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जापानी पीएम के साथ ट्रेन राइड पर निकले PM मोदी, भारतीय ड्राइवरों से बातचीत

टोक्यो  जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। साथ ही उन्होंने बुलेट ट्रेन ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले भारतीयों से भी मुलाकात की। जापानी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंदाई की यात्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने ALFA-X ट्रेन को भी देखा और जानकारी ली। बता दें कि भारतीय ड्राइवर जेआर ईस्ट के साथ इस समय ट्रेनिंग कर रहे हैं। जेआर ईस्ट जापान की एक रेलवे कंपनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लैटफॉर्म पर ही उनसे मुलाकात की और फोटो भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में स्थित एक सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत ‘राज्य-प्रांत सहयोग’ को मजबूत किए जाने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मैत्री का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यही कारण है कि कल 15वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर अलग से एक पहल की गई।’ उन्होंने कहा, ‘व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता आदि क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ‘स्टार्टअप’, प्रौद्योगिकी और एआई जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र भी लाभकारी हो सकते हैं।’ विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों पर आधारित भारत-जापान संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तोक्यो और नयी दिल्ली पर परंपरागत रूप से ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़कर राज्य-प्रांत संबंधों को नए सिरे से बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य-प्रांत साझेदारी पहल व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नर और भारतीय राज्य सरकारों से विनिर्माण, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, नवोन्मेष, ‘स्टार्ट-अप’ और लघु व्यवसायों में सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। पहलगाम हमले पर क्या बोले पीएम मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा? भारत और जापान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. दोनों देशों ने कहा कि हमले के जिम्मेदार आतंकियों, उनके आयोजकों और फाइनेंसर्स को तुरंत न्याय के कटघरे में लाया जाए. यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दिया गया. 'सफल दौरे से मिले शानदार नतीजे', PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत-जापान के बीच ये समझौते हुए पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच कई समझौते हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी जिसे प्रधानमंत्री ने रीपोस्ट किया. प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के गवर्नरों से मुलाकात की अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के अलग-अलग प्रीफेक्चरों (राज्य-स्तर की इकाइयों) के गवर्नरों से मुलाकात की. इस बातचीत में 16 गवर्नरों ने हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते बहुत पुराने सभ्यता से जुड़े हुए हैं और आज भी लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब जरूरत है कि दिल्ली और टोक्यो तक सीमित रिश्तों को आगे बढ़ाकर भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चरों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाया जाए. इसके लिए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में 'स्टेट-प्रीफेक्चर पार्टनरशिप' की शुरुआत की गई थी, जो ट्रेड, तकनीक, पर्यटन, सुरक्षा, स्किल और कल्चर जैसे क्षेत्रों में रिश्तों को और मजबूत करेगी. मोदी ने भारतीय राज्यों और जापानी गवर्नरों से कहा कि वे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप्स, छोटे उद्योग और नए इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करें. उन्होंने कहा कि जैसे जापान के हर प्रीफेक्चर की अपनी खास ताकत है, वैसे ही भारत के हर राज्य की अपनी अलग क्षमता है. अगर दोनों मिलकर काम करें तो बड़ा फायदा होगा. मोदी ने खासतौर पर युवाओं और कौशल विकास के आदान-प्रदान पर जोर दिया और कहा कि जापानी टेक्नोलॉजी और भारतीय टैलेंट साथ आएंगे तो नए अवसर बनेंगे. गवर्नरों ने भी माना कि अगर राज्यों और प्रीफेक्चरों के बीच सीधे रिश्ते बढ़ते हैं तो भारत-जापान के कारोबारी, शैक्षिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.

सीएम शामिल होंगे ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में, मंत्री लोधी बोले—MP का पर्यटन भविष्य उज्जवल

ग्वालियर ग्वालियर में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कॉन्क्लेव के अंतिम दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में शामिल होंगे। इससे पहले शुभारंभ अवसर पर पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में देश का पर्यटन हब बनेगा। लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी पर्यटन राज्य बनाने के लिए सभी ट्रैवल और टूर ऑपरेटर, होटलियर के साथ हितधारकों और विभाग को मिलकर काम करना होगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी होंगे।  “टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर आधारित कॉन्क्लेव में महत्वपूर्ण अनुबंध और साझेदारियां होंगी, नई परियोजनाओं का शुभारंभ होगा।  विरासतों, धरोहरों और अनुभवात्मक पर्यटन की संभावनाओं पर होगा मंथन  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज – ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ़ एमपी” औैर “ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग – इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस” विषय पैनल डिस्कशन होंगे।  हितधारक जानेंगे समृद्ध विरासत   ग्वालियर किले पर 30 एवं 31 अगस्त को योग सत्र, हेरीटेज वॉक का आयोजन किया जाएगा। चयनित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए फैमिलियाराइज़ेशन टूर (FAM Tour) का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्वालियर एवं आसपास के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है।   मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा एमपीटी इन्फ्लुएंसर मीट का आयोजन  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के अंतर्गत ग्वालियर स्थित इम्पीरियल गोल्फ रिसॉर्ट में ‘एमपीटी इन्फ्लुएंसर मीट’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भाग लिया। प्रदेश की कलाओं को पूरे विश्व से देखने आते हैं मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक और पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें गहरी हैं। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को टूरिस्ट पूरे विश्व से देखने आते हैं। अगर आप यहां निवेश करते हैं, हमारे पास सबसे बेहतर पॉलिसी है। हम निवेशकों को अच्छा इंसेंटिव दे रहे हैं। यह निवेश ग्वालियर–चंबल और सागर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।   एमपी फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बना प्रसिद्ध अभिनेता फैसल मलिक ने कहा कि मध्य प्रदेश की खूबसूरत लोकेशन्स फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करती हैं। यहां के लोग फिल्म–फ्रेंडली हैं और शासन–प्रशासन का सहयोग सराहनीय है।  मध्यप्रदेश की विविधतापूर्ण और खूबसूरत लोकेशन्स फिल्म निर्माताओं को लगातार आकर्षित करती रही हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन चुका है।  ग्वालियर की धरोहरें ऐतिहासक  मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड की अपर प्रबंध निदेशक बिदिशा मुखर्जी ने कहा कि इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य ग्वालियर की अमूल्य धरोहरों, संगीत और संस्कृति को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है। इस थीम के ज़रिए ग्वालियर को एक ऐसे पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है, जहां पर्यटक सिर्फ़ इतिहास और स्थापत्य को देखें ही नहीं, बल्कि यहां की धड़कन, रिवाज़, लोककला और परंपराओं को महसूस भी करें। इसका मक़सद है कि पर्यटन से ग्वालियर की पहचान मज़बूत हो, स्थानीय समुदाय को रोज़गार और नए अवसर मिलें, और आने वाली पीढ़ियां भी इस शहर की धरोहर पर गर्व कर सकें। 

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे सीएम योगी, तीसरी बार हुआ परिसर में आगमन

दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग देगी प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे सीएम योगी, तीसरी बार हुआ परिसर में आगमन वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के बीच हुआ मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत सीएम योगी ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत संरक्षण कार्यों का किया निरीक्षण पांडुलिपियों के संरक्षण को और तीव्रता से आगे बढ़ाने का निर्देश वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्थित राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के अंतर्गत चल रहे संरक्षण कार्यों के निरीक्षण के लिए पहुंचे। यह उनका विश्वविद्यालय परिसर में तीसरा आगमन था। विश्वविद्यालय परिवार ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के बीच किया। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कुलसचिव राकेश कुमार और वित्त अधिकारी सहित आचार्यों ने उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री योगी ने दुर्लभ पांडुलिपियों एवं उनके संरक्षण कार्यों की प्रगति का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और कार्यों की गति और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहर इन पांडुलिपियों का संरक्षण एक सराहनीय कार्य है और इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण दायित्व है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के विस्तार भवन में भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा चल रहे संरक्षण कार्यों की समीक्षा की। साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री का तीसरी बार विश्वविद्यालय आगमन होना संस्कृत भाषा, विश्वविद्यालय और देववाणी के लिए गौरव और हर्ष की बात है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पांडुलिपियों के संरक्षण के इस अभियान को गति देने में विश्वविद्यालय पूरी तरह से तत्पर है। इस मौके पर विश्वविद्यालय परिवार से कुलसचिव राकेश कुमार, वित्त अधिकारी हरिशंकर मिश्र, प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. राजनाथ, अभियंता रामविजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी शशिंद्र मिश्र सहित कई आचार्य और अधिकारी उपस्थित रहे।

योगी सरकार का राम की पैड़ी पर 26.11 लाख दीप प्रज्वलित करने का है लक्ष्य

दीपोत्सव 2025 रिकॉर्ड बनाने को 32 हजार वालंटियर बिछायेंगे 28 लाख दीप योगी सरकार का राम की पैड़ी पर 26.11 लाख दीप प्रज्वलित करने का है लक्ष्य -एडीएम सिटी मुख्य व अन्य विभागों से 20 नोडल बनाए गए -सूचना विभाग साकेत महाविद्यालय से निकालेगा 11 झांकियां लेजर लाइट व ग्रीन आतिशबाजी से सजेगी 19 अक्टूबर की शाम अयोध्या  श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर दीपोत्सव के भव्य आयोजन के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस बार राम की पैड़ी पर नौवें आयोजन के दौरान 26.11 लाख दीप प्रज्वलन का लक्ष्य रखा है । इसके लिए 28 लाख दीप बिछाने की योजना बनाई गई है। इस महायज्ञ में 32 हजार वॉलंटियर्स की सेना उतरेगी, जो दीपों को सजाने और प्रज्वलित करने का कार्य संभालेगी। 19 अक्टूबर की शाम को होने वाला यह आयोजन लेजर लाइट शो और ग्रीन आतिशबाजी से और भी आकर्षक होगा। प्रशासन ने इस भव्य आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। अयोध्या के एडीएम सिटी योगेंद्र पाण्डेय को मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि विभिन्न विभागों से 20 नोडल अधिकारी बनाए गए हैं, जो आयोजन की हर बारीकी पर नजर रखेंगे। दीपोत्सव की तैयारियों में स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। राम की पैड़ी को दीपों से सजाने के लिए विशेष डिजाइन तैयार किए गए हैं, जो भगवान राम की लीलाओं को दर्शाएंगे। इन दीपों को जलाने के लिए सरसों तेल और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग होगा, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। रामकथा पार्क तक जाएंगी झांकियां सूचना विभाग की ओर से साकेत महाविद्यालय से 11 झांकियों का आयोजन किया जाएगा। ये झांकियां रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत करेंगी और अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेंगी। इन झांकियों में आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा, जिससे दर्शकों को एक अनूठा अनुभव मिलेगा। झाकियां यहां से निकलकर रामकथा पार्क तक जाएंगी। मंत्रमुग्ध हो जाएंगे पर्यटक व श्रद्धालु 19 अक्टूबर की शाम को लेजर लाइट शो और ग्रीन आतिशबाजी का प्रदर्शन होगा, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देगा। यह आतिशबाजी पर्यावरण के अनुकूल होगी, जिससे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। दीपोत्सव के इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भी भारी भीड़ की उम्मीद है।रामलीलाओं का होगा मंचन।पिछले वर्ष सरयू में सामूहिक सरयू आरती का बना था वर्ल्ड रिकॉर्ड। एक बार फिर सामूहिक वर्ल्ड रिकॉर्ड सरयू आरती का बनाने का किया जाएगा प्रयास। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए: डीएम जिलाधिकारी निखिल टीकाराम ने बताया कि प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ मेडिकल टीमें भी तैनात रहेंगी। स्वच्छता के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा, ताकि राम की पैड़ी और आसपास का क्षेत्र स्वच्छ और सुंदर बना रहे। जानिए, कब कितने दीप जले  वर्ष                जले दीप 2017             1.71 लाख 2018             3.01 लाख 2019             4.04 लाख 2020             6.06 लाख 2021             9.41 लाख 2022           15.76 लाख 2023           22.23 लाख 2024                25 लाख

जम्मू-कश्मीर रियासी हादसा: भूस्खलन में 7 की मौत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

 रियासी  जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में भारी बारिश और ऊपरी इलाकों में बादल फटने से एक बार फिर से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई है. इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं. वहीं रियासी जिले के महौर क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार मलबे से अब तक 7 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. प्रशासन के अनुसार कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कुछ पूरी तरह बाढ़ के पानी में बह गए. हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि लापता लोगों को तलाशा जा सके. साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है. वहीं रियासी भूस्खलन की घटना में स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर राहत-बचाव अभियान चला रही हैं. जम्मू-कश्मीर में लगातार बादल फटने की घटना और फ्लैश फ्लड अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी तबाही मची है. इस महीने में प्रदेश को लगातार फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड्स का सामना करना पड़ा, जिससे खासतौर पर जम्मू क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते में आई भीषण बारिश ने जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में तबाही मचाई. इन घटनाओं में अब तक 36 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सिर्फ रियासी और डोडा जिलों में ही कम से कम 9 लोगों की जान गई. भारी बारिश से भूस्खलन हुए, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई. इससे पहले, 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में एक बादल फटने की घटना हुई थी. यह इलाका माता वैष्णो देवी यात्रा के मार्ग पर स्थित है और समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. इस क्लाउडबर्स्ट में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल और लापता बताए गए. तेज फ्लैश फ्लड्स ने श्रद्धालुओं के कैंप, मकान और पुल बहा दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में सामान्य बारिश ही दर्ज हुई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट की वजह से सीमित क्षेत्र में अचानक पानी का सैलाब आ गया. क्लाउडबर्स्ट क्या है? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, किसी छोटे क्षेत्र (20–30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश को क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है. यह घटना अक्सर पहाड़ी इलाकों में होती है. मॉनसून की नमी से भरी हवाएं जब पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना देती हैं. इनमें जब पानी का भार असहनीय हो जाता है तो अचानक भारी बारिश के रूप में गिरता है. इस अचानक बारिश से मिनटों में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड और मडफ्लो जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस तरह की घटनाओं की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं.

यात्रियों के लिए खुशखबरी: इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ोतरी

इंदौर इंदौर से नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और सीटों की भारी मांग को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, नए रैक कब जोड़े जाएंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। 7 वंदे भारत ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रतलाम मंडल जुड़े वरिष्ठ ने बताया कि इस मामले में लिखित में किसी तरह की कोई जानकारी मिली नहीं है। रेलवे बोर्ड ने हाल ही में वंदे भारत की ऑक्यूपेंसी (ट्रेन में कितनी सीटें भरी हुई हैं) और यात्रियों की मांग के संबंध में सभी जोन और मंडलों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद देशभर में चल रही सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला लिया गया है।   यात्रियों की बढ़ती संख्या है प्रमुख मुद्दा रतलाम रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार, मंडल ने बढ़ती संख्या में यात्रियों और टिकट की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया था। वर्तमान में इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत आठ कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास और शेष चेयरकार कोच में हैं। वर्तमान सीट व्यवस्था और कोच विस्तार की योजना सी-वन और सी-सेवन कोच में कुल 88 सीटें हैं। सी-टू से सी-सिक्स तक के पांच कोच में प्रत्येक कोच में 78 सीटें हैं, कुल 390 सीटें। बी-वन कोच (एक्जीक्यूटिव क्लास) में 52 सीटें हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार कोच संख्या बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। इन रूट्स पर अपग्रेडेशन सीनियर डीसीएम हीना केवलरामानी ने कहा कि इंदौर-नागपुर, मेंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, सिकंदराबाद-तिरुपति, चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली, मदुरै-बेंगलुरु कैंट, देवघर-वाराणसी, हावड़ा-राउरकेला रूट पर चलने वाली वंदे भारत में अपग्रेडेशन होगा। फिलहाल लिखित में जानकारी नहीं है वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाने के मामले में फिलहाल हमारे पास लिखित में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है। इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत में कुल 90 फीसदी की ऑक्यूपेंसी है। कुछ सेक्शन में 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी है। यात्रियों को मिलेगी राहत सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि आगामी महीनों में त्योहारी सीजन और यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए इंदौर-भोपाल-वंदे भारत में कोच की संख्या बढ़ाई जा रही है। इससे हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। इस मामले में रेल मंत्री से हमने पत्र लिखकर मांग की थी।

भारत की पहली प्रदूषण-रहित ट्रेन का आगाज, हरियाणा से होगी शुरुआत

हरियाणा  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर सितंबर 2025 में ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, और यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है।  इसे भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल कदम है। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न की जाती है, जिसमें पानी और भाप खर्च होती है। इसका कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण-मुक्त है।    यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली होगी जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है. अन्य देशों (जैसे जर्मनी) की हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 500-600 हॉर्सपावर की होती हैं। ट्रेन में 8 यात्री कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है. 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। किलो हाइड्रोजन इस ट्रेन को 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देता है. 8-10 कोच खींचने के लिए 2.4 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ट्रेन में दो पावर प्लांट लगाए गए हैं।    ट्रेन का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, जो 1955 में स्थापित भारत की पहली कोच उत्पादन इकाई है. ट्रेन का डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है. भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत 35 ऐसी ट्रेनों के लिए 2,800 करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।   

अब अस्पतालों में नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज, 1 सितंबर से लागू होगा नया नियम

भोपाल  मध्यप्रदेश में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निजी बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच भुगतान को लेकर चल रहे विवाद का असर सीधे बीमाधारकों पर पड़ने वाला है। एक सितंबर से दो प्रमुख बीमा कंपनियों के बीमाधारकों का कैशलेस इलाज प्रदेश के अस्पतालों में नहीं हो पाएगा। बीमाधारकों की चिंता अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच खींचतान का खामियाजा बीमाधारक मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इलाज के लिए उन्हें अपनी जेब से नकद भुगतान करना होगा। प्रदेश में करीब 30 लाख लोग निजी कंपनियों के हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में आते हैं। इनमें ज्यादातर पॉलिसियां 3 से 5 लाख रुपए तक की हैं। क्यों मचा विवाद? हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट की दरें बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। जबकि अस्पतालों का कहना है कि इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बीमा कंपनियां भुगतान कम कर रही हैं और क्लेम सेटलमेंट में देरी भी कर रही हैं। इसी कारण एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया ने अपने 15,000 सदस्य अस्पतालों को बजाज एलायंज जैसी कंपनियों के ग्राहकों का कैशलेस इलाज रोकने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों का तर्क अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां कैशलेस इलाज के बाद क्लेम पास करने में काफी समय लगाती हैं। बीमा कंपनियां ट्रीटमेंट की लागत घटाकर या कुछ चार्जेस को नॉन-पेएबल बता कर रकम कम कर देती हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि कई बार मरीज के छुट्टी लेने के हफ्तों बाद भी बीमा कंपनी से पूरा क्लेम नहीं मिलता। कभी राशि कम मिलती है तो कभी विवाद में फंसी रहती है। इससे अस्पतालों की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है और वे कैशलेस सुविधा देने में हिचकिचाने लगते हैं। अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियों के दबाव में वे घाटे में इलाज नहीं कर सकते। सरकारी कंपनियों में राहत विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां न्यू इंडिया इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस की कैशलेस सुविधा फिलहाल जारी रहेगी। इन कंपनियों में क्लेम कटौती और देरी जैसी समस्या कम देखने को मिलती है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अक्सर अस्पताल इलाज की वास्तविक लागत और अतिरिक्त चार्जेस छिपाते हैं। वहीं, बीमा कंपनियों का टैरिफ घटाने का दबाव भी विवाद को बढ़ा रहा है। ऐसे हालात में बीमाधारकों की साख और भरोसा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

जनसंख्या बदलाव का असर: असम के 11 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक, मुस्लिम बहुल इलाके बढ़े

दिसपुर  उत्तर प्रदेश के संभल की डेमोग्राफी बदल गई है. संभल हिंसा पर बनी कमेटी की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. संभल में हिंदू आबादी घट गई है. रिपोर्ट की मानें तो संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी आजादी के समय 45 फीसदी थी. अब यह घटकर 15 फीसदी रह गई है. इस पर अब सियासत भी तेज हो चुकी है. हालांकि, हकीकत देखें तो संभल तो अभी झांकी है. इससे अधिक तो असम चौंकाता है. असम में ऐसे कम से कम 11 जिले हैं, जहां की डेमोग्राफी में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है. असम में कम से कम 11 जिलों में हिंदू बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक हो चुके हैं. खुद असम के मुख्यमंत्री का कहना है कि 2041 तक राज्य में मुस्लिमों और हिंदुओं की आबादी 50-50 हो सकती है. दरअसल, साल 2011 की जनगणना के अनुसार दावा किया जा रहा है कि असम के 11 जिलों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो गई है, जहां हिंदू अब अल्पसंख्यक हैं. इन जिलों में अवैध घुसपैठ, जन्म दर में अंतर और प्रवासन को मुख्य कारण माना जा रहा है. यह स्थिति उत्तर प्रदेश के संभल जिले की हालिया जांच रिपोर्ट से काफी मिलती-जुलती है, जहां भी डेमोग्राफिक शिफ्ट में हिंदू आबादी घट गई है. असम के ये 11 जिले, जहां मुस्लिम हो गए बहुसंख्यक     धुबरी- 79.67% मुस्लिम     गोलपारा- 57.52% मुस्लिम     बरपेटा- 70.74% मुस्लिम     मोरीगांव- 52.56% मुस्लिम     नागांव- 55.36% मुस्लिम     दरांग-64.34% मुस्लिम     हैलाकांडी- 60.31% मुस्लिम     करीमगंज-56.36% मुस्लिम     बोंगाईगांव – 50.22% मुस्लिम     साउथ सलमारा-मानकाचार- डेटा उपलब्ध नहीं     होजाई- डेटा उपलब्ध नहीं राज्य में कैसे घटते गए हिंदू? दरअसल, 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी. यह राज्य के कुल 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी. राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का करीब 61.47 प्रतिशत था. 2011 की जनगणना के अनुसार कम से कम नौ जिले मुस्लिम बहुल थे. जबकि 2001 में यह संख्या महज छह थी . अभी मौजूदा समय में यह संख्या बढ़कर कम से कम 11 हो गई है. 2001 में कितने जिले मुस्लिम बहुल? 2001 में जब असम में 23 जिले थे, तब छह जिलों में मुस्लिम बहुल थे. धुबरी (74.29), गोलपाड़ा (53.71), बारपेटा (59.37), नागांव (51), करीमगंज (52.3) और हैलाकांडी (57.63). क्या है कारण? असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का मानना है कि हिंदुओं की घटती आबादी की वजह बांग्लादेशी घुसपैठ है. इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च जन्म दर, प्रवासन और भूमि अतिक्रमण जैसे कारक भी जिम्मेदार हैं. अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ सालों में राज्य में हिंदू आबादी 61% से घटकर अनुमानित 50% के करीब पहुंच सकती है, जबकि मुस्लिम 34% से बढ़कर 40% से अधिक हो सकती है. अगर सीएम की मानें तो 2041 तक दोनों की आबादी बराबर हो जाएगी, अगर इसी अनुपात से डेमोग्राफी में बदलाव होते रहे तो. संभल से जैसा असम में हाल? असम में यह डेमोग्राफिक बदलाव, उत्तर प्रदेश के संभल से मिलती जुलती है. संभल की रिपोर्ट में डेमोग्राफिक बदलाव को ‘साजिश’ बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 1947 में संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू 45% थे, जबकि मुस्लिम 55%. आज हिंदू घटकर 15 फीसदी रह गए हैं. मुस्लिम 85% हो गए हैं. जांच समिति ने इसे ‘व्यवस्थित परिवर्तन’ माना, जिसमें हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया और आबादी का ‘एथनिक क्लीनिंग’ जैसा असर हुआ.

शिक्षा का अजीब हाल: 8 हजार स्कूलों में स्टूडेंट ही नहीं, 1 लाख में सिर्फ 1 टीचर

नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारत में पहली बार स्कूल शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है. यह उपलब्धि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है क्योंकि इससे न केवल शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्टूडेंट-टीचर अनुपात (Student-Teacher Ratio) में भी सुधार हुआ है. महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ी  देश में महिला शिक्षकों की संख्या में भी साल 2014 के तुलना में इजाफा हुआ है. शिक्षा मंत्रालय के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 से अभी तक 51.36 लाख शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है, जिनमें से 61 प्रतिशत महिलाएं हैं. मौजूदा समय में जहां पुरुष शिक्षकों की संख्या 46.41 लाख हैं. वहीं, महिला शिक्षकों की संख्या 54.81 लाख हैं.  भारत में कुल स्कूलों की संख्या 14.71 लाख है, जिसमें 69 प्रतिशत सरकारी हैं और इनमें कुल छात्रों के नामांकन का दर 49 प्रतिशत है. वहीं, देश में कुल प्राइवेट स्कूलों की संख्या 26 प्रतिशत है, लेकिन ये देश के 41 प्रतिशत छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं. वहीं, देश के कुल शिक्षकों में से 51 प्रतिशत शिक्षक सरकारी स्कूलों में और 42 प्रतिशत शिक्षक प्राइवेट स्कूलों में हैं.  UDISE Report: शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 की तुलना में 2024-25 में शिक्षकों की संख्या में 6.7% की वृद्धि हुई है. अब देश में अलग-अलग स्तरों पर स्टूडेंट-टीचर अनुपात अलग-अलग है. शिक्षकों की संख्या में वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.      क्या है डेमोग्राफिक चेंज? 3 प्वाइंट में समझें, संभल हिंसा पर सौंपी गई रिपोर्ट में इसपर क्यों हुई है चर्चा     ट्रंप टैरिफ जारी रहा, तो भारत के निर्यात पर पड़ेगा भारी असर; विशेषज्ञों ने बताया स्थिति से निपटने का तरीका     शरीर पर 36 जख्म और पोस्टमार्टम में निकली 17 गोलियां, झारखंड के चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड को जानिए स्टूडेंट-टीचर रेशियो (PTR) और बेहतर परिणाम यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) की रिपोर्ट के अनुसार आधारभूत, प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात क्रमशः 10, 13, 17 और 21 है. यह अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में सुझाए गए 1:30 से कहीं बेहतर है. रिपोर्ट बताती है कि कम अनुपात होने से शिक्षक और छात्रों के बीच संवाद बेहतर होता है, जिससे पढ़ाई आसान बनती है और परिणाम भी अच्छे आते हैं. छात्रों के स्कूल छोड़ने के दर में गिरावट  शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के स्कूल छोड़ने के दर में भी गिरावट आई है. प्राइमरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या एक साल में 3.7 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत हो गई है. मिडिल लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 1 साल में 5.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवर पर 10.9 प्रतिशत से घटकर 8.2 प्रतिशत हो गई है. इसी प्रकार छात्रों के स्कूल में बने रहने के दर में भी वृद्धि हुई है. प्राइमरी लेवल पर बच्चों के स्कूल में बने रहने का दर एक साल में 85.4 प्रतिशत से बढ़कर 92.4 प्रतिशत हो गई है. वहीं, मिडिल लेवल पर एक साल में 78 प्रतिशत से बढ़कर 82.8 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवल पर यह एक साल पहले में 45.6 प्रतिशत से बढ़कर 47.2 प्रतिशत हो गई है.  महिला शिक्षकों की संख्या तेजी से बढ़ी ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 के सत्र में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो अब 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार 420 हो गए हैं। इनमें से 51% (51.47 लाख) शिक्षक सरकारी स्कूलों में हैं। एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में पुरुष शिक्षक 45.46 लाख और महिला 40.16 लाख थीं, जो 2024-25 में बढ़कर क्रमश: 46.41 लाख और 54.81 लाख हो गई हैं। बीते दशक में महिला शिक्षकों की संख्या करीब 8% बढ़ने की बड़ी वजह इनकी भर्तियां हैं। 2014 से अब तक 51.36 लाख भर्तियों में से 61% महिला शिक्षकों की हुई हैं। पीपुल-टीचर रेश्यो: अब 21 छात्रों पर एक शिक्षक, पहले 31 पर थे     मिडिल स्तर पर 10 साल पहले एक शिक्षक के पास 26 छात्र थे, जो घटकर 17 रह गए हैं। सेकंडरी स्तर पर यह 31 से घटकर 21 रह गया है। यानी छात्र व शिक्षकों के बीच संवाद बेहतर हो रहा है। शिक्षकों के पास जितने कम छात्र होंगे, वे उन्हें ज्यादा समय दे पाएंगे।     ड्रॉपआउट रेट घटा है। सेकंडरी पर 2023-24 में यह 10.9% था, जो 2024-25 में 8.2% बचा है। मिडिल स्तर पर यह 5.2% की तुलना में 3.5% और प्राथमिक पर 3.7% से घटकर 2.3% रह गई है।     प्राथमिक पर रिटेंशन रेट 2023-24 में 85.4% से बढ़कर अब 92.4 % हो गया है। मिडिल पर 78% से बढ़कर 82.8%, तो सेकंडरी पर यह 45.6% से बढ़कर 47.2% हो गया है। सेकंडरी स्तर पर नामांकन दर बढ़कर 68.5% हो गई है। डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ी  डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें तो स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं भी लगातार बढ़ रही है. पिछले साल तक 57.2 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर थे, जो अब 64.7 प्रतिशत स्कूलों में हो गए हैं. वहीं, स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें, जो पिछले साल तक 53.9 प्रतिशत स्कूलों में थी, वो अब लगभग 63.5 प्रतिशत हो गई है.  बुनियादी सुविधाएं बेहतर इन सभी के साथ स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. अब 99.3 प्रतिशत स्कूलों में पीने का पानी, 93.6 प्रतिशत स्कूलों में बिजली, 97.3 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय और 96.2 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय हैं. इसी के साथ स्कूलों अन्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब 55 प्रतिशत स्कूलों में रैंप और रेलिंग, 89.5 प्रतिशत स्कूलों में लाइब्रेरी और 83 प्रतिशत स्कूलों में खेल के मैदान हैं.   ड्रॉपआउट दर और नामांकन में सुधार रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 6% की कमी आई है और शून्य नामांकन वाले स्कूलों में करीब 38% की … Read more