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मध्य प्रदेश में बाढ़ खतरा, इटारसी तवा डैम के गेट खुले, टीकमगढ़ में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

भोपाल  स्ट्रॉन्ग सिस्टम के एक्टिव होने से मध्य प्रदेश में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार को 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, धार, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है।। भोपाल,  इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है।सोमवार को भोपाल, रतलाम, दमोह, ग्वालियर समेत 26 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई।  नर्मदापुरम जिले के इटारसी में रुक-रुक कर तेज और रिमझिम बारिश हो रही है। जलस्तर बढ़ने पर तवा डैम के 3 गेट दो-दो फीट की ऊंचाई तक खोले गए हैं। यह इस सीजन में दूसरी बार है, जब बांध के गेट खोले गए हैं। डैम के एसडीओ एनके सूर्यवंशी के अनुसार, डैम से 10,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसका जलस्तर 1164.50 मीटर पर बना हुआ है। इससे पहले सोमवार देर शाम टीकमगढ़ में 20 लोग धसान नदी के बरा घाट पर फंस गए थे। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने उनको सुरक्षित रेस्क्यू किया। ये सभी कुडीला थाना क्षेत्र के निवासी हैं। धसान नदी में रेत का अवैध खनन करने गए थे। इसी दौरान जलस्तर बढ़ने से फंस गए थे। मौसम विभाग के मुताबिक, जिन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है, उनमें उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, धार, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। दमोह में सबसे ज्यादा 2.6 इंच पानी गिरा पिछले 24 घंटे के दौरान मध्यप्रदेश के 32 से अधिक जिलों में बारिश का दौर रहा। सबसे ज्यादा दमोह में 2.6 इंच पानी गिर गया। रतलाम, श्योपुर-दतिया में डेढ़ इंच, ग्वालियर में सवा इंच, गुना में 1 इंच और भोपाल में आधा इंच बारिश हो गई। सिवनी, बैतूल, मंडला, रायसेन, छतरपुर, शिवपुरी, टीकमगढ़, सीधी, इंदौर, सागर, नर्मदापुरम, उमरिया, जबलपुर, खंडवा, सतना, छिंदवाड़ा, बालाघाट, नरसिंहपुर, भिंड, निवाड़ी, मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर, विदिशा समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा। दमोह में 2.3 इंच पानी गिरा सोमवार को सबसे ज्यादा दमोह में 2.3 इंच पानी गिर गया। रतलाम-दतिया में डेढ़ इंच, ग्वालियर में पौन इंच और भोपाल में आधा इंच बारिश हो गई। बैतूल, इंदौर, पचमढ़ी, गुना, शाजापुर, भिंड, निवाड़ी, छतरपुर, बालाघाट, मंदसौर, सतना, नर्मदापुरम, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, जबलपुर, नौगांव, सागर, सिवनी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, बालाघाट में भी बारिश का दौर बना रहा। इस लिए हो रही तेज बारिश मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो ट्रफ गुजर रही हैं। इस वजह से सोमवार को कई जिलों में तेज बारिश का दौर रहा। मंगलवार को भी सिस्टम का असर देखने को मिलेगा। प्रदेश में बारिश का कोटा फुल मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 37.8 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की 102 प्रतिशत है। वहीं, अब तक 31.2 इंच बारिश होनी थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। इस बार बारिश के मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 56 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 24 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 54.2 इंच बारिश हो चुकी है। श्योपुर में साढ़े 52.4 इंच, अशोकनगर में 51.8 इंच और रायसेन में 51.5 इंच पानी गिरा है। वहीं, सबसे कम बारिश वाले 5 जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। इंदौर में सबसे कम 21.3 इंच बारिश हुई है। शाजापुर में 21.6 इंच, खरगोन में 22.6 इंच, खंडवा में 23 इंच और बड़वानी में 24.2 इंच पानी गिरा है।  रतलाम में गांव डूबा, मुरैना में तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार मानसून ट्रफ की एक्टिविटी इस समय प्रदेश में है। सोमवार को सबसे ज्यादा दमोह में 2.3 इंच पानी गिर गया। रतलाम-दतिया में डेढ़ इंच, ग्वालियर में पौन इंच और भोपाल में आधा इंच बारिश हो गई। बैतूल, इंदौर, पचमढ़ी, गुना, शाजापुर, भिंड, निवाड़ी, छतरपुर, बालाघाट, मंदसौर, सतना, नर्मदापुरम, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, जबलपुर, नौगांव, सागर, सिवनी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, बालाघाट में भी बारिश का दौर बना रहा। मुरैना के अंबाह में तिरपाल ढांककर अंतिम संस्कार किया गया। दमोह में एक मकान गिर गया। मलबे में दबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। उसकी पत्नी घायल है, जिसे अस्पताल ले जाया गया। भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश जारी रही। रतलाम के धोलावाड़ डैम के तीन गेट खोलने पड़े। पलसोड़ा गांव पानी में पूरी तरह डूब गया। लोग छतों पर चढ़कर बैठे रहे। उसरगार और अमलेटा गांव के बीच नाले की पुलिया धंसने से ट्रैफिक रुक गया। उपलई गांव में एक कार पलट गई। ग्रामीणों ने कार सवार लोगों को बाहर निकाला। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     वर्तमान में मानसून ट्रफ़ माध्य समुद्र तल परम गंगानगर, पिलानी, दतिया, सतना, डाल्टनगंज, दीघा से होकर पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और संलग्न म्यांमार तट पर माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर की ऊंचाई पर सक्रिय है, जो ऊँचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुक रहा है।     24 घंटों में उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर-पश्चिम राजस्थान और निकटवर्ती क्षेत्रों पर माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय है।     एक ट्फ़ उत्तर-पश्चिम राजस्थान और निकटवर्ती क्षेत्रों पर बने चक्रवातीय परिसंचरण से, उत्तर एमपी, दक्षिण यूपी होकर झारखंड तक माध्य समुद्र तल से 3.1 किमी की उंचाई पर विस्तृत है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर-पश्चिम एमपी और निकटवर्ती क्षेत्रों पर माध्य समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय उपरोक्त ट्रफ़ में विलीन हो गया है। 5 सितंबर तक जारी रहेगा वर्षा का दौर 2 सितंबर: राजगढ़, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, धार, रतलाम, उज्जैन, आगर, गुना, शिवपुरी, अनुपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी में भारी वर्षा, झंझावत और वज्रपात। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगौन, बड़वानी, … Read more

फैमिली बिजनेस के लिए ट्रंप ने भारत से दोस्ती की बलि दी: पूर्व NSA का बड़ा दावा

नई दिल्ली भारत के साथ टैरिफ वॉर छेड़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही मुल्क में घिर रहे हैं। अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन का कहना है कि ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ डील के कारण भारत से संबंधों को कुर्बान कर दिया। खास बात है कि ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है। जबकि, पाकिस्तान को राहत दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुलिवन ने कहा, 'दशकों से अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने के लिए काम किया है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जो ऐसा देश है कि जिसके साथ तकनीक, हुनर, अर्थव्यवस्था और चीन के बदलते रुख का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर पहले से ज्यादा प्रगति हुई थी। भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए किया है काम सुलिवन ने एक पॉडकास्ट में कहा, "दशकों से द्विपक्षीय आधार पर अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ अपने संबंध बनाने के लिए काम किया है। भारत एक ऐसा देश जिसके साथ हमें तकनीक, प्रतिभा, अर्थशास्त्र और कई अन्य मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए और चीन से इस रणनीतिक खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। और हम इस मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं।" ट्रंप ने परिवारिक बिजनेस के लिए भारत को किया दरकिनार उन्होंने कहा, "अब मुझे लगता है कि पाकिस्तान के ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण, ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम है क्योंकि एक मजबूत अमेरिका-भारत संबंध हमारे हितों की पूर्ति करता है। लेकिन दुनिया के हर दूसरे देश की कल्पना कीजिए, जर्मनी, जापान, कनाडा, आप उसे देखते हैं और कहते हैं कि कल हम भी ऐसा कर सकते हैं।" अमेरिका पर दोस्तों को भी भरोसा नहीं सुलिवन ने कहा कि भारत के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके इस विचार को और पुष्ट करता है कि आपको अमेरिका के खिलाफ बचाव करना होगा। उन्होंने कहा, "दुनिया भर के हमारे सभी मित्र और देश यह तय कर चुके हैं कि वे किसी भी रूप में अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते। यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है।" भारत के साथ जो हो रहा, उसका प्रत्यक्ष प्रभाव सुलिवन ने कहा, "हमारा वचन ही हमारा बंधन होना चाहिए। हमें अपनी बात पर खरा उतरना चाहिए। हमारे मित्रों को हम पर भरोसा करना चाहिए और यही हमारी हमेशा से ताकत रही है। और भारत के साथ अभी जो हो रहा है, उसका न केवल बहुत बड़ा प्रत्यक्ष प्रभाव है, बल्कि दुनिया भर में हमारे सभी रिश्तों और साझेदारियों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है।" भारत और पाकिस्तान पर टैरिफ में अंतर ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और रूसी तेल खरीद के चलते जुर्माना भी ठोका था। बाद में उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया, जिसके बाद कुल टैरिफ 50 प्रतिशत पर पहुंच गया। वह लगातार आरोप लगाते रहे कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। जबकि, भारत ने भी साफ किया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूस के साथ व्यापार करते हैं। खास बात है कि ट्रंप सरकार ने पाकिस्तान पर पहले 29 फीसदी जवाबी टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया। पारिवारिक लोभ ने इंडिया-अमेरिका के संबंधों खत्म कर दिया उन्होंने आगे कहा, "अब मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है. यह एक बड़ा रणनीतिक झटका है क्योंकि एक मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी हमारे हितों की रक्षा करता है." बता दें कि इस्लामाबाद ने न केवल ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया, बल्कि उनके परिवार और करीबी लोगों को अपनी नई पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल में भी शामिल किया है. पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद ही ट्रंप के परिवार द्वारा समर्थित वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. सुलिवन सहित कई विशेषज्ञों ने ट्रंप परिवार के पाकिस्तानी बिजनेस में शामिल होने को उनके पाकिस्तान झुकाव से जोड़कर देखा है. भारत के साथ ट्रंप के संबंधों को बिगाड़ने पर सुलिवन ने कहा, "अगर हमारे सहयोगी यह निष्कर्ष निकालते हैं कि वे किसी भी तरह, किसी भी रूप में हम पर भरोसा नहीं कर सकते, तो यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है." सुलिवन ने कहा, "भारत के साथ जो हो रहा है, उसका दुनिया भर में हमारे सभी संबंधों और साझेदारियों पर सीधा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा." ट्रंप के पाकिस्तान प्रेम की वजह समझिए बता दें कि पाकिस्तान ने 26 अप्रैल को वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल (WLF ) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल एक ऐसी कंपनी है जिसमें ट्रंप के परिवार, जिसमें उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, और दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं, की 60% हिस्सेदारी है. WLF के होमपेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति के एक भव्य चित्र के साथ "डोनाल्ड जे ट्रंप से प्रेरित" शब्द को प्रमुखता से दिखाया गया है.  वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल एक विकेन्द्रीकृत वित्तीय परियोजना और एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है जिसकी स्थापना 2024 में हुई थी. यह सौदा पाकिस्तान सरकार द्वारा क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन को कानूनी बनाने के संकेत के तुरंत बाद हुआ है. इस डील के बाद इस कंपनी के लिए पाकिस्तान में पैसे कमाने के रास्ते खुल जाएंगे. विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों का प्रयास ध्वस्त अमेरिका के ही एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने एक बार फिर से ट्रंप की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप की नीतियों ने भारत को एक बार फिर से रूस के पाले में जाने को मजबूर किया है. उन्होंने कहा है कि पश्चिम ने दशकों तक भारत को सोवियत संघ/रूस के साथ शीत युद्ध के लगाव से दूर करने की कोशिश की है और चीन से पैदा होने वाले खतरे के प्रति भारत को आगाह किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों के प्रयासों को ध्वस्त कर … Read more

पर्सनल कानूनों की आड़ में बाल विवाह नहीं चलेगा, सभी धर्मों पर लागू होना चाहिए अधिनियम: भुवन ऋभु

पर्सनल कानूनों की आड़ में जारी बाल विवाह की प्रथा पर रोक लगे और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सभी धर्मों व संप्रदायों पर समान रूप से लागू हो :  भुवन ऋभु भोपाल जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल अधिकारों की सुरक्षा में मध्य प्रदेश अग्रिम मोर्चे पर है और इस राज्य के पास बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने की राष्ट्रीय लड़ाई के नेतृत्व की पूरी क्षमता व संभावना है।  मध्य प्रदेश की सात करोड़ तीस लाख की आबादी में 40 प्रतिशत हिस्सा बच्चों का है। ऐसे में राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती है और इसने निर्णायक कदम उठाए हैं। बाल विवाह, ट्रैफिकिंग और यौन हिंसा की चुनौती से निपटने के लिए सरकार और नागरिक समाज ने साथ मिलकर तेजी से कदम उठाए हैं।      देश के 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग से अप्रैल 2023 से अगस्त 2025 के बीच मध्य प्रदेश के 41 जिलों में 36,838 बाल विवाह रुकवाए, ट्रैफिकिंग के शिकार 4,777 बच्चों को मुक्त कराया और यौन शोषण के शिकार 1200 से अधिक पीड़ित बच्चों की मदद की।  नागरिक समाज संगठनों के पुलिस, अधिवक्ताओं, बाल कल्याण समितियों और समुदायों के साथ तालमेल व समन्वय से काम करने के इस अनूठे माडल ने बच्चों की सुरक्षा की राज्य की क्षमता को मजबूती दी है।मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य था जिसने बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया था। ऋभु ने कहा कि सरकार को यही संकल्प बाल विवाह के खिलाफ भी दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) एक धर्मनिरपेक्ष कानून है जो बच्चों की सुरक्षा के मकसद से बनाया गया था और इसे हर हाल में धार्मिक विश्वासों व पर्सनल लॉ पर तरजीह मिलनी चाहिए।    हाल ही में कुछ उच्च न्यायालयों के फैसलों जिसमें पीसीएमए पर पर्सनल लॉ को तरजीह दी गई थी, का जिक्र करते हुए भुवन ऋभु ने कहा कि मध्य प्रदेश को अगुआई करते हुए इसे सभी के लिए बाध्यकारी बनाना चाहिए।  भोपाल में  एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भुवन ऋभु ने कहा, “सैद्धांतिक रूप से बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम किसी भी पर्सनल लॉ, प्रथा या संहिता से ऊपर है। मध्य प्रदेश सरकार को इस पर अमल की अगुआई करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून बगैर किसी समझौते के हर बच्चे की हिफाजत करे।”  भुवन ऋभु वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन से ‘मेडल ऑफ ऑनर’ से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय अधिवक्ता हैं। वे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन की वैश्विक पहल जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड (जेसीडब्ल्यू) के भी अध्यक्ष हैं। जेसीडब्ल्यू दुनियाभर के अधिवक्ताओं, जजों और न्यायविदों को एक मंच पर लाता है ताकि कानूनी सुधारों व कानून पर अमल के जरिए बच्चों की सुरक्षा को मजबूती दी जा सके। बेस्टसेलर किताब ‘व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन: टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज’ के लेखक भुवन ऋभु ने कहा, “बच्चों की वास्तविक सुरक्षा व संरक्षण तभी संभव है जब कानून एक मजबूत निवारक उपाय का काम करे।”    उन्होंने कहा, “अप्रैल 2023 से जुलाई 2025 के बीच महज इन दो सालों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के कार्यों से यह साबित होता है कि यदि कानून को उसके उद्देश्य और तात्कालिकता के साथ लागू किया जाए तो बच्चे वास्तव में सुरक्षित होंगे। देश में 3,74,000 बाल विवाह रोक कर, ट्रैफिकिंग के शिकार 1,00,000 से अधिक बच्चों को मुक्त करा कर, यौन शोषण के शिकार 34,000 से भी ज्यादा बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कर और 63,000 से भी ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर भारत ने यह साबित किया है कि हम एक ऐसा राष्ट्र बन सकते हैं जहां बच्चों के खिलाफ अपराध करके कोई कानून से नहीं बच पाएगा। यहां तक कि साइबर जगत में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण के 1,000 से अधिक मामले दर्ज कर हमने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून का शासन हर बच्चे की सुरक्षा करेगा और हर जगह करेगा।” हालांकि मध्य प्रदेश में बाल विवाह की दर 23.1 है जो राष्ट्रीय औसत 23.3 के मुकाबले मामूली कम है लेकिन कुछ जिलों में स्थिति गंभीर है। जैसे राजगढ़ में बाल विवाह की दर 46.0, श्योपुर में 39.5, छतरपुर में 39.2, झाबुआ में 36.5 और आगर मालवा जिले में 35.6 प्रतिशत है। कानून पर सख्ती से अमल के अभाव में बाल विवाह से बच्चियों का पढ़ाई छोड़ना और उनका शोषण व गरीबी के अंतहीन दुष्चक्र में फंसना जारी रहेगा।  मध्य प्रदेश में जेआरसी नेटवर्क के 17 सहयोगी संगठन पिछले दो वर्षों से राज्य के 41 जिलों में काम कर रहे हैं। यह नेटवर्क बाल विवाह, बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल यौन शोषण और बाल श्रम की रोकथाम के लिए जागरूकता के प्रसार और कानूनी हस्तक्षेप उपायों की दोहरी रणनीति पर काम करता है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ‘चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया’ अभियान के सहयोग में भी अग्रिम मोर्चे पर है जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत से बाल विवाह का खात्मा है।    बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 बाल विवाह पर पूरी तरह पाबंदी लगाता है। यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के को बच्चे के तौर परिभाषित करता है। इस कानून के तहत बाल विवाह को प्रोत्साहित करने या उसमें किसी भी तरह का सहयोग करने जैसे बारात में शामिल मेहमानों, हलवाई, सजावट करने वाले, बैंड वाले या घोड़ी वाले पर भी सजा व जुर्माने का प्रावधान है।

इनकम टैक्स का बड़ा कदम: भोपाल के साइंस हाउस पर कई शहरों में रेड

भोपाल आयकर विभाग ने मंगलवार सुबह भोपाल, इंदौर और मुंबई सहित कई शहरों में एक साथ कार्रवाई करते हुए तीस से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई भोपाल के एमपी नगर स्थित साइंस हाउस और इंदौर में उससे जुड़े सहयोगी संस्थानों पर हो रही है। सूत्रों के अनुसार छापे के दौरान टैक्स चोरी से जुड़े भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी विभागीय टीम जांच कर रही है।इस दौरान साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड के संचालक जितेंद्र तिवारी और उनके सहयोगियों से पूछताछ भी की जा रही है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर कर चोरी के खुलासे से जुड़ी है। टीम सुबह करीब 5 बजे साइंस हाउस पहुंची। फिलहाल अफसर, इसके संचालक जितेंद्र तिवारी और उनके सहयोगी सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहित गुप्ता, कंसल्टेंट दिनेश बारोलिया, शिखा राजोरिया से पूछताछ कर रहे हैं। मेडिकल सर्जिकल कारोबार से जुड़ा मामला सूत्रों के मुताबिक यह रेड मेडिकल सर्जिकल उपकरणों का कारोबार करने वाले राजेश गुप्ता से संबंधित है। राजेश गुप्ता का मुख्य ऑफिस साइंस हाउस ग्रुप बिल्डिंग में ही है, जहां अधिकारी कागज़ात और अकाउंट से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। उनके कारोबार से जुड़े कई पहलुओं को आयकर विभाग खंगाल रहा है। कारोबारी के घर पर भी छापा सिर्फ ऑफिस ही नहीं, बल्कि राजेश गुप्ता के निजी आवास को भी इस कार्रवाई में शामिल किया गया। विभाग की एक टीम सीधे लालघाटी स्थित पंचवटी पार्क कॉलोनी में उनके घर पहुंची। वहां भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और टीम ने भीतर जाकर तलाशी अभियान शुरू किया। दोनों जगहों पर अलग-अलग टीमें दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। इलाके में मची सनसनी और लोगों की प्रतिक्रिया स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह-सुबह अचानक पांच से अधिक गाड़ियां और भारी फोर्स देखकर वे हैरान रह गए। कई लोग यह देखने के लिए रुक गए कि आखिर इतनी भारी सुरक्षा और अधिकारी किस मकसद से आए हैं। धीरे-धीरे खबर फैलते ही पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई कि यह कार्रवाई किसी बड़े कारोबारी से जुड़ी है। अभी तक आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल आयकर विभाग की ओर से इस रेड को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि बिल्डिंग और घर पर छापामारी का असली कारण क्या है। हालांकि, अधिकारियों ने बिल्डिंग के भीतर मौजूद दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड और अन्य कागजात की गहराई से जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस कार्रवाई से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साइंस हाउस का मेन ऑफिस भोपाल में गौतम नगर के मकान नंबर सी-25 में 1994 से चल रहा है। कंपनी देशभर में मेडिकल इक्विपमेंट्स की सप्लाई करती है। डायग्नोस्टिक सर्विस भी देती है। पैथालॉजी लैब और निजी अस्पताल की भी सेवाएं भी उपलब्ध कराती हैं।

एमवाय अस्पताल में NICU में घुसे बड़े चूहे, नवजातों के हाथ कुतरे

इंदौर.  इंदौर शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल MYH में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अस्पताल के NICU वार्ड में 2 नवजात बच्चे भर्ती थे. चूहों ने दोनों शिशुओं को हाथ को बुरी तरह कुतर डाला. बताया जा रहा है कि दोनों बच्चों का जन्म कुछ ही दिन पहले हुआ था. इसके बाद दोनों को NICU में एडमिट किया गया था. चूहे ने रविवार को पहले एक बच्चे को जख्मी किया था. फिर उसका इसका इलाज शुरू किया गया. फिर सोमवार को भी चूहे ने एक दूसरे नवजात को काट लिया. सूत्रों की मानें तो अस्पताल कैंपस में लंबे समय से चूहों को लेकर शिकायतें सामने आती रही है. NICU यूनिट भी चूहों को देखा गया है. मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन भी एक्टिव हो गया. अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल की तैयारी शुरू की गई है. NICU में भी चूहों को रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है. दोनों बच्चों का इलाज जारी मामला सामने आने के बाद जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया. घटना की जानकारी डॉक्टरों ने फौरन सीनियर स्टाफ को दी. फिर सीनियर डॉक्टरों की टीम फौरन पहुंची और बच्चों की जांच की गई. फिलहाल दोनों नवजातों का इलाज किया जा रहा है. डॉक्टरों की टीम बच्चों के हेल्थ को मॉनिटर कर रहे हैं. सीनियर डॉक्टर्स भी NICU में पहुंचे स्टाफ ने तुरंत संबंधित डॉक्टरों को सूचना दी। इस बीच सीनियर डॉक्टर्स यूनिट में पहुंचे और बच्चों की जांच की। उन्होंने तत्काल एचओडी डॉ. ब्रजेश लाहोटी को फोन पर घटनाक्रम बताया। दरअसल डॉ. लाहोटी अभी छुट्टी पर हैं। डॉक्टरों ने उन्हें दोनों बच्चों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद डॉ. लाहोटी ने सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव को जानकारी दी। स्टाफ को सतर्कता बरतने को कहा डॉ. लाहोटी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पूरे अस्पताल और आसपास चूहों की काफी भरमार है। दोनों नवजातों का ट्रीटमेंट चल रहा है। विशेष तौर पर ध्यान रखा जा रहा है। स्टाफ को सतर्कता बरतने के लिए कहा है। साथ ही यूनिट में चूहों की आवाजाही बंद करने के इंतजाम किए जा रहे हैं। सुपरिटेंडेंट बोले- पांच साल पहले हुआ था पेस्ट कंट्रोल उधर, डॉ. अशोक यादव (सुपरिटेंडेंट) अभी भोपाल में है। उन्होंने बताया कि मरीज के परिजन खाद्य सामग्री लेकर वार्ड तक ले आते हैं। इस कारण चूहों की संख्या बढ़ रही है। पांच साल पहले अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल किया गया था। इसके बाद अब फिर चूहों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खास बात यह कि परिजन घबरा न जाए, इसलिए अभी उन्हें बताया नहीं गया है। सभी नवजातों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। डीन ने स्टाफ को लगाई फटकार नवजात के हाथों को चूहों द्वारा कुतरने के मामले में सोमवार रात अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने NICU का दौरा किया। उन्होंने स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई और नवजातों की हालत जानी। दैनिक भास्कर द्वारा मामले का खुलासा करने के बाद अस्पताल में हड़कंप मचा है। जिन नवजातों के हाथों को चूहे ने कुतरा है उनके परिवार को अभी बताया नहीं गया है। साथ ही दूसरी मंजिल स्थित यूनिट में बाहरी लोगों की एंट्री रोक दी गई है।  

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

 बाढ़ प्रभावितों का हाल जानने उनके बीच पहुँचे मुख्यमंत्री साय: अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया हवाई और जमीनी सर्वेक्षण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा और बस्तर का हवाई सर्वेक्षण एवं जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुँचना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता तथा तत्परता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा के चूड़ीटिकरा पारा में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था निरंतर बनी रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके पुनर्वास के कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों में सभी जरूरी व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को राशन, बर्तन और कपड़े जैसे आवश्यक सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को आवश्यकता अनुसार मकान की मरम्मत अथवा नए मकान निर्माण के लिए सहायता राशि समय पर देने के निर्देश दिए। साय ने कलेक्टर एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को बाढ़ से हुई फसल क्षति, पशुधन हानि सहित अन्य नुकसानों का शीघ्र आंकलन कर प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कठिनाई अवश्य लाती हैं, परंतु प्रशासनिक तत्परता और जनसहयोग से इन कठिनाइयों का समय पर समाधान संभव है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष देखभाल की जाए तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य शिविर का जायजा लिया मुख्यमंत्री साय ने यहाँ लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल टीम से दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती और मरीजों को दी जा रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए यह भी पूछा कि क्या वे प्रशासन की मदद से संतुष्ट हैं। प्रभावितों ने जिला प्रशासन के त्वरित सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। साय ने बाढ़ प्रभावितों की स्वास्थ्य जांच, बीमारों के उपचार और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता के बारे में मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ प्रभावितों को शिविर में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ के बाद संभावित उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित मौसमी बीमारियों पर निरंतर निगरानी रखने और बचाव हेतु पेयजल स्रोतों का अनिवार्य रूप से क्लोरीनेशन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आमजन को पीने के शुद्ध पानी का उपयोग करने, स्वच्छता एवं साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को प्रभावित वार्डों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन रायपुर में CM विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत इंतजामों की समीक्षा बैठक की दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक : स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश रायपुर दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक:स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई। बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।

अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर FIR, लेखपाल-नायब तहसीलदारों ने धरना दिया

लखनऊ  सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर ही FIR लाद दी गई । सरकारी कर्मचारियों पर हुई एफआईआर के विरोध में नगर निगम मुख्यालय पर लेखपालों और नायब तहसीलदारों ने धरना दिया । मांग रखी गई है कि एफआईआर निरस्त कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने चेतावनी भी दी कि जब तक एफआईआर वापस नहीं होगी, तब तक सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी नहीं करेंगे। पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी। धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें – डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए। – अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे। – एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो। – कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सबके साथ, सबके विकास के लिए सबके प्रयासों एवं सबको विश्वास में लेकर बढ़ रहे हैं आगे

प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों तक हेलीकॉप्टर से पहुंचाएंगे पर्यटकों को कानून-व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, असामाजिक तत्वों का करेंगे सफाया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश कई मामलों में देश में अव्वल है। प्रदेश को और आगे ले जाना है। हमारी सरकार खेती-किसानी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। हमारी सरकार सबके साथ और सहयोग से सबके विकास के लिए साझा प्रयासों एवं सबको पूरे विश्वास में लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल में मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित 'इमर्जिंग बिजनेस कॉन्क्लेव (भोपाल चैप्टर)' में मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कान्क्लेव में मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में विस्तार से चर्चाकर प्रदेश के नवनिर्माण एवं बेहतरी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद में कहा कि हम प्रदेश के किसानों की जिंदगी बेहतर बनाना चाहते हैं। इसीलिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन से दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक खेती के प्रोत्साहन और किसानों को सम्मान निधि देकर उनके जीवन में स्वावलंबन लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग रोजाना नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना हो रही है। इससे हमारे युवाओं को रेाजगार भी मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन होना है। इससे पहले बुधवार, 3 सितम्बर को नई दिल्ली में पीएम मित्रा पार्क में निवेश के लिए इच्छुक निवेशकों के साथ मीटिंग एवं वन-टू-वन चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन सहित मेडिकल टूरिज्म के साथ फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ टूरिज्म की ओर स्पेशल फोकस किया जा रहा हैं। प्रदेश के 13 प्रमुख तीर्थस्थानों में स्थायी प्रकार के निर्माण कार्यों एवं नियमित प्रबंधन कर इनका विकास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमहाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में तेजी से टूरिज्म बढ़ा है। वर्ष 2024 में करीब 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आए। इसी से प्रेरणा लेकर हमारी सरकार अब प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को हेलीकाप्टर के जरिए पहुंचाने का प्रबंध कर रही है। बहुत जल्द हम प्रदेश में इसकी शुरूआत करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का दिल है। मध्यप्रदेश की देश में केंद्रीय स्थिति का हम समुचित लाभ उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भरपूर लैंड बैंक, सरप्लस बिजली और मजबूत अधोसंरचना है। मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में बड़ी मात्रा में निवेश लाने के लिए हमने कई अप्रासंगिक कानून बदले हैं। उद्योग लगाने के लिए शासकीय अनुमतियां भी कम से कम कर दी हैं। हम निवेशकों के हित में 18 नई औद्योगिक नीतियां भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। असामाजिक और गुंडा तत्वों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। कानून को अपने हाथ में लेने वाले ऐसे तत्वों का प्रदेश से सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम राज्य की बेहतरी के लिए नए फैसले लेने में पीछे नहीं हटेंगे। लोकलुभावन वादों की जगह हम जनहित के निर्णयों पर तेजी से आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद कार्यक्रम में एक निजी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे हाईजीन प्रोग्राम के पोस्टर्स का विमोचन किया और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले समाजसेवियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े, मीडिया समूह के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारी/प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

जमीन अधिग्रहण की खबर से खरीदारों को झटका, पश्चिम रिंग रोड का नया विवाद

इंदौर प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड में नया पेच आ गया है। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंगरोड के लिए जमीन अधिग्रहण करते हुए जिम्मेदारों ने एक वैध कालोनी को भी अधिग्रहण की सूची में शामिल कर लिया। कॉलोनी की जमीन को कृषि भूमि मानकर अवार्ड की तैयारी भी कर ली गई। कॉलोनी के प्लाटधारकों को नोटिस जारी हुआ न ही उनका पक्ष सुना गया। मंहगे दाम पर प्लाट खरीदने वालों को कॉलोनी की जमीन अधिग्रहण की जानकारी लगी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई। 70 से ज्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुईं। सोमवार को इन सभी में एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।   मामला देपालपुर तहसील के मोहना और बेटमाखुर्द गांव में आने वाली नेचुरल वैली कॉलोनी का है। इस कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों के संघर्ष की कहानी भी अजीब है। कॉलोनी विकासकर्ता और उनके मार्केटिंग एजेंट ने लोगों से प्लाट के पैसे तो लिए लेकिन वे रजिस्ट्री से मुकर गए। प्लाट खरीदने वालों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर की। लंबी जद्दोजहद के बाद इन प्लाटों की रजिस्ट्रियां हो सकीं। शासन ने रजिस्ट्री के वक्त प्रति वर्गफीट के हिसाब से स्टाम्प शुल्क भी खरीदारों से वसूला। रजिस्ट्री के बाद खरीदार यह सोचकर खुश थे कि आखिर उनका संघर्ष अंजाम तक पहुंच गया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, दूसरी परेशानी उनका इंतजार कर रही थी। प्लाटों की रजिस्ट्री के कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पश्चिम रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमियों के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। नेचुरल वैली कॉलोनी को भी अधिग्रहण की जाने वाली सूची में शामिल किया गया। विडंबना यह कि प्लाट मालिकों को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना में स्वामी ही नहीं माना गया बल्कि उस विकासकर्ता को जिसने रजिस्ट्री खरीदारों के नाम की थी उसे स्वामी माना गया।   आवासीय कॉलोनी को प्राधिकरण मान रहा कृषि भूमि प्लाट खरीदारों की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि यह वैध आवासीय कालोनी है। विधिवत अलग-अलग विभागों से अनुमति प्राप्त की गई थी, बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कालोनी की जमीन को कृषि भूमि मान रहा है। जिम्मेदारों ने यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की कि अधिग्रहित की जा रही भूमि आवासीय या कृषि। प्लाट स्वामियों ने प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति भी जताई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली। यह है पश्चिम रिंगरोड प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड 64 किमी लंबा है। यह शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनया जाना है और इसका निर्माण दो हिस्से में करने की योजना है। एक हजार करोड़ रुपये मुआवजा पश्चिम रिंगरोड में इंदौर और धार जिलों की जमीन आ रही है। इंदौर जिले की तीन तहसील और धार जिले की एक तहसील इसमें शामिल है। पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही जमीनों के लिए केंद्र शासन करीब एक हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि तय कर चुका है। इंदौर जिले में 795 करोड़ और धार जिले में 200 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना है। इंदौर जिले में 998 किसानों की जमीन पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही है।