी, नेता पुत्रों को बड़ी आसानी से प्रवेश मिल जाता है. कलेक्टर द्वारा भक्तों से भेदभाव किया जाता है. हम फैसला का स्वागत करते हैं, लेकिन हम इसको लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे."  2023 से गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक बता दें कि अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने भी याचिका का समर्थन किया था और कोर्ट से कहा था कि गर्भगृह दर्शन के लिए नीति बनाई जाए. महासंघ ने सुझाव दिया था कि चाहे शुल्क निर्धारित किया जाए या समय, लेकिन आम भक्तों को भी बाबा महाकाल के समीप जाने का अवसर मिलना चाहिए. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर 4 जुलाई 2023 से प्रतिबंध लगा हुआ है. हाल ही में कई नेता पुत्रों द्वारा जबरदस्ती बैरिकेडिंग फांदकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने के मामले भी सामने आए हैं.

468 अस्थायी शिक्षणेतर और 480 आउटसोर्सिंग पदों पर भर्ती करेगी योगी सरकार

योगी सरकार का उच्च शिक्षा में बड़ा कदम : तीन विश्वविद्यालयों में 948 नए पदों को मंजूरी 468 अस्थायी शिक्षणेतर और 480 आउटसोर्सिंग पदों पर भर्ती करेगी योगी सरकार  भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और कार्यात्मक व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी  शैक्षिक गुणवत्ता में भी होगी वृद्धि और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता  लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के तीन नवगठित विश्वविद्यालयों—गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (मुरादाबाद), मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय (मिर्जापुर) और मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय (बलरामपुर) में कुल 948 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसमें 468 अस्थायी शिक्षणेतर पद और 480 आउटसोर्सिंग पद शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन पदों के सृजन से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और कार्यात्मक व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। साथ ही शैक्षिक गुणवत्ता में वृद्धि होगी और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यूपी बढ़ रहा आगे  उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह निर्णय विश्वविद्यालयों को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार स्पष्ट किया है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा और रोजगार दोनों उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विश्वविद्यालयों में नए पदों का सृजन इसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो उच्च शिक्षा को सशक्त और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। 468 अस्थायी शिक्षणेतर पद प्रत्येक विश्वविद्यालय में 156 अस्थायी शिक्षणेतर पद सृजित किए गए हैं, जो 28 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेंगे और आवश्यकतानुसार समाप्त भी किए जा सकते हैं। इन पदों में फार्मासिस्ट, इलेक्ट्रिशियन, अवर अभियंता, आशुलिपिक, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक, लैब टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट, उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, वैयक्तिक सहायक, लेखाकार, प्रधान सहायक, चिकित्साधिकारी और स्टाफ नर्स जैसे पद शामिल हैं। इन पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, सीधी भर्ती, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया से की जाएगी। 480 आउटसोर्सिंग पद इसके अलावा, प्रत्येक विश्वविद्यालय में 160 पद वाह्य सेवा प्रदाता (आउटसोर्सिंग) के माध्यम से पूरे किए जाएंगे, जिससे कुल 480 पद बनते हैं। इनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर, स्वच्छकार, चौकीदार, माली, चपरासी, वाहन चालक और पुस्तकालय परिचर जैसे पद शामिल हैं। आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, श्रम विभाग और कार्मिक विभाग द्वारा जारी शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी नियुक्तियों में आरक्षण से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा।

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ से बदले प्रदेश के स्कूलों के हालात

बुनियादी सुविधाओं से स्मार्ट क्लास तक यूपी बना शिक्षा के कायाकल्प का साक्षी  ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ से बदले प्रदेश के स्कूलों के हालात योगी सरकार की पहल से प्राथमिक से लेकर माध्यमिक विद्यालय तक बने आधुनिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 19 मानकों पर 97 प्रतिशत संतृप्तिकरण हुआ पूरा  प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से 2295 माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारने को की गई है मैपिंग  2017 से पहले तक स्कूलों में टॉयलेट, पानी, बिजली और फर्नीचर तक का था अभाव  आज स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान से उज्ज्वल हो रहा देश का भविष्य  लखनऊ शिक्षक दिवस पर स्पेशल   उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक में व्यापक बदलाव करते हुए प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ ने परिषदीय विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों को नई पहचान दी है। ऑपरेशन कायाकल्प वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। इसका लक्ष्य परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधासंपन्न बनाना था। आज इस अभियान के तहत 97 प्रतिशत तक बुनियादी सुविधाओं का विकास पूरा हो चुका है। पहले जहां स्कूलों में टॉयलेट, पानी, बिजली और फर्नीचर तक का अभाव था, वहीं आज वे गेट युक्त बाउंड्री वॉल, टाइल्स युक्त शौचालय, पेंटेड परिसर और सोलर लाइट्स से युक्त विद्यालयों में तब्दील हो चुके हैं। नीति आयोग ने भी इसे देशभर के लिए अनुकरणीय मॉडल माना है। इसी तरह, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ की शुरुआत की है, जिसके तहत 27 मापदंडों पर 2295 विद्यालयों की मैपिंग की अवस्थापना स्थिति को बेहतर बनाने का कार्य चल रहा है।  ऑपरेशन कायाकल्प ने बदली तस्वीर योगी सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के सुधार लिए ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के बाद प्रदेश में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुए हैं। सभी विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, बालक, बालिका और दिव्यांग बच्चों के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय और मूत्रालय का निर्माण कराया गया है। मल्टीपल हैंड वाशिंग, कक्षा-कक्षों में टाइल्स, आधुनिक बोर्ड्स, स्वच्छ रसोई घर, भवनों का रंग रोगन, रैंप एवं रेलिंग की व्यवस्था, स्कूलों में विद्युत की व्यवस्था, वाटर सप्लाई, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, लाइब्रेरी, फर्नीचर और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से इन विद्यालयों को लैस किया गया है।  प्रोजेक्ट अलंकार से जर्जर भवन हुए आधुनिक इसी तरह माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत शैक्षणिक, सह शैक्षणिक, मूल अवस्थापना के लिए व्यापक पैमाने पर कार्य किया है। विद्यालयों में कक्षा-कक्ष, लैब, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, वाई-फाई, स्मार्ट क्लास और फर्नीचर की व्यवस्था की गई है। वहीं खेल का मैदान, ओपन जिम, बहुउद्देशीय हॉल, आर्ट एंड क्राफ्ट कक्ष, व्यावसायिक शिक्षा कक्ष और बैंड तथा साउंड सिस्टम उपलब्ध कराया गया है। मूलभूत अवस्थापना में प्रिंसिपल रूम, स्टाफ कक्ष, पेयजल, बालक, बालिका शौचालय, चहारदीवारी और कार्यालय कक्ष का निर्माण कराया गया है। अन्य अवस्थापना में बजली, बायोमेट्रिक मशीन, सीसीटीवी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोलर पैनल स्थापना, फायर इंस्ट्रूमेंट और साइकिल स्टैंड से सुसज्जित किया गया है।  2017 से पहले जर्जर थी पूरी शिक्षा व्यवस्था  2017 से पहले की स्थिति पर नज़र डालें तो अधिकांश विद्यालयों की हालत बेहद खराब थी। भवन जर्जर हो चुके थे और बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही थीं। इसके चलते विद्यालयों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही थी और शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। लेकिन योगी सरकार की प्राथमिकता शिक्षा को सर्वोच्च स्थान देने की रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों को गुणवत्ता आधारित, समान और समावेशी शिक्षा देना सरकार का दायित्व है। इसी दृष्टि से ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ जैसी योजनाएं न केवल स्कूलों को नया रूप दे रही हैं बल्कि करोड़ों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव भी रख रही हैं। आज गांवों के ये स्कूल केवल सरकारी भवन नहीं, बल्कि ग्राम सभा के सबसे सुंदर, सुरक्षित और सर्वसुविधा युक्त केंद्र बन चुके हैं। ग्रामीण अभिभावकों का भरोसा अब इन विद्यालयों पर और बढ़ा है। शिक्षा का यह कायाकल्प केवल स्कूलों की दीवारें नहीं बदल रहा, बल्कि प्रदेश का भविष्य गढ़ रहा है।