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भोपाल-इंदौर में नई व्यवस्था: बिना हेलमेट वालों को नहीं मिलेगा पेट्रोल, प्रशासन ने कसी कमर

भोपाल / इंदौर मध्य प्रदेश के दो शहर भोपाल और इंदौर में सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आज 1 अगस्त 2025 से शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा. यह सख्त निर्देश दोनों शहरों के कलेक्टर ने जारी किए हैं. प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी और लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी. इस आदेश को लागू करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. बैठक में इंदौर की मौजूदा यातायात व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद जिला प्रशासन ने यह ठोस कदम उठाने का ऐलान किया. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यह आदेश दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है औरआज  1 अगस्त से इसे सख्ती से लागू किया जाएगा. आदेश से पहले 30 और 31 जुलाई को शहर भर में जनजागरूकता अभियान चलाया गया , ताकि लोगों को समय रहते जानकारी मिल सके और वे नियमों का पालन करें. नियम नहीं माना तो पेट्रोल पंप के खिलाफ होगी कार्रवाई प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देशित किया है कि वे बिना हेलमेट आए किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल न दें. अगर कोई पेट्रोल पंप इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के लागू होने से शहर में हेलमेट पहनने की आदत को मजबूती मिलेगी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा. मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक और सवारी को आईएसआई मार्क हेलमेट(Helmet Petrol Rule 2025) पहनना जरूरी है। यह प्रतिबंध 01 अगस्त 2025 से लागू होकर 29 सितंबर 2025 तक प्रभावशील रहेगा। इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति, संस्था या संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। किस कानून के तहत आया आदेश?  यह नियम मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129, आपदा प्रबंधन अधिनियम और नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसके तहत दोनों शहरों के पेट्रोल पंप संचालकों को आदेशित किया गया है कि वे बिना हेलमेट आए ग्राहक को ईंधन न दें। आदेश का उल्लंघन करने पर पंप संचालकों पर कानूनी कार्रवाई होगी, हालांकि उपभोक्ता पर क्या सज़ा होगी, इसका अभी स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। कहां, कैसे और किसको मिलेगी हेलमेट न पहनने की छूट? यदि किसी व्यक्ति के पास मेडिकल इमरजेंसी या आकस्मिक परिस्थिति है, तो उसे इस नियम से अस्थायी रूप से छूट दी जाएगी। लेकिन अन्य सभी मामलों में यह नियम सख्ती से लागू होगा। इमरजेंसी में मिले सकेगी छूट     प्रतिबंध मेडिकल संबंधी मामलों व आकस्मिक स्थिति में लागू नहीं होगा। यह प्रतिबंध अन्य किसी नियम/आदेश के प्रतिबंध के अतिरिक्त होंगे।     यह आदेश 1 अगस्त 25 से लागू होगा। 29 सितंबर 25 तक की अवधि में प्रभावशील रहेगा।     इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, संस्था और संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता-23 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी। बिना हेलमेट आने वालों पर क्या कार्रवाई? पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर पंप संचालक पर तो कार्रवाई करेगी, लेकिन जो पेट्रोल ले रहा है, उस पर क्या कार्रवाई होगी? सड़क पर पुलिस बिना हेलमेट वाले वाहन चालकों को नहीं पकड़ पा रही है। इस पर भी सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली थी। इस दौरान उन्होंने कुछ जरूरी निर्देश दिए थे।     सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए।     अगले 6 महीनों में सुधार के लिए रणनीति तैयार की जाए ताकि सकारात्मक बदलाव और नतीजे देखने को मिलें। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा था कि इंदौर में लोगों को हेलमेट पहनने की आदत डालनी चाहिए। सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। लोक परिवहन के साधन बढ़ाए जाएं ताकि सड़कों पर छोटे निजी वाहनों की भीड़ कम हो। पुलिस, सरकारी कर्मचारी और विद्यार्थी जब भी वाहन चलाएं, तो हेलमेट पहनना अनिवार्य हो। सरकारी दफ्तरों में बिना हेलमेट एंट्री नहीं  इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर सरकारी कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। अब बिना हेलमेट किसी सरकारी दफ्तर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों पर अमल  सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जज अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर समीक्षा बैठक में हेलमेट अनिवार्यता, शराब पीकर वाहन चलाने पर सज़ा, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन जैसे बिंदुओं पर सख्त अमल की मांग की थी। यही दिशा-निर्देश अब जमीन पर उतारे जा रहे हैं। कब से लागू होगा हेलमेट पहनने का आदेश? क्या मिलेगा दंड? यह आदेश 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक लागू रहेगा। नियम का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 223 के तहत चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट नहीं प्रशासन का निर्णय ठीक है, लेकिन आदेश में स्पष्ट नहीं है कि पेट्रोल पंप(Helmet Petrol Rule 2025) पर यदि कोई बिना हेलमेट के पेट्रोल भरवाता है तो इसमें पेट्रोल पंप संचालक को दोषी नहीं माना जाएगा। पंप संचालक को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पंप संचालक पर इसकी अनिवार्यता नहीं होना चाहिए।-अजय सिंह, अध्यक्ष, मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन

महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बहन-बेटियों के लिए सम्मान का प्रतीक है “लाड़ली बहना योजना’’ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना योजना की राशि में होगी चरणबद्ध वृद्धि परिवार परम्परा का आधार है मातृशक्ति महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध सतना को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला बनाने के लिए दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत महिला सम्मेलन को किया संबोधित सतना जिले के सिंहपुर में मना मातृशक्ति उत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और सभी की अधिकार सम्पन्नता के लिए सामाजिक रचना के ताने-बाने में सभी स्तर पर आवश्यक योगदान दे रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप किसान, युवा, गरीब कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित हैं। हमारी संस्कृति में देश के लिए मातृत्व भाव विद्यमान है, हम सब भारत माता पर सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए सदैव तत्पर हैं। आज का मातृशक्ति सम्मेलन- माताओं-बहनों के प्रति सनातन संस्कृति के अनुरूप अनन्य श्रद्धा-स्नेह-प्रेम और सम्मान का प्रकटीकरण है। भारत की कुटुम्ब या परिवार परम्परा हमारी संस्कृति को समृद्ध और सशक्त बनाती है। परिवार परम्परा का आधार मातृशक्ति ही है। बेटियां एक ही नहीं दो परिवारों का उद्धार करती हैं। बहन-बेटियों के प्रति इस सम्मान के परिणामस्वरूप ही प्रदेश में “लाड़ली बहना योजना’’ आरंभ की गई। सावन के महीने में लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रूपए के साथ 250 रूपए अतिरिक्त रूप से आने वाले हैं। यह बहन-बेटियों प्रति हमारी सरकार का आदर और स्नेह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सतना जिले के सिंहपुर में आयोजित मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत बहनों को जारी की जाने वाली राशि में चरणबद्ध रूप से वृद्धि होगी और वर्ष 2028 तक बहनों को तीन हजार रूपए प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण और उनके कल्याण के लिए 1500 करोड़ रूपए से अधिक प्रतिमाह अंतरित किए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं। इनके मान-सम्मान और कल्याण के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। दीपावली के बाद आने वाली भाईदूज तक राज्य सरकार सभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए से बढ़ाकर हर माह 1500 रूपए सहायता राशि देगी। बहन-बेटियों के सशक्तिकरण के‍लिए स्व-सहायता समूहों का संचालन, नौकरियों और स्थानीय व नगरीय निकायों और पंचायतों में आरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और विधानसभा में बहनों का 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। माताओं-बहनों के कल्याण के लिए ही सभी परिवारों को पक्के मकान, घर-घर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दीदीयां लखपति बनकर प्रगति कर रही हैं, बेटियों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था है, उन्हें साइकिलें उपलब्ध कराने के साथ-साथ परीक्षा में अच्छा परिणाम लाने पर प्रोत्साहन स्वरूप लेपटॉप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने के लिए भी आवश्यक हरसंभव सहायता बेटियों को उपलब्ध है। उद्योगों में काम करने वाली बहनों के लिए भी राज्य सरकार विशेष सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जिन्दगी बदलने के लिए उन्हें बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सोलर पम्प पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। अगले डेढ़ माह में बरगी नहर का कार्य पूर्ण हो रहा है, इससे रीवा-सतना क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। हमारी सरकार ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है और हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2002-03 तक केवल 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविध उपलब्ध थी। वर्तमान में हम 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया। अगले दो साल में संभवत: 2700 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के माध्यम से शीघ्र ही गरीबों के लिए 4 करोड़ आवास स्वीकृत होने वाले हैं, वर्ष 2028 तक 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन की व्यवस्था है, बच्चों की शिक्षा के लिए सांदिपनी विद्यालय जैसे स्कूल विद्यमान हैं, यह सब रामराज की संकल्पा को साकार करने के समान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रीराम वन गमन पथ का निर्माण करा रही है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने जहां-जहां लीलाएं की हैं, वे स्थल तीर्थ के रूप में विकसित किए जाएंगे। किसानों की आय में वृद्धि के‍लिए गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से परिवार के सभी सदस्यों को पर्याप्त पोषण भी उपलब्ध हो सकेगा। अत: सरकार घर-घर गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए 'जिसके घर गाय वह गोपाल' के भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में देश का 9 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन होता है, इसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। यदि कोई गौ-पालक 25 गायों का पालन करता है तो उन्हें लागत के 40 लाख रूपए में से 10 लाख रूपए अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। गौशालाओं में भी प्रति गौमाता 20 रूपए के स्थान पर 40 रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। पांच हजार से अधिक गौमाताएं पालने पर 130 एकड़ जमीन और 40 रूपए प्रति गाय के मान से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। गौमाताओं की उचित देखभाल के लिए नगर निगम, नगर परिषद और पंचायतों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा-सतना क्षेत्र में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होमस्टे विकसित करने में राज्य सरकार सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना जिला भगवान श्रीराम से जुड़ता है अत: क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को अपने गांव-मोहल्ले का उन्नयन करते हुए सतना जिले को … Read more

महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बहन-बेटियों के लिए सम्मान का प्रतीक है “लाड़ली बहना योजना’’ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना योजना की राशि में होगी चरणबद्ध वृद्धि परिवार परम्परा का आधार है मातृशक्ति महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध सतना को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला बनाने के लिए दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत महिला सम्मेलन को किया संबोधित सतना जिले के सिंहपुर में मना मातृशक्ति उत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और सभी की अधिकार सम्पन्नता के लिए सामाजिक रचना के ताने-बाने में सभी स्तर पर आवश्यक योगदान दे रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप किसान, युवा, गरीब कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित हैं। हमारी संस्कृति में देश के लिए मातृत्व भाव विद्यमान है, हम सब भारत माता पर सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए सदैव तत्पर हैं। आज का मातृशक्ति सम्मेलन- माताओं-बहनों के प्रति सनातन संस्कृति के अनुरूप अनन्य श्रद्धा-स्नेह-प्रेम और सम्मान का प्रकटीकरण है। भारत की कुटुम्ब या परिवार परम्परा हमारी संस्कृति को समृद्ध और सशक्त बनाती है। परिवार परम्परा का आधार मातृशक्ति ही है। बेटियां एक ही नहीं दो परिवारों का उद्धार करती हैं। बहन-बेटियों के प्रति इस सम्मान के परिणामस्वरूप ही प्रदेश में “लाड़ली बहना योजना’’ आरंभ की गई। सावन के महीने में लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रूपए के साथ 250 रूपए अतिरिक्त रूप से आने वाले हैं। यह बहन-बेटियों प्रति हमारी सरकार का आदर और स्नेह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सतना जिले के सिंहपुर में आयोजित मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत बहनों को जारी की जाने वाली राशि में चरणबद्ध रूप से वृद्धि होगी और वर्ष 2028 तक बहनों को तीन हजार रूपए प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण और उनके कल्याण के लिए 1500 करोड़ रूपए से अधिक प्रतिमाह अंतरित किए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं। इनके मान-सम्मान और कल्याण के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। दीपावली के बाद आने वाली भाईदूज तक राज्य सरकार सभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए से बढ़ाकर हर माह 1500 रूपए सहायता राशि देगी। बहन-बेटियों के सशक्तिकरण के‍लिए स्व-सहायता समूहों का संचालन, नौकरियों और स्थानीय व नगरीय निकायों और पंचायतों में आरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और विधानसभा में बहनों का 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। माताओं-बहनों के कल्याण के लिए ही सभी परिवारों को पक्के मकान, घर-घर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दीदीयां लखपति बनकर प्रगति कर रही हैं, बेटियों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था है, उन्हें साइकिलें उपलब्ध कराने के साथ-साथ परीक्षा में अच्छा परिणाम लाने पर प्रोत्साहन स्वरूप लेपटॉप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने के लिए भी आवश्यक हरसंभव सहायता बेटियों को उपलब्ध है। उद्योगों में काम करने वाली बहनों के लिए भी राज्य सरकार विशेष सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जिन्दगी बदलने के लिए उन्हें बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सोलर पम्प पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। अगले डेढ़ माह में बरगी नहर का कार्य पूर्ण हो रहा है, इससे रीवा-सतना क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। हमारी सरकार ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है और हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2002-03 तक केवल 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविध उपलब्ध थी। वर्तमान में हम 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया। अगले दो साल में संभवत: 2700 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के माध्यम से शीघ्र ही गरीबों के लिए 4 करोड़ आवास स्वीकृत होने वाले हैं, वर्ष 2028 तक 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन की व्यवस्था है, बच्चों की शिक्षा के लिए सांदिपनी विद्यालय जैसे स्कूल विद्यमान हैं, यह सब रामराज की संकल्पा को साकार करने के समान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रीराम वन गमन पथ का निर्माण करा रही है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने जहां-जहां लीलाएं की हैं, वे स्थल तीर्थ के रूप में विकसित किए जाएंगे। किसानों की आय में वृद्धि के‍लिए गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से परिवार के सभी सदस्यों को पर्याप्त पोषण भी उपलब्ध हो सकेगा। अत: सरकार घर-घर गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए 'जिसके घर गाय वह गोपाल' के भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में देश का 9 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन होता है, इसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। यदि कोई गौ-पालक 25 गायों का पालन करता है तो उन्हें लागत के 40 लाख रूपए में से 10 लाख रूपए अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। गौशालाओं में भी प्रति गौमाता 20 रूपए के स्थान पर 40 रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। पांच हजार से अधिक गौमाताएं पालने पर 130 एकड़ जमीन और 40 रूपए प्रति गाय के मान से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। गौमाताओं की उचित देखभाल के लिए नगर निगम, नगर परिषद और पंचायतों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा-सतना क्षेत्र में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होमस्टे विकसित करने में राज्य सरकार सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना जिला भगवान श्रीराम से जुड़ता है अत: क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को अपने गांव-मोहल्ले का उन्नयन करते हुए सतना जिले को … Read more

CM यादव ने पीएमपर्यटन वायु सेवा बुकिंग पोर्टल की आईआरसीटीसी पोर्टल पर हुई लांचिंग, होम-स्टे ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल किया लाँच

पर्यटन को मिली नई उड़ान, टूरिज्म कॉन्क्लेव में मिले 3000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर पर्यटन क्षेत्र में काम कर रही है राज्य सरकार विरासतों को सहेजकर बढ़ायेंगे विंध्याचल का वैभव पर्यटन, संस्कृति, विरासत और ऊर्जा क्षेत्र का समन्वित विकास है हमारा लक्ष्य पर्यटन के क्षेत्र में 12 करोड़ का निवेश करने वाली चार कम्पनियों को वितरित किये लेटर ऑफ अलॉटमेंट पीएमपर्यटन वायु सेवा बुकिंग पोर्टल की आईआरसीटीसी पोर्टल पर हुई लांचिंग होम-स्टे ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल किया लाँच मण्डला, डिण्डोरी, सिंगरौली, सीधी और सिवनी में कला और शिल्प केन्द्रों के निर्माण और रीवा के वेंकट भवन के संरक्षण कार्य के लिए हुआ एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा में किया दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का शुभारंभ रीवा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रीवा रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नई सुबह का आगाज़ हुआ है। आज पर्यटन श्रेत्र में प्रमुख निवेशकों ने रीवा और शहडोल संभाग में 3 हजार करोड़ से अधिक के निवेश की इच्छा जताकर इन क्षेत्रों में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया है। यह ऐतिहासिक पल दोनों संभागों के लिए आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। कॉन्क्लेव में निवेशकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को रीवा में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के शुभारंभ कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र के निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस दो दिवसीय रीजनल कान्क्लेव का विधिवत शुभारंभ किया। यह कान्क्लेव 27 जुलाई को भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि विकास के मायने तभी हैं, जब हम अपनी जड़ों से, अपनी संस्कृति और अपनी विरासतों से भी आत्मीयता से जुड़े रहें। हम विरासत से विकास की ओर मिशन मोड में आगे बढ़ रहे हैं। विंध्य क्षेत्र हमेशा से ही मध्यप्रदेश का गौरव रहा है। इस क्षेत्र के विकास में अब कोई भी बाधा नहीं रही। हम यहां की हेरिटेज साइट्स को समुचित तरीके से सहेजकर पूरे विंध्याचल को उसका पुरा वैभव लौटायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी मीठी बोली, कला, संस्कृति, खान-पान में अपनत्व समेटे और सघन वनों की हरियाली से आच्छादित इस हरित क्षेत्र में आइडियल टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की पूरी संभावना है। हमारी सरकार पर्यटन सेक्टर को भी इंडस्ट्रियल सेक्टर की सारी सुविधाएं दे रही है। हमारी इन्वेस्टर फ्रेंडली पर्यटन नीति का भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार 100 करोड़ रुपए लागत का कोई टूरिस्ट होटल, मोटल या रिसार्ट खोलने पर 30 करोड़ रुपए की सब्सिडी देगी। हेल्थ टूरिज्म के लिए 100 करोड़ रुपए लागत का कोई वेलनेस सेंटर खोलने पर 40 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी देगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई निवेशक रोजगार आधारित उद्योग लगाते हैं तो हमारी सरकार उस उद्योग से रोजगार पा रहे पुरूष श्रमिक को 5 हजार रुपए और महिला श्रमिक को 6 हजार रुपए दस साल तक प्रदान करेगी। उद्योग स्थापना में सरकार निवेशकों को सभी जरूरी मदद मुहैया करायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है और विंध्याचल प्रदेश का हर दिल अजीज हिस्सा है। यहां की माटी ने देश को नेतृत्व दिया है। यहां के वनों में सफेद शेर खुले में विचरण करते हैं। यह क्षेत्र खनिजों और लौह अयस्क से भरा हुआ है। देश की ऊर्जाधानी (रीवा और सिंगरौली) भी इसी क्षेत्र में है। दिल्ली की मेट्रो ट्रेन यहीं से उत्पादित बिजली से ही चलती है। पूरे देश और प्रदेश को रौशन करने वाले इस क्षेत्र में हम विकास की नई रौशनी लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि रीवा में एयरपोर्ट बनने से इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लग गए हैं। अब रीवा आना-जाना कठिन नहीं रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र प्रदेश की संस्कृति को वैचारिक और आध्यात्मिक रूप से भी पोषित करता है। रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के बाद रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन यह संकेत है कि हम इस क्षेत्र को पर्यटन के क्षेत्र में आगे लाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा और संपूर्ण विंध्यांचल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध है, बल्कि यह कई अनोखे प्राकृतिक चमत्कारों से भी धनी क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि रीवा हवाई अड्डे की स्थापना के बाद अब यह क्षेत्र देश के अन्य हिस्सों से जुड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार विंध्य क्षेत्र के बहुआयामी विकास के लिए प्रयासरत है। समृद्ध प्राचीन विरासतों से भरपूर इस क्षेत्र की सभी संभावनाओं की पहचान कर पर्यटन विकास को और गति दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में जीवंत जंगल हैं। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इसे सुंदरतम बनाता है। वसुधैव कुटुंबकम के तहत हम सबको जोड़ना चाहते हैं। इस क्षेत्र के विकास का कारवां अब निर्बाध गति से प्रवाहमान है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यहां हेल्थ टूरिज्म की भी व्यापक संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि विंध्य क्षेत्र में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए हम निजी निवेशकों के साथ मिलकर नई संभावनाओं पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने निवेशकों से आव्हान किया कि वे मध्यप्रदेश की धरा पर विशेषकर विंध्य अंचल में निवेश के लिए खुले दिल से आगे आएं, सरकार निवेशकों को हर जरूरी सुविधा और सहयोग उपलब्ध कराऐगी। लेटर ऑफ अलॉटमेंट क्रं. स्थान भूमि (हेक्टेयर में ) परियोजना न्यूनतम नेवेश राशि निवेशक 1 ढकना चपना जिला रायसेन 4.653 होटल/ रिसोर्ट 5.00 करोड़ श्री सिद्धार्थ सिंह तोमर, भोपाल 2 नेहरयाई जिला विदिशा 2 होटल/ रिसोर्ट 3.00 करोड़ मे प्रयास पावर, भोपाल 3 नन्हाखेडा जिला जबलपुर 0.405 होटल/ रिसोर्ट 1.00 करोड़ में अफोर्ड मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर 4 ग्राम कुम्हरोड़ा नरसिंहपुर 3.805 होटल/रिसॉर्ट 3.00 करोड़ मेसर्स सिद्धिविनायक कंस्ट्रक्शन, जबलपुर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की। फ्लाईओला के मैनेजिंग डायरेक्टर राम ओला ने ₹700 करोड़ के सबसे बड़े निवेश की मंशा जताई, जो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पर्यटन परियोजनाओं की शुरुआत का संकेत है। आरसीआरसीपीएल और विंध्य प्राइड के दिव्यांश सिंह बघेल ने 500 करोड़ के निवेश की इच्छा जताई।, इसी क्रम में अमित दिग्विजय सिंह ने ₹500 करोड़ और संदड़िया बिल्डर्स … Read more

सिर्फ जिंदा रहना ही चुनौती बन गया है: सूडान में इंसानों का दर्दनाक संघर्ष, यहां जिंदा रहना भर ही काफी

खारर्तूम  सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच लोग जिंदा रहने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे हैं. यहां सिर्फ सेना और विद्रोही अर्धसैनिक बलों की गोलियों से बचना भर ही जीवित रहने की शर्त नहीं है. भुखमरी और अकाल भी लोगों को धीरे-धीरे मार रही है. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपनी भूख मिटाने के लिए घास और खरपतवार खाने को मजबूर हो रहे हैं.   एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान के कई इलाकों में भूखमरी का आलम ऐसा है कि लोग जंगली पौधों और खरपतवारों को नमक के साथ उबाल कर अपने बच्चों को पिला रहे हैं, ताकि उनकी भूख शांत हो सके. पूरा देश विनाशकारी युद्ध और व्यापक भूख से जूझ रहा है. जंगली घास बन रहा लोगों का सहारा भोजन के लिए संघर्ष कर रहे लोगों में 60 वर्षीय सेवानिवृत्त एक स्कूल शिक्षक ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर यहां के हालात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सूडान में लोगों को खाना नहीं मिल रहा है. लोग अपनी भूख मिटाने के लिए अब घास और जंगली पौधों पर निर्भर हो गए हैं. खदीजा कोरो नामक एक पौधा इन दिनों भूखे लोगों के लिए बड़ा सहारा बन गया है.  इस शिक्षक ने इस पौधे के लिए एक  कविता भी लिखी है. अपनी कविता के जरिए इस जंगली घास के प्रति आभार व्यक्त किया है, जो यहां लोगों की लाइफलाइन बन चुकी है. उन्होंने कहा कि ये हमारे लिए एक मरहम है जो भय के बीच कई लोगों को भूख से मरने से बचाता है. दो करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में  ये रिटायर्ड शिक्षक सूडान में 24.6 मिलियन लोगों में से एक हैं, जो गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. इतने सारे लोग इस देश की आबादी का आधा हिस्सा हैं. सूडान अप्रैल 2023 से संघर्ष में उलझा है. जब सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच तनाव पूर्ण पैमाने पर लड़ाई में बदल गया. एक करोड़ से ज्यादा लोग हुए हैं विस्थापित शुरुआत में ये संघर्ष राजधानी खार्तूम में शुरू हुआ और फिर पूरे देश में फैल गया. युद्ध में 20,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. युद्ध की वजह से लगभग 1 करोड़ 30 लाख  लोग विस्थापित हुए हैं. इसके साथ ही जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अकाल की चपेट में है. इन दिनों सूडान पर विश्व का सबसे बड़ा हंगर क्राइसिस मंडरा रहा है.  सहायता संगठनों की रिपोर्ट है कि संघर्ष के कारण बाजार में खाद्य सामग्री की कीमतें आसमान छू रही हैं. सहायता वितरण में भारी बाधा आ रही है तथा एक ऐसे देश में कृषि भूमि में भारी कमी आई है, जिसे कभी वैश्विक अन्न भंडार माना जाता था. कोर्डोफन, नुबा पर्वत और दारफुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है. जहां एल फशेर और जमजम शिविर जैसे क्षेत्र नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद जैसे समूहों के लिए दुर्गम बने हुए हैं, जैसा कि पोर्ट सूडान में स्थित सहायता कार्यकर्ता मैथिल्डे वु ने पुष्टि की है. कोयला चूसकर भूख मिटा रहे लोग कुछ लोग दिन में केवल एक बार भोजन करके जीवित रह रहे हैं, जो प्रायः साधारण बाजरे का दलिया होता है. वहीं उत्तरी दारफुर में कुछ लोग अपनी भूख मिटाने के लिए कोयला चूसने पर भी निर्भर हैं.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सूडानी सैन्य नेता जनरल अब्देल-फतह बुरहान को फ़ोन किया और उनसे एल फशर में एक हफ़्ते के लिए युद्धविराम की मांग की ताकि सहायता पहुंचाई जा सके. सेना के एक बयान के अनुसार, बुरहान इस अनुरोध पर सहमत हो गए, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि आरएसएफ इस युद्धविराम पर सहमत होगा या नहीं. विद्रोही सेना के कब्जे वाले इलाके अकालग्रस्त सूडान के कृषि मंत्री अबू बक्र अल-बशारी ने अप्रैल में अल-हदाथ समाचार चैनल को बताया कि देश में अकाल के कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन आरएसएफ के नाम से जाने जाने वाले अर्धसैनिक बलों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति की कमी है. विश्व खाद्य कार्यक्रम, सूडान की प्रवक्ता लेनी किन्जली ने बताया कि गेजेरा के 17 इलाके, दारफ़ूर क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा और खार्तूम, जिसमें जेबेल औलिया भी शामिल है, अकाल की चपेट में है. किन्जली ने बताया कि हर महीने 40 लाख से ज़्यादा लोग समूह से सहायता प्राप्त करते हैं, जिनमें से 17 लाख लोग अकालग्रस्त या जोखिम वाले इलाकों में रहते हैं. सूडान में दो मोर्चों पर हो रहा संघर्ष सूडान में दो-दो संगठनों से सेना का संघर्ष चल रहा है. एक रैपिड सपोर्ट फोर्सेस और सेना के बीच और दूसरा पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ के साथ, जो सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. साथ ही इनका आरएसएफ के साथ संबंध है, जिसके कारण भोजन, स्वच्छ पानी या दवा तक पहुंच लगभग असंभव हो गई है. रैपिड सपोर्ट फोर्सेस द्वारा सड़कें अवरुद्ध किए जाने के कारण लोग अपने परिवार से मिलने के लिए उत्तरी कोर्डोफ़ान के ओबैद नहीं जा सकते. सहायताकर्मियों के अनुसार, हिंसा और लूटपाट ने यात्रा को असुरक्षित बना दिया है. जिससे निवासियों को अपने आस-पड़ोस में ही रहना पड़ रहा है और उनके लिए भोजन तक पहुंच सीमित हो गई है.

इंदिरा सागर-ओंकारेश्वर डैम के गेट खुलने की तैयारी, निचले इलाकों के लोग रहें सतर्क

 खंडवा  नर्मदा घाटी के उपरी क्षेत्रों में हो रही वर्षा और बरगी तथा तवा बांध के गेट खुलने से जिले के इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट रविवार सुबह खोले जाएगें। इस मानसून सीजन में बांधों के गेट पहली बार खुलेंगे। शनिवार को बांध के जलाशय का जलस्तर 258.41 मीटर और ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 194.72 मीटर है। आगामी 12 से 24 घंटे में जलस्तर की स्थिति को देखते हुए बांधों के गेट खोले जाने की संभावना को देखते हुए एनएचडीसी बांध प्रबंधन के नर्मदा के किनारे और निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है। दोनों बांधों के पावर हाउस से सभी टरबाइन चलाकर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे भी नर्मदा नदी में 1800 से 2000 क्यूमेक्स पानी का प्रवाह होने से जलस्तर बढ़ गया है। भारी बारिश से बढ़ रहा जल स्तर इंदिरा सागर बांध के ऊपरी नर्मदा कछार में भारी वर्षा के बाद नर्मदा नदी में जल का अत्याधिक प्रवाह हो रहा है। शनिवार को प्रातः 11 बजे की स्थिति में तवा बांध से 3173 क्यूमेक्स और बरगी बांध द्वारा 1338 क्यूमेक्स जल राशि छोड़ी जा रही है तथा दोपहर एक बजे बाद इसे 3177 क्यूमेक्स कर दिया गया है। इसके फलस्वरूप इंदिरा सागर जलाशय में कुल आंकलित जल आवक लगभग 7500 क्यूमेक्स संभावित है। इंदिरा सागर परियोजना प्रमुख अजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए और अपस्ट्रीम मे अतिवृष्टि की स्थिति में अगले 24 से 48 घंटे में इंदिरा सागर पावर स्टेशन के बांध के रेडियल गेटों का संचालन कर अतिरिक्त जल राशि को छोड़े जाने की संभावना है। बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के प्रभारी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध के गेट 27 जुलाई को सुबह चार बजे तथा ओंकारेश्वर सागर बांध के गेट सुबह छह बजे खोले जाने की संभावना है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सूचना जारी की गई है बांध के डाउनस्ट्रीम में जन सामान्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना जारी की है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेटों की संख्या का निर्धारण कर पावर स्टेशन बांध के रेडियल गेटों से होने वाले जल प्रवाह की मात्रा के संबंध में सूचना जारी की जाएगी। ओंकारेश्वर बांध परियोजना प्रमुख धीरेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध से पानी की आवक को देखते हुए बांध के गेट कितने और किस ऊंचाई तक खोले जाएगी इसकी संख्या तय की जाएगी।

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

MP शिक्षक भर्ती 2025: TET पास उम्मीदवारों के लिए 10 हजार से ज्यादा पद खाली, जल्द करें अप्लाई

भोपाल  सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा मौका है.  अगर आप प्राइमरी स्कूल में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है. MPESB (मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल) ने तृतीय श्रेणी के प्राथमिक शिक्षक पदों पर 10,150 वैकेंसी निकाली हैं. आवेदन की लास्ट डेट 1 अगस्त 2025 है. अगर आप इस पोस्ट के लिए आवेदन करना चाहता हैं तो आपको ऑफिशियल वेबसाइट esb.mponline.gov.in पर जाना होगा.  कौन कर सकता है आवेदन?  प्राइमरी टीचर के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास TET परीक्षा पास (साल 2020 या 2024 में) की डिग्री होनी चाहिए. इसके अलावा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से D.El.Ed.की डिग्री हो. इसके साथ ही ग्रेजुएट डिग्री भी ज़रूरी है यहां चेक करें आयु सीमा प्राइमरी टीचर के लिए आवेदन करने वाले सामान्य पुरुष की उम्र 21 साल से लेकर 40 साल के बीच होनी चाहिए. वहीं, सामान्य महिला की उम्र 21 साल से लेकर 45 साल के बीच होनी चाहिए. दिव्यांग कैंडिडेट्स (PWD) के लिए उम्र सीमा 21 साल से लेकर 45 साल तक है.  कैसे होगा सेलेक्शन प्राइमरी टीचर का सेलेक्शन TET एग्जाम की मेरिट लिस्ट और रिटन एग्जाम के आधार पर होगा.  कितनी मिलेगी सैलरी  "मध्यप्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) सेवा शर्ते एवं भर्ती नियम 2018 तथा समय-समय पर किए गए संशोधनों और अधिसूचना दिनांक 24.12.2019 के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार यह भर्ती की जाएगी. प्राथमिक शिक्षक को न्यूनतम वेतन ₹25,300 के साथ महंगाई भत्ता दिया जाएगा. चयनित उम्मीदवारों को प्रोबेशन अवधि के दौरान भर्ती नियम 2018 के उपनियम 13 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा. कितना लगेगा फीस प्राइमरी टीचर आवेदन के लिए  जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपए लगेंगे. वहीं, मध्य प्रदेश के SC, ST, EWS, OBC, दिव्यांग कैटेगरी के उम्मीदवारों को 250 रुपए देने होंगे.  कैसे करना होगा आवेदन ऐसे करें आवेदन : आवेदन करने के लिए आपको ऑफिशियल वेबसाइट esb.mponline.gov.in पर जाएं. इसके बाद आपको होम पेज पर जाकर “Apply Online” लिंक पर क्लिक करना होगा. वहां आपको “New Registration” का ऑप्शन दिखेगा, उसपर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन करें. वहां मांगी गई सभी जानकारी भरें. सबसे लास्ट में फॉर्म चेक कर पेमेंट कर दें और फॉर्म का प्रिंट आउट रख लें. 

FTA से भारत को मिलेगा फायदा! केसर से लेकर चावल तक UK में जमाएंगे धाक

नई दिल्ली भारत-यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK Free Trade Agreement) हो चुका है, जिसके तहत भारत, ब्रिटेन में अपने प्रोडक्‍ट्स '0' या कम टैक्‍स बेचेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की करीब 99 फीसदी चीजें ब्रिटेन में कम टैक्‍स पर बिकेंगी. वहीं UK की 90 फीसदी चीजें भारत में कम टैरिफ पर बिकेंगी. FTA दस्‍तावेज पर साइन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में गुरुवार को हुई थी.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस डील को लेकर कहा था कि इससे ग्‍लोबल स्‍तर पर भारत को और मजबूती मिलेगी. साथ ही दोनों देशों के बीच सालाना व्‍यापार 34 अरब डॉलर बढ़ेगा. इस डील के तहत 2030 तक व्‍यापार को  120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. इससे आम लोगों को भी फायदा होगा, जिसमें ब्रिटेन से आने वाले कुछ चीजों के रेट घट जाएंगे.  क्‍या चीजें हो जाएंगी सस्‍ती?  अगर आप वाइन के शौकीन हैं तो स्‍कॉच व्हिस्‍की के रेट में करीब 20 से 50 फीसदी की गिरावट आ सकती है. वहीं इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, चमड़े के प्रोडक्‍ट्स और दवाइंया,  मेटल और ज्‍वेलरी सस्‍ती हो सकती हैं. जबकि एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो और स्‍टील की चीजें महंगी हो सकती हैं.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्‍ट्स FTA से यूनाइटेड किंगडम (UK) में इम्‍पोर्ट होन वाली चीजें भी सस्‍ती हो जाएंगी, जिससे इसका प्रोडक्‍शन तेजी से बढ़ेगा. लोग भारतीय प्रोडक्‍ट को ज्‍यादा खरीदेंगे. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इमेज शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि भारत किस राज्‍य से कौन-कौन से प्रोडक्‍ट्स ब्रिटेन में इम्‍पोर्ट होंगे, जो मेड इन इंडिया की छाप छोड़ेंगी.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे.  जम्‍मू-कश्‍मीर: पश्‍मीना शॉल, बासमती चावल, कश्‍मीरी केसर और कश्‍मीरी विलो बैट्स  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: बासमती चावल  पंजाब- जलंधर स्‍पोर्ट्स गूड्स, बासमती राइस  दिल्‍ली- बासमती राइस  राजस्‍थान- जयपुर जेमस्‍टोन और ज्‍वेलरी  गुजरात– सूरत टेक्‍सटाइल, मोरबी में बने मिट्टी के वर्तन और सूरत के डायमंड  महाराष्‍ट्र– कोल्‍हापुरी फूटवीयर, आईटी सर्विसेज  कर्नाटक– चन्‍नापाटन के खिलौने केरल– रबर और हल्‍दी उत्तर प्रदेश– खुर्जा में बने मिट्टी के बर्तन, मेरठ के स्‍पोर्ट्स प्रोडक्‍ट, बासमती चावल और आगरा-कानपुर के लेदर  तेलंगाना– आईटी सर्विस आंध्र प्रदेश– कॉफी और हल्‍दी  तमिलनाडु– कांचीपूरम साड़ी, हल्‍दी, गुड़‍िया, स्‍लीपर और आईटी सर्विस  बिहार- सिक्‍की ग्रॉस टॉय, भागलपुर सिल्‍क, मखाना और लिच्ची त्रिपुरा– नेचुरल और प्रोड्यूस्‍ड रबर  वेस्‍ट बंगाल- साड़ी, दाजर्लिंग टी, गुड़‍िया और शांतिनिकेतन लेदर