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MP में 35 हजार पैथोलॉजी लैब्स का संकट टला, निर्बाध संचालन का रास्ता खुला

भोपाल  मध्य प्रदेश में संचालित 35 हजार पैथोलॉजी लैब जो बंद होने की कगार पर खड़ी थीं, अब उनके निर्बाध संचालन का रास्ता खुल सकता है। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेश शुक्ला ने यह कहा कि मध्यप्रदेश में पैथोलॉजी के सहज संचालन लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यह बात उन्होंने मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन माल्टा के साथ लगातार हो रही चर्चा के बाद कही है। कई महीनों की चर्चा का नतीजा इस बारे में जानकारी देते हुए माल्टा के प्रदेश सचिव संजय श्रीवास्तव ने बताया कि माल्टा के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क और उनके निर्देश के बाद उनके भोपाल स्थित आवास में विभाग के अधिकारियों से पैथालाजी संचालन के नियमों को लेकर कई महीने चर्चा की। एमपी की 35 हजार लैब बंद हो जाएंगी चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि अगर पैथोलॉजी लैब का संचालन सिर्फ पैथोलॉजिस्ट को ही करने का नियम लागू किया गया तो मध्यप्रदेश की 35 हजार लैब बंद हो जाएंगी, क्योंकि इतनी संख्या में प्रदेश में पैथोलॉजिस्ट नहीं। इस नियम की वजह से लैब टेक्नीशियन की पढ़ाई करने वाले युवाओं का भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा। सरकारी अस्पतालों में टेक्नीशियन ही चला रहे लैब प्रदेश के सभी जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में टेक्नीशियन ही लैब का संचालन कर रहे हैं। कुछ जिलों में ही जिला मुख्यालय के अस्पतालों में पैथोलॉजिस्ट हैं जबकि कई जिलों में तो पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर भी नहीं है। यह होगा फायदा माल्टा ने यह सवाल भी उठाया था कि जब सरकारी अस्पतालों में टेक्नीशियन लैब को बेहतर ढंग से चला रहे हैं तो फिर किसी एक एमबीबीएस डॉक्टर के मार्गदर्शन में पैथोलॉजी लैब का संचालन होने में क्या परेशानी होगी। माल्टा ने यह मांग भी रखी कि मध्यप्रदेश में पैथालाजी संचालन के नियमों में उदारता जरूरी है। प्रदेश में ज्यादातर लैब का संचालन एमबीबीएस डॉक्टर के मार्गदर्शन में लैब टेक्नीशियन द्वारा किया जाता है, जो आगे भी जारी रह सकेगा। पैरामेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले उन हजारों छात्रों के सामने से संशय की स्थिति समाप्त हो जाएगी जो लैब टेक्नीशियन का कोर्स कर रहे हैं। ग्रामीण स्तरों तक निजी पैथालाजी लैब खोलना संभव हो सकेगा।

सीएम योगी की सौगात: रक्षाबंधन पर बहनों को मिलेगी मुफ्त रोडवेज यात्रा की सुविधा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर कानून व्यवस्था अन्य प्रकार की विभागीय समीक्षा को लेकर बैठक कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने त्योहारों के महीनों में मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस बल को विशेष निगरानी करने के लिए निर्देशित किया। मिलावट को लेकर दिए कड़े निर्देेश इस दौरान सीएम योगी ने रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के मद्देनजर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने खाद्यपदार्थों में मिलावट न हो इसके लिए जांच टीमोंं को सक्रिय करने के आदेश दिए। उन्होंने भाई बहन के त्योहार रक्षाबंधन को लेकर बहनों को उपहार दिया है। सीएम योगी अपने सरकारी आवास से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सभी प्रकार की बस सेवाओ को 8 अगस्त की सुबह से लेकर 10 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक बसों की निःशुल्क यात्रा की सौगात दिया है। इस दौरान बहनों को एसी और नॉन एसी की सभी बसों जिसमे यूपीएसआरटीसी और उससे अनुबंधित बसों की यात्रा निःशुल्क रहेगी।

एमपी में मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, 76% बारिश पूरी – इंदौर सबसे पीछे, ग्वालियर आगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। राज्य के उत्तरी हिस्से के ग्वालियर-छतरपुर समेत आठ जिलों में सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में रविवार को बारिश भी हुई। हालांकि राज्य में बारिश का मजबूत तंत्र नहीं दिखाई दे रहा है, जिसके चलते बीते कुछ दिनों से राज्य में हल्की-फुल्की बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से के ऊपर से एक ट्रफ और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की एक्टिविटी जारी है। इसका असर राज्य में भी देखने को मिल रहा है। इस वजह से सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग द्वारा कल जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाओं के चलने की भी आशंका जताई गई है। बीते दिनों की बात करें को गुना, नर्मदापुरम, छतरपुर, रीवा, टीकमगढ़ , सागर, सतना, सीधी, उमरिया समेत कई जिलों में बारिश हुई थी। इससे पहले की बात करें तो बीते सप्ताह तो राज्य में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। ऐसी स्थिति वाले इलाकों में राज्य का पूर्वी हिस्सा- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर शामिल था, जहां मॉनसून झमझमाकर बरसा था। इसके चलते लोगों को कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था। बीते दिन सबसे ज्यादा तापमान इन हिस्सों में दर्ज किया गया। ग्वालियर में 27 डिग्री, दतिया में 26.4, पृथ्वीपुर में 26.3, मुरैना में 26.2, श्योपुर में 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अगर कम तापमान वाले इलाकों की बात करें तो, नरसिंहपुर में 19, खरगौन में 20, राजगढ़ में 20.6 और खंडवा में 21 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। मध्यप्रदेश में कोटे की 76% बारिश मध्यप्रदेश के 9 जिले-ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मुरैना में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। सबसे ज्यादा पानी गुना में 45.8 इंच गिरा है। भोपाल, जबलपुर की तस्वीर भी बेहतर है, लेकिन इंदौर फिसड्‌डी है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े तो दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। मानसून को अभी करीब दो महीने बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अगस्त में ही बारिश का कोटा फुल हो जाएगा। बता दें कि मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हो रही है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। इस वजह से 9 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर गया। इनमें ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 में से 6 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है। 3 जिले सागर और भोपाल संभाग के है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग में सिस्टम की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं।  पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही, लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, डैम ओवरफ्लो है। इनके गेट खोले गए। एमपी में अब तक 28 इंच से ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश के ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। यहां सामान्य से 50% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। गुना, टीकमगढ़-निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश हुई है, जबकि इंदौर में सबसे कम पानी गिरा है। उज्जैन संभाग की तस्वीर भी ठीक नहीं है। वहीं, भोपाल और जबलपुर में सीजन की आधी बारिश हुई है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े को दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। गुना में सबसे ज्यादा 42 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। मंडला में 44 इंच, टीकमगढ़ में करीब 44 इंच निवाड़ी में 43 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया में 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में सबसे कम 11 इंच, बुरहानपुर में 11.1 इंच, बड़वानी में 11.5 इंच, खरगोन में 11.8 इंच ओर खंडवा में 12.8 इंच पानी ही गिरा है। ऐसे समझें बारिश का गणित… 40 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     मंडला, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और रायसेन। 30 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     ग्वालियर, विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया। 20 से 30 इंच तक बारिश वाले जिले     भोपाल, सीहोर, झाबुआ, अलीराजपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, दतिया, दमोह, शाजापुर, नीमच, भिंड, मुरैना, रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, हरदा, बैतूल, शहडोल और अनूपपुर। 10 से 19 इंच बारिश वाले जिले     इंदौर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा।

मॉनसूनी त्रासदी से बेहाल MP: जनहानि बढ़ी, राहत शिविरों में गुज़र रहा है लोगों का जीवन

भोपाल मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है लेकिन बीते करीब 40 दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई तेज़ बारिश के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं. प्रदेश सरकार ने बताया है कि मॉनसून के इस सीज़न में अबतक 252 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 432 पशु भी बारिश के मौसम में मारे जा चुके हैं जबकि 3600 से ज्यादा लोगों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीते दिनों प्रदेश में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ की वजह से बने हालातों और राहत एवं बचाव के संबंध में जिला कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की थी, जिसमें मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश के अतिवृष्टि वाले जिलों में अब तक 3628 नागरिकों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया है. फिलहाल 53 राहत शिविरों में 3065 प्रभावित लोगों को रखकर उन्हें सभी प्रकार की जरूरी मदद जैसे खाना-पीना, दवाइयां, कपड़े आदि मुहैया कराए जा रहे हैं. अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए कि अतिवृष्टि या बाढ़ प्रभावितों को कोई भी कठिनाई न आने पाये और जल्द ही सर्वे पूरा कर पीड़ितों को उनके नुकसान की समुचित भरपाई की जाए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अतिवृष्टि वाले जिलों के कलेक्टर द्वारा अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित की जा चुकी है. शासन द्वारा लगभग 3600 करोड़ रुपए की व्यवस्था राहत मदद में की गई है. सीएम मोहन यादव ने बताया कि भारी बारिश को देखते हुए NDRF की टीमों को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार में तैनात किया गया है जबकि SDRF को प्रदेश भर में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया. 252 लोगों की हुई मौत प्रदेश सरकार के मुताबिक, मॉनसून के सीजन में अबतक 252 लोगों की मौत हुई है. इनमें से भारी बारिश से 47, नदी-नाले में दुर्घटनावश डूबने से 132, आकाशीय बिजली से 60 और दीवार/मकान/पेड़ गिरने से 13 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है. इसके अलावा साथ ही 432 पशु हानि और 1200 मुर्गियां की मृत्यु हुई है. प्रदेश में तैनात बचाव और राहत दलों द्वारा 432 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए हैं, जिसमें 3628 नागरिकों और 94 मवेशियों को जीवित बचाया गया है. इसके अलावा बारिश से 128 मकानों को पूर्ण और 2333 मकानों को आंशिक क्षति हुई है. सामान्य से 59 फीसदी ज्यादा बारिश एमपी सरकार के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 711.3 MM वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है. प्रदेश के कुल 40 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है. इस अतिवृष्टि के कारण प्रदेश के प्रभावित लगभग 254 ग्रामीण सड़कों क्षतिग्रस्त हुई हैं. 

चीन ने जमीन कब्जाई’ पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल से पूछा– जानकारी का स्रोत क्या है?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि यदि आप सच्चे भारतीय हैं तो आप ऐसा कुछ नहीं कहते. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की चीन द्वारा भारत की जमीन पर कब्जा करने संबंधी बयान पर कड़ी टिप्पणी की और उनसे पूछा कि उन्हें संसद में ये मुद्दे उठाने से किसने रोका है. कोर्ट ने पूछा, 'क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना किसी विश्वसनीय सामग्री के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं. अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब बातें नहीं कहते.' मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने की. वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने पीठ के समक्ष राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व किया. सुनवाई की शुरुआत में सिंघवी ने गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर वह ये सब नहीं कह सकते तो विपक्ष के नेता भी नहीं हो सकते. उन्होंने पीठ से अपने मुवक्किल के बयान की जाँच करने का आग्रह किया. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'डॉ. सिंघवी, आपको जो भी कहना है, कहिए. आप संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में यह सब क्यों कहना है.' सिंघवी ने तर्क दिया, 'एक तकनीक है, आप संसद सदस्य (एमपी) बन जाते हैं और सभी को बदनाम करते हैं लेकिन जनहित में एक पार्टी के नेता, बस देखें कि उन्होंने क्या कहा.' न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'डॉ. सिंघवी, हमें बताइए कि आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीनियों ने कब्जा कर लिया है. आपको कैसे पता चला कि आप वहाँ थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना किसी विश्वसनीय सामग्री के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं.' न्यायमूर्ति दत्ता ने आगे कहा, 'अगर आप एक सच्चे भारतीय होते, तो आप ये सब बातें नहीं कहते.' सिंघवी ने कहा कि यह भी संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 भारतीय सैनिकों को पीटा गया और मार दिया गया, और उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चिंता का विषय है. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'जब सीमा पार संघर्ष होता है. अगर आप खुलासा कर रहे हैं, आप विपक्ष के नेता (एलओपी) हैं. तो आप (संसद में) सवाल क्यों नहीं पूछते, आप एलओपी हैं. यह क्या है, आप कहे जा रहे हैं? आपके पास अनुच्छेद 19(1)(ए) का अधिकार (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) है, एक जिम्मेदार एलओपी होने के नाते, आप ऐसा करते हैं.' सिंघवी ने कहा कि मानहानि का मुकदमा दायर करके किसी व्यक्ति को परेशान करने का यह कोई तरीका नहीं है, और उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधान 1 की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि अब संज्ञान लेने से पहले प्राकृतिक न्याय की आवश्यकता होती है. सिंघवी ने तर्क दिया, 'यह एक सर्वमान्य आधार है कि जब वर्तमान मामले में यानी 11 फरवरी, 2025 को संज्ञान लिया गया था, तब कोई प्राकृतिक न्याय नहीं था और न ही 223 (1) प्रावधान का कोई अनुपालन हुआ था.  राहुल गांधी से कोर्ट के तीखे सवाल सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राहुल गांधी की तरफ से दिए गए बयानों पर असहमति जताई. राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने शुरुआत में दलील दी कि अगर कोई विपक्षी नेता मुद्दे नहीं उठा सकता, तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी. अदालत में सिंघवी ने कहा कि अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते, तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते. इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, 'आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में यह क्यों कहना है?' राहुल गांधी के बयान पर असहमति जताते हुए जस्टिस दत्ता ने पूछा, 'आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं. अगर आप एक सच्चे भारतीय होते, तो आप यह सब नहीं कहते.' भारत जोड़ो यात्रा में दिया था बयान अपनी 2023 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान, कांग्रेस नेता राहुल ने दावा किया कि एक पूर्व सेना अधिकारी ने उन्हें बताया था कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है. उनके इस बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया था और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था. राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 'आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2,000 किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है?' और इस पर जोर देते हुए कहा, 'अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसा नहीं कहते.' कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? जब सीमा पार कोई विवाद होता है तो क्या आप ये सब कह सकते हैं? आप संसद में सवाल क्यों नहीं पूछते? कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकार लगाते हुए कहा कि आप विपक्ष के नेता हैं तो आप ये बातें क्यों कहेंगे? आप ये सवाल संसद में क्यों नहीं पूछते? इसके जवाब में राहुल की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने संसद में बोलने की छूट पाने के लिए चुनाव नहीं लड़ा. अनुच्छेद 19(1)(ए) राहुल गांधी को सवाल पूछने की इजाजत देता है. सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने यह स्वीकार करते हुए कि याचिकाकर्ता अपना बयान बेहतर तरीके से पेश कर सकते थे, कहा कि शिकायत सिर्फ सवाल उठाने के लिए उन्हें परेशान करने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है, जो एक विपक्षी नेता का कर्तव्य है. उन्होंने यह भी बताया इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया है. हालांकि, जस्टिस दत्ता ने बताया कि यह मुद्दा हाई कोर्ट के सामने नहीं उठाया गया था. सिंघवी ने माना कि इस पॉइंट को उठाने में चूक हुई. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में चुनौती मुख्य रूप से शिकायतकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर केंद्रित थी.  सिंघवी ने राहुल की तरफ से कहा कि उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की कोई जरूरत नहीं है. मामले में संज्ञान लिए जाने से पहले उन्हें कोई प्राकृतिक न्याय … Read more

शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधारों की झलक – 5000 नए शिक्षकों की होगी नियुक्ति, 2047 तक ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘ज्ञान धारा – शिक्षा संवाद’ कार्यक्रम में हुए शामिल शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधारों की झलक – 5000 नए शिक्षकों की होगी नियुक्ति, 2047 तक ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  ने  राजधानी रायपुर में हरिभूमि और आईएनएच मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘ज्ञान धारा – शिक्षा संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद मानती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब से मैंने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली, उसी क्षण से मेरी प्राथमिकता रही कि विभाग को गहराई से समझते हुए उसमें सुधार की ठोस पहल की जाए। सबसे पहले एक गहन समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह पाया गया कि राज्य में शिक्षक और छात्रों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर होने के बावजूद वितरण असमान है।ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या अधिक है, लेकिन शिक्षक अपेक्षाकृत कम हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अधिक संख्या में पदस्थ हैं। इस असंतुलन को दूर करने हेतु राज्य में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई। इसके परिणामस्वरूप आज छत्तीसगढ़ का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। इस प्रभाव का विस्तार इतना व्यापक रहा कि इरकभट्टी जैसे गांवों में वर्षों से बंद पड़े विद्यालय पुनः प्रारंभ हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब भी शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है, जिसे ध्यान में रखते हुए 5000 नए शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाएगी। नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में लागू किया गया है, और राज्य में हमारी सरकार ने इसे तत्परता से अपनाया है। छत्तीसगढ़ में अब 18 स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों में प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। इससे न केवल स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को बल मिला है, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम-स्कूल योजना के अंतर्गत छात्रों को हाई-टेक सुविधाएँ मिल रही हैं। विद्यालय भवनों के रखरखाव हेतु ₹133 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। साथ ही, छात्रावासों की स्थिति सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं। नक्सलवाद से विकास की ओर – बस्तर की नई दिशा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उपजाऊ भूमि और जैव विविधता से परिपूर्ण एक समृद्ध प्रदेश है, किंतु यह भी सत्य है कि यह राज्य वर्षों से नक्सलवाद की पीड़ा झेलता आया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि नक्सल समस्या से दोहरे मोर्चे—सुरक्षा और विकास—पर समन्वित रणनीति से निपटा जाएगा। सरकार ने नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की, और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक 1500 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। साथ ही, सुरक्षा बलों के द्वारा चलाए जा रहे अभियान में कई सक्रिय नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए हैं। पुनर्वास हेतु ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से संभव है। सरकार इन क्षेत्रों में विशेष रूप से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गांव को विश्व के 20 प्रमुख पर्यटन ग्रामों में स्थान मिला है, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है, और बस्तर में बोधघाट परियोजना के माध्यम से 7 लाख हेक्टेयर सिंचाई सुविधा और 200 मेगावॉट बिजली उत्पादन के लक्ष्य पर कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय प्रगति हुई है। एक समय था जब राज्य में मात्र 1 मेडिकल कॉलेज था, आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। राज्य में अब तक 19 निजी विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं और 3 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरु रहा है और आज पुनः वह स्थान प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। विदेशों से छात्र भारत में शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा का केंद्र बने। 2047 का लक्ष्य: विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक "विकसित छत्तीसगढ़" के लिए एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। डॉक्यूमेंट में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के विद्यालयों और महाविद्यालयों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो तथा राज्य की जीएसडीपी में शिक्षा का योगदान सशक्त और प्रभावशाली बने। उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को “उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान” से अलंकृत किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में सुके. शारदा, बी. आर. साहू, भरत किशोर यादव,डॉ. धनंजय पाण्डेय, बलदाऊ सिंह श्याम शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं खेल एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायकगण पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, प्रदेश के शिक्षाविद्, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ  उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री जूनियर स्टेट लेवल बैडमिंटन चैंपियनशिप के समापन समारोह में हुए शामिल

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन में बैडमिंटन प्रति अच्छा वातावरण बन रहा है। उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम का विकास 11:45 करोड रुपए की लागत से किया गया है। आने वाले समय में यहां 50 करोड़ रुपए की लागत से एस्ट्रो टर्फ और पेवीलियन बनाए जाने की मंजूरी सरकार द्वारा दी गई है। यहां सिंथेटिक ट्रेक भी बनाया जाएगा। स्टेडियम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन भी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 महापर्व के अंतर्गत विक्रम उद्योगपुरी में 1000 एकड़ जमीन उद्योगों की स्थापना के लिए आवंटित की गई है, आने वाले समय में 1000 एकड़ जमीन और दी जाएगी। विकास के मामलों में अब उज्जैन पीछे नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को नानाखेड़ा स्टेडियम में आयोजित जी एच रायसोनी मेमोरियल 58 वीं मध्यप्रदेश राज्य जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सफल आयोजन के लिए आयोजनकर्ताओं को अपनी ओर से शुभकामनाएं दीं। जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का शाल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया और एसोसिएशन के सदस्यों ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। पुरस्कार वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैडमिंटन चैंपियनशिप के विजेताओं और उपविजेताओं को पुरस्कार वितरण किये। चैंपियनशिप के फाइनल में जीते खिलाड़ी मिक्स्ड डबल अंडर 17 कन्हैया शर्मा, कृतिका पाठक, मिक्स्ड डबल्स अंडर 19 ओम पटेल, कीर्ति तिवारी, बॉयज सिंगल अंडर 17 मेदांश शर्मा, बॉयज सिंगल अंडर 19 नैवेद्य तोंडे, गर्ल्स सिंगल अंडर 17 नित्या जादौन, बॉयज डबल अंडर 19 देव कुमावत, अंगद मुछाल, गर्ल्स डबल अंडर 19 आस्था शर्मा, कीर्ति तिवारी, गर्ल्स सिंगल अंडर 19 माही पवार, बॉयज डबल्स अंडर 17 शौर्य मिश्रा, अथर्व सक्सेना, गर्ल्स डबल अंडर 17 नित्या जादौन, नाविका सोमानी को ट्राफी प्रदान की गई। इस दौरान विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव सहित एसोसिएशन के राजेंद्र भारती, संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, अश्विन गुप्ता और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी एवं नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि अंडर 19 के यहां के जो विनर हैं वे गोवा में बेस्ट ज़ोन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई हुए हैं, जो मध्यप्रदेश की टीम का नेतृत्व करेंगे। आभार प्रदर्शन एसोसिएशन के सचिव अनुराग शर्मा ने किया।  

रक्षाबंधन पर CM डॉ. यादव का संदेश: भाई-बहन का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल

भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व है रक्षाबंधन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – रक्षाबंधन स्नेह, सुरक्षा और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन पर CM डॉ. यादव का संदेश: भाई-बहन का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल मुख्यमंत्री ग्राम तालोद और उज्जैन में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में हुए शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उज्जैन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत तालोद में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे रक्षाबंधन पर्व पर बहनों से मिले प्रेम और स्नेह से अभिभूत हैं। यह पर्व भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व है। आज बहनों ने मुझे जो राखियाँ बांधी हैं वह सभी बहनों का प्रेम, विश्वास और सम्मान दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के आशीर्वाद से प्रदेश में सरकार निरंतर विकास के कार्य कर रही है। गाँवों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए निरंतर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। शासन ने द्वारा "एक पेड-माँ के नाम” अभियान से प्रेरित होकर "एक बगिया-माँ के नाम" योजना बनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश को हरा भरा बनाने के साथ महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुडी महिलाओं को उनकी निजी भूमि पर फलदार पौधों के बगीचे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार द्वारा बगिया में फलदार पौधे, खाद, गड्डे खोदने का खर्च, फेंन्सिग, सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर के जल कुंड बनाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध भी कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को पूरे देश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत प्रतिमाह प्रदाय की जाने वाली राशि में भी वृध्दि की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहनों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन कर फल और मिठाई की टोकरी भेंट स्वरुप दी। मुख्यमंत्री ने बहनों से राखी बंधवाई और उन्हें परंपरा अनुसार सावन का झूला भी झुलाया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कमला कुंवर, उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर, सदस्य शोभाराम मालवीय, महापौर मुकेश टटवाल, राजेश धाकड, संजय अग्रवाल, रवि वर्मा, अमृत लाल कुमावत, लाल सिंह भाटी, दिनेश पटेल, अनिल मालवीय, गोपाल आंजना एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के अथर्व होटल में आयोजित लाडली बहना रक्षाबंधन उत्सव कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सभी बहनों का स्नेह उन्हें बीते कई वर्षों से प्राप्त हो रहा है। वर्ष में भाई-बहन के दो उत्सव आते हैं एक रक्षाबंधन और दूसरा भाई दूज। इस वर्ष दिवाली के बाद आने वाली भाई दूज से लाडली बहनों को 1250 रूपए के स्थान पर 1500 रूपए प्रति माह प्रदान किए जाएंगे। आने वाले वर्षों में बहनों को प्रदाय की जाने वाली राशि में और वृद्धि की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर, उज्जैन, देवास और धार शहर को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाई जाएगी। आने वाले दिनों में शहर में सदावल, पुलिस डीआरपी लाइन और दताना मताना में हेलीपैड होंगे। दताना मताना को हवाई अड्डे के रुप में भी विकसित किया जाएगा। श्रीमहाकालेश्वर और श्रीओमकारेश्वर ज्योर्तिलिंग को हवाई मार्ग से जोडा जाएगा। चिंतामण, पंवासा और विक्रम नगर रेलवे स्टेशन को भी विकसित किया जाएगा। लाल पुल से रामघाट, मंगलनाथ से सिद्धवट और शनि मंदिर से गउघाट तक नाव का संचालन किया जाएगा। वर्तमान में उज्जैन में औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 20 हजार नागरिकों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। आने वाले दिनों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए नए उद्योगो की स्थापना भी सतत की जा रही है। कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव और बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें एवं नागरिक उपस्थित थे।  

सुगम परिवहन सेवा का नया ढांचा तैयार, मुख्यमंत्री होंगे राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष

भोपाल प्रदेश में नगर वाहन सेवा समेत अंतरशहरी बस सेवा को सुगम बनाने के लिये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेश में जल्द ही शुरू किये जाने के प्रयास परिवहन विभाग द्वारा किये जा रहे है। इसके लिये प्रदेश में राज्य स्तरीय कम्पनी के साथ 7 सहायक कंपनियां गठित की गई हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना को राज्य शासन द्वारा अप्रैल 2025 में स्वीकृति दी जा चुकी है। कंपनियों का गठन प्रदेश में राज्य स्तरीय कंपनी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का गठन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट में 3 जुलाई 2025 को पंजीयन के साथ हो गया है। मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष होंगे। परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होंगे। राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन राज्य शासन के द्वारा लिये गये निर्णयों के अनुसार 7 सहायक कंपनी सम्पूर्ण प्रदेश में रहेगी। वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनिया बनाई गई है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत सभी संभागों में वैज्ञानिक पद्धति से ट्रैफिक सर्वे करते हुए नये सिरे से नवीन बस रूट निर्धारण और इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी के निर्धारण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस क्रम में उज्जैन एवं इंदौर संभाग का ट्रैफिक सर्वे और रूट निर्धारण का कार्य अंतिम चरण में है। जबलपुर एवं सागर संभाग में सर्वे कार्य जारी है। इसके बाद भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, ग्वालियर तथा चंबल संभाग के रूट्स सर्वेक्षण का कार्य भी किया जाएगा। अधोसंरचना का कार्य पीपीपी मॉडल पर होगा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में वर्तमान निजी बस ऑपरेटर्स को पारदर्शी प्रक्रिया के साथ शासन नियंत्रित बस कंपनी द्वारा अनुबंधित कर कंपनी के सुपरविजन में बस संचालित होंगी। इस योजना में प्रत्येक जिले में बस डिपो, अत्याधुनिक बस स्टेंड और बस स्टॉप का निर्माण पीपीपी (पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशीप) मॉडल में किया जाएगा। उज्जैन एवं इंदौर रूट सर्वे कार्य अंतिम चरण होने से इन बस कंपनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिलेवार बस ऑपरेटर्स से सलाह कर रूट निर्धारण के संबंध में आवश्यक सलाह मशविरा कर सकेंगे। संदीप सोनी को अतिरिक्त प्रभार उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार संदीप सोनी को सौपा गया है। संदीप सोनी वर्तमान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी उज्जैन प्राधिकरण भी हैं। क्षेत्रीय सहायक कम्पनी प्रदेश की 7 क्षेत्रीय सहायक कम्पनी अपनी क्षेत्राधिकार के जिलों में सिटी बस सेवा और अंतरशहरी बस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगी। प्रदेश में लम्बे समय से शहरी और अंतरशहरी बस सेवा की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इन बस सेवाओं में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित और किफायती दर पर निर्धारित समय पर बस सेवा उपलब्ध हो सकें।  

महाकाल की सवारी में उमड़ेगा आस्था और कला का संगम, उमा-महेश की झलक और जनजातीय नृत्य का समावेश

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर से सावन महीने की चौथी सवारी सोमवार, 4 अगस्त को निकलेगी। इस बार भगवान महाकाल की पालकी के साथ नंदी रथ पर भगवान श्री उमा-महेश की प्रतिमा भी शामिल की जाएगी। चौथी सवारी की थीम मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधारित होगी। सवारी शाम 4 बजे निकलेगी भगवान महाकाल की यह सवारी शाम 4 बजे मंदिर से निकलेगी। भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर पालकी में विराजेंगे, श्री मनमहेश हाथी पर और श्री शिव-तांडव गरुड़ रथ पर होंगे। भगवान का पूजन-अर्चन मंदिर में किया जाएगा, फिर पालकी नगर भ्रमण पर रवाना होगी। मंदिर के बाहर पुलिस जवान भगवान को सलामी देंगे। सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस, होमगार्ड, भजन मंडली, झांझ मंडली और पुलिस बैंड भी चलेगा। इन मार्गो से निकलेगी सवारी सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। वहाँ भगवान का शिप्रा नदी के जल से अभिषेक होगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। पर्यटन पर आधारित झांकियां रहेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार, इस बार की सवारी में मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों की झांकियां भी शामिल रहेंगी।     वन्यजीव पर्यटन: कान्हा, पेंच, रातापानी और पन्ना टाइगर रिजर्व की झांकियां     धार्मिक पर्यटन: उज्जैन के सांदीपनि आश्रम और ओंकारेश्वर का एकात्मधाम     ऐतिहासिक स्थल: ग्वालियर और चंदेरी के किले, खजुराहो के मंदिर     ग्रामीण पर्यटन: ओरछा में होम स्टे और मंदिर की झांकी चार जनजातीय और लोक नृत्य दल सवारी में प्रस्तुति देंगे।     धार से भगोरिया नृत्य– मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में     छिंदवाड़ा से भड़म नृत्य– मोजीलाल डाडोलिया     उज्जैन से मटकी नृत्य- कृष्णा वर्मा के नेतृत्व में     सिवनी से सैला नृत्य- राहुल धुर्वे के नेतृत्व में